सुप्रीम कोर्ट ने कहा- 2006 एनकाउंटर मामले में उनकी भूमिका अब भी संदेह में है, आप चुनाव नहीं लड़ सकते

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई पुलिस के पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा को चुनाव लड़ने की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 2006 एनकाउंटर मामले में उनकी भूमिका अब भी संदेह में है। ऐसे में उन्हें आरोप मुक्त नहीं किया जा सकता है। जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने कहा, आपकी अभी वह स्थिति नहीं है कि संदेह की स्थिति में फायदा दिया जाए। पर्याप्त ऐसे सबूत हैं जो कि आपके खिलाफ संदेह पैदा करते हैं। इसके अलावा आप जमानत पर हैं। सीनियर वकील मुकल रोहतगी और सिद्धार्थ लूथरा शर्मा की तरफ से कोर्ट में पेश हुए थे। उन्होंने कहा कि पहली बार नहीं है जब वह चुनाव लड़ने की इजाजत मांग रहे हैं। रोहतगी ने कहा, याचिकाकर्ता एक एनजीओ भी चलाते हैं और एक रिटायर्ड पुलिस अधइकारी हैं। ऐसे में इन तथ्यों पर ध्यान देते हुए उन्हें चुनाव लड़ने की अनुमति दी जाए। 1k लोगों ने हिस्सा लिया बेंच ने कहा, आपको बहुत-बहुत शुभकामना। लेकिन ये जमानत पर बाहर रहकर चुनाव नहीं लड़ सकते। इसके बाद बेंच ने रोहतगी को ऐप्लिकेशन वापस लेने की अनुमति दे दी। बॉम्बे हाई कोर्ट ने 19 मार्च को सुनाए फैसले में उन्हें राम नारायण गुप्ता उर्फ लखन भैया की हत्या का दोषी ठहराया था। आरोप था कि वह छोटा राजन गैंग से था। उसका 2006 में प्रदीप शर्मा ने ही एनकाउंटर किया था। इसके बाद इसी साल प्रदीप शर्मा ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सबसे पहले ट्रायल कोर्ट ने शर्मा को बरी किया था लेकिन हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटकर उन्हें दोषी ठहराया था। सुप्रीम कोर्ट ने शर्मा को जमानत देते हुए एक सप्ताह में ही सरेंडर करने का आदेश दिया था। वहीं ट्रायल कोर्ट को भी निर्देश दिए थे कि स्थितियां देखकर ही उन्हें जमानत दी जाए। शर्मा ने अपनी यचिका में सीआरपीसी की धारा 389 का जिक्र किया था जिसके तहत कोर्ट किसी दोषी व्यक्ति को भी जमानत दे सकता है या फिर सजा रद्द कर सकता है। 2010 में प्रदीप शर्मा को गिरफ्तार किया गया था। पाया गया था कि मृत व्यक्ति के शरीर में जो गोली मिली थी वह शर्मा के ही सर्विस रिवॉल्वर की थी। 2013 में ट्रायल कोर्ट ने शर्मा को बरी कर दिया। इसे बाद याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी। हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलट दिया। इस मामले में शर्मा के साथ 6 अन्य पुलिसवालों को भी दोषी करार दिय गया था। इसके अलावा प्रदीप शर्मा अन्य मामलों में भी आरोपी हैं। इसमें एंटीलिया बम धमकी केस भी शामिल है।   recent visitors 114

सर्प विशेषज्ञ अभिजीत यादव के स्वास्थ्य में हुआ सुधार, जनरल वार्ड में किया शिफ्ट, जल्‍द होंगे अस्‍पताल से डिस्‍चार्ज

