गाजा में इजरायल की घातक एयर स्ट्राइक, नमाज पढ़ रहे 100 से अधिक फिलिस्तीनियों की मौत

गाजा इजरायल द्वारा गाजा में लगातार बमबारी और एयर स्ट्राइक की जा रही है. अब एक ताजा हवाई हमले में 100 से अधिक फिलिस्तीनी नागरिकों के मारे जाने की खबर सामने आ रही है. फ़िलिस्तीनी समाचार एजेंसी WAFA के हवाले से रॉयटर्स ने बताया कि पूर्वी गाजा में विस्थापित लोगों के आवास वाले एक स्कूल को निशाना बनाकर किए गए इजरायली हमले में 100 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं जबकि दर्जनों लोग घायल हुए हैं. हमास द्वारा संचालित गाजा सरकार के मीडिया कार्यालय के अनुसार, हमला उस समय हुआ जब लोग नमाज़ अदा कर रहे थे. कार्यालय ने एक बयान में कहा, "इजराइली हमलों ने फ़ज्र (सुबह) की नमाज़ अदा करते समय विस्थापित लोगों को निशाना बनाया, जिसके कारण हताहतों की संख्या में तेज़ी से वृद्धि हुई." लगातार हमले कर रहा है इजरायल पिछले हफ्ते गाजा में चार स्कूलों पर हमला किया गया था. 4 अगस्त को, गाजा शहर में विस्थापित लोगों के लिए आश्रय के रूप में काम करने वाले दो स्कूलों पर इजरायली हमला हुआ, जिसमें 30 लोग मारे गए और कई अन्य घायल हो गए थे. इससे पहले, गाजा शहर में हमामा स्कूल पर इजरायली हमले में 17 लोग मारे गए थे. तीन से ज्यादा रॉकेट छोड़े गए थे इजरायली सेना ने दावा किया है कि जिस स्कूल पर उसने शनिवार सुबह हमला किया, वह हमास मुख्यालय था और उसमें आतंकवादी मौजूद थे. रिपोर्ट के मुताबिक, गाजा शहर इस स्कूल में सुबह की नमाज की जा रही थी, तभी बमबारी हो गई. बताया गया कि तीन से ज्यादा रॉकेट छोड़े गए थे, जिसमें 100 से अधिक लोग मारे गए. स्थानीय मीडिया के अनुसार, स्कूल में आग लग गई है और बचाव दल उसे बुझाने के लिए काम कर रहे हैं. वहीं, इजरायली सेना ने एक बयान में कहा कि उन्होंने अल-तबीन स्कूल के अंदर स्थित सैन्य कमान मुख्यालय में काम करने वाले आतंकवादियों पर हमला किया था. सेना ने दावा किया है कि नागरिकों पर पर हमला नहीं किया गया. इजराइली रॉकेट नमाज के दौरान गिरे यह बम आज सुबह की नमाज के समय गिरे. स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार स्कूल में आग लग गई है और बचाव दल इसे बुझाने के लिए काम कर रहे हैं. गाजा के निवासियों ने बताया कि स्कूल पर तीन रॉकेट उस समय गिरे, जब लोग नमाज पढ़ रहे थे. फिलिस्तीनी पत्रकार होसम शबात के अनुसार, गाजा शहर में बमबारी वाले एक स्कूल में फिलिस्तीनी लोग फंस गए हैं, क्योंकि इमारत में आग लग गई है. आग बुझाने में दिक्कत हो रही है, क्योंकि इजरायली सेना ने पानी की सप्लाई भी काट दी है.  1 अगस्त को दलाल अल-मुगराबी स्कूल पर इजरायली हमले में 15 लोग मारे गए थे.7 अक्टूबर, 2023 को हमास द्वारा किए गए हमले के बाद इजरायल ने  हमास के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य हमला शुरू कर दिया था. इसके बाद से ही इजरायल लगातार गाजा में स्कूलों सहित इमारतों पर हमले कर रहा है. इजरायल का दावा है कि परिसर के अंदर "आतंकवादी" हैं जो "हमास कमांड कंट्रोल सेंटर" के रूप में काम कर रहे हैं. 40 हजार से अधिक की हो चुकी है मौत 10 महीने लंबे युद्ध में गाजा में 40,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे गए हैं. युद्ध से तबाह तटीय फिलिस्तीनी क्षेत्र में युद्ध विराम के लिए कई दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन अभी तक कोई सफलता नहीं मिली है.   recent visitors 93

