ग्वालियर कलेक्टर ने निजी स्कूलों के खिलाफ सख्त निर्देश, विद्यार्थियों को निश्चित दुकान से खरीदी के लिए बाध्य करता है तो होगी कड़ी कार्रवाई

 ग्वालियर ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान ने निजी स्कूल संचालकों के खिलाफ सख्त निर्देश जारी किए हैं. यदि कोई स्कूल विद्यार्थियों और अभिभावकों को स्कूल की यूनिफॉर्म, कॉपी, किताबें और अन्य स्टेशनरी किसी निश्चित दुकान से खरीदने के लिए बाध्य करता है, तो ऐसे स्कूलों के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNS) की धारा 163 के तहत कार्रवाई की जाएगी. स्कूलों को कलेक्टर का अल्टीमेटम यह आदेश ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान ने जारी करते हुए स्कूल संचालकों को स्पष्ट रूप से अल्टीमेटम दे दिया है. उन्होंने कहा है कि 8 मार्च तक आवश्यक रूप से स्कूल प्रबंधन द्वारा सभी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करते हुए ड्रेस और पुस्तक की जानकारी वेबसाइट पर अपलोड करने के साथ-साथ स्कूल प्रबंधन की बैठक भी आयोजित की जाए, जिसमें आदेश के परिपालन में सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाए. शिकायतों के बाद कार्रवाई कलेक्टर रुचिका चौहान ने बताया कि आम लोगों की ओर से शिकायत प्राप्त हो रही थी कि ग्वालियर के विद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है. विद्यालय प्रबंधन द्वारा अभिभावकों को पाठ्य पुस्तक, स्टेशनरी, पठन सामग्री, बैग, यूनिफॉर्म, स्पोर्ट्स किट, ट्रांसपोर्ट सुविधा के लिए बाध्य किया जा रहा है. इसी शिकायत को ध्यान रखते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत आदेश जारी कर दिया गया है, जिसमें स्कूल प्रबंधन द्वारा आदेश का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. उल्लंघन करने पर इनके खिलाफ होगी कार्रवाई कलेक्टर रुचिका चौहान ने बताया कि आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है. यदि कोई इसका उल्लंघन करता है तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 223 (सरकारी आदेशों का उल्लंघन) और अन्य सुसंगत अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी. विद्यालय द्वारा आदेश का पालन नहीं करने पर प्राचार्य संचालक के साथ-साथ शाला का प्रबंधक बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के समस्त सदस्य भी दोषी माने जाएंगे. recent visitors 47

भोपाल के स्कूल को IED ब्लास्ट से उड़ाने की धमकी, तेलुगु भाषा में मेल किया, स्कूल खाली कराया गया; पुलिस और ATS ने ली तलाशी

