एपी गज़ब फर्जी डॉक्टर ने सरकार को लगाया लाखों का चूना, एक साथ तीन जिलों में करता रहा नौकरी

Bizarre case from AP: Fake doctor swindles the government out of lakhs; held jobs in three districts simultaneously. मध्यप्रदेश में फर्जीवाड़े का एक बड़ा मामला सामने आया है। शहडोल के जयसिंहनगर विकासखंड स्थित उफरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ तथाकथित डॉक्टर महेश चंद शर्मा के रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद एक-एक कर चौंका देने वाले खुलासे हो रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि तथाकथित फर्जी डॉक्टर एक ही समय में प्रदेश के तीन जिलों में नौकरी कर रहा था और वेतन ले रहा था। जानकारी के मुताबिक वो अब तक तीनों जिलों में मिलाकर 64 लाख रुपये के करीब वेतन ले चुका है। तीन जिलों में एक साथ नौकरीमध्यप्रदेश के शहडोल, खरगोन और श्योपुर तीनों जिलों में डॉक्टर महेश चंद शर्मा की अलग-अलग कर्मचारी आईडी, अलग-अलग पैन नंबर और अलग-अलग आधार संबंधी विवरण दर्ज थे, लेकिन एनएचएम और स्वास्थ्य विभाग की जांच प्रणाली इस फर्जीवाड़े को वर्षों तक पकड़ नहीं सकी। शुरुआती आंकलन के अनुसार आरोपी ने वेतन के रूप में सरकार को करीब 64 लाख रुपए की आर्थिक क्षति पहुंचाई है। तीन पहचान, नहीं पकड़ पाया सिस्टमजांच में सामने आया कि आरोपी ने प्रत्येक जिले में अलग-अलग दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति हासिल की। सबसे बड़ा सवाल यह है कि शहडोल में आधार का अधूरा नंबर जमा होने के बावजूद नियुक्ति कैसे मिल गई और दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ। घर बैठे लगती रही ऑनलाइन हाजिरीविभागीय सूत्रों के अनुसार आरोपी उफरी स्वास्थ्य केंद्र में शायद ही कभी दिखाई देता था। वह सार्थक ऐप के माध्यम से जिले और कई बार प्रदेश की सीमा से बाहर रहकर भी अपनी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करा देता था। ब्लॉक और जिला स्तर के अधिकारियों के औचक निरीक्षण में भी वह कई बार अनुपस्थित मिला, जिसके कारण नोटिस भी जारी किए गए, लेकिन इसके बावजूद उसके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। लाखों रुपये वेतन लिया पड़ताल में सामने आया है कि आरोपी को तीनों जिलों से प्रतिमाह लगभग 50 से 55 हजार रुपए मानदेय मिलता था। अनुमानित भुगतान इस प्रकार है- इस प्रकार आरोपी ने तीनों जिलों से मिलाकर करीब 64 लाख रुपए का सरकारी भुगतान प्राप्त किया। स्वास्थ्य मंत्री बोले- एफआइआर भी होगी, वसूली भीमामले पर संज्ञान लेते हुए प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने शहडोल प्रवास के दौरान सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि आरोपी की सेवा समाप्त करने के साथ उसके द्वारा लिए गए पूरे वेतन की वसूली की जाएगी और उसके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी। साथ ही उन अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होगी, जिन्होंने दस्तावेजों का सत्यापन किए बिना नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की, ऑनलाइन उपस्थिति पर निगरानी नहीं रखी और समय रहते अनियमितताओं की जानकारी उच्च अधिकारियों तक नहीं पहुंचाई। recent visitors 5

स्वास्थ्य मंत्री के प्रभार में भी नहीं सुधरी व्यवस्था , वार्ड बॉय बना ‘डॉक्टर’, लापरवाही से गई जान

स्वास्थ्य मंत्री के प्रभार में भी नहीं सुधरी व्यवस्था , वार्ड बॉय बना ‘डॉक्टर’, लापरवाही से गई जान

