लोगों की समस्या के निराकरण और विकास की योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिये निरंतर संवाद आवश्यक : उप मुख्यमंत्री देवड़ा

भोपाल उप मुख्यमंत्री एवं जबलपुर जिले के प्रभारी मंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि लोगों की समस्या के निराकरण और विकास की योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिये जन प्रतिनिधियों और सबंधित विभागों के अधिकारियों के बीच निरन्तर संवाद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आम जनता से जुड़ी समस्या का निराकरण तत्परता से किया जाएं। जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए मुद्दों का समय-सीमा तय कर समाधान करें। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा गुरूवार को जबलपुर में जिला योजना समिति की बैठक को संबोधित कर रहे थे। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने बैठक में जल जीवन मिशन एवं अमृत 2.0 सहित जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति के कार्यों की समीक्षा की तथा सिविल डिफेंस प्लान के क्रियान्वयन पर योजना समिति के सदस्यों के साथ विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि किसी भी मुद्दे का निराकरण अगर जिला स्तर पर संभव नहीं है, तो तत्काल उनके संज्ञान में लाया जाएं जिससे शासन स्तर पर उसे निराकृत करने का प्रयास किया जाएगा। बैठक में शहर की यातायात व्यवस्था, शहर में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था में सुधार, यात्री बसों के शहर में प्रवेश पर लगे प्रतिबंध का कड़ाई से पालन कराने और अतिक्रमण जैसे मुद्दों पर भी बैठक में विचार विमर्श हुआ। इस के साथ ही नवनिर्मित राँझी में स्टेडियम का नामकरण पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. ईश्वरदास रोहाणी खेल परिसर के नाम पर करने तथा पनागर जनपद पंचायत के ग्राम खिरियाकला के शासकीय हाई स्कूल का नाम इस स्कूल के लिये जमीन दान करने वाली श्रीमती राधिका पटेल एवं श्रीमती लक्ष्मी पटेल के नाम करने के प्रस्ताव का अनुमोदन भी बैठक में किया गया। बैठक में राज्य सभा सदस्य श्रीमती सुमित्रा वाल्मीकि, सांसद श्री आशीष दुबे एवं विधायकगण मौजूद थे।   recent visitors 53

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत-पाकिस्तान सीजफायर पर अपने बयान से पलट गए, कहा- ‘मैंने जंग नहीं रुकवाई

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप गुरुवार को भारत-पाकिस्तान सीजफायर पर अपने बयान से पलट गए। उन्होंने कहा कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता नहीं कराई। उन्होंने कहा कि मैंने दोनों देशों के बीच तनाव का समाधान निकालने में मदद की थी। कतर दौरे पर पहुंचे ट्रंप ने अल-उदीद एयर बेस पर अमेरिकी सैन्य कर्मियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा, 'मैंने ये नहीं कहना चाहता कि मैने ऐसा किया। लेकिन मैंने पिछले सप्ताह पाकिस्तान और भारत के बीच समस्या को सुलझाने में मदद की, जो काफी तनावपूर्ण होती जा रही थी।' कई बार ले चुके थे क्रेडिट ट्रंप ने मंगलवार को सऊदी अरब की यात्रा के दौरान दावा किया था कि उनके प्रशासन ने भारत और पाकिस्तान के बीच सफलतापूर्वक ऐतिहासिक संघर्ष विराम कराया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने गत शनिवार को दो बार यह दावा किया था कि भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम उन्होंने करवाया। इसके बाद सोमवार को तीसरी बार उन्होंने दावा किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु संघर्ष को रोकने में उनकी सरकार ने मध्यस्थता की और लाखों लोगों की जान बचाई। बता दें कि ट्रंप इस समय पश्चिम एशिया के चार दिवसीय दौरे पर हैं। भारत ने खारिज कर दिया था बयान भारत ने स्पष्ट तौर पर कह दिया था कि पाकिस्तान के डीजीएमओ ने फोन कर भारत से सीजफायर की गुजारिश की थी। इसमें कोई तीसरा पक्ष शामिल नहीं है। अमेरिकी सैनिकों को संबोधित करते हुए ट्रम्प ने फिर से दावा किया कि उन्होंने देशों से ट्रेड के बारे में बात की। recent visitors 57

