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स्वतंत्रता दिवस के मौके पर रायपुर में सुबह हल्के बादल छाए हुए, कई जगह जमकर बरसेंगे बादल
रायपुर स्वतंत्रता दिवस के मौके पर रायपुर में सुबह हल्के बादल छाए हुए हैं। रायपुर के पुलिस लाइन परेड ग्राउंड में ध्वजारोहण से पहले मौसम सुहावना बना हुआ है। हालांकि रायपुर में मौसम के सामान्य बने रहने की संभावना है। जबकि मौसम विभाग के अनुसार अगले पांच दिनों तक सरगुजा संभाग में बारिश की गतिविधि बनी रहेगी तथा इस क्षेत्र के कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना है। बुधवार को प्रदेश भर में सर्वाधिक वर्षा पटना (जिला कोरिया) में 5 सेमी बारिश हुई। बतादें कि छत्तीसगढ़ में एक जून से लेकर 13 अगस्त तक 801.2 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य से नौ प्रतिशत ज्यादा है।बुधवार सुबह से ही रायपुर सहित प्रदेश भर में आंशिक रूप से बादल छाए रहे। दोपहर बाद मौसम का मिजाज बदला और रायपुर सहित कई क्षेत्रों में बारिश हुई। बादल छाए रहने व बारिश के चलते मौसम में भी ठंडकता बनी रही। रायपुर का अधिकतम तापमान 31.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 0.5 डिग्री ज्यादा रहा। मौसम विज्ञानियों के अनुसार अभी अगस्त का आधा महीना बाकी बचा है और इन पंद्रह दिनों में अच्छी बारिश के आसार बने हुए है। मौसम विशेषज्ञ एचपी चंद्रा ने बताया कि मानसून द्रोणिका मध्य समुद्र तल पर बीकानेर, रांची और उसके बाद पूर्व दक्षिण पूर्व की ओर पूर्व मध्य बंगाल की खाड़ी तक स्थित है। एक ऊपरी हवा का चक्रीय चक्रवाती परिसंचरण दक्षिण बांग्लादेश और उससे लगे गंगेटिक पश्चिम बंगाल के ऊपर 4.5 किमी ऊंचाई तक फैला है। इसके प्रभाव से गुरुवार को प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में हल्की से मध्यम वर्षा होगी। उत्तर छत्तीसगढ़ में भारी वर्षा की संभावना है। recent visitors 75
भगवान महाकाल के साथ मनाया स्वतंत्रता का जश्न, भस्म आरती में दिखा, अर्पित किए तीन रंग के वस्त्र
उज्जैन ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर में भी भस्म आरती के दौरान स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाया गया। इस दौरान भगवान महाकाल को तीन रंगों के वस्त्र अर्पित किए गए। इस दौरान बड़ी संख्या में भक्त मौजूद थे।भगवान महाकाल की भस्म आरती में शामिल होने के लिए देर रात से ही श्रद्धालुओं की कतार लगना आरंभ हो गई थी। सुबह स्नान और अभिषेक के साथ भस्मारती की गई। भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। कल रात से ही महाकाल मंदिर पर आकर्षक रोशनी भी की गई है। मंदिर तीन रंगों की रोशनी से रोशन हो रहा है। महाकाल मंदिर के शिखर पर भी राष्ट्रध्वज लगाया गया। पंडितों ने जैसे ही सुबह महाकाल मंदिर के कपाट खोले भक्त दर्शनों के लिए उमड़ पड़े। इसके बाद विशेष पूजा और आरती की गई। महाकाल मंदिर के पुजारियों के अनुसार सभी पर्व और राष्ट्रीय त्योहार महाकाल मंदिर में भी पूरे उत्साह के साथ मनाए जाते हैं। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु महाकाल मंदिर पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मंदिर समिति और प्रशासन ने दर्शनों के विशेष इंतजाम किए हैं। recent visitors 116