कानपुर में किशोरी को किडनैप कर दुष्कर्म का प्रयास, दोषी मौलाना हुआ फरार

कानपुर नाबालिग बच्चियों के साथ दुष्कर्म की कई घटनाओं को अंजाम दे चुके एक मौलाना का शुक्रवार को एक युवक ने एक बच्ची के साथ दुष्कर्म की कोशिश करते वीडियो बना लिया. मोहल्ले के एक युवक को मौलाना पर पिछले कई दिनों से शक था. ऐसे में वह मौलाना पर नजर रख रहा था. शुक्रवार को जब मौलाना एक बच्ची को अपने साथ टॉफी दिलाने के बहाने कमरे में लेकर गया तो उसका पीछा करते हुए युवक भी पहुंच गया. मौलाना जब कमरे में मासूम को निवस्त्र करके दुष्कर्म की कोशिश कर रहा था, उसी समय का वीडियो युवक ने कमरे के रोशनदान से बना लिया. लोग पहुंचे तो दरवाजा खोलकर दूसरे कमरे से भाग गया मौलाना बच्ची से दुष्कर्म के आरोप में जिस मौलाना का वीडियो बनाया गया है, उसकी उम्र करीब 70 वर्ष की है. वह कानपुर के ग्वालटोली  का रहने वाला है.पूरे मोहल्ले में वह मौलाना चाचा के नाम से प्रसिद्ध है. वीडियो बनाने वाले युवक के मुताबिक जब वह भीड़ को लेकर मौलाना के कमरे में पहुंचा तो मौलाना दरवाजा खोलकर दूसरे कमरे में भाग गया. जिसके बाद मोहल्ले वालों ने मौलाना के खिलाफ थाने में FIR दर्ज करवाई. कई नाबालिग बच्चियों से दुष्कर्म का लग चुका है आरोप इलाके के एसीपी महेश कुमार ने बताया कि 70 वर्षीय मुख्तार ने मोहल्ले की ही 7 वर्षीय बच्ची के साथ रेप की कोशिश की है. उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है और उसकी तलाश की जा रही है. साथ ही पुलिस अब यह भी पता करने की कोशिश कर रही है कि मौलाना इससे पहले कितनी बच्चियों के साथ इस तरह की हरकत कर चुका है. क्योंकि मोहल्ले वासियों का आरोप है कि मौलाना अब तक कई बच्चियों के साथ दुष्कर्म कर चुका है. लेकिन बदनामी के डर से लोग मुंह नहीं खेलते थे. हालांकि, मोहल्ले के एक युवक को मौलाना पर शक था. इसलिए वह मौलाना पर कई दिनों से नजर रख रहा था. शुक्रवार को जब वह एक बच्ची को टॉफी दिलाने के बहाने अपने कमरे में ले गया तो युवक भी पीछे-पीछे पहुंच गया. इसके बाद उसने रोशनदान से वीडियो बना लिया और मोहल्ले वासियों को बुला लिया. इसके बाद बच्ची को भी मुक्त करा लिया.   recent visitors 110

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के एससी-एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर को चिन्हित करने के फैसले भी नहीं

