अगले पांच साल में प्रदेश के वर्तमान बजट को करेंगे दोगुना

केन्द्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी बढ़ाई जाए, इससे राज्यों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी :मुख्यमंत्री डॉ. यादव आयोग ने कहा मध्यप्रदेश का भविष्य है सुरक्षित हाथों में अगले पांच साल में प्रदेश के वर्तमान बजट को करेंगे दोगुना नदियों को जोड़कर विकास के लिए कर रहे पड़ौसी राज्यों के साथ समन्वय अगले तीन साल में हम 30 लाख किसानों को देंगे सोलर पम्प राज्य की भावी वित्तीय आवश्यकताओं पर की चर्चा, मेमोरेंडम भी सौंपा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्यों के सशक्तिकरण में ही राष्ट्र का सशक्तिकरण है, इसलिए केन्द्रीय करों और राजस्व प्राप्तियों में राज्यों की हिस्सेदारी अर्थात् अनुदान बढ़ाया जाना चाहिए। राज्य अपनी क्षमता और सीमित संसाधनों से ही अपने लक्ष्यों की पूर्ति के लिए काम करते हैं। केन्द्र सरकार से अधिक वित्तीय अनुदान मिलने से राज्य अपने दीर्घकालीन लक्ष्यों को अल्पकाल में ही प्राप्त कर सकेंगे। विकसित भारत का निर्माण, विकसित मध्यप्रदेश के बिना नहीं हो सकता, इसलिए केन्द्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी 41 प्रतिशत से बढ़ाकर 48 प्रतिशत तक की जाए। इससे राज्य सशक्त होंगे और राष्ट्र को विकास की ले जाने में सहायक होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश एक बड़ा राज्य है, इसलिए इसकी जरूरतें भी बड़ी हैं। लोक कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना ही केन्द्र और राज्य सरकारों का लक्ष्य है। केन्द्र और राज्यों के बेहतर तालमेल और आपसी सामंजस्य से यह लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में 16वें केन्द्रीय वित्त आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के साथ महत्वपूर्ण बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने आयोग के राज्य के दीर्घकालिक लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता का जिक्र कर वित्त आयोग से प्रदेश की अपेक्षाओं से भी अवगत कराया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का सर्वाधिक प्रगतिशील राज्य है। प्रदेश कृषि, अधोसंरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, वन, पर्यटन, नगरीय विकास और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इन क्षेत्रों में और अधिक विकास के लिए केन्द्र सरकार से और अधिक वित्तीय सहयोग/अनुदान की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत में मध्यप्रदेश को भी योगदान देना है। हम विकसित मध्यप्रदेश का संकल्प पूरा करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अभी हमारा बजट करीब साढ़े तीन लाख करोड़ रूपए है। अगले पांच सालों में हम इस बजट को बढ़ाकर दोगुना कर देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वित्त आयोग से कहा कि हम नदियों को जोड़कर जल बंटवारे के लिए पड़ोसी राज्यों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) नदी जोड़ो परियोजना में हमने राजस्थान के साथ मिलकर किया जा रहा हैं। केन्द्र सरकार ने इस राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना के लिए 90 हजार करोड़ रूपए आवंटित किए। इसी तरह केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के साथ मिलकर कार्य किया जा रहा हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दोनों राष्ट्रीय परियोजना का भूमि-पूजन कर मध्यप्रदेश को गौरव प्रदान किया है। अब महाराष्ट्र सरकार के साथ ताप्ती नदी