Mhow Gang Rape Case: महू में सैन्य अफसरों के साथ लूट, मारपीट और महिला मित्र से गैंगरेप के पांच दोषियों को उम्रकैद

 महू इंदौर जिले के महू क्षेत्र स्थित जाम गेट के पास सितंबर 2024 में हुए बहुचर्चित जाम गेट कांड में अदालत ने 5 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. इस मामले में सेना के ट्रेनी मेजर को बंधक बनाकर उनकी महिला मित्र के साथ लूटपाट, मारपीट और गैंगरेप की जघन्य घटना को अंजाम दिया गया था. फास्ट ट्रैक कोर्ट में चली सुनवाई के बाद महज पांच महीने में आए इस फैसले ने पीड़ितों को न्याय दिलाया है और समाज में कड़ा संदेश दिया है कि ऐसे अपराध बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे. यह घटना पिछले साल 11 सितंबर को सुबह 2 से 3 बजे के बीच महू-मंडलेश्वर रोड पर जाम गेट पर हुई थी और इसने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी थीं. महू न्यायालय की विशेष लोक अभियोजक संध्या उइके ने पीटीआई को बताया कि चौथे अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रविशंकर दोहरे ने अनिल बारोड़ (27), पवन वसुनिया (23), रितेश भाभर (25), रोहित गिरवाल (23) और सचिन मकवाना (25) को आजीवन कारावास की सजा सुनाई. आरोपियों को सामूहिक बलात्कार पीड़िता को 50,000 रुपये और अन्य तीन पीड़ितों को 10-10 हजार रुपये देने का आदेश दिया गया है. छठे आरोपी, जो नाबालिग है, पर किशोर न्यायालय में मुकदमा चल रहा है. मध्य प्रदेश के महू में सेना के दो प्रशिक्षु अधिकारियों और उनकी दो महिला मित्रों के साथ लूट, मारपीट और सामूहिक बलात्कार के मामले में पांच लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है. घटना पिछले साल 11 सितंबर को महू-मंडलेश्वर रोड पर जाम गेट पर हुई थी.     11 सितंबर को क्या हुआ था? उइके ने कहा, "लूट, अपहरण और सामूहिक बलात्कार की घटना पिछले साल 11 सितंबर को 2 से 3 बजे के बीच महू-मंडलेश्वर रोड पर स्थित जाम गेट के पास हुई थी, जब इन्फैंट्री स्कूल, महू के दो प्रशिक्षु सेना अधिकारी अपनी दो महिला मित्रों के साथ वहां गए थे." उइके ने कहा, "अचानक, छह लोगों ने पिस्तौल तान दी, उन पर हमला किया और लाठी से उनकी पिटाई की. उन्होंने 10 लाख रुपये मांगे और न देने पर जान से मारने की धमकी दी. उन्होंने उनके मोबाइल फोन और 800 रुपये लूट लिए.इसके बाद उन्होंने एक प्रशिक्षु अधिकारी और महिला मित्र को रकम का इंतजाम करने के लिए इन्फैंट्री स्कूल जाने को कहा." 12 अक्टूबर को अदालत में पेश की गई अंतिम रिपोर्ट उइके ने कहा कि उन्होंने एक प्रशिक्षु अधिकारी और एक महिला मित्र को बंधक बना लिया, जिसके साथ रितेश भाभर और अनिल बारोड़ ने सामूहिक बलात्कार किया. अगले दिन बड़गोंडा थाने में मामला दर्ज किया गया और मामले की अंतिम रिपोर्ट 12 अक्टूबर को अदालत में पेश की गई. उइके ने बताया, "अभियोजन पक्ष की दलीलें 26 अक्टूबर को शुरू हुईं और बचाव पक्ष के गवाहों के बयान इस साल 20 मार्च को दर्ज किए गए. अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष की अंतिम दलीलें 21 मार्च को समाप्त हुईं, जो मामला दर्ज होने की तारीख से ठीक पांच महीने और 12 दिन बाद था."  