शहर के पेट्रोल पंपों पर फ्यूल डिलेवरी वर्कर की भूमिका निभायेंगीं “शक्ति दीदी”

ग्वालियर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में ग्वालियर जिले में "शक्ति दीदी" के नाम से जिला प्रशासन द्वारा यह प्रेरणादायी पहल की गई है। जिन महिलाओं को “शक्ति दीदी” के रूप में फ्यूल वर्कर के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराया गया है, वे ऐसी महिलायें हैं जो अपनों द्वारा उपेक्षित हैं अथवा जिनके पति का असमय निधन हो चुका है। पेट्रोल पंप संचालकों ने इस सराहनीय पहल में सहयोग करने का भरोसा दिलाया और कहा कि वे अपने पेट्रोल पंपों पर शक्ति दीदी के रूप में अन्य जरूरतमंद महिलाओं को भी रोजगार देंगे। ग्वालियर शहर के पाँच व्यस्ततम पेट्रोल पंपों पर नए साल के दूसरे दिन गुरुवार को पाँच महिलाओं ने ‘शक्ति दीदी’ के रूप में फ्यूल डिलेवरी वर्कर का मोर्चा संभाला। ग्वालियर के पड़ाव आरओबी के समीप स्थित वैश्य एण्ड मुखर्जी पेट्रोल पंप पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विवेक कुमार ने श्रीमती जयहालदार को शक्ति दीदी की जिम्मेदारी सौंपी। इसी तरह संस्कृति पेट्रोल पंप न्यू कलेक्ट्रेट पर अपर कलेक्टर श्रीमती अंजू अरुण कुमार ने श्रीमती रानी शाक्य, दर्शन फ्यूल स्टेशन पिंटो पार्क पर अपर कलेक्टर कुमार सत्यम ने श्रीमती प्रीति माझी एवं सांई राम पेट्रोल पंप चेतकपुरी पर एडीएम टी.एन. सिंह ने श्रीमती निशा परिहार का स्वागत कर उन्हें शक्ति दीदी का दायित्व सौंपा। महिला फ्यूल वर्कर के रूप में तैनात शक्ति दीदी की ड्यूटी की अवधि प्रात: 9 बजे से सायंकाल 5 बजे तक रहेगी। कलेक्टर श्रीमती चौहान ने सुविधा पेट्रोल पंप की “शक्ति दीदी” श्रीमती मीना जाटव का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि वे पूरे आत्मविश्वास के साथ अपने दायित्व का निर्वहन करें। जिला प्रशासन सहयोग के लिये सदैव तत्पर रहेगा। साथ ही पुलिस के सहयोग से आपकी सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा जायेगा। उन्होंने इस अवसर पर शहरवासियों का आह्वान किया कि वे पेट्रोल पंपों पर अपने वाहन में तेल भरवाते समय फ्यूल वर्कर की भूमिका निभा रही शक्ति दीदी का सम्मान और हौसला अफजाई करें, जिससे उनका मनोबल बढ़े।   recent visitors 46

