48 तालाबों की योजनाओं के लिये 74 करोड़ रूपये की राशि अनुदान के रूप में जारी

भोपाल प्रदेश के शहरी क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाली झीलों एवं तालाबों को प्रदूषण मुक्त रखने के लिये नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा संरक्षण एवं संवर्धन योजना चलाई जा रही है। योजना में अब तक 41 नगरीय निकायों में 48 तालाबों की योजनाओं के लिये 74 करोड़ रूपये की राशि अनुदान के रूप में जारी की जा चुकी है। योजना में नगरीय क्षेत्रों में झीलों एवं तालाबों की सीमा में होने वाले कटाव को रोकने संबंधी कार्य, झीलों एवं तालाबों के आस-पास बाउंड्रीवॉल बनाने, सघन पौधरोपण, लैम्प और फव्वारों की स्थापना के लिये नगरीय निकायों को राज्य शासन की ओर से अनुदान राशि दी जा रही है। नगरीय निकाय इस अनुदान राशि का उपयोग अपशिष्ट जल को रोकने, ट्रीटमेंट व्यवस्था, झील एवं तालाबों के किनारे सीवर पाईप व्यवस्था के लिये भी उपयोग कर रहे हैं। योजना में नगरीय निकायों को दी जाने वाली अनुदान राशि का प्रतिशत भी निर्धारित किया गया है। नगर निगम को कुल लागत राशि का 60 प्रतिशत, नगर पालिका परिषद को 75 प्रतिशत और नगर परिषद को 90 प्रतिशत राज्य शासन की ओर से अनुदान दिये जाने की व्यवस्था है। अनुदान राशि के अलावा शेष राशि की व्यवस्था संबंधित नगरीय निकायों को स्वयं अपनी इनकम जनरेट करने के निर्देश हैं।   recent visitors 47

कर्नल सोफिया-विजय शाह मामले पर सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 19 मई को, शाह के वकील ने अदालत से समय मांगा था

नई दिल्ली सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी के बाद मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री कुंवर विजय शाह के खिलाफ हाई कोर्ट ने एफआईआर का आदेश दिया था। विजय शाह ने हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी जिस पर शुक्रवार को सुनवाई होनी थी, लेकिन शीर्ष अदालत अब 19 मई को इस पर सुनवाई करेगी। रिपोर्ट के मुताबिक, मंत्री विजय शाह के वकील मनिंदर सिंह ने कुछ अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने के लिए अदालत से समय मांगा है। इस वजह से अगली सुनवाई के लिए 19 मई की तारीख तय की गई है। कर्नल कुरैशी पर मंत्री विजय शाह ने विवादित टिप्पणी की थी। उनकी टिप्पणी के बाद पूरे देश में उनकी आलोचना हो रही है। विपक्ष उन्हें कैबिनेट से बर्खास्त करने की मांग भी उठा रहा है। पहलगाम आतंकवादी हमले के खिलाफ भारत द्वारा शुरू किए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी को वायु सेना की विंग कमांडर व्योमिका सिंह के साथ नियमित प्रेस ब्रीफिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई थी और इसे उन्होंने बखूबी निभाया। लगातार ब्रीफिंग की वजह से देश में उन्होंने चर्चा बटोरी। उनके खिलाफ दिया गया बयान विजय शाह की असंवेदनशीलता को प्रदर्शित करता है। विजय शाह ने अपने बयान के लिए माफी भी मांगी है। उन्होंने एक वीडियो जारी कर कहा है कि कर्नल कुरैशी उनकी सगी बहन से भी बढ़कर हैं। इस बीच, समाजवादी पार्टी के नेता राम गोपाल यादव ने विंग कमांडर व्योमिका सिंह को लेकर जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया है। उनके खिलाफ भी पूरे देश में आक्रोश है। उधर, मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मंत्री विजय शाह को बर्खास्त किए जाने की मांग करते हुए शुक्रवार को कांग्रेस विधायकों ने राज्यपाल मंगू भाई पटेल को एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन सौंपने के बाद मंत्री को बर्खास्त करने की मांग करते हुए वे राजभवन के गेट नंबर 2 पर धरने पर बैठ गए। पुलिस ने कांग्रेस विधायकों को समझा-बुझाकर वहां से हटाने की कोशिश की, लेकिन कांग्रेस विधायक नहीं माने। हंगामे के बीच पुलिस ने धरना दे रहे विधायकों को हिरासत में ले लिया। recent visitors 52

