आज सरकार की पहली मासिक डेटा सीरीज ने अप्रैल में बेरोजगारी दर 5.1 प्रतिशत रहने का लगाया अनुमान

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने गुरुवार को कहा कि अप्रैल के दौरान 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के बीच श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) 55.6 प्रतिशत थी। इसी आयु वर्ग के व्यक्तियों के लिए एलएफपीआर ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 58 प्रतिशत थी और शहरी क्षेत्रों में 50.7 प्रतिशत थी। एलएफपीआर एक महत्वपूर्ण संकेतक है, जो रोजगार की स्थिति को दर्शाता है। यह दर बताती है कि श्रम बल में कितने लोग सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा जारी मासिक आंकड़ों पर आधारित नई सीरीज के अनुसार, डेटा में पहली बार ग्रामीण रोजगार के आंकड़े भी शामिल हैं, जो कवरेज को व्यापक बनाते हैं। अप्रैल में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के बीच सीडब्ल्यूएस में बेरोजगारी दर (यूआर) 5.1 प्रतिशत थी, घरेलू स्तर पर पुरुष यूआर 5.2 प्रतिशत थी, जबकि महिला यूआर 5.0 प्रतिशत थी। तिमाही आधार पर संकलित पुरानी सीरीज के अक्टूबर-दिसंबर- 2024 के दौरान शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर (यूआर) 6.4 प्रतिशत थी। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के पुरुषों के लिए सीडब्ल्यूएस में एलएफपीआर क्रमशः 79 प्रतिशत और 75.3 प्रतिशत थी, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं के बीच एलएफपीआर अप्रैल के दौरान 38.2 प्रतिशत थी। ग्रामीण क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के बीच सीडब्ल्यूएस में श्रमिक जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यूपीआर) 55.4 प्रतिशत था। आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल के दौरान समान आयु वर्ग के व्यक्तियों के बीच शहरी क्षेत्रों में डब्ल्यूपीआर 47.4 प्रतिशत था, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर समग्र डब्ल्यूपीआर 52.8 प्रतिशत रहा। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं के लिए डब्ल्यूपीआर महीने के दौरान क्रमशः 36.8 प्रतिशत और 23.5 प्रतिशत थी और देश के स्तर पर समान आयु वर्ग की समग्र महिला डब्ल्यूपीआर 32.5 प्रतिशत देखी गई। बढ़ी हुई कवरेज के साथ उच्च आवृत्ति श्रम बल संकेतकों के निर्माण की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) की नमूना पद्धति को जनवरी 2025 से नया रूप दिया गया है। पुनर्निर्मित पीएलएफएस डिजाइन की परिकल्पना अखिल भारतीय स्तर पर सीडब्ल्यूएस में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए मासिक आधार पर प्रमुख रोजगार और बेरोजगारी संकेतकों (श्रम बल भागीदारी दर, श्रमिक जनसंख्या अनुपात और बेरोजगारी दर) का अनुमान लगाने के लिए की गई है। मासिक परिणाम पीएलएफएस के मासिक बुलेटिन के रूप में जारी करने की योजना है। वर्तमान मासिक बुलेटिन अप्रैल 2025 महीने के लिए सीरीज में पहला है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लिए पीएलएफएस में जनवरी 2025 से एक रोटेशनल पैनल सैंपलिंग डिजाइन अपनाया गया है। इस रोटेशनल पैनल योजना में, प्रत्येक चयनित घर का लगातार चार महीनों में चार बार दौरा किया जाता है। recent visitors 54

सीएम योगी समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा- ‘सेना की वर्दी ‘जातिवादी चश्मे’ से नहीं देखी जाती