परियोजना पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज से 20 साल पहले तक प्रदेश में केवल 7 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि सिचिंत थी, आज प्रदेश की 48 लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि को हम सिंचित कर चुके हैं। प्रदेश में नदी जोड़ो के लिए एक अभियान चला रहे हैं। किसानों के साथ हमारा आत्मीय संबंध है और खेतों तक पानी पहुंचाना हमारा पहला कर्तव्य है। हमारी नीतियों के कारण किसानों का जैविक खेती की ओर तेजी से रूझान बढ़ा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी 18 नई औद्योगिक नीतियों के कारण निवेशक भी जुड़ रहे हैं। आरआईसी और जीआईएस-भोपाल के जरिए प्रदेश को 30.77 लाख करोड़ रूपए के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। यह निवेशकों का मध्यप्रदेश पर बढ़ते विश्वास का प्रतीक है। हम प्रदेश के हर जिला कलेक्ट्रेट में उद्योग प्रकोष्ठ बना रहे हैं, इससे किसी निवेशकों की जिला स्तर पर भी कठिनाई हल की जा सकेंगी। हम प्रदेश में व्यापार और व्यवसाय को सुगम बना रहे हैं। इसमें सभी का सहयोग लेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम प्रदेश में हरसंभव तरीके से दूध उत्पादन को बढ़ावा देंगे। हमारी कोशिश है कि देश का 20 प्रतिशत से अधिक दूध मध्यप्रदेश में उत्पादित हो, इससे हमारे किसान और पशुपालक दोनों सम्पन्न होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि युवा शक्ति की ऊर्जा का भरपूर उपयोग भी हम कर रहे हैं। पंचशील सिद्धांतों का पालन करते हुए जन, जल, जंगल, जमीन और जैविक विविधता का संरक्षण हमारा प्राथमिक लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि जंगल बचेंगे, तो जल बचेगा और जल बचेगा, तो जन-जीवन बचेगा। हम जैविक संपदा को संरक्षित रखने के लिए भी हर जरूरी प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम प्रदेश के किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अगले तीन सालों में 30 लाख किसानों को सोलर पम्प दिये जायेंगे। इससे हमारे किसान अन्नदाता के साथ-साथ ऊर्जादाता भी बनेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार किसानों को मात्र पांच रूपए में बिजली का स्थाई कनेक्शन देने जा रही है, इससे हमारे किसानों को बिजली कनेक्शन के लिए कहीं भी भटकना नहीं पड़ेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वित्त आयोग को मध्यप्रदेश में बीते एक वर्ष में किए गए नवाचारों की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि हमारी सरकार ने एयर एम्बुलेंस सेवा प्रारंभ की है। इससे बीते एक साल में कई गंभीर मरीजों को एयरलिफ्ट कर बड़े अस्पतालों तक पहुंचाकर उनका जीवन बचाया गया। हमारी इस सेवा को बेहद अच्छा प्रतिसाद मिला है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वित्त आयोग के समक्ष प्रदेश के विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए आवश्यक वित्तीय सहयोग की मांग रखते हुए राज्य सरकार की विशेष प्राथमिकताओं को भी पृथक से रेखांकित किया। उन्होंने राज्य सरकार की ओर से वित्त आयोग को मेमोरेंडम की प्रति भी सौंपी। इसमें विभिन्न क्षेत्रों में निवेश और वित्तीय सहयोग की जरूरतों का विस्तार से उल्लेख किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आयोग को राज्य सरकार द्वारा प्रदेश की भावी योजनाओं की भी जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों को प्रतीक चिन्ह भी भेंट किए। मध्यप्रदेश भविष्य में प्रगति के प्रति जागरूक सोलहवें वित्त आयोग ने … Read more

