स्थानीय बुनकरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से अपने उत्पाद बेचने के लिए किया जा रहा है प्रशिक्षित – मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को सशक्त बनाने की दिशा में 16 दिसंबर से दिल्ली स्थित भारत मंडपम में होने वाला 'फ्लेवर्स ऑफ इंडिया कार्यक्रम' एक अद्भुत पहल है। उन्होंने कहा कि हमारे देश की समृद्ध विरासत में निहित स्थानीय खानपान, शिल्पकला और वस्त्र उद्योग की पहचान को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने की यह एक अनूठी कोशिश है। इसमें भारतीय मूल अनाजों, विशेष रूप से मिलेट्स – जिन्हें ‘अन्न’ के रूप में भी जाना जाता है,  पोषण लाभों और उनकी महत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह कदम आने वाली पीढ़ियों को हमारे पारंपरिक खानपान की ओर प्रेरित करेगा और स्वास्थ्य के प्रति एक नई जागरूकता लाएगा। केन्द्रीय खाद्य प्र-संस्करण मंत्रालय द्वारा दिल्ली के भारत मंडपम में 16 दिसम्बर को "फ्लेवर्स ऑफ इंडिया-2024" का आयोजन केन्द्रीय वस्त्र मंत्रालय, नीति आयोग, सर्व रिथु सेवा फाउंडेशन के सहयोग से किया जा रहा है। भारतीय खान-पान और परंपरागत परिधानों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने की दिशा में यह एक प्रयास है। राज्य सरकार कर रही है वोकल फॉर लोकल में प्रदेश के हर जिले की विशेषताओं को प्रोत्साहित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने वोकल फॉर लोकल के तहत अपने स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। खान-पान क्षेत्र में, प्रदेश के हर जिले की विशेषताओं को प्रोत्साहित करने के लिए स्थानीय व्यंजन महोत्सव आयोजित किए हैं। चंदेरी, भोपाल, और मालवा क्षेत्रों के खास व्यंजनों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए उन्हें फूड फेस्टिवल्स और अन्तर्राष्ट्रीय मंचों पर प्रदर्शित किया गया है। मुख्यमंत्री ने स्थानीय उत्पादों और परंपराओं को प्रोत्साहित करने का किया आव्हान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वस्त्र उद्योग में, चंदेरी और महेश्वरी जैसे पारंपरिक वस्त्रों को बढ़ावा देने के लिए हस्तशिल्प विकास योजनाएं शुरू की गई हैं। स्थानीय बुनकरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपने उत्पाद बेचने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिससे वे सीधे अपने ग्राहकों से जुड़ सकें। हमने लोकल-टू-ग्लोबल के दृष्टिकोण के साथ इंटरनेशनल टेक्सटाइल एक्सपो भी आयोजित किए हैं। फ्लेवर्स ऑफ इंडिया जैसे आयोजनों के माध्यम से, स्थानीय कारीगरों, किसानों और बुनकरों की कला और परिश्रम को राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान दिलाने में मदद मिलती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी आयोजकों को इस प्रयास के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह पहल भारतीय खानपान और वस्त्र उद्योग को एक नई ऊंचाई पर ले जाने में मदद करेगी और वोकल फॉर लोकल को एक सशक्त दिशा प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी को इस पहल में शामिल होकर अपने स्थानीय उत्पादों और परंपराओं को प्रोत्साहित करने का आहवान किया।   recent visitors 41

विश्व के पहले वाद्य यंत्र की प्रेरणा का स्रोत वर्षा की बूंद है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

तानसेन संगीत समारोह भारतीय संगीत की विरासत को जीवंत करने का माध्यम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव हमारे सभी देवी देवताओं की पहचान किसी न किसी वाद्य यंत्रों से जुड़ी है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव विश्व के पहले वाद्य यंत्र की प्रेरणा का स्रोत वर्षा की बूंद है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव ग्वालियर में बना हिन्दुस्तानी क्लासिकल संगीत का विश्व रिकार्ड गिनिज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज हुई 546 कलाकारों द्वारा 9 वाद्य यंत्रों पर दी गई वृहद समवेत वाद्य यंत्र प्रस्तुति वायलेन, हारमोनियम, सारंगी, बांसुरी, सरोद, संतूर, शहनाई, पखावज, तबले पर शास्त्रीय बैंड द्वारा दी गई प्रस्तुति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्वालियर में किया तानसेन संगीत समारोह 2024 का शुभारंभ ग्वालियर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तानसेन संगीत समारोह 2024 के शुभारंभ और वृहद समवेत वाद्य यंत्र प्रस्तुति में हिन्दुस्तानी क्लासिकल बैंड द्वारा बनाए गए गिनिस बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में सहभागी कलाकारों को इस उपलब्धि के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि तानसेन संगीत समारोह और विश्व रिकार्ड की यह उपलब्धि संगीत सम्राट तानसेन, महारानी लक्ष्मी बाई, महादजी सिंधिया, स्व. राजमाता सिंधिया और जैन तीर्थंकर सहित भारतीय संस्कृति में विद्यमान संगीत की लंबी प्राचीन विरासत को जीवंत करने का माध्यम है। उल्लेखनीय है कि 546 कलाकारों द्वारा 9 वाद्य यंत्रों की मनमोहक प्रस्तुति से हिन्दुस्तान क्लासिकल संगीत का विश्व रिकार्ड बनाया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ग्वालियर में आयोजित तानसेन संगीत समारोह 2024 एवं वृहद समवेत वाद्य यंत्र प्रस्तुति का शुभारंभ कर संबोधित कर रहे थे। ग्वालियर संगीत सम्राट तानसेन की साधना स्थली और ख्याल गायकी का रहा उद्गम स्थल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि ग्वालियर संगीत सम्राट तानसेन की साधना स्थली और ख्याल गायकी का उद्गम स्थल रहा है। राजा मानसिंह तोमर से लेकर सिंधिया घराने तक संगीत की विरासत को सहजने के यहां हर संभव प्रयास हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संगीत सग्राट तानसेन के 100वें उत्सव के अवसर पर 9 शास्त्रीय वाद्यों क्रमश: वायलेन, हारमोनियम, सारंगी, बांसुरी, सरोद, संतूर, शहनाई, पखावज, तबले पर शास्त्रीय बैंड द्वारा दी गई प्रस्तुति के लिए कलाकारों का अभिवादन किया। विश्व का कोई भी वाद्य, भारतीय शास्त्रीय रचना से बाहर नहीं हो सकता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस चराचर जगत के रोम-रोम में संगीत है। महार्षि पतंजलि द्वारा 5 मुख्य प्राण, 5 सहायक प्राण के साथ ही उप प्राणों का भी उल्लेख किया गया है। इसमें एक उपप्राण संवेदना (सैंसेशन) है, जो संगीत से हमें जोड़ता है। रोम-रोम से संगीत की अनुभूति और जीवंतता की पहचान होती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा धनुधारी वीर अर्जुन को दिखाए गए विराट स्वरूप का उल्लेख करते हुए कहा कि रोम-रोम के माध्यम से जीवन की चेतना आती है। शास्त्रीय संगीत की साधना व्यक्ति के रोम-रोम को पुल्कित करती है। भारतीय संस्कृति में शास्त्रीय वाद्यों के आधार पर प्रकृति से तालमेल बनाने की परम्परा आरंभ की गई। विश्व का कोई भी वाद्य, शास्त्रीय रचना से बाहर नहीं हो सकता, यह भारतीय शास्त्रीय संगीत की विशेषता है। भारतीय संगीत परम्परा सभी से तालमेल कर आनंद की यात्रा को आगे बढ़ाने में हमें सक्षम बनाती है। महादेव के लिए डमरू और भगवान श्रीकृष्ण के लिए बांसुरी आनंद का स्रोत रहे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे सभी देवी देवताओं की पहचान किसी न किसी वाद्य यंत्रों से जुड़ी है। विश्व के पहले वाद्य यंत्र की प्रेरणा का स्रोत वर्षा की बूंद है। तालाब या नदी में पहली बार पड़ने वाली पानी की बूंद की ध्वनि डमरू की ध्वनि से जुड़ती है। इसी का परिणाम है कि डमरू विश्व का पहला वाद्य यंत्र है जो भगवान शिव से जुड़ा है। भगवान श्रीकृष्ण के लिए बांसुरी, आनंद का स्रोत है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर तानसेन संगीत समारोह का शुभारंभ किया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, जल संसाधन मंत्री तथा ग्वालियर के प्रभारी तुलसीराम सिलावट, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, संस्कृति एवं पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र सिंह लोधी, सांसद भारत सिंह कुशवाह, प्रमुख सचिव संस्कृति एवं पर्यटन शिव शेखर शुक्ला सहित बड़ी संख्या में संगीत प्रेमी उपस्थित रहे। सुरों की साधना को समर्पित 9 मिनट तक शास्त्रीय वाद्यों का वादन सुरों की साधना को समर्पित समवेत प्रस्तुति में देश और प्रदेश के 546 कलाकारों ने 9 शास्त्रीय वाद्य यंत्रों का वादन एक साथ किया। समवेत प्रस्तुति के माध्यम से स्वर सम्राट तानसेन को स्वरांजली अर्पित की गई। यह प्रस्तुति तानसेन रचित तीन राग जिनमें मल्हार, मियां की तोड़ी एवं दरबारी कान्हड़ा में निबद्ध थी। इस प्रस्तुति का संयोजन सुप्रसिद्ध बांसुरी वादक पंडित रोनू मजूमदार ने किया। समवेत प्रस्तुति में वाद्य यंत्रों के साथ ही गायन भी शामिल था। निरन्तर 9 मिनट तक वाद्यों का वादन करने पर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड रचा गया। विगत वर्ष ताल दरबार से रचा था इतिहास विगत वर्ष संगीत सम्राट तानसेन की नगरी ग्वालियर में अपराजेय भारतीयता के विश्व गान राष्ट्रगीत वंदे-मातरम की धुन पर "ताल दरबार" ने मध्यप्रदेश के संगीत को एक वैश्विक पहचान दिलाई थी। यूनेस्को द्वारा चयनित संगीत नगरी में राष्ट्रीयता का उद्घोष करते हुए 1500 से अधिक संगीत साधकों ने प्रदेश की ऐतिहासिकता, सांस्कृतिकता और संगीत की त्रिवेणी को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराया था।   recent visitors 25