अफसरों को बंधक बनाकर मांगे थे रुपये पिछले साल 10 सितंबर को दो प्रशिक्षु सैन्य अधिकारी अपनी दो महिला मित्रों के साथ रात को जाम गेट तक गए थे। वे कार रोककर बातें कर रहे थे, तभी आरोपी हथियार लेकर उनके पास आए और दोनों सैन्य अफसरों के साथ मारपीट की। एक ट्रेनी आर्मी अफसर और उसकी गर्लफ्रेंड को आरोपियों ने छोड़ दिया और 10 लाख रुपये लेकर आने के लिए कहा। इस दौरान दूसरे अफसर और उसकी महिला मित्र को बंधक बनाकर रखा गया। इसके बाद अनिल और रितेश बंधक युवती को झाड़ियों में ले गए और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। दूसरे अफसर ने अपने कमांडेंट को सूचना दी। इसके बाद मौके पर पुलिस के पहुंचने से पहले ही आरोपी भाग गए थे। बाद में पुलिस ने घटना में शामिल छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने घटना के एक माह के भीतर ही चालान पेश कर दिया था। पुलिस ने दुष्कर्म में शामिल अनिल और रितेश के कपड़े, मौके पर मिले उनके सिर के बाल आदि डीएनए सेंपल के लिए भेजे थे। युवती के सैंपल भी भेजे गए थे। रिपोर्ट में आरोपियों द्वारा युवती से दुष्कर्म की पुष्टि हुई थी। पुलिस ने आरोपियों के पास से हथियार भी जब्त किए थे। पुलिस की त्वरित कार्रवाई घटना की सूचना मिलते ही इंदौर ग्रामीण एसपी हितिका वासल और एएसपी रूपेश द्विवेदी घटनास्थल पर पहुंचे. पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पांच अलग-अलग टीमें बनाकर आरोपियों की तलाश शुरू की. शुरुआत में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, और बाद में विशेष अभियान चलाकर बाकी आरोपियों को भी पकड़ लिया गया. पुलिस ने डकैती, मारपीट, फिरौती और सामूहिक दुष्कर्म का मामला दर्ज किया. इंदौर ग्रामीण एसपी हितिका वासल ने उस समय कहा था, "हमें सूचना मिली कि आर्मी अफसर और उनके साथियों के साथ मारपीट और लूट की घटना हुई है. हमने तुरंत अपनी टीम भेजी और पांच नई टीमें बनाकर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया. आरोपियों ने महिला के साथ दुष्कर्म किया है." फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई, 5 महीने में फैसला मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया गया. चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश आर.एस. दोहरे की कोर्ट में करीब पांच महीने तक सुनवाई चली. अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजन अधिकारी संध्या उईके ने मजबूती से पैरवी की. पुलिस ने ठोस सबूत और दस्तावेज पेश किए, जिसके आधार पर कोर्ट ने पांच आरोपियों—पवन, रोहित, अनिल, रितेश और सचिन (सभी मानपुर थाना क्षेत्र के निवासी)—को आजीवन कारावास की सजा सुनाई. कोर्ट ने साफ कहा कि यह सजा मरते दम तक जेल में रहने की होगी. इसके अलावा, कोर्ट ने पीड़ितों को मुआवजा देने का भी आदेश दिया. गैंगरेप की शिकार युवती को 50 हजार रुपए और अन्य तीन पीड़ितों को 10-10 हजार रुपए की राशि दी जाएगी. मामले में एक नाबालिग आरोपी भी शामिल था, जिसका फैसला अभी लंबित है. विशेष लोक अभियोजन अधिकारी का बयान विशेष लोक अभियोजन अधिकारी संध्या उईके ने कहा, "यह एक जघन्य अपराध था, जिसमें सैन्य अधिकारियों और उनकी महिला मित्रों के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया. कोर्ट ने सभी पांच आरोपियों को आजीवन कारावास और अर्थदंड से दंडित किया है. यह … Read more