जन समस्याओं के निराकरण के लिए करें जन-संवाद – मुख्यमंत्री डॉ.यादव

विधान सभावार विजन आधारित तैयार करें रोडमैप – मुख्यमंत्री डॉ.यादव जन समस्याओं के निराकरण के लिए करें जन-संवाद रैन बसेरों का निरीक्षण करें विधानसभा वार समीक्षा की जाए इंदौर संभाग में चल रही विकास गतिविधियों एवं निर्माण कार्यों की समीक्षा मुख्यमंत्री ने बैठक में दिए निर्देश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी विधायकों को अपने क्षेत्र के विकास का विजन डॉक्यूमेंट (रोडमैप) बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि सभी विधायक क्षेत्रीय अधिकारियों के साथ जन समस्याओं के निराकरण को लेकर जन-संवाद करें। जनकल्याण अभियान के मिल रहे परिणामों का आकलन करें और सुनिश्चित करें कि कोई भी पात्र व्यक्ति सरकार की योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे। इसके लिए जरूरी है कि जनता के बीच जाएं, उनसे संवाद करें, उनकी समस्याएं जानें और निराकरण के लिए तुरन्त कदम उठाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को इंदौर संभाग में चल रही विकास गतिविधियों एवं वृहद् निर्माण कार्यों की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। जनजातीय कार्य, लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन तथा भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान, इंदौर सांसद शंकर लालवानी सहित अन्य क्षेत्रीय विधायकों एवं जन-प्रतिनिधियों ने बैठक में अपने-अपने क्षेत्र से वर्चुअली सहभागिता की। मुख्यमंत्री निवास में हुई बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन, मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव एस.एन, मिश्रा, अपर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन, प्रमुख सचिव श्रीमती दीपाली रस्तोगी, प्रमुख सचिव संजय शुक्ल, प्रमुख सचिव श्रीमती रश्मि अरूण शमी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। गाँव में रात्रि विश्राम करें अधिकारी और जन-प्रतिनिधि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक में वुर्चअली जुड़े मंत्रीगण, सांसद, विधायक एवं अन्य जन-प्रतिनिधियों से कहा कि वे सरकार की योजनाओं का फीडबैक लेने के लिए अधिकाधिक फील्ड दौरे करें। जन-प्रतिनिधि, क्षेत्रीय अधिकारियों के साथ दूरस्थ गाँव (विशेषकर जनजातीय ग्राम) में रात्रि विश्राम करें। वहां ग्रामीणों से बात करें, उनकी कठिनाईयों का समाधान करें। मुख्यमंत्री ने दिन-ब-दिन बढ़ती सर्दी के मद्देनजर कलेक्टर एवं जिला अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे रैन बसेरों का औचक निरीक्षण करें। जरूरतमंदों को कंबल एवं गर्म वस्त्र प्रदाय करें। किसी को भी सर्दी से कठिनाई न होने पाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि क्षेत्र के विकास के लिए विधायक यदि चाहें, तो कोई नवाचार भी कर सकते हैं। ऐसी नवाचारी गतिविधियों को अमल में लाएं, जिससे जनता को अधिकतम लाभ हो। उन्होंने कहा कि अब सभी संभागों के प्रभारी अपर मुख्य सचिव जिलेवार समीक्षा बैठक करेंगे। इससे सभी विधायकों को अपने-अपने क्षेत्र की प्रमुख मांगों एवं संवदेनशील विषयों को रखने का पर्याप्त अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि सभी कलेक्टर्स अब विधानसभावार समीक्षा बैठक करें। जिले के सभी विधायकों से चर्चा करें और उनके विधानसभा क्षेत्र का विजन डाक्यूमेंट बनाने में सहयोग भी करें। पुराने मंजूर सीएम राइज स्कूल का निर्माण पूरा कराएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सीएम राइज स्कूलों