प्रधानमंत्री मोदी ने कलाकारों के मान-सम्मान की प्रेरणादायी परंपरा कायम की : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

ग्वालियर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि संगीतधानी ग्वालियर की उत्सवधर्मिता की देश भर में विशेष पहचान है। साथ ही संगीत और कलाओं का प्रोत्साहन एवं कलाकारों का मान-सम्मान बढ़ाने की यहाँ की रिवायत भी अद्वितीय है। इस धरा पर जन्मे तानसेन और बैजू बावरा जैसे महान संगीतज्ञों को वर्तमान संगीत साधक भगवान की तरह पूजते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ग्वालियर में आयोजित हो रहे 100वें “तानसेन संगीत समारोह” के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि संगीत शिरोमणि तानसेन की स्मृति में आयोजित हो रहे शताब्दी आयोजन में शामिल होकर मुझे विशेष खुशी की अनुभूति हुई है। रविवार की सांध्य बेला में तानसेन समाधि परिसर में महेश्वर के ऐतिहासिक किला की थीम पर बने भव्य एवं आकर्षक मंच पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में देश एवं दुनिया के सर्वाधिक प्रतिष्ठित महोत्सव “तानसेन समारोह” का केन्द्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया व विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर तथा अन्य जनप्रतिनिधिगणों के साथ दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारंभ किया। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी अतिथियों के साथ सुर सम्राट तानसेन की समाधि पर पहुँचकर उन्हें नमन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि तानसेन समारोह के शताब्दी आयोजन में अपने देश के संगीत के शीर्षस्थ साधकों के साथ चार अन्य देशों के संगीत कलाकार सुर सम्राट तानसेन को स्वरांजलि देने आए हैं। मध्यप्रदेश सरकार देश और विदेश के सभी कलाकारों का अभिनंदन करती है। उन्होंने कहा कि ग्वालियर संगीत एवं कला की अद्भुत नगरी है। मेरा सौभाग्य है कि यहाँ महान संगीतज्ञ तानसेन की याद में आयोजित होने वाले संगीत समारोह में दो बार आने का मुझे मौका मिला। पिछली बार जब मैं आया था तब ग्वालियर दुर्ग पर ताल दरबार के वृहद आयोजन से गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बना था। इसी तरह इस बार कला साधकों ने वाद्य यंत्रों का समवेत वादन कर विश्व रिकॉर्ड बनाया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कलाकारों के मान-सम्मान की प्रेरणादायी परंपरा कायम की मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र और राज्य सरकार कलाकारों के मान-सम्मान का पूरा ध्यान रख रहीं हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी भारत रत्न स्वर कोकिला लता मंगेशकर के निधन पर पैदल चलकर श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुँचे थे। उन्होंने कलाकारों के मान-सम्मान की जो प्रेरणादायी परंपरा कायम की है, प्रदेश सरकार उसका पूरा ध्यान रख रही है। प्रकृति से तालमेल बिठाने की क्षमता रखता है संगीत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शास्त्रीय संगीत के राग प्रकृति से तालमेल बिठा लेते हैं। साथ ही संसार के सभी प्राणियों से संगीत संवाद स्थापित करने में सक्षम होता है। भगवान श्रीकृष्ण के बांसुरी वादन से सम्पूर्ण गौधन का एकत्रित हो जाना इस बात का प्रमाण है। इसी तरह संगीत सम्राट तानसेन ने राग मल्हार के जरिए बरसात कराकर साबित किया कि राग प्रकृति से तालमेल बिठाने में सक्षम है। ग्वालियर को संगीत हब बनाने के लिये हर संभव प्रयास किए जायेंगे – केन्द्रीय मंत्री सिंधिया केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि संगीत के क्षेत्र में ग्वालियर के लिये यह वर्ष अलौकिक वर्ष है। वर्ष 1924 में सिंधिया राज्यकाल में शुरू हुए तानसेन समारोह का इस साल शताब्दी वर्ष है। यह वर्ष ग्वालियर के इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जायेगा। उन्होंने कहा कि ग्वालियर की पहचान संगीत के शहर के रूप में होती है। ग्वालियर को संगीत का हब बनाने का काम मुख्यमंत्री डॉ. यादव के सहयोग से हम सब लोगों द्वारा मिलजुलकर किया जायेगा। सिंधिया ने तानसेन समारोह की तर्ज पर बैजू बावरा की स्मृति में चंदेरी संगीत महोत्सव को भव्य बनाने का आग्रह