Kuno National Park sheopur: चीतों ने गाय को पकड़ा तो ग्रामीणों ने मारे पत्थर, वन विभाग के मना करने पर भी नहीं माने

When the leopards caught the cow, the villagers threw stones at it, they did not listen even after the forest department’s warning Kuno National Park sheopur श्योपुर ! Kuno National Park sheopur से बाहर निकले पांच चीतों पर ग्रामीणों ने लाठी-डंडों और पत्थरों से हमला कर दिया। घटना का वीडियो भी सामने आया है। हालांकि, मौके पर मौजूद वन विभाग की रेस्क्यू टीम ग्रामीणों से चीतों से दूर रहने की बात कहती रही, लेकिन वे नहीं माने, घटना सोमवार की है। दरअसल, एक महीने पहले खुले जंगल में छोड़ी गई मादा चीता ज्वाला और उसके चार शावक शनिवार शाम को पहली बार पार्क की सीमा से बाहर आ गए थे। चीते रविवार दोपहर बाद फिर कूनो के जंगल की ओर लौट गए थे। रविवार रात को ये चीते वीरपुर तहसील के ग्राम श्यामपुर के पास देखे गए। वे निर्माणाधीन श्योपुर-ग्वालियर ब्रॉडगेज रेल ट्रैक से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर थे। सोमवार सुबह ये पांचों चीते कूनो सायफन के पास से होते हुए कूनो नदी में पहुंचे। Kuno National Park sheopur वे निर्माणाधीन रेलवे पुल के नीचे काफी देर तक बैठे रहे। इस दौरान कूनो सायफन से गुजरने वाले राहगीरों की भीड़ चीतों को देखने के लिए जमा हो गई। मादा चीता और शावक एक-एक कर रास्ता पार कर रहे थे, तभी उन्होंने गाय पर झपट्टा मारा। मादा चीता और शावकों को भगाने के लिए ग्रामीण लाठी लेकर दौड़े और पत्थर मारना शुरू कर दिए। चीता ज्वाला काफी देर तक गाय का गला पकड़े रही। जैसे ही उसे पत्थर लगा, उसने गाय को छोड़ दिया और शावकों के साथ भाग निकली। घटना के बाद करीब 10 बजे चीता दल, कूनो पुल क्षेत्र से निकलकर वीरपुर के तिललिडेररा क्षेत्र पहुंचा है। Read more: माफी नहीं मांगूंगा… BJP विधायक चिंतामणि मालवीय का पार्टी के खिलाफ मोर्चा, कांग्रेस का भी मिल गया साथ ज्वाला और उसके शावकों को 21 फरवरी को खजूरी क्षेत्र के जंगल में छोड़ा गया था। एक महीने तक वे पार्क की सीमा में ही रहे। चीतों के बाहर निकलने पर क्षेत्र के चीता मित्र और उनकी टीम ने आसपास के लोगों को जागरुक किया। उन्होंने बताया कि चीते लोगों पर हमला नहीं करते हैं। उन्होंने लोगों से चीतों को न भगाने और उनकी सुरक्षा का ध्यान रखने की अपील की। recent visitors 137

देश में 14 टोल प्लाजा की सालाना कमाई 200 करोड़ रुपये, राजस्थान में सबसे ज्यादा 156 टोल, लेकिन कमाई में UP नंबर 1

