कोलकाता ने चेन्नई के खिलाफ टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया

चेन्नई चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच आईपीएल 2025 का 25वां मुकाबला खेला जा रहा है। एमए चिदंबरम स्टेडियम में होने वाले मुकाबले में एमएस धोनी पहली बार जारी सीजन में चेन्नई की कप्तानी करते हुए नजर आएंगे। क्योंकि नियमित कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ कोहनी में फ्रेक्चर के कारण आईपीएल के बचे हुए सीजन से बाहर हो गए। चेन्नई सुपर किंग्स का प्रदर्शन बेहद खराब रहा है, टीम ने 5 मैच खेले हैं और सिर्फ एक में जीत हासिल की है। वहीं दूसरी तरफ कोलकाता की टीम ने 5 मैच खेलते हुए दो में जीत दर्ज की है। कोलकाता ने जीता टॉस कोलकाता ने चेन्नई के खिलाफ टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया है। पॉइंट्स टेबल में कौन आगे चेन्नई सुपर किंग्स की टीम पॉइंट्स टेबल में नौवें स्थान पर मौजूद है। टीम ने पांच खेलते हुए चार गंवाए हैं और सिर्फ एक जीत सकी है। वहीं कोलकाता की टीम पांच मैच खेलते हुए दो जीती है और तीन गंवाए हैं। recent visitors 30

दो दिवसीय पारिवारिक सिंधी मेले का भव्य शुभारंभ : दरयानी

दो दिवसीय पारिवारिक सिंधी मेले का भव्य शुभारंभ : दरयानी

Grand inauguration of two-day family Sindhi fair: Daryani भोपाल, ब्यूरो रिपोर्ट। सिंधी मेला समिति द्वारा लालघाटी स्थित सुंदरवन गार्डन में आज से पारिवारिक सिंधी मेले का भव्य आग़ाज होने जा रहा है, इस मेले की संपूर्ण तैयारियाँ पूर्ण हो चुकी है। इस वर्ष यह मेला सिंधी सभ्यता एवं सुहिनी सभ्यता पर आधारिक होगा जिसमें प्रमुख रूप से समाज की संस्कृति, भाषा, बोली एवं सिंध की झलकियाँ को प्रमुख रूप से प्रदर्शित किया जायेगा, इसके अलावा पहली बार इस मेले में सिंधी समाज का प्रमुख हिंगलाज माता का मंदिर जो वर्तमान में सिंध पाकिस्तान के बलूचिस्तान के प्रांत में हिंगोल नदी के किनारे पर स्थित है उस मंदिर का प्रारूप इस मेले प्रमुख आकर्षण का केन्द्र होगा। सिंधी मेला समिति के अध्यक्ष मनीष दरयानी एवं महासचिव नरेश तलरेजा ने बताया कि भगवान झूलेलाल के बहराने के साथ इस मेले की विधि विधान से पूजा अर्चना कर शुरुआत कि जायेंगी, साथ ही मेले के प्रथम दिन देसी लेडी गागा (पिंकी मैदासानी, पिकोक) की प्रस्तुति भी इस वर्ष मेले में युवाओ के लिए आकर्षण का केन्द्र रहेगी, साथ ही युवाओं में जोश भरने के लिए सिम्फ़ोनी बैंड को भी मुख्य रूप से आमंत्रित किया गया है। रविवार को तारक मेहता उल्टा चश्मा फ़ैम टपू सेना भी इस सिंधी मेला में अपनी प्रस्तुति देकर इस मेले में चारचाँद लगायेंगे। इसके अलावा मेले में कई प्रकार के आकर्षण पुरस्कारों का भी वितरण समिति की और किया जायेगा। recent visitors 83

अखिलेश का बड़ा हमला- भाजपा बाबा साहब के संविधान को भी नहीं मान रही, भाजपा समय-समय पर बदलाव कर रही है

