चयन सूची और परीक्षा परिणाम न्यायालय की अनुमति के बिना घोषित नहीं किए जाएं :हाईकोर्ट

 जबलपुर असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा में गेस्ट फैकल्टी को एससी-एसटी वर्ग के तहत मिलने वाली आयु सीमा छूट का लाभ नहीं दिए जाने के खिलाफ जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने एससी-एसटी वर्ग को 5 साल की अतिरिक्त आयु सीमा छूट का लाभ प्रदान करने के आदेश जारी किए हैं। युगलपीठ ने यह भी निर्देश दिया है कि चयन सूची और परीक्षा परिणाम न्यायालय की अनुमति के बिना घोषित नहीं किए जाएं। अतिथि शिक्षकों को मिलेगा नौकरी में 25% रिजर्वेशन, जबलपुर हाईकोर्ट का फैसला अतिथि शिक्षकों के लिए जबलपुर हाईकोर्ट ने राहत देने वाला आदेश जारी किया है. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत व जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने स्वाशासकीय व जनभागीदारी कॉलेज में कार्यरत अतिथि शिक्षकों को आरक्षण का लाभ देने का अंतरिम आदेश जारी किया है. युगलपीठ ने एमपीपीएससी के माध्यम से निकाली गई असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती में इन कॉलेज में कार्यरत गेस्ट फैकल्टी को भी 25 प्रतिशत आरक्षण की श्रेणी में रखने के अंतरिम आदेश जारी किए हैं. क्या है गेस्ट फैकल्टी और आरक्षण का मामला? दरअसल, स्वाशासकीय यानी ऑटोनॉमस व जनभागीदारी कॉलेज में कार्यरत 33 गेस्ट फैकल्टी की ओर से ये याचिका दायर की गई थी. तीन याचिका में कहा गया था कि उच्च शिक्षा विभाग ने MPPSC के माध्यम से असिस्टेंट प्रोफेसर और खेल अधिकारियों के लिए 2 हजार 117 पदों पर भर्ती निकाली है. वहीं सभी याचिकाकर्ता स्वाशासकीय व जनभागीदारी कॉलेज में रिक्त पदों पर वर्षों से कार्यरत हैं. याचिका में इसके साथ मांग की गई कि इस भर्ती में गेस्ट फैकल्टी होने के नाते उन्हें भी 25 प्रतिशत आरक्षण का लाभ प्रदान किया जाए, जो उन्हें नहीं दिया जा रहा है. अब मिलेगा आरक्षण का लाभ अतिथि शिक्षकों की याचिका की सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने स्वाशासकीय व जनभागीदारी कॉलेज में कार्यरत गेस्ट फैकल्टी को भी आरक्षण का लाभ देने के अंतरिम आदेश जारी किए हैं. युगलपीठ ने नियुक्ति याचिका के अंतिम आदेश के अधीन रहते हुए एमपीपीएससी को रिजल्ट फिलहाल जारी नहीं करने के आदेश दिए हैं. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता एस डी मिश्रा ने पैरवी की.  हाईकोर्ट ने शिक्षक भर्ती में दी राहत, 2018 की टीईटी मान्य, आयु सीमा में छूट, अनुभव प्रमाण पत्र अनिवार्य नहीं मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने शिक्षक भर्ती से जुड़े तीन अलग-अलग मामलों में अभ्यर्थियों को राहत प्रदान की है। हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश के तहत उम्मीदवारों को चयन प्रक्रिया में शामिल करने के आदेश दिए। कोर्ट ने कहा कि इन अभ्यर्थियों का परीक्षा परिणाम इस याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा। चयन प्रक्रिया में शामिल करने के निर्देश बुरहानपुर निवासी आकांक्षा व अन्य की ओर से कोर्ट को बताया गया कि शिक्षक पात्रता परीक्षा 2023 की नियम पुस्तिका के अनुसार, 2018 के बाद आयोजित किसी भी शिक्षक पात्रता परीक्षा की वैधता आजीवन होगी। इसके बावजूद कर्मचारी चयन बोर्ड ने प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2024 में टीईटी 2020 पास अभ्यर्थियों को शामिल नहीं किया। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को चयन प्रक्रिया में शामिल करने के निर्देश दिए। भर्ती परीक्षा में आवेदन करने और भाग लेने की अनुमति विदिशा निवासी अरविंद रघुवंशी व अन्य की ओर से 2024 के भर्ती विज्ञापन की कंडिका 6.2 को चुनौती दी थी, जिसमें अधिकतम आयु सीमा 45 वर्ष तय की गई थी। दलील दी गई कि सामान्य प्रशासन विभाग ने 18 सितंबर 2022 को आदेश जारी कर अधिकतम आयु सीमा में 3 वर्ष की छूट का प्रावधान दिया है। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को भर्ती परीक्षा में आवेदन करने और भाग लेने की अनुमति दी। वहीं हाईकोर्ट ने टीकमगढ़ निवासी शैलेन्द्र यादव व अन्य को बिना अनुभव प्रमाण पत्र के आवेदन करने की अनुमति प्रदान की।   recent visitors 44