नई दिल्ली हाईवे-एक्सप्रेसवे पर चलते हुए आपको टोल प्लाजा पर रुककर टोल टैक्स भरना पड़ता है. टोल टैक्स से आपकी जेब कटती है तो सरकार का खजाना भरना भरता है. इन टोल टैक्स से सरकारी खजाने में मोटा पैसा आता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश का सबसे कमाऊ टोल प्लाजा कौन सा है? इसकी कमाई इतनी है कि सालभर में यह 400 करोड़ रुपये आपकी जेब से वसूल लेता है. देश का सबसे कमाऊ टोल प्लाजा   देश में सबसे ज्यादा कमाई करने वाला टोल प्लाजा गुजरात के भरथाना गांव में बना है, राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 48 पर बना यह टोल प्लाजा कमाई के मामले में अव्वल है.  राजधानी दिल्ली को मुंबई से जोड़ने वाले इस हाईवे पर बने टोल प्लाजा की गिनती सबसे ज्यादा कमाई करने वाले टोल प्लाजा के तौर पर होती है.बता दें कि NH-48 देश के सबसे व्यस्त हाईवे में से एक है. क्या आप जानते हैं कि देश में सबसे ज्यादा कमाई किस टोल प्लाजा पर होती है? इसका जवाब है गुजरात के भरथाना गांव में बना टोल प्लाजा। यह टोल प्लाजा राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 48 पर बना है जो राजधानी दिल्ली को देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से जोड़ता है। यह देश में सबसे ज्यादा कमाई करने वाला टोल प्लाजा है। यह टोल प्लाजा हर साल लगभग 400 करोड़ रुपये कमाता है। यह पिछले पांच साल का औसत है। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 48 देश का सबसे व्यस्त रूट है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने लोकसभा में कुछ जानकारी दी। एनएच-48 के जरिए उत्तरी भारत के राज्यों से सामान पश्चिमी तट के पोर्ट्स तक जाता है। देश में सबसे ज्यादा कमाई करने वाला दूसरा टोल प्लाजा भी इसी एनएच पर है। राजस्थान के शाहजहांपुर में NH-48 पर बना टोल प्लाजा हर साल 378 करोड़ रुपये कमाता है। सरकारी जानकारी के अनुसार भारत में 1,063 टोल प्लाजा हैं। इनमें से 14 टोल प्लाजा हर साल 200 करोड़ रुपये से ज्यादा कमाते हैं। अभी देश में 1.5 लाख किलोमीटर के एनएच नेटवर्क में से लगभग 45,000 किलोमीटर पर टोल लगता है। इसमें नए बने एक्सप्रेसवे भी शामिल हैं। कैसे बढ़ी कमाई पिछले पांच साल में कई नए राजमार्ग बने हैं जिन पर टोल लगता है। FASTag के इस्तेमाल से टोल की चोरी भी कम हुई है। इसलिए टोल से होने वाली कमाई बहुत बढ़ गई है। साल 2019-20 में टोल से 27,504 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी। पिछले साल यह कमाई बढ़कर 55,882 करोड़ रुपये हो गई। सरकार के आंकड़ों के अनुसार लोगों ने पिछले पांच साल में टोल के रूप में 1.9 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा दिए हैं। लेकिन यह रकम राजमार्गों के विकास और रखरखाव के लिए खर्च होने वाले बजट का सिर्फ पांचवां हिस्सा है। सरकार केवल उन्हीं राजमार्गों पर टोल लगाती है जो कम से कम ढाई लेन के हों। सरकार ज्यादा से ज्यादा राजमार्गों पर टोल लगाना चाहती है ताकि उसकी कमाई बढ़ सके। किस राज्य में हैं सबसे ज्यादा टोल प्लाजा संसद में दी गई जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश में 97 टोल प्लाजा हैं। इन टोल प्लाजा ने पिछले पांच साल में सबसे ज्यादा 22,914 करोड़ रुपये की कमाई की है। वहीं राजस्थान में सबसे ज्यादा 156 टोल प्लाजा हैं। इन टोल प्लाजा ने 20,308 करोड़ रुपये की कमाई की है। आमतौर पर, उन टोल प्लाजा पर ज्यादा कमाई होती है जो पोर्ट्स और इंडस्ट्रियल एरिया क्षेत्रों को जोड़ने वाले NH पर बने होते हैं।  एक रिपोर्ट के मुताबिक एक अधिकारी ने कहा, 'इन टोल प्लाजा पर ज्यादातर कमर्शियल गाड़ियां आती हैं। ये गाड़ियां निजी वाहनों की तुलना में ज्यादा टोल देती हैं। इसलिए ये प्रोजेक्ट निजी कंपनियों के लिए फायदेमंद होती हैं।' FASTag के आने से टोल संग्रह में पारदर्शिता आई है और टोल प्लाजा पर लगने वाला समय भी कम हुआ है। इससे यात्रियों को भी सुविधा हुई है और सरकार की कमाई भी बढ़ी है। बढ़ी टोल प्लाजा की कमाई   फास्टैग आने के बाद से टोल प्लाजा की कमाई बढ़ गई है. फास्टैग की मदद से टोल टैक्स की चोरी कम हुई है, जिसकी वजह से रेवेन्यू बढ़ा है.  सरकार ज्यादा से ज्यादा राजमार्गों पर टोल लगाना चाहती है ताकि उसकी कमाई बढ़ सके. वहीं एनएच-48 के जरिए उत्तरी भारत के राज्यों से सामान पश्चिमी तट के बंदरगाह तक पहुंचते हैं. ट्रकों और गाड़ियों को इस टोल प्लाजा से होकर गुजरना पड़ता है, जिसकी वजह से इस टोल प्लाजा की कमाई अधिक, वहीं निजी वाहनों के मुकाबले कॉर्मिशियल गाड़ियों का टोल भी अधिक है.   कमाई में ये भी अव्वल   इसी एचएच-48 पर बना राजस्थान के शाहजहांपुर टोल प्लाजा कमाई के मामले में दूसरे नंबर पर है. यहां हर साल 378 करोड़ रुपये का टोल कलेक्शन होता है. इसके अलावा पश्चिम बंगाल का जलाधुलागोरी टोल प्लाजा कमाई में तीसरे नंबर पर है. इसके अलावा उत्तर प्रदेश में बाराजोर टोल प्लाजा चौथे नंबर पर है. बता दें कि  उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा टोल प्लाजा है. इस राज्य में करीब 97 टोल प्लाजा हैं.   recent visitors 41

