भिंड के करीब 45 किलोमीटर लंबे पांच बायपास बनाए जाएंगे, नए बायपास से इन ग्रामीण क्षेत्रों को फायदा पहुंचेगा

 भिंड मध्य प्रदेश से गुजरने वाले बड़े ग्वालियर-इटावा नेशनल हाइवे पर लगातार सड़क दुर्घटनाओं बढ़ रही। इसी को देखते हुए भिंड के पास प्रशासन ने लगभग 45 किलोमीटर लंबे पांच बायपास बनाने का निर्णय लिया है। इसे अंतिम रूप देने के लिए भिंड कलेक्ट्रेट में जनप्रतिनिधियों के साथ अनुमोदन बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह, हेमंत कटारे, केशव देशाई और कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव की उपस्थिति रही। जिला पंचायत अध्यक्ष कामना सिंह भदौरिया, अपर कलेक्टर एलके पांडेय, नपा अध्यक्ष वर्षा वाल्मीक और विधायक प्रतिनिधि अरविंद बघेल सहित अन्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। बायपास के निर्माण का प्रारूप बायपास का निर्माण रेत, गिट्टी की खदानों, रेलवे लाइनों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। एलईडी स्क्रीन पर बायपास का पूरा नक्शा दिखाकर जनप्रतिनिधियों से अनुमोदन मांगा गया। हालांकि, अटेर विधायक हेमंत कटारे ने आपत्ति जताई कि उनके क्षेत्र की उपेक्षा की गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि रेत और गिट्टी की खदानें नेशनल हाइवे की बाईं ओर स्थित हैं और दूसरी तरफ रेलवे लाइनें हैं। ऐसे में अंडरपास और आरओबी बनाने से समय और लागत में बढ़ोतरी होती है। निर्माण के चरण और लागत सूत्रों के अनुसार, बायपास का निर्माण दो चरणों में किया जा सकता है। पहले चरण में 1500 करोड़ रुपये की लागत से हाईब्रिड एन्युटी मोड के तहत काम किया जाएगा। दूसरे चरण में 2500 करोड़ रुपये की लागत सामान्य प्रक्रिया के तहत होगी। कुल मिलाकर इस परियोजना पर चार हजार करोड़ रुपये का खर्च आएगा। कहां बनेगा कितना लंबा बायपास     भिण्ड:18 किमी     मेहगांव: 10 किमी     गोहद: 5.5 किमी     मालनपुर: 8.0 किमी     फूप: 3.0 किमी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया इन बायपासों के निर्माण के लिए लगभग 400 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। परियोजना का प्रस्ताव पहले भोपाल, फिर दिल्ली भेजा जाएगा। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी। जनप्रतिनिधियों की उम्मीद जनप्रतिनिधियों का मानना है कि इन बायपासों के बनने से न केवल दुर्घटनाओं में कमी आएगी बल्कि आवागमन भी सुगम होगा। क्षेत्र में आर्थिक और सामाजिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। recent visitors 48

इंदौर में मास्टर प्लान की सड़कों के जल्द निर्माण के निर्देश

इंदौर  एमपी के इंदौर शहर में स्मार्ट सिटी मास्टर प्लान की 8 ऐसी सड़कों का काम करेगा जो अधूरी है या उनका काम शुरू ही नहीं हुआ है। सड़कों के निर्माण के साथ अन्य विकास कार्य भी होंगे। यह सभी काम समय सीमा में पूरे किए जाएंगे। कलेक्टर आशीष सिंह के मुताबिक  स्मार्ट सिटी की बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक हुई।  बैठक में निगम आयुक्त शिवम वर्मा, स्मार्ट सिटी सीईओ दिव्यांक सिंह सहित अन्य सदस्य व विभागों के अधिकारी मौजूद थे। प्रोजेक्ट चिन्हित किए गए हैं। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि बाधाओं को चिन्हित कर निराकरण कर लिया जाए। इनका निर्माण शीघ्र ही स्मार्ट सिटी के माध्यम से कराया जाएगा। बैठक में निर्देश दिए गए कि इन सड़कों का निर्माण जल्द ही प्रारंभ किया जाएगा। सड़कों में आने वाली बाधाओं को भी चिह्नित कर इनके निराकरण की समुचित व्यवस्था भी कर ली जाए। यहां होगा काम -एमआर-5 रोड, इंदौर वायर फैक्ट्री से बड़ा बांगड़दा तक। -वायर फैक्ट्री से सुपर कॉरिडोर तक स्टॉर्म वाटरलाइन डालने का कार्य। -नेमावर रोड-पालदा तिराहा से आरई-2 आइएसबीटी होते हुए बायपास तक मास्टर प्लान सड़क का विकास कार्य। -एमआर-9 रोबोट चौराहा से बायपास एवं अनूप टॉकीज के पास सड़क। धार रोड चंदन नगर चौराहा से एयरपोर्ट रोड तक सड़क। -एमआर-3 पीपल्यापाला रीजनल पार्क से बायपास तक सड़क। -नायता मुण्डला से एमआर-10 तक आरई-2 का शेष भाग। एमआर-6 रिंग रोड से महू नाका रोड। recent visitors 44