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा प्रदेश के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में संचालित विकास कार्यों की नियमित समीक्षा की जाए

मध्यप्रदेश में नक्सलियों का किया जाएगा खात्मा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री मोदी के वर्ष 2026 तक नक्सल मुक्त भारत के संकल्प की पूर्ति में मध्यप्रदेश सक्रिय भूमिका निभाएगा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा प्रदेश के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में संचालित विकास कार्यों की नियमित समीक्षा की जाए उच्च स्तरीय बैठक में दिए निर्देश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में संचालित विकास कार्यों की नियमित समीक्षा की जाए। नक्सल गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश के लिए भी जिला स्तर और पुलिस मुख्यालय से लेकर राज्य शासन के स्तर पर निरंतर समीक्षा की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को मुख्यमंत्री निवास में बैठक लेकर नक्सल उन्मूलन अभियान पर वरिष्ठ अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2026 तक नक्सलियों का पूरी तरह खात्मा करने का संकल्प व्यक्त किया है। मध्यप्रदेश इस दिशा में सक्रिय भूमिका का निर्वहन करेगा। प्रभावित क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण, दूरसंचार साधनों के विस्तार और आवश्यक जवानों की तैनाती से नक्सल तत्वों पर नियंत्रण में सफलता मिल रही है। विकास कार्य निरंतर जारी रखे जाएं और आधुनिक उपकरणों के उपयोग और क्षेत्र की निरंतर निगरानी से नक्सली तत्वों के खात्मे के लिए प्रयास तेज किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश में नक्सलवाद के उन्मूलन का अभियान चल रहा है। प्रदेश में नक्सलवाद के किसी भी कीमत पर पैर जमने नहीं दिए जाएंगे। नक्सलवाद के समूल नाश के लिए कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वर्ष 2026 तक नक्सल मुक्त भारत बनाने के संकल्प को पूर्ण करने के लिए ही केन्द्रीय गृह मंत्री ने नक्सल प्रभावित राज्यों के साथ बैठक आयोजित कर गंभीर विचार-विमर्श किया है। प्रधानमंत्री मोदी जी के संकल्प के अनुपालन में मध्यप्रदेश को पूरी तरह से नक्सल मुक्त करने की कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्पेशल डीजी पंकज श्रीवास्तव को प्रति पखवाड़े नक्सल उन्मूलन अभियान की समीक्षा के निर्देश दिए।  चार नक्सलियों को मार गिराने पर दी बधाई मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक में नक्सलियों के विरूद्ध बालाघाट और निकटवर्ती क्षेत्र में हुई कार्रवाई की प्रशंसा भी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बालाघाट में पुलिस और नक्सलियों की मुठभेड़ में हाल ही में चार नक्सलियों को मार गिराए जाने की कार्रवाई के लिए पुलिस अधिकारियों को बधाई दी। मारे गए नक्सलियों से तलाशी में भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद जप्त किया गया था। छत्तीसगढ़ की सीमा के निकट वन क्षेत्र में पुलिस की नक्सल विरोधी हॉक फोर्स और स्थानीय पुलिस बल द्वारा यह साहसिक कार्रवाई की गई थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गत वर्ष प्रदेश में नक्सलवाद के खिलाफ उठाए गए कदमों को महत्वपूर्ण बताया। बैठक में मध्यप्रदेश सहित छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना राज्यों द्वारा संयुक्त अभियान के माध्यम से नक्सलवादियों के खात्मे के संकल्प पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अन्य निर्देश          नक्सल प्रभावित क्षेत्र के निवासियों की आर्थिक तथा सामाजिक प्रगति के लिए राज्य सरकार लगातार काम कर रही है। समन्वित प्रयासों को बढ़ाया जाए।          संचार सुगमता के लिए मोबाइल टॉवरों की स्थापना का कार्य प्राथमिकता से पूर्ण करें।          नए सुरक्षा कैंपों की स्थापना के लिए हॉक फोर्स बल में वृद्धि की स्वीकृति की कार्यवाही करें।          प्रदेश से माओवादी समस्या का उन्मूलन सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके दृष्टिगत समवेत प्रयास किए जाएं।          नक्सल प्रभावित जिलों में सुदूरवर्ती दुर्गम क्षेत्रों के निवासियों के आवागमन को आसान बनाने के लिए निर्माणाधीन सड़क निर्माण कार्य जल्द पूर्ण करें। बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव गृह जे.एन. कंसोटिया, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना और दूरसंचार विभाग और बीएसएनएल, मध्यप्रदेश परिमंडल के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।   recent visitors 47

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आदि शंकराचार्य ने बाल्यकाल में प्रदेश के ओंकारेश्वर में आकर निवास किया