Even under the Health Minister, the situation hasn’t improved; a ward boy becomes a ‘doctor,’ resulting in a life lost due to negligence. शहडोल। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री के प्रभार वाले शहडोल जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत एक बार फिर उजागर हो गई है। पाली रोड स्थित एक निजी अस्पताल में डॉक्टर की अनुपस्थिति के बीच कथित तौर पर वार्ड बॉय और स्टाफ द्वारा इलाज किए जाने के बाद एक मरीज की मौत हो गई। इस घटना ने न सिर्फ निजी अस्पताल प्रबंधन बल्कि स्वास्थ्य मंत्री की निगरानी और जिम्मेदारी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों के अनुसार, 16 दिसंबर की रात करीब 11:30 बजे गुरुनानक चौक निवासी कमलेश जैन को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि इमरजेंसी में मौजूद एक युवक ने स्वयं को डॉक्टर बताकर इलाज शुरू किया, जबकि दवाइयां अस्पताल की महिला स्टाफ द्वारा लिखी गईं। उस वक्त अस्पताल में कोई योग्य चिकित्सक मौजूद नहीं था, जो स्वास्थ्य विभाग के नियमों का खुला उल्लंघन है। परिजनों का कहना है कि इलाज के दौरान मरीज की हालत लगातार बिगड़ती रही, लेकिन समय पर सीपीआर और विशेषज्ञ चिकित्सा सहायता नहीं दी गई। उचित इलाज के अभाव में कुछ ही देर में मरीज की मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि यदि मौके पर डॉक्टर मौजूद होता तो शायद मरीज की जान बचाई जा सकती थी। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब शहडोल जिला स्वयं प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री के प्रभार में है। इसके बावजूद निजी अस्पतालों की मनमानी, डॉक्टरों की गैरहाजिरी और लचर निगरानी व्यवस्था ने सरकार की स्वास्थ्य नीतियों की पोल खोल दी है। सवाल यह उठता है कि जब मंत्री स्वयं जिले के प्रभारी हैं, तब ऐसी गंभीर लापरवाही कैसे हो रही है? घटना के बाद आक्रोशित परिजन कोतवाली पहुंचे और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। उपनिरीक्षक उपेंद्र त्रिपाठी के अनुसार, शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है और तथ्यों के सामने आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब देखना यह होगा कि सरकार और विभाग इस मामले में सख्त कार्रवाई कर व्यवस्था सुधारते हैं या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। recent visitors 57

गजब MP:फिर बड़ा घोटाला, ग्राम पंचायत ने 50 रुपये में खरीदी 1 ईंट 2500 ईंटों का बिल 1.25 लाख

गजब MP:फिर बड़ा घोटाला, ग्राम पंचायत ने 50 रुपये में खरीदी 1 ईंट 2500 ईंटों का बिल 1.25 लाख

