हिन्दुत्व के विकास मॉडल पर अग्रसर मोहन सरकार
-अनुज प्रताप सिंह भाजपा संगठन के कुशल सिपाही प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यकाल का पहला वर्ष पूर्ण हो गया है। मोहन के मन में मोदी ही मोदी की लाइन पर चलते मोहन यादव मध्य प्रदेश के लिए पारस बनकर उभरे हैं। हिन्दुत्व एवं सनातन के नए चेहरे के रुप में मोहन सरकार स्थायित्व की ओर बढ़ रही है। तमाम अशंकाओं को नकारते हुए डॉ. मोहन यादव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं भाजपा आलाकमान की अपेक्षाओं पर खरे उतरे हैं। मोदी के मन में मध्यप्रदेश और मोहन के मन में मोदी की परिकल्पना डबल इंजन की मोहन सरकार के चेहरे पर साफ झलकती है। शुरुआत में यह कहा जा रहा था कि तमाम दिग्गजों के मोहन कैबिनेट में होने से मुख्यमंत्री मोहन यादव को परेशानी होगी परंतु मुख्यमंत्री ने सभी के साथ बेहतर तालमेल बिठाते हुए, सरकार का सफल संचालन कर दिखाया। केंद्रीय भाजपा संगठन से लेकर प्रदेश संगठन के साथ भी उनका बेहतर समन्वय रहा, जो उनकी असली ताकत बना। मुख्यमंत्री तमाम आयोजनों में प्रदेश भाजपा कार्यालय जाते रहते हैं। प्रदेश अध्यक्ष वी.डी. शर्मा एवं संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा तथा विधानसभ अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के साथ उनका बेहतर समन्वय रहा है। तमाम सरकारी ताम-झाम से दूर मुख्यमंत्री मोहन यादव सहज और सरलता से एक आम आदमी की तरह चलना पसंद करते हैं। उनकी साधारण मानवी की शैली ने सभी का ध्यान आर्कर्षित किया। जमीन से जुड़ कर राजनीति करने वाले डॉ. मोहन यादव ने सरकार चलाकर यह साबित कर दिया की यदि आपके इरादे सच्चे और मजबूत हैं तो आप बड़ी से बड़ी बाधा को पार कर सकते हैं। सरकार के कार्यकाल के शुरुआत में उनकी शैली से कभी-कभी ऐसा भी लगा की मुख्यमंत्री अकेले ही सरकार की गाड़ी खींच रहे हैं, परंतु समय के साथ मुख्यमंत्री के रुप में वे परिपक्व होते चले गए और आज उनकी स्वीकार्यता सभी के सामने है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के एक वर्ष के कार्यकाल की सबसे बड़ी खूबी यह रही है कि उन्होंने अपने हर भाषणा में यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र अवश्य किया है। आने वाले समय में यह भी एक रिकार्ड बनेगा कि मुख्यमंत्री के रुप में सबसे अधिक बार अपने भाषणों में प्रधानमंत्री का जिक्र करने वाले मुख्यमंत्रियों में उनका नाम पहले नंबर पर होगा। मुख्यमंत्री की यह खूबी रही है कि वे प्रधानमंत्री की उपलब्धियों को गिनाने में कोई कसर नहीं छोड़ते। वे हमेशा डबल इंजन की भांति ही सरकार चला रहे हैं, यह संदेश अवश्य देते हैं। एैसा कोई कार्यक्रम नहीं होगा जब मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी के नाम का उल्लेख ना किया हो और उनका अभिनंदन जनता से तालियां बजबाकर ना किया हो। उनका यह भाव बताता है कि वे अपने उच्च नेत्तृव के पद चिन्हो पर चल रहे हैं । उनकी सौम्यता और सहजता और अति साधारण शैली उन्हे अन्य नेताओ से अलग बनाती है। 