महाकाल लोक परिसर की तरह एकात्म धाम का करें विकास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव ओंकारेश्वर अंचल के समग्र विकास के लिए समय-सीमा में कार्य करें पूर्ण: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आदि शंकराचार्य ने बाल्यकाल में प्रदेश के ओंकारेश्वर में आकर निवास किया मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक में दिए निर्देश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आदि शंकराचार्य ने बाल्यकाल में प्रदेश के ओंकारेश्वर में आकर निवास किया। उनके दर्शन और शिक्षाओं को आज भी प्रासंगिक माना जाता है। सम्पूर्ण समाज को एकता के सूत्र में बांधने का कार्य करने वाले आदि शंकराचार्य की विशाल प्रतिमा ओंकारेश्वर में स्थापित है। प्रतिमा स्थल सहित सम्पूर्ण ओंकारेश्वर के समग्र विकास के लिए सभी आवश्यक कार्य सम्पन्न किए जाएं। सिंहस्थ : 2028 तक ओंकारेश्वर भी उज्जैन की तरह श्रद्धालुओं और पर्यटकों के विशेष आकर्षण का केन्द्र बने, इस दिशा में सभी प्रयास किए जाएं। यह स्थान प्रदेश के धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन का महत्वपूर्ण केन्द्र है। उन्होंने कहा कि एकात्म धाम ओंकारेश्वर में शिव पंचायतन मंदिर परिसर का विकास महाकाल लोक की तरह किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) के सभाकक्ष में एक बैठक में एकात्म धाम, ओंकारेश्वर के विकास के संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों से विचार-विमर्श कर आवश्यक निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संस्कृति विभाग द्वारा तैयार प्रजेंटेशन भी देखा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ओंकारेश्वर में सुविधाओं के विकास से यहां आने वाले श्रद्धालुओं और अन्य पर्यटकों की संख्या निश्चित ही बढ़ेगी। नागरशैली में अयोध्या के राम मंदिर की तरह इस आस्था स्थल में मंदिर का निर्माण प्रदेश की विशेष पहचान में सहायक होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एकात्म धाम और क्षेत्र में आने-जाने के सुविधाजनक मार्गों के निर्माण और प्रस्तावित रोप-वे की व्यवस्था के लिए समय-सीमा में कार्यों को पूर्ण किया जाए। बैठक में अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास संजय कुमार शुक्ला, प्रमुख सचिव संस्कृति शिवशेखर शुक्ला, पर्यटन विकास निगम के प्रबंध संचालक इलैयाराजा टी एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।   recent visitors 29

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में बाघ-चीतों के संरक्षण पर जताई प्रसन्नता, माधव नेशनल पार्क में छोड़ेंगे बाघों का जोड़ा

माधव नेशनल पार्क होगा प्रदेश का 9वां बाघ संरक्षित क्षेत्र : मुख्यमंत्री डॉ. यादव वन्यजीव प्रेमियों के लिए पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनेगा चंबल: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री शिवपुरी के माधव नेशनल पार्क में छोड़ेंगे बाघों का जोड़ा मुख्यमंत्री ने प्रदेश में बाघ-चीतों के संरक्षण पर जताई प्रसन्नता, माधव नेशनल पार्क में छोड़ेंगे बाघों का जोड़ा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारत में टाइगर स्टेट का दर्जा हासिल कर चुके मध्यप्रदेश को जल्द ही एक नए टाइगर रिजर्व पार्क की सौगात मिलने जा रही है। शिवपुरी जिले का माधव नेशनल पार्क प्रदेश का 9वां बाघ संरक्षित क्षेत्र होगा, जो चंबल क्षेत्र में वन्य जीव प्रेमियों के लिए पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वे स्वयं बाघों का एक जोड़ा माधव नेशनल पार्क में छोड़ेंगे। चंबल रेंज में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि से स्थानीय युवाओं को रोजगार-स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे। एशिया में पहली बार चीते भी चंबल के कूनो नेशनल पार्क में दिखाई दे रहे हैं। चंबल नदी क्षेत्र में घड़ियाल एवं डॉल्फिन प्रोजेक्ट पर भी कार्य चल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को मीडिया को जारी संदेश में कहा कि देश में सबसे ज्यादा टाइगर मध्यप्रदेश में हैं, जिन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक मध्यप्रदेश आते हैं। बाघ संरक्षित क्षेत्र में जंगल सफारी का आनंद लेने के लिए सभी नेशनल पार्कों में सीजन भर पर्यटकों का आवागमन रहता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में बाघों की संख्या और उनके संरक्षण से प्राप्त उपलब्धियों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों सहित प्रदेशवासियों को बधाई दी।   recent visitors 55

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा प्रयास मध्यप्रदेश को “स्टार्ट-अप और नवाचार का केंद्र” बनाना