अप्रैल और मई की गर्मी में बिजली कटौती के तैयार रहे ग्वालियरवासी, एक फिक्स समय पर बिजली सप्लाई बंद रखने का निर्णय

ग्वालियर  गर्मी आ गई है। हर साल की तरह बिजली कंपनी प्री मानसून मेंटेनेंस में जुटने वाली है। मध्य प्रदेश के ग्वालियर से खबर है कि इस बार यह मेंटेनेंस हर साल जैसा न होकर कुछ अलग होगा। इस बार मेंटेनेंस के लिए एक फिक्स समय पर बिजली सप्लाई बंद रखने का निर्णय लिया जा सकता है। वह फिक्स समय सुबह नौ से दोपहर एक बजे तक होगा। यानी अप्रैल से मई तक अलग-अलग इलाकों में जो कटौती होगी, वह इन्हीं चार घंटों में होगी। लोगों की सहूलियत के लिए बनाया शेड्यूल     बिजली कंपनी के शहर वृत्त के महाप्रबंधक नितिन मांगलिक ने बताया कि भीषण गर्मी के पूर्वानुमान को देखते हुए इस बार लोगों की सहूलियत के लिए मेंटेनेंस का ऐसा शेड्यूल तैयार किया जाएगा।     दोपहर दो बजे के बाद जब तापमान ज्यादा रहता है, तब शटडाउन नहीं लिया जाए। दो माह तक अलग-अलग इलाके की करीब तीस से पचास हजार की आबादी रोज चार घंटे घोषित बिजली कटौती झेलेगी। शनिवार को पांच फीडर पर गुल रहेगी बिजली नगर संभाग पूर्व के पांच फीडर क्षेत्रों में शनिवार को बिजली गुल रहेगी। मेला फीडर, इंद्रमणी नगर, सुरेश नगर फीडर पर दोपहर 12 बजे से शाम छह बजे तक बिजली गुल रहेगी। इससे इंद्रमणी नगर, न्यू विवेक नगर, दुल्लपुर गांव, पंचशील नगर, नदीपार टाल, तृप्ती नगर तरुण बिहार कालोनी सहित अन्य क्षेत्र प्रभावित रहेंगे। गुलमोहर व विवेकानंद फीडर पर सुबह 11 बजे से दोपहर एक बजे तक बिजली गुल रहेगी। इससे गुलमोहर सिटी, ग्रीन पार्क, ओहदपुर, यशोदा रेजीडेंसी, लोटस विला, विवेकानंद नीडम सहित अन्य क्षेत्र प्रभावित रहेंगे। recent visitors 42

Trump ने कर दिया अमेरिकी शिक्षा विभाग को बंद करने वाले आदेश पर हस्ताक्षर, क्या है मामला

