मुख्यमंत्री इंदौर सिम्बायोसिस स्किल यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में हुए शामिल

इंदौर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आज किताबी ज्ञान भले ही पूरा हुआ हो परंतु दीक्षांत के बाद स्वाध्याय, मनन और चिंतन सतत् जारी रहना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को मंत्र दिया कि "यही समय है – सही समय है।" मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को इंदौर में सिबायोसिस स्किल यूनिवर्सिटी के छठवें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बदलते दौर में भारत में बहुत से उल्लेखनीय काम हो रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश निरंतर आगे बढ़ रहा है। हमारी नई पीढ़ी तकनीकी रूप से दक्ष बने और देश के विकास और समग्र मानव समाज के कल्याण में अपना योगदान सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इज़राइल का उदाहरण देते हुए कहा कि तकनीकी ज्ञान के बल पर ही इज़राइल ने अनेक चुनौतियों से पार पाया है। हमें भी अपनी क्षमता और तकनीकी दक्षता को शिखर तक ले जाना होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नैतिकता सदा ही सर्वोपरि है। शिक्षा के साथ संस्कारों की दीक्षा भी ज़रूरी है। मुख्यमंत्री ने दीक्षांत समारोह में उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई दी और जीवन में आगे बढ़ने की शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण शिखर हैं किन्तु सिम्बायोसिस समूह जिन्होंने तकनीकी दक्षता और तकनीकी क्षेत्र में विश्वविद्यालय स्थापित किया है, यह और भी महत्वपूर्ण योगदान हो जाता है। उन्होंने प्रो. चांसलर डॉ. स्वाति मजूमदार की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अमेरिका को छोड़कर भारत में शिक्षा को अपना जीवन समर्पित किया है। प्रारंभ में सिम्बायोसिस तकनीकी विश्वविद्यालय की प्रो. चांसलर डॉ. मजूमदार ने स्वागत भाषण दिया और कुलगुरु डॉ. विनीत नायर ने संस्थान की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की।  दीक्षांत समारोह में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, डॉ. भारत शरण सिंह सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।   recent visitors 61

