मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने सोनिया गांधी के इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें माफी मांगने की बात कही

भोपाल 18वीं लोकसभा के बजट सत्र के पहले दिन शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा के जॉइंट सेशन में 59 मिनट का अभिभाषण दिया। उनके इस अभिभाषण पर कांग्रेस नेताओं की टिप्पणी पर विवाद खड़ा हो गया। सोनिया गांधी ने द्रौपदी मुर्मू को "बेचारी" कहा। वहीं राहुल ने भाषण को बोरिंग बताया। वहीं, राष्ट्रपति भवन के प्रेस सेक्रेटरी ने भी सोनिया गांधी के बयान पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा- विपक्षी सांसदों का बयान दुर्भाग्यपूर्ण और राष्ट्रपति की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है। सीएम बोले- सोनिया गांधी ने हल्की टिप्पणी की, माफी मांगें सीएम डॉ मोहन यादव ने सोनिया गांधी के इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें माफी मांगने की बात कही है। सीएम ने अपने बयान में कहा- दुनिया के सबसे बडे़ लोकतंत्र में हमारे संविधान के मुखिया के नाते से राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल को लेकर बजट भाषण में विस्तार से अपनी बात कही। बडे़ गर्व का विषय था। देश के लिए उत्साह और उमंग का वातावरण था। सीएम ने आगे कहा- ऐसे में कांग्रेस के लोगों ने हमेशा की तरह और सोनिया गांधी ने जो हल्की टिप्पणी की है ये पूरे देश के लिए अपमानजनक है। खासकर आदिवासी बहन राष्ट्रपति के रूप में शोभायमान हैं। ऐसे में उनका अपमान करना ये सर्वथा निंदनीय है। मैं इसकी निंदा करता हूं और सोनिया गांधी से मांग करता हूं कि वे अपने कथन के लिए माफी मांगें। कांग्रेस का चरित्र है वो कदम कदम पर इस प्रकार की हरकतें करती है जिससे पूरा लोकतंत्र लज्जित होता है। राष्ट्रपति जी ने जितने अच्छे ढंग से अपनी बात रखी है वो पूरा देश जानता है। सोनिया जी को माफी मांगना चाहिए। recent visitors 47

भारत लौटते ही मुख्यमंत्री मोहन यादव दिल्ली के केशवपुरम में जनसभा को संबोधित करेंगे

भोपाल/ दिल्ली मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव 4 दिवसीय जापान यात्रा से आज वापस लौटेंगे। सीएम टोक्यो के हानेडा हवाई अड्डे से रवाना हो गए हैं, शाम तक मुख्यमंत्री मोहन यादव दिल्ली पहुंचेंगे। स्वदेश लौटते ही सीएम बिना आराम किए दिल्ली विधानसभा चुनाव की बागडोर संभालेंगे। दिल्ली में मुख्यमंत्री मोहन यादव जनसभा को करेंगे संबोधित भारत लौटते ही मुख्यमंत्री मोहन यादव दिल्ली के केशवपुरम में जनसभा को संबोधित करेंगे। रात 8 बजे दिल्ली के दादा देवता मंदिर, शकूर गांव के विधानसभा टीआरआई नगर, केशवपुरम में जनसभा करेंगे। मुख्यमंत्री पार्टी कार्यकर्ताओं से भी मुलाकात करेंगे। जापान दौरे से प्रदेश में आएगा बड़ा निवेश मुख्यमंत्री का जापान दौरे से प्रदेश में बड़ा निवेश आएगा। यात्रा में मध्यप्रदेश में निवेश, नवाचार और सतत विकास को बढ़ावा देने की पहल हुई है। प्रतिष्ठित जापानी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने निवेश की सहमति दी है। निवेशकों के साथ One-to-One बैठक हुई, कृषि, डेयरी एवं फूड प्रोसेसिंग, फिनटेक, आईटी/आईटीईएस और रोबोटिक्स, फार्मास्युटिकल्स, मेडिकल डिवाइस, इलेक्ट्रिक वाहन, ऑटोमोबाइल, शहरी एवं औद्योगिक बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों पर बैठकें केंद्रित रहीं। प्रदेश के बजट का आधार बनेगा आम बजट आज देश का आम बजट पेश होने जा रहा है। लेकिन इससे प्रदेश को भी काफी आशाएं हैं क्योंकि यह एमपी के बजट का आधार बनेगा। राज्य को विभिन्न योजनाओं में 50 हजार करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। वित्त विभाग ने सभी विभागों से बजट भाषण सुनने और रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। केंद्रीय योजनाओं के प्रावधानों के साथ नए अवसरों पर विभाग रिपोर्ट तैयार करेंगे। 