शिक्षा विभाग ने स्कूलों को 31 मार्च तक फीस स्ट्रक्चर और कोर्स की जानकारी सार्वजनिक करने को कहा, आदेश जारी

भोपाल  निजी स्कूलों ने शुल्क ढांचे (फीस स्ट्रक्चर) में मनमानी की या यूनिफॉर्म, कॉपी-किताब को किसी विशेष दुकान से खरीदने का दबाव बनाया तो उन पर कार्रवाई हो सकती है। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया। स्कूलों को 31 मार्च तक अपना फीस स्ट्रक्चर और कोर्स की जानकारी सार्वजनिक करने को कहा गया है, ताकि पेरेंट्स को इसकी जानकारी हो जाए। भोपाल के अधिकांश निजी स्कूलों द्वारा किताबों की सूची और फीस की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। इसके साथ ही स्कूलों द्वारा निश्चित दुकानों से कॉपी-किताबें व यूनिफॉर्म खरीदने का दबाव बनाया जाने लगा है।  जारी हुआ आदेश  निजी स्कूलों की इस मनमानी पर रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने कॉपी-किताब व ड्रेस खरीदने का दबाव बनाने पर कार्रवाई करने का आदेश जारी किया है।     संयुक्त संचालक अरविंद चौरगड़े की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि नया शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले निजी स्कूल लेखक एवं प्रकाशक के नाम और मूल्य के साथ कक्षावार पुस्तकों की सूची विद्यालय में प्रदर्शित करें।     ऐसी सूची मांगने पर उपलब्ध कराई जाए, ताकि विद्यार्थी या अभिभावक इनको खुले बाजार से भी खरीद सकें। प्रत्येक स्कूल प्रबंधक, प्राचार्य स्कूल में हर कक्षा की पाठ्यपुस्तकों और प्रकाशकों की जानकारी को डीईओ की वेबसाइट पर अनिवार्य अपलोड करें।     किसी भी प्रकार की शिक्षण सामग्री पर स्कूल का नाम अंकित नहीं होना चाहिए। स्कूल के सूचना पटल पर यह भी अंकित किया जाए कि अभिभावक किसी दुकान विशेष से खरीदने के लिए बाध्य नहीं हैं। डीईओ पर निगरानी की जिम्मेदारी आदेश में जिला शिक्षा अधिकारी को निगरानी और आदेश लागू करने की जिम्मेदारी दी गई है। कहा गया है कि डीईओ सुनिश्चित करें कि जिले के सीबीएसई, आईसीएसई, एमपी बोर्ड समेत सभी प्री प्राइमरी से लेकर 12वीं तक स्कूल में संचालित की जाने वाली किताबों, कॉपियों व यूनिफॉर्म की सूची 31 मार्च तक विद्यालय के सूचना पटल पर लग जाएं। एनसीईआरटी की पुस्तकें अनिवार्य आदेश में स्कूल शिक्षा विभाग ने पहली से 12वीं तक की कक्षाओं में एनसीईआरटी की पुस्तकें अनिवार्य कर दिया है। कहा गया है कि इस आदेश का कड़ाई से पालन किया जाए, नहीं तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। recent visitors 52

गोटेगांव : बच्चों की घटती संख्या के चलते ये सरकारी स्कूल बंद होने के कगार पर पहुंच गए