भोपाल भोपाल के पिपलानी में एक प्राइवेट स्कूल को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। शनिवार की सुबह स्कूल के ऑफिशियल ईमेल आईडी पर तेलगू भाषा में एक धमकी भरा मेल मिला। जिसमें स्कूल की बिल्डिंग को IED ब्लास्ट से उड़ाने की धमकी मिली है। स्कूल स्टाफ में एक व्यक्ति को तेलगू भाषा की समझ है। उसने तुरंत मेल को ट्रांसलेट करके अन्य स्टाफ को जानकारी दी। धमकी मिलने के बाद से स्कूल में हड़कंप मच गया। सूचना पर पुलिस की टीम बीडी (बॉम्ब डिस्पोजल) और डॉग स्क्वायड की टीम के साथ मौके पर पहुंची और स्कूल के कोने कोने की तलाशी ली। शनिवार को छुट्टी होने के कारण बच्चे स्कूल में नहीं थे। स्कूल में पैरेंट्स टीचर मीटिंग बुलाई गई थी। उस समय स्कूल में करीब 50 लोग मौजूद थे। सभी को परिसर से बाहर निकाल दिया गया। मामला शनिवार सुबह 10.30 बजे हरमन माइनर स्कूल का है। आज स्कूल की छुट्‌टी थी, लेकिन स्टाफ के कुछ सदस्य और कुछ छात्रों के परिजन मीटिंग के लिए मौजूद थे। धमकी मिलने के बाद तुरंत ही वे बाहर निकल गए और पुलिस को सूचना दी। स्कूल के हर कोने की हुई तलाशी मौके पर पहुंची पुलिस ने बीडी (बॉम्ब डिस्पोजल) और डीएस (डॉग स्क्वायड) की टीम के साथ स्कूल की सघन तलाशी शुरू कर दी। इसके अलावा, एटीएस (एंटी टेरर स्क्वायड) की टीम भी जांच के लिए पहुंची। थाना प्रभारी (TI) अनुराग लाल ने बताया कि स्कूल के कोने-कोने की तलाशी ली गई, लेकिन कोई संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई। आईपी एड्रेस ट्रेस करने की कोशिश थाना प्रभारी अनुराग लाल ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस और विशेष सुरक्षा दल मौके पर पहुंचे। स्कूल के कोने कोने की तलाशी ली गई, लेकिन कोई भी संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। पुलिस का कहना है कि मेल भेजने वाले व्यक्ति की पहचान के लिए साइबर एक्सपर्ट्स की मदद ली जा रही है। उसका आईपी एड्रेस ट्रेस कर रहे हैं। पुलिस ने स्कूल में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। पुलिस के साथ एटीएस भी इम मामले की जांच करने में लगी हुई है। पुलिस का मानना है कि यह किसी शरारती तत्व का काम हो सकता है। लेकिन फिर भी जांच जारी है। तेलुगु भाषा में था मेल, स्टाफ ने किया ट्रांसलेट धमकी भरा मेल तेलुगु भाषा में लिखा गया था। स्कूल स्टाफ में मौजूद एक व्यक्ति को तेलुगु भाषा आती थी, उसने मेल को ट्रांसलेट कर इसकी जानकारी अन्य स्टाफ को दी। इसके बाद तुरंत स्कूल खाली कराया गया। उस समय वहां करीब 50 लोग मौजूद थे। स्कूल की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। recent visitors 46

स्कूलों ने 10 प्रतिशत से ज्यादा फीस बढ़ाई है, तो वो पैसा माता-पिता को वापस करना होगा: हाई कोर्ट

जबलपुर  एमपी हाई कोर्ट ने  निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि पर बड़ा फैसला सुनाया। चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने कहा कि अगर स्कूलों ने 2018 या उससे पहले 10 प्रतिशत से ज्यादा फीस बढ़ाई है, तो वो पैसा माता-पिता को वापस करना होगा। यह मामला पैरेंट्स द्वारा स्कूलों की अवैध फीस वसूली के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। कोर्ट ने स्कूलों को फीस जमा करने के लिए भी निर्देश दिए हैं। मामले पर अगली सुनवाई 17 मार्च को होगी। कैसे शुरू हुआ मामला मामले की शुरुआत पैरेंट्स द्वारा निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर करने से हुई। अभिभावकों का कहना था कि स्कूल ज्यादा फीस वसूल रहे हैं। इसके कारण उन्हें आर्थिक स्तर पर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस याचिका पर सुनवाई हुई। नहीं हो रहा नियमों का पालन हस्तक्षेपकर्ता के वकील सुरेंद्र वर्मा ने कोर्ट में दलील दी कि एमपी सरकार द्वारा बनाए गए स्कूल विनिमय अधिनियम 2018 के नियमों का पालन नहीं हो रहा है। पैरेंट्स से एक बार में फीस वसूली के आदेश दिए जा रहे हैं। इस पर कोर्ट ने सवाल किया कि अभिभावक फीस क्यों नहीं जमा कर रहे हैं। याचिकाकर्ताओं के वकील ने जवाब दिया कि अभिभावकों ने 70% फीस तो जमा कर दी है। लेकिन बाकी फीस का मामला कोर्ट में है, इसलिए वो फीस अभी जमा नहीं की गई है। निजी स्कूलों की दलील निजी स्कूलों की तरफ से वकील अंशुमान सिंह ने 13 अगस्त 2024 के हाई कोर्ट के आदेश का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि 2018 के नियम के हिसाब से 10 प्रतिशत फीस बढ़ाने की अनुमति है। उसी के अनुरूप काम किया जा रहा है। वापस करनी होगी फीस- कोर्ट का फैसला इसके बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि निजी स्कूलों को 50 प्रतिशत फीस तीन दिन में और बाकी 50 फीसदी फीस तीन महीने के अंदर जमा करनी होगी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर 2018 या उससे पहले किसी स्कूल ने 10 परसेंट से ज्यादा फीस बढ़ाई है, तो वह ज्यादा वसूली गई राशि पैरेंट्स को वापस करनी होगी। यह फैसला अभिभावकों के लिए एक बड़ी राहत की बात है। इससे स्कूलों की मनमानी पर रोक लगने की उम्मीद है। recent visitors 66