भारतमाला घोटाले में ईओडब्ल्यू और एसीबी ने तेज की जांच, कई अधिकारियों पर दर्ज होगी FIR

 रायपुर रायपुर-विशाखापत्तनम भारतमाला रोड परियोजना में हुए घोटाले की जांच ईओडब्ल्यू और एसीबी ने तेज कर दी है। घोटाले में शामिल अधिकारियों से जल्द ही पूछताछ करने की तैयारी है। वहीं, इन पर भ्रष्टाचार के तहत अपराध भी दर्ज किया जाएगा। भारतमाला प्रोजेक्ट में सरकार की जांच में सामने आया कि 43.18 करोड़ रुपये के मुआवजे का गलत तरीके से भुगतान किया गया है। इस मामले में अब तक दो तहसीलदार समेत तीन पटवारियों पर कार्रवाई की जा चुकी है। इसके अलावा घोटाले में संलिप्त अन्य बड़े अधिकारियों को जांच के दायरे में लिया गया है। रायपुर जिले के अभनपुर में तैनात पूर्व एसडीएम निर्भय कुमार साहू पर गलत तरीके से मुआवजा देने का आरोप है। बताजा जा रहा है कि उन्होंने रायपुर-विशाखापत्तनम भारतमाला रोड परियोजना के लिए कुछ भूस्वामियों को गलत तरीके से मुआवजे का भुगतान किया है। जमीन को टुकड़ों में बांटा, 80 नए नाम चढ़ाए सूत्रों ने बताया कि मुआवजा करीब 29.5 करोड़ रुपए का होता है। अभनपुर के ग्राम नायकबांधा और उरला में भू-माफियाओं ने राजस्व अधिकारियों के साथ मिलकर जमीन को छोटे टुकड़ों में काटकर 159 खसरे में बांट दिया। मुआवजे के लिए 80 नए नाम रिकार्ड में चढ़ा दिया गया। इससे 559 मीटर जमीन की कीमत करीब 29.5 करोड़ से बढ़कर 78 करोड़ रुपए पहुंच गई। अभनपुर क्षेत्र में 9.38 किलोमीटर के लिए 324 करोड़ मुआवजा राशि निर्धारित की गई, जिसमें से 246 करोड़ रुपये मुआवजा दिया जा चुका है। वहीं, 78 करोड़ रुपये का भुगतान अभी रोक दिया गया है। पिछली तिथि में दस्तावेजों में हुई गड़बड़ी अभनपुर इलाके में पदस्थ अधिकारियों ने पिछली तिथि में जाकर दस्तावेजों में गड़बड़ी की और जमीन मालिक को नुकसान पहुंचाया। अभनपुर के ग्राम नायक बांधा और उरला में चार एकड़ जमीन जो सर्वे से पहले एक परिवार के पास थी। वो सर्वे होने के ठीक कुछ दिन पहले एक ही परिवार के 14 लोगों के नाम पर बांट दी गई। इसके बाद एक ही परिवार के सदस्यों को 70 करोड़ रुपये की मुआवजा का भुगतान कर दिया गया। जांच अधिकारियों ने तत्कालीन अफसरों की इस कार्यप्रणाली का सीधा जिक्र अपनी जांच रिपोर्ट में किया है। इन पर घोटाले में शामिल होने का आरोप तत्कालीन अनुविभागीय और सक्षम अधिकारी निर्भय कुमार साहू, तत्कालीन तहसीलदार अभनपुर शशिकांत कुर्रे, तत्कालीन नायब तहसीलदार गोबरा नवापारा लखेश्वर प्रसाद किरण, तत्कालीन हल्का पटवारी नायकबांधा जितेंद्र साहू, तत्कालीन हल्का पटवारी नायकबांधा दिनेश पटेल और तत्कालीन हल्का पटवारी टोकरो लेखराम देवांगन समेत अन्य अधिकारियों के घोटाले में शामिल होने के सुबूत मिले हैं। recent visitors 43