इटारसी इटारसी समेत आसपास के गांवों में वर्षा काल के अलावा साल भर निकलने वाले जहरीले सांपों के अलावा अन्य जीव जंतुओं को सुरक्षित पकड़कर उन्हें जंगल में छोड़ने वाले स्नैक केचर अभिजीत यादव अब खतरे से बाहर हैं। बुधवार शाम रेस्क्यू के दौरान तवानगर के जंगल में अभिजीत को कोबरा सांप ने डस लिया था, इसके बाद अभिजीत बेहोश हो गए थे। नर्मदा अस्पताल में करीब 40 घंटे जिदंगी और मौत के बीच उनकी जिदंगी फसी रही, लेकिन लोगों की दुआओं और दवाओं ने अभिजीत को नया जीवन दिया है। जीत अब सामान्य हो गए हैं, चार पांच दिन बाद उन्हें नर्मदा अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। हजारों विषैले सांपों को सुरक्षित ढंग से पकड़कर उनकी जान बचाने वाले सर्प विशेषज्ञ अभिजीत यादव की वायरल एक तस्‍वीर ने हजारों लोगों के चेहरे पर मुस्कान और सुकून ला दिया। नर्मदा अस्पताल प्रबंधक मनोज सारन ने एक तस्‍वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की, जिसमें अभिजीत यादव अस्पताल के बेड पर हल्की मुस्कान के साथ नजर आ रहे थे। जीत की सलामती के लिए उनके प्रशंसकों और चाहने वाले हजारों लोगों ने दिल से दुआ की, मन्नत मांगी, जिसका असर यह हुआ कि दवाओं और दुआओं के बल पर अभिजीत को नया जीवन मिल गया। दिन-रात शहरवासी जीत की सेहत का अपडेट इस तरह ले रहे थे, मानो वह हर परिवार का सदस्य है। अस्‍पताल में मिलने वालों का तांता लोगों ने उस वक्त राहत की सांस ली, जब पता चला कि जीत अब खतरे से बाहर है। अभिजीत को वेंटीलेटर से हटाकर बाहर शिफ्ट किया गया है, अभी उनकी दवाएं चल रही हैं। दो-चार दिन बाद जीत सामान्य हालत में आ जाएंगे। अस्पताल में उनसे मिलने के लिए भी लोगों की भीड़ लगी हुई है। लोगों ने उठाया इलाज का भी खर्च नर्मदा अस्पताल प्रबंधक मनोज सारन ने बताया कि अभिजीत को सामान्य वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। वह सभी को पहचान भी रहा है, हल्की मुस्कान भी चेहरे पर आ गई है। कई लोगों ने जीत के इलाज में आने वाले खर्च का प्रबंध भी किया है। सांप पकड़े पर कभी पैसे नहीं मांगे दरअसल जीत ने यूं ही लोगों के दिलों में जगह नहीं बना ली, बल्कि इसे पाने के लिए उन्हें दस साल लग गए। गो सेवा से शुरूआत करते हुए जीत ने शहर समेत आसपास के गांवों ओर जिला मुख्यालय तक सांप पकड़ना प्रारंभ कर दिया, बदले में मांगकर रुपये नहीं लिए। सांपों को पकड़ा भी ओर पूरी संजीदगी के साथ उन्हें जंगल तक छोड़ने भी गए, इसी तरह के एक रेस्क्यू में एक सांप ने उन्हें डस लिया था। गोसेवा से शुरू किया था सफर नाला मोहल्ला निवासी अभिजीत यादव के पिता रेलवे से सेवानिवृत्त हैं। 12 साल पहले जीत ने शहर में पहले गो सेवा शुरू की, धीरे-धीरे उन्होंने सांप पकड़ना सीख लिया, इस कला के वे महारथी हो गए। पिछले सालों में 2 हजार से ज्यादा सांपों की जान बचाकर जीत ने लोगों के मन में बैठा सांपों का डर भी खत्म किया।   recent visitors 218

बंगाल सरकार के वकील ने उच्च न्यायालय पर ही तीखा हमला करते हुए कहा-HC ही राज्य को चलाना चाहता है, हम क्या करें मीलॉर्ड