इंदौर में ग्रीन बेल्ट की जमीन की गाइडलाइन का अलग से निर्धारण होगा

इंदौर   इंदौर में कलेक्टर गाइडलाइन लगभग तैयार हो चुकी है। इस पर पंजीयन विभाग ने दावे-आपत्तियों को मंगाया था। डेढ़ सौ से अधिक आपत्तियां  आई है। जिसका निराकरण किया जा रहा है। इसके बाद गाइडलाइन का प्रारुप राज्य सरकार को भेजा जाएगा। 1 अप्रैल ले नई कलेक्टर गाइड लाइन तैयार हो जाएगी। इंदौर में 3200 लोकेशनों पर गाइडलाइन बढ़ाई जा रही है, जबकि 240 नई काॅलोनियों को गाइडलाइन के दायरे में लिया गया है। इस बदलाव से प्राॅपर्टी के कीमतों में भी वृद्धि होगी। सालभर हुए सौदों के आधार पर गाइडलाइन में बदलाव किया गया। इंदौर में सबसे ज्यादा तेजी खंडवा रोड़ और उज्जैन रोड़ पर देखने को मिली है। खंडवा रोड पर फोरलेन निर्माण हो रहा है, जबकि इंदौर उज्जैन रोड पर छह लेन बन रहा है। इंदौर में बड़े ग्रुप भी रियल इस्टेट सेक्टर में आ चुके है। 32 लोकेशनों के ज्यादातर इलाके शहरी सीमा से सटे है। इनमे बाइपास, सुपर काॅरिडोर, गांधी नगर जैसे क्षेत्र शामिल है। ग्रीन बेल्ट की जमीन की गाइडलाइन का अलग से निर्धारण पंजीयन विभाग के पास अलग-अलग तरह की आपत्तियां आई है। कुछ आपत्तियां ग्रीन बेल्ट को लेकर भी है। जिसमें कहा गया है कि ग्रीन बेल्ट की जमीनों के ज्यादा सौंदे नहीं होते है। इसकी गाइडलाइन का निर्धारण अलग से किया जाना चाहिए। इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्रों में जमीन की खरीदी बिक्री में छूट को बहाल करने की मांग भी की गई है। मास्टर प्लान में 89 गांवों को जोड़ा गया है। वहां भी प्राॅपर्टी गाइडलाइन में बदलाव हुए है। इंदौर में कुछ लोकेशनों पर 30 से लेकर 40 प्रतिशत तक गाइड लाइन बढ़ाई गई है। इंदौर एक में 531,इंदौर दो में 596, इंदौर तीन में 658, इंदौर चार में 425, महू में 429, सांवेर में 348,देपालपुर में 329 लोकेशनो पर गाइडलाइन बदली है। अब समिति के इस प्रस्ताव को प्रदेश सरकार को भेजा जाएगा। मंजूरी मिलते ही एक अप्रैल से नई गाइडलाइन के हिसाब से पंजीयन विभाग में रजिस्ट्रियां होगी। recent visitors 59