उज्जैन में 127 करोड़ 63 लाख रूपये लागत की इंगोरिया-उन्हेल सड़क मार्ग की स्वीकृति

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक बुधवार शाम को मंत्रालय में हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा मध्यप्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण से संबंधित स्थानों को तीर्थ के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश लोक न्यास अधिनियिम 1951 के अंतर्गत "श्रीकृष्ण पाथेय न्यास" का गठन किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गयी। स्वीकृति अनुसार भगवान श्रीकृष्ण से संबंध क्षेत्रों का साहित्यिक व सांस्कृतिक संरक्षण और संवर्धन किया जायेगा। न्यास द्वारा भगवान श्रीकृष्ण के मंदिरों एवं संरचनाओं का प्रबंधन, सांदिपनि गुरुकुल की स्थापना के लिए परामर्श, सुझाव, श्रीकृष्ण पाथेय के स्थानों का सामाजिक, आर्थिक तथा पर्यटन की दृष्टि से विकास, पुस्तकालय, संग्रहालय की स्थापना आदि गतिविधियों का क्रियान्वयन किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गठित न्यास में कुल 28 सदस्य होंगे। इसमे 23 पदेन न्यासी सदस्य तथा 5 ख्याति प्राप्त विद्वत सदस्य, अशासकीय न्यासी सदस्य के रूप में नामांकित होंगे। अशासकीय न्यासी सदस्यों का कार्यकाल अधिकतम 3 वर्ष होगा। "श्रीकृष्ण पाथेय न्यास" का मुख्यालय भोपाल होगा। इसके लिये 6 पद सृजित किये जायेंगे। श्रीकृष्ण पाथेय न्यास अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिये शासन अथवा अन्य स्त्रोतों से अनुदान एवं दान प्राप्त कर सकता है। न्यास के संचालन एवं उद्देश्यों की प्राप्ति के लिये शोध-सर्वेक्षण एवं विकास कार्य के लिये आवश्यकतानुसार विशेषज्ञ समितियों का गठन किया जा सकेगा। न्यास के लिए श्रीकृष्ण पाथेय न्यास विलेख तैयार किया जायेगा। विलेख मे न्यास के अधिकार, कार्यकारी समिति, सदस्यों, कार्यकारी समिति के अधिकार, न्यासी सचिव के अधिकार, मुख्य कार्यपालक अधिकारी के अधिकार, न्यास के लेखे एवं अंकेक्षण एवं न्यास के कार्यक्षेत्र एवं सीमा से संबंधित विषयों का विस्तारपूर्वक वर्णन होगा। श्रीकृष्ण पाथेय न्यास के उद्देश्यों में मध्यप्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण के चरण जहाँ-जहाँ पड़े उन स्थानों को तीर्थ के रुप में विकसित तथा संरक्षित करना और हमारी सामाजिक संस्कृति की गौरवशाली परम्परा के महत्व को समझने के लिए सम्बन्धित क्षेत्रों का प्रलेखन (डाक्युमेंटेशन), अभिलेखन (रिकॉर्डिंग), छायांकन, फिल्मांकन तथा चित्राकंन आदि करना शामिल है। श्रीकृष्ण पाथेय न्यास के अंतर्गत अवस्थित भगवान श्रीकृष्ण के मंदिरों एवं उनमें स्थित जल संरचनाओं, वन सम्पदा, उद्यान आदि की सुरक्षा, संरक्षण, संवर्धन एवं प्रबंधन किया जायेगा। इन धार्मिक तीर्थ स्थलों का राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जायेगा। इसके साथ ही उज्जैन में 64 कलाओं और 14 विद्याओं की विधिवत शिक्षा के लिए सांदीपनि गुरुकुल की स्थापना हेतु परामर्श, सुझाव एवं अन्य कार्यवाही की जायेगी। श्रीकृष्ण पाथेय न्यास की अवधारणा के अनुरुप शिक्षा, संस्कृति, कृषि, गौ एवं पशुधन संवर्धन की विरासत का विकास किया जायेगा। मध्यप्रदेश राज्य की सीमा में आने वाले श्रीकृष्ण पाथेय के चिन्हांकित स्थलों के अवलोकन, पुरान्वेषण तथा धार्मिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक, इतिहास आदि की दृष्टि से रचनात्मक विकास हेतु परामर्श, सुझाव एवं आवश्यकतानुसार कार्यवाही की जायेगी। युवा पीढ़ी को भगवान श्रीकृष्ण की जीवन गाथा और उज्जैन को केन्द्र में रखकर की गई उनकी यात्राओं की महत्ता से अवगत कराते हुए गंतव्य स्थलों के साथ भावनात्मक एवं अनुभवात्मक रूप से जोड़ने की योजनाएँ परिकल्पित करना तथा भगवान श्रीकृष्ण से संबंधित सांस्कृतिक एवं अन्य गतिविधियाँ आयोजित करना इसके उद्देश्यों में शामिल होगा। केन्द्र एवं राज्य शासन के सर्व संबंधित विभागों के समन्वय से श्रीकृष्ण पाथेय के स्थानों का सामाजिक, आर्थिक तथा पर्यटन की दृष्टि से विकास तथा विभिन्न निर्माण एवं अधोसंरचना का विकास किया जायेगा। साथ ही जन-सामान्य को धार्मिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक रूप से प्रबुद्ध करते हुए पर्यटकों, शोधार्थियों, युवाओं तथा सभी वर्ग के विद्यार्थियों की जानकारी के लिए पुस्तकालयों, संग्रहालयों तथा सूचना केन्द्रों की स्थापना की जायेगी। श्रीकृष्ण पाथेय न्यास द्वारा पौराणिक काल से वर्तमान समय तक भगवान श्रीकृष्ण को जगद्गुरु स्वरुप स्थापित करने में अपना योगदान प्रदान करने वाले अनेक-अनेक तेजस्वी नायकों, दार्शनिकों, मंत्रदृष्टा ऋषियों, संतों, मनीषियों, चिंतकों, कवियों, साहित्यकारों, कलाकारों, वैज्ञानिकों के अवदान का रेखाकंन एवं वाणियों का ध्वन्यांकन तथा फिल्मांकन कराया जायेगा। भगवान श्रीकृष्ण की प्रेरक कथाओं और चित्रों का चित्रांकन, उत्कीर्णन एवं शिल्पकला की विधा के माध्यम से प्रस्तुतिकरण किया जायेगा। श्रीकृष्ण पाथेय न्यास के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए भारत सरकार, राज्य सरकार, गैर शासकीय संस्थाओं, संगठनों, राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के निकायों तथा व्यक्तियों से समन्वय, सहयोग तथा सम्पर्क स्थापित कर वित्तीय एवं अन्य गतिविधियों का क्रियान्वयन किया जायेगा। साथ ही साथ श्रीकृष्ण पाथेय न्यास के अंतर्गत सभागारों, सामुदायिक केन्द्रों (कम्युनिटी सेंटर) और धर्मशालाओं का निर्माण एवं व्यवस्थापन कार्य किया जायेगा। चयनित 209 स्टॉफ नर्सों को नियुक्ति दिये जाने की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड, भोपाल (वर्तमान में मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल) द्वारा 27 जनवरी, 2022 को घोषित परीक्षा परिणाम के आधार पर स्टॉफ नर्स के पद पर चयनित 209 अभ्यार्थियों को विभाग के अधीन संचालित चिकित्सा महाविद्यालयों में वर्तमान में उपलब्ध रिक्त पदों पर नियुक्ति दिये जाने के प्रस्ताव पर स्वीकृति प्रदान की गई है। उज्जैन मे 127 करोड़ 63 लाख रूपये लागत की इंगोरिया-उन्हेल सड़क मार्ग की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने उज्जैन जिला अंतर्गत इंगोरिया-उन्हेल (लंबाई 23.71 कि.मी.) 2-लेन मय पेव्हड शोल्डर सड़क निर्माण कार्य की स्वीकृति दी है। यह सड़क 23.71 कि.मी. लंबी होगी एवं 127 करोड़ 63 लाख रूपये की लागत से म.प्र. सड़क विकास निगम के माध्यम से विकसित की जायेगी।   recent visitors 135

