जनजातीय महिलाओं के सशक्तिकरण के लिये प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में संकल्पबद्ध होकर कार्य कर रही

भोपाल अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि यह अवसर है उन उपलब्धियों को सराहने का, जो महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में हासिल हुई हैं। साथ ही, यह दिन हमें यह सोचने का अवसर भी प्रदान करता है कि आगे का रास्ता क्या होना चाहिए। भारत जैसे देश में, जहाँ नारी को शक्ति और सहनशीलता का प्रतीक माना जाता है, वहाँ जनजातीय महिलाओं के सशक्तिकरण के लिये प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में संकल्पबद्ध होकर कार्य कर रही है। जनजातीय महिलाएँ अपनी संस्कृति, परंपरा और स्वाभिमान की प्रतीक रही हैं। सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों के कारण जनजातीय वर्ग की महिलायें लंबे समय तक विकास की मुख्यधारा से दूर रहीं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार इस दूरी को समाप्त कर रही है। उद्देश्य यह नहीं कि वे केवल लाभार्थी बनें, बल्कि वे समाज की निर्णायक शक्ति बनकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश करें। सशक्तिकरण की दिशा में ठोस कदम सरकार की सोच यह नहीं कि महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभ मिले, बल्कि वे अपने निर्णय स्वयं ले सकें, अपने व्यवसाय और कार्यक्षेत्र में मजबूती से खड़ी हो सकें। प्रधानमंत्री वन धन योजना के तहत जनजातीय महिलाओं को उनके द्वारा संग्रहीत वन उपज का सही मूल्य दिलाने के लिए सशक्त तंत्र विकसित किया गया है। इससे न केवल उनकी आय बढ़ी है, बल्कि वे अब स्वयं का व्यवसाय भी कर रही हैं। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना ने बालिका शिक्षा को प्राथमिकता दी है, जिससे जनजातीय और ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों के स्कूल छोड़ने की दर में उल्लेखनीय गिरावट आई है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता देकर उनके पोषण और स्वास्थ्य की सुरक्षा कर रही है। स्टैंड-अप इंडिया योजना के अंतर्गत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं को स्व-रोजगार हेतु वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे वे खुद के व्यवसाय की स्थापना कर सकें। मध्यप्रदेश सरकार भी इस दिशा में भी आगे बढ़कर कार्य कर रही है। पीछे नहीं है। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में राज्य सरकार महिलाओं को प्रत्यक्ष आर्थिक सहयोग प्रदान कर रही है, जिससे उनके जीवन स्तर में बड़ा सुधार हुआ है। मुख्यमंत्री आदिवासी महिला उद्यमिता योजना ने जनजातीय महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हर घर जल योजना ने जल संकट से जूझ रही ग्रामीण और जनजातीय महिलाओं के लिए राहत प्रदान की है, जिससे उनका दैनिक जीवन सरल हुआ है। पेसा अधिनियम ने ग्राम सभाओं में महिलाओं की भागीदारी को मजबूती प्रदान की है, जिससे वे अपने अधिकारों के प्रति अधिक सजग और जागरूक हो रही हैं। अब वे अपनी ग्राम सभाओं में न केवल सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं, बल्कि अपने समुदाय की नीतियाँ तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही हैं। संघर्ष से सशक्त नेतृत्व तक का सफर मैं स्वयं एक जनजातीय महिला हूँ। जीवन में संघर्ष मेरे लिए नया नहीं है। बचपन में परिवार की मदद के लिए ईंट-भट्टों पर मजदूरी से लेकर सरपंच, जिला पंचायत अध्यक्ष, राज्यसभा सदस्य और अब मध्यप्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री बनने तक का सफर आसान नहीं था। लेकिन मेरी पार्टी का संगठनात्मक सशक्तिकरण और मजबूत नेतृत्व ही है, जिसने मुझे और हमारे समाज की लाखों महिलाओं को आगे बढ़ने के अवसर दिए। मेरी पार्टी ने सदैव जनजातीय समाज को प्राथमिकता दी है। जब देश को पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति के रूप में श्रीमती द्रौपदी मुर्मु मिलीं, तो यह केवल एक व्यक्ति की नहीं बल्कि पूरे जनजातीय समाज की उपलब्धि थी। यह इस बात का प्रमाण है कि अगर महिलाओं को सही अवसर और संसाधन मिलें, तो वे हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती हैं। महिला सशक्तिकरण कोई एक दिन की प्रक्रिया नहीं है, यह एक निरंतर चलने वाली यात्रा है। यह केवल व्यक्तिगत विकास तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र की उन्नति का आधार है। महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि नीति-निर्माण और निर्णय लेने में भागीदार बनाना ही सही मायनों में सशक्तिकरण है। शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक स्वतंत्रता के साथ समाज में उन्हें सम्मानजनक स्थान दिलाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। आज, जब दुनिया नारी शक्ति का सम्मान कर रही है, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि समाज के सबसे वंचित वर्ग- जनजातीय और अनुसूचित जाति की महिलाएँ-विकास की मुख्यधारा से जुड़ें। मेरा सभी माताओं, बहनों और बेटियों से आग्रह है कि वे सरकार की योजनाओं का पूरा लाभ उठाएँ, आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाएँ और अपने सपनों को पूरा करने के लिए आगे बढ़ें। जब महिलाएँ आगे बढ़ेंगी, तो समाज और देश भी नई ऊँचाइयों को छुएगा।   recent visitors 50