कोलकाता पश्चिम बंगाल में कई जातियों का ओबीसी दर्जा खत्म करने वाले हाई कोर्ट के फैसले को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इस पर सोमवार को सुनवाई हुई, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस दौरान बंगाल सरकार के वकील ने उच्च न्यायालय पर ही तीखा हमला बोल दिया। ओबीसी कोटे को लेकर बनी जातिवार सूची पर उच्च न्यायालय की तीखी टिप्पणियों पर राज्य सरकार ने ऐतराज जताया। यही नहीं दलीलों के दौरान बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि क्या उच्च न्यायालय ही राज्य को चलाना चाहता है। बंगाल सरकार की वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा, 'ऐसा क्यों हो रहा है। इसलिए क्योंकि वे मुस्लिम हैं? वे कहते हैं कि ये धर्म का मामला है। जो पूरी तरह से गलत है। यह कहा जा रहा है कि उन लोगों को इसलिए आरक्षण दिया गया क्योंकि वे मुस्लिम हैं। हमारे पास रिपोर्ट्स हैं कि सभी समुदायों पर विचार किया गया है। मंडल आयोग की सिफारिशों के आधार पर काम हुआ है। सरकार राज्य चलाना चाहती है। लेकिन अदालत ऐसा करना चाहती है तो फिर करे। आखिर हम क्या कर सकते हैं। कृपया बताएं।' इन दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने याचिका पर सुनवाई को लेकर सहमति जताई। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि जातियों की पहचान बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग का जिक्र किए बिना हुई। यह दलील है। ऐक्ट को खारिज करने के गंभीर असर हैं। फिलहाल बंगाल में कोई आरक्षण लागू नहीं हो पा रहा है। यह मुश्किल स्थिति है। इस पर इंदिरा जयसिंह ने कहा कि राज्य में पूरी आरक्षण व्यवस्था ही अटक गई है। दरअसल हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि किस जाति को कौन सा दर्जा देना है, यह आयोग का काम है। राज्य सरकार का नहीं है। आयोग 1993 में बना था और राज्य सरकार की ओर से 2012 में ऐक्ट लाया गया। इसमें बताया गया कि कैसे जाति प्रमाण पत्र मिलेगा और उसका आधार क्या होगा।   recent visitors 98

‘डेथ चैंबर्स हैं दिल्ली के कोचिंग संस्थान’, राजेंद्र नगर हादसे पर SC की सख्त टिप्पणी

नई दिल्ली उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली के राजेंद्र नगर इलाके में एक निजी कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में गत 27 जुलाई को पानी में डूबकर तीन विद्यार्थियों की मौत मामले में सोमवार को स्वत: संज्ञान और नोटिस जारी किया।न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने स्वत: संज्ञान लेते हुए केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर उनसे सुरक्षा मानदंडों पर जवाब मांगा। पीठ ने उनसे पूछा है कि सभी कोचिंग सेंटरों में किस तरह के पर्याप्त सुरक्षा मानदंडों का पालन किया जा रहा। शीर्ष अदालत ने दिल्ली में तीन भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अभ्यर्थियों की दुखद मौत का हवाला देते हुए कोचिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा दायर एक अन्य याचिका पर सुनवाई की। यह याचिका दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें दिल्ली सरकार और दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को (बेसमेंट में हुई) घटना के बाद अग्निशमन विभाग से वैध अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के बिना राज्य में चल रहे कोचिंग सेंटरों को बंद करने का निर्देश दिया गया था। उच्च न्यायालय ने दो अगस्त को घटना की जांच दिल्ली पुलिस से लेकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी थी। एक निजी कोचिंग सेंटर के के बेसमेंट में 27 जुलाई को अचानक बारिश का पानी घुसने के बाद वहां तीन विद्यार्थियों की डूबकर मृत्यु हो गई थी। इस घटना के बाद दिल्ली के राजेंद्र नगर और मुखर्जी नगर क्षेत्र में यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी कर रहे सैकड़ों विद्यार्थी लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। recent visitors 104

दोस्ती के बाद युवक से मिलने पहुंची महिला, पानी के साथ पिलाया नशीला पदार्थ, किया गैंग रेप