मध्य प्रदेश में 5 साल में बनेंगी 1 लाख KM सड़कें, शहरों से गांवों तक मिलेगी नई रफ्तार; बजट में क्या-क्या ऐलान

भोपाल मध्य प्रदेश में इस बार वित्त वर्ष 2025-26 का बजट शहरों से लेकर गांवों तक पूरे प्रदेश को नई रफ्तार देने वाला है। इसमें नई सड़कों से लेकर फ्लाईओवर बनाने तक के लिए बजट रखा गया है। राज्य के उपमुख्यमंत्री के साथ ही वित्त मंत्री का प्रभार संभाल रहे जगदीश देवड़ा ने बुधवार को विधानसभा में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 4.21 लाख करोड़ रुपयों से अधिक का बजट पेश किया। इस बार के बजट में ग्रामीणों की सुविधा के लिए मुख्यमंत्री मजरा टोला सड़क योजना प्रारंभ की जा रही है, इसके लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। वित्त मंत्री देवड़ा ने अपने बजट भाषण में कहा कि प्रदेश में अगले 5 सालों में 1 लाख किलोमीटर सड़क बनाए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसी तरह प्रदेश में आगामी 5 वर्षों में 500 रेल ओवर ब्रिज एवं फ्लाईओवर बनाए जाएंगे। इस वर्ष 3500 किलोमीटर नई सड़कें तथा 70 पुल बनाए जाने का लक्ष्य है। वहीं, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत वित्त वर्ष 2024-25 में लगभग 1 हजार किलोमीटर सड़कों के निर्माण एवं लगभग 5200 किलोमीटर सड़कों के नवीनीकरण का लक्ष्य पूर्ण होगा। 8631 गांवों को बारहमासी मार्ग से जोड़ा गया मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत अब तक 8631 गांवों को 19,472 किलोमीटर लंबाई की सड़कें बनाकर, बारहमासी मार्ग से जोड़ा जा चुका है। हालांकि, अब भी कुछ गांवों में मेन रोड से ग्राम पंचायतों में पहुंचने के लिए सड़क उपलब्ध नहीं है। अतः ग्रामवासियों को सुविधाजनक मार्ग उपलब्ध कराने के लिए नई योजना "मुख्यमंत्री मजरा-टोला सड़क योजना" प्रारंभ की जा रही है। इस योजना के लिए वर्ष 2025-26 में रुपये 100 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है। इसके अलावा एक नई योजना ‘क्षतिग्रस्त पुलों का पुनर्निर्माण योजना’ प्रारम्भ की जा रही है। इस योजना के लिए वर्ष 2025-26 में रुपये 100 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है। वहीं, सड़कों एवं पुलों के निर्माण एवं रखरखाव के लिए वर्ष 2025-26 में रुपये 16,436 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है, जो वर्ष 2024-25 से 34 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि रोड नेटवर्क, एक्सप्रेसवे, मेट्रो, एलिवेटेड कॉरिडोर जैसी अनेक परियोजनाओं के साथ प्रदेश इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में तेजी से आगे बढ़ रहा है। भोपाल, देवास, ग्वालियर, जबलपुर, सतना और इंदौर में एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण कार्य प्रगति पर हैं। उज्जैन-जावरा 4 लेन सड़क के निर्माण से उज्जैन, इंदौर एवं आसपास के क्षेत्र, दिल्ली-मुंबई 8 लेन कॉरिडोर से जुड़ जाएंगे। वहीं, 1692 करोड़ की अनुमानित लागत वाले उज्जैन-इंदौर 6 लेन रोड का भूमि पूजन हो चुका है। 116 नए रेलवे ओवरब्रिज बनाने का काम प्रगति पर देवड़ा ने कहा कि रेलवे क्रॉसिंग पर यातायात बाधित होने से समय एवं ईंधन की बर्बादी रोकने के लिए रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) एवं रेलवे अंडरब्रिज (आरयूबी) के निर्माण कार्य रेलवे के साथ मिलकर प्राथमिकता से कराए जा रहे हैं। प्रदेश में 4251 करोड़ रुपये की लागत के कुल 116 नए रेलवे ओवरब्रिज बनाने का काम प्रगति पर हैं। recent visitors 42