मुख्यमंत्री डॉ. यादव से किया। प्रदेश में हो रहे सांस्कृतिक अभ्युदय के प्रयास सराहनीय – विधानसभा अध्यक्ष तोमर विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि खुशी की बात है राज्य सरकार द्वारा सांस्कृतिक अभ्युदय का काम समूचे प्रदेश में किया जा रहा है। ग्वालियर में तानसेन समारोह के विस्तार के रूप में पिछले साल ताल दरबार और इस साल वृहद शास्त्रीय बैंड की समवेत प्रस्तुति का आयोजन इसका उदाहरण है। इन दोनों आयोजनों से गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बना है, जिससे ग्वालियर की ख्याति संगीत के क्षेत्र में दुनियाभर में और बढ़ी है। उन्होंने इसके लिये मुख्यमंत्री एवं संस्कृति विभाग के प्रति ग्वालियरवासियों की ओर से आभार जताया। साथ ही कहा कि महाराजा मानसिंह तोमर के राज्यकाल में संगीत और कलाओं को आश्रय देने का जो सिलसिला शुरू हुआ उसे महादजी सिंधिया से लेकर सम्पूर्ण सिंधिया राज्यकाल में पूरी शिद्दत के साथ आगे बढ़ाया गया। वर्तमान में प्रदेश सरकार भी संगीत एवं कलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन में जुटी है। 100वें तानसेन समारोह के उपलक्ष्य में डाक टिकिट का विमोचन तानसेन समारोह के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में डाक विभाग द्वारा पाँच रूपए का डाक टिकिट जारी किया गया है। तानसेन समारोह के उदघाटन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं अन्य अतिथियों ने इस डाक टिकिट का विमोचन किया। तानसेन समारोह की 100 वर्षीय यात्रा पर केन्द्रित पुस्तक और स्मारिका का किया विमोचन मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं अन्य अतिथियों ने तानसेन समारोह की 100 वर्षीय यात्रा पर केन्द्रित पुस्तक और इस साल के आयोजन पर तैयार की गई स्मारिका का विमोचन भी किया। कार्यक्रम के अंत में संस्कृति एवं पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र सिंह लोधी ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।     recent visitors 31

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजनाएं सरकार के अथक प्रयासों का परिणाम

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजनाएं सरकार के अथक प्रयासों का परिणाम हैं। इन महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय परियोजनाओं के लिए गत 20 वर्षों से निरंतर प्रयास किया जा रहे थे। यह प्रदेश के लिए अत्यंत सौभाग्य का विषय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इन परियोजनाओं को स्वीकृत किया और वे स्वयं इनका शिलान्यास करने आ रहे हैं। इन परियोजनाओं से बुंदेलखंड और मालवा क्षेत्र की तस्वीर एवं तकदीर बदलेगी। सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र में इनसे बड़ा परिवर्तन आएगा। प्रधानमंत्री मोदी केन-बेतवा लिंक परियोजना का शिलान्यास 25 दिसंबर को खजुराहो, छतरपुर में आयोजित कार्यक्रम में और पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना का शिलान्यास जयपुर (राजस्थान) में करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम की तैयारी की समीक्षा की। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, अपर मुख्य सचिव जल संसाधन डॉ. राजेश राजौरा एवं सभी संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। परियोजना से जुड़े संभागों के आयुक्त तथा जिलों के कलेक्टर्स वीडियो कॉफ्रेंस के माध्यम से शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश में सबसे ज्यादा नदियां मध्यप्रदेश में हैं और यहां अपार जल राशि भी है। हमें इसका अधिक से अधिक उपयोग किसानों के हित में करना है। उन्होंने कहा कि 2 बड़ी राष्ट्रीय परियोजनाओं में मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी होना बहुत बड़ी उपलब्धि है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जन-जन तक जल के महत्व और सदुपयोग का संदेश जाना चाहिए। गांव-गांव में किसान सम्मेलन हों, कलश यात्रा निकाली जाएं, प्रभात फेरिया हों, भजन मंडलियां और लोक कलाकार प्रस्तुतियां दें, विद्यालय और महाविद्यालय में चित्रकला, निबंध, वाद-विवाद प्रतियोगिताएं हों। कार्यक्रमों में जन-प्रतिनिधि, स्व-सहायता समूह और समाज सेवी संगठन की सहभागिता हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नदी जोड़ो की राष्ट्रीय परियोजनाओं के साथ ही राज्य के भीतर भी नदियों को जोड़ने का कार्य निरंतर किया जाएगा। उज्जैन में कान्ह नदी को 20 किलोमीटर डक्ट बनाकर गंभीर नदी से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। सीवरखेड़ी- सिलारखेड़ी