बिहार सरकार के मंत्रियों ने राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा और इसे उनकी नौटंकी करार दिया

पटना कांग्रेस नेता राहुल गांधी के दरभंगा दौरे के दौरान दलित छात्रावास में कार्यक्रम आयोजित करने को लेकर दो एफआईआर दर्ज की गई हैं। इस घटना ने बिहार की सियासत का तापमान बढ़ा दिया है। बिहार सरकार के मंत्रियों ने राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा और इसे उनकी नौटंकी करार दिया है। बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए कहा कि वह अराजकता की मानसिकता वाले व्यक्ति हैं। परिवारवाद और जमींदारी के अहंकार में ये लोग कानून की धज्जियां उड़ाते हैं। ये संविधान का मजाक बनाते हैं और लोकतंत्र में विश्वास नहीं रखते। जनता के बीच घड़ियाली आंसू बहाकर ये सिर्फ वोट बैंक की राजनीति करते हैं। ये नेता नहीं, अभिनेता की भूमिका निभाना चाहते हैं। लेकिन, बिहार की धरती पर जनता को नेतृत्व चाहिए, नौटंकी नहीं। उनका यह कदम लोकतंत्र के खिलाफ है और जनता ऐसी हरकतों को बेहतर तरीके से समझ रही है। वहीं, बिहार सरकार के नगर विकास मंत्री जीवेश मिश्रा ने भी राहुल गांधी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी बिहार में ड्रामा करने आए थे। अगर उन्हें दलितों से मिलना था तो अब तक क्या कर रहे थे? 55 साल की उम्र में भी वे बच्चों वाली हरकत कर रहे हैं। अगर उन्हें दलितों की चिंता होती तो उनकी सरकार के समय दलितों की स्थिति इतनी खराब नहीं होती। राहुल गांधी जहां जाते हैं, केवल हंगामा करते हैं। यह उनका मकसद है। बिहार और भारत की जनता इसे अच्छे से समझती है।” एफआईआर के सवाल पर जीवेश मिश्रा ने कहा, “एफआईआर क्यों न दर्ज हो? उनके खिलाफ सबूत हैं। कानून तोड़ना, संविधान की अवहेलना करना और इसे जेब में रखने की मानसिकता गांधी परिवार की पुरानी आदत है। राहुल गांधी की चर्चा करना समय की बर्बादी है। कानून के उल्लंघन को लेकर अगर कार्रवाई की गई है तो यह न्यायसंगत है।" वहीं बिहार भाजपा की प्रवक्ता संगीता कुमारी ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के बिहार दौरे को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि उनके बिहार आने-जाने से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला, क्योंकि बिहार की जनता ने अपना मूड बना लिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार ने बिहार में विकास की गंगा बहाई है। विशेष रूप से महिलाओं के उत्थान और समग्र विकास के लिए किए गए कार्यों ने जनता का दिल जीत लिया है। बिहार की जनता पूरी तरह से एनडीए के साथ है और यहां राहुल गांधी का कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला है। recent visitors 60

बांके बिहारी कॉरिडोर को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भक्त गदगद, ऐसा होगा कॉरिडोर, हजारों गाड़ियों की पार्किंग

