विवादों में घिरीं डॉ. अरुणा कुमार बनी डीएमई, जूडा ने सीएम यादव को पत्र लिखकर नियुक्ति आदेश निरस्त करने की मांग

 भोपाल  डॉ. अरुणा कुमार को डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन (DME) बनाए जाने के फैसले ने एक बार फिर नया विवाद खड़ा कर दिया है। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (जूडा) और मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन (एमटीए) ने इस नियुक्ति का विरोध करते हुए सरकार को 24 घंटे में आदेश निरस्त करने की चेतावनी दी है। दोनों संगठनों ने निर्णय पर पुनर्विचार नहीं होने पर आंदोलन की भी चेतावनी दी है। साथ ही सीएम डॉ मोहन यादव को पत्र लिखकर उनकी नियुक्ति आदेश निरस्त करने की मांग की है। डॉ. अरुणा पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने औऱ गाली गलौज करने आरोप लगे हैं। डॉ अरुणा कुमार का विवादों से पुराना नाता रहा है , दो बार उन्हें गांधी मेडिकल कॉलेज के गायनी डिपार्टमेंट के HOD पद से हटना भी पड़ा था। वहीं एक बार उन्हें डीन पद से इस्तीफा भी देना पड़ा था। डॉ अरुणा कुमार को हटवाने के लिए मेडिकल टीचर्स डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला से भी मुलाकात कर चुके हैं। बीते सालों डॉ. अरुणा कुमार के कार्यकाल में एक महिला जूनियर डॉक्टर ने आत्महत्या की थी और आरोप लगाया था कि उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। आज डॉ अरुणा कुमार को पदस्थ करने के विरोध में गांधी चिकित्सा महाविद्यालय के सभी चिकित्सक, जूनियर डॉक्टर्स आज दोपहर हमीदिया अस्पताल मर विरोध प्रदर्शन करेंगे। इस वजह से हटी थी डॉ अरुणा 31 जुलाई 2023 को गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की थर्ड ईयर पीजी स्टूडेंट बाला सरस्वती ने आत्महत्या कर ली थी। 27 वर्षीय मेडिकल स्टूडेंट ने एनेस्थीसिया इंजेक्शन का ओवरडोज लेकर जान दी थी। घटना के बाद जीएमसी परिसर में हड़कंप मच गया था। जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (जूडा) ने इस आत्महत्या के लिए डॉ. अरुणा कुमार को मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया और उनके खिलाफ मोर्चा खोलते हुए हड़ताल पर चले गए थे। संगठन ने आरोप लगाया था कि छात्रा को थीसिस सबमिशन को लेकर लगातार मानसिक दबाव और प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा था। जिसके बाद डॉ. अरुणा कुमार को जीएमसी से हटाकर डायरेक्टोरेट ऑफ मेडिकल एजुकेशन (डीएमई) में स्थानांतरित कर दिया था, जहां से वे अब तक कार्यरत थीं। अब उसी डायरेक्टोरेट में उन्हें डायरेक्टर पद पर पदोन्नत किया गया है, जिससे एक बार फिर विरोध हो रहा है। recent visitors 53

पिपरिया के 15 किसानों ने खेतों में नरवाई जलाई, प्रशासन ने सख्त,लगाया जुर्माना, दंडात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू

