प्रधानमंत्री मोदी 24 अप्रैल को देश की तीसरी अमृत भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखयेंगे, सतना से खंडवा होकर गुजरेगी

जबलपुर  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 24 अप्रैल को देश की तीसरी अमृत भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाने वाले हैं. यह ट्रेन मध्य प्रदेश में सतना से खंडवा होकर गुजरेगी. इस बीच में यह कटनी जबलपुर और इटारसी रेलवे स्टेशन से भी जाएगी, लेकिन फिलहाल यह तय नहीं है कि इसका स्टॉपेज कहां होगा. वंदे भारत के बाद यह दूसरी महत्वाकांक्षी ट्रेन है, जो मोदी सरकार की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. एमपी से गुजरेगी तीसरी अमृत भारत एक्सप्रेस 24 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की तीसरी अमृत भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाने वाले हैं. यह ट्रेन बिहार के सहरसा से शुरू होकर मुंबई जाएगी. सहरसा से अमृत भारत एक्सप्रेस शाम 4:00 बजे निकलेगी और 24 घंटे में 1956 किलोमीटर का सफर तय करके यह मुंबई पहुंचेगी. अमृत भारत एक्सप्रेस सहरसा से खगड़िया, हसनपुर, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, पाटलिपुत्र और दानापुर होते हुए वाराणसी के दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पहुंचेगी. दीनदयाल जंक्शन से ये ट्रेन मध्य प्रदेश में इंटर करेगी और सतना, कटनी जबलपुर से होती हुई यह इटारसी, खंडवा और भुसावल के रास्ते मुंबई जाएगी. जल्द तय होंगे मध्य प्रदेश के स्टॉपेज पश्चिम मध्य रेलवे के अधिकारी अभी यह बताने की स्थिति में नहीं है कि यह जबलपुर से कितने बजे गुजरेगी और मध्य प्रदेश के कौन से स्टेशन पर रुकेगी, क्योंकि इस ट्रेन का पूरा नियंत्रण ईस्ट सेंट्रल रेलवे के पास में है. अभी यह भी तय नहीं है कि यह मध्य प्रदेश के किस स्टेशन पर रुकेगी. इसके पहले भी बिहार के दरभंगा से नई दिल्ली के बीच में पहली अमृत भारत एक्सप्रेस चलाई गई थी. यह ट्रेन लगभग 1137 किलोमीटर की यात्रा 21 घंटे में पूरी करती है. दूसरी अमृत भारत एक्सप्रेस पश्चिम बंगाल की मालदा टाउन से बेंगलुरु के लिए चलती है. वहीं इस बारे में पश्चिम मध्य रेलवे के सीपीआरओ हर्षित श्रीवास्तव ने बताया है कि "अमृत भारत एक्सप्रेस के मध्य प्रदेश में सतना और जबलपुर स्टॉपेज होने की संभावना है, क्योंकि अभी इसके स्टॉपेज का नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है." अमृत भारत एक्सप्रेस की बढ़ी स्पीड अमृत भारत एक्सप्रेस 2247 किलोमीटर की यात्रा 42 घंटे में पूरी करती है. इन ट्रेन की अधिकतम स्पीड 130 किलोमीटर प्रति घंटा है, लेकिन फिलहाल यह 106 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड पर चल पा रही है. बता दें अमृत भारत एक्सप्रेस में वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी ही सुविधाएं हैं, लेकिन इसमें अभी तक एसी कोच शामिल नहीं किया गया है. हालांकि इस ट्रेन में बाकी सारी सुविधा पुरानी ट्रेनों की अपेक्षा अपग्रेड कर दी गई हैं. साथ ही इसकी स्पीड भी बढ़ा दी गई है. इसकी वजह से यात्रा करने वाले लोगों का समय बच रहा है. recent visitors 28

ED कोर्ट में सौरभ-शरद की जमानत पर फैसला आज: मां-पत्नी सहित चार रिश्तेदारों को 11 दिन पहले मिल चुकी है जमानत