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में संविधान में दिए गए एससी और एसटी के लिए आरक्षण के उप-वर्गीकरण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर विस्तृत चर्चा हुई. बैठक में स्पष्ट किया कि डॉ. बीआर अंबेडकर द्वारा तैयार संविधान में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षण प्रणाली में “क्रीमी लेयर” का प्रावधान नहीं है. ऐसे में अंबेडकर के संविधान के मुताबिक ही आरक्षण का प्रावधान होना चाहिए. दरअसल कैबिनेट में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर चर्चा हुआ हुई. कैबिनेट का मत था कि एनडीए सरकार अंबेडकर के बनाए संबिधान को लेकर प्रतिबद्ध है और एससी एसटी में कोई क्रीमीलेयर का प्रावधान नहीं है. मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एससी-एसटी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से शुरू हुई हालिया बहस के बारे में बात की. सरकार संविधान प्रति कटिबद्ध वैष्णव ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण के संबंध में निर्णय सुनाया था और एससी-एसटी आरक्षण के संबंध में सुझाव दिया था. मंत्रिमंडल में इस पर विस्तृत चर्चा हुई. एनडीए सरकार बीआर अंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान के प्रति कटिबद्ध है. बीआर अंबेडकर के संविधान के अनुसार एससी-एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर का कोई प्रावधान नहीं है.' उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण संवैधानिक दिशानिर्देशों के अनुरूप लागू किया जाना चाहिए. यह पूछे जाने पर कि क्या यह मुद्दा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री या प्रधानमंत्री द्वारा उठाया गया था, वैष्णव ने कहा कि यह मंत्रिमंडल का सुविचारित विचार है. सांसदों ने की थी पीएम से मुलाकात इससे पहले शुक्रवार को एससी और एसटी सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की थी और एससी/एसटी आरक्षण के मुद्दे और सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर चर्चा की.बैठक के बाद मोदी ने एक्स पर कहा, "आज एससी/एसटी सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की. एससी/एसटी समुदायों के कल्याण और सशक्तिकरण के लिए हमारी प्रतिबद्धता और संकल्प को दोहराया." वहीं प्रधानमंत्री से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में शामिल भाजपा के राज्यसभा सदस्य सिकंदर कुमार ने कहा, "हम सभी सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से चिंतित हैं. हमें इस मामले पर चिंता जताने वाले लोगों के फोन आ रहे हैं. एससी और एसटी का प्रतिनिधित्व करने वाले सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की और इस संबंध में अपनी चिंता व्यक्त की." कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री ने सांसदों के साथ गंभीर चर्चा की और आश्वासन दिया कि सरकार सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को लागू नहीं होने देगी. उन्होंने कहा, "हम इसके लिए प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हैं." भाजपा सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री को दिए ज्ञापन में आग्रह किया है कि क्रीमी लेयर के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को लागू नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने पीटीआई से कहा, "प्रधानमंत्री का भी ऐसा ही विचार था. उन्होंने हमें आश्वासन दिया कि वह इस मामले को देखेंगे और हमें चिंता न करने के लिए कहा. उन्होंने कहा कि इसे एससी और एसटी श्रेणी में लागू नहीं किया जाएगा." क्या था सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस महीने की शुरुआत में, मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की बेंच ने बीते हफ्ते 6:1 के बहुमत वाले फैसले में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के कोटे में कोटा दिए जाने को मंजूरी दी थी. कोर्ट ने कहा था कि SC-ST कैटेगरी के भीतर नई सब कैटेगरी बना सकते हैं और इसके तहत अति पिछड़े तबके को अलग से रिजर्वेशन दे सकते हैं. देश में अभी अनुसूचित जाति (एससी) को 15 फीसदी और अनुसूचित जनजाति (एसटी) को 7.5 फीसदी आरक्षण मिलता है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद एससी और एसटी की जातियों के इसी 22.5 फीसदी के आरक्षण में ही राज्य सरकारें एससी और एसटी के कमजोर वर्गों का अलग से कोटा तय कर सकेंगी. सुप्रीम कोर्ट ने कोटे के अंदर कोटे की अनुमति राज्य सरकारों को देते हुए का था कि राज्य अपनी मर्जी और राजनीतिक महत्वाकांक्षा के आधार पर फैसला नहीं ले सकते. अगर ऐसा होता है तो उनके फैसले की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है.अगर कोई राज्य किसी जाति को कोटे के अंदर कोटा देती है तो उसे साबित करना होगा कि ऐसा पिछड़ेपन के आधार पर ही किया गया है. ये भी देखा जाएगा कि किसी एससी-एसटी के कुल आरक्षण का उसके किसी एक वर्ग को ही 100% कोटा न दे दिया जाए.     recent visitors 117