मथुरा बांके बिहारी कॉरिडोर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने  रास्ता साफ कर दिया। इस फैसले से ठाकुरजी के भक्त गदगद हैं। कॉरिडोर बनने के बाद दर्शन के दौरान और मंदिर तक पहुंचने के लिए लोगों को जद्दोजहद नहीं करनी पड़ेगी और ना ही दर्शन के दौरान लोगों को घुटन महसूस होगी। यही नहीं भीड़ के कारण अव्यवस्था भी नहीं फैलेगी। कॉरिडोर ऐसा होगा कि वहां एक साथ करीब छह हजार श्रद्धालु आ जाएंगे। साथ ही उनके लिए वेटिंग हॉल, और पार्किंग की बेहतर सुविधा रहेगी। वर्तमान में बांके बिहारी मंदिर का आंगन 300 वर्गमीटर का है, जिसकी क्षमता 650 श्रद्धालुओं की है। इसका बाहरी प्रांगण 450 वर्गमीटर का है, जिसकी क्षमता 1000 श्रद्धालुओं की है। जबकि यहां पर रोजाना हजारों श्रद्धालु आते हैं और विशेष अवसरों पर तो यह संख्या लाखों में हो जाती है। यही कारण है कि ऐसी स्थिति में श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। कॉरिडोर बनने के बाद उसमें एक साथ छह हजार श्रद्धालु आ सकेंगे। कानूनी प्रक्रिया से गुजरने के बाद आखिर बांके बिहारी कॉरिडोर का रास्ता साफ हो गया है। बिहारी जी कॉरिडोर के लिए जमीन खरीदने के लिए पैसा मंदिर कोष से लिया जाए, इसे लेकर कोर्ट भी कोर्ट ने साफ कर दिया है कि मंदिर कोष से 500 करोड़ रुपये लिये जाएंगे। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा हरी झंडी देने के बाद अब बिहारी जी कॉरिडोर का कार्य जल्दी ही शुरू हो सकता है। गौरतलब है कि प्रदेश सरकार इसके लिए बजट में भी प्रावधान कर चुकी है। बांकेबिहारी मंदिर कॉरीडोर का जो नक्शा प्रशासन ने तैयार कराया है, वह ऐसा है कि कॉरिडोर बनने के बाद श्रद्धालुओं को भीड़ भरे माहौल से मुक्ति मिल जाएगी। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी दर्शन सुविधाजनक होंगे। कॉरीडोर के दृष्टिगत जहां सुनरख में पार्किंग तैयार होगी, वहीं बांकेबिहारी मंदिर के सामने और देवराह बाबा घाट पर सस्पेंशन पुल बनाए जाएंगे। बांकेबिहारी मंदिर कॉरीडोर के प्रस्तावित डिजाइन में इन विकास कार्यों को सम्मिलित किया गया है। कई पार्किंग होंगी, हजारों वाहन हो सकेंगे पार्क बिहारी जी कॉरिडोर की ओर आने वाले हर रास्ते पर पार्किंग बनायी जाएंगी। ऐसे में एक नहीं कई पार्किंग होंगी, जिनमें हजारों वाहन खड़े किये जा सकेंगे। हाईवे की ओर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए 26 हजार वर्गमीटर में सुनरख पार्किंग तैयार की जाएगी। इसमें 2600 वर्गमीटर का एरिया कवर्ड होगा। इस पार्किंग में करीब एक हजार वाहन एक बार में खड़े हो सकेंगे। एक पार्किंग यमुना पार बेगमपुर (कॉरिडोर के ठीक सामने) में 12 हेक्टेयर में ग्रीन पार्किंग बनेगी, जिसमें करीब चार हजार वाहन खड़े हो सकेंगे। यह ग्रीन पार्किंग होगी, क्योंकि यहां हरियाली के बीच में वाहन पार्क होंगे। यहां से एक एलीवेटेड बिहारी जी से जोड़ेगा। इस रोड की खासियत यह होगी कि इस पर सिर्फ गोल्फ कार्ट चलेंगी और श्रद्धालु इससे पैदल भी आ सकेंगे। इसके अलावा पानीगाम, नगला रामताल में भी बड़ी पार्किंग प्रस्तावित हैं। 11 हजार वर्गमीटर में यात्री सुविधाएं बांकेबिहारी ब्रिज पार्किंग से लेकर कॉरीडोर तक करीब 11 हजार वर्गमीटर के रास्ते में यात्री सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। कॉरीडोर तक ई-रिक्शा चलाये जाएंगे या गोल्फकार्ट चलेंगी। बड़े वाहन कॉरिडोर तक नहीं पहुंचेंगे, उनको पार्किंग में पार्क करना होगा। कॉरिडोर में यात्री विश्राम स्थल, पेयजल, शौचालय, वाई-फाई, फूडकोर्ट आदि की सुविधाएं होंगी। मुल स्वरूप रहेगा यथावत, बाहर होगी आधुनिकता श्रीबांकेबिहारी मंदिर का कॉरिडोर भव्य और दिव्य होगा, जिसमें परंपरा और आधुनिकता का समावेश होगा। इस कॉरिडोर में मंदिर के मूल स्वरूप को यथावत रखते हुए बाहरी क्षेत्र के विस्तारीकरण और पहुंच मार्गों के चौड़ीकरण की कार्ययोजना तैयार की गई है। जब उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बांकेबिहारी मंदिर की व्यवस्थाओं के सुधार के लिए कॉरिडोर की परिकल्पना की थी, तभी उन्होंने मथुरा के अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि कॉरिडोर की परियोजना ऐसी हो, जहां मंदिर के मूल स्वरूप को किसी भी कीमत पर परिवर्तित न किया जाए और न किसी परंपरा को तोड़ा जाए। सीएम के इसी निर्देश पर बांकेबिहारी कॉरिडोर को डिजाइन किया गया। इसमें मंदिर के मूल स्वरूप को यथावत रखते हुए बाहरी परिसर को विस्तारित किया जाएगा। अभी तक हाल यह है कि मंदिर के बाहर ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है, जहां भीड़ बढ़ने पर श्रद्धालुओं को रोका जा सके। इससे श्रद्धालु निरंतर मंदिर की ओर बढ़ते चले जाते हैं। जहां पुलिस बैरियर लगा देती है, वहां धक्का मुक्की हो जाती है लेकिन कॉरिडोर में ऐसा नहीं होगा। नए डिजाइन में बांकेबिहारी मंदिर के बाहर द्विस्तरीय क्षेत्र होगा, जो खुला भी होगा और कवर्ड भी। मंदिर के बाहर इस खुले परिसर के बीच में बड़ा फव्वारा होगा, जिसके चारों ओर चार बगीचे होंगे।   recent visitors 44

