विवादित टिप्पणी पर कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के खिलाफ दर्ज मुकदमे की सुनवाई एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा की जाएगी

जबलपुर  मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा नेत्री इमरती देवी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी. इसके खिलाफ भाजपा नेत्री ने डबरा में एफआईआर दर्ज करवाई थी. पुलिस ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट सहित अन्य धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया था. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि जब उन्होंने कथित अपराध किया, वह विधायक नहीं थे और वर्तमान में भी विधायक नहीं हैं. इसलिए उनके खिलाफ एमपी-एमएलए विशेष कोर्ट में उनके खिलाफ मुकदमा नहीं चलाया जाना चाहिए. एमपी-एमएलए कोर्ट गठित करने का उद्देश्य बताया एकलपीठ ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अश्विनी कुमार उपाध्याय बनाम भारत संघ के संबंध में पारित आदेश का समीक्षा करते हुए कहा "इसके पीछे मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि निर्वाचित प्रतिनिधियों (सांसदों और विधायकों) के खिलाफ आपराधिक मुकदमे शीघ्रता से समाप्त हो जाएं. इसके अलावा विशेष विचार की आवश्यकता केवल देश में राजनीति में अपराधीकरण की बढ़ती लहर के कारण और निर्वाचित प्रतिनिधियों (वर्तमान या पूर्व) के पास प्रभावी अभियोजन को प्रभावित करने या बाधित करने की शक्ति के कारण हैं." पूर्व विधायक भी मामले को प्रभावित कर सकता है सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार "वर्तमान एवं पूर्व विधायकों एवं सांसदों के मुकदमों की सुनवाई के लिए मध्य प्रदेश राज्य में विशेष न्यायालयों की स्थापना की गई है. विशेष न्यायालयों की स्थापना का उद्देश्य वर्तमान एवं पूर्व विधायकों एवं सांसदों द्वारा या उनके विरुद्ध दर्ज मुकदमों की सुनवाई में तेजी लाना है." याचिकाकर्ता पूर्व विधायक हैं लेकिन अपराध के समय वह विधायक नहीं था और वर्तमान में भी विधायक नहीं है. अपराध की प्रासंगिक तारीख के अनुसार अभियुक्त पर विशेष न्यायालय द्वारा मुकदमा चलाया जाना है या नहीं, इसकी व्याख्या करना विशेष न्यायालयों की स्थापना के उद्देश्य को ही विफल कर देगी. मणिपुर हाईकोर्ट के आदेश का हवाला दिया ये भी कहा गया "अभियुक्त की स्थिति महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि महत्वपूर्ण पहलू वह शक्ति है जिसका वह आनंद लेता है जो गवाहों को प्रभावित या प्रभावी अभियोजन को बाधित कर सकती है." एकलपीठ ने मणिपुर हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश का हवाला देते हुए कहा कि विशेष न्यायालयों के पास पूर्व और वर्तमान विधानमंडलों के खिलाफ सभी मामलों की सुनवाई करने का अधिकार क्षेत्र है, भले ही ऐसे अपराध किए जाने के समय उनकी स्थिति कुछ भी हो. एकलपीठ ने सुनवाई के बाद प्रकरण एमपी-एमएलए विशेष कोर्ट में प्रस्तुत करने के आदेश जारी किए. इमरती देवी ने जारी किया था वीडियो इस वाकये के बाद पूर्व मंत्री इमरती देवी ने भी वीडियो जारी कर अपनी बात कही थी. उन्होंने कहा था, ‘कांग्रेसियों के लिए मैं भगवान से प्रार्थना करती हूं कि उन्हें सद्बुद्धि दे. एक दलित महिला के बारे में ऐसा बोलना शोभा नहीं देता है. मैं कुछ ज्यादा नहीं बोलना चाहती, क्योंकि उन्होंने मुझे सदैव बड़ी बहन कहा है. भगवान ने उनकी बुद्धि खराब कर दी है, इसलिए ऐसा बोल रहे हैं. वह तो बहुत छोटे हैं. उनके बड़े नेता कमलनाथ मुझे आइटम कहते हैं, दिग्विजय सिंह टंच माल कहते हैं. कांग्रेसी तो शुरू से ऐसे ही बोलते आ रहे हैं. मैं एसपी के पास जाऊंगी, एफआईआर कराऊंगी. उन्हें छोडूंगी नहीं. इमरती को इतना सस्ता न समझें कि कभी भी कुछ भी बोल दें. मैं अपनी सरकार से भी कहूंगी कि मुझे न्याय दो.’   recent visitors 151