मालवा निमाड़ में तेज बारिश की कमी सोयाबीन की फसल पर असर पड़ रहा
मालवा-निमाड़ देश में सर्वाधिक सोयाबीन उत्पादन करने वाला राज्य मध्य प्रदेश है। राज्य में अधिकांश सोयाबीन मालवा-निमाड़ में उपजता है, किंतु इस बार सोयाबीन संकट में है। कई दिनों से क्षेत्र में तेज बारिश नहीं हुई है। इससे फसलों में इल्लियों और कीट का प्रकोप हो गया है। एक तरफ तेज बारिश न होना संकट का कारण है, वहीं रिमझिम वर्षा भी दिक्कत पैदा कर रही है। रिमझिम के कारण नमी किसानों का कहना है कि रिमझिम बारिश की वजह से फसलों पर हर समय नमी बनी रहती है। इस कारण किसान अभी खेतों में कीटनाशक का छिड़काव नहीं कर पा रहे हैं। बताया जाता है कि यह कीटनाशक पत्तियों से धुलकर जमीन पर गिर जाता है। जानिए मालवा-निमाड़ में किस जिले में सोयाबीन की क्या है स्थिति झाबुआ जिले में 1 लाख 89 हजार हेक्टेयर में खरीफ फसल की बोवनी की गई है। रिमझिम बारिश व मौसम में नमी बने रहने से सोयाबीन के साथ कपास, मूंगफली, उड़द जैसी फसलों में छेदक इल्लियों का प्रकोप है। इससे बचने के लिए किसान दवाइयों का छिड़काव कर रहे हैं। खरगोन जिले में इस साल 80 हजार हेक्टेयर में सोयाबीन की बोवनी हुई है। किसान श्यामसिंह पंवार का कहना है कि जल्द ही वर्षा नहीं रुकी तो फसल खराब हो जाएगी। देवास जिले में सोयाबीन फसल का रकबा लगभग 3.45 लाख हेक्टेयर है। तेज वर्षा के अभाव, सतत रिमझिम का दौर चलने से इल्ली व अन्य कीट का असर फसल पर पड़ रहा है। बागली के उन्नत किसान मुकेश गुप्ता के अनुसार इस सीजन में इल्ली व अन्य कीटों को पनपने के लिए अनुकूल मौसम अधिक दिनों तक मिला है। अब नियंत्रण के सिर्फ दो ही उपाय हैं या तो तेज बारिश का दौर चले या फिर कुछ दिन धूप खिले और बचे किसान इस खुले मौसम में कीटनाशक का छिड़काव कर लें। सहायक संचालक कृषि लोकेश गंगराड़े का कहना है कि समय पर कीटनाशक छिड़काव नहीं हो पाने से इल्लियों का प्रकोप फसलों में है, लेकिन चिंताजनक स्थिति सामने नहीं आई है। कृषि विभाग की टीमें अलग-अलग क्षेत्रों में भ्रमण कर फसलों की स्थिति पर नजर रख रही हैं। -लोकेश गंगराड़े, सहायक संचालक कृषि तने को पहुंचाते हैं नुकसान धार जिले में सोयाबीन फसल पर तना मक्खी, गर्डर बीटल और व्हाइट ग्रब यानी गोबर के कीड़े का प्रकोप है। कृषि विज्ञानी डाॅ. जीएस गाठिया ने बताया कि तना मक्खी से लेकर गर्डर बीटल व अन्य कीटों का अपना जीवन चक्र होता है। जुलाई के अंतिम सप्ताह और अगस्त के प्रथम सप्ताह में अंडों से इल्ली निकालने का दौर शुरू होता है और ये इल्लियां फसल को नष्ट करती हैं। जिले में करीब 3 लाख 10 हेक्टेयर में बोई गई सोयाबीन की फसल पर असर पड़ रहा है। अधिकांश कीट ऐसे हैं जो तने को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे सोयाबीन के उत्पादन में गिरावट की स्थिति बनती है। लगातार नमी व बादल छाए रहने से इल्लियों का प्रकोप फसलों में बढ़ जाता है। कृषि वैज्ञानिकों की टीम गांव-गांव घूमकर फसलों का निरीक्षण कर रही है। साथ ही किसानों को दवा छिड़काव के बारे में जानकारी दी जा रही है।