Amazing MP Another big scam, Gram Panchayat bought 1 brick for 50 rupees, bill for 2500 bricks was 1.25 lakh शहडोल। MP Another big scam प्रदेश के मुखिया के चहेत मैदानी अधिकारी क्या कर रहे हैं। इसकी जानकारी मीडिया में आ ही जाती है। जिला स्तर पर तैनात अधिकारी कैसे अपनी जेब गरम करते हैं, इसकी परतें आए दिन खुल रही हैं। यानि उनके कारनामों की फाइलें सच उगल रही हैं। प्रदेश के आदिवासी जिले शहडोल की ग्राम पंचायतें इन दिनों काफी चर्चा में हैं. कभी फलों और ड्राईफ्रूट के नाम पर लाखों का बिल बना दिया जाता है तो कभी ईंट की कीमत सुनकर लोग दंग रह जाते हैं. ताजा मामला बुढार ब्लॉक की भाटिया ग्राम पंचायत का है. यहां 2,500 ईंट खरीदने का बिल 1.25 लाख रुपये में पास कर दिया गया है. जबकि बाजार में यही ईंट 5-6 रुपये में आसानी से मिल जाती है. इस हिसाब से देखें तो पंचायत ने एक ईंट 50 रुपये में खरीदी है यह बिल पैरीबहरा गांव के चेतन प्रसाद कुशवाहा के नाम पर बना है. इसमें लिखा गया है कि ईंटें पटेरा टोला पर मौजूद आंगनवाड़ी भवन की बाउंड्री वॉल बनाने के लिए खरीदी गईं. इस बिल पर भाटिया पंचायत के सरपंच और सचिव दोनों के दस्तखत भी मौजूद हैं. अब यह बिल सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. Read More: टाइगर रिजर्व में दुर्लभ प्रजाति का पक्षी सैंड ग्राउंस मौजूद MP Another big scam यह कोई पहला मामला नहीं है. कुछ हफ्ते पहले ही कुदरी ग्राम पंचायत में सिर्फ दो पन्नों की फोटोकॉपी कराने के लिए 4,000 रुपये का बिल पास किया गया था. वहीं जुलाई में भदवाही गांव की पंचायत में जल गंगा संवर्धन अभियान के दौरान सिर्फ एक घंटे में 14 किलोग्राम ड्राईफ्रूट, 30 किलोग्राम नमकीन और 9 किलोग्राम फल खा लिए जाने का बिल सामने आया था. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिन दुकानों से यह सामान खरीदे जाने के बिल लगे, वे असल में उस चीज का कारोबार करती ही नहीं. उदाहरण के तौर पर, काजू-बादाम बेचने वाली दिखाई गई एक दुकान दरअसल छोटी-सी किराना दुकान निकली, जहां ना तो बिल बुक थी, ना त्रस्ञ्ज नंबर था. यहां तक कि स्टॉक में एक किलोग्राम ड्राईफ्रूट भी नहीं मिले. इसी तरह, घी और फल का बिल जिस दुकान से जारी हुआ, वहां हकीकत में रेत-पत्थर और ईंट बिकती हैं. ड्राईफ्रूट घोटाले की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि मऊगंज जिले से एक और मामला सामने आ गया. यहां भी जल गंगा संवर्धन अभियान सिर्फ 40 मिनट चला और खर्च दिखाया गया 10 लाख रुपये से ज्यादा. बिलों में टेंट, मिठाई, गद्दे, चादर से लेकर राशन तक सबकुछ शामिल था. खास बात ये कि सारे बिल एक ही रहस्यमयी प्रदीप एंटरप्राइजेस के नाम से बने थे, जबकि असल में यह एक इलेक्ट्रॉनिक सामान बेचने वाली दुकान निकली। शहडोल के कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने इन मामलों को गंभीर मानते हुए अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए हैं. उन्होंने क्लस्टर-लेवल अधिकारियों को 10-12 पंचायतों की रोज जांच करने के आदेश दिए, ताकि यह पता चल सके कि ये बिल लापरवाही में बने या फिर जानबूझकर धोखाधड़ी हुई है। recent visitors 139

नेताओं के पेट में दर्द क्यों? रेत खदान के समर्थन में उतरे पंचायत सरपंच व ग्रामीण

Why do leaders have stomach pain? Panchayat sarpanch and villagers came out in support of sand mine शहडोल। आमतौर पर आपने रेत के उत्खनन और परिवहन का विरोध करते देखा या सुना होगा, लेकिन मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में ठीक इसके उलट हो रहा है। यहां रेत के कारोबार के समर्थन में तीन पंचायतों के सरपंच सहित ग्रामीण सड़क पर उतर कर रेत के कारोबार का समर्थन कर नेताओं का विरोध कर रहे हैं। जिले के जनपद पंचायत बुढ़ार के ग्राम पंचायत चंदपुर पंचायत के लुकामपुर कुनूक नदी में ग्लोबल सहकार कंपनी की रेत खदान ठेका है। इस खदान ने क्षेत्र के ग्रामीण बेरोजगार युवाओं को रोजगार दिया है, जो कि क्षेत्र के कुछ नेताओं को यह नागवार गुजर रहा है। यहां कुछ कथित नेता विरोध करते हुए रेत की खदान को बंद कराने में आमादा है। इसी बात से नाराज ग्राम पंचायत कोलुहा सरपंच धन्नू कोल, भोगडा पंचायत सरपंच नागेश्वरी सिंह, चंदपुर पंचायत सरपंच शिव प्रसाद सहित ग्रामीणों ने रेत खदान के समीप नेताओं की इस हरकत का विरोध किया। आदिवासी सरपंचों ने बताया कि पेशा एक्ट के तहत प्रस्ताव पास कराकर खदान स्वीकृत के लिए भेजा था। अब जब खदान चालू हो गई पीएम आवास व अन्य विकास कार्यों के लिए रेत लगभग फ्री में मिल रही है, तो कथित नेताओं के पेट दर्द क्यों हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जो खदान संचालक क्षेत्र के बेरोजगारो को रोजगार दे रही, उस रेत खदान को किसी कीमत पर बंद नहीं होने देंगे, उसके लिए चाहे कुछ भी करना पड़े। recent visitors 143