मुंबई-दिल्ली कॉरिडोर से जुड़ेगा उज्जैन-जावरा फोरलेन: मंत्री जगदीश देवड़ा

भोपाल मध्यप्रदेश की मोहन सरकार के द्वारा दूसरा बजट (MP Budget 2025) पेश कर दिया गया है। इस दौरान वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने मेट्रो और फोरलेन को लेकर कहा कि इंदौर-भोपाल में मेट्रो का काम जल्द शुरु किया जाएगा। साथ ही उज्जैन-जावरा फोरलेन निर्माण से इंदौर को बड़ा फायदा होगा। मुंबई-दिल्ली कॉरिडोर से जुड़ेगा उज्जैन-जावरा फोरलेन उज्जैन-जावरा 4-लेन के बनने से उज्जैन, इन्दौर और उसके आसपास के क्षेत्र मुम्बई-दिल्ली 8-लेन कॉरिडोर से जुड़ जाएंगे। उज्जैन-इन्दौर सिक्स लेन का 1 हजार 692 करोड़ की अनुमानित लागत से भूमि पूजन हो चुका है। भोपाल, देवास, ग्वालियर, जबलपुर, सतना और इंदौर में एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण प्रगति पर है। नगरीय विकास के लिए 18 हजार 715 करोड़ प्रस्तावित सिंहस्थ क्षेत्र में विकास कार्य तेजी से हो रहे हैं। सिंहस्थ का आयोजन साल 2028 में किया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगभग 2 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान प्रस्तावित है। नगरीय विकास के लिए साल 2025-26 के लिए 18 हजार 715 करोड़ रुपए का प्रावधान प्रस्तावित है। जो साल 2024-25 से 2 हजार करोड़ रुपए ज्यादा है। एमपी में इन जिलों से गुजरता है दिल्ली-मुबंई आठ लेन दिल्ली-मुबंई 8 लेन कॉरिडोर झाबुआ के तलावड़ा से महूड़ी का माल से एक्सप्रेस-वे रतलाम में प्रवेश कर रावटी, सैलाना, पिपलौदा, व जावरा के कुम्हारी होकर मंदसौर के लसुड़िया से मंदसौर जिले में जाता है। रतलाम जिले के 87 गांवों से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे होकर गुजरता है। एक्सप्रेस-वे के जरिए गरोठ में शामगढ़ रोड और भानपुरा में नीमथुर से एंट्री कर सकेंगे। मंदसौर जिले से एक एंट्री सीतामऊ से भी मिलेगी। गरोठ और जावरा में लॉजिस्टिक हब बनाया जाएगा। साथ ही बसई के पास की जमीन पर उद्योग लगाए जाएंगे। recent visitors 40

मध्यप्रदेश में सड़कों का नेटवर्क तेजी से बढ़ रहा, बजट में लोक निर्माण कार्य के लिए 2500 करोड़ रुपए का बजट में प्रावधान