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद रामगोपाल यादव को विंग कमांडर व्योमिका सिंह पर दिए गए विवादित बयान पर घेरते हुए कहा कि सेना की वर्दी 'जातिवादी चश्मे' से नहीं देखी जाती है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव द्वारा एक वीरांगना बेटी को जाति की परिधि में बांधना न केवल उनकी पार्टी की संकुचित सोच का प्रदर्शन है, बल्कि सेना के शौर्य और देश की अस्मिता का भी घोर अपमान है। सीएम योगी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "सेना की वर्दी 'जातिवादी चश्मे' से नहीं देखी जाती है। भारतीय सेना का प्रत्येक सैनिक 'राष्ट्रधर्म' निभाता है, न कि किसी जाति या मजहब का प्रतिनिधि होता है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव द्वारा एक वीरांगना बेटी को जाति की परिधि में बांधना न केवल उनकी पार्टी की संकुचित सोच का प्रदर्शन है, बल्कि सेना के शौर्य और देश की अस्मिता का भी घोर अपमान है।" उन्होंने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा, "यह वही मानसिकता है, जो तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति में राष्ट्रभक्ति तक को बांटने का दुस्साहस करती है। इस विकृत जातिवादी सोच को जनता फिर जवाब देगी।" दूसरी तरफ, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी सपा महासचिव रामगोपाल पर वार करते हुए एक्स पोस्ट में लिखा, ''जाति व धर्म से परे होती है सेना। सेना का एक ही धर्म होता है 'देश की रक्षा'। इसलिए सेना में जाति व धर्म देखना 'ओछी मानसिकता' है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेना में भी महिला सशक्तीकरण पर खासा जोर दिया है। सबको उन पर भरोसा करना चाहिए।" दरअसल, मुरादाबाद में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सपा के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के बारे में नियमित रूप से ब्रीफिंग करने वाली वायु सेना की विंग कमांडर व्योमिका सिंह को लेकर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया। इस दौरान उन्होंने सेना के अन्य अधिकारियों की जातियां भी बताईं। रामगोपाल यादव ने अपनी टिप्पणी में व्योमिका सिंह और कर्नल सोफिया कुरैशी सहित अन्य सैन्य अधिकारियों की जाति का जिक्र किया। उन्होंने कहा, "युद्ध एक मुसलमान, एक जाटव और एक यादव ने लड़ा। ये तीनों पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक (पीडीए) वर्ग से आते हैं। ऐसे में भाजपा इस अभियान का श्रेय कैसे ले सकती है।" recent visitors 40

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद केंद्र सरकार ने तुर्की की कंपनियों से जुड़े सभी समझौते और परियोजनाओं की समीक्षा शुरू कर दी