के निर्माण की समीक्षा में कहा कि पुराने मंजूर सीएम राइज स्कूलों का जितना भी निर्माण कार्य अभी शेष है, पहले उन्हें विशेष प्राथमिकता से पूरा कर लिया जाए। इसके बाद नये सीएम राइज स्कूलों के निर्माण का प्रस्ताव लिये जाए। ताप्ती-चिल्लूर वृहद परियोजना की पूर्णता के लिये महाराष्ट्र सरकार से करेंगे चर्चा जल संसाधन विभाग की समीक्षा में खंडवा जिले की ताप्ती-चिल्लूर वृहद सिंचाई परियोजना के बारे में जानकारी दी गई। इस पर खंडवा जिले के हरसूद से विधायक एवं जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने मुख्यमंत्री से इस परियोजना को जल्द से जल्द मंजूरी देने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वासन देते हुए कहा कि जल्द से जल्द इस पर काम शुरू किया जाएगा। यदि आवश्यकता हुई, तो वे स्वयं महाराष्ट्र शासन से भी इस परियोजना के संबंध में चर्चा करेंगे। उल्लेखनीय है कि करीब 26 हजार 279 करोड़ रूपए लागत वाली इस वृहद सिंचाई परियोजना के पूरा होने पर संबंधित क्षेत्र के 81 हजार 600 हेक्टेयर रकबे में फसल सिंचाई एवं वाटर रिचार्जिंग की स्थायी सुविधा उपलब्ध हो जाएगी। जल जीवन मिशन के कामों में तेजी लाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर संभाग में जल जीवन मिशन के तहत संचालित कामों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि अपूर्ण कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण करें। जल जीवन मिशन सीधा जनता से जुड़ा अभियान है। यदि इस अभियान के क्रियान्वयन में कोई समस्या आ रही है, तो आपसी संवाद एवं समन्वय से उसका समाधान निकाला जाए। उन्होंने कहा कि वे 20 जनवरी तक पूरे प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत चल रहे कार्यों की प्रगति की समीक्षा करेंगे। बताया गया कि इंदौर संभाग के अंतर्गत अधीन जिलों में नल-जल योजना के अंतर्गत खोदी गई 3205.83 कि.मी. रोड के विरूद्ध अब तक 3166.81 कि.मी. रोड का रेस्टोरेशन कार्य गुणवत्तापूर्वक पूरा कर लिया गया है। शेष रोड का रेस्टोरेशन कार्य पाइप लाईन की टेस्टिंग के बाद पूरा कर लिया जाएगा। इंदौर-उज्जैन के वर्तमान फोरलेन को बनाया जाएगा सिक्स लेन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर-उज्जैन के फोरलेन को सिक्स लेन में बदलने के संबंध में अब तक हुई प्रगति की जानकारी ली। बताया गया कि इस काम के लिए निर्माण एजेंसी से अनुबंध कर लिया गया है। तय निर्माण एजेंसी द्वारा अनुबंध के अनुसार प्री-कंस्ट्रक्शन गतिविधियां भी तेजी से संचालित की जा रही है। इंदौर सांसद ने इंदौर-देपालपुर मार्ग को फोरलेन बनाए जाने की मांग रखी। बैठक यह भी बताया गया कि मध्यप्रदेश में वर्तमान 6 एक्सप्रेस-वे नियोजित हैं,‍जिसमें नर्मदा प्रगति पथ, विंध्य एक्सप्रेस-वे, मालवा-निमाड़ विकास पथ, बुंदेलखंड विकास पथ, अटल प्रगति पथ और मध्य भारत विकास पथ का निर्माण प्रगतिरत है। अपने सुझाव परिसीमन आयोग को भी दे सकते हैं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक में वर्चुअली जुड़े सांसद एवं विधायकों से कहा कि यदि वे क्षेत्रीय आबादी या भौगोलिक स्तर पर जनहित में अपने जिले या तहसील का संभाग या जिला परिवर्तन कराना चाहते हैं, तो वे अपने सुझाव लिखित में राज्य सरकार द्वारा गठित परिसीमन आयोग को दे सकते हैं। प्राप्त सुझाव पर परिसीमन आयोग ही अंतिम निर्णय लेगा। बड़ी ग्राम पंचायतों को नगर परिषद में बदलने के दे दें प्रस्ताव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार बड़ी ग्राम पंचायतों को नगर परिषद में बनाने के मामलों में गंभीर … Read more