Vidisha के बीजामंडल में हिंदू नहीं कर पाएंगे पूजा, कलेक्टर ने दिया ASI के ‘मस्जिद’ नोटिफिकेशन का हवाला

 विदिशा  मध्य प्रदेश के विदिशा जिला प्रशासन ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की अधिसूचना का हवाला देते हुए शुक्रवार को नागपंचमी के मौके पर हिन्दुओं के पूजा करने के लिए 11वीं सदी के बीजामंडल को खोलने से इनकार कर दिया है। हिंदुओं के एक समूह ने जिलाधिकारी बुद्धेश कुमार वैद्य को शहर के बीचों-बीच स्थित इस स्थल को नागपंचमी पर खोलने के लिए ज्ञापन सौंपा था। इस दिन नाग देवता की पूजा की जाती है। जिलाधिकारी ने उनकी याचिका एएसआई को भेज दी, जिसने 1951 की गजट अधिसूचना का दो अगस्त को हवाला देते हुए कहा कि बीजामंडल मंदिर नहीं, बल्कि मस्जिद है। एएसआई है ढांचे का संरक्षक जिलाधिकारी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि एएसआई इस ढांचे का संरक्षक है, इसलिए उन्होंने मामले पर निर्णय लेने के लिए ज्ञापन उसे भेजा था। ज्ञापन सौंपने वाले हिंदू समूह के नेता शुभम वर्मा ने निराशा व्यक्त करते हुए एजेंसी से कहा, 'हम पिछले 30 साल से नागपंचमी पर वहां (ढांचे के बाहर) पूजा करते आ रहे हैं, लेकिन किसी ने यह नहीं कहा कि यह मंदिर नहीं बल्कि मस्जिद है।' वर्मा ने जिलाधिकारी के पत्र और एएसआई की गजट अधिसूचना को दिखाते हुए कहा कि एएसआई द्वारा इसे मस्जिद बताए जाने से हिंदुओं की भावनाएं आहत हुई हैं। हिंदुओं ने मांगी पूजा की अनुमति हालांकि, इस साल हिंदू समूहों ने 9 अगस्त को परिसर में प्रवेश करने और पूजा करने की अनुमति मांगी। विदिशा कलेक्टर बुद्धेश वैश्य ने उनके अनुरोध को एएसआई को भेज दिया, जिसने 1951 के राजपत्र अधिसूचना का हवाला देते हुए इस स्थल को 'बीजामंडल मस्जिद' के रूप में वर्गीकृत किया। कलेक्टर ने तब पूजा की अनुमति देने से इनकार कर दिया, जिससे हिंदू समूहों में आक्रोश फैल गया। वे एएसआई द्वारा इस स्थल को मस्जिद के रूप में वर्गीकृत करने का विरोध करते हैं, उनका दावा है कि यह 1972 से हिंदू पूजा स्थल रहा है। विधायक चाहते हैं सर्वेक्षण वहीं, विदिशा विधायक 'मंदिर के स्वामित्व' को साबित करने के लिए सर्वेक्षण चाहते हैं वे एएसआई द्वारा इस स्थल को मस्जिद के रूप में वर्गीकृत करने का विरोध करते हैं, उनका दावा है कि यह 1972 से हिंदू पूजा स्थल रहा है। भोपाल से 60 किमी दूर भोपाल से लगभग 60 किमी और सांची स्तूप से बमुश्किल 10 किमी दूर विजय सूर्य मंदिर/बीजामंडल मस्जिद स्थल का इतिहास उथल-पुथल भरा रहा है। एएसआई-भोपाल सर्किल की वेबसाइट का कहना है कि मस्जिद का निर्माण हिंदू मंदिर के खंडहरों पर किया गया था। हालांकि, यहां स्तंभ पर पाए गए शिलालेखों में से एक का कहना है कि यह देवी चर्चिका का मंदिर था। सूर्य देव के सम्मान में बनाया गया था यह मंदिर ऐसा माना जाता है कि इसे 11वीं-12वीं शताब्दी में सूर्य देव के सम्मान में बनाया गया था। मुगल शासन के दौरान, विशेष रूप से औरंगजेब के शासनकाल में मंदिर को काफी नुकसान पहुंचा था, जिसके बाद 17वीं शताब्दी में इसे मस्जिद के रूप में पुनर्निर्मित किया गया था। हालांकि, मराठा शासन के दौरान मस्जिद को दूसरी जगह