पुलिस अफसर की 21 साल की गर्लफ्रेंड, जीती थी लग्जरी लाइफ; पास में मिला नेकलेस, गुच्ची का बैग और महंगी कारें

 छतरपुर मध्यप्रदेश के छतरपुर में बहुचर्चित टीआई अरविंद सुसाइड केस में पुलिस को बड़ा इनपुट हाथ लगा है. पुलिस के मुताबिक टीआई की कथित गर्लफ्रेंड आशी अपने दोस्त सोनू परमार के साथ मिलकर उन्हें रेप केस में फंसाने की धमकी दे रहे थे. इसी धमकी के साथ ये दोनों टीआई को ब्लैकमेल कर मोटी रकम वसूल कर रहे थे. पुलिस ने आशी और सोनू परमार को बुधवार को कोर्ट में पेश किया, जहां से इन दोनों को आगे की पूछताछ के लिए पुलिस कस्टडी रिमांड पर भेजा गया है. पुलिस ने आशी राजा परमार एवं सोनू सिंह परमार के खिलाफ धारा 308 एवं 108 BNS के तहत मामला दर्ज किया है. एडिशनल एसपी विदिता डागर के मुताबिक दोनों आरोपी टीआई को रेप केस में फंसाने की धमकी देकर ब्लैकमेल कर रहे थे. इनकी धमकी की वजह से टीआई परेशान हो चुके थे और 6 मार्च की शाम को उन्होंने अपने आवास पर सुसाइड कर लिया था. उधर, आशी की मां ने इस मामले में अपनी बेटी का बचाव किया है. कहा कि उनकी बेटी को फंसाया गया है. टीआई कुजूर एक साल से उनकी बेटी आशी को मुखबिर के रूप में इस्तेमाल कर रहे थे. इसके लिए वह हर महीने उनकी बेटी को 30 से 50 हजार रुपए भी दिया करते थे. आशी की मां का जवाब: मेरी बेटी को फंसाया गया इस मामले में आशी की मां सविता परमार ने अपनी बेटी को निर्दोष बताया है. सविता ने कहा, "मेरी बेटी को झूठा फंसाया जा रहा है. टीआई अरविंद कुजूर पिछले एक साल से आशी को अपनी गोपनीय टीम में मुखबिर के रूप में इस्तेमाल कर रहे थे. उन्हें हर महीने 30 से 50 हजार रुपये दिए जाते थे. मां ने स्वीकार किया कि टीआई कुजूर ने आशी के जन्मदिन और अन्य मौकों पर सोने का हार, अंगूठियां और कार के लिए पैसे भी दिए थे. मेरी बेटी ने कोई ब्लैकमेलिंग नहीं की." सविता ने यह भी दावा किया कि उनकी बेटी को इस मामले में बलि का बकरा बनाया जा रहा है. क्या है पूरा मामला? 6 मार्च की शाम छतरपुर के पेप्टेक टाउन इलाके में अपने निजी बंगले पर टीआई अरविंद कुजूर ने सर्विस रिवॉल्वर से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी. पुलिस की प्रारंभिक जांच में ब्लैकमेलिंग को आत्महत्या का कारण माना गया. इस मामले में आशी और उसके दोस्त सोनू पर संदेह के बाद पुलिस ने दोनों को हिरासत में लिया. जांच में यह भी सामने आया कि आशी और सोनू ने मिलकर कुजूर को रेप केस में फंसाने की धमकी दी थी, जिसके चलते वे मानसिक तनाव में थे. आगे की कार्रवाई पुलिस ने दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया, जहां से रिमांड की मांग की गई है. एडिशनल एसपी विदिता डागर ने कहा कि इस मामले में सभी तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और जल्द ही पूरी सच्चाई सामने आएगी. उधर, इस घटना ने छतरपुर में हड़कंप मचा दिया है और लोग इस चर्चित मामले में निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं. बहरहाल, यह कांड मध्य प्रदेश में पुलिस महकमे के लिए भी एक बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है कि आखिर एक तेज-तर्रार पुलिस इंस्पेक्टर कैसे इस हद तक मानसिक दबाव में आ गया कि उसने अपनी जान ले ली. जांच के नतीजे इस रहस्य से पर्दा उठाने में अहम होंगे. सोनू परमार के प्यार में थी आशी यहां तक कि बेटी के जन्मदिन एवं अन्य अवसर पर टीआई ने सोने का नेकलेस, अंगूठियां आदि भी गिफ्ट की थीं. बता दें कि छह मार्च को जब टीआई ने सुसाइड किया तो पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था. मामले की जांच हुई तो पता चला कि 48 वर्षीय टीआई की एक 21 साल की गर्लफ्रेंड भी है. पुलिस ने इस गर्लफ्रेंड की डिटेल खंगाली तो पता चला कि वह सोनू परमार नामक युवक के प्यार में थी और टीआई अरविंद कुजूर के भी संपर्क में थी. घटना के बाद आशी और उसका प्रेमी सोनू फरार हो गए थे, हालांकि पुलिस ने मंगलवार को इन्हें अरेस्ट कर लिया. जरूरी पूछताछ के बाद इन्हें बुधवार को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से कोर्ट ने इन्हें आगे की पूछताछ के लिए पुलिस को सौंप दिया है. सामने आई ये कहानी पुलिस अधिकारियों के मुताबिक टीआई अरविंद कुजूर अपनी गर्लफ्रेंड आशी राजा से शादी करना चाहते थे, जबकि आशी राजा सोनू परमार को पसंद करती थी. वह टीआई के दायरे से बाहर निकलना चाहती थी, जब यह संभव नहीं हो पाया तो वह अपने प्रेमी सोनू के साथ मिलकर टीआई को ब्लैकमेल करने लगी थी. पुलिस के मुताबिक अरविंद कुजूर ने आशी को पुलिस लाइन के पास ही एक किराए का घर भी दिलाया था और इसका किराया खुद देते थे. इस मामले में पुलिस ने 15 से अधिक लोगों से पूछताछ कर चुकी है.   recent visitors 40