सरकार की बड़ी सौगात- जल्द ही डिलीवरी बॉय को भी मिलेगी पेंशन!, कंपनियां भी तैयार

नई दिल्ली जोमैटो, स्विगी, अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी दिग्गज कंपनियों के साथ काम कर रहे लाखों डिलीवरी पार्टनर्स और कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स के लिए एक अहम खबर सामने आई है। जल्द ही इन गिग वर्कर्स को भी पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिल सकता है। सूत्रों की मानें तो ओला, उबर और अमेजन सहित कई कंपनियों ने इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है और इसे अगली कैबिनेट बैठक में पेश किया जा सकता है। कौन हैं गिग वर्कर्स? गिग वर्कर्स वो श्रमिक होते हैं जो किसी स्थायी नौकरी की बजाय अस्थायी या अनुबंध आधारित कार्य करते हैं। इनमें फ्रीलांसर, डिलीवरी एजेंट, कैब ड्राइवर, कंटेंट क्रिएटर, और कई ऑनलाइन सर्विस प्रोवाइडर्स शामिल हैं। ये कर्मचारी "पे-पर-टास्क" मॉडल पर काम करते हैं और परंपरागत कर्मचारियों की तरह उन्हें पेंशन, मेडिकल या अन्य सुविधाएं नहीं मिलतीं। क्या है सरकार की योजना? सरकार की योजना के मुताबिक, इन अस्थायी कर्मचारियों के लिए एक पेंशन स्कीम लागू की जा सकती है, जिसमें कंपनियां EPFO (Employees’ Provident Fund Organisation) के माध्यम से एक तय राशि जमा करेंगी। गिग वर्कर्स के पास दो विकल्प होंगे—या तो वो खुद भी अंशदान करें या केवल कंपनी के अंशदान के आधार पर पेंशन प्राप्त करें। क्यों है यह जरूरी? देश में लंबे समय से यह मांग उठती रही है कि गिग वर्कर्स को भी पारंपरिक कर्मचारियों की तरह सामाजिक सुरक्षा दी जाए। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी इस साल के आम बजट में गिग वर्कर्स के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाने की घोषणा की थी, जिसका उद्देश्य उनके डेटा को संकलित करना और उन्हें स्वास्थ्य बीमा, बीमा कवर और अब पेंशन जैसी सुविधाएं देना है। आगे क्या? अब यह प्रस्ताव कैबिनेट के पास भेजा जाएगा और वहां से मंजूरी मिलने पर एक बड़ी श्रेणी के गिग वर्कर्स को पहली बार संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों की तरह सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलने लगेगा। अगर यह स्कीम लागू हो जाती है, तो यह भारत के श्रम बाजार में एक ऐतिहासिक कदम माना जाएगा।   recent visitors 48

सतना में गोवंश की हत्या, पेड़ से बांधकर कई अंग काटे, पुलिस के सामने ग्रामीणों ने आक्रोश जताया

सतना जिले के सिंहपुर थाना क्षेत्र में आने नौखड़ गांव में अज्ञात लोगों ने निर्ममता से पेड़ में बांधकर गौवंश का अंग-भंग कर हत्या कर दी। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में भारी तनाव का माहौल है। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस के सामने ग्रामीणों ने आक्रोश जताया है। सिंहपुर पुलिस ने गौवंश मालिक गोपाल की शिकायत पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।   पेड़ से बांधकर की हत्या गौपालक छोटे अहिरवार ने बताया कि उन्होंने अपनी गाय को घर से कुछ दूरी पर बांध दिया था। बुधवार की रात से सुबह छह बजे के बीच कुछ लोग गाय को वहां से ले गए। उसे दूर पेड़ में बांधकर गौवंश की निर्ममता से अंग-भंग कर हत्या कर दी। उसका किसी भी कोई विवाद भी नहीं है। क्षेत्र में तनाव का माहौल गौवंश के साथ इस प्रकार का अमानवीय कृत्य सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव की स्थिति बन चुकी है। जानकारी लगते ही ग्रामीणों ने गौवंश समाधि बनाने व आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग कर दी है। लोगों ने कहा कि पुलिस आरोपियों को जल्द पकड़े। अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज सिंहपुर थाना प्रभारी अजय कुमार ने बताया कि सूचना पर प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने कार्रवाई का आश्वासन दिया है। गौपालक की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है। रैगांव और सिंहपुर थाना पुलिस मिलकर मामले की जांच कर रही है। पशु चिकित्सक ने गौवंश का पीएम किया है। recent visitors 49