यूनियन कार्बाइड के कचरे के विनिष्टीकरण के लिये सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार कार्रवाई की जा रही : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

जनता की शंकाओं को दूर कर सावधानी पूर्वक किया जायेगा कचरे का विनिष्टीकरण: मुख्यमंत्री डॉ. यादव यूनियन कार्बाइड के कचरे के विनिष्टीकरण की करेंगे सतत निगरानी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव यूनियन कार्बाइड के कचरे के विनिष्टीकरण के लिये सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार कार्रवाई की जा रही : मुख्यमंत्री डॉ. यादव वर्ष 2015 में किया जा चुका है ट्रायल रन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि यूनियन कार्बाइड के कचरे के विनिष्टीकरण के लिये सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार कार्रवाई की जा रही है। कचरे का निष्पादन जनता की शंकाओं को दूर कर सावधानी पूर्वक किया जायेगा। उन्होंने कहा कि जनता के सरोकार प्राथमिकता में सबसे ऊपर है, कचरे के विनिष्टीकरण की कार्रवाई सतत् निगरानी में की जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हादसे के 40 वर्ष बीतने के बाद भोपाल में रखा लगभग 337 मीट्रिक टन कचरे का हानिकारक प्रभाव खत्म हो गया है। उन्होंने बताया कि बचे हुए शेष कचरे में 60 प्रतिशत से अधिक केवल स्थानीय मिट्टी, 40 प्रतिशत में 7-नेपथॉल, रिएक्टर रेसिड्यूज और सेमी प्रोसेस्ड पेस्टीसाइड्स का अपशिष्ट है। इसमें मौजूद 7-नेपथॉल रेसीड्यूस मूलतः मिथाइल आइसो साइनेट एवं कीटनाशकों के बनने की प्रक्रिया का सह-उत्पाद होता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इसका विषैला प्रभाव 25 साल में लगभग समाप्त हो जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को मुख्यमंत्री निवास में मीडिया से चर्चा में ये बातें कहीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि कचरे के निपटान की प्रक्रिया का केन्द्र सरकार की विभिन्न संस्थाओं जैसे- नीरी (नेशनल इन्वॉयरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट), नागपुर, NGRI (नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टीटयूट) हैदराबाद, IICT (इंडीयन इंस्टीट्यूट ऑफ केमीकल टेक्नोलॉजी) तथा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा समय-समय पर गहन परीक्षण किया गया है। उनके अध्ययन तथा सर्वोच्च न्यायालय को प्रस्तुत प्रतिवेदनों के आधार पर भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय को मार्च, 2013 में दिये गये निर्देशानुसार केरल कोच्चि स्थित हिंदुस्तान इनसेक्टीसाइड लिमिटेड के 10 टन यूनियन कार्बाइड के समान कचरे का परिवहन कर पीथमपुर स्थित TSDF में ट्रायल रन केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निगरानी में किया गया। सफल ट्रायल रन का प्रतिवेदन सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि ट्रायल रन के निष्कर्षों के आधार पर सर्वोच्च न्यायालय ने अप्रैल, 2014 में यूसीआईएल के 10 मीट्रिक टन कचरे का एक और ट्रायल रन भारत सरकार, पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय नई दिल्ली की निगरानी में टीएसडीएफ पीथमपुर मे किये जाने के निर्देश दिये। सर्वोच्च न्यायालन ने इस ट्रायल रन की वीडियोग्राफी भी सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिये थे। निर्देशानुसार अगस्त, 2015 में ट्रायल रन के बाद केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा प्रायोगिक निपटान की समस्त रिपोर्ट सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत की गई। रिपोर्ट्स में यह स्पष्ट हुआ कि इस प्रकार के कचरे के निपटान से वातावरण को कोई नुकसान नही हुआ है। उच्चतम न्यायालय ने सभी रिपोर्ट के गहन परीक्षण के पश्चात ही यूसीआईएल के कचरे के निपटान की कार्यवाही को आगे बढ़ाने एवं उन्हें नष्ट करने का निर्देश जारी किया। मुख्य सचिव ने 3 बिन्दुओं पर कराई जांच कचरे के विनिष्टीकरण की कार्रवाई के संबंध में समय-समय पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिये जा रहे निर्देशों के अतिरिक्त मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव ने विस्तृत रूप से तीन बिंदुओं को आधार बनाकर पृथक से जांच कराई। जांच के बिंदु :- आसपास के गांवों में स्वास्थ्य संबंधी परीक्षण, फसल की उत्पादकता पर प्रभाव और क्षेत्रीय जल स्त्रोतों की गुणवत्ता का परीक्षण थे। तीनों बिंदुओं के परीक्षण में यह पाया गया कि यूसीआईएल कचरे के निष्पादन से किसी भी प्रकार के नकारात्मक परिणाम परिलक्षित नहीं हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि कचरे के निपटान की प्रक्रिया को लेकर शासन पूरी तरह से संवेदनशील हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, मध्यप्रदेश प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ ही सभी संबंधित टीमों की सतत् निगरानी में विनिष्टीकरण की कार्रवाई की जाएगी।   recent visitors 49

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्रीमती सुमित्रा देवी मेहता के निधन पर शोक व्यक्त किया