-नगीन रावत, कृषि उपसंचालक, झाबुआ शाजापुर जिले में यह है हाल शाजापुर जिले में इस साल दो लाख 70 हजार हेक्टेयर में सोयाबीन की बोवनी हुई है। बारिश की कमी के चलते के पौधों की बढ़वार तो हो रही है लेकिन छेदक इल्लियों व अन्य कीटो के कारण फसल प्रभावित हो रही है। किसान हेमराज, राजाराम वर्मा का कहना है कि छेदक इल्लियों के कारण फसल खराब हो रही है। तेज बारिश नहीं हुई तो फसल खराब हो जाएगी। निगरानी सहित फसल बचाने के सुझाव कृषि विज्ञानी डाॅ. जीआर अम्बावतिया ने बताया कि अंचल के किसानों को निगरानी सहित फसल बचाने के सुझाव दे रहे हैं। इल्लियों के नियंत्रण के उपाय- तेज बारिश हो या तेज धूप खिले, किसान कीटनाशक का छिड़काव समय पर करें। खंडवा जिले में दो लाख 10 हजार हेक्टेयर से अधिक रकबे में सोयाबीन की बोवनी की गई है। छेदक इल्लियों से बचाव के लिए किसान दवा का छिड़काव कर रहे हैं। उप संचालक कृषि कैलाश वास्कले का कहना है कि जिले में फसलों की स्थिति ठीक है। बारिश से फूल पर सोयाबीन के परगना धुलने से फलियां कम बैठने का संभावना है। recent visitors 100
प्रशासन ने शिफ्ट की मजार करीब है मंदिर, हिंदू जागरण मंच ने कार्यवाही पर उठाए सवाल
इंदौर बियाबानी चौराहा स्थित मजार को सरकारी जमीन पर शिफ्ट करने का मामला हाई कोर्ट पहुंच गया है। इसे लेकर एक जनहित याचिका प्रस्तुत हुई है। इसमें कहा है कि नगर निगम और जिला प्रशासन ने बगैर तथ्यों की जांच किए मजार को सरकारी जमीन पर शिफ्ट कर दिया। मजार की शिफ्टिंग से पहले क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति की जांच भी नहीं की गई। यह भी नहीं देखा गया कि पास ही में राम मंदिर है और राम नवमी के अवसर पर प्रतिवर्ष वहां बड़ा आयोजन होता है। याचिका में सवाल उठाया गया है कि प्रशासन बताए कि किस नियम और कानून के तहत के तहत मजार की सरकारी जमीन पर शिफ्टिंग की गई है। हाई कोर्ट में यह जनहित याचिका हिंदू जागरण मंच के संजय भाटिया ने एडवोकेट आशुतोष शर्मा के माध्यम से दायर की है। याचिका में यह कहा गया याचिका में मजार को शासकीय भूमि से हटाने और नियम विरुद्ध कार्य करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की गई है। बियाबानी चौराहा स्थित यह मजार लंबे समय से यातायात में बाधा बनी हुई थी। मजार की वजह से अक्सर चौराहा पर जाम लगता था। 8 अगस्त को जिला प्रशासन ने नगर निगम की मदद से उक्त मजार को सेवालय अस्पताल के पास खाली पड़ी सरकारी जमीन पर शिफ्ट कर दिया था। याचिकाकर्ता का कहना है कि उनका विरोध शिफ्टिंग को लेकर नहीं है। यह विरोध मजार को शासकीय जमीन पर शिफ्ट करने को लेकर है। recent visitors 118
स्वतंत्रता दिवस पर प्रदेश की जेल से रिहा होंगे 177 बंदी, पांच महिलाएं भी शामिल
भोपाल स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश की जेलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 177 कैदियों को रिहा कर दिया जाएगा। इन बंदियों में 05 महिलाएं भी शामिल हैं। इन बंदियों को मध्यप्रदेश शासन, जेल विभाग की रिहाई नीति-2022 के अंतर्गत सजा में छूट प्रदान की जा रही है। हालांकि रिहा होने वाले बंदियों में बलात्कार, पोक्सो आदि के प्रकरण में दंडित कोई कैदी शामिल नहीं है। जेल में मिला प्रशिक्षण जेल विभाग ने बताया कि इन बंदियों को जेल में सजा काटने के दौरान टेलरिंग, कारपेन्ट्री, लौहारी, भवन