मध्यप्रदेश चिकित्सा उपकरण निर्माण का प्रमुख केंद्र बनने की ओर अग्रसर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश की अनुकूल नीतियां, विकसित अधोसंरचना और मेडिकल डिवाइस पार्क जैसी सुविधाएं राज्य को दवा कंपनियों और चिकित्सा उपकरण निर्माताओं के लिए फेवरेट इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन बना रही हैं। जीआईएस-भोपाल में हेल्थकेयर, फार्मा और मेडिटेक क्षेत्र की संभावनाओं पर व्यापक चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि मध्यप्रदेश चिकित्सा उपकरण निर्माण का प्रमुख केंद्र बनने की ओर अग्रसर है। उज्जैन में विकसित हो रहे 75 एकड़ के मेडिकल एवं फार्मास्यूटिकल पार्क को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वैश्विक निवेशकों के लिए ‘बेस्ट डेस्टिनेशन’ करार दिया। 'मॉलिक्यूल टू मशीन' अवधारणा से आगे बढ़ता मध्यप्रदेश जीआईएस-भोपाल में आयोजित ‘मॉलिक्यूल्स-टू-मशीन (हेल्थकेयर, फार्मा, मेडिटेक)’ सत्र के दौरान, विशेषज्ञों ने इस अवधारणा पर चर्चा करते हुए बताया कि मध्यप्रदेश दवा निर्माण से लेकर चिकित्सा उपकरण उत्पादन तक पूरे हेल्थकेयर इको सिस्टम को मजबूत कर रहा है। राज्य में फार्मास्युटिकल कंपनियों, एक्टिव फार्मास्युटिकल इनग्रेडिएंट्स (एपीआई) निर्माण इकाइयों और मेडिकल डिवाइस विनिर्माण में तेजी से वृद्धि हो रही है। मेडिकल डिवाइस पार्क में बढ़ता निवेश एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री के समन्वयक श्री राजीव छिब्बर ने बताया कि उज्जैन स्थित विक्रम उद्योग नगरी में विकसित हो रहे मेडिकल डिवाइस पार्क में 23 विनिर्माताओं ने निवेश करने की पुष्टि की है। सरकार की नई औद्योगिक नीति के तहत दी जा रही रियायतों और सुविधाओं के कारण निवेशकों की इकाइयां स्थापित करने की लागत काफी कम हो रही है, जिससे निवेश को बढ़ावा मिल रहा है। मेडिकल टेक्सटाइल में अपार संभावनाएं जीआईएस-भोपाल के शुभारंभ संबोधन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मध्यप्रदेश को ‘मेडिकल टेक्सटाइल्स’ का प्रमुख केंद्र बताया। सर्जिकल गाउन, मास्क, पीपीई किट, सैनिटरी नैपकिन और अन्य उत्पादों के निर्माण में राज्य की अहम भूमिका को रेखांकित किया गया। कोविड महामारी में भारत ने मास्क और पीपीई किट के उत्पादन में वैश्विक पहचान बनाई थी, जिसे मध्यप्रदेश आगे बढ़ा रहा है। ध्यप्रदेश, प्रमुख फार्मास्युटिकल राज्यों में शामिल मध्यप्रदेश देश के प्रमुख फार्मास्युटिकल राज्यों में से एक है। वर्तमान में प्रदेश में 270 से अधिक फार्मा कंपनियां कार्यरत हैं, जिनमें से 80 से अधिक पीथमपुर में स्थित हैं। राज्य में निर्मित दवाइयां 160 