नई दिल्ली भारत और तुर्की के बीच वर्षों से चल रहे व्यापारिक और रणनीतिक संबंध अब एक नई दिशा की ओर बढ़ते दिख रहे हैं। 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद केंद्र सरकार ने तुर्की की कंपनियों से जुड़े सभी समझौते और परियोजनाओं की समीक्षा शुरू कर दी है। भारत में निर्माण, मैन्युफैक्चरिंग, एविएशन, मेट्रो रेल और आईटी जैसे क्षेत्रों में सक्रिय तुर्की की कंपनियों की भूमिका को दोबारा परखा जा रहा है। यह कदम तुर्की के कश्मीर मुद्दे पर बार-बार टिप्पणी और पाकिस्तान के साथ उसकी बढ़ती निकटता के मद्देनजर उठाया गया है। भारत ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन (IBEF) की फरवरी 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में भारत-तुर्की के बीच द्विपक्षीय व्यापार 10.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। वहीं, अप्रैल 2000 से सितंबर 2024 तक भारत में तुर्की से कुल 240.18 मिलियन अमेरिकी डॉलर का एफडीआई आया है, जिससे तुर्की एफडीआई इक्विटी फ्लो में 45वें स्थान पर रहा। इन निवेशों का विस्तार गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और दिल्ली जैसे राज्यों तक है। मेट्रो रेल, सुरंग निर्माण, और एयरपोर्ट सेवाओं से लेकर शिक्षा, मीडिया और सांस्कृतिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में कई समझौते और साझेदारियां की गई थीं। उदाहरण के तौर पर, 2020 में अटल टनल के इलेक्ट्रोमैकेनिकल हिस्से का कार्य एक तुर्की कंपनी को सौंपा गया था, जबकि 2024 में रेलवे विकास निगम लिमिटेड (RVNL) ने मेट्रो परियोजना के लिए एक तुर्की कंपनी के साथ समझौता किया। तुर्की के ऑपरेटरों ने की पाकिस्तान की मदद लेकिन 'ऑपरेशन सिंदूर' और उसके बाद की घटनाओं ने भारत सरकार को एक निर्णायक मोड़ पर ला खड़ा किया है। तुर्की ने न केवल पाकिस्तान को सैन्य ड्रोन उपलब्ध कराए, बल्कि यह भी सामने आया कि तुर्की के ऑपरेटरों ने पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाइयों में सहायता की। यह प्रमुख वजह है कि अब सभी तुर्की कंपनियों से जुड़े प्रोजेक्ट्स की गहन समीक्षा की जा रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "सरकार सभी तुर्की परियोजनाओं और समझौतों को फिर से जांच रही है, भले ही वे समाप्त हो चुके हों। हर सौदे और परियोजना का पूरा डेटा इकट्ठा किया जा रहा है।" सरकार के इस कदम के पीछे एक बड़ा कारण तुर्की का लगातार कश्मीर मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बयानबाजी करना और पाकिस्तान के साथ उसकी बढ़ती नजदीकियां हैं। भले ही अब तक किसी भी परियोजना को औपचारिक रूप से रद्द नहीं किया गया है, लेकिन संकेत साफ हैं- भारत अपनी विदेश नीति में 'जरूरी बदलाव' की ओर बढ़ रहा है। वाणिज्य मंत्रालय से जुड़े एक वरिष्ठ विशेषज्ञ ने बताया, "कुछ दीर्घकालिक समझौते तत्काल प्रभाव से प्रभावित नहीं हो सकते, लेकिन ताजा परिस्थितियां और तुर्की का रवैया भविष्य के निवेश और साझेदारियों को प्रभावित कर सकता है।" कई परियोजनाओं में तुर्की की कंपनियां भागीदार भारत में तुर्की की मौजूदगी को केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। लखनऊ, पुणे और मुंबई जैसे शहरों में मेट्रो परियोजनाओं में तुर्की की कंपनियां भागीदार हैं। गुजरात में एक संयुक्त उद्यम के तहत मैन्युफैक्चरिंग यूनिट भी स्थापित की गई है। इसके अलावा, एक प्रमुख तुर्की विमानन कंपनी भारतीय हवाई अड्डों पर सेवाएं प्रदान कर रही है। तुर्की की कंपनी सलेबी एविएशन भारत के आठ प्रमुख हवाई अड्डों पर कार्गो हैंडलिंग जैसे हाई-सिक्योरिटी कार्यों में शामिल है। इनमें हवाई अड्डों में दिल्ली, मुंबई और चेन्नई शामिल हैं। इस लिहाज से पाकिस्तानी सैन्य कार्रवाई में तुर्की ऑपरेटरों के शामिल होने के खुलासे ने भारत में सुरक्षा चिंताएं बढ़ी दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन संवेदनशील क्षेत्रों में तुर्की की भागीदारी को देखते हुए, भारत सरकार इन सौदों की गहन जांच कर सकती है ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। कम शोर, सख्त संदेश 2017 में तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच मीडिया, शिक्षा और कूटनीतिक प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में सहयोग के लिए कई समझौते हुए थे। लेकिन आठ साल बाद अब ये समझौते कागजों पर ही सिमटते नजर आ रहे हैं। सरकार की मौजूदा रणनीति कम शोर, सख्त संदेश वाली प्रतीत हो रही है। फिलहाल किसी परियोजना को आधिकारिक रूप से समाप्त नहीं किया गया है, लेकिन अंदरखाने एक ठोस बदलाव की तैयारी चल रही है। भारत अब अपने रणनीतिक हितों को सर्वोपरि रखते हुए ऐसे व्यापारिक रिश्तों पर पुनर्विचार कर रहा है जो देश की विदेश नीति और सुरक्षा नीतियों से मेल नहीं खाते। तुर्की का हर मोर्चे पर बहिष्कार जारी अखिल भारतीय सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) ने फिल्म शूटिंग और सांस्कृतिक सहयोग के लिए तुर्की का "पूर्ण बहिष्कार" करने की घोषणा की है। AICWA ने X पर कहा, "तुर्की में तत्काल प्रभाव से कोई भी बॉलीवुड या भारतीय फिल्म प्रोजेक्ट शूट नहीं किया जाएगा। किसी भी भारतीय निर्माता, प्रोडक्शन हाउस, निर्देशक या फाइनेंसर को तुर्की में कोई भी फिल्म, टेलीविजन या डिजिटल कंटेंट प्रोजेक्ट ले जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।"  recent visitors 51

यूपी सरकार ने गरीबों की थाली तक राशन पहुंचाने के लिए खोला खजाना, 179.42 करोड़ रुपए किये स्वीकृत