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्रीमती सुमित्रा देवी मेहता के निधन पर शोक व्यक्त किया निवास पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वरिष्ठ पत्रकार, कॉलमिस्ट एवं कथावाचक पं. विजय शंकर मेहता की माताजी श्रीमती सुमित्रा देवी मेहता के निधन पर गहन शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने गुरुवार सुबह श्री मेहता के निवास पर पहुंचकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की। स्व. श्रीमती मेहता 90 वर्ष की थीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व. सुमित्रा देवी के चित्र पर माल्यार्पण और श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने कहा कि स्व. सुमित्रा देवी का जीवन सादगी, सेवा और संस्कारों का प्रतीक था। उनके जीवन मूल्य हमेशा प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिवंगत श्रीमती मेहता के परिजन से आत्मीय चर्चा की और सभी को सांत्वना देकर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।   recent visitors 123

वैज्ञानिक तरीके से जहरीला कचरा नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड का जहरीला कचरा जलाए जाने को लेकर मीडियो से बात की। उन्होंने कहा कि रासायनिक कचरे का निष्पादन वैज्ञानियों से ही कराया जा रहा है। इसमें सभी मानकों का पालन हो रहा है। जनप्रतिनिधियों के साथ आज तीन बजे प्रभारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय बैठक करेंगे और सभी शंकाओं का समाधान करेंगे। कचरा जलाने से ना तो पर्यावरण कोई कोई नुकसान होगा और ना ही भूजल प्रभावित होगा। समस्त अध्ययन के बाद ही कार्रवाई की जा रही है। भोपाल के लोग 40 साल से कचरे के साथ जी रहे थे कांग्रेस द्वारा उठाई जा रही आपत्तियों पर सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि पीथमपुर को लेकर आवाज उठा रहे हैं और भोपाल को लेकर अभी तक कोई बात नहीं की। दोमुही कांग्रेसी करते हैं। यह राजनीति का विषय नहीं है। भोपालवासी 40 वर्ष से इस कचरे के साथ जी रहे थे। हम सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन कर रहे हैं। सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जिस कचरे को हम पीथमपुर में जलाने जा रहे है उसका पहले भी ड्राई रन कर चुके है। इसकी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में जमा की थी, उसी रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने इस कचरे को नष्ट करने के निर्देश हमें दिए थे। इसमें यह साफ कर दिया गया था कि इस कचरे के जलने से पर्यावरण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अगस्त 2015 में यूनियन कार्बाइड का कचरा जलाने का ट्रायल रन किया गया था। परीक्षण में जो रिपोर्ट आई है उसके मुताबिक कचरा जलाने से वातावरण में किसी तरह का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इस रिपोर्ट के बाद हाईकोर्ट ने हमें कचरा जलाने के लिए निर्देशित किया है। recent visitors 40

मध्यप्रदेश में मोहन सरकार सरकारी विभागों को कर रही ऑनलाइन, जानें क्या है ई-ऑफिस प्रणाली