तानसेन समारोह का विस्तार, प्रदेश के साथ ही चार राज्यों में होंगी गतिविधियां

देश में नए उद्योगों और निवेश संवर्धन प्रयासों से सवा तीन लाख से अधिक लोगों को मिलेगा रोजगार मुख्यमंत्री डॉ यादव 24 से 29 नवंबर तक निवेश बढ़ाने करेंगे जर्मनी और यूके का दौरा तानसेन समारोह का विस्तार, प्रदेश के साथ ही चार राज्यों में होंगी गतिविधियां साबरमती रिपोर्ट के माध्यम से आया है सत्य सामने मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद की बैठक के पहले किया संबोधित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में उद्योग और निवेश संवर्धन प्रयासों से बड़ी संख्या (सवा तीन लाख) में लोगों को रोजगार मिलेगा। वर्ष 2024 में प्रदेश के विभिन्न संभागों में हुई रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव और देश के कई नगरों में हुए इंटरैक्टिव सेशन के फलस्वरुप उद्योगों के विकास का वातावरण बना है। प्रदेश में करीब 2 लाख 75 हजार करोड़ रुपए का निवेश आ रहा है। प्रदेश में वर्ष 2025 उद्योग वर्ष होगा। इस नाते इस वर्ष प्रदेश में संपन्न औद्योगिक विकास गतिविधियों का विशेष महत्व रहा। द साबरमती रिपोर्ट से आया सत्य सामने मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज "द साबरमती रिपोर्ट" की स्क्रीनिंग भोपाल में हो रही है। फिल्म से गुजरात के गोधरा में वर्ष 2002 में हुई घटना का सच सामने आया है। इस घटना का गलत प्रेजेंटेशन से भी हुआ था। आज अनेक जनप्रतिनिधि इस फिल्म को देखेंगे। मध्यप्रदेश शासन ने इस फिल्म को टैक्स फ्री किया है। तानसेन समारोह का देश भर में विस्तार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आगामी 15 से 19 दिसंबर को ग्वालियर के साथ ही प्रदेश में रीवा ,जबलपुर, गुना, दतिया, शिवपुरी, खंडवा और ओरछा में तानसेन समारोह की गतिविधियां आयोजित किए जाने की जानकारी दी। इस वर्ष प्रदेश के बाहर 4 स्थान जयपुर, बनारस, बड़ौदा और खैरागढ़ में भी तानसेन समारोह की गतिविधियां होंगी। तानसेन समारोह का देश व्यापी विस्तार हुआ है। गुजरात दौरा सार्थक रहा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आज अहमदाबाद में गुजरात सरकार के सीएम डैशबोर्ड और अन्य बेस्ट प्रैक्टिसेज ऊर्जा क्षेत्र ,नवीन प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे कार्यों के संबंध में भी जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि उनका गुजरात दौरा सार्थक रहा। चिंतन बैठक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चिंतन बैठक भी आयोजित की जाएगी। प्रदेश में चिंतन बैठक के आयोजन की तिथियां शीघ्र निर्धारित की जा रही हैं।   recent visitors 62