मिस्त्री, भवन सामग्री निर्माण आदि का प्रशिक्षण प्रदान किया गया है, ताकि रिहा होने के पश्चात ये जीवकोपार्जन के साधन अर्जित कर सकें। गौरतलब है कि सरकार हर साल 15 अगस्त को कुछेक कैदियों को उनके अच्छे आचरण और अन्य मापदंडों के आधार पर रिहा करती है। कहां, कितने कैदियों को मिलेगी आजादी जेल विभाग द्वारा जारी सूची के मुताबिक 15 अगस्त को सतना जेल से सर्वाधिक 24 कैदी रिहा किए जाएंगे। वहीं जबलपुर के केंद्रीय कारागार से 20 कैदियों को रिहाई मिलेगी। इसके अलावा सागर व उज्जैन की जेल से 19-19, इंदौर जेल से 18, ग्वालियर जेल से 16, भोपाल व नरसिंहपुर की जेल से 15-15, रीवा जेल से 14, बड़वानी जेल से 07, नर्मदापुरम जेल से 06 और टीकमगढ़ जेल से 04 कैदी रिहा किए जाएंगे। recent visitors 87
ग्वालियर में बने 12 हजार 500 तिरंगे मध्यप्रदेश के 16 राज्यों में फहराए जाएंगे
ग्वालियर सभी मानकों को पूरा कर ग्वालियर में तैयार राष्ट्रीय ध्वज केरल कर्नाटक समेत 16 राज्यों में फहराया जाएगा। अब तक 12 हजार 500 तिरंगे तैयार कर इन राज्यों में भेजे जा चुके हैं। मध्य भारत खादी संघ अब तक 14 राज्यों में इनको भेजता था। इस बार दो राज्य बढ़ गए। सेल और उत्पादन में बढ़ोतरी ग्वालियर में तैयार होने वाले राष्ट्रीय ध्वज की सेल और उत्पादन में भी वृद्धि हुई है। पिछले साल के मुकाबले इस साल 5000 ज्यादा आर्डर मिले। इस बार केरल और कर्नाटक राज्यों ने तिरंगे के आर्डर भेजे। 14 अगस्त तक भारत खादी संघ ग्वालियर से 16 राज्यों में 12 हजार 500 तिरंगे भेजे जा चुके हैं। मध्य भारत खादी संघ द्वारा बनाए जाने वाले यह तिरंगे खादी ग्रामोद्योग आयोग भारत सरकार को जाते हैं। यहां से ये तिरंगे सचिवालय, लाल किला, राष्ट्रपति भवन सहित सभी सरकारी कार्यालय में भेजे जाते हैं। संघ में 196 लोगों की टीम इन तिरंगों को तैयार करती है। उच्च मानक वाला तिरंगा होता है तैयार देश में केवल तीन ही ऐसे संस्थान हैं, जहां उच्च मानक वाला तिरंगा तैयार किया जाता है। इनमें से एक ग्वालियर शहर का मध्य भारत खादी संघ है। जहां ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड का ISI प्रमाणित भारतीय तिरंगा बनता है। झंडा बनने की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है। इसमें कपास की कताई, बुनाई, डाई सहित नौ मानकों पर खरा उतरने के बाद एक तिरंगा झंडा आकार लेता है। 55 दिन की मेहनत के बाद तैयार होता है तिरंगा धागे से झंडा बनने के इस सफर में कई कारीगरों और बुनकरों की कला के साथ ही 55 दिन की कड़ी मेहनत भी लगती है। ग्वालियर के मध्य भारत खादी संघ में बने भारतीय तिरंगा देश में कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक फहराया जा चुका है। इन राज्यों में जाते हैं तिरंगे मध्यप्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, छत्तीसगढ़, बिहार, बंगाल, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश शामिल हैं। मध्य भारत खादी संघ की यूनिट में रोज 150 झंडे बन रहे हैं। यहां धागा कातने से लेकर, स्टेचिंग, कटिंग, कलर आदि का काम चल रहा है। खादी संघ पिछले 25 साल से तिरंगा झंडा तैयार कर रहे हैं। वहीं बीआइएस का लाइसेंस 2016 से मिला है। recent visitors 101