स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का 80 प्रतिशत कार्य पूर्ण, जल्द ही बनकर होगा तैयार

भोपाल खेल और युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने शुक्रवार को भोपाल स्थित बरखेड़ा नाथू में निर्माणाधीन अंतर्राष्ट्रीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय मापदण्ड के अनुसार निर्माणाधीन अंतर्राष्ट्रीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है और शेष कार्यों को तेजी व गुणवत्ता के साथ शीघ्र पूर्ण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स प्रदेश के युवाओं को खेल के क्षेत्र में वैश्विक मंच तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने निर्माण एजेंसियों को जल्द से जल्द गुणवत्तापूर्ण कार्य को पूर्ण करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान खेल संचालक श्री राकेश कुमार गुप्ता, संयुक्त संचालक श्री बी.एस. यादव, कांट्रेक्टर, इंजीनियर्स, प्रोजेक्ट मैनेजर सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। आधुनिक सुविधाओं से युक्त होगा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स निरीक्षण के दौरान मंत्री श्री सारंग ने एथलेटिक्स स्टेडियम, लाइटिंग सिस्टम, प्रैक्टिस हॉकी फील्ड, वार्म-अप ट्रैक, मल्टीलेवल पार्किंग, फुटबॉल फील्ड, वॉटर एवं सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और अन्य निर्माण कार्यों का जायज़ा लिया। उन्होंने प्रोजेक्ट की कंस्ट्रक्शन डिटेल्स का प्रस्तुतीकरण भी देखा और तकनीकी पहलुओं पर अधिकारियों से चर्चा की। सभी खेल सुविधाएं एक परिसर में मंत्री श्री सारंग ने कहा कि इस सर्वसुविधायुक्त स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के तैयार होने से मध्यप्रदेश में खेलों के लिए एक नया आयाम स्थापित होगा। यहाँ के खिलाड़ियों को प्रशिक्षण से लेकर प्रतियोगिताओं तक की सभी सुविधाएं एक ही परिसर में मिलेंगी, जिससे उन्हें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में मजबूती मिलेगी।   recent visitors 40

पश्चिमी देश एशिया में आसियान की भूमिका को कमजोर करने की कोशिश कर रहा, बोले रूसी विदेश मंत्री