उमरिया जिले के मानपुर जनपद क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पिपरिया के 15 किसानों द्वारा खेतों में नरवाई (फसल अवशेष) जलाने के मामले में जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए जुर्माना लगाने के साथ ही अब दंडात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस प्रकरण में जिला कलेक्टर धरणेन्द्र कुमार जैन को पहले ही आर्थिक दंड अधिरोपित किया गया था, जिसके बाद अब प्रशासन एफआईआर की कार्रवाई की ओर बढ़ गया है। शुक्रवार को तहसीलदार बरबसपुर सर्किल ने कोतवाली थाना उमरिया को पत्र सौंपते हुए भारतीय न्याय संहिता की धारा 2023 की 223 के अंतर्गत दोषी किसानों पर दंडात्मक कार्रवाई करने का आवेदन प्रस्तुत किया। जारी पत्र में सभी 15 किसानों के नाम स्पष्ट रूप से उल्लिखित हैं, जिनके विरुद्ध यह कार्रवाई प्रस्तावित की गई है। बताया जा रहा है कि यह कदम किसानों को भविष्य में इस प्रकार के पर्यावरण विरोधी कृत्य से रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। उल्लेखनीय है कि खेतों में नरवाई जलाने से वातावरण में अत्यधिक प्रदूषण फैलता है, जिससे न केवल हवा की गुणवत्ता प्रभावित होती है, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी उत्पन्न होती हैं। इसके साथ ही भूमि की उर्वरता पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। शासन द्वारा लगातार नरवाई न जलाने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, बावजूद इसके कई क्षेत्रों में किसान इस निर्देश की अनदेखी कर रहे हैं। इस बीच, बांधवगढ़ तहसील के ग्राम महरोई में भी नरवाई जलाने की शिकायत मिलने पर जिला प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए तीन किसानों पर कुल साढ़े सात हजार रुपये का जुर्माना अधिरोपित किया है। कलेक्टर धरणेन्द्र कुमार जैन द्वारा शुक्रवार की शाम जारी आदेश के अनुसार इन किसानों में केशरी पिता जग्गू लोहार, टीकाराम पिता कामता विश्वकर्मा और पुरुषोत्तम पिता उदयभान राठौर शामिल हैं। सभी पर ₹2500-₹2500 का आर्थिक दंड लगाया गया है। प्रशासन की इस सख्ती से क्षेत्र के अन्य किसानों में भी हड़कंप की स्थिति है। विभागीय सूत्रों का मानना है कि यह कार्रवाई आगे चलकर एक उदाहरण प्रस्तुत करेगी, जिससे अन्य किसान पर्यावरण संरक्षण के नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित होंगे। जिला प्रशासन ने एक बार फिर अपील की है कि किसान नरवाई जलाने से बचें और वैकल्पिक उपायों को अपनाएं, जिससे खेत की उपजाऊ क्षमता बनी रहे और पर्यावरण भी सुरक्षित रहे।   recent visitors 36

गोवा : लइराई देवी मंदिर में मची भगदड़, 7 की मौत, 40 से ज्यादा घायल, CM प्रमोद सावंत ने लिया हालात का जायजा

पणजी  गोवा के प्रसिद्ध लइराई देवी मंदिर में शनिवार को उस समय अफरातफरी मच गई जब पारंपरिक ‘शिरगांव जात्रा’ के दौरान भीड़ बेकाबू हो गई। भगदड़ में कम से कम 7 लोगों की मौत हो गई है, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं। इस घटना में 40 से अधिक लोग घायल हुए हैं। सभी घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। नॉर्थ गोवा के पुलिस अधीक्षक अक्षत कौशल ने हादसे की पुष्टि करते हुए बताया कि भगदड़ के कारणों का फिलहाल पता नहीं चल सका है। बताया जा रहा है कि हर साल की तरह इस बार भी भारी संख्या में श्रद्धालु ‘शिरगांव जात्रा’ में हिस्सा लेने पहुंचे थे। इसी दौरान अचानक अफरा-तफरी मच गई और भगदड़ की स्थिति बन गई।घटना की जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत खुद मौके पर पहुंचे और घायलों से मुलाकात की। बता दें कि गोवा के श्रीगांव को लेकर कई कहनियां प्रचलित हैं। लइराई देवी का मंदिर होने की वजह से यहां पर शराब और अंडा तक प्रतिबंधित है। कोई किसी जानवर की हत्या नहीं कर सकता। इस गांव में घोड़े भी प्रवेश नहीं कर सकते। बड़ी संख्या में लोग लइराई देवी के दर्शन करने पहुंचते हैं। लइराई देवी की पूजा मुख्य रूप से गोवा में की जाती है। यहां हर साल आयोजित होने वाले जात्रा को को शिरगांव जात्रा के नाम से भी जाना जाता है। यह जात्रा चैत्र मास में कई दिनों तक चलती है। इसमें लोग दहकते अंगारों पर नंगे पैर चलते हैं। भक्त एक पवित्र झील में स्नान करते हैं। इससे पहले लोग व्रत और पूजा करते हैं। मंदिर से देवी की भव्य शोभा यात्रा निकाली जाती है। शिरगांव और लइराई देवी की मान्यता – लइराई देवी का मंदिर गोवा के श्रीगांव में स्थित है, जो अपनी पवित्रता और धार्मिक परंपराओं के लिए जाना जाता है। यहां शराब, अंडा और किसी भी जानवर की हत्या पर सख्त प्रतिबंध है। यहां तक कि घोड़ों का प्रवेश भी निषिद्ध है। ‘शिरगांव जात्रा’ चैत्र मास में आयोजित होती है और यह कई दिनों तक चलती है। इस आयोजन में श्रद्धालु दहकते अंगारों पर नंगे पैर चलते हैं और एक पवित्र झील में स्नान करते हैं। इस दौरान व्रत, पूजा और देवी की भव्य शोभायात्रा भी निकाली जाती है। recent visitors 40