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार हर जरूरतमंद तक राशन पहुंचाने की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने पर जोर दे रही है। योगी सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के अंतर्गत उचित दर वितरण प्रणाली को मजबूत करने के लिए 179.42 करोड़ रुपए की बड़ी धनराशि स्वीकृत की है। यह धनराशि उठाई, धराई और अंतर्राज्यीय संचालन से लेकर उपभोक्ताओं तक राशन सामग्री के सुचारू वितरण के लिए स्वीकृत की गई है, जो खाद्य एवं रसद विभाग की कार्यक्षमता को नई गति देगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश के गरीबों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत योगी सरकार एक-एक पात्र गरीब को चिन्हित कर राशन कार्ड जारी कर रही है। प्रदेश में अंत्योदय कार्ड लाभार्थियों की संख्या 1.29 करोड़ से अधिक है। अब तक प्रदेश में 3.16 करोड़ से अधिक परिवारों के पात्र गृहस्थी राशन कार्ड और 40.73 लाख से अधिक परिवारों के अंत्योदय राशन कार्ड बनाए जा चुके हैं। सरकार का लक्ष्य हर जरूरतमंद तक राशन पहुंचाना है और इसके लिए अभियान चलाकर पात्रता की पहचान की जा रही है। उपर्युक्त धनराशि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ली गई है, जिसके अंतर्गत केंद्रांश और राज्यांश का अनुपात 50-50 रखा गया है। इस योजना का उद्देश्य राज्य भर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को और अधिक पारदर्शी, सक्षम और व्यापक बनाना है, ताकि लाभार्थियों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जा सके। इसमें अंतर्राज्यीय परिवहन, भंडारण, सामग्री की लदान-उतरान, उचित दर दुकानों तक राशन की आपूर्ति और वितरण व्यवस्था शामिल है। यह राशि खाद्य भंडारण एवं आपूर्ति श्रृंखला की बुनियादी संरचना को मजबूत करने के लिए खर्च की जाएगी, जिससे किसी भी स्तर पर खाद्यान्न वितरण में बाधा न आए। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी आयुक्त, खाद्य एवं रसद विभाग द्वारा की जाएगी, जिन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि योजना पारदर्शी तरीके से लागू हो और इसका लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे। योगी सरकार ने निर्देश दिया है कि पूर्व में दी गई वित्तीय स्वीकृतियों और योजनाओं से कोई दोहराव न हो तथा हर तिमाही में आवश्यकतानुसार बजट का निर्धारण कर खर्च किया जाए। योगी सरकार गरीबों, जरूरतमंदों और अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक राशन और पोषण पहुंचाने को लेकर पूरी तरह गंभीर है। योगी सरकार ने राशन वितरण में किसी भी तरह का घपला नहीं हो, इसके लिए ई-केवाईसी और आधार सत्यापन प्रणाली लागू की है। इसके तहत राशन कार्डधारकों को अब देश के किसी भी उचित दर दुकान पर ई-केवाईसी कराने की सुविधा मिल रही है। राशन वितरण में ई-पॉस मशीनों के उपयोग ने पारदर्शिता को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। इन मशीनों के जरिए अन्न का वितरण सीधे लाभार्थियों तक पहुंच रहा है। यह तकनीकी नवाचार न केवल समय पर राशन उपलब्धता सुनिश्चित कर रहा है, बल्कि गरीबों के लिए खाद्य सुरक्षा को भी मजबूत कर रहा है। पात्र कार्डधारकों को प्रति यूनिट 5 किलो गेहूं और चावल दिया जा रहा है। पात्र गृहस्थी कार्डधारकों को प्रति यूनिट 2 किलो गेहूं और 3 किलो चावल (कुल मिलाकर 5 किलो) फ्री में दिया जा रहा है। वहीं, अंत्योदय कार्ड धारक को एकमुश्त 14 किलो गेहूं और 21 किलो चावल (कुल 35 किलो) दिए जा रहे हैं। recent visitors 36

नोएडा में अब तक 2 लाख फ्लैट खरीदारों को कब्जा दिया, लेकिन 18 हजार की ही रजिस्ट्री, DM ने बिल्डरों को भेजा नोटिस