भोपाल। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कोर्ट आरटीओ के पूर्व कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा की ओर से एडवोकेट दीपेश जोशी और सहयोगी शरद जायसवाल की ओर से एडवोकेट रजनीश बरैया ने सोमवार को जमानत आवेदन फाइल किया। विशेष न्यायाधीश सचिन कुमार घोष की कोर्ट ने इस जमानत आवेदन पर फैसला मंगलवार तक सुरक्षित रख लिया है। 9 अप्रैल को इसी कोर्ट से सौरभ की मां उमा शर्मा, पत्नी दिव्या शर्मा, जीजा विनय आसवानी और जबलपुर निवासी साले रोहित तिवारी को जमानत मिल गई थी। 18वें अपर सत्र एवं विशेष न्यायाधीश सचिन कुमार घोष की अदालत से 10 लाख रुपए के बॉन्ड पर जमानत दी गई थी। वहीं, जमानत नहीं मिलने की हालत में सौरभ शर्मा, उसके सहयोगी शरद और चेतन की पेशी 5 मई को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कराई जाएगी। ईडी ने 8 अप्रैल को पेश किया था चालान प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भोपाल ने आरटीओ के करोड़पति पूर्व कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा उसके सहयोगियों शरद जायसवाल, चेतन सिंह गौर के खिलाफ 8 अप्रैल मंगलवार को कोर्ट में चालान पेश किया था। इसमें इनोवा कार में मिला 52 किलो सोना और 11 करोड़ रुपए कैश सौरभ का ही बताया गया है। चालान में 12 आरोपियों के नाम तय ईडी ने चालान में 12 आरोपी तय किए हैं। जिसमें सौरभ शर्मा, उसकी मां, पत्नी दिव्या, शरद जायसवाल, चेतन सिंह गौर के अलावा इनकी फर्में और डायरेक्टर भी शामिल हैं। अब तक इस मामले में ईडी ने कुल 100.36 करोड़ रुपए की कुर्की और जब्ती की है। लोकायुक्त कोर्ट से मिल चुकी है जमानत बता दें कि इन सौरभ, चेतन और शरद के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस 60 दिन में भी चालान पेश नहीं कर सकी। जिस वजह से लोकायुक्त पुलिस के केस में तीनों को जमानत मिल चुकी हैं। जमानत मिलने के बाद में लोकायुक्त की काफी किरकिरी भी हुई थी। जिसके बाद ईडी ने 8 अप्रैल को चालान पेश कर दिया। recent visitors 81

कांग्रेस का ‘संविधान बचाओ अभियान’ आज से: प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक; 40 दिनों तक चलेगा विरोध प्रदर्शन और जनसंपर्क

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आर्थिक सलाहकार अनंत नागेश्वरन बोले- विकसित राष्ट्र के लिए भारत को हर साल 80 लाख Jobs पैदा करने की जरूरत

नई दिल्ली भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी अनंत नागेश्वरन ने कहा है कि भारत को 2047 तक विकसित देश बनने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अगले 10-12 वर्षों तक प्रति वर्ष कम से कम 80 लाख नौकरियां पैदा करनी होंगी तथा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में विनिर्माण की हिस्सेदारी बढ़ानी होगी। नागेश्वरन ने  यहां कहा, “हमारा दृष्टिकोण 2047 तक ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य हासिल करना है। भारत के आकार के अलावा सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अगले 10-20 वर्षों तक बाहरी वातावरण उतना अनुकूल नहीं रहने वाला है, जितना 1990 के बाद पिछले 30 वर्षों में रहा होगा।” उन्होंने कहा, “लेकिन इस संदर्भ में यह तो तय है कि आप एक सीमा से आगे अपना बाह्य वातावरण नहीं चुन सकते – हमें कम से कम अगले 10 से 12 वर्षों तक प्रति वर्ष 80 लाख नौकरियां पैदा करनी होंगी और जीडीपी में विनिर्माण का हिस्सा बढ़ाना होगा। हमें यह देखना होगा कि चीन ने विनिर्माण में, खासकर कोविड महामारी के बाद जबरदस्त प्रभुत्व हासिल कर लिया है।” नागेश्वरन कोलंबिया विश्वविद्यालय के ‘स्कूल ऑफ इंटरनेशनल एंड पब्लिक अफेयर्स’ में भारतीय आर्थिक नीतियों पर ‘दीपक और नीरा राज केंद्र’ द्वारा आयोजित ‘कोलंबिया भारत शिखर सम्मेलन-2025’ को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई), प्रौद्योगिकी और रोबोटिक्स ऐसी चुनौतियां हैं जिनका सामना आज के कुछ विकसित देशों को अपनी वृद्धि यात्रा में नहीं करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, “…लेकिन भारत को अपने आकार के हिसाब से इस विशाल, जटिल चुनौती से निपटना होगा और इसका कोई आसान जवाब नहीं है। अगर आप उन नौकरियों की संख्या देखें जिन्हें हमें बनाने की ज़रूरत है, तो यह हर साल लगभग 80 लाख नौकरियां हैं। …और शुरुआती स्तर की नौकरियों को खत्म करने में एआई की बड़ी भूमिका हो सकती है, या कम आईटी-सक्षम सेवाओं वाली नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं।”   recent visitors 35