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने फिल्म के कलाकारों ने मुम्बई के बाद मध्यप्रदेश को बताया फिल्म जगत का प्रमुख केंद्र

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि फिल्म "द साबरमती रिपोर्ट" इतिहास  के काले अध्याय को सामने लाती है। यह फिल्म वर्ष 2002 में  गुजरात के गोधरा में हुई घटना की सत्यता को सामने लाती है। फिल्म वास्तविक तथ्यों पर फिल्माई गई है। फिल्म, उन 59 कारसेवकों के बलिदान की जानकारी देती है जिसे उस दौर में गलत बताया गया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि फिल्म को मध्यप्रदेश शासन द्वारा करमुक्त किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा प्रदेश में फिल्मांकन की दृष्टि से अनेक महत्वपूर्ण स्थान हैं। प्रदेश सरकार की नीतियां भी फिल्म उद्योग को प्रोत्साहित करने वाली हैं। फिल्म "द साबरमती रिपोर्ट" के निर्माता साधुवाद के पात्र हैं जिन्होंने इस फिल्म का निर्माण कर आज की पीढ़ी को 22 वर्ष पुरानी घटना की सच्चाई बताने का कार्य किया है। सांसद वी.डी. शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने फिल्म को टैक्स फ्री करने का सराहनीय निर्णय लिया है। फिल्म के निर्माता  अंशुल मोहन ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने फिल्म को समर्थन दिया है। इसके लिए फिल्म की पूरी यूनिट उनकी आभारी हैं। फिल्म के नायक विक्रांत मैसी ने कहा कि आने वाली पीढ़ी को इतिहास की जानकारी होना चाहिए। सुएकता कपूर ने इतिहास के महत्वपूर्ण अध्याय को सामने लाने का कार्य किया है। फिल्म की नायिका सुराशि खन्ना ने कहा कि मध्यप्रदेश में भोपाल, खजुराहो, पचमढ़ी और कई अन्य महत्वपूर्ण स्थान हैं। मध्यप्रदेश फिल्म निर्माण का महत्वपूर्ण केंद्र बन रहा है। मुम्बई के बाद मध्यप्रदेश का फिल्म जगत में अहम स्थान बन रहा है। फिल्म प्रदर्शन देखने के लिए प्रदेश सरकार के अनेक मंत्री सांसद, विधायक और नागरिक उपस्थित थे।   recent visitors 43

मुख्यमंत्री ने स्व-सहायता समूहों को किया पुरस्कृत

भोपाल राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के भारत मंडपम में 43वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में मंगलवार को "मध्यप्रदेश दिवस" का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मेले में विभिन्न विभागों से शामिल स्व-सहायता समूह, उद्यमियों व कलाकारों को पुरस्कृत किया। मध्यप्रदेश के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग अंतर्गत संचालित राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत 2 स्व-सहायता समूहों को प्रथम व द्वितीय पुरस्कार मिले। प्रथम स्थान पर धार के मांडव का रेवा स्व-सहायता समूह रहा, जिन्हें बाग प्रिंट के लिए पुरस्कार मिला। वहीं संत रविदास स्व-सहायता समूह उज्जैन को बांस से बनी हुई सामग्री एवं कलात्मक खिलौने गुड़िया के लिए द्वितीय पुरस्कार दिया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण करते हुए समूहों का उत्साहवर्धन किया। मुख्यमंत्री ने स्व-सहायता समूहों की महिलाओं से उनके अनुभव भी सुने। स्व-सहायता समूह की दीदीयों ने डॉ. यादव को समूहों के उत्पाद भी भेंट किए। इस मौके पर केंद्रीय राज्य मंत्री महिला एवं बाल विकास विभाग श्रीमती सविता ठाकुर, मध्य सूक्ष्म एवं लघु उद्योग मंत्री चेतन कॉश्यप, नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी भी उपस्थित थीं। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, आयुक्त भरत यादव व मिशन संचालक एवं अपर आयुक्त कैलाश वानखेड़े ने दीनदयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के स्व-सहायता समूहों को इस उपलब्धि पर बधाई भी दी है।   recent visitors 64

नागरिक सुविधा व जनसामान्य के जीवन स्तर में सुधार के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग का मुख्यमंत्री डैशबोर्ड एक उत्कृष्ट उदाहरण है