छतरपुर: अंबेडकर की मूर्ति चोरी: तीन दिन पहले ही हुई थी स्थापना; ग्रामीण बोले- गांव के दबंग जमीन कब्जाना चाहते हैं

Chhatarpur: Ambedkar’s statue stolen: It was installed just three days ago; Villagers said that the village bullies want to occupy the land छतरपुर । बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की मूर्ति की चोरी हो गई। घटना गढ़ीमलहरा के बारी गांव में बुधवार रात की है। आज सुबह मूर्ति नहीं दिखने पर ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी। इसके बाद भीम आर्मी के कार्यकर्ता धरने पर बैठ गए। एएसपी विदिता डांगर ने बताया कि ग्रामीणों ने कुछ संदिग्धों के नाम बताए हैं। पुलिस इस दिशा में जांच कर रही है। जांच के बाद मुकदमा दर्ज किया जाएगा। रहवासी जयप्रकाश ने बताया, कुछ लोग पहले से ही मूर्ति स्थापना का विरोध कर रहे थे। ओमप्रकाश अहिरवार ने खुलासा किया कि कुछ लोग जमीन पर अतिक्रमण करना चाहते थे। इस मामले में पहले कलेक्टर की जनसुनवाई में शिकायत भी की गई थी मूर्ति चोरी होने पर अहिरवार समाज के लोग आक्रोशित हैं। उन्होंने पुलिस से कार्रवाई की मांग की है। जमीन का कुछ हिस्सा अंबेडकर के नाम जमीन से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, विवादित भूखंड का कुल रकबा 3.237 हेक्टेयर है, जिसमें से 0.650 हेक्टेयर जमीन डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम दर्ज है। वर्तमान में गांव के कुछ दबंग लोग इस जमीन पर कब्जा करना चाहते थे, जिसका ग्रामीण विरोध कर रहे थे। 10 मार्च को अहिरवार समाज ने गांव के स्कूल के पास हर्रई रोड पर डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की मूर्ति स्थापित कर दी। स्थापना के दौरान ढोल-नगाड़ों के साथ बड़ी संख्या में आसपास और जिले के लोग मौजूद थे। recent visitors 118

केंद्रीय बजट 2024-25 में शुरू की गई प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना का दूसरा चरण शुरू, 31 मार्च तक कर सकते हैं अप्लाई