आज सरकार की पहली मासिक डेटा सीरीज ने अप्रैल में बेरोजगारी दर 5.1 प्रतिशत रहने का लगाया अनुमान

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने गुरुवार को कहा कि अप्रैल के दौरान 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के बीच श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) 55.6 प्रतिशत थी। इसी आयु वर्ग के व्यक्तियों के लिए एलएफपीआर ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 58 प्रतिशत थी और शहरी क्षेत्रों में 50.7 प्रतिशत थी। एलएफपीआर एक महत्वपूर्ण संकेतक है, जो रोजगार की स्थिति को दर्शाता है। यह दर बताती है कि श्रम बल में कितने लोग सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा जारी मासिक आंकड़ों पर आधारित नई सीरीज के अनुसार, डेटा में पहली बार ग्रामीण रोजगार के आंकड़े भी शामिल हैं, जो कवरेज को व्यापक बनाते हैं। अप्रैल में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के बीच सीडब्ल्यूएस में बेरोजगारी दर (यूआर) 5.1 प्रतिशत थी, घरेलू स्तर पर पुरुष यूआर 5.2 प्रतिशत थी, जबकि महिला यूआर 5.0 प्रतिशत थी। तिमाही आधार पर संकलित पुरानी सीरीज के अक्टूबर-दिसंबर- 2024 के दौरान शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर (यूआर) 6.4 प्रतिशत थी। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के पुरुषों के लिए सीडब्ल्यूएस में एलएफपीआर क्रमशः 79 प्रतिशत और 75.3 प्रतिशत थी, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं के बीच एलएफपीआर अप्रैल के दौरान 38.2 प्रतिशत थी। ग्रामीण क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के बीच सीडब्ल्यूएस में श्रमिक जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यूपीआर) 55.4 प्रतिशत था। आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल के दौरान समान आयु वर्ग के व्यक्तियों के बीच शहरी क्षेत्रों में डब्ल्यूपीआर 47.4 प्रतिशत था, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर समग्र डब्ल्यूपीआर 52.8 प्रतिशत रहा। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं के लिए डब्ल्यूपीआर महीने के दौरान क्रमशः 36.8 प्रतिशत और 23.5 प्रतिशत थी और देश के स्तर पर समान आयु वर्ग की समग्र महिला डब्ल्यूपीआर 32.5 प्रतिशत देखी गई। बढ़ी हुई कवरेज के साथ उच्च आवृत्ति श्रम बल संकेतकों के निर्माण की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) की नमूना पद्धति को जनवरी 2025 से नया रूप दिया गया है। पुनर्निर्मित पीएलएफएस डिजाइन की परिकल्पना अखिल भारतीय स्तर पर सीडब्ल्यूएस में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए मासिक आधार पर प्रमुख रोजगार और बेरोजगारी संकेतकों (श्रम बल भागीदारी दर, श्रमिक जनसंख्या अनुपात और बेरोजगारी दर) का अनुमान लगाने के लिए की गई है। मासिक परिणाम पीएलएफएस के मासिक बुलेटिन के रूप में जारी करने की योजना है। वर्तमान मासिक बुलेटिन अप्रैल 2025 महीने के लिए सीरीज में पहला है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लिए पीएलएफएस में जनवरी 2025 से एक रोटेशनल पैनल सैंपलिंग डिजाइन अपनाया गया है। इस रोटेशनल पैनल योजना में, प्रत्येक चयनित घर का लगातार चार महीनों में चार बार दौरा किया जाता है। recent visitors 67

सीएम योगी समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा- ‘सेना की वर्दी ‘जातिवादी चश्मे’ से नहीं देखी जाती