भोपाल भोपाल में पति से अलग रहने वाली महिला के साथ गैंग रेप की वारदात सामने आई है। पीड़िता को परिचित युवक अपने घर ले गया था। यहां उसने पानी में नशीला पदार्थ देकर महिला के साथ ज्यादती की। इसके बाद आरोपी के अन्य दोस्त ने भी महिला से रेप किया।बाद में किसी को भी घटना की जानकारी देने पर हत्या की धमकी देकर पीड़िता को जाने दिया। रविवार रात को बजरिया थाना पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। दोनों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह गुर्जर ने बताया कि 27 वर्षीय महिला जहांगीराबाद थाना क्षेत्र में रहती है। वह अपने पति से अलग होकर रहने लगी है। महिला एक होटल में हाउस कीपिंग का काम करती है। पति से अलग होने के बाद महिला ऋषि कुशवाहा नाम के युवक के संपर्क में आई थी। दोनों के बीच की दोस्ती हो गई। युवक ने महिला को शादी करने का झांसा दिया तथा उसके साथ नजदीकियां बढ़ा लीं। थोड़े दिन बाद ही महिला को पता चला युवक ने शादी का झूठा वादा किया है तथा वह पहले से ही शादीशुदा है। बात करने के बहाने घर ले गया था युवक के पहले से शादीशुदा होने की बात पता लगते ही महिला ने युवक से दूरी बनाते हुए उससे बात करना बंद कर दी। शनिवार देर रात महिला होटल से काम खत्म कर अपने घर लौट रही थी तभी रास्ते में ऋषि कुशवाहा मिल गया। उसने महिला से साथ में चलने को कहा, उसने कहा कि उसे कुछ बात करनी है। महिला ने मना किया तो उसने पुराने प्रेम-प्रसंग की बात सबको बताकर बदनाम करने के की धमकी दी। महिला जब डर गई तो युवक उसे बजरिया इलाके में अपने घर पर ले गया। यहां पर उसने महिला को नशीला पदार्थ मिला हुआ पानी पीने के लिए दिया। पानी पीते ही महिला बेसुध होने लगी। बेहोशी की हालत में की ज्यादती महिला के नशे में आने के बाद युवक ने उसके साथ दुष्कर्म किया। थोड़ी देर ऋषि का एक दोस्त भी वहां पर पहुंचा तथा उसने भी महिला के साथ रेप किया। वारदात के बाद दोनों ने महिला को जान से मारने की धमकी दी थी। इसके कारण वह कुछ घंटों तक डरी रही लेकिन रविवार की रात वह थाने पहुंची तथा शिकायत करा दी। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 64, 70 (1), 351 (3) तथा 3 (5) के तहत प्रकरण दर्ज करने के बाद आरोपी ऋषि व उसके दोस्त की तलाश शुरू कर दी है। टीआई का कहना है कि ऋषि की गिरफ्तारी के बाद ही उसके दोस्त की पहचान हो सकेगी।   recent visitors 104

नहीं रहे दिग्गज ग्राहम थोर्प, 182 अंतरराष्ट्रीय मैच, 9124 रन, 16 शतक और 60 अर्धशतक, जानिए आंकड़े

लंदन इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेटर ग्राहम थोरपे (Graham Thorpe) नहीं रहे। 55 साल की उम्र में 5 अगस्त को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। वह 2022 में गंभीर रूप से बीमार होने के कारण अस्पताल में भर्ती हुए थे। उस समय उनका इलाज स्पष्ट नहीं था। ECB ने ग्राहम की मौत की पुष्टि की है। ECB ने एक्स पर पोस्ट किया, "हमें यह खबर शेयर करते हुए बहुत दुख हो रहा है कि ग्राहम थोरपे एमबीई का निधन हो गया है। उनकी मृत्यु से हमें जो गहरा सदमा लगा है उसे शब्दों में बताना संभव नहीं है।" इंग्लैंड के लिए 182 मैच खेले थे ग्राहम थोरपे ग्राहम थोरपे बाएं हाथ के बल्लेबाज थे। उनका अंतरराष्ट्रीय करियर 13 साल का रहा। इस दौरान उन्होंने इंग्लैंड के लिए 100 टेस्ट और 82 वनडे मैच खेले। बाद में थोर्प ने इंग्लैंड की सीनियर पुरुष टीम के बल्लेबाजी कोच के रूप में भी काम किया। ग्राहम थोरपे ने टेस्ट मैच में बनाए थे 6,744 रन ग्राहम थोरपे ने 1993 में ट्रेंट ब्रिज में एशेज में डेब्यू किया था। उन्होंने 100 टेस्ट मैचों में 16 शतक लगाए और 6,744 रन बनाए। थोरपे ने वनडे में 2,380 रन बनाए। काउंटी स्तर पर भी उनका प्रदर्शन शानदार था। उन्होंने सरे के लिए फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 21,937 रन बनाए। सरे क्रिकेट क्लब के अध्यक्ष ओली स्लिपर ने ग्राहम को श्रद्धांजलि देते हुए कहा, "बहुत दुख की बात है कि वह फिर कभी ओवल के दरवाजे से नहीं गुजरेंगे। उन्होंने एक क्रिकेटर और एक इंसान के तौर पर क्लब के लिए बेहतरीन योगदान दिया। उन्हें बहुत याद किया जाएगा।" ईसीबी ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा, "इंग्लैंड के सबसे बेहतरीन बल्लेबाजों में से एक होने के अलावा वह क्रिकेट परिवार के एक प्रिय सदस्य थे। दुनिया भर के प्रशंसक उनका सम्मान करते थे। 13 साल के अंतरराष्ट्रीय करियर में उनकी उपलब्धियों ने उनके साथियों, इंग्लैंड और सरे सीसीसी समर्थकों को बहुत खुशी दी। कोच के रूप में उन्होंने इंग्लैंड की सर्वश्रेष्ठ प्रतिभा का मार्गदर्शन किया।" recent visitors 109