चीतों की निगरानी के लिए वन विभाग की टीम लगातार काम कर रही, वन विभाग ने मौके पर पहुंचकर लोगों को चीतों से दूर रहने के लिए कहा

ग्वालियर  कूनो नेशनल पार्क के जंगल की सीमा से निकलकर श्योपुर की विजयपुर तहसील के भैरोपुरा गांव में मादा चीता ज्वाला व चार शावकों का ग्रामीणों से आमना-सामना हो गया। यहां एक बछड़े पर मादा चीता ज्वाला ने हमला कर दिया, तो शावकों ने भी घेराबंदी शुरू कर दी। बछ़ड़े पर हमला होते देख उसके मालिक व ग्रामीणों ने चीतों पर पत्थर मारना शुरू कर दिया। लाठी से भी भगाने का प्रयास किया। पास खड़ी कूनो की टीम ने ग्रामीणों को समझाया कि बछड़े का मुआवजा मिल जाता है, चीतों पर हमला न किया जाए। इस पर बछड़े के मालिक ने कहा कि हमारे सामने हमारे मवेशियों को मरता हुआ नहीं देख सकते हैं, ऐसा होगा तो हम तो हमला करेंगे। पार्क की सीमा से बाहर आ गए थे बता दें कि एक महीने पहले खुले जंगल में छोड़ी गई मादा चीता ज्वाला और उसके 4 शावक शनिवार शाम को पहली बार पार्क की सीमा से बाहर आ गए थे। ये चीते रविवार को दोपहर बाद फिर कूनो के जंगल की ओर लौट गए थे। सामने बछड़ा आ गया था रविवार रात को ये चीते वीरपुर तहसील के ग्राम भैरोपुरा के पास देखे गए। वे निर्माणाधीन श्योपुर-ग्वालियर ब्राडगेज रेल ट्रैक से करीब 1 किलोमीटर की दूरी पर थे। सोमवार सुबह मादा चीता ज्वाला के सामने बछड़ा आ गया, तो उसने शिकार की नीयत से हमला कर दिया। लेकिन ग्रामीणों के पत्थर मारने से चीते पीछे हट गए। लाठी डंडे लेकर चिल्लाते हुए ग्रामीणों को देख चीते डर गए। मादा चीता काफी देर तक बछड़े का गला पकड़े रही, लेकिन फिर छोड़ दिया। 15 लोगों का दल कर रहा ज्वाला व शावकों की निगरानी मादा चीता ज्वाला व शावकों की निगरानी में 15 लोगों का दल निगरानी कर रहा है, जब सोमवार सुबह यह घटना हुई तो एक दल पीछे रह गया था और एक वहीं चीतों के आसपास ही मौजूद था। ग्रामीणों से दल ने बात की और समझाने का प्रयास किया कि आगे से ऐसा न करें। recent visitors 134

राजस्थान में गर्मी दिखा रही तीखे तेवर, बाड़मेर में तापमान पहुंचा 40 डिग्री सेल्सियस के पार