से अधिक देशों में निर्यात की जा रही हैं। प्रमुख निवेशकों में सनफार्मा, सिप्ला, लुपिन, एल्मेंबिक, टॉरेंट फार्मा और एल्केमिस्ट जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। हरसंभव सहायता और तय समय में मंजूरियाँ मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार फार्मा और मेडिकल उपकरण कंपनियों को निवेश के लिए हरसंभव सहायता प्रदान कर रही है। सरकार की ओर से लाइसेंस प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। लोक सेवा गारंटी अधिनियम में सभी आवश्यक मंजूरियां तय समय में सुनिश्चित की जा रही हैं। 17 हजार करोड़ का निवेश और 49 हजार रोजगार सृजन मध्यप्रदेश सरकार द्वारा स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के प्रयासों के कारण इस जीआईएस-भोपाल में निवेशकों ने इस सेक्टर में 17 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्ताव प्रस्तुत किए। इससे लगभग 49 हजार नए रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और चिकित्सा शिक्षा संस्थानों की संख्या में वृद्धि से प्रदेश में चिकित्सा सुविधाएं और रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ेंगे। प्रदेश के फार्मा उद्योग को मिली ग्लोबल पहचान जीआईएस-भोपाल में मध्यप्रदेश के फार्मा, हेल्थकेयर और चिकित्सा शिक्षा इन्फ्रास्ट्रक्चर की क्षमताओं का परिचय देश-विदेश के निवेशकों को मिला है। इससे यहाँ निवेश संभावनाओं को ग्लोबल पहुंच मिली है। भविष्य में प्रदेश को भारत में ही नहीं विदेश में भी इस सेक्टर में आदर्श निवेश स्थल की पहचान मिलेगी। मध्यप्रदेश के फार्मास्युटिकल सेक्टर में एक लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिला है, 270 से अधिक दवा निर्माता कंपनियां और 250 से अधिक फार्मेसी संस्थान सक्रिय हैं, 160 से अधिक देशों में दवाइयों का निर्यात किया जाता है, 39 एक्टिव फार्मास्युटिकल इनग्रेडिएंट्स (एपीआई) निर्माण की इकाइयां स्थापित हैं, राज्य के कुल निर्यात में 25% फार्मा उद्योग की हिस्सेदारी है और 5 वाणिज्यिक हवाई अड्डे और 6 अन्तर्देशीय कंटेनर डिपो उद्योग समूहों की सुविधा के लिये उपलब्ध हैं। मध्यप्रदेश में ग्लोबल-इन्वेस्टर्स की दिलचस्पी जीआईएस-भोपाल में 300 से अधिक उद्योग जगत के दिग्गज, नीति निर्माता और स्वास्थ्य विशेषज्ञ एक मंच पर आए, जहां भारत के हेल्थकेयर और फार्मा सेक्टर में नवाचार और निवेश के अवसरों पर विचार-विमर्श किया गया। मध्यप्रदेश सरकार के प्रयासों से राज्य न केवल भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर फार्मा और मेडिकल डिवाइस निर्माण का नया केंद्र बनने की ओर बढ़ रहा है।   recent visitors 43

मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना के अंतर्गत 1158 वर-वधु परिणय सूत्र में बंधे

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खंडवा जिले के पंधाना विकासखंड में मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना के अंतर्गत सामूहिक विवाह समारोह में परिणय सूत्र में बंधे 1158 वर-वधु को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एक साथ इतने जोड़ों का परिणय सूत्र में बंधना अपने आप में रिकॉर्ड बनने जैसा है। पाणिग्रहण संस्कार और निकाह के एक साथ आयोजन ने सामाजिक समरसता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया है। विवाह के इस सामूहिक आयोजन से अपव्यय पर रोक लगती है और सामाजिक एकता का संदेश भी जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव, सामूहिक विवाह समारोह में मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन से वर्चुअली शामिल हुए। पंधाना में आयोजित कार्यक्रम में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण, उद्यानिकी तथा खाद्य प्र-संस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा उपस्थित थे। कृषि उपज मंडी पंधाना में हुए कार्यक्रम में 1158 जोड़े परिणय सूत्र में बंधे। इनमें 1137 का विवाह एवं 21 जोड़ों का निकाह हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विवाह 16 संस्कारों में से एक प्रमुख संस्कार है। उन्होंने कहा कि परिवार में आ रही वधू का बेटी के समान प्रेम और सम्मान दिया जाए तथा बेटी भी अपने सास-ससुर को माता-पिता मानकर कुटुंब परंपरा का निर्वहन करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य शासन की ओर से प्रत्येक वर-वधु को 51 हजार रुपये उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिसमें से 49 हजार रुपये सीधे उनके खाते में डाले जा रहे हैं। उन्होंने नव-दंपतियों से आव्हान किया कि वे शासन की योजनाओं का लाभ लें और स्वयं के तथा अपने परिवार के जीवन स्तर को उन्नत करने के लिए हर संभव प्रयास करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मां नर्मदा की गोद में विराजित ओंकारेश्वर-ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग, दादाजी धूनीवाले और पार्श्व गायक स्व. किशोर कुमार की सुमधुर आवाज ने खंडवा जिले की विशेष पहचान दी है। विख्यात साहित्यकार माखनलाल चतुर्वेदी साहित्यिक प्रतिभा और वीर टंट्या मामा के अदम्य साहस ने इस धरा को गौरवान्वित किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सामाजिक कार्यकर्ताओं और खंडवा के अधिकारियों-कर्मचारियों को सफल आयोजन के लिए बधाई दी।   recent visitors 47

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 10 मार्च से आरंभ हो रहे विधानसभा सत्र की तैयारियों की समीक्षा की

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 10 मार्च से आरंभ हो रहे विधानसभा सत्र की तैयारियों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रश्नों और ध्यानाकर्षण आदि के जवाब तथ्यात्मक और तर्कपूर्ण ढंग से दिए जाएं। उन्होंने लंबित शून्यकाल, अपूर्ण उत्तर, आश्वासन और लोक लेखा समिति की सिफारिशों के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि पंद्रह दिवसीय सत्र में 9 बैठकें होंगी, इस सत्र में 5 विधेयक प्रस्तुत होना संभावित हैं। समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में हुई बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन, अपर मुख्य सचिव जे.एन. कंसोटिया तथा विधि एवं विधायी विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।   recent visitors 48

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खदान में हुई तीन कर्मचारियों की मृत्यु पर शोक व्यक्त किया

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खदान में हुई तीन कर्मचारियों की मृत्यु पर शोक व्यक्त किया बैतूल के पाथाखेड़ा में कोयला खदान की छत धंसकने से हुआ हादसा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैतूल जिले के पाथाखेड़ा क्षेत्र में कोयले की खदान में कार्यरत 3 कर्मचारियों की मृत्यु पर शोक व्यक्त किया है। यहां खदान की छत धंसकने से दु:खद हादसा हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संबंधित माइनिंग कंपनी एवं जिला प्रशासन के अधिकारियों को मृतक कर्मचारियों के परिजनों को नियमानुसार आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत करने का निर्देश दिये है। उन्होंने बाबा महाकाल से दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की एवं शोकाकुल परिवारों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की हैं।   recent visitors 30

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 8 मार्च महिला दिवस पर उन उत्कृष्ट महिलाओं को सम्मानित करेंगे