बांग्लादेश में PM हसीना के इस्तीफे की मांग पर हिंसा, पुलिस हटाई गई, सेना पूरे देश में तैनात, अब तक 300 से ज्यादा की मौत

ढाका पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश हिंसा की आग में सुलग रहा है. आरक्षण के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन अब प्रधानमंत्री शेख हसीना की कुर्सी के लिए खतरा बनता जा रहा है. इस बीच राजधानी ढाका सहित देशभर में सेना तैनात कर दी गई है. सड़कों से पुलिस को हटा दिया गया है. सत्तारूढ़ अवामी लीग और मुख्य विपक्षी पार्टी बीएनपी के शीर्ष नेतृत्व के बीच सेना हेडक्वार्टर में बड़ी बैठक हो रही है. बांग्लादेश में लगातार खराब हो रहे हालातों के बीच सेना चीफ जनरल वकार-उज-जमान देश को संबोधित कर सकते हैं. देशव्यापी कर्फ्यू को दरकिनार कर हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी लॉन्ग मार्च के लिए ढाका के शाहबाग चौराहे पर इकट्ठा हुए. इससे पहले रविवार को हुई हिंसा में 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई. इनमें 19 पुलिसकर्मी शामिल हैं. बांग्लादेश के हालात ठीक वैसे ही बनते जा रहे हैं, जैसे कुछ समय पहले पाकिस्तान के थे. पाकिस्तान की तरह ही अंदरूनी कलह से जूझ रहे बांग्लादेश में लॉन्ग मार्च का आह्वान किया. छात्र नेताओं ने प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे की मांग को लेकर सविनय अवज्ञा आंदोलन की घोषणा की है. बांग्लादेश में कर्फ्यू लागू, 3500 से ज्यादा कपड़ा फैक्ट्रियां बंद सरकार ने हिंसा पर काबू पाने के लिए देशभर में कर्फ्यू लगा दिया है। 3 दिनों की छुट्टियां कर दी गई हैं।ट्रेनें अगले आदेश तक रोक दी गई हैं। 3500 से ज्यादा कपड़ा फैक्ट्रियों में भी ताला लग गया है। कोर्ट भी बंद कर दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि बंदी के दौरान बहुत जरूरी मामलों में ही सुनवाई की जाएगी। इसके लिए चीफ जस्टिस इमरजेंसी बेंच का गठन करेंगे। सोमवार सुबह 11 बजे देश में इंटरनेट पूरी तरह बंद कर दिया गया था, लेकिन 3 घंटे बाद इसे फिर से चालू कर दिया गया। बांग्लादेशी अखबार प्रोथोम अलो की मुताबिक मार्च टु ढाका में करीब 4 लाख लोग शामिल हैं। कई जगहों पर पुलिस के साथ उनकी झड़पें हुई हैं। इसमें 6 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने तंगेल और ढाका में अहम हाइवे पर कब्जा कर लिया है। इससे पहले रविवार को 98 लोगों की मौत हुई थी। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक बीते तीन हफ्तों में यहां हिंसा में 300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। छात्रों का ढाका तक लॉन्ग मार्च क्यों? बांग्लादेश में छात्र प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे की मांग करते हुए देशव्यापी कर्फ्यू को धता बताते हुए सोमवार को राजधानी ढाका तक लॉन्ग मार्च के लिए जुटे हैं. एंटी डिस्क्रिमिनेशन स्टूडेंट मूवमेंट ने सोमवार को एक दिन के लॉन्ग मार्च का आह्वान किया था. इस लॉन्ग मार्च के मद्देनजर बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी और बख्तरबंद गाड़ियों को सड़कों पर गश्ती करते देखा जा सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस प्रोटेस्ट के समन्वयक आसिफ महमूद ने कहा कि इस सरकार ने कई छात्रों का कत्ल किया है. अब समय आ गया है कि सरकार को अपने कर्मों का हिसाब देना होगा. सोमवार को हर छात्र ढाका का रुक कर रहा है. एक