अलीगढ़ अलीगढ़ पहुंचे सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा, भाजपा बाबा साहब के संविधान को भी नहीं मान रही। संविधान हमारा ढाल है, हमारा सम्मान है, हमारी पहचान है, हमें हक, अधिकार दिलाता है। उसे संविधान में भाजपा समय-समय पर बदलाव कर रही है। कानून व्यवस्था की की आज पोल खुल रही है। मुख्यमंत्री को साइड लाइन कर दिया गया। दिल्ली वाले अधिकारियों से सीधे घटनाओं की जानकारी ले रहे है। शुक्रवार को अखिलेश यादव पटियाली की पूर्व विधायक की बेटी की शादी में शामिल होन पहुंचे। तालानगरी एक रिसार्ट में अखिलेश भाजपा पर खूब बरसे। कहा कि उत्तर प्रदेश में वर्तमान समय में महिला, बेटी असुरक्षित हैं। भेदभाव की राजनीति हो रही है। जाति देखकर देखकर भेदभाव हो रहा है। विपक्ष को कैसे दबाया जाए। इस पर काम किया जा रहा है। अर्थव्यवस्था का खेल यह कि यह विश्व गुरु बनना चाहते थे यह लोग अपने जुमले से बताते थे कि हम विश्व में दूसरे तीसरे नंबर पर पहुंच गए हैं। सच्चाई यह कि मंहगाई सै जनता परेशान है ।‌ किसान को गेहूं का भाव नहीं मिल रहा अखिलेश यादव नै कहा कि किसानों को सुविधा नहीं मिल रही है ।गेहूं का ऐसा समर्थन मूल्य लागू किया है।जिससे किसानों को नुकसान हो रहा है। प्राइवेट लोग भी किसान का गेहूं महंगा नहीं खरीद सकते हैं । यह इसीलिए काला कानून ला रहे हैं ताकि किसान को फसल की सही कीमत ना मिले। यह प्राइवेट कंपनियों को गेहूं खरीदवा रहे है। जीएसटी ने व्यापार को बर्बाद कर दिया। जो व्यापारियों को लाभ मिलना चाहिए। वह लाभ व्यापारी सरकार नहीं दे पा रहा है। रामजीलाल सुमन के बयान पर रखी सफाई अखिलेश यादव ने कहा कि सांसद रामजीलाल सुमन ने जो कुछ कहा उसके बाद राज्यसभा के रिकॉर्ड से वह बात हटा दी गई। रिकॉर्ड से हटाई जाने वाली बात खत्म हो जाती है । लेकिन भाजपा का रवैया तानाशाह है। यह हिटलर की तरह कार्य करना चाह रहे हैं। इतिहास को इतिहास रहना चाहिए। सरकार के इसारे पर किसी को भी दोषी बनाया जा रहा है। समाजवादी पार्टी वक़्फ़ बोर्ड संशोधन बिल को किसी भी कीमत पर नहीं मानती है। recent visitors 44

Vastu Tips: क्यों पहले के समय में गोबर से होती थी घर की लीपाई? क्या कहते हैं धार्मिक ग्रंथ?

Vastu Tips: क्यों पहले के समय में गोबर से होती थी घर की लीपाई? क्या कहते हैं धार्मिक ग्रंथ?