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मुख्यमंत्री डॉ. यादव 8 मार्च को महिलाओं एवं बच्चों के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को करेंगे सम्मानित मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 8 मार्च महिला दिवस पर उन उत्कृष्ट महिलाओं को सम्मानित करेंगे मुख्यमंत्री करेंगे लाड़ली बहनों के खातों में राशि की अंतरित कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में होगा राज्य स्तरीय कार्यक्रम भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 8 मार्च महिला दिवस पर उन उत्कृष्ट महिलाओं को सम्मानित करेंगे, जिन्होंने प्रदेश में महिलाओं और बच्चों के क्षेत्र में समाज सेवा, सुरक्षा, वीरता एवं साहसिक कार्यों में उल्लेखनीय कार्य किया है। भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे इन्टरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में महिला, बाल विकास विभाग के राज्य स्तरीय पुरस्कार का वितरण करेंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव लाड़ली बहना योजना के तहत 1250 रूपये की मासिक किश्त का अंतरण भी करेंगे। उल्लेखनीय है कि महिला, बाल विकास विभाग द्वारा वर्ष 2023-24 के लिये राष्ट्रमाता पद्मावती पुरस्कार (2023), राजमाता विजयाराजे सिंधिया समाज सेवा पुरस्कार (2023-24), रानी अवंति बाई वीरता पुरस्कार (2024) और विष्णु कुमार महिला एवं बाल कल्याण समाज सेवा सम्मान पुरस्कार (2024) शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव महिला दिवस के अवसर पर लाड़ली बहना योजना में माह मार्च 2025 की 1.27 करोड़ लाभार्थी महिलाओं के खाते में लगभग 1552.73 करोड़ रूपये की राशि का सिंगल क्लिक से अंतरण करेंगे।   recent visitors 52

सरकार धार्मिक त्योहारों में बढ़ा रही है सक्रियता और सहभागिता, तीन राज्यों की सरकारें मिलकर करेंगे श्रीकृष्ण पाथेय का विकास

भोपाल देश में भगवान श्रीकृष्ण के पग जिस-जिस स्थान पर पड़े हैं, ऐसे स्थानों का विकास किया जा रहा है। मध्यप्रदेश, गुजरात और राजस्थान सरकार इसके लिए कार्य योजना बना रही है। तीनों राज्यों की सरकारें मिलकर श्रीकृष्ण पाथेय का विकास कार्य करेंगी। यह निर्णय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई श्रीकृष्ण पाथेय के संबंध में बैठक में लिया गया। गुरुवार को समत्व भवन में विषय विशेषज्ञ समिति की बैठक में यह फैसला किया गया है। मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने कहा कि श्रीकृष्ण पाथेय के विकास के लिए सभी समितियों को सक्रिय किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पुरातत्वविदों, धर्माचार्यों एवं भगवान श्रीकृष्ण पर साहित्य के अच्छे लेखकों को भी समिति में जोड़ा जाएगा। राज्यों में बनेगा सकारात्मक माहौल बैठक में सीएम मोहन ने कहा कि श्रीकृष्ण पाथेय के विकास के लिए भोपाल के अलावा उज्जैन, राजस्थान के जयपुर, भरतपुर, अथवा ब्रज या चौरासी कोस या अन्य किसी विशिष्ट स्थल पर समिति बैठकें आायोजित की जाएं। ऐसी पहल से दोनों राज्यों में श्रीकृष्ण पाथेय के लिए सकारात्मक माहौल बनेगा। धार्मिक त्योहारों में बढ़ी सरकार की सहभागिता मुख्यमंत्री मोहन यादव ने आगे कहा कि राज्य में धार्मिक त्योहारों में सरकार की सहभागिता बढ़ी है। सरकार ने दशहरे में शस्त्र पूजा, दीपावली पर गोवर्धन पूजा और हाल ही में गीता जयंती भी मनाई है। प्रदेश के 17 पवित्र धार्मिक शहरों और 2 ग्रामों में हमने शराबबंदी लागू करने का निर्णय ले लिया है। इससे समाज में बेहतर संदेश का संचार हुआ है। श्रीकृष्ण पाथेय पर केंद्रित होकर काम होगा मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार श्रीकृष्ण पाथेय के लिए केंद्रित होकर काम करेगी। भविष्य में भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी अन्य लीलाओं को भी इस कार्य से जोड़ा जाएगा। recent visitors 35