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जीआईएस-भोपाल में देश के औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विज़न पर काम करते हुए मध्यप्रदेश भी तेजी के साथ एक मजबूत स्टार्ट-अप हब के रूप में उभर रहा है। प्रदेश सरकार नवाचार, उद्यमिता और रोजगार सृजन को प्राथमिकता देते हुए युवा उद्यमियों की आकांक्षाओं के अनुकूल स्टार्ट-अप कल्चर को विकसित करने की दिशा में प्रभावी रणनीति अपना रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा प्रयास मध्यप्रदेश को "स्टार्ट-अप और नवाचार का केंद्र" बनाना है, जहां युवा उद्यमियों के आइडियाज को सफल व्यवसायों में बदलने के लिए अनुकूल माहौल और पूरा सहयोग मिले। जीआईएस-भोपाल में आयोजित ‘फ्यूचर-फ्रंटियर : स्टार्ट-अप पिचिंग’ सेशन नें प्रदेश के स्टार्ट-अप्स इकोसिस्टम को पंख दे कर ग्लोबल बना दिया है। आधुनिक तकनीक के इस युग में देश के स्टार्ट-अप जगत में मध्यप्रदेश बहुत तेजी से अपनी उपस्थिति दर्ज चुका है। जीआईएस-भोपाल में 20 से अधिक यूनिकॉर्न के संस्थापकों की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है। स्टार्ट-अप पर फोकस्ड सेशन ‘फ्यूचर-फ्रंटियर : स्टार्ट-अप पिचिंग’ में शामिल होने के लिए कुल 180 स्टार्ट-अप्स ने पंजीकरण कराया था। इनमें से 25 हाईली पोटेंशियल स्टार्ट-अप्स ने प्रस्तुतियां दीं। प्रस्तुतियों के विश्लेषण के बाद उन्हें जरूरी मार्गदर्शन और निवेश के अवसर भी मिले। इस सेशन में कुल 47 स्टार्ट-अप शामिल हुए थे। इनमें से 19 स्टार्ट-अप्स को एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट प्राप्त हुए। आईआईसीई ने 4 स्टार्ट-अप्स में रुचि दिखाई, एसजीएसआईटीएस ने 3 स्टार्ट-अप्स में, सिल्वर नीडल वेंचर्स ने 3 स्टार्ट-अप्स में, आईटीआई ग्रोथ ने 3 स्टार्ट-अप्स में, ईज़ीसीड ने 7 स्टार्ट-अप्स में, सीफंड ने 3 स्टार्ट-अप्स में, वेंचर कैटालिस्ट्स ने 10 स्टार्ट-अप्स में, वीएएसपीएल इनिशिएटिव्स ने 4 स्टार्ट-अप्स में, एआईस-आरएनटीयू ने 5 स्टार्ट-अप्स में तथा इक्वैनिमिटी इन्वेस्टमेंट्स ने 5 स्टार्ट-अप्स में निवेश की अभिरुचि प्रदर्शित की। स्टार्ट-अप्स को मिल रही है वित्तीय सहायता और प्रोत्साहन मध्यप्रदेश में स्टार्ट-अप को बढ़ावा देने के लिये महिलाओं, अनुसूचित जाति, जनजाति के उद्यमियों के स्टार्ट-अप्स को पहले निवेश पर 18 फीसदी, अधिकतम 18 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता मिल रही है। अन्य स्टार्ट-अप्स को पहले निवेश पर 15 प्रतिशत सहायता, अधिकतम 15 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है। इसके साथ इन्क्यूबेटर विस्तार के लिए 5 लाख रुपये का एक मुश्त अनुदान, स्टार्ट-अप्स के ऑफिस किराए में 50 फीसदी राशि की वापसी (तीन वर्षों तक प्रतिमाह 5,000 रुपये) की भी व्यवस्था की गई है। नीति में पेटेंट कराने पर 5 लाख रुपये तक की सहायता और पेटेंट फाइल करने की प्रक्रिया में आवश्यक सहायता का भी प्रावधान किया गया है। महिला उद्यमियों के स्टार्ट-अप्स को विशेष प्रोत्साहन मध्यप्रदेश में इस समय 4,900 से अधिक स्टार्ट-अप संचालित हो रहे हैं। इनमें से करीब 44 प्रतिशत स्टार्ट-अप्स महिलाओं द्वारा संचालित हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा लक्ष्य 'स्टार्ट-अप इंडिया' के तहत पंजीकृत स्टार्ट-अप्स की संख्या को 100 प्रतिशत तक बढ़ाना और कृषि एवं खाद्य क्षेत्र में स्टार्ट-अप्स को 200 प्रतिशत तक बढ़ावा देना है। इसके लिए प्रदेश में 72 इनक्यूबेटर कार्यरत हैं और उत्पाद-आधारित स्टार्ट-अप्स को बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। राज्य सरकार की स्टार्ट-अप नीति और क्रियान्वयन योजना के अंतर्गत स्टार्ट-अप्स को वित्तीय मदद, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में सहायता और नीतिगत मदद मुहैया कराई जा रही है। नई स्टार्ट-अप नीति के तहत वित्तीय अनुदान के पात्र स्टार्ट-अप्स को कुल निवेश का 18 फीसदी (अधिकतम 18 लाख रुपये) का अनुदान दिया जा रहा है। नई नीति में वित्तीय प्रोत्साहन, अधोसंरचना सहायता और क्षमता निर्माण कार्यक्रम शामिल हैं।   recent visitors 45