15 फरवरी से पहले सीएम डॉ मोहन यादव मप्र के बजट को लेकर बैठक करेंगे। गरीब, नारी, युवा और किसानों के लिए होंगे विशेष प्राविधान।   MP जीसीसी नीति लागू करने वाला पहला राज्य मध्यप्रदेश सरकार ने देश की पहली समर्पित ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स नीति-2025 लागू कर दी है। इससे राज्य नवाचार और तकनीकी उत्कृष्टता का केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर होगा। यह नीति भोपाल, इंदौर और ग्वालियर जैसे टियर-2 शहरों को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर के रूप में विकसित करने का मार्ग प्रशस्त करेगी। सरकार इन शहरों में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) और सायबर सुरक्षा के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करेगी। इसके साथ इनोवेशन क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। ये क्लस्टर आधुनिक तकनीकों में नवाचार के साथ रिसर्च एंड डेवलपमेंट के लिए मंच प्रदान करेंगे। खजुराहो बाल नृत्य महोत्सव 20 से 26 फरवरी तक मध्यप्रदेश के खजुराहो में बाल नृत्य महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। नृत्य महोत्सव में हिस्सा लेने के लिए 10 से 16 वर्ष के मध्यप्रदेश के मूल निवासी बाल नृत्य कलाकार ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। चयनित होने वाले कलाकारों को 20 से 26 फरवरी तक ऐतिहासिक नगरी खजुराहो में आयोजित होने वाले विश्वप्रसिद्ध खजुराहो नृत्य समारोह के दौरान एक पृथक मंच पर प्रस्तुति देने का अवसर प्राप्त होगा। इस महोत्सव में आवेदन करने के लिए 3 फरवरी को रात 12 बजे तक संस्कृति संचालनालय की वेबसाइट culturemp.in अथवा talent.khajurahodancefestival.com पर आवेदन किया जा सकता है। recent visitors 61

किसानों, युवाओं, महिलाओं और गरीबों के कल्याण को दें सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को मंत्रालय में वीडियो कॉन्फ्रेंस द्वारा कलेक्टर्स को मुख्यमंत्री जनकल्याण अभियान को गति देने और नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान कर सुव्यवस्था स्थापित करने को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में जिला किस तरह अग्रणी हो, इसके लिए स्वस्थ प्रतिस्पर्धा हो। मुख्यमंत्री जनकल्याण अभियान में विभिन्न योजनाओं में अधिक से अधिक हितग्राहियों को लाभान्वित करने का लक्ष्य 22 जनवरी तक पूर्ण किया जाना सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिलों में कलेक्टर की भूमिका विकास कार्यों और जनकल्याण की दृष्टि से महत्वपूर्ण होती है। समाज के युवाओं, किसानों, महिलाओं और गरीबों के कल्याण के लिए योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन को प्राथमिकता दी जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिला कलेक्टर की पहचान कार्य और जनकल्याण के कार्यक्रमों के श्रेष्ठ क्रियान्वयन के आधार पर ही बनेगी। कुछ क्षेत्रों में विशेष उपलब्धियों का आवश्यक प्रचार भी सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से