अन्य छात्र एम. जुबैर ने कहा कि हमें कोई भी मार्च करने से नहीं रोक सकता. अगर हमारा उनसे सामना होगा, तो बांग्लादेश को आजाद कराएंगे. मैं सेना के अपने भाइयों से कहना चाहता हूं कि तानाशाहों का साथ नहीं दें. या तो आप लोगों का साथ दें या फिर निष्पक्ष रहें. इसके साथ ही सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम भी दिया गया है कि सरकार इस तय अवधि के भीतर बंद की गई सभी यूनिवर्सिटीज को दोबारा खोल दे. क्या स्टूडेंट प्रोटेस्ट हुआ हाईजैक? बांग्लादेश के इस प्रोटेस्ट में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है. आरक्षण के विरोध में शुरू हुआ ये प्रदर्शन अब पूरी तरह से हिंसा में तब्दील हो चुका है. रविवार को हुई हिंसा में 100 से अधिक लोगों की मौत हुई है. सड़कों पर उत्पात मचा रहे प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस ने बल का प्रयोग किया. इंटरनेट पर बैन लगा दिया गया. अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू किया गया है. लेकिन इस बीच शेख हसीना सरकार के नेताओं ने दावा किया है कि स्टूडेंट्स के इस प्रोटेस्ट को कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी संगठन और पूर्व प्रधानमंत्री खालिद जिया की पार्टी बीएनपी की स्टूडेंट इकाई बांग्लादेश इस्लामी छात्र शिबिर ने किया है. दरअसल शेख हसीना सरकार ने हाल ही में जमात-ए-इस्लामी, इसकी छात्र शाखा और इससे जुड़े अन्य संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया था. यह कदम बांग्लादेश में कई सप्ताह तक चले हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद उठाया गया था. कहा जा रहा है कि सरकार की इस कार्रवाई के बाद ये संगठन शेख हसीना सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं. ऐसे में शेख हसीना सरकार को बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. शेख हसीना के खिलाफ सड़कों पर उतरे हुजूम को रोकने के लिए सरकार ने देशभर में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया है. इस कर्फ्यू की वजह से अवामी लीग का सोमवार को तय शोक जुलूस रद्द कर दिया गया है. भारत ने बांग्लादेश में जारी हिंसा के कारण अपने सभी नागरिकों को अगली सूचना तक पड़ोसी देश की यात्रा नहीं करने की सलाह दी है. एक ही थाने के 13 पुलिसकर्मियों को मारा गया सरकारी नौकरियों के लिए कोटा प्रणाली को खत्म करने की मांग को लेकर लंबे समय से चल रहा छात्रों का प्रदर्शन रविवार को उग्र हो गया था. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अब उनकी एक ही मांग है पीएम शेख हसीना का इस्तीफा. बांग्लादेश के प्रमुख अखबार प्रोथोम अलो ने बताया कि देशभर में झड़पों, गोलीबारी और जवाबी कार्रवाई में कम से कम 100 लोग मारे गए हैं. पुलिस मुख्यालय के मुताबिक देशभर में 14 पुलिसकर्मी मारे गए हैं. इनमें से 13 एक ही थाने सिराजगंज के इनायतपुर में मारे गए हैं. वहीं, करीब 300 पुलिसकर्मी घायल बताए जा रहे हैं. जानें क्यों भड़की है हिंसा बांग्लादेश में आरक्षण के मुद्दे को लेकर कई बार हिंसा भड़की थी. प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि 1971 के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों के लिए 30 प्रतिशत सरकारी नौकरियों को आरक्षित करने वाली कोटा प्रणाली को समाप्त किया जाए. पहले जब हिंसा भड़की थी तब कोर्ट ने कोटे की सीमा को घटा दिया था. लेकिन … Read more