वाशिंगटन  अमेरिका में एजुकेशन डिपार्टमेंट यानी शिक्षा विभाग पर ताला लग गया है. डोनाल्ड ट्रंप ने उस आदेश पर अपनी कलम भी चला दी है. जी हां, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शिक्षा विभाग को ‘खत्म’ करने के उद्देश्य से एक आदेश पर हस्ताक्षर किए. यह अमेरिकी दक्षिणपंथियों का दशकों पुराना लक्ष्य रहा है. वो चाहते हैं कि अलग-अलग राज्य संघीय सरकार से मुक्त होकर खुद स्कूलों का संचालन करें. व्हाइट हाउस के ईस्ट रूम में डेस्क पर बैठे स्कूली बच्चों से घिरे डोनाल्ड ट्रंप एक खास समारोह में हस्ताक्षर करने के बाद आदेश दिखाते हुए मुस्कुरा रहे थे. समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यह आदेश संघीय शिक्षा विभाग को हमेशा के लिए खत्म करने की शुरुआत करेगा. हम इसे बंद करने जा रहे हैं और जितनी जल्दी हो सके इसे बंद कर देंगे. यह हमारे लिए कुछ नहीं कर रहा है. हम शिक्षा को वापस राज्यों को सौंपने जा रहे हैं, जहां यह होना चाहिए.’ हालांकि, यह भी सच है कि 1979 में बनाए गए अमेरिकी शिक्षा विभाग को कांग्रेस की मंजूरी के बिना बंद नहीं किया जा सकता है. लेकिन ट्रंप के आदेश में इसे फंड और स्टाफ से वंचित करने की शक्ति होने की संभावना है. यह कदम डोनाल्ज ट्रंप के एक चुनावी वादे को पूरा करता है. यह सरकार के क्रूर बदलाव के अब तक के सबसे कठोर कदमों में से एक है जिसे ट्रंप टेक टाइकून एलन मस्क की मदद से अंजाम दे रहे हैं. आदेश में शिक्षा सचिव लिंडा मैकमोहन को ‘शिक्षा विभाग को बंद करने और शिक्षा प्राधिकरण को राज्यों को वापस करने की सुविधा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने’ का निर्देश दिया गया है. शिक्षा विभाग को आखरि ट्रंप ने क्यों किया 'बंद'? ट्रंप ने राष्ट्रपति की कुर्सी पर वापसी के लिए अपने चुनावी कैंपेन में एक वादा किया था- वादा था कि शिक्षा का विकेंद्रीकरण करने का. यानी केंद्र सरकार के हाथ में शिक्षा की बागड़ोर नहीं होगी. उन्होंने कहा था कि वह विभाग की शक्तियों को राज्य सरकारों को सौंप देंगे, जैसा कि कई रिपब्लिकन दशकों से चाहते थे. बता दें कि परंपरागत रूप से, अमेरिका में शिक्षा में फेडरल सरकार (केंद्रीय सरकार) की सीमित भूमिका रही है. प्राइमरी और सेकेंडरी स्कूलों के लिए केवल 13 प्रतिशत फंड केंद्र के खजाने से आता है. बाकी राज्यों और स्थानीय समुदायों द्वारा वित्त पोषित किया जाता है. लेकिन कम आय वाले स्कूलों और विशेष जरूरतों वाले छात्रों के लिए केंद्र से आने वाला फंड अमूल्य है, उनके चलने का जरीया है. अब तक फेडरल सरकार छात्रों के लिए प्रमुख नागरिक अधिकार सुरक्षा लागू करने में आवश्यक रही है. recent visitors 58

मुख्यमंत्री मोहन यादव की दो विदेश यात्राओं पर 18 करोड़ रुपये से ज़्यादा का खर्च आया