कलेक्टर का बड़ा एक्शन, भिंड के 126 निजी स्कूलों की मान्यता निलंबित, स्कूल एसोसिएशन ने मांगा समय

भिंड  मध्यप्रदेश में एक बार फिर प्राइवेट स्कूलों की लापरवाही पर बड़ी कार्रवाई की गई है। मामला भिंड जिले का है जहां कलेक्टर ने एक साथ 126 प्राइवेट स्कूलों की मान्यता निलंबित कर दी है। स्कूल प्रबंधन द्वारा अपार आईडी बनाने में लापरवाही बरतने के कारण ये एक्शन लिया गया है। कलेक्टर ने ये भी साफ कर दिया है कि जब तक स्कूल प्रबंधन अपार आईडी निर्माण कार्य पूरा कर उसका प्रमाण प्रस्तुत नहीं करेंगे, तब तक उनकी मान्यता बहाल नहीं की जाएगी। कलेक्टर भिण्ड संजीव श्रीवास्तव ने अपार आई डी निर्माण शुरू नहीं किये जाने पर नाराजगी जताते हुए जिले के 126 प्राइवेट स्कूलों की मान्यता निलंबित कर दी है। कलेक्टर ने आदेश जारी कर कहा है कि भारत सरकार की योजना अन्तर्गत नर्सरी से कक्षा 12वीं तक के छात्र/ छात्राओं की अपारआईडी बनाई जा रही है जिसके लिये कई बार बैठकों एवं व्हाट्सएप के माध्यम से निर्देश दिए गए हैं, कई स्कूलों ने उनके यहाँ पढ़ने वाले छात्र/छात्राओं के अपार आईडी के निर्माण का कार्य 29 जनवरी 2025 तक प्रारंभ नहीं किया जिसपर 30 जनवरी 2025 को कार्यालयीन पत्र भेजकर नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया लेकिन आज दिनांक तक  उसका कोई जबाब प्राप्त नहीं हुआ। लापरवाह 126 प्राइवेट स्कूलों की मान्यता निलंबित इसलिए अपार आई डी निर्माण का कार्य प्रारंभ न किये जाने पर जिले के 126 अशासकीय विद्यालय की मान्यता निलंबित कर दी गई है। कलेक्टर ने सभी 126 अशासकीय विद्यालयों के संचालकों को निर्देशित किया है कि वे अध्ययनरत विद्यार्थियों के अपार आईडी के निर्माण का कार्य पूर्ण करने के उपरान्त उसका प्रमाणीकरण प्रस्तुत करें तब ही मान्यता निलंबन से बहाल किये जाने पर विचार किया जायेगा। यह आदेश तत्काल प्रभावशील होगा। अपार आईडी ( APAAR ID) यानि छात्र का 12 अंकों का यूनिक आईडी नंबर अपार आईडी यानी ऑटोमेटिक परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री – APAAR ID। केंद्र सरकार के निर्देश को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकारों ने अपने यहां संचालित सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों से कहा है कि वे हर छात्र की एक अलग खास पहचान बनाने के लिए उनके माता-पिता से सहमति लें। केंद्र सरकार की “वन नेशन वन स्टूडेंट आईडी” योजना के तहत यह अपार आईडी कार्ड बनाया जा रहा है। योजना के तहत प्रत्येक छात्रों को 12 अंकों का एक यूनिक आईडी नंबर जारी किया जा रहा है जिसे अपार आईडी का नाम दिया गया है। अपार आईडी के लिए छात्र आधिकारिक वेबसाइट apaar education.gov.in पर जाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे। हालांकि यह काम स्कूलों द्वारा पूरा किया जाना है। APAAR ID से छात्र को मिलेगी अलग पहचान अपार आईडी आधार नंबर की तरह ही एक तरह का आईडी है। योजना के तहत अपार आईडी में एक विद्यार्थी की बचपन से लेकर हायर एजुकेशन तक की शैक्षणिक गतिविधियों का पूरा ब्योरा दर्ज होगा। इस योजना के तहत हर विद्यार्थी को आजीवन एक खास अपार पहचान मिलेगी। अपार आईडी कार्ड में छात्र का नाम, लिंग, जन्मतिथि, पता, पैरेंट्स का नाम, फोटो के साथ-साथ उनकी शैक्षणिक योग्यता के प्रमाणपत्र , कैरेक्टर सर्टिफिकेट, स्कूल ट्रांसफर सर्टिफिकेट सहित अन्य कई दस्तावेज मौजूद होंगे। इसके अलावा विद्यार्थी की खेल प्रतियोगिता में हिस्सा, स्कॉलरशिप, जीते गए अवॉर्ड, स्किल ट्रेनिंग, एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज, ओलिंपियाड में सहभागिता की जानकारी भी इस आईडी कार्ड में दर्ज कराई जाएगी। अपार आईडी में छात्र का ब्लड ग्रुप, ऊंचाई और वजन जैसी अतिरिक्त जानकारी भी शामिल हो सकती हैं।   recent visitors 59