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सरकार के कामकाज को बेहतर बनाने और नागरिक सुविधा व जनसामान्य के जीवन स्तर में सुधार के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग का मुख्यमंत्री डैशबोर्ड एक उत्कृष्ट उदाहरण है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गांधीनगर में गुजरात सीएम डैशबोर्ड की कार्यप्रणाली का अवलोकन करने तथा उसके संचालन संबंधी जानकारी प्राप्त करने के बाद उक्त विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ई-गवर्नेंस एप्लीकेशन, वेब सर्विसेज, कॉल सेंटर, ग्राम और तालुका स्तर से डाटा कलेक्शन, डाटा इंटीग्रेशन, डाटा वैलिडेशन, परफॉर्मेंस मेजरमेंट, फीडबैक सिस्टम और फीडबैक के आधार पर हितग्राही संतुष्टि से अवगत होने के लिए स्थापित व्यवस्था की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री डैशबोर्ड पारदर्शिता बढ़ाने और वास्तविक समय में डेटा प्राप्त करने में सहायक उल्लेखनीय है कि गुजरात सीएम डैशबोर्ड एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है। यह राज्य सरकार के विभिन्न कार्यक्रमों, योजनाओं और प्रगति की निगरानी और मूल्यांकन में सहायक है। यह डैशबोर्ड राज्य के प्रशासन को पारदर्शी, प्रभावी और उत्तरदायी बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। डैशबोर्ड पर योजनाओं की निगरानी और उनकी प्रगति का आंकलन किया जाता है, इससे यह सुनिश्चित होता है कि योजनाएं समय पर और प्रभावी तरीके से लागू हो रही हैं। डैशबोर्ड पर विभिन्न सरकारी विभागों के प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों को ट्रैक भी किया जाता है, यह संकेतक राज्य के विकास और प्रशासन की गति को मापने में सहायक हैं। डैशबोर्ड पारदर्शिता को भी बढ़ावा देने और वास्तविक समय में डेटा प्राप्त करने में सहायक है। डैशबोर्ड स्थानीय प्रशासन, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क निर्माण व अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सुधार और बेहतर प्रदर्शन में भी सहायक है।   recent visitors 24

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी का किया अवलोकन

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि गिफ्ट सिटी (गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी)एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, यह भारत को वैश्विक वित्तीय केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की परिकल्पना के अनुसार आकार ले रही गिफ्ट सिटी ‍निवेशकों को बेहतर अवसर प्रदान करने के साथ ही भारतीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगी। इसके माध्यम से भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक मानकों से तालमेल रखते हुए मजबूत आर्थिक शक्ति के रूप में प्रभावी रूप से गतिविधियों का संचालन करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुजरात के गांधी नगर में साबरमती नदी के किनारे स्थित भारत की पहली ग्रीनफील्ड स्मार्ट सिटी, भारत का फाइनेंशियल गेट-वे और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र 'गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी' (गिफ्ट सिटी) का अवलोकन कर अधिकारियों से चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गिफ्ट सिटी में स्वच्छता के लिए की गई व्यवस्था के संबंध में विशेष रूप से जानकारी प्राप्त करते हुए ऑटोमेटेड गारबेज एंड वेस्ट कलेक्शन सिस्टम और वेस्ट टनल का अवलोकन किया। उल्लेखनीय है कि गांधी नगर, गुजरात में स्थित गिफ्ट सिटी का पूरा नाम गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी सिटी है। अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देकर भारत को वैश्विक वित्तीय केंद्र बनाने उद्देश्य से विशेष आर्थिक क्षेत्र के रूप में स्थापित गिफ्ट सिटी को वर्ष 2007 में भारत सरकार द्वारा मंजूरी दी गई। यहां प्रमुख वित्तीय सेवाओं, जैसे बैंकिंग, बीमा, वित्तीय बाजार और तकनीकी सेवाओं के लिए आदर्श वातावरण उपलब्ध है। गिफ्ट सिटी में अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय बाजार की स्थापना की गई है, जहाँ वैश्विक निवेशक अपनी व्यापारिक गतिविधियाँ और निवेश कर सकते हैं। अत्याधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर, स्मार्ट सिटी तकनीक और हरित ऊर्जा प्रणालियों से युक्त गिफ्ट सिटी में उच्च गुणवत्ता वाले कार्यालय, आवासीय परिसर, होटल और मनोरंजन सुविधाएं उपलब्ध हैं।   recent visitors 66