भोपाल  मुख्यमंत्री मोहन यादव की दो विदेश यात्राओं पर 18 करोड़ रुपये से ज़्यादा का खर्च आया। यह जानकारी सरकार ने शुक्रवार को विधानसभा में दी। कांग्रेस MLA पंकज उपाध्याय ने इस बारे में सवाल पूछा था। मुख्यमंत्री यादव, जो उद्योग नीति और निवेश प्रोत्साहन विभाग के प्रमुख भी हैं, ने लिखित में इसका जवाब दिया। जवाब के अनुसार, मुख्यमंत्री यादव 24 से 30 नवंबर 2024 के बीच UK और जर्मनी गए थे। वहां उन्होंने निवेशकों के साथ बातचीत की। इस यात्रा का अस्थायी खर्च 1,075.55 लाख रुपये (10 करोड़ रुपये से ज़्यादा) था। उनकी दूसरी यात्रा 27 जनवरी से 1 फरवरी तक जापान की थी। इस पर 731.72 लाख रुपये (7 करोड़ रुपये से ज़्यादा) खर्च हुए। दोनों यात्राओं का कुल खर्च 1,807.27 लाख रुपये (18 करोड़ रुपये से ज़्यादा) था। एडवांस में भी मिले थे रूपए सरकार ने बताया कि यात्राओं के लिए 1,244.27 लाख रुपये (12 करोड़ रुपये से ज़्यादा) एडवांस में दिए गए थे। मुख्यमंत्री की इन दो विदेश यात्राओं का मकसद ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 को सफल बनाना था। यह समिट भोपाल में 24 और 25 फरवरी को हुआ था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका उद्घाटन किया था। निवेश के लिए की थी यात्राएं मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नवंबर 2024 से जनवरी 2025 के बीच UK, जर्मनी और जापान की यात्राएं कीं। इन यात्राओं का मकसद प्रदेश में निवेश लाना था। इन यात्राओं पर कुल 18 करोड़ रुपये से ज़्यादा का खर्च आया। यात्राओं के दौरान निवेशकों और उद्योगपतियों के साथ बैठकें हुईं। निवेशकों से निवेश के प्रस्ताव भी मिले। जवाब में यह भी बताया गया कि जर्मनी और UK की यात्रा में मुख्यमंत्री के साथ 15 लोग गए थे। जापान की यात्रा में 12 लोग साथ थे। इनमें एक पत्रकार, एक वीडियो पत्रकार, MPIDC के सलाहकार, MPIDC के नॉलेज पार्टनर, IAS अधिकारी और अन्य सरकारी अधिकारी शामिल थे। दोनों यात्राओं के सफल रहने का दावा UK और जर्मनी से लौटने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा था कि उनकी यात्रा बहुत सफल रही। उन्होंने कहा था कि इस यात्रा से लगभग 78,000 करोड़ रुपये के निवेश के प्रस्ताव मिले हैं। इसी तरह, जापान से लौटने के बाद मुख्यमंत्री ने बताया कि जापान-मध्य प्रदेश औद्योगिक सहयोग मंच बनाने का प्रस्ताव मंजूर हो गया है। इससे मध्य प्रदेश में जापानी इंडस्ट्रियल पार्क, स्किल डेवलपमेंट सेंटर और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग हब बनेंगे। इसके अलावा, जापानी निवेशकों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने के लिए एक जापान प्लस सेल भी बनाया जाएगा। जीआईएस में मिले 26.61 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) के बाद मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि दो दिन का GIS राज्य की तरक्की में एक सुनहरा अध्याय था। सरकार ने बताया कि GIS में 26.61 लाख करोड़ रुपये के निवेश के प्रस्ताव मिले हैं। recent visitors 52

सुप्रीम कोर्ट ने गोधरा के बाद हुए दंगों के केस में 6 को किया बरी, वह अवैध भीड़ का हिस्सा थे