प्रदेश की मोहन सरकार ने फिर लिया 6 हजार करोड़ का कर्ज, 15 दिनों में दूसरी बार बाजार से उठाया लोन

भोपाल  राज्य सरकार ने 15 दिनों के भीतर दूसरी बार 6000 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। इससे पहले 18 फरवरी को भी सरकार ने इसी राशि का ऋण लिया था। इस वित्तीय वर्ष में अब तक सरकार कुल 47,000 करोड़ रुपये का कर्ज उठा चुकी है। लगातार बढ़ रहा कर्ज राज्य सरकार अगस्त 2024 से अब तक हर महीने बाजार से कर्ज ले रही है। वित्त विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह ऋण विकास परियोजनाओं और अन्य आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए लिया गया है। कर्ज सीमा के भीतर लेने का दावा वित्त विभाग ने बताया कि यह कर्ज वित्तीय नियमों के तहत लिया गया है और सरकार के बजटीय प्रबंधन के दायरे में आता है। हालांकि, विपक्ष ने सरकार की ऋण नीति पर सवाल उठाए हैं और इसे राज्य की आर्थिक स्थिति के लिए चिंताजनक बताया है। प्रदेश सरकार अगस्त 2024 से अब तक हर महीने बाजार से कर्ज ले रही है। वित्त विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह ऋण विकास परियोजनाओं और अन्य आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए लिया गया है। यह कर्ज वित्तीय नियमों के तहत लिया गया है और सरकार के बजटीय प्रबंधन के दायरे में आता है। हालांकि, विपक्ष ने सरकार की ऋण नीति पर सवाल उठाए हैं और इसे राज्य की आर्थिक स्थिति के लिए कर्ज का उपयोग और भविष्य की योजना सरकार का कहना है कि यह ऋण बुनियादी ढांचे, बिजली क्षेत्र और कल्याणकारी योजनाओं में खर्च किया जाएगा। इसके साथ ही, राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कर्ज की अदायगी की योजना भी बनाई जा रही है ताकि वित्तीय संतुलन बना रहे। मुफ्तखोरी की योजनाओं को पूरा करने में जा रहा कर्ज का एक बड़ा हिस्सा     वर्तमान वित्त वर्ष में राज्य सरकार अगस्त 2024 से अमूमन हर माह नियमित रूप से बाजार से कर्ज उठा रही है।     वित्त विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आर्थिक गतिविधियों और विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए कर्ज लिया जा रहा है।     यह राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम में निर्धारित सीमा के भीतर है। सरकार राज्य सकल घरेलू उत्पाद के अनुपात में तीन प्रतिशत तक कर्ज ले सकती है।     आधा प्रतिशत और कर्ज बिजली सहित अन्य क्षेत्रों में अधोसंरचना सुधार के काम करने पर लिया जा सकता है।     राज्य सरकार द्वारा लिए जाने वाले कर्ज का एक बड़ा हिस्सा मुफ्त की योजनाओं को पूरा करने में ही चला जाता है। वर्ष 2024-25 में सरकार 65 हजार करोड़ रुपये तक कर्ज ले सकती है। वित्तीय वर्ष 24-25 में लिया कर्ज वर्ष- कर्ज (राशि करोड़ में)     06 अगस्त 2024- 5,000     27 अगस्त 2024- 5,000     24 सितंबर 2024- 5,000     08 अक्टूबर 2024-5,000     26 नवंबर 2024 – 5,000     24 दिसंबर 2024 -5,000     31 दिसंबर 2024 – 5,000     18 फरवरी 2025 -6,0000     4 मार्च 2025- 6,000 कुल – 47 हजार करोड़ रुपये   recent visitors 37