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद रामगोपाल यादव को विंग कमांडर व्योमिका सिंह पर दिए गए विवादित बयान पर घेरते हुए कहा कि सेना की वर्दी 'जातिवादी चश्मे' से नहीं देखी जाती है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव द्वारा एक वीरांगना बेटी को जाति की परिधि में बांधना न केवल उनकी पार्टी की संकुचित सोच का प्रदर्शन है, बल्कि सेना के शौर्य और देश की अस्मिता का भी घोर अपमान है। सीएम योगी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "सेना की वर्दी 'जातिवादी चश्मे' से नहीं देखी जाती है। भारतीय सेना का प्रत्येक सैनिक 'राष्ट्रधर्म' निभाता है, न कि किसी जाति या मजहब का प्रतिनिधि होता है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव द्वारा एक वीरांगना बेटी को जाति की परिधि में बांधना न केवल उनकी पार्टी की संकुचित सोच का प्रदर्शन है, बल्कि सेना के शौर्य और देश की अस्मिता का भी घोर अपमान है।" उन्होंने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा, "यह वही मानसिकता है, जो तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति में राष्ट्रभक्ति तक को बांटने का दुस्साहस करती है। इस विकृत जातिवादी सोच को जनता फिर जवाब देगी।" दूसरी तरफ, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी सपा महासचिव रामगोपाल पर वार करते हुए एक्स पोस्ट में लिखा, ''जाति व धर्म से परे होती है सेना। सेना का एक ही धर्म होता है 'देश की रक्षा'। इसलिए सेना में जाति व धर्म देखना 'ओछी मानसिकता' है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेना में भी महिला सशक्तीकरण पर खासा जोर दिया है। सबको उन पर भरोसा करना चाहिए।" दरअसल, मुरादाबाद में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सपा के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के बारे में नियमित रूप से ब्रीफिंग करने वाली वायु सेना की विंग कमांडर व्योमिका सिंह को लेकर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया। इस दौरान उन्होंने सेना के अन्य अधिकारियों की जातियां भी बताईं। रामगोपाल यादव ने अपनी टिप्पणी में व्योमिका सिंह और कर्नल सोफिया कुरैशी सहित अन्य सैन्य अधिकारियों की जाति का जिक्र किया। उन्होंने कहा, "युद्ध एक मुसलमान, एक जाटव और एक यादव ने लड़ा। ये तीनों पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक (पीडीए) वर्ग से आते हैं। ऐसे में भाजपा इस अभियान का श्रेय कैसे ले सकती है।" recent visitors 52

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद केंद्र सरकार ने तुर्की की कंपनियों से जुड़े सभी समझौते और परियोजनाओं की समीक्षा शुरू कर दी

