Monday, July 6, 2026 10:11 pm

आईएएस संतोष वर्मा के समर्थन में 18 जनवरी को भोपाल में ओबीसी, एससी, एसटी का महाआंदोलन

Massive agitation by OBC, SC, ST in Bhopal on January 18 in support of IAS Santosh Verma भोपाल। ओबीसी, एससी, एसटी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के तत्वावधान में 18 जनवरी को भोपाल के गोविंदपुरा स्थित भेल दशहरा मैदान में सुबह 10 बजे से विशाल महाआंदोलन और महासम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसमें पदोन्नति में आरक्षण, बैकलॉग पदों पर भर्ती, ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण, सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों के क्रियान्वयन को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया जाएगा। इस महाआंदोलन को भीम आर्मी, जयस सहित अनेक सामाजिक व आदिवासी संगठनों का समर्थन प्राप्त है। शुक्रवार को आयोजित संयुक्त पत्रकार वार्ता में अपाक्स के संरक्षक इंजीनियर भुवनेश पटेल, अखिल भारतीय ओबीसी महासभा के कार्यकारी अध्यक्ष तुलसीराम पटेल, अजाक्स के एसएल सूर्यवंशी, ओबीसी महासभा के कमलेंद्र सिंह, भीम आर्मी के सुनील बैरसिया, युवा छात्र संघ के प्रियंक जाटव और पिछड़ा वर्ग कल्याण परिषद के महामंत्री सीएस यादव ने डबल इंजन की भाजपा सरकार पर पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति विरोधी रवैया अपनाने का गंभीर आरोप लगाया। नेताओं ने आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने दुर्भावनापूर्ण तरीके से आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा के खिलाफ कार्रवाई की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्मा द्वारा किसी भी जाति, वर्ग या समाज के प्रति कोई आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं की गई थी। उनके कथन के भावार्थ को समझे बिना कुछ लोगों ने जानबूझकर दुष्प्रचार किया, जिसके आधार पर सरकार ने व्सतु स्थिति को जाने समझे बगैर कारण बताओ नोटिस जारी कर डीओपीटी को प्रस्ताव भेज दिया। यह सामाजिक न्याय की आवाज को दबाने का प्रयास है, जिससे ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग की भावनाएं आहत हुई हैं। ऐसी दमनात्मक कार्रवाई तत्काल रोकी जानी चाहिए। पत्रकार वार्ता में कहा गया कि मध्य प्रदेश में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग शिक्षा, रोजगार, प्रशासन, न्यायपालिका और विकास की मुख्यधारा में लगातार उपेक्षा और भेदभाव का सामना कर रहे हैं। कांग्रेस शासनकाल में घोषित 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को लेकर पिछड़ा वर्ग को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के बीच भटकाया जा रहा है, जबकि भाजपा सरकार को बिना बहाने सीधे तौर पर ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करना चाहिए। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इन मुद्दों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को पूरे प्रदेश में फैलाया जाएगा। महाआंदोलन की प्रमुख मांगें आईएएस संतोष वर्मा के विरुद्ध जारी समस्त कार्रवाई तत्काल वापस ली जाए।ओबीसी को जनसंख्या अनुपात में 52 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए।एससी, एसटी,ओबीसी के सभी रिक्त व बैकलॉग पद विशेष भर्ती अभियान से भरे जाएं।निजी क्षेत्र और संविदा, आउटसोर्स सेवाओं में आरक्षण लागू किया जाए।ओबीसी को भी पदोन्नति में आरक्षण दिया जाए।नई पेंशन व्यवस्था समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना लागू की जाए।सिविल जजों की भर्ती एमपीपीएससी के माध्यम से कराई जाए।सफाई कर्मियों को ठेका प्रथा से मुक्त कर नियमित किया जाए।विद्यार्थियों को समय पर छात्रवृत्ति और पर्याप्त छात्रावास सुविधा मिले।संविदा नियुक्ति संबंधी बिल निरस्त कर स्थायी भर्तियां की जाएं।न्यायालयों, मंदिरों और शासकीय ठेकों में आरक्षित वर्गों को जनसंख्या अनुपात में प्रतिनिधित्व दिया जाए।पेसा अधिनियम को पूर्ण रूप से लागू किया जाए।बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के अपमान के मामलों में कठोरतम कार्रवाई की जाए। recent visitors 92

सूरज भान कटारिया ने राज्य सरकारों से एस.सी./एस.टी. आरक्षण विभाजन मामले पर जल्दबाजी न करके