मुख्यमंत्री ने विभिन्न जिलों से वर्चुअली जुड़े हितग्राहियों से बात भी की, आवास निर्माण के लिए पहली किस्त मिलने पर दी बधाई

 मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल हिंसा से पीड़ितों को जारी की प्रधानमंत्री आवास योजना की पहली किस्त छत्तीसगढ़ के विशेष आग्रह पर केंद्र सरकार ने ऐसे परिवारों के लिए स्वीकृत किए हैं 15 हजार आवास कुल दस करोड़ रुपए आज हितग्राहियों के खातों में अंतरित, प्रथम किस्त के रूप में 2500 परिवारों को जारी किए गए 40-40 हजार रुपए मुख्यमंत्री ने विभिन्न जिलों से वर्चुअली जुड़े हितग्राहियों से बात भी की, आवास निर्माण के लिए पहली किस्त मिलने पर दी बधाई रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल हिंसा से प्रभावित 2500 परिवारों के बैंक खातों में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की पहली किस्त की राशि अंतरित की। उन्होंने मंत्रालय में वर्चुअली आयोजित कार्यक्रम में आवास निर्माण की पहली किस्त प्रति परिवार 40-40 हजार रुपए के मान से कुल दस करोड़ रुपए हितग्राहियों के खातों में अंतरित किए। छत्तीसगढ़ के विशेष आग्रह पर केंद्र सरकार द्वारा राज्य के आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के लिए 15 हजार आवास स्वीकृत किए गए हैं। उप मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा भी कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री साय ने विभिन्न जिलों से मंत्रालय से वर्चुअली बड़ी संख्या में जुड़े हितग्राहियों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य शासन ने केंद्र सरकार से विशेष आग्रह कर आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के लिए जो प्रधानमंत्री आवास योजना की पात्रता की शर्तों में नहीं आ पा रहे थे, उनके लिए 15 हजार आवास स्वीकृत कराया है। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने संवेदनशीलता और गंभीरता से हमारे निवेदन को मंजूरी दी और वंचित परिवारों के लिए भी आवास की व्यवस्था की। साय ने नक्सल प्रभावित दूरस्थ वनांचलों के लिए स्वीकृत इस विशेष परियोजना के हितग्राहियों की हौसला अफजाई करते हुए अच्छा मकान बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि इसमें सरकार हर तरह की मदद करेगी। मुख्यमंत्री ने नक्सली हिंसा के शिकार परिवारों से आत्मीयता से बातकर उनका हाल-चाल पूछा। उन्होंने घर-परिवार और उनके व्यवसाय की जानकारी ली। बातचीत के दौरान विभिन्न जिला मुख्यालयों से जुड़े हितग्राहियों ने पक्का आवास मिलने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को धन्यवाद दिया।    उप मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने भी हितग्राहियों को ऑनलाइन संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है। आज 2500 ऐसे परिवारों को जो नक्सलवाद छोड़कर मुख्य धारा में लौट आए हैं या नक्सल हिंसा से पीड़ित हैं, उनके पक्के आवासों के निर्माण के लिए 40-40 हजार रुपए की पहली किस्त जारी की गई है। ये ऐसे परिवार हैं जो प्रधानमंत्री आवास योजना की पात्रता में नहीं आ पा रहे थे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में विभाग ने विशेष प्रयास कर भारत सरकार से ये आवास मंजूर कराए हैं। शर्मा ने कहा कि राज्य में नक्सलवाद को समाप्त करने का अभियान अब अंतिम चरण में है। बस्तर के लोगों के मन से अब आतंक का डर हट जाना चाहिए। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे मुख्य धारा में आएं। बस्तर की शांति और विकास के लिए यह जरूरी है। उन्होंने विशेष परियोजना के तहत हितग्राहियों के चिन्हांकन और इसे अमलीजामा पहनाने के लिए विभागीय अधिकारियों की पीठ थपथपाई और उन्हें धन्यवाद दिया। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह ने कार्यक्रम में राज्य में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के क्रियान्वयन की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आवास निर्माण के लक्ष्यों को तेजी से पूरा किया जा रहा है। योजना के अगले चरण के लिए हितग्राहियों के सर्वेक्षण का काम भी तेजी से चल रहा है। मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, सचिव पी. दयानंद, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह तथा प्रधानमंत्री आवास योजना के संचालक तारन प्रकाश सिन्हा सहित वरिष्ठ विभागीय अधिकारी भी राशि अंतरण कार्यक्रम में मौजूद थे। सुकमा के सर्वाधिक 809 आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल प्रभावित परिवारों को मिली आवास की पहली किस्त, बीजापुर के 594 और नारायणपुर के 316 परिवार शामिल प्रधानमंत्री आवास योजना में विशेष परियोजना के तहत आज जिन 2500 आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल प्रभावित परिवारों के खातों में आवास निर्माण के लिए राशि अंतरित की गई, उनमें सर्वाधिक 809 परिवार सुकमा जिले के हैं। बीजापुर जिले के ऐसे 594, नारायणपुर के 316, बस्तर के 202, दंतेवाड़ा के 180, कोंडागांव के 166 और कांकेर के 138 परिवारों को आवास निर्माण के लिए राशि जारी की गई है। recent visitors 43