नई नोएडा नोएडा के जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा में फ्लैट की रजिस्ट्री में देरी पर ऐक्शन की तैयारी में है। डीएम ने 95 बिल्डरों को नोटिस जारी करते हुए तलब किया है। इस मामले में जिला प्रशासन ने एक बैठक बुलाई है जिसमें फ्लैट की रजिस्ट्री न होने की शिकायत करने वाले खरीदारों को भी बुलाया गया है। मिली जानकारी के अनुसार, नोएडा और ग्रेटर नोएडा में अब तक 2 लाख फ्लैट खरीदारों को कब्जा तो दे दिया गया है, लेकिन रजिस्ट्री को लेकर अभी भी संशय बना हुआ है। कई फ्लैट मालिक तो पिछले 10 सालों से इसका इंतजार कर रहे हैं। आइए जानते हैं पूरा मामला क्या है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित अमिताभ कांत समिति की सिफारिशें लागू होने के बावजूद कई बिल्डर खरीदारों को उनके फ्लैट का कब्जा तो दे रहे हैं लेकिन फ्लैट की रजिस्ट्री नहीं हुई है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में लगभग दो लाख खरीदारों को फ्लैट का कब्जा मिल चुका है, लेकिन अब तक केवल 18 हजार फ्लैट की ही रजिस्ट्री हो पाई है। कई खरीदार करीब एक दशक से इंतजार कर रहे हैं और बिल्डरों के कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही दिया जा रहा है। अब डीएम के नोटिस के बाद बिल्डरों पर ऐक्शन शुरू हो सकता है इस बारे में पूछे जाने पर सहायक पुलिस महानिदेशक बृजेश कुमार ने मीडिया को बताया कि लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि बिल्डर जानबूझकर रजिस्ट्री में देरी कर रहे हैं। इस संबंध में नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना विकास प्राधिकरण क्षेत्र के लगभग 95 बिल्डरों को नोटिस जारी किया गया हैं। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा आयोजित बैठक में बिल्डरों को खरीदारों के सवालों का जवाब देना होगा। उनके अनुसार, अगर कोई बिल्डर बैठक में शामिल नहीं होता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। recent visitors 42

बलूचिस्तान हिंदुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है क्योंकि यहां हिंगलाज माता का मंदिर स्थित है: सीएम सरमा

बलूचिस्तान भारत-पाकिस्तान के बीच जारी तनाव के बीच बलूचिस्तान की आजादी की मांग तेज हो गई है। इस बीच असम के मुख्यमंत्री हिमंत सरमा ने वहां स्थित एक हिंदू मंदिर का जिक्र करते हुए इसे सनातन धर्म के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल बताया है। सरमा ने गुरुवार को कहा कि बलूचिस्तान हिंदुओं के लिए ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है क्योंकि यहां हिंगलाज माता का मंदिर स्थित है जो 51 पवित्र शक्तिपीठों में से एक है। यहां पाकिस्तान का सबसे बड़े हिंदू उत्सव हिंगलाज यात्रा मनाया जाता है। हिंगलाज माता का प्राचीन गुफा मंदिर देश के उन कुछ हिंदू स्थलों में से एक है, जहां हर साल बड़ी संख्या में तीर्थयात्री आते हैं। आपको बता दें कि मुस्लिम बहुल पाकिस्तान में 44 लाख हिंदू रहते हैं, जो कि कुल आबादी का सिर्फ 2.14 प्रतिशत है। भक्तगण ज्वालामुखी के शिखर तक पहुंचने के लिए सैकड़ों सीढ़ियां चढ़ते हैं या चट्टानों से होते हुए यात्रा करते हैं। यहां मौजूद गड्ढे में नारियल और गुलाब की पंखुड़ियां फेंकते हैं और हिंगलाज माता के दर्शन के लिए दैवीय अनुमति मांगते हैं। यहां तीन दिवसीय मेला लगता है। मंदिर के सबसे वरिष्ठ पुजारी महाराज गोपाल बताते हैं कि लोग यहां क्यों आते हैं। वह कहते हैं, "यह हिंदू धर्म में सबसे पवित्र तीर्थस्थल है। जो कोई भी इन तीन दिनों के दौरान मंदिर में आता है और पूजा करता है, उसके सभी पाप क्षमा हो जाते हैं।" हिमंत सरमा ने क्या कहा? मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘यह मंदिर हिंगोल राष्ट्रीय उद्यान की दुर्गम पहाड़ियों में स्थित है और ऐसा माना जाता है कि यही वह स्थान है जहां देवी सती का शीश गिरा था। इस कारण यह स्थान देवी शक्ति के सबसे पवित्र स्थलों में से एक माना जाता है।’’ उन्होंने कहा कि ‘‘सिंधी, भावसर और चरण समुदायों’’ के श्रद्धालु सदियों से रेगिस्तानी रास्तों को पार करते हुए इस मंदिर में दर्शन के लिए कठिन यात्राएं करते आ रहे हैं। हिंगोल नेशनल पार्क के बीहड़ इलाकों में बसे इस मंदिर के बारे में माना जाता है कि यह वह स्थान है जहां देवी सती का सिर गिरा था, जो इसे शक्तिपीठ के सबसे पवित्र स्थलों में से एक बनाता है। मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि धार्मिक महत्व से परे, बलूचिस्तान इस क्षेत्र में उपमहाद्वीप के विभाजन से पहले तक हिंदुओं की प्राचीन सांस्कृतिक उपस्थिति का भी गवाह रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तीर्थ स्थल को बलूच समुदाय भी गहरे सम्मान से ‘नानी मंदिर’ कहकर संबोधित करते है, जो विभिन्न समुदायों के बीच साझा विरासत और पारस्परिक श्रद्धा की दुर्लभ मिसाल है। recent visitors 43