नरसिंहपुर नरसिंहपुर जिले के अंतर्गत जन शिक्षा केंद्र गोटेगांव के अंतर्गत संचालित एक से आठवीं तक के सरकारी स्कूलों की संख्या लगभग 300 है। इनमें से 20 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां बच्चों की दर्ज संख्या एक से दस के बीच रह गई है। बच्चों की गिरती संख्या के चलते ये स्कूल बंद होने के कगार पर पहुंच गए हैं। एक अप्रैल से नया शिक्षा सत्र प्रारंभ होगा, लेकिन इसके बावजूद सरकारी स्कूलों में प्रवेश लेने वाले बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी की उम्मीद नजर नहीं आ रही है। तीन मुख्य कारण जिम्मेदार ग्रामीण अंचलों में सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति के पीछे तीन मुख्य कारण बताए जा रहे हैं—     बिना मापदंड निजी स्कूलों को मान्यता– ग्रामीण क्षेत्रों में बिना उचित मापदंड के निजी स्कूलों को मान्यता दी जा रही है। इसके कारण अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में प्रवेश दिलाने के बजाय निजी स्कूलों में भेज रहे हैं।     आरटीई के तहत मुफ्त शिक्षा– राइट टू एजुकेशन (RTE) के तहत निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत बच्चों को निशुल्क प्रवेश देने का प्रावधान है, जिसका खर्च सरकार उठाती है। इससे भी सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या घट रही है।     सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और शैक्षणिक गतिविधियों की कमी- सरकारी स्कूलों में अंग्रेजी, विज्ञान और गणित विषय के शिक्षकों की सबसे अधिक कमी देखी जा रही है। वहीं, कई स्कूलों में शैक्षणिक गतिविधियों का अभाव रहता है। दूसरी ओर, निजी स्कूलों में प्रारंभ से ही विषय-विशेषज्ञ शिक्षक बच्चों को पढ़ाते हैं और वहां शैक्षणिक गतिविधियां नियमित रूप से संचालित की जाती हैं। इसी कारण ग्रामीण क्षेत्रों के अभिभावक अपने बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश दिलाना ज्यादा उचित समझते हैं। सीएम राइज स्कूल से मिलेगी राहत? गोटेगांव में सीएम राइज स्कूल भवन का निर्माण कार्य जारी है। इसके पूर्ण होते ही इस स्कूल के तहत शैक्षणिक गतिविधियां संचालित की जाएंगी। सीएम राइज स्कूलों में विषय-विशेषज्ञ शिक्षक तो उपलब्ध होंगे, लेकिन उनकी संख्या कितनी होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की संख्या और गुणवत्ता में सुधार किया जाए, तो सरकारी स्कूलों की गिरती स्थिति को संभाला जा सकता है। सरकारी स्कूलों का भविष्य अधर में सरकारी स्कूलों में बच्चों की घटती संख्या से शिक्षा विभाग चिंतित है। यदि जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो कई सरकारी स्कूल बंद हो सकते हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्र के उन बच्चों पर प्रभाव पड़ेगा, जो निजी स्कूलों की फीस वहन करने में असमर्थ हैं। recent visitors 49

इंदौर में 200 स्कूल 31 मार्च से बंद होंगे, हजारों विद्यार्थी प्रभावित

इंदौर इंदौर में लगभग 200 स्कूल बंद होने वाले हैं। यह स्कूल नए नियमों का पालन नहीं कर पाए। इस कारण 2025-26 के सत्र से इन्हें बंद किया जा रहा है। इससे हजारों छात्र प्रभावित होंगे। छात्रों और अभिभावकों को स्कूल बंद होने की जानकारी नहीं दी गई है। प्रशासन ने इन छात्रों के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं की है। छात्रों को दूसरे स्कूलों में दाखिला लेने में परेशानी हो सकती है। खासकर गरीब परिवारों के बच्चों को दिक्कत आएगी। ये 200 स्कूल 31 मार्च से बंद हो जाएंगे। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि उन्होंने मान्यता के नए नियमों का पालन नहीं किया। राज्य सरकार ने कहा था कि 2025-26 सत्र के लिए मान्यता नवीनीकरण 20 मार्च तक कराना होगा। जिले के 1684 स्कूलों में से केवल 1478 ने ही नवीनीकरण के लिए आवेदन किया। अब उनका निरीक्षण चल रहा है। 1 अप्रैल से बंद हो जाएंगे ये स्कूल जिन 206 स्कूलों ने नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं किया, वे 31 मार्च से बंद हो जाएंगे। इससे हजारों छात्र सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। ज्यादातर स्कूलों ने अभिभावकों को इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी है। कई छात्र परीक्षा दे चुके हैं और अगली कक्षा में जाने का इंतजार कर रहे हैं। उन्हें यह भी नहीं पता कि उनका स्कूल 1 अप्रैल से बंद हो जाएगा। एडमिशन के लिए बच्चे होंगे परेशान स्कूल बंद होने की वजह से अभिभावकों ने दूसरे स्कूलों में दाखिले की प्रक्रिया शुरू नहीं की है। इससे स्थिति और भी मुश्किल हो गई है। सरकार ने 1 अप्रैल से सरकारी स्कूलों में 'एडमिशन फेस्टिवल' शुरू करने की घोषणा की है। लेकिन बंद हो रहे स्कूलों के छात्रों को सरकारी स्कूलों में दाखिला दिलाने के लिए कोई खास इंतजाम नहीं किए गए हैं। गरीब बच्चों के लिए खासी परेशानी अधिकारियों का कहना है कि छात्र अपनी पसंद के किसी भी स्कूल में दाखिला ले सकते हैं। लेकिन गरीब परिवारों के छात्रों के लिए यह आसान नहीं होगा। कई स्कूल जो बंद होने वाले हैं, वे पिछड़े इलाकों में हैं। वहां प्राइवेट स्कूल कम हैं या छात्रों के घरों से बहुत दूर हैं। प्राइवेट स्कूलों में सीटें भी कम हैं। इसलिए सभी छात्रों को दाखिला मिलना मुश्किल है। ऐसे में सरकारी स्कूल ही एकमात्र विकल्प हैं। अधिकारी का कहना जिला परियोजना समन्वयक संजय कुमार मिश्रा ने कहा कि प्रभावित छात्रों को सरकारी स्कूलों में दाखिला दिलाने के लिए 25 अप्रैल के बाद एक प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जिन स्कूलों को मान्यता नहीं मिली है, उन्हें भी कहा गया है कि वे अभिभावकों को दूसरे स्कूल चुनने के लिए कहें। प्रशासन ने अधिकारियों को 25 मार्च तक 100% नामांकन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। नए छात्रों को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें मिलेंगी और सीनियर छात्र उनका स्वागत करेंगे।   recent visitors 46