उपभोक्ता की जीत: सॉफ्ट ड्रिंक पर अतिरिक्त 1 रुपये जीएसटी वसूलने पर रेस्तरां को ₹6,000 भुगतान का आदेश

Consumers win: Restaurant ordered to pay ₹6,000 for charging extra Rs 1 GST on soft drinks भोपाल, संवाददाता। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में अधिवक्ता अर्चित दीक्षित द्वारा अनिरुद्ध वाधवानी Vs हॉन्ग कॉन्ग चाइनीज केस में जीत हासिल की है। जिला उपभोक्ता आयोग ने उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा में एक अहम निर्णय में रेस्तरां को आदेश दिया है कि वह सॉफ्ट ड्रिंक पर अतिरिक्त ₹1 जीएसटी वसूलने के चलते उपभोक्ता को ₹6,000 का भुगतान करे। मामले के अनुसार, शिकायतकर्ता ने भोपाल में एम. पी. नगर जोन-2 स्थित हॉन्ग कॉन्ग चाइनीज रेस्तरां में भोजन करते समय एक सॉफ्ट ड्रिंक का ऑर्डर दिया था। बिल में उत्पाद के अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) के ऊपर अतिरिक्त ₹1 जीएसटी के रूप में वसूला गया। आपत्ति दर्ज कराने के बावजूद, रेस्तरां प्रबंधन ने संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया, जिसके पश्चात द्वारा उपभोक्ता ने जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत दायर की। सुनवाई के दौरान फोरम ने स्पष्ट किया कि किसी भी उत्पाद के MRP में कर सम्मिलित होते हैं और उपभोक्ता से MRP से अधिक राशि वसूलना अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है। आयोग ने इसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन मानते हुए रेस्तरां को आदेशित किया कि वह शिकायतकर्ता को मानसिक कष्ट और उत्पीड़न के मद में ₹5,000 तथा ₹1,000 मुकदमेबाजी व्यय के रूप में अदा करे। recent visitors 82