आतंकी रहे अहमद अल-शारा से डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात की दुनिया भर में चर्चा, प्रतिबंध हटाने का हुआ ऐलान

दमिश्क अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीरिया के अंतरिम नेता अहमद अल-शारा से मुलाकात की थी। इसके अलावा अमेरिकी नेता ने सीरिया से प्रतिबंध हटाने का भी ऐलान किया है। कभी आतंकी रहे अहमद अल-शारा से डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात की दुनिया भर में चर्चा है। कई देशों और मीडिया की तरफ से आलोचना भी हो रही है। लेकिन सीरिया में जश्न जैसा माहौल है। बुधवार रात को ही सीरिया में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। ये लोग नाच रहे हैं और डोनाल्ड ट्रंप की तारीफें कर रहे हैं। आज उनके लिए वही अमेरिका दोस्त बन गया है, जिसे कभी वे 'जानी दुश्मन' मानते थे। इस तरह एक झटके में सीरिया में माहौल बदल गया है। सीरिया के लोगों का कहना है कि अमेरिकी प्रतिबंध हटने के बाद अब उनके देश का आर्थिक विकास हो सकेगा। अब हम भी दुनिया की मुख्यधारा में आएंगे। जश्न मना रहे कई लोगों ने तो कहा कि यह सीरिया के नए जन्म जैसा है। इन लोगों का कहना है कि यह हमारे लिए कई दशक से चली आ रही तबाही से उबरने का एक रास्ता होगा। अब हमारे देश में भी निवेश आएगा और आर्थिक प्रगति की राह खुलेगी। वहीं अहमद अल शारा का कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप का फैसला बहुत साहस भरा है। उन्होंने कहा कि अब एक नया और आधुनिक सीरिया खड़ा होगा। यह तो सीरिया के लिए पुनर्जन्म जैसा है। टीवी पर देश को संबोधित करते हुए अहमद अल-शारा ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति का फैसला ऐतिहासिक और साहसी है। इससे सीरिया के लोगों की पीड़ा कम होगी। अब हम क्षेत्रीय शांति और स्थिरता में अपना योगदान दे सकेंगे। दरअसल सीरिया लंबे समय से गृह युद्ध की मार झेल रहा है। फिर आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने कब्जा जमा लिया था। लंबे समय तक बशर अल असद और उनके परिवार की देश में तानाशाही रही। इसके चलते सीरिया की 90 फीसदी आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवन गुजार रही है। अब सीरिया के लोगों को लगता है कि यह विकास की नई सुबह होगी। गुरुवार को सुबह ही बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। रात को भी जश्न चला। सोशल मीडिया पर जो वीडियो वायरल हो रहे हैं, उसमें दिखता है कि लोग झंडे लहराते हुए झूम रहे हैं। दमिश्क के मशहूर उम्मैद स्क्वेयर पर हजारों लोगों का जमावड़ा दिखाई दिया। बैकग्राउंड में म्यूजिक बज रहा था और सीरिया के झंडे लहरा रहे थे। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार जिहाद यजीगी नाम के एक शख्स ने कहा कि अब सरकार कोई बहाना नहीं कर पाएगी कि हमारे ऊपर अमेरिकी प्रतिबंध हैं। वह सीरिया रिपोर्ट के एडिटर भी हैं। वहीं एक अन्य शख्स हाजेम अल-लोदा ने कहा कि असद सरकार से निपटने के लिए अमेरिका ने पाबंदिया लगाई थीं, लेकिन इसे भुगत तो हमारे जैसे आम लोग ही रहे थे। recent visitors 49