परियोजना भी प्रारंभ हो रही है। हम निरंतर जल की दृष्टि से प्रदेश को समृद्ध बनाएंगे। हर खेत तक सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना हमारा संकल्प है। जल संसाधन मंत्री सिलावट ने बताया कि संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना से प्रदेश के मालवा और चंबल क्षेत्र में 6 लाख 13 हजार 520 हेक्टेयर में सिंचाई होगी और 40 लाख की आबादी को पेयजल उपलब्ध होगा। इसके अतिरिक्त लगभग 60 वर्ष पुरानी चंबल दाईं मुख्य नहर एवं वितरण-तंत्र प्रणाली के आधुनिकीकरण कार्य से भिंड, मुरैना एवं श्योपुर जिलों के 1205 ग्रामों में 3 लाख 62 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में कृषकों की मांग अनुसार पानी उपलब्ध कराया जाएगा। परियोजना से प्रदेश के गुना, मुरैना, शिवपुरी, भिंड, श्योपुर, उज्जैन सीहोर, मंदसौर, इंदौर, देवास, आगर मालवा, शाजापुर और राजगढ़ जिलों के 3217 ग्रामों को लाभ मिलेगा। केन-बेतवा लिंक परियोजना के अंतर्गत दौधन ग्राम में बांध का निर्माण कर केन नदी के जल को 221 किलोमीटर लंबी लिंक कैनाल के द्वारा मार्ग में दोनों ओर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराते हुए अधिशेष जल को बेतवा नदी में छोड़ा जाएगा। परियोजना से प्रदेश के कुल 8 लाख 11 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा प्राप्त होगी। इससे छतरपुर, पन्ना, दमोह, टीकमगढ़, शिवपुरी, निवाड़ी, दतिया रायसेन, विदिशा और सागर जिलों के लगभग 2013 ग्राम लाभान्वित होंगे। परियोजना से प्रदेश की 44 लाख आबादी को पेयजल की सुविधा प्राप्त होगी और 103 मेगावॉट जल विद्युत एवं 27 मेगावाट सोलर विद्युत का उत्पादन भी किया जाएगा। अपर मुख्य सचिव डॉ. राजौरा ने बताया कि परियोजनाओं के लिए जन-जागरण अभियान 25 दिसंबर तक चलाया जाएगा। अभियान के दौरान ग्रामों में कलश-यात्रा एवं प्रभात फेरियां निकाली जाएंगी, किसान सम्मेलन, जल के महत्व को बताते हुए नुक्कड़ नाटक भजन, सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। शैक्षिक संस्थानों में भी जल-संरक्षण और संवर्धन से संबंधित विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। परियोजनाओं के भूमि-पूजन शिलान्यास कार्यक्रमों का सभी ग्राम पंचायत में सीधा प्रसारण भी किया जाएगा।   recent visitors 71

गायिका सुस्वस्ति मेहुल ने भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन और सुदामा-कृष्ण की मैत्री पर केन्द्रित लोकप्रिय भजन सुनाए

विरासत के साथ विकास के सिद्धांत पर कार्य कर मध्यप्रदेश को बनाएंगे समृद्ध: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश में प्रकृति, संस्कृति और विकास का अद्भुत समन्वय: अभिनेता रणदीप हुड्डा गायिका सुस्वस्ति मेहुल ने भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन और सुदामा-कृष्ण की मैत्री पर केन्द्रित लोकप्रिय भजन सुनाए "मध्यप्रदेश : स्वर की समता नृत्य-नाटिका" का हुआ मंचन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश की समृद्धि की दिशा में केन-बेतवा लिंक और पार्वती-काली सिंध-चंबल परियोजनाएं मील का पत्थर सिद्ध होंगी। मध्यप्रदेश सरकार विरासत के साथ विकास में विश्वास रखते हुए नागरिकों का जीवन समृद्ध बनाने के लिए सक्रियता से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार रवीन्द्र भवन सभागार में "कलाओं की विविधता का उत्सव : विरासत" को संबोधित कर रहे थे। प्रारंभ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रवीन्द्र भवन में "कलाओं की विविधता का उत्सव "विरासत" का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर विरासत कार्यक्रम में प्रस्तुति देने आए कलाकारों को सम्मानित किया और संस्कृति विभाग द्वारा प्रकाशित विभिन्न पुस्तकों का विमोचन किया। कार्यक्रम में खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, भोपाल महापौर श्रीमती मालती राय, सभापति भोपाल नगर निगम किशन सूर्यवंशी, विधायक भगवानदास सबनानी, सुमित पचौरी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड और चंबल अंचल के साथ ही मालवा क्षेत्र में समृद्धि लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 2 महत्वपूर्ण नदी जोड़ो परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इन परियोजनाओं में से पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना का शिलान्यास आगामी 17 दिसम्बर को जयपुर में और केन-बेतवा परियोजना का 25 दिसम्बर को खजुराहो (छतरपुर) में होने जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने इन कार्यक्रमों में आने की सहमति दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री भारत रतन स्व. अटल बिहारी वाजपेई ने नदी जोड़ो परियोजना का स्वप्न देखा था। इसे साकार करने का अवसर प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार और साथ ही मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तरप्रदेश 3 राज्य सरकारों को मिला है। यह पूर्व प्रधानमंत्री स्व. वाजपेई की जयंती का 100वां वर्ष है। स्व. वाजपेई के जन्म के 100वें वर्ष में इन परियोजनाओं का शिलान्यास इस माह किया जाना पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेई को संपूर्ण राष्ट्र की आदरांजलि भी है। मध्यप्रदेश के बड़े इलाके को सिंचाई और पेयजल का लाभ मिलेगा। जब पानी की उपलब्धता पर्याप्त हो तो, कार्य के लिए पलायन की प्रवृत्तियां भी थम जाती हैं। प्रधानमंत्री मोदी की निर्धनों, किसानों, महिलाओं और युवाओं के कल्याण की प्राथमिकता के अनुसार मध्यप्रदेश सरकार ने इन क्षेत्रों में योजनाओं के क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया है। युवाओं के स्वप्न सच करने के लिए, उन्हें हुनरमंद बनाने के लिए और राष्ट्र की प्रगति में बेहतर योगदान देने के लिए मध्यप्रदेश सरकार गतिशील रहेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी एक ऐसे राजनेता हैं, जिन्होंने 50 वर्ष की आयु तक कोई चुनाव नहीं लड़ा था। इस आयु के पश्चात उन्होंने 3 बार गुजरात के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री के रूप में विकास के नए आयाम रचे हैं। उन्होंने केन्द्र में एक‍दल के बलबूते पर सरकार बनाने में सफलता अर्जित की है। प्रधानमंत्री मोदी ने प्रत्येक वर्ग के कल्याण की चिंता की है। मध्यप्रदेश जो गत दशक में कृषि के विकास, अधोसंरचना विकास की दृष्टि से आगे बढ़ा है, अब महत्वपूर्ण परियोजनाओं के माध्यम से समृद्धि के नए आयाम स्थापित करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में उपस्थित अभिनेता रणदीप हुड्डा का उल्लेख करते हुए उनकी अभिनय प्रतिभा की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रणदीप हुड्डा ने अभिनय का मार्ग चुना और वीर सावरकर के चरित्र को परदे पर प्रभावशाली ढंग से निभाया। वीर सावरकर जी के इस योगदान को सिनेमा के माध्यम से राष्ट्र के सम्मुख लाना प्रशंसनीय है। कार्यक्रम में रणदीप हुड्डा ने कहा कि वे मध्यप्रदेश में प्रकृति, संस्कृति और विकास का अद्भुत समन्वय देखकर प्रसन्न हुए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी जन्मभूमि हरियाणा और कर्मभूमि मुम्बई है, लेकिन वे भगवान श्रीकृष्ण के मध्यप्रदेश में शिक्षा ग्रहण करने के ऐतिहासिक तथ्य और वर्तमान में पर्यटन एवं वन्य जीव संरक्षण में प्रदेश की प्रगति के कारण इसे सुकून-भूमि मानते हैं। उन्होंने मध्यप्रदेश में फिल्म संस्थान एवं फिल्म सिटी के विकास की संभावनाओं को साकार करने का आग्रह किया। हुड्डा ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को मध्यप्रदेश में प्रकृति, संस्कृति और विकास के शानदार तालमेल के लिए उनकी महत्वूपर्ण भूमिका के लिए बधाई दी। विरासत कार्यक्रम में सुस्वस्ति मेहुल, मुंबई ने अपने कलाकार दल के साथ लोकप्रिय भजन मेरी झोपड़ी के भाग्य आज खुल जाएंगे राम आयेंगे… प्रस्तुत किया। सुस्वस्ति मेहुल ने भगवान कृष्ण की स्तुति में भी कर्णप्रिय भजन प्रस्तुत किए। उन्होंने कृष्ण-सुदामा की मैत्री की थीम पर भजनों की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। "मध्यप्रदेश : स्वर की समता नृत्य नाटिका" की मनमोहक प्रस्तुति सुजयलक्ष्मी ईश्वर नई दिल्ली के निर्देशन में कलाकार दल द्वारा दी गई। कार्यक्रम में कलाकार दल ने मध्यप्रदेश के प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों पर केन्द्रित विशेष नृत्य-गीत कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी कलाकारों की प्रस्तुति की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर गौ एवं गौपाल तथा श्रीमद्भागवत पुराण आधारित चित्र प्रदर्शनी देखी। संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव शिव शेखर शुक्ला ने अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्कृति और पर्यटन विभाग की गतिविधियों का विवरण दिया। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश गान भी प्रस्तुत किया गया।   recent visitors 64

प्रधानमंत्री मोदी 25 दिसंबर को मप्र में केन-बेतवा नदी जोड़ो project की आधारशिला रखेंगे