मॉस्को रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि पश्चिमी देश भारत और पाकिस्तान को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा कर रहे हैं। सरकारी समाचार एजेंसी की खबर के मुताबिक, लावरोव ने मॉस्को में सीमाओं के बिना संस्कृति : सांस्कृतिक कूटनीति की भूमिका और विकास विषय पर आयोजित डिप्लोमैटिक क्लब की बैठक में यह टिप्पणी की। रूसी विदेश मंत्री ने कहा, ''एशिया-प्रशांत क्षेत्र के हालिया घटनाक्रमों पर गौर करें, जिसे पश्चिम ने अपनी नीति को स्पष्ट रूप से चीन विरोधी रुझान देने के लिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र कहना शुरू कर दिया है-इस उम्मीद के साथ भी कि इससे हमारे महान मित्रों और पड़ोसी देशों भारत व चीन के बीच टकराव पैदा किया जा सकेगा।'' चीन के बढ़ते प्रभाव से निपटने के लिए स्थापित चतुष्पक्षीय सुरक्षा संवाद (क्वाड) के मुखर आलोचक लावरोव ने ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अमेरिका के सैन्य गठबंधन एयूकेयूएस के गठन के बाद इसकी आलोचना कम कर दी है। क्वाड में भारत, अमेरिका, जापान और अमेरिका शामिल हैं। लावरोव ने कहा कि पश्चिमी देश एशिया में आसियान (दक्षिण-पूर्वी एशियाई राष्ट्रों का संगठन) की भूमिका को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा, ''पश्चिमी सहयोगी दुनिया के अन्य हिस्सों की तरह यहां भी प्रभावशाली भूमिका में आना चाहते हैं। वे आसियान की केंद्रीय भूमिका को कमजोर करना चाहते हैं, जो कई दशकों से सभी के लिए अनुकूल थी और जो आसियान देशों और उनके सहयोगियों की ओर से राजनीति के क्षेत्र में, सैन्य सहयोग के क्षेत्र में और रक्षा के क्षेत्र में बातचीत में कायम एकमत पर आधारित थी।'' आसियान दक्षिण-पूर्वी एशिया के 10 देशों का एक क्षेत्रीय समूह है, जिसका उद्देश्य अपने सदस्यों के बीच आर्थिक और सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देना है। इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपीन, सिंगापुर, थाईलैंड, ब्रुनेई, म्यांमा, कंबोडिया, लाओस और वियतनाम इसके सदस्य देश हैं। रूसी विदेश मंत्री ने कहा, ''आम सहमति के नियम, साझा आधार की तलाश-इन सभी को हमारे पश्चिमी सहयोगी धीरे-धीरे दरकिनार करना शुरू कर रहे हैं और कुछ आसियान देशों को एकीकृत मंचों के बजाय खुले तौर पर प्रतिरोधी मंचों से जुड़ने के लिए प्रलोभन दे रहे हैं।'' उन्होंने यूरेशिया में सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था का भी आह्वान किया। लावरोव ने कहा, ''यूरेशिया जैसा कोई दूसरा महाद्वीप नहीं है, जहां इतनी सारी सभ्यताएं एक साथ रहती हैं और जिन्होंने आधुनिक युग में भी अपनी पहचान एवं प्रासंगिकता बनाए रखी है। हालांकि, यूरेशिया एकमात्र ऐसा महाद्वीप भी है, जहां कोई महाद्वीप-व्यापी मंच नहीं है। यूरेशिया में इस तरह के एकीकृत मंच की जरूरत है, ताकि कई बड़ी, वास्तव में महान शक्तियों और सभ्यताओं के हितों में सामंजस्य स्थापित किया जा सके।'' उन्होंने याद दिलाया कि अफ्रीका में जहां उप-क्षेत्रीय मंचों के अलावा अफ्रीकी संघ मौजूद है, वहीं लातिन अमेरिका और कैरीबियाई क्षेत्र में लातिन अमेरिकी और कैरीबियाई राज्यों का समुदाय (सीईएलएसी) है, जबकि यूरेशिया में अभी तक ऐसा कोई मंच नहीं बनाया जा सका है।   recent visitors 43

भारत सरकार ने तुर्की के साथ सभी तरह के समझौते की समीक्षा शुरू कर दी, तुर्की पर पहली बार प्राइवेट यूनिवर्सिटी की मार