मुख्यमंत्री डॉ. यादव कृषि उद्योग समागम का 3 मई को मंदसौर में करेंगे शुभारंभ

भोपाल कृषि एवं उद्यानिकी क्षेत्र में नवाचार, तकनीकी उन्नयन और कृषक कल्याण को समर्पित ‘कृषि उद्योग समागम-2025’ का 3 मई को मंदसौर में भव्य आयोजन होगा। एक दिवसीय समागम का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे। उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा, कृषि मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना, उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह, क्षेत्रीय सांसद, विधायकगण तथा प्रदेश भर से आए कृषक, उद्यमी, निर्यातक और एफपीओ प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहेंगे। प्रमुख गतिविधियाँ कृषक सम्मेलन एवं विशेषज्ञ मार्गदर्शन: समागम में कृषि एवं उद्यानिकी के विशेषज्ञों द्वारा नवीनतम तकनीकों पर विस्तृत मार्गदर्शन किसानों और उद्यमियों को प्रदान किया जायेगा, जिसका लाभ वह अपने कृषि और खाद्य प्र-संस्करण इकाइयों को बेहतर बनाने में कर सकेंगे। नवीन कृषि तकनीकों का प्रदर्शन समागम स्थल पर देश के कृषि और उद्यानिकी के क्षेत्र में आधुनिक यंत्रों, उपकरणों का उत्पादन करने वाली इकाइयों द्वारा स्टॉल लगाये जायेंगे। इनमें आधुनिक कृषि यंत्र ट्रैक्टर, हैप्पी सीडर, प्याज-लहसुन बुआई यंत्र, ड्रोन, एआई आधारित उपकरण, पॉवर स्प्रेयर, सूक्ष्म सिंचाई संयंत्र ड्रिप, मिनी स्प्रिंकलर, सेंसर-आधारित उर्वरक संयंत्र, कृषि एवं उद्यानिकी की नवीनतम एवं उन्नत किस्में, पॉली/नेट हाउस, मल्चिंग, पौंड लाइनिंग आदि, जैविक व नैनो फर्टिलाइज़र, कस्टमाइज्ड माइक्रो न्यूट्रिएंट्स, गौशाला उत्पाद, दुग्ध एवं हर्बल उत्पाद, पशु आहार, ब्यूटी प्रोडक्ट्स, बायो-फ्लॉक्स, टैंक व केज कल्चर मॉडल, एक्वेरियम डिस्प्ले शामिल हैं। प्राकृतिक एवं जैविक खेती के मॉडल समागम में भाग लेने वाले किसानों और एफपीओ प्रतिनिधियों के लिये प्राकृतिक और जैविक खेती का लाइव प्रदर्शन किया जायेगा, जिसके माध्यम से किसान भाई जैविक खेती की आधुनिक और उन्नत तकनीक से अवगत हो सकेंगे। उद्योग व निर्यात पर संगोष्ठी समागम में कृषि, औषधीय फसलों पर आधारित उद्योगों, एफपीओ, निर्यातकों व क्रेता-विक्रेताओं के लिए संवाद व नेटवर्किंग सत्र का आयोजन भी किया गया है, जिसमें विशेषज्ञों द्वारा उत्पादन के साथ निर्यात, तकनीकों और प्रक्रियाओं के विषय में बताया जायेगा। एग्री-हॉर्टी एक्सपो-2025 में विभागीय सहभागिता कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य, कृषि अभियांत्रिकी एमएसएमई, मध्यप्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन, एमपी एग्रो सहित राज्य सरकार के कई अन्य विभाग एवं संस्थान सम्मिलित होंगे। ऑन-द-स्पॉट पंजीयन समागम में कृषकों को विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी दी जाएगी व ऑन-द-स्पॉट पंजीयन की सुविधा मुहैया करायी जायेगी। स्थानीय नवाचारों की प्रस्तुति समागम के दौरान मंदसौर जिले में कृषकों द्वारा किए गए नवाचारों पर केंद्रित वीडियो फिल्म का प्रदर्शन मुख्य आकर्षण होगा। कृषक हितलाभ वितरण व निवेश संवाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा कृषि-उद्यानिकी विभाग से संबंधित योजनाओं के हितग्राहियों को लाभ वितरण और निवेशकों से सीधी चर्चा की जायेगी। मंदसौर उद्यानिकी उत्पादों में अग्रणी जिला 1.15 लाख हेक्टेयर में फल, सब्जी, मसालों, औषधीय फसलों का मुख्य केन्द्र है। इन फसलों से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा दिया जायेगा। साथ ही नये निवेशकों को इन फसलों से संबंधी व्यवसायों के लिये जागरूक कर प्रोत्साहित भी किया जायेगा। 33 करोड़ से निर्मित महर्षि सांदीपनि विद्यालय भवन चंदवासा का होगा लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. यादव सीतामऊ में 33 करोड़ 14 लाख से निर्मित (सीएम राइज स्कूल) महर्षि सांदीपनी विद्यालय भवन चंदवासा का लोकार्पण करेंगे। साथ ही दुधाखेड़ी में 400 करोड़ के निर्माण कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन करेंगे। 15 विषय-विशेषज्ञों के होंगे व्याख्यान एवं हितलाभ वितरण कृषि उद्योग समागम में 15 विषय-विशेषज्ञ व्याख्यान के रूप में अनुभव साझा करेंगे। किसानों को खेती किसानी से जुड़ी तकनीकी सलाह प्रदान करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कृषि उद्योग समागम में विभिन्न योजनाओं में अलग-अलग हितग्राहियों को हितलाभ प्रदान करेंगे। लगाये जायेंगे 80 राज्य स्तरीय स्टॉल मुख्यमंत्री डॉ. यादव सीतामऊ कृषि उद्योग समागम में 8 विभागों द्वारा किसानों से जुड़े विविध तरह के लगाये गये 80 राज्य स्तरीय स्टॉलों का अवलोकन करेंगे। इन स्टॉल के माध्यम से कृषकों को उन्नत तकनीकी, खेती किसानी की जानकारी, नवाचार, उन्नत किसान के संबंध बारे में बताया जाएगा।   recent visitors 31