कनाथ शिंदे किसान अवतार के लिए सुर्खियों में, खेत में फावड़ा चलाने की तस्वीरें सामने आई

मुंबई  महाराष्ट्र में मनसे चीफ राज ठाकरे और शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे के एक होने की अटकलों से जहां राजनीति गर्म है तो वहीं दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे साथ छोड़कर अलग हुए एकनाथ शिंदे किसान अवतार के लिए सुर्खियों में हैं। तीन दिन के लिए अपने सतारा स्थित अपने दरे गांव पहुंची डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की खेतों में फावड़ा चलाने की तस्वीरें सामने आई हैं। शिंदे ने अपने गांव के खेतों में इस बार विदेशी पौधे को लगाया। शिंदे ने इस एवोकाडो नाम के इस विदेशी पौधे के फायदे भी गिनाए हैं। एवोकाडो, जिसे हिंदी में रूचिरा या मक्खनफल भी कहा जाता है। शिंदे ने किया नया प्रयोग शिवसेना प्रमुख और राज्य के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने रविवार को अपने गांव में सहकर्मियों के साथ मिलकर नए पेड़ लगाए। शिंदे ने पिछले दौरों में स्ट्रॉबेरी, हल्दी, चीकू और बांस के पौधे लगाए थे। इस साल उन्होंने पहली बार एक विदेशी फल एवोकाडो, लगाने का निर्णय लिया। शिंदे ने उन्होंने फावड़े और कुदाल का उपयोग करके स्वयं एक एवोकाडो का पेड़ लगाया। उन्होंने अपने खेत में यह प्रयोग इस आशा के साथ किया है कि यदि यह प्रयोग स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक लाभकारी एवोकाडो फल की खेती में सफल होता है, तो यह स्थानीय किसानों को भी वैकल्पिक फसल के रूप में एवोकाडो की खेती करने के लिए प्रोत्साहित करेगा। नए प्रयोग से नई फसल उगेगी डिप्टी सीएम शिंदे इससे पहले सतारा जिले के महाबलेश्वर तालुका में कोयना नदी के तट को काफी उपजाऊ बता चुके हैं। वह कहते आए हैं कि दरे गांव के आसपास की मिट्टी बहुत अच्छी है। इसमें उगाई जाने वाली कोई भी फसल अच्छी तरह से उगती है। इसलिए उन्हें पूरा विश्वास है कि यहां एवोकाडो की खेती का यह प्रयास अवश्य सफल होगा। यदि ऐसा होता है, तो उनका मानना है कि इस क्षेत्र के किसान, जो स्ट्रॉबेरी और ब्लूबेरी जैसे जामुन उगाते हैं, एवोकाडो की खेती के माध्यम से एक और नई नकदी फसल पा सकेंगे। इसीलिए उन्होंने अपने खेतों में इस प्रयोग को सफल बनाने का प्रयास किया है। इस अवसर पर उनके साथ दरे गांव के ग्रामीणजन और शिंदे के सभी साथी उपस्थित थे। एवोकाडो के क्या हैं फायदे? एवोकाडो का तेल त्वचा और बालों के लिए अच्छा होता है। एक बहु-उपयोगी फल है जो कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है। यह स्वस्थ वसा, फाइबर, और विटामिन से भरपूर होता है जो हृदय स्वास्थ्य, पाचन, और आंखों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं। एवोकाडो में पोटेशियम, मैग्नीशियम, और अन्य महत्वपूर्ण खनिज भी पाए जाते हैं। इतना ही नहीं एवोकाडो में अनसैचुरेटेड फैट होता है जो कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करता है और हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम को कम करता है। इसके अलावा यह फाइबर से भरपूर होता है, जो पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है और कब्ज से राहत दिलाता है। recent visitors 48