why were homes plastered with cow dung in earlier times pehle ke samay me gobar se kyon leepa jata tha plastered with cow dung आज भी जब हम गांव जाते हैं तो सुबह की पहली किरण के साथ जो सोंधी खुशबू उठती थी, वह सिर्फ मिट्टी की नहीं, गोबर से लिपे आंगनों की होती थी। यह परंपरा असल में सनातन धर्म की उन गहराइयों से जुड़ी है जहां हर वस्तु का एक दिव्य और व्यावहारिक अर्थ छुपा होता है। गोबर से घर लीपने से वह शुद्ध और ठंडा बना रहता है। तो आज की इस खबर में हम आपको बताने जा रहे हैं कि पहले के समय में घर को गोबर से क्यों लीपा जाता है। क्या ये सिर्फ एक चली आ रही कोई परंपरा थी, या इसके पीछे कुछ कारण भी थे? आइए जानते हैं। क्यों गोबर से लीपा जाता था घर? सनातन परंपरा में गोबर को पवित्रता और शुद्धता का प्रतीक माना गया है। किसी भी धार्मिक आयोजन से पहले जब घर के आंगन को गोबर से लिपा जाता है, तो वह सिर्फ सफाई नहीं, बल्कि भूमि को ऊर्जा देने की एक क्रिया होती है। शास्त्रों में तो यहां तक कहा गया है कि गोबर में लक्ष्मी का वास होता है । इसलिए कहते हैं, “गोमय वसते लक्ष्मी”। इसका अर्थ यही है कि जहां गोबर है, वहां समृद्धि, सकारात्मकता और पवित्रता खुद आ जाती है। plastered with cow dung Read more: इंजेक्शन, टैबलेट या फिर लिक्विड…शरीर में दवा पहुंचाने का क्या है सबसे सही तरीका? पंचगव्य बनाने में भी आता है काम गोबर केवल धार्मिक अनुष्ठानों में इस्तेमाल नहीं होता है, बल्कि यह पंचगव्य का भी एक आवश्यक हिस्सा है, जिसमें गोबर, गोमूत्र, दूध, दही और घी आदि शामिल है। इन पांच तत्वों का मिश्रण न केवल आध्यात्मिक शुद्धिकरण करता है, बल्कि यह आयुर्वेद में एक औषधीय तत्व के रूप में भी प्रयोग होता है। कुछ पुराणों में यह साफ बताया गया है कि पंचगव्य का सेवन पापों को हरने वाला और रोगों को मिटाने वाला होता है। plastered with cow dung शुभ कार्य के दौरान गोबर का किया जाता है इस्तेमाल धार्मिक ग्रंथों में गोबर का जो स्थान है, इसे किसी भी प्रकार से बढ़ा-चढ़ाकर नहीं बताया गया है। अथर्ववेद से लेकर गरुड़ पुराण और मनुस्मृति तक में गोबर और गाय से जुड़े पदार्थों की महिमा का वर्णन मिलता है। इसलिए जब भी घर में कई त्यौहार मनाया जाता है या फिर कोई शुभ कार्य, जैसे कि हवन या पूजा किया जाता है तो पूरे घर को गोबर से लीपा जाता है, जिससे घर में लक्ष्मी का वास हो और घर की सुख-समृद्धि में वृद्धि हो। घर में मक्खियों, मच्छरों को भी दूर भगाता है गोबर बता दें कि गोबर कीट-पतंगों से रक्षा करने में काफी असरदार साबित होता है। गोबर से घर में मक्खियां, मच्छर, और कीट दूर रहते हैं। यही कारण है कि गांवों में गोबर से लिपे घरों में रोगों का प्रकोप कम देखा गया है। इसके अलावा, यह पूरी तरह जैविक है, पर्यावरण के अनुकूल है, और धरती को हानि नहीं पहुंचाता। डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए “माइ सीक्रेट न्यूज़” उत्तरदायी नहीं है। recent visitors 114

ब्यावरा शहर में एक चौंकाने वाला सामने आया, 70 वर्षीय महिला करीब 35 साल पहले गायब हो गई थी, जो अचानक मिली

राजगढ़ मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा शहर में एक चौंकाने वाला सामने आया है। एक 70 वर्षीय महिला करीब 35 साल पहले गायब हो गई थी। मृत समझकर परिवार के लोगों ने यूपी के प्रयागराज में पिंडदान भी कर दिया था। अब वह महिला अचानक जिंदा मिली है। जब वह अपने घर लौटी तो परिवार वालों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। दरअसल, राजगढ़ जिले के ब्यावरा शहर के जगात चौक पर रहने वाले गोपाल सेन की पत्नी गीता सेन करीब 35 साल पहले अपने मायका शाजापुर जिले के कालापीपल तहसील के खोखरा गांव गई हुई थी। वह अचानक से गायब हो गई थी। इसके बाद परिवार के लोगों ने गीता बाई की खूब तलाश की, लेकिन गीताबाई का कोई सुराग नहीं मिला। करीब 5 साल पहले परिवार के लोगों ने मरा समझकर प्रयागराज जाकर गीता बाई का पिंडदान कर दिया। हर साल श्राद्ध पक्ष में नवमी के दिन श्राद्ध करने लग गए थे। लेकिन अचानक महाराष्ट्र के नागपुर के मेंटल हॉस्पिटल से एक फोन जिसके बाद परिवार को लोगों को पैरों तले जमीन खिसक गई। फोन पर गीता बाई के जिंदा होने की खबर मिली। नागपुर मेंटल हॉस्पिटल की समाजसेवा अधीक्षक कुंडा बिडकर और कालापीपल सहित ब्यावरा पुलिस के सहयोग से परिवार नागपुर पहुंचा और गीताबाई को सुरक्षित घर लेकर आए। 19 महीने तक एड्रेस किया सर्च नागपुर के क्षेत्रीय मेंटल हॉस्पिटल की समाजसेवा अधीक्षक कुंडा बिडकर ने बताया कि महिला को कोर्ट के आदेश पर बीमारी के हालत में भर्ती किया गया था। महिला को परिवार और एड्रेस के बारे में कुछ जानकारी नहीं थी। इस दौरान बायोमेट्रिक से भी एड्रेस पता लगाने की कोशिश की गई, लेकिन उसमें भी सफलता नहीं मिली। महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के कई गांव और पुलिस स्टेशनों और सरपंचों सहित किराना दुकानदारों से संपर्क ट्रेस किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली। 19 महीने के बाद ब्यावरा के बारे में जानकारी मिली तो राजगढ़ एसपी कार्यालय में संपर्क किया। इसके बाद पुलिस के सहयोग से परिवार के बारे में जानकारी ली गई। घर लौटने पर परिवार के लोगों ने किया भव्य स्वागत गीताबाई के 35 साल बाद पहली बार घर लौटने पर पति, बेटे, बेटी और पोते- पोतियों ने फूल मालाओं के साथ भव्य स्वागत किया। इस दौरान पति-पत्नी ने एक दूसरे को माला भी पहनाई। recent visitors 44