नई दिल्ली भारत और तुर्की के बीच वर्षों से चल रहे व्यापारिक और रणनीतिक संबंध अब एक नई दिशा की ओर बढ़ते दिख रहे हैं। 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद केंद्र सरकार ने तुर्की की कंपनियों से जुड़े सभी समझौते और परियोजनाओं की समीक्षा शुरू कर दी है। भारत में निर्माण, मैन्युफैक्चरिंग, एविएशन, मेट्रो रेल और आईटी जैसे क्षेत्रों में सक्रिय तुर्की की कंपनियों की भूमिका को दोबारा परखा जा रहा है। यह कदम तुर्की के कश्मीर मुद्दे पर बार-बार टिप्पणी और पाकिस्तान के साथ उसकी बढ़ती निकटता के मद्देनजर उठाया गया है। भारत ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन (IBEF) की फरवरी 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में भारत-तुर्की के बीच द्विपक्षीय व्यापार 10.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। वहीं, अप्रैल 2000 से सितंबर 2024 तक भारत में तुर्की से कुल 240.18 मिलियन अमेरिकी डॉलर का एफडीआई आया है, जिससे तुर्की एफडीआई इक्विटी फ्लो में 45वें स्थान पर रहा। इन निवेशों का विस्तार गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और दिल्ली जैसे राज्यों तक है। मेट्रो रेल, सुरंग निर्माण, और एयरपोर्ट सेवाओं से लेकर शिक्षा, मीडिया और सांस्कृतिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में कई समझौते और साझेदारियां की गई थीं। उदाहरण के तौर पर, 2020 में अटल टनल के इलेक्ट्रोमैकेनिकल हिस्से का कार्य एक तुर्की कंपनी को सौंपा गया था, जबकि 2024 में रेलवे विकास निगम लिमिटेड (RVNL) ने मेट्रो परियोजना के लिए एक तुर्की कंपनी के साथ समझौता किया। तुर्की के ऑपरेटरों ने की पाकिस्तान की मदद लेकिन 'ऑपरेशन सिंदूर' और उसके बाद की घटनाओं ने भारत सरकार को एक निर्णायक मोड़ पर ला खड़ा किया है। तुर्की ने न केवल पाकिस्तान को सैन्य ड्रोन उपलब्ध कराए, बल्कि यह भी सामने आया कि तुर्की के ऑपरेटरों ने पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाइयों में सहायता की। यह प्रमुख वजह है कि अब सभी तुर्की कंपनियों से जुड़े प्रोजेक्ट्स की गहन समीक्षा की जा रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "सरकार सभी तुर्की परियोजनाओं और समझौतों को फिर से जांच रही है, भले ही वे समाप्त हो चुके हों। हर सौदे और परियोजना का पूरा डेटा इकट्ठा किया जा रहा है।" सरकार के इस कदम के पीछे एक बड़ा कारण तुर्की का लगातार कश्मीर मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बयानबाजी करना और पाकिस्तान के साथ उसकी बढ़ती नजदीकियां हैं। भले ही अब तक किसी भी परियोजना को औपचारिक रूप से रद्द नहीं किया गया है, लेकिन संकेत साफ हैं- भारत अपनी विदेश नीति में 'जरूरी बदलाव' की ओर बढ़ रहा है। वाणिज्य मंत्रालय से जुड़े एक वरिष्ठ विशेषज्ञ ने बताया, "कुछ दीर्घकालिक समझौते तत्काल प्रभाव से प्रभावित नहीं हो सकते, लेकिन ताजा परिस्थितियां और तुर्की का रवैया भविष्य के निवेश और साझेदारियों को प्रभावित कर सकता है।" कई परियोजनाओं में तुर्की की कंपनियां भागीदार भारत में तुर्की की मौजूदगी को केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। लखनऊ, पुणे और मुंबई जैसे शहरों में मेट्रो परियोजनाओं में तुर्की की कंपनियां भागीदार हैं। गुजरात में एक संयुक्त उद्यम के तहत मैन्युफैक्चरिंग यूनिट भी स्थापित की गई है। इसके अलावा, एक प्रमुख तुर्की विमानन कंपनी भारतीय हवाई अड्डों पर सेवाएं प्रदान कर रही है। तुर्की की कंपनी सलेबी एविएशन भारत के आठ प्रमुख हवाई अड्डों पर कार्गो हैंडलिंग जैसे हाई-सिक्योरिटी कार्यों में शामिल है। इनमें हवाई अड्डों में दिल्ली, मुंबई और चेन्नई शामिल हैं। इस लिहाज से पाकिस्तानी सैन्य कार्रवाई में तुर्की ऑपरेटरों के शामिल होने के खुलासे ने भारत में सुरक्षा चिंताएं बढ़ी दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन संवेदनशील क्षेत्रों में तुर्की की भागीदारी को देखते हुए, भारत सरकार इन सौदों की गहन जांच कर सकती है ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। कम शोर, सख्त संदेश 2017 में तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच मीडिया, शिक्षा और कूटनीतिक प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में सहयोग के लिए कई समझौते हुए थे। लेकिन आठ साल बाद अब ये समझौते कागजों पर ही सिमटते नजर आ रहे हैं। सरकार की मौजूदा रणनीति कम शोर, सख्त संदेश वाली प्रतीत हो रही है। फिलहाल किसी परियोजना को आधिकारिक रूप से समाप्त नहीं किया गया है, लेकिन अंदरखाने एक ठोस बदलाव की तैयारी चल रही है। भारत अब अपने रणनीतिक हितों को सर्वोपरि रखते हुए ऐसे व्यापारिक रिश्तों पर पुनर्विचार कर रहा है जो देश की विदेश नीति और सुरक्षा नीतियों से मेल नहीं खाते। तुर्की का हर मोर्चे पर बहिष्कार जारी अखिल भारतीय सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) ने फिल्म शूटिंग और सांस्कृतिक सहयोग के लिए तुर्की का "पूर्ण बहिष्कार" करने की घोषणा की है। AICWA ने X पर कहा, "तुर्की में तत्काल प्रभाव से कोई भी बॉलीवुड या भारतीय फिल्म प्रोजेक्ट शूट नहीं किया जाएगा। किसी भी भारतीय निर्माता, प्रोडक्शन हाउस, निर्देशक या फाइनेंसर को तुर्की में कोई भी फिल्म, टेलीविजन या डिजिटल कंटेंट प्रोजेक्ट ले जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।"  recent visitors 66