भोपाल  मध्यप्रदेश में सड़कों का नेटवर्क तेजी से बढ़ रहा है। बड़े स्तर पर चल रही सड़क परियोजनाओं का उद्देश्य केवल सड़कों और राजमार्गों का निर्माण ही नहीं, बल्कि राज्य के हर नागरिक के जीवन को सरल और समृद्ध बनाने के लिए कदम उठाए जा रहे है। केन्द्र द्वारा लगभग 40 हजार करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाओं से मध्यप्रदेश में स्थायी आधारभूत संरचना विकसित होगी।  आज मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने अपना दूसरा पूर्ण बजट पेश किया है। विधानसभा में उप मुख्यमंत्री और प्रदेश के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा बजट पेश किया गया। इस बजट में लोक निर्माण कार्य के लिए 2500 करोड़ रुपए का बजट में प्रावधान मिला है। जिसके तहत एमपी के गांव-शहर और तहसीलों में सड़कों का निर्माण किया जाएगा। कितना मिला बजट -ग्रामीण सड़कों एवं अन्य जिला मार्गों का निर्माण/उन्नयन के अंतर्गत 2500 करोड़ रुपए का प्रावधान -म.प्र. सड़क विकास निगम (एन.डी.बी.) के अंतर्गत 1450 करोड़ रुपए का प्रावधान -मध्यप्रदेश सड़क विकास कार्यक्रम (ए.डी.बी.) के अंतर्गत 1315 करोड़ रुपए का प्रावधान -केन्द्रीय सड़क निधि के अंतर्गत 1150 करोड़ रुपए का प्रावधान -वृहद पुलों का निर्माण के अंतर्गत 1000 करोड़ रुपए का प्रावधान -सड़कों का सुदृढ़ीकरण के अंतर्गत 1000 करोड़ रुपए का प्रावधान -अनुरक्षण और मरम्मत – साधारण मरम्मत के अंतर्गत 836 करोड़ रुपए का प्रावधान -एन्यूटी के अंतर्गत 825 करोड़ रुपए का प्रावधान -सड़क एवं सेतु हेतु संधारण कार्य के अंतर्गत 525 करोड़ रुपए का प्रावधान -मुख्य जिला मार्गो तथा अन्य का नवीनीकरण, उन्नतीकरण एवं डामरीकरण के अंतर्गत 500 करोड़ रुपए का प्रावधान संभागीय कार्यालय स्थापना के अंतर्गत 350 करोड़ रुपए का प्रावधान -नवीन ग्रामीण एवं अन्य जिला मार्गों का निर्माण/उन्नयन के अंतर्गत 350 करोड़ रुपए का प्रावधान -म.प्र. सड़क विकास निगम के माध्यम से सड़कों का निर्माण के अंतर्गत 200 करोड़ रुपए का प्रावधान -एफ टाईप एवं उससे नीचे की श्रेणी के शासकीय आवासों का अनुरक्षण के अंतर्गत 200 करोड़ रुपए का प्रावधान -मुख्य जिला मार्गों का निर्माण/उन्नयन के अंतर्गत 200 करोड़ रुपए का प्रावधान -एन.डी.बी. से वित्त पोषण (पुल निर्माण) के अंतर्गत 150 करोड़ का प्रावधान recent visitors 48

MP को जल्द मिलेगा पहला फ्लोटिंग रोड, सफर बनेगा सुहाना ! रायसेन-सागर के बीच 9 किमी लंबा सेमी ऐलिवेटेड कॉरिडोर अंतिम चरण में