एस.सी./एस.टी. आरक्षण विभाजन में सुप्रीम कोर्ट   निर्णय केंद्र सरकार अध्यादेश लाकर करें समाप्त :  सूरजभान कटारिया एस.सी./एस.टी. आरक्षण विभाजन में सुप्रीम कोर्ट निर्णय को केंद्र सरकार अध्यादेश लाकर समाप्त करने का कार्य करना चाहिए :  सूरजभान कटारिया सूरज भान कटारिया ने राज्य सरकारों से एस.सी./एस.टी. आरक्षण विभाजन मामले पर जल्दबाजी न करके संवैधानिक रूप से केंद्र सरकार के मार्गदर्शन में अंतिम निर्णय लेने का आग्रह किया आज दिल्ली संसद भवन में देशभर से एस.सी./एस.टी. समुदायों से संबंधित लोकसभा और राज्यसभा के  लगभग 100 से ज्यादा भाजपा सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। सांसदों ने संयुक्त रूप से एस.सी./एस.टी. के लिए क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को लेकर एक ज्ञापन सौंपा और मांग की कि इस फैसले को हमारे समाज में लागू नहीं किया जाना चाहिए प्रधानमंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया कि वह इस मामले पर गंभीरता से संज्ञान लेंगे।  नई दिल्ली / चंडीगढ़ भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के अखिल भारतीय पूर्व उपाध्यक्ष एवं केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारीता मंत्रालय भारत सरकार के सदस्य रहे  सूरज भान कटारिया ने आज कहा है की एस.सी./एस.टी. आरक्षण विभाजन में सुप्रीम कोर्ट निर्णय को केंद्र सरकार अध्यादेश लाकर समाप्त करने का कार्य करना चाहिए ताकि भारतीय संविधान के अनुसार समाज में एकता का प्रदर्शन बरकरार रहे। कटारिया ने आज देशभर के एस.सी./एस.टी. समुदाय के प्रतिनिधि से आह्वान किया है की अनुसूचित जाति आरक्षण विभाजन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को संसद द्वारा अध्यादेश जारी कराकर निरस्त कराने में एकजुटता दिखायें. कटारिया ने आगे बताया आज दिल्ली संसद भवन में देशभर से एस.सी./एस.टी. समुदायों से संबंधित लोकसभा और राज्यसभा के  लगभग 100 से ज्यादा भाजपा सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। सांसदों ने संयुक्त रूप से एस.सी./एस.टी. के लिए क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को लेकर एक ज्ञापन सौंपा और मांग की कि इस फैसले को हमारे समाज में लागू नहीं किया जाना चाहिए प्रधानमंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया कि वह इस मामले पर गंभीरता से संज्ञान लेंगे। कटारिया ने देशभर की राज्य सरकारों से भी आग्रह किया है कि इस मामले पर जल्दबाजी न करके संवैधानिक रूप से केंद्र सरकार के मार्गदर्शन में अंतिम निर्णय ले. सूरज भान कटारिया ने एस.सी./एस.टी. सभी समुदायों के प्रतिनिधियों को आग्रह किया है की सुप्रीम कोर्ट का फैसला केवल नौकरियों तक ही सीमित नहीं है वह है समाज की एकता को टुकड़ों में बाँट देना, दूसरे उसमे क्रीमीलेयर तथा जिसे एक बार आरक्षण का लाभ मिल गया, उसे दोबारा नहीं मिलेगा सीधा कहे तो इस सन्दर्भ में देशभर में राजनैतिक आरक्षण के तहत जो एस.सी./एस.टी. समाज के लोग किसी भी पार्टी द्वारा विधानसभाओं में और देश की संसद में चुनकर गए हैं, दोबारा वह चुनाव नहीं लड़ पायेंगे क्योंकि एक बार उन्हें राजनैतिक आरक्षण का लाभ मिल चुका है . लेकिन यह फैसला सामान्य वर्ग, अप्ल्संख्यक और फिलहाल ओबीसी वर्ग के राजनेताओं पर लागू नहीं होगा, हमें आपसी मतभेद मिटा कर जागरूक और सावधान होकर देश राष्ट्रीय हित में इस पर जरूर गंभीरता से सोचना होगा अतः एस.सी./एस.टी. वर्ग के प्रतिनिधि समाजहित में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को संसद द्वारा अध्यादेश जारी कराकर निरस्त कराने में एकजुटता दिखायें, अन्यथा देश के एस.सी./एस.टी. समाज के प्रति तथा भारत के संविधान के प्रति बड़ा धोखा होगा। recent visitors 93

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के एससी-एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर को चिन्हित करने के फैसले भी नहीं