दुनियाभर की सड़कों पर दौड़ती ‘मेड इन इंडिया’ गाड़ियां, FY25 में रिकॉर्ड निर्यात

मुंबई भारत का ऑटोमोबाइल सेक्टर वैश्विक बाजारों में फिर से रफ्तार पकड़ चुका है। वित्त वर्ष 2024-25 में देश का कुल वाहन निर्यात 19% की दमदार छलांग लगाते हुए 53 लाख यूनिट्स के पार पहुंच गया। सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, बीते वित्त वर्ष में कुल 53.63 लाख (53,63,089) वाहनों का निर्यात हुआ, जो 2023-24 के 45 लाख (45,00,494) यूनिट्स की तुलना में उल्लेखनीय बढ़त है। वैश्विक स्तर पर ‘मेड इन इंडिया’ वाहनों की मांग में उछाल SIAM ने बताया कि भारत में बनने वाले वैश्विक मॉडल्स की क्वालिटी और परफॉर्मेंस की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इनकी डिमांड तेजी से बढ़ी है। यही नहीं, कई भारतीय कंपनियों ने अब विकसित देशों में भी वाहन निर्यात की शुरुआत कर दी है। यात्री वाहन (Passenger Vehicles): 2024-25 में 15% की वृद्धि के साथ यात्री वाहनों का निर्यात बढ़कर 7,70,364 यूनिट्स हो गया, जो 2023-24 में 6,72,105 यूनिट था। इसमें यूटिलिटी वाहनों (Utility Vehicles) की हिस्सेदारी भी काफी बढ़ी और 3,62,160 यूनिट्स निर्यात हुईं, जो पिछले साल के 2,34,720 यूनिट्स से 54% ज्यादा हैं। दोपहिया वाहन (Two-Wheelers): दोपहिया वाहन निर्यात में 21% की तेजी रही। 41,98,403 यूनिट्स का निर्यात हुआ, जबकि पिछले साल 34,58,416 यूनिट्स भेजे गए थे। अफ्रीका में आर्थिक स्थिरता और लैटिन अमेरिका में मजबूत मांग ने इस ग्रोथ को सहारा दिया। नए मॉडल्स और नए बाजारों की खोज ने भी एक्सपोर्ट को बढ़ावा दिया। तिपहिया वाहन (Three-Wheelers): इस कैटेगरी में हल्की मगर स्थिर बढ़ोतरी हुई। 2024-25 में 3.1 लाख यूनिट्स निर्यात हुईं, जो 2023-24 की तुलना में 2% ज्यादा है। वाणिज्यिक वाहन (Commercial Vehicles): वाणिज्यिक वाहनों के निर्यात में 23% की मजबूती देखी गई। बीते वित्त वर्ष में 80,986 यूनिट्स विदेश भेजे गए, जबकि इससे पिछले वर्ष यह आंकड़ा 65,818 यूनिट्स था। ‘मेड इन इंडिया’ ब्रांड की वैश्विक पकड़ मजबूत SIAM के अध्यक्ष शैलेश चंद्रा ने कहा, “निर्यात के मोर्चे पर सभी क्षेत्रों, खासकर यात्री और दोपहिया वाहनों में अच्छा पुनरुद्धार देखा गया है। यह भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और वैश्विक बाजारों में बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है।” उन्होंने यह भी कहा कि अफ्रीका और पड़ोसी देशों जैसे प्रमुख बाजारों में भारतीय वाहनों की मांग बनी रहने की उम्मीद है। recent visitors 39