भोपाल  मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बृहस्पतिवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 25 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती मौके पर मध्यप्रदेश में केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना की आधारशिला रखेंगे।  यादव ने कहा, "देश की नदियों के जल संसाधनों को बढ़ाने के लिए नदियों को जोड़ने का सपना देखने वाले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 100वीं जयंती पर प्रधानमंत्री मोदी 25 दिसंबर को मप्र के छतरपुर जिले में महत्वाकांक्षी केन-बेतवा राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना की आधारशिला रखेंगे।" इन जिलों को मिलेगा लाभ उन्होंने कहा कि केन और बेतवा नदियों को जोड़ने की परियोजना से राज्य के छतरपुर, पन्ना, टीकमगढ़, निवाड़ी, दमोह, शिवपुरी, दतिया, रायसेन, विदिशा और सागर जिलों को लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे मध्यप्रदेश (8.11 लाख हेक्टेयर) और उत्तर प्रदेश (2.51 लाख हेक्टेयर) में फैले बुंदेलखंड क्षेत्र में 10.62 लाख हेक्टेयर में सिंचाई के लिए पानी मिलेगा, साथ ही मध्यप्रदेश में 41 लाख और उत्तर प्रदेश में 21 लाख लोगों को पीने का पानी मिलेगा। यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश ने पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजना को भी लागू करने का फैसला किया है, जिससे राज्य के गुना, शिवपुरी, सीहोर, देवास, राजगढ़, उज्जैन, आगर-मालवा, इंदौर, शाजापुर, मंदसौर और मुरैना जिलों को लाभ मिलेगा। यादव ने कहा कि इस परियोजना से मध्यप्रदेश में 6.13 लाख हेक्टेयर में सिंचाई के लिए पानी मिलेगा और प्रधानमंत्री मोदी 17 दिसंबर को जयपुर में इसकी आधारशिला रखेंगे। यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश 2025 को 'उद्योग वर्ष' के रूप में मनाएगा और मोदी 24-25 फरवरी को भोपाल में आयोजित होने वाले वैश्विक निवेशक सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। उन्होंने कहा कि निवेशकों के सम्मेलन से पहले राज्य सरकार मध्यप्रदेश में क्षेत्रीय उद्योग सम्मेलन आयोजित कर रही है और राज्य तथा विदेश में रोड शो तथा सम्मेलन आयोजित कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन संयुक्त प्रयासों के कारण राज्य को चार लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिससे तीन लाख रोजगार सृजित होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार के एक वर्ष पूरे होने पर उनके प्रशासन के विकास कार्यों को उजागर करने तथा अधिक पात्र लोगों को कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए दो कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। दिसंबर और जनवरी में 'जनकल्याण पर्व' तथा 'मुख्यमंत्री जनकल्याण अभियान' चलाया जाएगा। दिसंबर में कई परियोजनाओं का लोकार्पण मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य की लोकप्रिय 'लाडली बहना' योजना के तहत 1.29 करोड़ महिलाओं को 19,212 करोड़ रुपये दिए गए हैं। सरकार ने 1,450 किलोमीटर लंबे 'राम वन गमन पथ' के अलावा भगवान कृष्ण से जुड़े सभी स्थानों को जोड़कर 'श्रीकृष्ण पथ' विकसित करने का भी फैसला किया है, जिसमें संदीपनी आश्रम, नारायण गांव, उज्जैन, जानापाव (इंदौर) और अमझेरा (धार) शामिल हैं। कार्यक्रम को मध्यप्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा और उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ला ने भी संबोधित किया। recent visitors 60

हीरा पॉलिसिंग एवं कटिंग से होगा रोजगार सृजित, रूकेगा पलायन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

अलीराजपुर के हर गाँव तक पहुंचेगा नर्मदा मैया का जल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने किया सोंडवा माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना का भूमि-पूजन हीरा पॉलिसिंग एवं कटिंग से होगा रोजगार सृजित, रूकेगा पलायन  : मुख्यमंत्री डॉ. यादव भगोरिया के नृत्य एवं ढोलक की थाप देवताओं को भी करती है आकर्षित अगले वर्ष विश्व प्रसिद्ध भगोरिया मेले में सम्मिलित होने का करेंगे प्रयास भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सोंडवा माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना क्षेत्र में सिंचाई के लिये महत्वपूर्ण साबित होगी। इससे किसानों को सिंचाई के लिये पर्याप्त जल मिलेगा। छकतला में हीरा पॉलिसिंग एवं कटिंग का कार्य होने से क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। इससे