MP में प्राइवेट स्कूलों की मान्यता की डेट समाप्त, स्कूल बंद होंगे तो आरटीई के तहत पढ़ने वाले बच्चों पर संकट आएगा

भोपाल मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग और राज्य शिक्षा केंद्र के नए नियमों के कारण हजारों निजी स्कूलों के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। निजी स्कूल संगठन के अध्यक्ष अजीत सिंह का कहना है कि विभाग की कठोर शर्तों और प्रशासनिक लापरवाही के चलते कई विद्यालयों होंगे बंद। वजह, शासन ने मान्यता नियम के लिए रजिस्टर्ड किरायानामा की शर्त रखी है, जो स्कूल संचालक पूरी नहीं करना चाह रहे। भोपाल में 1400 स्कूलों में से 232 स्कूलों ने मान्यता के लिए आवेदन नहीं किया है। वहीं राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक हरजिंदर सिंह इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी करने से बच रहे हैं। अगर यह हालात रहे तो 18,000 निजी स्कूल बंद हो सकते हैं, जिससे लाखों बच्चों की शिक्षा प्रभावित होगी, खासकर उन छात्रों की जिनका नाम कम शुल्क वाले विद्यालयों में है। अजीत सिंह के अनुसार, जिन स्कूलों ने आवेदन किया है, उनमें भी कई स्कूलों के पास दस्तावेज़ पूरे नहीं हैं या वे नए नियमों का पालन नहीं कर पा रहे हैं। इस मुद्दे पर सरकार और विभाग की चुप्पी बनी हुई है। recent visitors 40

एमपी में निजी स्कूलों के लिए बदले फीस के नियम, फीस बढ़ाने के लिए जिला समिति की अनुमति लेनी होगी