इंजेक्शन, टैबलेट या फिर लिक्विड…शरीर में दवा पहुंचाने का क्या है सबसे सही तरीका?

इंजेक्शन, टैबलेट या फिर लिक्विड…शरीर में दवा पहुंचाने का क्या है सबसे सही तरीका?

injection tablet or liquid what is the fastest way to get medication into the body Way to Get Medication into the Body : किसी भी व्यक्ति के बीमार पड़ने पर डॉक्टर उनकी स्थिति के हिसाब से उन्हे दवाएं देते हैं. डॉक्टर अपने मरीजों को दवाएं कई रूपों में देते हैं, जिसमें टैबलेट, कैप्सूल, लिक्विड सिरप, इंजेक्शन या फिर इन्हेलर जैसे अन्य विकल्प होते हैं. अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि इनमें से किस तरह की दवाएं सबसे अधिक असरदार होती हैं? तो आपको बता दें कि इसका जवाब इस पर निर्भर करता है कि आपको किस तरह की समस्या हुई है और आपकी स्थिति कितनी गंभीर है. आइए जानते हैं इस बारे में- medication into the body टैबलेट और कैप्सूल टैबलेट और कैप्सूल सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला तरीका है. इन्हें लेना आसान होता है, ये लंबे समय तक स्टोर की जा सकती हैं और कम खर्चीली भी होती हैं. हालांकि, इन्हें पचने और खून में घुलने में समय लगता है, इसलिए ये उन बीमारियों में दी जाती हैं जिनमें तुरंत असर की जरूरत नहीं होती, जैसे – सामान्य बुखार, दर्द, एलर्जी, ब्लड प्रेशर इत्यादि स्थितियों में टैबलेट और कैप्सूल जैसी दवाएं दी जाती हैं. medication into the body Read more: एमपी में जल संकट, बूंद-बूंद पानी को तरस रहे ग्रामीण, नल जल योजना पूरी तरह फेल लिक्विड जिन मरीजों के निगलने की क्षमता कम होती है, जैसे- छोटे बच्चे या बुजुर्ग, उन्हें दवाएं लिक्विड दी जाती हैं. लिक्विड में मिलने वाली दवाएं जल्दी अवशोषित होती हैं और स्वाद के अनुसार बनाई जाती हैं. पर इनकी मात्रा का सही निर्धारण जरूरी होता है. इंजेक्शन किसी भी मरीज को इंजेक्शन तब दिया जाता है, जब दवा को शरीर में तुरंत पहुंचाना होता है. इंजेक्शन सबसे सबसे प्रभावी तरीका होता है. ये सीधे खून में (IV), मांसपेशी (IM) या स्किन के नीचे (SC) दिए जाते हैं. इंजेक्शन गंभीर संक्रमण, एलर्जी रिएक्शन या सर्जरी के समय इसका इस्तेमाल किया जाता है. मुख्य रूप से तेज बुखार, डिहाइड्रेशन, गंभीर संक्रमण, डायबिटीज (इंसुलिन) जैसी स्थितियों में दिया जाता है. सबसे सही तरीका कौन सा है? दवाएं देने का कोई सही तरीका नहीं होता है. यह पूरी तरह इस पर निर्भर करता है कि बीमारी की गंभीरता क्या है? दवा कितनी जल्दी असर दिखानी चाहिए? मरीज की उम्र और शारीरिक स्थिति क्या है? हर दवा देने का तरीका अपनी जगह सही होता है. डॉक्टर आपकी स्थिति के अनुसार सबसे उपयुक्त तरीका चुनते हैं. खुद से दवाओं का रूप या तरीका बदलना खतरनाक हो सकता है, इसलिए हमेशा चिकित्सक की सलाह लेना ही सबसे सही तरीका है. recent visitors 118