भोपाल में हुआ लोक वित्त प्रबंधन प्रणाली पर पहला क्षेत्रीय सम्मेलन

पीएफएमएस एक सुदृढ़ नेटवर्क प्रणाली, 3.48 लाख करोड़ की हुई बचत : सीजीए दुबे एसएनए-स्पर्श प्रणाली के बेहतर क्रियान्वयन में पीएफएमएस की भूमिका महत्वपूर्ण : मुख्य सचिव जैन भोपाल में हुआ लोक वित्त प्रबंधन प्रणाली पर पहला क्षेत्रीय सम्मेलन भोपाल नियंत्रक महालेखा परीक्षक श्याम सुन्दर दुबे ने सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए पीएफएमएस की पारदर्शिता और दक्षता के साथ निधियों के वितरण में इसकी भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि पीएफएमएस एक सुदृढ़ नेटवर्क प्रणाली है, जो विभिन्न मंत्रालयों, विभागों, बैंकों, भारतीय रिजर्व बैंक और नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया जैसी संस्थाओं से जुड़ी हुई है। दुबे ने कहा कि पीएफएमएस जैसी सशक्त प्रणाली से लाभार्थियों के दोहराव की और फर्जी लाभार्थियों को समाप्त कर अब तक लगभग 3.48 लाख करोड़ रुपये की बचत की है। लोक वित्त प्रबंधन प्रणाली (PFMS) पर पहला क्षेत्रीय सम्मेलन दिनांक 2 मई 2025 को भोपाल स्थित आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी में आयोजित किया गया। भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक (सीजीए) दुबे ने सम्मेलन का शुभारंभ किया। मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव जैन आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सम्मेलन में मध्यप्रदेश, बिहार, ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ राज्यों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने पीएफएमएस का स्वागत करते हुए केन्द्र सरकार में अपनी प्रतिनियुक्ति के दौरान हुए इससे संबंधित अनुभव साझा किए। उन्होंने SNA-SPARSH प्रणाली के माध्यम से पीएफएमएस की उस भूमिका की सराहना की, जिसके अंतर्गत सरकार को निधियों के निष्क्रिय रूप से रखे जाने के लिए ऋण लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती। मुख्य सचिव जैन ने कहा कि पीएफएमएस आधुनिक सार्वजनिक वित्त प्रबंधन का आधार बन चुका है, जिससे राज्य सरकारें जन-कल्याणकारी योजनाओं को तेजी, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में सक्षम हुई हैं। उन्होंने PFMS, RBI और राज्य सरकारों के सामूहिक प्रयासों की सराहना करते हुए इसे डिजिटल इंडिया के विजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। सम्मेलन में पीएफएमएस के वरिष्ठ अधिकारियों ने इसके विभिन्न मॉड्यूल्स पर प्रस्तुतियाँ दीं। सम्मेलन में राज्य वित्त विभाग, कोषालय लेखा निदेशालय और विभिन्न राज्य सरकारों के विभागों एवं मंत्रालयों के अधिकारी सम्मिलित हुए। प्रतिभागियों को SNA-SPARSH, DBT और DBT-SPARSH जैसे मॉड्यूल्स की नवीनतम कार्यप्रणालियों की विस्तृत जानकारी दी गई। यह सम्मेलन कार्यान्वयन एजेंसियों, सरकारी विभागों तथा प्रत्यक्ष लाभार्थियों से सुझाव प्राप्त कर पीएफएमएस प्रणाली में सुधार की दिशा में मार्ग प्रशस्त करने का एक मंच सिद्ध हुआ। सम्मेलन के दौरान विभिन्न राज्यों के प्रतिभागियों को SNA-SPARSH से संबंधित तकनीकी प्रश्नों के समाधान भी प्रदान किए गए। निकट भविष्य में इस प्रकार की क्षेत्रीय सम्मेलन विभिन्न राज्यों में आयोजित किये जाएंगे।   recent visitors 37