 भोपाल  मध्यप्रदेश में निजी स्कूलों में बस किराया और ट्यूशन फीस को लेकर बड़ा अपडेट है। अब निजी स्कूल अलग से बस फीस नहीं ले पाएंगे और इसे भी वार्षिक का ही भाग माना जाएगा। मध्यप्रदेश निजी विद्यालय अधिनियम-2024 सदन से पारित होने के बाद राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने मुहर लगा दी है। नए नियम के तहक बिना अनुमति अब 10% से अधिक फीस नहीं बढ़ेगी। ₹25000 से ज्यादा सालाना फीस लेने वाले स्कूलों को फीस बढ़ाने के लिए जिला समिति की अनुमति लेनी होगी। इसी फीस में बस का शुल्क भी शामिल होगा। नई कानून पर राज्यपाल ने मुहर लगाई है। मध्यप्रदेश के 18000 स्कूल इसके दायरे में आएंगे। इस नए नियम से अभिभावकों को बड़ी राहत मिलेगी। फीस नियंत्रण पर अभिभावकों को राहत यह विधेयक निजी स्कूलों की फीस नीति को नियमित करने और पारदर्शिता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न सिर्फ अभिभावकों के आर्थिक बोझ को कम करेगा, बल्कि शिक्षा में समानता और सभी बच्चों को शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित करेगा। सरकार के इस प्रयास से शिक्षा क्षेत्र में बड़े बदलाव की उम्मीद है, जो छात्रों और अभिभावकों के हित में साबित हो सकते हैं। यह विधेयक निजी स्कूलों की फीस नीति को नियमित करने और पारदर्शिता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रदेश में 16 हजार स्कूल ऐसे आपको बता दें कि मध्यप्रदेश में करीब 34,652 निजी स्कूल हैं। इनमें से लगभग 16 हजार ऐसे स्कूल हैं, जिनकी किसी भी कक्षा में वार्षिक फीस 25 हजार रुपये या इससे कम है। मध्य प्रदेश निजी विद्यालय अधिनियम-2017 के तहत वर्ष 2020 में नियम बनाए गए हैं। इसके अनुसार सरकार को यह अधिकार दिया गया कि वह निजी स्कूलों की फीस और अन्य विषयों पर निर्णय लेकर फीस विनियमन कर सकेगी। नए प्रवाधानों में क्या नए प्रावधानों के अनुसार 10 प्रतिशत वार्षिक फीस बिना अनुमति के बढ़ाई जा सकती है लेकिन इससे अधिक वृद्धि के लिए जिला समिति की अनुमति लेना जरूरी होगा। स्कूल 25 हजार रुपये तक फीस लेने वाले स्कूलों को शिक्षकों के वेतन सहित अन्य व्यवस्थाओं के लिए वित्तीय प्रबंधन में परेशानी होती है। आपको बता दें कि यदि दस प्रतिशत वृद्धि करते हैं तो अभिभावकों पर अधिक भार नहीं पड़ता है, इसलिए नई उपधारा प्रस्तावित की गई है कि 25 हजार रुपये वार्षिक फीस लेने वाले स्कूल अधिनियम के दायरे से बाहर रहेंगे। साथ ही परिवहन फीस स्कूलों की वार्षिक फीस का भाग होगा। अभी स्कूल इसे वार्षिक फीस से अलग लेते हैं और इसमें वृद्धि भी अधिक होती है। इससे वार्षिक फीस नियंत्रित रहेगी। समिति के अध्यक्ष होंगे शिक्षा मंत्री नए नियमों के अनुसार फीस बढ़ाने पर आपत्ति की अपील सुनने मंत्री की अध्यक्षता में समिति अधिनियम में यह संशोधन भी प्रस्तावित किया गया है कि वार्षिक फीस में 15 प्रतिशत से अधिक वृद्धि के आदेश के विरुद्ध अपील सुनने के लिए राज्य स्तरीय समिति होगी। इसके अध्यक्ष स्कूल शिक्षा मंत्री रहेंगे। समिति को यह अधिकार रहेगा कि वह विभागीय समिति द्वारा किसी स्कूल पर लगाए गए अर्थदंड को घटा या बढ़ा सकेगी। अलग से बस फीस नहीं ले पाएंगे प्राइवेट स्कूल मध्यप्रदेश सरकार ने  मध्य प्रदेश निजी विद्यालय अधिनियम-2024 में संशोधन के लिए प्रस्तुत विधेयक पेश किया। इसमें ये प्रावधान किया गया है कि प्राइवेट स्कूलों के द्वारा बस फीस अलग से वसूली नहीं जा सकेगी और बस फीस को स्कूल की वार्षिक फीस का ही हिस्सा माना जाएगा। मध्य प्रदेश निजी विद्यालय अधिनियम-2024 सदन से पारित होने के बाद राज्यपाल मंगुभाई पटेल के पास अनुमति के लिए भेजा जाएगा और वहां से मंजूरी मिलते ही प्रभावी हो जाएगा। recent visitors 54