स्थानांतरित कर दिया गया और स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थल जीर्ण-शीर्ण हो गया। हिंदू महासभा के नेतृत्व में किया गया आंदोलन 1934 में मंदिर के अवशेषों की खोज ने हिंदू महासभा के नेतृत्व में इसके संरक्षण के लिए एक आंदोलन को जन्म दिया। इसका एक महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रभाव पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप स्थानीय कार्यालयों में हिंदू महासभा के उम्मीदवार चुने गए। तब से, मंदिर को साल में केवल एक बार नाग पंचमी पर पूजा के लिए खोला जाता है। 1965 में सांप्रदायिक तनाव को दूर करने के लिए, तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारका प्रसाद मिश्रा ने मुसलमानों के लिए एक अलग ईदगाह की स्थापना की। पीएम मोदी से की मांग फिर से विवाद उठने के साथ, हिंदू संगठनों ने पीएम नरेंद्र मोदी से 'बीजामंडल विजय मंदिर' को नियमित पूजा के लिए फिर से खोलने की अपील की है। कलेक्टर बुद्धेश वैश्य ने स्थानीय मीडिया को बताया कि सब कुछ एएसआई नियमों के अनुसार किया जाएगा। मुस्लिम प्रतिनिधियों ने विवाद पर मीडिया से बात करने से परहेज किया। विदिशा विधायक ने की यह मांग वहीं, विदिशा के भाजपा विधायक मुकेश टंडन ने मंदिर के स्वामित्व को स्थापित करने के लिए एक सर्वेक्षण का प्रस्ताव दिया है। उनका मानना है कि इस सर्वेक्षण से मंदिर की स्थिति की पुष्टि होगी। साथ ही संभावित रूप से 'पूजा के लिए इसके पूर्ण उपयोग की बहाली' होगी। टंडन ने मुस्लिम समुदाय के रुख को स्वीकार करते हुए कहा कि उन्होंने 'भूमि पर कोई विवाद नहीं जताया है'। उन्होंने समुदायों के बीच आपसी सम्मान पर प्रकाश डाला। साथ ही जिला प्रशासन द्वारा मुस्लिम धार्मिक प्रथाओं, विशेष रूप से ईद पर, को समायोजित करने के प्रयासों का हवाला दिया। हिंदुओं में पैदा कर दी है चिंता उन्होंने कहा कि एएसआई द्वारा मंदिर पर लगाए गए ताले ने हिंदुओं में चिंता पैदा कर दी है। विधायक ने कहा कि एएसआई का कहना है कि ताला वहां संग्रहित कुछ मूर्तियों की सुरक्षा के लिए है। स्मारक संरक्षण के लिए 1951 में स्थापित कानूनी ढांचे का हवाला देते हुए टंडन ने कहा कि आपके नियमों में ताला लगाने का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि ताला के बारे में भ्रम को दूर करने के लिए जिला प्रशासन के साथ एक बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें एएसआई से इसे खोलने का आग्रह किया गया था, खासकर नाग पंचमी पूजा के दौरान। विधानसभा में उठाएंगे इसे विधायक इस मुद्दे को विधानसभा में उठाएंगे। साथ ही पीएम मोदी और मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से मिलने के लिए दिल्ली जाने के लिए एक टीम बना रहे हैं। विधायक ने अप्रैल 1992 में इसी तरह की स्थिति का जिक्र किया, जब विरोध प्रदर्शन के बाद एएसआई और जिला अधिकारियों के साथ सफल बातचीत हुई थी, जिसके बाद 11 लोगों की टीम को मंदिर में पूजा करने की अनुमति दी गई थी। उन्होंने कहा कि हिंदू परिवार एएसआई द्वारा लगाए गए किसी प्रतिबंध के बिना इस स्थल पर पूजा करना जारी रखे हुए हैं। recent visitors 82