अमन सहरावत ने देश को पेरिस ओलंपिक में दिलाया छठा मेडल, पीएम मोदी ने दी बधाई

 पेरिस  पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत को एक और मेडल मिल गया है. अब तक भारत की झोली में कुल 6 मेडल आ गए हैं. भारतीय पहलवान अमन सहरावत ने मेन्स फ्रीस्टाइल 57 किलो भारवर्ग में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया. अमन ने ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले में प्यूर्टो रिको के डेरियन टोई क्रूज को 13-5 से हरा दिया है. बता दें कि अमन सहरावत का ओलंपिक सफर काफी मुश्किलों भरा रहा है. अमन सहरावत ने बचपन में ही माता-पिता को खो दिया था. 21 साल के अमन सहरावत का ओलंपिक तक का सफर बिल्कुल भी आसान नहीं रहा है. जाट परिवार से आने वाले अमन हरियाणा के झज्जर जिले के बिरोहर से आते हैं. उन्होंने 11 साल की उम्र में ही अपने माता-पिता को खो दिया था. पहले अमन की मां का हार्टअटैक से निधन हो गया था, तब उनकी उम्र 10 साल थी. फिर लगभग एक साल बाद उनके पिता भी चल बसे थे. इसके बाद अमन और उनकी छोटी बहन पूजा सहरावत को उनके बड़े चाचा सुधीर सहरावत और एक मौसी की देखभाल में छोड़ दिया गया. माता-पिता की दुखद मृत्यु के बाद अमन गंभीर अवसाद से जूझ रहे थे, ऐसे में उनके दादा मांगेराम सहरावत ने उन्हें संभाला और इससे उबरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. रेसलिंग में ऐसा रहा है अमन का सफर इस सबके बीच उन्होंने कुश्ती के प्रति अपने जुनून को जारी रखा और कोच ललित कुमार के अंडर ट्रेनिंग लेना शुरू किया. अमन 2021 में अपना पहला राष्ट्रीय चैम्पियनशिप खिताब जीतकर लाइमलाइट में आए. अमन ने 2022 के एशियाई खेलों में 57 किलोग्राम वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीता. फिर साल 2023 एशियाई कुश्ती चैम्पियनशिप में गोल्ड मेडल हासिल किया. जनवरी 2024 में उन्होंने जागरेब ओपन कुश्ती टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया. वह पेरिस 2024 ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाले भारत के एकमात्र पुरुष पहलवान रहे. recent visitors 99

शेख हसीना की सत्ता हिलाने वाले छात्र नेता एम नाहिद इस्लाम और आसिफ महमूद को मंत्री बनाया गया