कलेक्टर ने पुस्तकें और गणवेश खरीदने की बाध्यता पर नन्ही दुनिया इंटरनेशनल स्कूल पर 2 लाख रुपए का जुर्माना ठोंका

सतना  सतना जिले में कलेक्टर सतीश कुमार एस ने प्राइवेट स्कूल द्वारा अभिभावकों से मनमानी वसूली करने वाले एक प्राइवेट स्कूल पर बड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर ने शहर के नामचीन प्राइवेट विद्यालय नन्ही दुनिया इंटरनेशनल स्कूल पर 2 लाख का जुर्माना ठोका है। साथ ही सात दिन के अंदर यह राशि जमा करने का आदेश दिया गया है। इस कार्यवाही के बाद से प्राइवेट स्कूल संचालकों में हड़कंप मच गया है। इसलिए ठोका जुर्माना कलेक्टर ने पुस्तकें और गणवेश एक स्थान से खरीदने की बाध्यता पर प्राइवेट स्कूल नन्ही दुनिया इंटरनेशनल स्कूल बगहा कोठी रोड को 2 लाख रुपए का जुर्माना ठोंका है। कलेक्टर ने शिकायत की जांच के बाद मध्यप्रदेश निजी विद्यालय फीस एवं अन्य संबंधित विषयों का विनियमन 2017 और 2020 की धारा 6 के विपरीत कृत्य करने पर संबंधित स्कूल पर अधिनियम की धारा 9 के तहत प्रथम बार में 2 लाख रुपए के अर्थ दंड से दंडित किया है। स्कूल से ही ड्रेस लेने के लिए किया जाता था बाध्य स्कूल के खिलाफ शिकायत प्राप्त हुई थी कि संस्था द्वारा स्कूल से ही किताबें-ड्रेस लेने हेतु छात्रों एवं उनके अभिवावकों को बाध्य किया जाता है। जो अभिभावक इससे मना करते हैं, संस्था द्वारा उन बच्चों को परेशान किया जाता है। संस्था में एनसीआरटी की पुस्तकों के अलावा स्वतंत्र प्रकाशकों की पुस्तकें चलाई जाती हैं। जिससे अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ता है। अंकसूची देने के लिए भी राशि ली जाती है, लेकिन इसकी रसीद नहीं दी जाती है। जिला शिक्षा अधिकारी ने मौके पर किया निरीक्षण वहीं, कलेक्टर को शिकायत प्राप्त होने पर जिला शिक्षा अधिकारी सतना द्वारा 11 मार्च को संस्था का निरीक्षण कर शिकायत की जांच की गई। उसमें पाया गया कि संस्था द्वारा सत्र 2024-25 और सत्र 2025-26 के पत्रक के बिना सक्षम समिति के अनुमोदन के कक्षा नर्सरी से कक्षा 4 तक की शुल्क वृद्धि 20 प्रतिशत, कक्षा 5 में लगभग 15 प्रतिशत और कक्षा 7 एवं 8 में 20 प्रतिशत वृद्धि नियमों के विपरीत की गई है। स्कूल में मिले दुकान के कार्ड निरीक्षण के दौरान उपस्थित स्टाफ ने बताया कि स्कूल ड्रेस और पुस्तकें माही साइबर एवं स्टेशनरी नामक प्रतिष्ठान राजेन्द्र गली नम्बर 3 से प्राप्त करने के लिए अभिभावकों को कहा जाता है। इस संस्थान का कार्ड भी संस्था में काफी मात्रा में रखे पाये गये है। संस्था द्वारा एनसीआरटी के अतिरिक्त स्वतंत्र प्रकाशकों की पुस्तकें नर्सरी कक्षाओं के अलावा अन्य कक्षाओं में भी अधिनियम की धारा 6 कण्डिका (घ) के विपरीत चलाई जा रही हैं। दोषी पाए जाने पर कलेक्टर ने ठोका जुर्माना जिला शिक्षा अधिकारी ने संस्था की सुनवाई और बचाव का नैसर्गिक अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया, जिसके उत्तर में समाधानकारक तथ्य नहीं पाये गये। कलेक्टर ने प्रथम बार दो लाख, वहीं दूसरी बार जारी करने पर 4 लाख रूपये की सजा और इसके आगे के आदेशों पर 6 लाख रूपये तक की सजा अधिरोपित करने के प्रावधान हैं। recent visitors 72