पार्टी संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत और सक्रिय बनाने की दिशा में पार्टी ने बड़े कदम उठाने शुरू कर दिए

जयपुर  गुजरात में हाल ही में संपन्न हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन (Congress National Adhiveshan) के बाद संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत और सक्रिय बनाने की दिशा में पार्टी ने बड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं. राजस्थान इस दिशा में सबसे पहला मॉडल स्टेट बना है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा (Govind Singh Dotasra) के निर्देश पर 58 हजार से अधिक मंडल, ब्लॉक, जिला और बूथ पदाधिकारियों का डिजिटल डाटा तैयार कर लिया गया है. कौन पदाधिकारी सक्रिय है, कौन निष्क्रिय, और किस स्तर पर कौन-कौन सी संगठनात्मक गतिविधियां चल रही हैं, इससे पूरी डिटेल ऑनलाइन हो गई है. यह डाटा अब सीधे AICC और प्रदेश नेतृत्व की निगरानी में रहेगा और निष्क्रिय नेताओं की पहचान कर उनके स्थान पर नए ऊर्जावान कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने की प्रक्रिया जल्द शुरू हो सकती है. निष्क्रिय नेताओं की उलटी गिनती शुरू इस डिजिटल प्लेटफॉर्म की मदद से पार्टी उन नेताओं की लिस्ट तैयार कर रही है जो वर्षों से पदों पर जमे हैं, लेकिन संगठनात्मक रूप से निष्क्रिय बने हुए हैं. ये वह चेहरे हैं जिन पर अब तक पार्टी के पास निगरानी की कोई सटीक व्यवस्था नहीं थी, लेकिन अब एक क्लिक में पता चलेगा कि किसने कितनी बैठकें अटेंड कीं, कितने कार्यकर्ता जोड़े और संगठन के लिए जमीनी स्तर पर कितना काम किया. 'परफॉर्मेंस ही प्रमोशन का आधार बनेगा' राजस्थान कांग्रेस का यह डिजिटलाइजेशन मॉडल अब राष्ट्रीय अधिवेशन के बाद पूरे देश में लागू किया जा सकता है. अधिवेशन में “संगठन निर्माण” को लेकर जिस विचार को बल दिया गया था, वह अब धरातल पर उतरता नजर आ रहा है. डोटासरा ने कहा, यह कदम केवल डेटा एंट्री नहीं, बल्कि कांग्रेस संगठन की रीब्रांडिंग है, जहां परफॉर्मेंस ही प्रमोशन का आधार बनेगा. एक क्लिक में प्रदेश का संगठनात्मक ब्लूप्रिंट इस डिजिटलीकरण के बाद कार्यकर्ताओं की ट्रैकिंग अब आसान होगी. मंडल, ब्लॉक और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं की उपस्थिति, सक्रियता और सहभागिता का ऑनलाइन रिकॉर्ड तैयार किया जा सकता है. प्रशिक्षण शिविरों, बैठकों और अभियानों में भागीदारी का डिजिटल विश्लेषण होगा. निष्क्रिय पदाधिकारियों की तत्काल पहचान और रिपोर्टिंग हो सकेगी. एक क्लिक में पूरे प्रदेश का संगठनात्मक ब्लूप्रिंट सामने आ जाएगा. संगठन में व्यापक फेरबदल की तैयारी सूत्रों के मुताबिक, इस डिजिटल डाटा के आधार पर जल्द ही संगठन में व्यापक फेरबदल की तैयारी है. कई वर्षों से पदों पर जमे नेताओं को हटाकर युवाओं, महिलाओं और सक्रिय कार्यकर्ताओं को आगे लाने की योजना बनाई जा रही है. इस पूरी प्रक्रिया का डाटा कांग्रेस की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा और राष्ट्रीय नेतृत्व इसे सीधा देख सकेगा. इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि संगठन के किसी भी स्तर पर निष्क्रियता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. recent visitors 54