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में संविधान में दिए गए एससी और एसटी के लिए आरक्षण के उप-वर्गीकरण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर विस्तृत चर्चा हुई. बैठक में स्पष्ट किया कि डॉ. बीआर अंबेडकर द्वारा तैयार संविधान में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षण प्रणाली में “क्रीमी लेयर” का प्रावधान नहीं है. ऐसे में अंबेडकर के संविधान के मुताबिक ही आरक्षण का प्रावधान होना चाहिए. दरअसल कैबिनेट में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर चर्चा हुआ हुई. कैबिनेट का मत था कि एनडीए सरकार अंबेडकर के बनाए संबिधान को लेकर प्रतिबद्ध है और एससी एसटी में कोई क्रीमीलेयर का प्रावधान नहीं है. मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एससी-एसटी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से शुरू हुई हालिया बहस के बारे में बात की. सरकार संविधान प्रति कटिबद्ध वैष्णव ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण के संबंध में निर्णय सुनाया था और एससी-एसटी आरक्षण के संबंध में सुझाव दिया था. मंत्रिमंडल में इस पर विस्तृत चर्चा हुई. एनडीए सरकार बीआर अंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान के प्रति कटिबद्ध है. बीआर अंबेडकर के संविधान के अनुसार एससी-एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर का कोई प्रावधान नहीं है.' उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण संवैधानिक दिशानिर्देशों के अनुरूप लागू किया जाना चाहिए. यह पूछे जाने पर कि क्या यह मुद्दा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री या प्रधानमंत्री द्वारा उठाया गया था, वैष्णव ने कहा कि यह मंत्रिमंडल का सुविचारित विचार है. सांसदों ने की थी पीएम से मुलाकात इससे पहले शुक्रवार को एससी और एसटी सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की थी और एससी/एसटी आरक्षण के मुद्दे और सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर चर्चा की.बैठक के बाद मोदी ने एक्स पर कहा, "आज एससी/एसटी सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की. एससी/एसटी समुदायों के कल्याण और सशक्तिकरण के लिए हमारी प्रतिबद्धता और संकल्प को दोहराया." वहीं प्रधानमंत्री से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में शामिल भाजपा के राज्यसभा सदस्य सिकंदर कुमार ने कहा, "हम सभी सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से चिंतित हैं. हमें इस मामले पर चिंता जताने वाले लोगों के फोन आ रहे हैं. एससी और एसटी का प्रतिनिधित्व करने वाले सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की और इस संबंध में अपनी चिंता व्यक्त की." कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री ने सांसदों के साथ गंभीर चर्चा की और आश्वासन दिया कि सरकार सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को लागू नहीं होने देगी. उन्होंने कहा, "हम इसके लिए प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हैं." भाजपा सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री को दिए ज्ञापन में आग्रह किया है कि क्रीमी लेयर के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को लागू नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने पीटीआई से कहा, "प्रधानमंत्री का भी ऐसा ही विचार था. उन्होंने हमें आश्वासन दिया कि वह इस मामले को देखेंगे और हमें चिंता न करने के लिए कहा. उन्होंने कहा कि इसे एससी और एसटी श्रेणी में लागू नहीं किया जाएगा." क्या था सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस महीने की शुरुआत में, मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की बेंच ने बीते हफ्ते 6:1 के बहुमत वाले फैसले में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के कोटे में कोटा दिए जाने को मंजूरी दी थी. कोर्ट ने कहा था कि SC-ST कैटेगरी के भीतर नई सब कैटेगरी बना सकते हैं और इसके तहत अति पिछड़े तबके को अलग से रिजर्वेशन दे सकते हैं. देश में अभी अनुसूचित जाति (एससी) को 15 फीसदी और अनुसूचित जनजाति (एसटी) को 7.5 फीसदी आरक्षण मिलता है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद एससी और एसटी की जातियों के इसी 22.5 फीसदी के आरक्षण में ही राज्य सरकारें एससी और एसटी के कमजोर वर्गों का अलग से कोटा तय कर सकेंगी. सुप्रीम कोर्ट ने कोटे के अंदर कोटे की अनुमति राज्य सरकारों को देते हुए का था कि राज्य अपनी मर्जी और राजनीतिक महत्वाकांक्षा के आधार पर फैसला नहीं ले सकते. अगर ऐसा होता है तो उनके फैसले की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है.अगर कोई राज्य किसी जाति को कोटे के अंदर कोटा देती है तो उसे साबित करना होगा कि ऐसा पिछड़ेपन के आधार पर ही किया गया है. ये भी देखा जाएगा कि किसी एससी-एसटी के कुल आरक्षण का उसके किसी एक वर्ग को ही 100% कोटा न दे दिया जाए.     recent visitors 102