विद्या भारती केवल शिक्षा प्रदान करने तक सीमित नहीं है: मोहन भागवत

भोपाल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के परम पूजनीय सरसंघचालक मोहन भागवत जी ने आज विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान (वीबीएबीएसएस) के पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं के पंचदिवसीय प्रशिक्षण शिविर का औपचारिक उद्घाटन किया। यह शिविर भोपाल स्थित सरस्वती विद्या मंदिर आवासीय विद्यालय, शारदा विहार में आयोजित किया गया है। इस अवसर पर संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल जी, विद्या भारती के अध्यक्ष डी. रामकृष्ण राव, महामंत्री अवनीश भटनागर सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे। उद्घाटन सत्र में अवनीश भटनागर ने अतिथियों का परिचय कराया, जिसके उपरांत अध्यक्ष डी. रामकृष्ण राव ने शिविर की संकल्पना प्रस्तुत की। युगानुकूल परिवर्तन में भारत की अग्रणी भूमिका: अपने संबोधन में परम पूजनीय सरसंघचालक मोहन भागवत जी ने कहा कि विद्या भारती केवल शिक्षा प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय पुनर्निर्माण का एक अभिन्न अंग है। उन्होंने कहा कि संघ केवल शाखा संचालन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज परिवर्तन की दिशा में कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि विश्व में हो रहे सामाजिक, सांस्कृतिक और वैचारिक बदलावों को भारत की सनातन परंपरा के आलोक में दिशा देने की आवश्यकता है। आज जब वैश्विक परिदृश्य में कई विकृतियां उभर रही हैं, तब भारत ही वह ध्रुव तारा है जो सही दिशा प्रदान कर सकता है। इसके लिए समाज और राष्ट्र के सर्वांगीण विकास हेतु भारतीय परंपराओं पर आधारित शिक्षा, संस्कृति और नीति निर्माण को बढ़ावा देना आवश्यक है। संघ का व्यापक प्रभाव: उन्होंने उल्लेख किया कि विद्या भारती द्वारा किए जा रहे कार्यों का वैश्विक स्तर पर प्रभाव देखा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी इसकी व्यापकता को स्वीकार किया है। यह प्रमाणित करता है कि संघ और उसके सहयोगी संगठनों का कार्य केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका वैश्विक महत्व भी है। समाज जागरण की आवश्यकता: भागवत जी ने कहा कि आज समाज में नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हमें केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि मानवता, करुणा और सत्य जैसे मूलभूत सिद्धांतों पर आधारित समाज का निर्माण करना चाहिए। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में भारत को एक आदर्श समाज मॉडल के रूप में प्रस्तुत करना होगा, जो संपूर्ण विश्व को शांति और समरसता की ओर ले जाने में सक्षम हो। संघ कार्यकर्ताओं से आह्वान: परम पूजनीय सरसंघचालक जी ने सभी कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वे अपने विचार और कार्यों से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए निरंतर कार्य करें। उन्होंने पंच परिवर्तन, विमर्श परिवर्तन, और सज्जन शक्ति जागरण को संघ के आगामी कार्यक्रमों का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। शिविर के आगामी सत्रों में विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा और प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा, जिससे कार्यकर्ताओं को समाज जागरण के लिए और अधिक प्रभावी रूप से तैयार किया जा सके। recent visitors 52