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के गोधरा कांड के बाद हुए दंगों के मामले के छह आरोपियों को  बरी कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी मामले में सिर्फ मौके पर मौजूद होना या वहां से गिरफ्तारी होना यह साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है कि वे गैरकानूनी भीड़ के हिस्सा थे। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने गुजरात हाईकोर्ट के 2016 के उस फैसले को खारिज कर दिया, जिसमें गोधरा कांड के बाद 2002 में हुए दंगों के मामले में छह लोगों को बरी करने के फैसले को पलट दिया गया था। बेंच ने कहा कि सिर्फ मौके पर मौजूद होना या वहां से गिरफ्तारी होना यह साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है कि वे (छह लोग) एक हजार से ज्यादा लोगों की गैरकानूनी भीड़ का हिस्सा थे। धीरूभाई भाईलालभाई चौहान और पांच अन्य को उस घटना में एक साल की जेल की सजा सुनाई गई थी, जिसमें कथित तौर पर भीड़ ने वडोद गांव में एक कब्रिस्तान और एक मस्जिद को घेर लिया था। सभी अपीलकर्ता आरोपियों को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया था। निचली अदालत ने सभी 19 आरोपियों को बरी कर दिया था, लेकिन हाईकोर्ट ने उनमें से 6 को दोषी ठहराया। एक आरोपी की मामला लंबित रहने के दौरान मौत हो गई थी। अपीलकर्ताओं सहित 7 लोगों को एफआईआर में नामजद किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने एक निचली अदालत के 2003 के फैसले को बहाल करते हुए उन्हें बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि किसी भी तरह की दोषी भूमिका के अभाव में मौके पर उनकी गिरफ्तारी 28 फरवरी 2002 को वडोद में हुई घटना में उनकी संलिप्तता के बारे में निर्णायक नहीं है। खासकर तब जब उनके पास से न तो विध्वंस का कोई हथियार बरामद हुआ और ना ही कोई भड़काऊ सामग्री। बेंच ने कहा कि पुलिस ने गोलीबारी की, जिससे लोग इधर-उधर भागने लगे। इस तरह की झड़प में एक निर्दोष व्यक्ति को भी अपराधी समझ लिया जाता है। इसलिए, अपीलकर्ताओं की मौके से गिरफ्तारी उनकी दोषी होने की गारंटी नहीं है। बेंच ने कहा कि सामूहिक झड़पों में अदालतों पर यह सुनिश्चित करने का भारी दायित्व होता है कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति को दोषी न ठहराया जाए और उसकी स्वतंत्रता छीनी न जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में अदालतों को सावधान रहना चाहिए और उन गवाहों की गवाही पर भरोसा करने से बचना चाहिए, जो आरोपी या उसकी भूमिका का विशेष संदर्भ दिए बिना सामान्य बयान देते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसा इसलिए है, क्योंकि अक्सर (खासकर जब अपराध का स्थान सार्वजनिक स्थान होता है) लोग जिज्ञासावश अपने घर से बाहर निकलकर यह देखने लगते हैं कि आसपास क्या हो रहा है। ऐसे लोग केवल एक दर्शक से अधिक कुछ नहीं होते। हालांकि, गवाह को वे गैरकानूनी भीड़ का हिस्सा लग सकते हैं। बेंच ने कहा, "इस प्रकार, सावधानी के नियम के रूप में और कानून के नियम के रूप में नहीं, जहां रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य इस तथ्य को स्थापित करते हैं कि बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे, केवल उन व्यक्तियों को दोषी ठहराना सुरक्षित हो सकता है, जिनके खिलाफ प्रत्यक्ष कृत्य का आरोप लगाया गया है। कई बार ऐसे मामलों में सावधानी के नियम के रूप में और कानून के नियम के रूप में नहीं, अदालतों ने बहुलता परीक्षण को अपनाया है। अर्थात, दोषसिद्धि तभी कायम रह सकती है जब इसका समर्थन कुछ निश्चित संख्या में गवाहों द्वारा किया जाए जो घटना का सुसंगत विवरण देते हैं।" बेंच ने कहा कि ऐसी स्थिति में अदालत के लिए यह निर्धारित करना महत्वपूर्ण है कि क्या अभियुक्त जिस पर मुकदमा चलाया जा रहा है वह गैरकानूनी भीड़ का हिस्सा था या सिर्फ एक दर्शक था। ऐसा निर्धारण मामले के सिद्ध तथ्यों के आधार पर अनुमानात्मक है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में अपीलकर्ता उसी गांव के निवासी थे, जहां दंगे भड़के थे, इसलिए घटनास्थल पर उनकी उपस्थिति स्वाभाविक है। कोर्ट ने कहा कि इतना ही नहीं अभियोजन पक्ष का यह मामला नहीं है कि वे हथियार या विध्वंस के उपकरण लेकर आए थे। बेंच ने कहा, "हाईकोर्ट द्वारा लिया गया विपरीत दृष्टिकोण पूरी तरह से अनुचित है।'' recent visitors 54