प्रदेश के लाल ने पेरिस ओलंपिक में किया कमाल, विवेक सागर के घर जश्न का माहौल

नर्मदापुरम  हॉकी के ओलंपिक इतिहास में लगातार दूसरी बार भारत ने ब्रॉन्ज मेडल जीता है. इसकी खुशियां पेरिस से लेकर मध्य प्रदेश के छोटे से गांव चांदोन तक मनाई जा रही हैं. दरअसल मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले के छोटे से गांव चांदोन में जन्में विवेक सागर देश की ओलंपिक टीम का हिस्सा है और मैच में विवेक के सराहनीय योगदान के कारण देश को कांस्य पदक मिला है. इसी जीत को लेकर पूरा जिला विवेक के परिवार के साथ जश्न में शरीक है. इस दौरान विवेक के गांव में जश्न का माहौल है. इस दौरान ढोल बाजे के साथ नाच गाना कर सभी लोग पेरिस ओलंपिक में हॉकी टीम के कांस्य पदक जीतने की खुशी मना रहे हैं. दोनों ही मैचों में विवके का अहम योगदान पेरिस में खेले जा रहे हैं ओलंपिक के ब्रॉन्ज मेडल के मुकाबले में भारत की टीम ने स्पेन को 2-1 से हराकर ब्रॉन्ज मेडल पर कब्जा किया. भारत की हॉकी टीम ने ओलंपिक में लगातार दूसरी बार ब्रॉन्ज मेडल जीता है. ओलंपिक के इन दोनों ही मुकाबलों में इटारसी के चांदोन गांव निवासी विवेक सागर का अहम योगदान है. विवेक बचपन से ही हॉकी के दीवाने थे और गांव के कच्चे मैदान से प्रैक्टिस करते हुए विवेक लगातार भारत की ओर से दूसरी बार ओलंपिक टीम का हिस्सा बने हैं. टोक्यो ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीतने पर मध्य प्रदेश सरकार ने विवेक को डीएसपी की नौकरी दी थी. साथ ही उन्हें एकलव्य अवॉर्ड से भी नवाजा था. उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने दी बधाई उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने पेरिस ओलिम्पिक में भारतीय हाकी टीम को कांस्य पदक जीतने पर पूरी हॉकी टीम को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि भारतीय हॉकी टीम ने भारत का गौरव बढ़ाया है। भारतीय हॉकी टीम ने अत्यंत कलात्मक हॉकी का प्रदर्शन कर भारतवासियों का दिल जीत लिया। गांव में जश्न का माहौल विवेक के भाई विद्यासागर ने बताया कि, ''पूरे गांव में जश्न का माहौल है. घर और गांव में ढोल बजाकर पटाखे फोड़कर जश्न मनाया जा रहा है.'' उन्होंने कहा कि "ब्रॉन्ज मेडल मिलना भी एक बड़ी बात है." विवेक के पिता रोहित प्रसाद का कहना है कि "बहुत ही अच्छा लग रहा है, शुरू से मेरे द्वारा तो कई बार विवेक को हॉकी खेलने के लिए मना किया जाता था, लेकिन जब विवेक आज जिस मुकाम पर पहुंचा है, तो बहुत खुशी होती है.'' विवेक ने प्रदेशवासियों को दी बधाई नर्मदापुरम जिले एकलौते हॉकी खिलाड़ी विवेक सागर ने मैच में ब्रॉन्ज मैडल जीतने के बाद एमपी के नागरिकों और खिलाड़ियों को बधाई दी. उन्होंने वीडियो शेयर कर कहा कि "ओलंपिक में आज भारतीय हाकी टीम ने ब्रॉन्ज मैडल जीता है. साथ ही भारतीय टीम और उनको सपोर्ट करने के लिए प्रदेश वासियों और हॉकी प्रेमियों को बधाई देते हुए कहा कि, ''आज भारतीय हॉकी टीम पेरिस ओलंपिक में तीसरा स्थान प्राप्त कर ब्रॉन्ज मेडल घर लेकर जा रही है.''   recent visitors 92