किया जाए। इससे अन्य जिलों में अधिकारियों और अन्य सभी को भी ऐसे कार्यों को करने की प्रेरणा मिलेगी। कलेक्टर, देखें रैन बसेरों की व्यवस्थाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सर्दी में रैन बसेरों में रहने वाले व्यक्तियों की अच्छी देखभाल सुनिश्चित करें। समय-समय पर रैन बसेरों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लें। इसके साथ ही कलेक्टर, थानों का आकस्मिक निरीक्षण भी करें। जिले की घटनाओं पर कलेक्टर की बारीक नजर होना चाहिए। जनप्रतिनिधियों से संवाद और सम्पर्क में कमी नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सेवा के महत्वपूर्ण सेक्टर्स में जिलों में ऐसे आयोजन हों, जो जिले के महत्व को बढ़ाते हों। टी.बी. रोग नियंत्रण में गतिविधियां बढ़ाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलेक्टर्स को निर्देश दिए कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने निक्षय अभियान में देश के 347 जिले चिन्हित कर विशेष प्रयास कर क्षय रोग के नियंत्रण का अभियान प्रारंभ किया। यह अभियान आगामी 24 मार्च तक चलेगा। निक्षय अभियान में मध्यप्रदेश में 23 जिले चिन्हित किए गए हैं। प्रदेश में इस अभियान को गति प्रदान की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के 5 जिले मंदसौर, नरसिंहपुर, मंडला, बैतूल और खंडवा इस अभियान के क्रियान्वयन में शीर्ष पर हैं। इसी तरह टी.बी. रोगियों को फूड-बॉस्केट के वितरण में जबलपुर, नरसिंहपुर, मंदसौर, अनूपपुर और मंडला सबसे आगे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि टी.बी. नियंत्रण के कार्य में कलेक्टर विभिन्न नवाचार भी कर सकते हैं। स्वास्थ्य संचालक ने जानकारी दी कि मंदसौर में एक्सरे मशीन की खरीदी, सीहोर में जनप्रतिनिधियों द्वारा एक-एक टी.बी. रोगी की देखभाल का प्रण लेने और उज्जैन एवं नीमच में टी.बी. रोगियों के पंजीयन और उपचार के कार्य गुणवत्तापूर्ण ढंग से किए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रेडक्रास सोसायटी, एनसीसी और एनएसएस जैसे संगठनों का टी.बी. उन्मूलन अभियान के लिए सहयोग प्राप्त किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आयुष्मान योजना में निर्धन वर्ग के नागरिकों की सहायता के लिए जिलों में समन्वय पूर्वक सहायता के कार्य किए जाएं। मुख्य सचिव अनुराग जैन द्वारा प्रदेश में सिकल सेल एनीमिया के रोगियों के उपचार के संबंध में कलेक्टर को निर्देशित किया गया। वीडियो कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री कार्यालय के अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।   recent visitors 96

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 132 करोड़ रूपये के विकास कार्यों का करेंगे भूमि-पूजन एवं लोकार्पण

विदिशा जिले को 4 जनवरी को मिलेगी विकास की अनेक सौगातें भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार 4 जनवरी को विदिशा के लटेरी में लगभग 132 करोड़ रूपये की लागत का भूमि-पूजन एवं लोकार्पण करेंगे। इसका लाभ विदिशा जिले के सिरोंज और लटेरी क्षेत्र की जनता को मिलेगा। लटेरी में आयोजित कार्यक्रम में हितग्राहियों को हितलाभ भी वितरित किये जायेंगे। विदिशा के सिरोंज और लटेरी अनुभाग क्षेत्र में जिन विभागों के करोड़ों की लागत से भूमि-पूजन और लोकार्पण होने जा रहे हैं, उनमें नगर पालिका परिषद के 20.6217 करोड़, जनपद पंचायत के 6.6352 करोड़, स्वास्थ्य विभाग के 9.4179 करोड़, पीएमजेएसवाय के 7.0311 करोड़, लोक निर्माण विभाग के 24.8112 करोड़, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग के 15.7288 करोड़, शिक्षा विभाग के 38.8000 करोड़, राजस्व विभाग के 7.3200 करोड़, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के 1.1604 करोड़ और महिला एवं बाल विकास विभाग के 0.4488 करोड़ की लागत के विकास कार्य शामिल हैं।   recent visitors 123

मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज करेंगे चंबल अभयारण्य का भ्रमण

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वन्य जीव पर्यटन की दिशा में मध्यप्रदेश महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। आज शनिवार 4 जनवरी से वन्य-जीव पर्यटन को एक नया आयाम मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव चंबल अभयारण्य का भ्रमण कर चंबल नदी के घड़ियाल अभयारण्य की व्यवस्थाओं का अवलोकन कर पर्यटन सुविधाओं का जायजा लेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रकृति ने मध्यप्रदेश को कई वरदान दिए हैं। सघन वन, वृक्षों की विविधता के साथ ही वन्य-प्राणियों की भी विविधता मध्यप्रदेश में देखने को मिलती है। वनों और वन्य-प्राणियों से मध्यप्रदेश की एक अलग पहचान बनी है। मध्यप्रदेश बाघ, तेंदुआ और घड़ियाल जैसे प्राणियों की सर्वाधिक संख्या वाला प्रदेश है। चीता पुनर्स्थापन करने वाला मध्यप्रदेश एक मात्र प्रदेश है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश में ही नहीं पूरे विश्व में सर्वाधिक घड़ियाल चंबल नदी में पाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि विश्व में लगभग तीन हजार घड़ियाल हैं, तो इनमें से 85 प्रतिशत चंबल नदी में हैं। करीब चार दशक पहले घड़ियालों की गणना का कार्य शुरू हुआ, जिससे घड़ियालों के इतनी बड़ी संख्या में चंबल में होने की जानकारियां सामने आईं। जनवरी और फरवरी महीने में अनुकूल तापमान का अनुभव कर घड़ियाल पानी से बाहर निकलते हैं और उस वक्त घड़ियालों और मगरमच्छों की गिनती आसानी से हो जाती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य को राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल वन्य-जीव अभयारण्य के नाम से भी जाना जाता है। पर्यटकों में यह चंबल बोट सफारी के नाम से प्रसिद्ध है। यह तीन राज्यों मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के संयुक्त प्रयासों से एक प्रमुख संरक्षण परियोजना है। मध्यप्रदेश में वर्ष 1978 में इसे वन्य-जीव अभयारण्य के रूप में मान्यता दी गई थी। चंबल घड़ियाल वन्य-जीव अभयारण्य का मुख्य उद्देश्य लुप्तप्राय घड़ियाल, लाल मुकुट वाले छत कछुए और लुप्तप्राय गांगेय डॉल्फिन को संरक्षित करना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह अभयारण्य लगभग साढ़े पांच वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। पहाड़ियों और रेतीले समुद्र तटों से यह धरती भरी हुई है। यह वन्य-जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत संरक्षित है और इसका मुख्यालय मुरैना में है। घड़ियालों और गंगा डॉल्फिनों का निवास स्थान, पारिस्थितिकी संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया गया है। घड़ियाल, लाल मुकुट वाले कछुए और डॉल्फ़िन यहाँ पाए जाते हैं। अन्य जानवर जो (दुर्लभ) श्रेणी में हैं, उनमें मगरमच्छ, चिकने-लेपित ऊदबिलाव, धारीदार लकड़बग्घा और भारतीय भेड़िये हैं, जो संरक्षण सूची की अनुसूची-1 में शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चंबल नदी में कछुआ परिवार की 26 दुर्लभ प्रजातियों में से 08 प्रजातियाँ पाई जाती हैं। इनमें भारतीय संकीर्ण सिर एवं नरम खोल वाला कछुआ, तीन धारीदार छत वाला कछुआ और मुकुटधारी नदी वाला कछुआ शामिल हैं, जो यहां की पहचान है। शीतकाल है घड़ियाल देखने का उपयुक्त समय चंबल में घड़ियाल अभयारण्य देखने के लिए यात्रा का सर्वोत्तम समय अक्टूबर से जून तक रहता है। शीतकाल में घड़ियाल देखने और यह क्षेत्र घूमने का सबसे अच्छा समय माना गया है। राष्ट्रीय चंबल वन्य-जीव अभयारण्य में प्रकृति को देखने की बहुत सी गतिविधियाँ होती हैं। घड़ियाल, डॉल्फ़िन, अन्य सरीसृप, जल निकायों और सुंदर परिदृश्य की फोटोग्राफी नाव की सवारी से की जा सकती है। यहाँ की घाटियों और नदियों के किनारे पगडंडियों पर चलना प्रकृति को करीब से देखने का मौका देता है। चंबल नदी लगभग एक हजार किलोमीटर लंबी है। पर्यटक चंबल घड़ियाल सफारी अभयारण्य का आनंद उक्त क्षेत्र के निकटवर्ती नगरों में रहवास सुविधा का उपयोग ले सकते हैं।   recent visitors 74

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश खनन के क्षेत्र में अधिक राजस्व प्राप्त कर नई ऊँचाइयाँ छू रहा

विशेष लेख नवाचारों से मध्यप्रदेश बनेगा माइनिंग केपिटल भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नवाचारों से प्रेरित होकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार माइनिंग में नवाचार कर रही है। प्रदेश में सबसे पहले क्रिटिकल मिनरल के 2 ब्लॉक्स को नीलामी में रखा गया है। सबसे अधिक खनिज ब्लॉक्स की नीलामी कर मध्यप्रदेश देश में पहले स्थान पर आ गया है। प्रदेश की समृद्ध खनिज सम्पदा और नई खनन नीतियों से राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। खनिज संसाधनों के उपयोग से न केवल राजस्व में बढ़ोत्तरी होगी, बल्कि रोजगार के नये अवसर भी पैदा होंगे। प्रदेश में कोयला, चूना पत्थर, डोलोमाइट और बॉक्साइट जैसे खनिजों का विशाल भण्डार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश खनन के क्षेत्र में अधिक राजस्व प्राप्त कर नई ऊँचाइयाँ छू रहा है। प्रदेश में वित्तीय वर्ष 2023-24 के मुकाबले खनिज राजस्व संग्रह में 23 प्रतिशत की वृद्धि हुई, प्रदेश में पहली बार खनिज राजस्व संग्रह 5 अंकों में पहुंच गया। जबकि वित्तीय वर्ष 2023-24 में इस अवधि में 4 हजार 958 करोड़ 98 लाख रुपये प्राप्त हुए थे। जबकि वर्ष 2024-25 में यह प्राप्ति 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक प्राप्त किया गया है। मध्यप्रदेश खनिज ब्लॉक्स की नीलामी में सर्वप्रथम मध्यप्रदेश मुख्य खनिज ब्लॉकों की सर्वाधिक संख्या में नीलामी करने में देश में प्रथम स्थान पर है। भारत सरकार द्वारा वर्तमान में स्ट्रैटेजिक एवं क्रिटिकल मिनरल पर देश की आत्म-निर्भरता बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे इन खनिजों की आयात पर निर्भरता कम हो सके। प्रदेश द्वारा इस खनिज समूह के अंतर्गत अभी तक ग्रेफाइट के 8 खनिज ब्लॉक, रॉक-फॉस्फेट खनिज के 6 ब्लॉक सफलतापूर्वक नीलाम किये गये हैं। मुख्य खनिज के 20 ब्लॉकों की नीलामी के लिये विभाग द्वारा 9 अगस्त, 2024 को निविदा आमंत्रण सूचना-पत्र (NIT) जारी की गयी है, जिसकी कार्यवाही प्रचलन में है। इसके अतिरिक्त महत्वपूर्ण खनिज गोल्ड के 4 ब्लॉक, मैग्नीज खनिज के 16 ब्लॉक एवं कॉपर का एक ब्लॉक अभी तक सफलतापूर्वक नीलाम किये गये हैं। भारत सरकार