रायसेन मध्यप्रदेश के रायसेन में पहले फ्लोटिंग रोड के निर्माण को जल्द पूरा होने वाला है। ये बेगमगंज (रायसेन) से राहतगढ़ (सागर) को जोड़ने वाला मार्ग जल्द ही प्रदेश के प्रमुख मार्गों में गिना जाएगा, जहां 9 किमी लंबा सेमी ऐलिवेटेड कॉरिडोर बन रहा है। यह कॉरिडोर केवल सफर को आसान नहीं बनाएगा, बल्कि पर्यटकों के लिए भी एक रोमांचक अनुभव लेकर आएगा। जंगलों और पहाड़ियों से घिरे इस क्षेत्र में अब सड़क यात्रा किसी टूरिस्ट डेस्टिनेशन से कम नहीं होगी।  डूब क्षेत्र में तकनीक का कमाल, 120 करोड़ की लागत से बन रहा फ्लोटिंग रोड मढ़िया बांध के कारण रायसेन-सागर रोड का एक हिस्सा डूब में आ रहा था। इसी समस्या को हल करने के लिए MPRDC (मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम) ने 120 करोड़ रुपए की लागत से फ्लोटिंग रोड और चार बड़े फ्लाईओवर का निर्माण शुरू किया। यह सेमी ऐलिवेटेड कॉरिडोर बांध के पानी के ऊपर से गुजरेगा, जिससे यात्रियों को एक अनोखा सफर मिलेगा और इलाके की कनेक्टिविटी भी बरकरार रहेगी। टूरिज्म को मिलेगा बड़ा बूस्ट, बनेगा नया सेल्फी प्वाइंट! राहतगढ़ पहले से ही अपने खूबसूरत झरने और प्राकृतिक नजारों के लिए प्रसिद्ध है। अब जब यह नई सड़क जंगल, पहाड़ियों और डैम के बीच से गुजरेगी, तो यह इलाका पर्यटन का नया केंद्र बन सकता है।  सेल्फी प्वाइंट और व्यूइंग डेक बनाने की योजना  पर्यटकों के लिए फूड कोर्ट और रेस्ट एरिया विकसित किए जाएंगे  स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे परियोजना से प्रभावित गांवों की स्थिति इस प्रोजेक्ट के चलते रायसेन जिले के 14 गांव पूरी तरह और 42 गांव आंशिक रूप से डूब क्षेत्र में आएंगे। प्रशासन ने प्रभावित ग्रामीणों के पुनर्वास और मुआवजे के लिए योजना बनाई है, जिससे किसी को नुकसान न हो। पर्यटन को मिलेगा नया जीवन राहतगढ़ का वॉटरफॉल पहले से ही इस क्षेत्र का बड़ा आकर्षण रहा है, जहां मानसून के दौरान हजारों पर्यटक पहुंचते हैं। अब जब यह नया कॉरिडोर जंगल, पहाड़ियों और डैम के पानी के बीच से होकर गुजरेगा, तो यह जगह और भी शानदार दिखेगी। यहां पर्यटकों के लिए सेल्फी प्वाइंट और अन्य सुविधाएं विकसित करने की भी योजना बनाई जा रही है। परियोजना के कारण क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। कॉरिडोर के आसपास पर्यटन केंद्र और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ने की संभावना है, जिससे स्थानीय लोगों को फायदा होगा। डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों की स्थिति इस परियोजना के कारण रायसेन जिले के 14 गांव पूरी तरह और 42 गांव आंशिक रूप से डूब क्षेत्र में आएंगे। इनमें चंदामाऊ और ककरुआ बरामद गढ़ी पूरी तरह से जलमग्न होंगे। हालांकि, प्रशासन ने प्रभावित किसानों और ग्रामीणों के लिए मुआवजा योजना तैयार की है, जिसका वितरण जल्द शुरू किया जाएगा। जल्द पूरा होगा निर्माण कार्य कॉरिडोर और लाई ओवर ब्रिज का निर्माण कार्य अपने अंतिम चरण में है। एमपीआरडीसी के जीएम सोनल सिन्हा के अनुसार, ठेकेदार को मई तक कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं और इसकी सतत समीक्षा हो रही है। प्रयास यही है कि बारिश से पहले कार्य पूरा हो जाए, जिससे आगामी मानसून में यह क्षेत्र पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार हो सके। बारिश से पहले पूरा होगा निर्माण, जल्द खुलेगा ट्रैफिक के लिए MPRDC के जीएम सोनल सिन्हा के अनुसार, ठेकेदार को मई 2025 तक निर्माण कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। कोशिश यह है कि मानसून से पहले यह शानदार सड़क चालू हो जाए, ताकि पर्यटक और स्थानीय लोग इसका पूरा लाभ उठा सकें। फ्लोटिंग रोड: सफर नहीं, एक अनोखा अनुभव! मध्यप्रदेश में यह अपनी तरह की पहली सड़क होगी, जहां सफर करते हुए लोग महसूस करेंगे कि वे पानी के ऊपर चल रहे हैं। यह सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि प्रदेश के पर्यटन और विकास की नई पहचान बनने जा रहा है। अब सफर सिर्फ मंजिल तक पहुंचने के लिए नहीं, बल्कि उसे जीने के लिए होगा! recent visitors 61