अन्य क्षेत्रों में रोजगार के लिये होने वाला पलायन भी रूकेगा। उन्होंने कहा कि सोंडवा क्षेत्र के 169 गाँवों के लिये शीघ्र ही नर्मदा जल भी उपलब्ध होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव अलीराजपुर जिले के छकतला में 1732.45 करोड़ की लागत की सोंडवा माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना के भूमि-पूजन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, मथवाड़ हाई स्कूल से हॉयर सेकेंडरी उन्नयन एवं कट्ठीवाड़ा से सोंडवा से लेकर कुल 13 सड़कों के निर्माण को मंच से ही स्वीकृति प्रदान की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सोंडवा सिंचाई परियोजना से क्षेत्र को एक से अधिक उपज देने में मदद मिलेगी। जिससे आर्थिक सशक्तिकरण के द्वार खुलेंगे। रोजगार की तलाश में अन्य क्षेत्रों में होने वाले पलायन को रोकने में भी इस परियोजना से मदद मिलेगी। सोंडवा परियोजना से पानी की कमी की समस्या भी दूर होगी। आज का दिन अलीराजपुर जिले के लिये एतिहासिक दिन है। आज छकतला में 15.14 करोड़ रूपये छकतला हीरा पॉलिसिंग एवं कटिंग कार्य की परियोजना का भूमि-पूजन किया गया है। इससे भी युवाओं के लिये रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। अलीराजपुर के युवा भी हीरा तराशने का कार्य कर सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि क्षेत्रवासियों को मिली सौगात से उत्साहित लोगों को देखकर ऐसा लग रहा है जैसे भगोरिया का पर्व मन रहा है। उन्होंने कहा कि भगोरिया के नृत्य एवं ढोलक की थाप देवताओं को भी आकर्षित करती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यहां का भगोरिया पर्व विश्व प्रसिद्ध है। वे अगले वर्ष इसमें शामिल होने का प्रयास करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सोंडवा माइक्रो उदवहन सिंचाई परियोजना से जिले के 169 गाँव की 55013 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। इससे आर्थिक समृद्धि भी आएगी, आमजन का जीवन सुधरेगा, लोगों जीने का अंदाज बदलेगा और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अलीराजपुर कलेक्टर को बिजली की आवश्यकता का सर्वे का प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि प्रतिवेदन की समीक्षा कर आवश्यकता अनुसार बिजली उपलब्ध कराया जाना सुनिश्चित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हाल ही में गीता जयंती का भी आयोजन किया गया। इसके साथ ही 11 दिसम्बर से 26 दिसम्बर तक पूरे प्रदेश में जन कल्याण पर्व एवं 11 दिसम्बर से 26 जनवरी 2025 तक जन कल्याण अभियान आयोजित किया जाएगा। इसमें 76 प्रकार की योजनाएं एवं 63 प्रकार की सेवाएं नागरिकों को ग्राम ग्राम जाकर उनके घर पर उपलब्ध करवाई जाएगी। जिले में 81000 प्रधानमंत्री आवास का निर्माण हुआ है। जिले के 87000 कृषकों को 12000 रुपए की राशि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि एवं मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना में प्राप्त होती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अलीराजपुर के गौरवशाली इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि क्रांतिकारी शहीद चंद्रशेखर आजाद जिन्होंने नारा दिया किया था कि आजाद हूं, आजाद रहूंगा, ऐसी पावन धरा पर आकर स्वयं को भाग्यशाली अनुभूत कर रहा हूँ। उन्होंने क्रांतिसूर्य टंट्या मामा का जिक्र करते हुए कहा कि अंग्रेजों से धन लेकर गरीब लोगों में वितरित कर दिया करते थे। उन्होंने कहा कि टंट्या मामा के नाम पर खरगोन में विश्वविद्यालय प्रारंभ किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लाड़ली बहना योजना की हितग्राही को उद्यानिकी विभाग की पीएमएफएई योजना में ऑयल मिल के लिये 24 लाख का ऋण स्वीकृत कर चेक दीपांशु पिता अशोक थेपड़िया को सौंपा। उन्होंने गमरिया चौहान को आयुष्मान कार्ड प्रदान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर जिला प्रशासन द्वारा तैयार की गई ’जनहित के प्रयास’ कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया। इस बुक में जिले में पिछले वर्ष में किए गए नवाचारों की चित्रावली है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्वागत अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान, सांसद श्रीमती अनिता नागर सिंह चौहान, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती हजरीबाई खरत, सहित अन्य जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में क्षेत्र के नागरिक मौजूद थे।   recent visitors 71