द्वारा जनवरी-2024 में एक्सप्लोरेशन नीति प्रभावशील की गयी। इस नीति के तहत मध्यप्रदेश राज्य द्वारा क्रिटिकल मिनरल के 2 ब्लॉक नीलामी में रखे गये हैं। मध्यप्रदेश केंद्र सरकार की इस नीति का क्रियान्वयन करने वाला पहला राज्य बन गया है। खनिज अन्वेषण के क्षेत्र में भी प्रदेश प्रथम स्थान पर है। प्रदेश में स्ट्रेटेजिक एवं क्रिटिकल मिनरल, मुख्यत: रॉक-फास्फेट, ग्रेफाइट, ग्लूकोनाइट, प्लेटिनम एवं दुर्लभ धातु (आरईई) के लिये कार्य किया जा रहा है। इसके अंतर्गत 11 क्षेत्रों पर अन्वेषण कार्य किया गया। प्रदेश में जिला खनिज विभाग के अंतर्गत विभिन्न विकास कार्य, जिसमें पेयजल, चिकित्सा, शिक्षा, महिला एवं बाल कल्याण, स्वच्छता, कौशल विकास और वृद्ध, विकलांग कल्याण के लिये 16 हजार 452 परियोजनाएँ स्वीकृत की गयी हैं, जिनकी लागत 4406 करोड़ रुपये है। इनमें से 7 हजार 583 परियोजना लागत 1810 करोड़ रुपये का कार्य पूर्ण हो गया है। अवैध खनन को रोकने के लिये ई-चेकगेट की स्थापना प्रदेश में खनिज के अवैध परिवहन रोकने के लिये एआई आधारित 41 ई-चेकगेट स्थापित किए जा रहे हैं। ई-चेकगेट पर वेरीफोकल कैमरा, आरएफआईडी रीडर और ऑटोमेटिक नम्बर प्लेट रीडर की सहायता से खनिज परिवहन में संलग्न वाहन की जाँच की जा सकेगी। परियोजना में पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में खनिज परिवहन के लिये महत्वपूर्ण 4 स्थानों पर ई-चेकगेट स्थापित कर कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। अवैध परिवहन की निगरानी के लिये राज्य स्तर पर भोपाल में कमाण्ड एवं कंट्रोल सेंटर तथा जिला भोपाल एवं रायसेन में जिला कमाण्ड सेंटर स्थापित किया गया है। इस वर्ष तक सभी 41 ई-चेकगेट की स्थापना किये जाने का लक्ष्य है। अवैध खनन की रोकथाम के लिये उपग्रह और ड्रोन आधारित परियोजना प्रारंभ की गयी है। इस परियोजना के माध्यम से 7 हजार खदानों को जियो टैग देकर खदान क्षेत्र का सीमांकन किया गया है। यह परियोजना पूर्ण रूप से लागू होने पर अवैध खनन को चिन्हित कर प्रभावी कार्यवाही हो सकेगी। परियोजना के लागू होने पर स्वीकृत खदान के अंदर 3-डी इमेजिंग तथा वॉल्यूमेट्रिक एनालिसिस कर उत्खनित खनिज की मात्रा का सटीक आँकलन किया जा सकेगा। माइनिंग में नवाचारों से प्रदेश की आर्थिक प्रगति सुनिश्चित होगी, साथ ही इससे मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर खनिज उत्पादक राज्य के रूप में नई पहचान मिलेगी। निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन मध्यप्रदेश सरकार निजी क्षेत्र को प्रदेश के प्रचुर खनिज संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिये प्रोत्साहित कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में हाल ही में भोपाल में आयोजित माइनिंग कॉन्क्लेव में कई बड़ी कम्पनियों ने माइनिंग सेक्टर में निवेश की इच्छा जताई है। कॉन्क्लेव में 20 हजार करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। राज्य सरकार ने खनिज क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिये कई सुधार किये हैं। इनमें पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया, पर्यावरण-अनुकूल खनन और स्थानीय समुदायों को मुनाफे में भागीदारी देने जैसे कदम शामिल हैं। प्रदेश में है देश का एकमात्र हीरा भण्डार प्रदेश के पन्ना जिले में देश का एकमात्र हीरे का भण्डार है। हीरा खदान से प्रतिवर्ष एक लाख कैरेट हीरे का उत्पादन होता है। मलाजखण्ड कॉपर खदान भारत की सबसे