जीएसडीपी को दुगुना करने का मोहन संकल्प

भोपाल मध्य प्रदेश की विधानसभा में उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने वर्ष 2024-25 के आर्थिक सर्वेक्षण सदन में प्रस्तुत किए। सर्वेक्षण में उद्यमशील मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के लक्ष्य पूर्ति के महानतम संकल्प हेतु राज्य के सकल घरेलू उत्पाद को पाँच वर्षों में वर्ष 2028-29 तक दोगुना करने का संकल्प लिया है। वर्तमान में ‍प्रदेश का सकल घरेलू उत्‍पाद वर्ष 2024-25 प्रचलित भावों पर रूपये 1503395 करोड़ पहुंच गया है, जो वर्ष 2023-24 में रूपये 1353809 करोड़ था। पिछले वित्‍तीय वर्ष से 11.05 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।मप्र की आर्थिक वृद्धि दर राष्ट्रीय दर के सापेक्ष लगभग डेढ़ गुनी से अधिक है।यह वृद्धि दर मोहन सरकार की आर्थिक नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने का ही परिणाम है, सुफल है।मध्‍यप्रदेश का सकल घरेलू उत्‍पाद वर्ष 2024-25 में स्थिर भावों पर जीएसडीपी 712260 करोड़ रूपये है जो वर्ष 2023-24 में 671636 करोड़ रहा। यह 6.05 प्रतिशत की वास्‍तविक वृद्धि दिखाता है। मध्‍यप्रदेश की प्रति व्‍यक्ति आय वर्ष 2024-25 प्रचलित भावों पर पिछले वर्ष के सापेक्ष लगभग 9 प्रतिशत की दर से बढ़कर रूपये 152615 हो गई है। स्थिर भाव पर वर्ष 2024-25 में प्रति व्‍यक्ति आय रूपये 70434 है । मध्‍यप्रदेश के सकल मूल्य वर्धन में प्रचलित भावों पर वर्ष 2024-25 में क्षेत्रवार हिस्‍सेदारी क्रमश: प्राथमिक क्षेत्र में 44.36 प्रतिशत, द्वितीयक क्षेत्र में 19.03 प्रतिशत तथा तृतीयक क्षेत्र में 36.61 प्रतिशत रही है। मोहन सरकार ने लोक वित्‍त में अपनी मजबूत अर्थव्‍यवस्‍था बनाये रखने के लिये प्रभावी कदम उठाये गये है। वित्‍तीय वर्ष 2024-25 में राजस्‍व अधिशेष रूपये 1700 करोड़ रहने का अनुमान है, जबकि राजकोषीय घाटा जीएसडीपी के 4.11 प्रतिशत तक सीमित रहेगा। राजस्‍व प्राप्तियां रूपये 263344 करोड़ तक पहॅुचने का अनुमान है।विकसित भारत की संकल्पना के अनुरूप विकसित मध्यप्रदेश के रूप में राज्य अपनी महत्वपूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करेगा। प्रदेश की मजबूत बैंकिंग प्रणाली और वित्तीय समावेश की शक्ति से आर्थिक तंत्र निरंतर सशक्त हो रहा है आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार कृषि फसल क्षेत्र का प्राथमिक क्षेत्र के अंतर्गत योगदान वर्ष 2024-25 में 30.90 प्रतिशत रहा।प्रचलित भाव पर यह 10.8 प्रतिशत बढ़ा है। इसी तरह पशुधन क्षेत्र में 7.45 प्रतिशत का योगदान रहा है । कृषि और कृषि प्र-संस्करण के माध्यम से आय के स्रोतों में वृद्धि हो रही है, जबकि सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्योग, बड़ी अधोसंरचनात्मक परियोजनाएं, वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का विस्तार, और ऊर्जा उपलब्धता में बढ़ोतरी जैसे महत्वपूर्ण घटक एक आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था के निर्माण की दिशा में प्रदेश की प्रगति को दर्शाते हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, आर्थिक और सामाजिक समावेश तथा महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता देने से आर्थिक और सामाजिक उन्नति में व्यापक भागीदारी