ढाका बांग्लादेश में नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद युनुस ने गुरुवार को अंतरिम सरकार के प्रमुख के रूप में शपथ ली थी. युनूस ने शुक्रवार को विभिन्न मंत्रालयों के कार्यभार का बंटवारा किया गया. गौर करने वाली बात ये है कि यूनुस ने 27 मंत्रालय या विभाग अपने पास रखे हैं. नई सरकार के विदेश मंत्री तौहीद हुसैन ने किसी देश का नाम लिए बिना कहा, "हमें बड़े देशों के साथ संबंधों में संतुलन बनाए रखने की जरूरत है." बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख प्रो. मोहम्मद यूनुस ने शुक्रवार को नवनियुक्त 16 सदस्यीय सलाहकार परिषद के विभागों का बंटवारा कर दिया. यूनुस ने रक्षा, लोक प्रशासन, शिक्षा, ऊर्जा, खाद्य, जल संसाधन और सूचना जैसे  27 मंत्रालय अपने पास रखे हैं. राजनयिक मोहम्मद तौहीद हुसैन को विदेश मंत्रालय का प्रमुख नियुक्त किया है. अंतरिम कैबिनेट में शामिल किए दो छात्र नेताओं नाहिद इस्लाम और आसिफ महमूद को क्रमशः दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी तथा युवा और खेल मंत्रालयों का प्रभार दिया गया है. नोबेल पुरस्कार विजेता 84 वर्षीय यूनुस ने गुरुवार को अंतरिम सरकार के प्रमुख के रूप में शपथ ली थी. उन्होंने शेख हसीना की जगह ली है, जिन्होंने नौकरियों में विवादास्पद कोटा प्रणाली को लेकर अपनी सरकार के खिलाफ हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद देश छोड़ दिया था और भारत आ गईं थीं. यूनुस हसीना के लंबे समय से आलोचक भी हैं. जानें किसको कौन सा मंत्रालय मिला  1- ब्रिगेडियर जनरल (सेवानिवृत्त) एम सखावत हुसैन गृह मंत्रालय 2- फरीदा अख्तर मत्स्य पालन और पशुधन मंत्रालय 3- खालिद हुसैन धार्मिक मामलों का मंत्रालय 4- नूरजहां बेगम स्वास्थ्य मंत्रालय 5- शर्मीन मुर्शिद सामाजिक कल्याण मंत्रालय 6- सुप्रदीप चकमा अभी शपथ नहीं ली 7- प्रोफेसर बिधान रंजन रॉय अभी शपथ नहीं ली 8- तौहीद हुसैन विदेश मंत्रालय 9- मोहम्मद नज़रुल इस्लाम कानून मंत्री 10- आदिलुर रहमान खान उद्योग मंत्रालय 11- एएफ हसन आरिफ एलजीआरडी मंत्रालय 12- सईदा रिज़वाना हसन पर्यावरण मंत्रालय 13- नाहिद इस्लाम डाक, दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय 14- आसिफ महमूद युवा और खेल मंत्रालय 15- फारूक-ए-आजम अभी शपथ नहीं ली 16- सालेह उद्दीन अहमद वित्त मंत्रालय और योजना मंत्रालय सलाहकार परिषद के तीन सदस्य राजधानी में अनुपस्थित होने के कारण गुरुवार रात शपथ नहीं ले सके, और यह अनुमान लगाया जा रहा है कि यूनुस उन्हें 27 विभागों में से कुछ सौंप सकते हैं. सेवानिवृत्त सेना ब्रिगेडियर जनरल एम सखावत हुसैन को गृह मंत्रालय की देखरेख का काम सौंपा गया है. हुसैन 2001 से 2005 तक कोलकाता में बांग्लादेश के उप उच्चायुक्त थे और 2006 से 2009 तक बांग्लादेश के विदेश सचिव के रूप में कार्यरत थे. विदेश मामलों के सलाहकार हुसैन ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि कानून और व्यवस्था बहाल करना फिलहाल अंतरिम सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है और पहला लक्ष्य हासिल होने के बाद अन्य काम भी पटरी पर आ जाएंगे. उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश को सभी देशों के साथ अच्छे संबंध रखने की जरूरत है.  हुसैन ने किसी देश का नाम लिए बिना कहा, "हमें बड़े देशों के साथ संबंधों में संतुलन बनाए रखने की जरूरत है." बांग्लादेश बैंक के पूर्व गवर्नर सलाहुद्दीन अहमद वित्त और योजना मंत्रालयों के प्रभारी होंगे, जबकि पूर्व अटॉर्नी जनरल ए एफ हसन आरिफ स्थानीय सरकार मंत्रालय की देखरेख करेंगे. कौन हैं मोहम्मद यूनुस? बांग्लादेश के नए प्रमुख बने मोहम्मद यूनुस ऐसे 32वें शख्स बने हैं, जो नोबेल पुरस्कार जीत चुके हैं और अब राष्ट्र प्रमुख की जिम्मेदारी निभाएंगे. इससे पहले पूरी दुनिया में 31 लोग और हैं, जिन्हें नोबेल पुरस्कार भी मिला है और उन्होंने राष्ट्र प्रमुख की भूमिका भी निभाई है. गरीबों के बैंकर के रूप में पहचाने जाने वाले यूनुस और उनके द्वारा स्थापित ग्रामीण बैंक को 2006 का नोबेल शांति पुरस्कार मिला चुका है. उन्होंने गांव में रहने वाले गरीबों को 100 डॉलर से कम के छोटे-छोटे कर्ज दिलाकर लाखों लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में मदद की थी. इन गरीबों को बड़े बैंकों से कोई मदद नहीं मिल पाती थी. उनके कर्ज देने के इस मॉडल ने दुनिया भर में ऐसी कई योजनाओं को प्रेरित किया. इसमें अमेरिका जैसे विकसित देश भी शामिल हैं.  अमेरिका में यूनुस ने एक अलग गैर-लाभकारी संस्था ग्रामीण अमेरिका की भी शुरुआत की. 84 वर्षीय यूनुस जैसे-जैसे सफल होते गए उनका झुकाव राजनीति में करियर बनाने की ओर बढ़ता चला गया. उन्होंने 2007 में अपनी खुद की पार्टी भी बनाने की कोशिश की. लेकिन जब उनकी इस महत्वाकांक्षा ने बड़ा रूप लेना शुरू किया तब शेख हसीना नाराज हो गईं. हसीना ने यूनुस पर पर 'गरीबों का खून चूसने' का आरोप भी लगाया. recent visitors 104

महाबहस के लिए डोनाल्ड ट्रंप और कमला हैरिस तैयार, एबीसी न्यूज के मंच पर मुकाबला, तारीख भी हुई फिक्स