नीरज के रजत पदक जीतने पर CM मोहन यादव ने कहा, ‘आपकी उपलब्धि पर देश को फक्र है’

भोपाल  पेरिस ओलंपिक की जैवलिन थ्रो में नीरज चोपड़ा ने सिल्वर मेडल हासिल किया है. नीरज चोपड़ा लगातार दो ओलंपिक में पदक जीतने वाले पहले भारतीय ट्रैक और फील्ड खिलाड़ी बन गए है. नीरज चोपड़ा की उपलब्धि पर उन्हें देशभर से बधाईयां और शुभकामनाएं दी जा रही है. इसी कड़ी में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, "अप्रतिम, अद्भुत, अतुलनीय. मां भारती के लाड़ले और करोड़ों भारतीयों की आंखों के तारे नीरज चोपड़ा को पेरिस ओलंपिक में रजत पदक जीतने पर हार्दिक बधाई, शुभकामनाएं. आप निरन्तर ऐसे ही नए- नए इतिहास रचते हुए अपनी गौरवपूर्ण उपलब्धियों से मां भारती को गौरवान्वित करते रहें, हम सबकी शुभकामनाएं सदैव आपके साथ हैं." मुख्यमंत्री ने हॉकी टीम को भी दी बधाई वहीं सीएम मोहन यादव ने भारतीय हॉकी टीम को भी कांस्य पदक जीतने पर बधाई दी है. उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, "चक दे इंडिया, पुरुष हॉकी टीम को पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं. आपकी सफलता पर आज समस्त भारतवासी गर्व की अनुभूति कर रहे हैं. आज टीम ने जो बेहतरीन प्रदर्शन किया है, वह भावी खिलाड़ियों को सर्वोच्च सफलता की प्रेरणा देगा. यह हमारे लिए और भी आनंद की बात है कि मध्य प्रदेश के विवेक सागर भी इस विजयी टीम का हिस्सा हैं. बधाई, अभिनंदन." डिप्टी सीएम ने भी नीरज चोपड़ा को दी बधाई वहीं मध्य प्रदेश के डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने भी एक्स पर पोस्ट कर नीरज चोपड़ा को बधाई दी है. उन्होंने लिखा कि पेरिस ओलंपिक में भाला फेंक प्रतिस्पर्धा के फाइनल मुकाबले में भारतीय एथलीट नीरज चोपड़ा को रजत पदक जीतने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं. आपने अथक परिश्रम और उत्कृष्ट खेल कौशल से मां भारती का मान बढ़ाया है और हर भारतीय में गर्व और उत्साह का संचार किया है. recent visitors 113

ई-रुपी मॉडल की काटजू अस्पताल से जल्द शुरुआत, गर्भवती महिलाओं की निजी केंद्रों पर होगी निःशुल्क सोनोग्राफी

भोपाल  जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत निश्शुल्क सोनोग्राफी सुविधाओं में विस्तार करते हुए ई रुपी सुविधा शुरू की जा रही है, जिसके माध्यम से शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं में आने वाली गर्भवती महिलाओं की सोनोग्राफी चिन्हित निजी सोनोग्राफी केंद्रों में निशुल्क होगी। इन केंद्रों पर मिलेगी सुविधा नौ अगस्त को यानी आज एक्सटेंडेड प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के अवसर पर ई रूपी माडल की शुरुआत राजधानी के डॉ. कैलाशनाथ काटजू महिला चिकित्सालय से की जाएगी। जिले में पीसीपीएनडीटी एक्ट अंतर्गत पंजीकृत निजी सोनोग्राफी सेंटर द्वारा शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं से भेजी गई गर्भवती महिलाओं को सोनोग्राफी की सुविधा निश्शुल्क प्रदान की जाएगी।  निजी क्षेत्र के पंजीकृत सोनोग्राफी सेंटर को सोनोग्राफी उपरांत डिजिटल पेमेंट पद्धति से भुगतान किया जाएगा।जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रभाकर तिवारी ने बताया कि निजी क्षेत्र के पंजीकृत सोनोग्राफी सेंटर द्वारा गर्भवती महिलाओं की सोनोग्राफी करने के लिए सहमति ली गई है। शासकीय चिकित्सालयों से रेफर गर्भवती महिलाओं की सोनोग्राफी निश्शुल्क की जाएगी। recent visitors 65