13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठते ही डॉ. मोहन यादव ने पहला आदेश जारी कर मस्जिद एवं अन्य धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर की तेज आवाज पर अंकुश लगा दिया था, इसके तहत अगर निर्धारित डेसिबल से अधिक आवाज में लाउडस्पीकर बजाया गया तो इस पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। मुख्यमंत्री के इस कदम को चौतरफा सराहा गया और देशभर में इसकी चर्चा हुई। इसके साथ ही उन्होंने खुल में मास-मच्छी की बिक्री पर भी प्रतिबंध लगाया। कार्यकाल की शुरुआती अंदाज में मुख्यमंत्री ने जनता का मन मौह लिया। मुख्यमंत्री यादव अपनी कार्यशैली को लेकर लगातर चर्चा में रहे, उन्होंने ने कैबिनेट की बैठक को लेकर भी नवाचार किया और नव वर्ष 2024 की पहली बैठक जबलपुर में रखी गई थी। इसके बाद प्रदेश के बजट में भी उनकी सरकार ने परिपक्वता दिखाई, 3 लाख 65 हजार करोड़ का बजट पेश किया गया जो की अब तक का सबसे अधिक है। जन्माष्टमी, गोवर्धन पूजा को संस्कृति से जोड़कर सरकारी स्तर पर मनाने, धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना और गाय पालने वालों और गोशला में गाय चारे की राशि में बढ़ोतरी कर मुख्यमंत्री मोहन यादव हिन्दुत्व की लाइन पर आगे बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने मझे हुए खिलाड़ी के नाते ना केवल विधानसभा के अंदर अपने दल एवं सरकार का नेत्तृव किया बल्कि सभी मुद्दों पर धारा प्रवाह बोलते हुए सबके सामने रखा। इससे पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के मामले में यह कहा जाता था तथा ऐसा लगता भी था कि उनसे अच्छी सरकार कोई चला नहीं सकता, अब आगे क्या होगा। भाजपा के अंदर भी यह प्रश्न उठता था कि तमाम दिगगजों से सजी नई सरकार का नेत्तृव मोहन यादव कैसे करेंगे? शिवराज सिंह चौहान जैसी भाषण शैली का अभाव भी सामने था परंतु तमाम बातों को धीरे-धीरे मुख्यमंत्री ने समाधान कर दिया और एक साल सरकार का पूरा कर अपनी स्वीकार्यता को सिद्ध कर दिया। चाहे बात प्रशासनिक दक्षता की हो या राजनैतिक हो सभी मोर्चों पर मुख्यमंत्री ने अपनी पकड़ साबित कर दी है। मुख्यमंत्री प्रतिदिन सक्रिय रहते हैं, प्रदेश भर में वे निरंतर दौरे करते हैं, प्रतिदिन वे कार्यक्रमों और शासकीय बैठकों में शामिल होकर जनकल्याण के कार्यों को अंजाम देते नजर आते हैं। अपने पिता के देहांत के बाद भी उन्होंने राजधर्म को प्राथमिकता दी थी। भाषण शैली के मामले में भी मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पूर्व मुख्यमंत्री की कमी खलने नहीं दी है, हर विषय पर उनकी पकड़ उनकी भाषणों में दिखाई पड़ती है। भोपाल के नूतन कॉलेज में ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री का वह भाषण जिसमें उन्होंने इतिहास पर धारा प्रवाह बोलते हुए सबको हैरत में डाल दिया था, वहां जिन लोगों को लगता था कि मोहन यादव में शिवराज जैसी बात नहीं वो भी कहने लगे वाह! मान गए मोहन जी को, भाजपा के तमाम मंत्री एवं विधायक इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री का भाषण सुन एक-दूसरे का मुंह देखते नजर आए थे। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री यादव ने धर्म के आधार पर हुआ देश के विभाजन को भारतीय इतिहास का एक काला अध्याय बताया था। लोकसभा चुनाव में प्रदेश की सभी 29 सीटों पर चुनाव जीतकर मुख्यमंत्री यादव ने अपनी राजनैतिक कौशल का परिचय भाजपा नेत्तृव को दिखाया और सिद्ध किया की वे उनके निर्णय पर फिट बैठते … Read more