स्कूलों को बम से उड़ाने की मिली धमकी, नोएडा पुलिस, बम स्कवॉड और सभी बड़े अधिकारी स्कूलों में पहुंचकर छानबीन कर रहे

नोएडा उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर में एक बार फिर स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। यह धमकी ई मेल के जरिये मिली है। धमकी भरी मेल की जानकारी जैसे ही स्कूल प्रबंधक को मिली उन्होंने तुरंत इसकी सूचना कमिश्नरेट पुलिस को दी। सूचना मिलने के तुरंत बाद ही पुलिस टीम, दमकल विभाग और बम निरोधक दस्ता मौके पर पहुंच गई। टीम ने स्कूल को खाली करवा कर छानबीन शुरु कर दी। इसमें नोएडा के कई नामी स्कूल शामिल है। नोएडा में नामी चार स्कूलों को आज सुबह एक साथ बम से उड़ाने की धमकी मिली है। यह धमकी बुधवार की सुबह ईमेल के माध्यम से दी गई हैं। धमकी भरी आयी ईमेल मिलने के बाद मौके पर हड़कंप मच गया। स्कूलों में डर का माहौल उत्पन्न हो गया। आनन फानन में स्कूल प्रबंधकों ने इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी गई। धमकी भरे ईमेल की सूचना मिलते ही कमिश्नरेट पुलिस मौके पर पहुंच गई। इसके बाद टीम ने तत्काल स्कूल के एक-एक कोने में छानबीन शुरु कर दी। जिन स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी भरे ईमेल आया है, उनमें स्टेप बाय स्टेप स्कूल , द हेरिटेज स्कूल , ज्ञानश्री स्कूल  और मयूर स्कूल का नाम शामिल है। नोएडा कमिश्नरेट पुलिस की टीम ने घटनास्थल पर पहुंच कर जांच पड़ताल शुरु कर दी है। दमकल विभाग और बम निरोधक दस्ता के साथ स्थानीय पुलिस मौके पर छानबीन कर रहे है। स्कूलों को खाली करवा कर दिया गया है। कई स्कूलों के बच्चों को सुरक्षित जगह पर इकठ्ठा किया गया है। अभी तक की मिली जानकारी के मुताबिक, किसी स्कूल में कोई आपत्तिजनक सामान नही मिला है। बम स्क्वायड के साथ कमिश्नरेट पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी स्कूलों में पहुंच कर छानबीन कर रहे है। गौतमबुद्ध नगर कमिश्नरेट पुलिस प्रवक्ता ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि स्टेप बाय स्टेप स्कूल, द हेरिटेज स्कूल, ज्ञानश्री स्कूल और मयूर स्कूल में स्पेम ईमेल द्वारा बॉम्ब थ्रेट प्राप्त होने पर तत्काल अलग अलग पुलिस, बॉम्ब स्क्वाड, फायर ब्रिगेड, डॉग स्क्वाड, बीडीडीएस टीम से सभी जगह चेकिंग करा ली गई है। सब जगह नार्मल है। कई स्कूल में क्लासेज आरंभ हो गई हैं। साइबर टीम द्वारा ईमेल की विवेचना की जा रही है। recent visitors 43