नागचंद्रेश्वर मंदिर के आधी रात को खुले पट, भक्तों की उमड़ी भीड़,लगाए जयकारे

उज्जैन तीर्थ नगरी उज्जैन में साल में एक बार नाग पंचमी के अवसर पर खुलने वाले भगवान श्री नागचंद्रेश्वर के पट रात्रि 12 बजे शुभ मुहूर्त में खोले गए. मंदिर के पट खुलने के बाद सर्वप्रथम पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े के महंत विनीतगिरी महाराज ने विधि-विधान से श्री नागचंद्रेश्वर भगवान का पूजन अर्चन किया. इस अवसर पर मंदिर प्रबन्ध समिति के अध्यक्ष और कलेक्टर नीरज कुमार सिंह, पुलिस अधीक्ष प्रदीप शर्मा, प्रशासक मृणाल मीना, समिति सदस्य राजेन्द्र शर्मा 'गुरु' और अन्य प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौजूद थे. नागचंद्रेश्वर मंदिर के रात 12 बजे खुले पट नाग पंचमी के अवसर पर भगवान श्री नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए मंदिर के बाहर गुरुवार रात 8 बजे से श्रद्धालु की भीड़ लगने लगी थी. लालपुल से होते हुए कर्कराज मंदिर से चारोधाम मंदिर से हरसिद्धि माता मंदिर से बड़े गणेश से प्रवेश दिया जा रहा है. वहीं रात में ही 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए. बता दें कि, नाग चंद्रेश्वर की प्रतिमा की पूजन के बाद नागचंद्रेश्वर के शिवलिंग का पूजन और अभिषेक किया गया. पूजन अर्चन के बाद भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन आम दर्शनार्थियों के लिए खोल दिए गए.     शीघ्र दर्शन के लिए ऑनलाइन बुकिंग महाकालेश्वर मंदिर में नागपंचमी पर्व मनाया जा रहा है. नागचन्द्रेश्वर भगवान के पट रात्रि 12 बजे खुले और शुक्रवार की रात 12 बजे तक खुले रहेंगे. जिसमें लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना जताई गई है. इसी के साथ श्रद्धालुओं के लिए तमाम प्रकार की व्यवस्थाएं भी प्रशासन द्वारा की गईं हैं. कम से कम समय में दर्शन हो इसकी व्यवस्था प्रशासन ने की है. वहीं शीघ्र दर्शन करने वालों के लिए ऑनलाइन टिकट बुकिंग करने की व्यवस्था भी की गई है. नागचन्द्रेश्वर मंदिर में दर्शन का समय नागचन्द्रेश्वर मंदिर में दर्शन का समय दिनांक 8 अगस्त की मध्य रात्रि 12ः00 बजे से शुक्रवार 9 अगस्त की रात्रि 12ः00 बजे तक रहेगा. इसके बाद भगवान नागचंद्रेश्वर की आरती के बाद पट बंद हो जाएंगे, फिर एक साल बाद भगवान नागचंद्रेश्वर के पट खुलेंगे. नागचन्द्रेश्वर भगवान के दर्शन हेतु निर्धारित मार्ग आगंतुक व समस्त श्रद्धालु भील समाज धर्मशाला से प्रवेश कर गंगा गार्डन के समीप से होते हुए चारधाम मंदिर पहुंचे. वहां से पार्किंग स्थल जिगजेग हरसिद्धी चौराहा से होते हुए रूद्रसागर के समीप से बड़ा गणेश मंदिर के द्वार नम्बर 04 व 05 के रास्ते से निकाल कर विश्राम धाम एरोब्रिज से होकर भगवान श्री नागचन्द्रेश्वर जी के दर्शन करेंगे. दर्शन उपरांत एरोब्रिज के द्वितीय ओर से रेम्प मार्बल गलियारा होते हुए नवनिर्मित मार्ग के द्वार क्रमांक 04 के सम्मुख से बड़ा गणेश मंदिर पहुंचेगे और वहां से हरसिद्धि चौराहा से नृसिंह घाट तिराहा होते हुए पुनः भील समाज धर्मशाला पहुंचेंगे. भगवान महाकालेश्वर के दर्शन हेतु निर्धारित मार्ग उज्जैन महाकाल मंदिर में नागचंद्रेश्वर मंदिर तक आने वाले श्रद्धालु त्रिवेणी संग्रहालय के समीप सरफेस पार्किंग से प्रवेश कर नंदीद्वार श्री महाकाल महालोक मानसरोवर भवन में प्रवेश कर फेसेलिटी सेंटर-01 मंदिर परिसर के कार्तिक मण्डपम में प्रवेश कर कार्तिक मण्डपम और गणेश मण्डपम से बाबा महाकाल के दर्शन कर सकेंगे. दर्शन उपरांत बाहर की ओर प्रस्थान कर पुनः महाकाल महालोक एवं नीलकंठ पथ होते हुए अपने गंतव्य तक पहुंचेंगे.   recent visitors 79