बड़ी ताम्बा खदान है। इस खदान से प्रतिदिन 5 से 10 हजार ताम्बा निकाला जाता है। भारत के कुल ताम्बा भण्डार का 70 प्रतिशत ताम्बा मध्यप्रदेश में है। राज्य में स्थित सासन कोयला खदान भी अपने विशाल खनन उपकरणों के लिये प्रसिद्ध है। मध्यप्रदेश देश का चौथा सबसे बड़ा कोयला उत्पादक राज्य है। प्रदेश में लाइम-स्टोन, डायमण्ड और पाइरोफ्लाइट जैसे खनिज संसाधन हैं। मध्यप्रदेश के जिलों में खनिज के भण्डार हैं, जिसमें सतना, रीवा और सीधी में लाइम-स्टोन, बॉक्साइट, ग्रेफाइट, गोल्ड और ग्रेनाइट, सिंगरौली में कोयला, गोल्ड और आयरन, शहडोल, अनूपपुर और उमरिया में कोयला, कोल बेड, मिथेन और बॉक्साइट, छतरपुर, सागर और पन्ना में डायमण्ड, रॉक फास्फेट, आयरन, ग्रेनाइट, लाइम, डायस्पोर और पाइरोफ्लाइट, जबलपुर और कटनी में बॉक्साइट, डोलोमाइट, आयरन, लाइम-स्टोन, मैग्नीज, गोल्ड और मार्बल, नीमच और धार में लाइम-स्टोन, बैतूल में कोयला, ग्रेफाइट, ग्रेनाइट, लीड और जिंक, छिंदवाड़ा में कोयला, मैग्नीज और डोलोमाइट, बालाघाट में कॉपर, मैग्नीज, डोलोमाइट, लाइम-स्टोन और बॉक्साइट, मण्डला और डिण्डोरी में डोलोमाइट और बॉक्साइट, ग्वालियर और शिवपुरी में आयरन, फ्लेग-स्टोन और क्वार्ट्ज, झाबुआ और अलीराजपुर में रॉक फस्फेट, डोलोमाइट, लाइम-स्टोन, मैग्नीज और ग्रेफाइट … Read more

प्रदेश में 6 माह का विशेष अभियान चलाकर 792 वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में परिवर्तित करने : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में 6 माह का विशेष अभियान चलाकर 792 वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में परिवर्तित करने की अधिसूचना संबंधित कलेक्टर्स द्वारा जारी कर दी गई है। इसमें बैतूल जिले के 91, डिंडौरी के 86, मंडला के 75, खरगौन के 65, बड़वानी के 64, खंडवा के 51, सीहोर के 49, छिंदवाड़ा के 48, बालाघाट के 46, हरदा के 42, बुरहानपुर के 37, सिवनी के 28, नर्मदापुरम के 24, भोपाल के 14, धार के 13, देवास के 12, सिंगरौली के 11, नरसिंहपुर के 10, रायसेन के 7, टीकमगढ़ एवं जबलपुर के 5-5, सागर के 4, विदिशा, राजगढ़, इंदौर, कटनी और गुना के 1-1 गांव शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में कुल 827 वन ग्राम बचे थे। इनमें से 792 को राजस्व ग्राम में परिवर्तित किया जा चुका है। शेष 35 वन ग्रामों के वीरान/विस्थापित होने अथवा डूब क्षेत्र में होने से परिवर्तन करने की आवश्यकता नहीं रही। इस प्रकार विस्थापित होने वाले गांव को छोड़कर प्रदेश के सभी वन ग्रामों को राजस्व ग्रामों में परिवर्तित कर दिया गया है। इन 792 ग्रामों के राजस्व नक्शा बनाने का कार्य राजस्व विभाग द्वारा शुरू कर दिया है। भू-अभिलेख और नक्शा पूरे हो जाने से अब ग्रामवासियों को बड़ी सहूलियत होगी। अब यह सुविधाएं मिल सकेंगी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वन ग्राम के राजस्व ग्राम में परिवर्तित हो जाने से ग्रामवासियों को अनेक सुविधाएं और विकास की सौगातें मिल सकेंगी। बँटवारा और नामांतरण होने के साथ फसलों की गिरदावरी भी हो सकेगी। प्राकृतिक आपदा पर फसल बीमा योजना का लाभ मिलेगा, आँगनवाड़ी एवं विद्यालय भवन स्वीकृत हो सकेंगे और स्वास्थ्य की बेहतर सुविधाएँ मिलेंगी। बिजली, पानी, सड़क और तालाबों आदि सुविधाओं का निर्माण भी हो सकेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्राम सभा के माध्यम से वनवासियों के कल्याण के लिये कार्य का अवसर भी मिलेगा।   recent visitors 60