सुनिश्चित हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में गरीब कल्याण, युवा शक्ति, अन्नदाता, और नारी शक्ति जैसे चार प्रमुख मिशनों की शुरुआत की है। ये मिशन क्रमशः समाज के वंचित वर्गों, युवाओं, किसानों और महिलाओं के समग्र विकास एवं आर्थिक स्वतंत्रता को सुनिश्चित करने कार्यरत हैं। सरकार का संकल्प है कि राज्य की आर्थिक नीतियां समाज के प्रत्येक वर्ग के विकास में सहायक हों और व्यापक आर्थिक समृद्धि सुनिश्चित करें। मध्यप्रदेश सरकार ने 'ईज़ ऑफ लिविंग' और 'ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस' को बढ़ावा देने के लिए मानकों के सरलीकरण, जनविश्वास बिल, राजस्व महाभियान और पीएम जनमन कार्यक्रम जैसे प्रभावी उपायों को अपनाया है, जिससे सुशासन को और अधिक प्रभावी बनाया गया है। राज्य के प्राकृतिक संसाधनों की समृद्धि, टाइगर एवं चीता रिजर्व, धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहरें, और पर्यटन स्थलों ने मध्यप्रदेश को पर्यटन और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित किया है। मध्यप्रदेश आर्थिक सर्वेक्षण वर्ष 2024-25 प्रदेश की आर्थिक प्रतिबद्धताओं, विकास योजनाओं और उनके प्रभावी क्रियान्वयन का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। यह सर्वेक्षण राज्य की विकास यात्रा को प्रतिबिंबित करता है और यह दर्शाता है कि मध्यप्रदेश सतत और समावेशी आर्थिक विकास के मार्ग पर अग्रसर है। मध्‍यप्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2025 को "उद्योग वर्ष’’ घोषित किया गया है। वित्‍तीय वर्ष 2024-25 में द्वि‍तीयक क्षेत्र में 2.73 लाख करोड़ रूपये के सकल मूल्‍य वर्धन तक पहॅुच गया। राज्‍य में सामाजिक क्षेत्र के लिये महत्‍वपूर्ण बजटीय आवंटन किये गये है जिसमें पिछले चार वर्षो में 82.52 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। सरकार ने समस्‍त बाल विकास को प्राथमिकता देते हुये राज्‍य के कुल बजट का 21.6 प्रतिशत बजट आवंटित किया है। पोषण भी पढाई भी,स्‍व-सहायता समूह, सामुदायिक संस्‍थागत विकास, लखपति दीदी,विकसित मध्‍यप्रदेश विजन 2047 आदि इस दिशा में अग्रणी प्रयास है। स्‍वास्‍थ्य क्षेत्र मे राज्‍य का बजट वर्ष 2024-25 में 15744 करोड़ रूपये तक पहॅुच गया है। आयुष्मान भारत योजना के तहत 4.85 करोड़ से अधिक कार्ड जारी किये गये है। वर्ष 2024-25 में शिक्षा का बजट 11.26 प्रतिशत आवंटित किया गया है। व्‍यावसायिक शिक्षा में 14 ट्रेडस शुरू किये गये है।उच्‍च शिक्षा के अंतर्गत 1346 महाविद्यालय में 10.5 लाख सीट उपलब्‍ध है। कौशल विकास मिशन के अंतर्गत वर्ष 2024-25 में 3.49 लाख छात्रों को व्‍यावसयिक शिक्षा का प्रशिक्षण दिया गया है।10 आई.टी.पार्क एवं 4 आई.टी SEZ विकसित किये गये है। 4895 से अधिक मान्‍यता प्राप्‍त स्‍टार्ट-अप कार्यरत है। मध्य प्रदेश का अधिसूचित वन क्षेत्र 94.69 हजार वर्ग किलोमीटर तथा वनावरण 77.07 हजार वर्ग कि.मी. क्षेत्रफल के साथ अग्रणी स्थिति पर है।खनिज उत्‍पादन मूल्‍य पिछले वर्ष की तुलना में 16.71 प्रतिशत अधिक रहा है। आर्थिक सर्वेक्षण में मोहन सरकार का राज्य के सकल घरेलू उत्पाद को पाँच वर्षों में दोगुना करने का संकल्प स्पष्ट रूप से झलक रहा है, दृष्टि गोचर हो रहा है।   टिप्पणीकार-सत्येंद्र जैन recent visitors 31