भोपाल  नए साल का पहला दिन मध्यप्रदेश में सुशासन की पहल का साक्षी बना है। मध्यप्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने ई-गवर्नेंस की नई शुरुआत की है। प्रदेश में ई-ऑफिस सिस्टम लागू हुआ है। इसके बाद से मुख्यमंत्री कार्यालय, मुख्य सचिव कार्यालय सहित सभी विभागों में ई-ऑफिस सिस्टम लागू हो गया। यानी कागजी नोटशीट फाइलें नहीं चलेंगी, उनकी बजाए ऑनलाइन फाइलें इधर से उधर जाएंगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन से ई-ऑफिस प्रणाली की शुरुआत की। डिजिटिलाइजेशन के साथ आगे बढ़ रही मोहन सरकार मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि कई जन हितैषी कार्यक्रमों, गरीब, महिला, किसान और युवा वर्ग के कल्याण को फोकस करते हुए एमपी सरकार डिजिटिलाइजेशन के जरिए आगे बढ़ना चाहती है। मुख्यमंत्री कार्यालय सहित मुख्य सचिव अनुराग जैन ने भी मुख्य सचिव कार्यालय में ई-ऑफिस प्रणाली से काम शुरू कर दिया है। क्या है ई-ऑफिस प्रणाली ई-ऑफिस, ऑनलाइन प्रणाली है। इसमें अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक कम्प्यूटर पर बैठकर अपनी फाइलें निपटाएंगे। इससे यह पता चल जाएगा कि कौन सी फाइल किस के पास लंबित है। पुरानी नस्तियों को भी इसमें ढूंढा जा सकेगा। इससे शासकीय कार्य तेजी से संपादित हो सकेंगे। उच्च स्तर पर इसकी मॉनिटरिंग भी आसान होगी। 3 चरणों में प्रदेश में होगा लागू आपको बता दें कि ई-ऑफिस सिस्टम 3 चरणों में पूरे प्रदेश में लागू किया जा रहा है। पहले चरण के तहत 1 जनवरी से मंत्रालय में पूरी तरह लागू किया जा चुका है। अब मंत्रालय में सभी फाइलों का मूवमेंट सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक मोड (ई-फाइल) में ही हो सकेगा। पूरी कार्रवाई पेपरलेस हो जाएगी। दूसरे चरण के तहत सभी विभाग प्रमुखों के कार्यालय और तीसरे चरण में सभी जिला स्तर के कार्यालयों को ई-ऑफिस प्रणाली में जोड़ा जाएगा। पर इसके लिए अंतिम समय तय नहीं किया गया है। इससे पहले मंत्रालय में हाईब्रिड मोड में काम किया जा रहा था। कुछ काम ई-फाइल के जरिए तो कुछ पी-फाइल (पेपर फाइल) के जरिए होते थे। अब सबकुछ ई-फाइल में तब्दील किया गया है। recent visitors 55

पारदर्शिता, तत्परता और जनकल्याणकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन का लक्ष्य होगा पूर्ण: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया ई-ऑफिस प्रणाली का शुभारंभ प्रधानमंत्री मोदी भी चाहते हैं सुशासन के लिए डिजिटाइजेशन बढ़े: मुख्यमंत्री डॉ. यादव पारदर्शिता, तत्परता और जनकल्याणकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन का लक्ष्य होगा पूर्ण: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्य सचिव कार्यालय में भी शुरू हुई ई-ऑफिस प्रणाली भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सुशासन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मध्यप्रदेश सरकार निरंतर अपनी सभी व्यवस्थाओं को ऑनलाईन करना चाहती है। डिजिटाइजेशन के माध्यम से सभी योजनाओं को बेहतर ढंग से लागू करने, विभागों का समन्वय बढ़ाने और जन कल्याण की गति तेज करने में आसानी होगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी डिजिटाइजेशन के अभियान को आज के युग में पारदर्शिता की दृष्टि से और कार्यों की तत्परता की दृष्टि से आवश्यक मानते हैं। यह सुशासन की दिशा में एक ठोस कदम है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) से ई-ऑफिस क्रियान्वयन प्रणाली का शुभारंभ करते हुए कहा कि अनेक जन हितैषी कार्यक्रमों, गरीब, महिला, किसान और युवा वर्ग के कल्याण को फोकस करते हुए मध्यप्रदेश सरकार डिजिटाइजेशन के माध्यम से आगे बढ़ना चाहती है। मुख्यमंत्री कार्यालय सहित मुख्य सचिव अनुराग जैन ने भी मुख्य सचिव कार्यालय में ई-ऑफिस प्रणाली में कार्य प्रारंभ कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आशा की कि आम जनता को ई-ऑफिस से राहत मिलेगी। विभिन्न विभागों द्वारा 1 जनवरी 2025 से समस्त नस्तियों को ई-ऑफिस के माध्यम से संचालित किए जाने का निर्णय लिया गया है। इससे विभागों के कार्य प्रचलित नस्तियों के स्थान पर ही ई-ऑफिस के माध्यम से होंगे। इसके लिए विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षित भी किया गया है। इस प्रणाली का शीघ्र ही समस्त विभागों द्वारा क्रियान्वयन हो, इस उद्देश्य से विभाग प्रक्रिया पूर्ण करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ई-ऑफिस प्रणाली की शुरूआत के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों और अमले को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। ई-ऑफिस प्रणाली के शुभारंभ अवसर पर अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय डॉ. राजेश राजौरा एवं अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।   recent visitors 53