MP में अब साइबर तहसील 2.0 की शुरुआत, अब आंशिक खसरा क्रय-विक्रय का ऑनलाइन नामांतरण 3 सप्ताह मे

भोपाल मध्य प्रदेश में जमीन खरीदने और बेचने के बाद नामांतरण की प्रक्रिया में लगने वाला महीनों का समय अब केवल 2 से 3 सप्ताह में बदल गया है. जमीन खरीदने के बाद तहसील कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. जरूरी दस्तावेज, खसरा, नक्शा ऑनलाइन SMS, ई-मेल और वॉट्सएप पर घर बैठे मिलेंगे. सम्पूर्ण खसरा क्रय-विक्रय की प्रक्रिया ऑनलाइन थी. अब आंशिक खसरा क्रय-विक्रय प्रक्रिया भी ऑनलाइन प्रक्रिया से जोड़ दिए गए हैं. यह सब संभव हुआ है साइबर तहसील 2.0 की शुरुआत से. राज्य की प्रमुख राजस्व आयुक्त  अनुभा श्रीवास्तव ने बताया कि एक साल में अमूमन सम्पूर्ण खसरे के क्रय विक्रय के करीब 2 लाख और आंशिक खसरा क्रय-विक्रय के लगभग 6 लाख प्रकरणों का नामांतरण होता है. आंशिक खसरा क्रय-विक्रय के प्रकरणों का भी ऑनलाइन नामांतरण होने से हर साल करीब 8 लाख से अधिक नागरिक लाभांवित होंगे. यह साइबर तहसील 2.0 के शुरू होने से संभव हो रहा है. साइबर तहसील 2.0 में संपदा से प्राप्त अविवादित आंशिक खसरों के क्रय-विक्रय आधारित नामांतरण प्रकरणों में क्षेत्रीय स्तर पर एण्ड-टू-एण्ड ऑनलाइन सिस्टम के माध्यम से त्वरित निराकरण की व्यवस्था की गई है. इस व्यवस्था में नामांतरण के बाद नामांतरण आदेश और खसरा नक्शा की अपडेट कॉपी ऑनलाइन इमेल और वॉट्सएप के माध्यम से घर बैठे नागरिकों को मिलेगी. साइबर तहसील 2.0 स्वचालित प्रणाली है. इससे एक ओर जहां नागरिकों को तहसील के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी. वहीं, तहसील स्तर पर कार्यरत अधिकारी और कर्मचारियों की कार्य दक्षता बढ़ेगी. इससे अविवादित प्रकरणों के निराकरण त्वरित होने से संबंधित तहसील के राजस्व अधिकारी विवादित प्रकरणों पर पर्याप्त समय दे सकेंगे. जिससे विवादित प्रकरण भी आपसी सहमती से जल्दी निराकृत होंगे.   recent visitors 103