प्रदेश में 27 हजार शिक्षकों को ब्रिज कोर्स का प्रशिक्षण दिया जा रहा

भोपाल प्रदेश में सरकारी स्कूलों में कक्षा 9वीं में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों में अध्ययन के स्तर और दक्षता को सुधारने के लिये स्कूल शिक्षा विभाग ब्रिज कोर्स का संचालन कर रहा है। इसके लिये हिन्दी, अंग्रेजी एवं गणित विषय के 9 हजार 312 रिसोर्सपर्सन तैयार किये गये हैं। इनका प्रशिक्षण भोपाल के वाल्मी संस्थान में फरवरी माह में कराया जा चुका है। प्रदेश में 4 हजार 200 हाई स्कूल और 4 हजार 100 हायर सेकेण्डरी सरकारी स्कूल हैं। अब इन स्कूलों में हिन्दी, अंग्रेजी एवं गणित के एक-एक शिक्षक को प्रशिक्षण देने की व्यव्स्था मार्च माह से शुरू कर दी गई है। प्रदेश में लगभग 27 हजार शिक्षकों को ब्रिज कोर्स का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ब्रिज कोर्स के माध्यम से सरकारी स्कूलों को ड्रॉप-आउट दर को कम करने में मदद मिलेगी। ब्रिज कोर्स प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षक अप्रैल माह में और 16 जून से 20 जुलाई तक ब्रिज कोर्स का संचालन करेंगे। ब्रिज कोर्स का संचालन सभी सरकारी हाई और हायर सेकण्डरी स्कूलों में होगा। इसके साथ ही इन 3 विषयों के अलावा विज्ञान एवं संस्कृत विषय की पढ़ाई भी इन बच्चों को कराई जायेगी। लोक शिक्षण संचालनालय ने स्कूल में लगने वाली ब्रिज कोर्स की समय-सारणी भी तैयार की है। बेसलाइन टेस्ट ब्रिज कोर्स के दौरान ही 5 और 12 अप्रैल को इन विद्यार्थियों का बेस लाइन टेस्ट अंग्रेजी, गणित और हिन्दी में लिया जायेगा। बेस लाइन टेस्ट पेपर 31 मार्च को स्कूल शिक्षा विभाग के "विमर्श" पोर्टल पर अपलोड कर दिये जायेंगे। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दे दिये गये हैं। तय तिथियों में जो विद्यार्थी किन्ही वजह से टेस्ट नहीं दे पायेंगे, उनके लिये अलग व्यवस्था की गई है। बेस लाइन टेस्ट की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन संबंधित शिक्षकों द्वारा उसी दिन किये जाने की व्यवस्था की गई है। बेस लाइन टेस्ट में कम दक्षता वाले विद्यार्थियों के लिये अंग्रेजी, हिन्दी और गणित विषय के ब्रिज कोर्स की व्यवस्था की गई है। एंडलाइन टेस्ट सरकारी हाई और हायर सेकेण्डरी स्कूलों में ब्रिज कोर्स की समाप्ति पर 20 जुलाई के बाद विद्यार्थियों की गुणवत्ता जांचने के लिये एंडलाइन टेस्ट की भी व्यवस्था की जा रही है। यह टेस्ट 21 से 25 जुलाई के बीच होगा। इस संबंध में लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी सरकारी स्कूलों को निर्देश दिये हैं। ब्रिज कोर्स की मॉनिटरिंग के लिये 3 स्तर पर राज्य, संभाग और जिला स्तर के अधिकारियों द्वारा नियमित मॉनिटरिंग की जायेगी। जिला शिक्षा अधिकारी को प्रति माह कम से कम 10 विद्यालयों में मॉनिटरिंग किये जाने के लिये कहा गया है। उनके इस कार्य में जिला परियोजना समन्वयक और विकासखंड शिक्षा अधिकारी मदद करेंगे। जिला स्तर पर होगा मूल्यांकन ब्रिज कोर्स संचालन के दौरान जिला स्तर के अधिकारी रेन्डमली कम से कम 10 प्रतिशत विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं जिला स्तर पर बुलाकर पुन: मूल्यांकन करेंगे। इन बच्चों की दक्षता सुधार के लिये लोक शिक्षा संचालनालय स्तर पर वर्ष भर सतत् प्रयास किये जायेंगे।   recent visitors 40

मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने जारी किए सख्त निर्देश, छात्रों को शारीरिक सजा देना दंडनीय अपराध होगा

भोपाल शिक्षक महोदय जी सावधान हो जाइए। अगर आपने बच्चों के सामने कड़क बनने की कोशिश की तो आपकी खटिया खड़ी हो सकती है। बच्चों से मारपीट के मामले में मध्यप्रदेश सरकार अब सख्त होती नजर आ रही है। प्रदेश के सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में अब छात्र-छात्राओं के साथ मारपीट या किसी भी तरह की शारीरिक सजा पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। अगर किसी शिक्षक या अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों ने ऐसी हरकत की तो उन पर कानूनी कार्रवाई हो जाएगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए ऐसी हालत में कार्रवाई के लिए कहा है। साथ ही ऐसे मामलों की रिपोर्ट भी देने के लिए कहा गया है। आयोग की चिट्ठी के बाद एक्शन बाल अधिकार संरक्षण आयोग की चिट्ठी के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने यह दिशा निर्देश जारी किये हैं। आयोग ने इसको लेकर 4 फरवरी 2025 को स्कूल शिक्षा विभाग को पत्र लिखा था। लोक शिक्षण संचालनालय के अपर संचालक रवीन्द्र कुमार सिंह की ओर से जारी निर्देश में अलग-अलग बातें लिखी गई हैं। इस मामले में सख्त एक्शन के निर्देश दिए जा रहे हैं। ऐसा करना दंडनीय अपराध होगा पत्र में लिखा है कि मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा अधिनियम 2009 की धारा 17 (1) में शारीरिक मानसिक प्रताड़ना और भेदभाव पूरी तरह प्रतिबंधित है। साथ ही धारा 17 (2) के तहत ऐसा करना दंडनीय अपराध है। साथ ही भारतीय दंड संहिता की धारा 323 के तहत शारीरिक दंड भी प्रतिबंधित है। इस कारण सभी जिलों में संचालित सरकारी और निजी स्कूलों में छात्रों को शारीरिक दंड देने की घटनाओं की त्वरित पहचान करने और इस तरह की स्थितियों पर रोक लगाने के लिए उचित कदम उठाए जाएं। सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश इस पत्र में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को ये निर्देश भी दिए गए हैं कि किसी स्कूल या शिक्षक द्वारा शारीरिक दंड देने के मामले में तत्काल एक्शन लेकर अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाए। recent visitors 59