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के मददगार तुर्की की अब खटिया खड़ी होने लगी है। भारतीयों ने तुर्की बहिष्कार का ऐलान किया है। इसके अलावा भारत सरकार ने तुर्की के साथ सभी तरह के समझौते की समीक्षा शुरू कर दी है। कुछ समझौते तो रद्द भी होने शुरू हो गए हैं। इस बीच, पहली बार एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी ने राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए तुर्की के साथ हुए अपने सभी समझौतों को रद्द कर दिया है। पंजाब के फगवाड़ा में स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी ने ऐसा कर दिखाया है। इस यूनिवर्सिटी ने तुर्की और अजरबैजान के साथ सभी समझौता ज्ञापनों को रद्द कर दिया है। इस यूनिवर्सिटी ने हाल की भू-राजनीतिक घटनाक्रमों का हवाला देते हुए तुर्की और अजरबैजान के संस्थानों के साथ छह शैक्षणिक साझेदारियों को औपचारिक रूप से तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया है। एलपीयू के संस्थापक चांसलर और राज्यसभा सांसद डॉ. अशोक कुमार मित्तल ने कहा, “जब हमारे बहादुर सशस्त्र बल अपने जीवन को जोखिम में डाल रहे हैं – चाहे गुप्त ऑपरेशन हो, हवाई रक्षा हो, या हमारी सीमाओं पर गश्त करना हो, तो हम, एक संस्थान के रूप में कैसे उदासीन बने रह सकते हैं।"  बता दें कि सुरक्षा और विमानन से लेकर शिक्षा और व्यापार तक भारत तुर्की के साथ कई क्षेत्रों में संबंध खत्म कर रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस्लामाबाद का समर्थन करने के बाद नई दिल्ली ने अंकारा को सबक सिखाने का प्रण किया है। एक दिन पहले ही नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो ने ‘राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में’ तुर्की की कंपनी सेलेबी एयरपोर्ट सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लि. की सुरक्षा मंजूरी रद्द कर दी। यह कंपनी देशभर के नौ हवाई अड्डों – मुंबई, दिल्ली, कोचीन, कन्नूर, बेंगलुरु, हैदराबाद, गोवा (जीओएक्स), अहमदाबाद और चेन्नई में सेवाएं प्रदान करती थी। इसके बाद इस सभी हवाई अड्डों ने सेलेबी के साथ समझौता रद्द कर दिया है। AIU ने देशभर के कुलपतियों को पत्र लिखा गुरुवार को ही एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (AIU) ने देशभर के कुलपतियों को पत्र लिखा है। AIU ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए कुलपतियों से तुर्की, पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ शैक्षणिक संबंध निलंबित करने का आग्रह किया है। इसके अगले ही दिन लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी ऐसा कदम उठाकर देश की पहली प्राइवेट यूनिवर्सिटी बन गई है। अब तक इन विश्वविद्यालयों ने लिया ऐक्शन अब तक जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), जामिया मिलिया इस्लामिया और कानपुर के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) सहित कई शैक्षणिक संस्थान ऐसा ही कदम उठा चुके हैं। दिल्ली में जामिया मिलिया विश्वविद्यालय ने तुर्की के शैक्षणिक संस्थानों के साथ अपने एमओयू को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है, जबकि जेएनयू ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए ऐसा किया है। जेएनयू ने तुर्की के इनोनू विश्वविद्यालय के साथ एमओयू को निलंबित कर दिया है। तुर्की के पर्यटन स्थलों के बहिष्कार का ऐलान गुरुवार को ही मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी (MANUU) ने तुर्की के यूनुस एमरे इंस्टीट्यूट के साथ अपने संबंधों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। MANUU के एक बयान में कहा, "यह निर्णय भारत-पाक तनाव की पृष्ठभूमि में पाकिस्तान की आतंकवादी गतिविधियों के लिए तुर्की के समर्थन के विरोध में लिया गया है।" फिलहाल दिल्ली विश्वविद्यालय तुर्की के कॉलेजों के साथ अपने संबंधों की समीक्षा कर रहा है। लोगों ने तुर्की के विमानों और तुर्की के पर्यटन स्थलों का बहिष्कार करने का भी आह्वान किया है। तुर्की एयरलाइन्स के विमान देशभर के 10 हवाई अड्डों से सप्ताह में 56 उड़ान भरते हैं। ये उड़ानें भारतीय यात्रियों को 131 देशों के 352 शहरों तक सेवा पहुंचाती हैं।   recent visitors 55