गृहमंत्री अमित शाह और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से सीएम डॉ. मोहन ने की मुलाकात

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। साथ ही गृहमंत्री अमित शाह से भी मिलकर सीएम ने प्रदेश के विकास कार्यों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि जल्द ही राष्ट्रपति और गृहमंत्री मध्य प्रदेश का दौरा करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज दिल्ली दौरे पर थे। इस दौरान वे राष्ट्रपति भवन पहुंचे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के बाद उन्होंने कहा, “महामहिम राष्ट्रपति और गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात कर उनके प्रति आभार व्यक्त किया। उम्मीद करता हूं कि बहुत जल्द उनकी तारीख तय होगी और वे हमें आशीर्वाद देने के लिए आएंगे।” recent visitors 27

मुझे किसी के कुछ खाने से दिक्कत नहीं, लेकिन कांग्रेस पार्टी में मटन राज्यसभा की योग्यता नहीं हो सकता है : गौरव वल्लभ

नई दिल्ली एक पूर्व कांग्रेसी और वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने अपनी पुरानी पार्टी के वर्किंग कल्चर को लेकर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि देश की सबसे पुरानी पार्टी में चाटुकारिता हावी हो चुकी है। एक पॉडकास्ट इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कई दावे किए। उन्होंने किसी का नाम लिए बगैर यहां तक कहा है कि कांग्रेस पार्टी में एक नेता को दो बार राज्यसभा जाने का मौका इसलिए मिला क्योंकि उन्हें पता है कि मल्लिकार्जुन खरगे को मीट खाना बहुत पसंद और दिल्ली में किस दुकान का मटन उन्हें सबसे अच्छा लगता है। पत्रकार आदेश रावल के साथ एक पॉडकास्ट इंटरव्यू के दौरान गौरव वल्लभ ने कांग्रेस पार्टी के पतन और अपने इस्तीफे को लेकर खुलकर बात की है। उन्होंने कांग्रेस में 'पीए कल्चर' हावी होने की बात भी कही है। साथ ही उन्होंने परिवारवाद और भेदभाव के गंभीर आरोप लगाए हैं। गौरव वल्लभ ने कहा, ‘कांग्रेस में मैं एक ऐसे आदमी को जानता हूं जो खरगे साहब के काफी करीबी हैं। उस व्यक्ति की एक ही योग्यता है कि उसे पता है कि दिल्ली में मटन कहां अच्छा मिलता है। खरगे साहब मटन के शौकीन है। मैं तो शुद्ध शाकाहारी आदमी हूं। मैं दाल भी किसी के लिए नहीं लेकर जाऊंगा। उस व्यक्ति को यह पता है कि पुरानी दिल्ली की कौन सी दुकान पर मटन अच्छा मिलता है। वह मटन लाते-लाते दूसरी बार राज्यसभा में पहुंच गया। ना वह अक्ल से समझदार, ना ज्ञान से समझदार। योग्यता इतनी ही कि मटन कहां अच्छा मिलता है। मुझे किसी के कुछ खाने से दिक्कत नहीं, लेकिन कांग्रेस पार्टी में मटन राज्यसभा की योग्यता नहीं हो सकता है।’ उन्होंने इस दौरान किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन आदेश रावल के द्वारा जम्मू-कश्मीर के प्रभारी नासिर हुसैन का नाम लेने पर उन्होंने कहा कि मैं किसी का नाम नहीं लूंगा, लेकिन कांग्रेस पार्टी के हर कार्यकर्ता को यह पाता है कि कांग्रेस पार्टी में मटन लाने की योग्यता किसमें हैं। recent visitors 42