पाम बीच अमेरिका में इस साल होने वाले राष्ट्रपति पद के चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप और डेमोक्रेटिक उम्मीदवार कमला हैरिस ने 10 सितंबर को चुनावी बहस के लिए सहमति व्यक्त की है, जिसमें दोनों उम्मीदवारों का आमना-सामना होगा। अमेरिकी व्यापारिक टेलीविजन प्रसारण नेटवर्क ‘अमेरिकन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी’ (एबीसी) ने यह जानकारी दी। इस घोषणा से कुछ देर पहले ही ट्रंप ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि उन्होंने तीन टेलीविजन नेटवर्क के समक्ष राष्ट्रपति पद के चुनाव की प्रक्रिया के तहत तीन बहसों का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कहा कि वे सितंबर में कुछ निश्चित तारीखों पर सहमत हैं। इस साल होने वाले राष्ट्रपति पद के चुनाव की प्रक्रिया के तहत प्रथम बहस ट्रंप और डेमोक्रेटिक पार्टी के पूर्व उम्मीदवार जो बाइडन के बीच हुई थी। इस बहस में अमेरिका के मौजूदा राष्ट्रपति बाइडन के खराब प्रदर्शन के बाद उन पर उम्मीदवारी छोड़ने के लिए चौतरफा दबाव था। बाद में बाइडन ने अपनी उम्मीदवारी छोड़ते हुए हैरिस का नाम इसके लिए प्रस्तावित किया था। तीन बहस चाहते हैं ट्रंप हालांकि, गुरुवार को उन्होंने अपने मन में बदलाव की घोषणा की और हैरिस पर फॉक्स और एनबीसी पर सितंबर में दो और बहसों के लिए सहमत होने का दबाव बनाने की कोशिश की। जब उनसे पूछा गया कि अगर हैरिस केवल एबीसी बहस के लिए सहमत होती हैं तो वह क्या करेंगे। इस पर ट्रंप ने कहा, 'मुझे नहीं पता कि यह कैसे काम करेगा। हम तीन बहस करना चाहेंगे। हमें लगता है कि हमें तीन बहस करनी चाहिए।' न्यूज़ कॉन्फ्रेंस के कुछ घंटों बाद हैरिस ने संवाददाताओं से कहा कि वह खुश हैं कि उन्होंने आखिरकार 10 सितंबर को एबीसी पर उनके साथ बहस करने के लिए हैं। मैं इसके लिए उत्सुक हूं और उम्मीद करती हूं कि वह आएंगे।   recent visitors 119

निश्चित रूप से हम नस्ल आधार पर किसी भी तरह के हमले या हिंसा भड़काने के खिलाफ हैं – एंटोनियो गुतारेस

संयुक्त राष्ट्र बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर हमलों की घटनाओं के बीच, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुतारेस के एक प्रवक्ता ने कहा कि वह नस्ली आधार पर होने वाले किसी भी तरह के हमले या हिंसा भड़काने के खिलाफ हैं। महासचिव के उप प्रवक्ता फरहान हक ने  यहां कहा, ‘‘यह स्पष्ट है कि हम सुनिश्चित करना चाहते हैं कि हाल के सप्ताह में बांग्लादेश में जो हिंसा हो रही है उस पर नियंत्रण पाया जाए। निश्चित रूप से हम नस्ल आधार पर किसी भी तरह के हमले या हिंसा भड़काने के खिलाफ हैं।’’ वह बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों पर हो रहे हमलों के संबंध में महासचिव की प्रतिक्रिया से जुड़े सवालों के जवाब दे रहे थे। सोमवार को प्रधानमंत्री शेख हसीना के पद से इस्तीफा देने और देश छोड़कर भारत आ जाने के बाद से जारी हिंसा में कई हिंदू मंदिरों, घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में तोड़फोड़ की गई है और अवामी लीग से जुड़े कम से कम दो हिंदू नेताओं की हत्या कर दी गई। नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार के प्रमुख के रूप में शपथ दिलाए जाने पर हक ने संयुक्त राष्ट्र की ‘‘सरकार बनाने की एक समावेशी प्रक्रिया’’ की आशाओं का उल्लेख किया और कहा, ‘‘हम उम्मीद बरकरार रखे हुए हैं। शांति बहाली का कोई भी संकेत एक अच्छी चीज है।’’ जब उनसे पूछा गया कि क्या महासचिव गुतारेस ने यूनुस को बधाई दी है या फोन पर बात की है? तो हक ने कहा कि गुतारेस ने उनसे बात नहीं की है, लेकिन बांग्लादेश में संयुक्त राष्ट्र की स्थानीय समन्वयक ग्विन लुईस शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हई थीं। हक ने कहा, ‘‘निश्चित रूप से, वह और देश की टीम सक्रिय तौर पर यह सुनिश्चित कर रही है कि जमीनी स्तर पर परिवर्तन शांतिपूर्ण हो।’’ पिछले कुछ सप्ताहों में बांग्लादेश में हुई हत्याओं की जांच का हिस्सा बनने के लिए संयुक्त राष्ट्र से किए गए अनुरोध पर हक ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र गौर करेगा कि गठित होने वाली किसी भी नयी सरकार से उसे किस प्रकार का औपचारिक अनुरोध प्राप्त होता है।   recent visitors 95