जयपुर राजस्थान में अगले एक सप्ताह तक मौसम शुष्क बना रहेगा। हालांकि, 25-26 मार्च के दौरान एक पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों में 20-30 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज सतही हवाएं चलने और आंशिक बादल छाने की संभावना है। राजस्थान के तापमान में 2-3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट संभव मौसम विभाग के अनुसार, आगामी 48 घंटों में तापमान में कोई विशेष बदलाव नहीं होगा। हालांकि, इसके बाद उत्तरी हवाओं के प्रभाव से तापमान में 2-3 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है। प्रदेश में फिर लौटी हीटवेव, 40 के पार पहुंचा तापमान राजस्थान में हीटवेव का असर एक बार फिर से नजर आने लगा है। बाड़मेर में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। प्रदेश के सबसे गर्म शहरों में बाड़मेर के साथ जोधपुर, जैसलमेर और चित्तौड़गढ़ जिलों शामिल हैं। यहां गर्मी का प्रभाव बढ़ गया है। राजस्थान के प्रमुख शहरों का तापमान बाड़मेर – 40.6°C जैसलमेर – 39.8°C डूंगरपुर – 37.9°C नागौर – 36.3°C सिरोही – 36.8°C जोधपुर – 38.1°C चित्तौड़गढ़ – 37.9°C कोटा – 36.1°C जयपुर – 35.1°C अगले दो दिन कैसा रहेगा मौसम? मौसम विज्ञान केंद्र, जयपुर के अनुसार, अगले दो दिन उत्तर-पूर्वी हवा के प्रभाव से तापमान में मामूली उतार-चढ़ाव होगा और आसमान साफ रहेगा। अधिकतम तापमान 34 से 38 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना हैं जबकि रात के तापमान में हल्की गिरावट हो सकती है। जयपुर मौसम केंद्र के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि 26 मार्च को राजस्थान के कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है। इससे न्यूनतम तापमान में 1-2 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आने के आसार हैं। 26 मार्च से मौसम में बदलाव की संभावना मौसम विभाग ने 26 मार्च से मौसम में बदलाव के संकेत दिए हैं। इस दौरान एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा, जिससे कुछ इलाकों में हल्की बारिश होने की संभावना है। इससे प्रदेशवासियों को गर्मी से थोड़ी राहत मिल सकती है। 23 मार्च को तापमान में 3.6 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी रविवार, 23 मार्च को प्रदेश के अधिकतम तापमान में 1 से 3.6 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसके बाद बाड़मेर का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 48 घंटों तक प्रदेश का मौसम शुष्क रहने की संभावना है। recent visitors 81

नक्सल प्रभावित बेडमाकोटी नया कैंप स्थापित, जवानों की जान को हर कदम पर खतरा

जगदलपुर भारत सरकार के मार्च 2026 तक नक्सलवाद समाप्त करने के संकल्प को साकार करने की दिशा में आईटीबीपी (इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस) ने छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में बेडमाकोटी में एक नया कैंप स्थापित किया है। यह कैंप कुतुल से लगभग 5 किमी आगे स्थित है और इसे सुरक्षा बलों की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। कोण्डागांव स्थित 41वीं वाहिनी, आईटीबीपी ने डीआईजी राणा युद्धवीर सिंह (सामरिक क्षेत्रीय मुख्यालय, भुवनेश्वर) के नेतृत्व में यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है। बेडमाकोटी नक्सल प्रभावित क्षेत्र है, जहां सुरक्षा बलों के लिए चुनौतियां लगातार बनी रहेंगी। इसके बावजूद, यह कैंप न केवल नक्सल विरोधी अभियानों को मजबूत करेगा, बल्कि स्थानीय निवासियों को भयमुक्त वातावरण प्रदान करने में भी सहायक सिद्ध होगा, आईटीबीपी भारत सरकार के नक्सल उन्मूलन मिशन के तहत, अबूझमाड़ क्षेत्र में लगातार अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है। नए कैंपों की स्थापना से न केवल सुरक्षा बलों की पकड़ मजबूत हो रही है, बल्कि यहां के ग्रामीणों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। आईटीबीपी के हिमवीर न केवल क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं, बल्कि स्थानीय जनता को भारत सरकार और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी प्रदान कर रहे हैं। इस निरंतर उपस्थिति से नक्सलियों की गतिविधियों पर अंकुश लगा है, जिससे आम जनता अब खुद को पहले से अधिक सुरक्षित और आत्मनिर्भर महसूस कर रही है। डीआईजी राणा युद्धवीर सिंह ने कहा कि आईजी ओपी यादव (सेंट्रल फ्रंटियर, आईटीबीपी) के निरंतर मार्गदर्शन के कारण यह अभियान सफल रहा। उन्होंने 41वीं वाहिनी के सेनानी नरेंद्र सिंह और उनके हिमवीरों को बेडमाकोटी कैंप की सफल स्थापना पर बधाई दी। इसके साथ ही, उन्होंने बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी, कांकेर रेंज डीआईजी अमित कामले, नारायणपुर पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार, डीआरजी और छत्तीसगढ़ पुलिस की टीमों को इस अभियान में उनके सक्रिय सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। इस अवसर पर 53वीं वाहिनी के सेनानी अमित भाटी और 45वीं वाहिनी के सेनानी राजीव गुप्ता भी उपस्थित रहे। recent visitors 87