इंदौर केंद्रीय बजट 2024-25 में शुरू की गई प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (पीएमआईएस) के अंतर्गत 21 से 24 वर्ष की आयु के एक करोड़ युवाओं को इंटर्नशिप प्रदान की जानी है। यह योजना 12 महीने की अवधि के लिए विभिन्न उद्योगों में वास्तविक जीवन के कारोबारी माहौल से रूबरू कराएगी। इस योजना को कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय और भारतीय कॉर्पोरेट कानून सेवा (आईसीएलएस) कैडर के अधिकारियों ने कार्यान्वित किया है। अधिकारियों के मुताबिक योजना का उद्देश्य भारत को ‘विश्व की कौशल राजधानी’ बनाना है।   आवेदनों की प्रक्रिया शुरू हुई योजना के पायलट चरण को लेकर आवेदनों की प्रक्रिया शुरू हो गई है। दूसरे चरण में भारत के 730 से अधिक जिलों में शीर्ष कंपनियों में एक लाख से भी अधिक इंटर्नशिप के अवसर युवाओं को प्रदान किए जाएंगे। आवेदन करने की अंतिम तिथि 31 मार्च 2025 तक बढ़ा दी गई है। तीन इंटर्नशिप के लिए आवेदन आवेदक अधिकतम तीन इंटर्नशिप के लिए आवेदन कर सकता है। कोई भी उम्मीदवार भारत में कहीं भी किसी भी इंटर्नशिप के लिए आवेदन करने के लिए स्वतंत्र है। क्षेत्रीय कार्यालय अहमदाबाद में आने वाले चार राज्यों में शीर्ष कंपनियों ने 25 हजार 338 इंटर्नशिप अवसर प्रदान किए हैं। 5220 इंटर्नशिप के अवसर अकेले मध्य प्रदेश में ही कुल पांच हजार 220 इंटर्नशिप अवसर हैं, जो देश की शीर्ष कंपनियों द्वारा अलग-अलग जिलों में पेश किए जा रहे हैं। पावर ग्रिड कार्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, नार्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड, एचडीएफसी बैंक लिमिटेड, जुबिलेंट फुडवर्क्स लिमिटेड और एनएचडीसी लिमिटेड जैसी अग्रणी कंपनियां इस दौर में मध्य प्रदेश में इंटर्नशिप के प्रस्ताव रख रही हैं। recent visitors 23

विश्व धरोहर सूची में शामिल होने से बस्तर को मिलेगी अंतर्राष्ट्रीय पहचान- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर छत्तीसगढ़ के  कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान (KVNP) को यूनेस्को की विश्व धरोहर की अस्थायी सूची में प्राकृतिक श्रेणी के अंतर्गत शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि ये छत्तीसगढ़ के लिये बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि ये हर्ष का विषय है कि यूनेस्को द्वारा कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान को विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया गया है । कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान न केवल जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, बल्कि यह स्थानीय जनजातीय संस्कृति और इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा देता है। इस सूची में शामिल होने से बस्तर क्षेत्र को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी एवं पर्यटन को और भी बढ़ावा मिलेगा । यह उपलब्धि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है । उल्लखेनीय है कि यह उद्यान तीन महत्वपूर्ण मापदंडों—प्राकृतिक सौंदर्य, भूवैज्ञानिक विशेषताएँ, और जैव विविधता पर खरा उतरता है।  कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान प्रबंधन द्वारा उद्यान को  यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार को प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था,  जिसे यूनेस्को द्वारा अपने अस्थाई सूची में चयन किया गया है। कांगेर घाटी में प्राकृतिक सौंदर्य और अनूठी संरचनाएँ कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान अपने मनमोहक प्राकृतिक दृश्यों, हरी-भरी घाटियों, गहरी खाइयों और झरनों के लिए प्रसिद्ध है। तीरथगढ़ जलप्रपात, जो कांगेर नदी से निकलता है, 150 फीट की ऊंचाई से गिरता हुआ एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है। कांगेर नदी अपने स्वच्छ जल और अनूठी चट्टानी संरचनाओं के कारण महत्वपूर्ण पर्यटन  स्थल है। इसके अलावा, कोटमसर, कैलाश, दंडक और ऐसी १५ से अधिक गुफाएँ अपने अद्वितीय प्राकृतिक स्वरूप और ऐतिहासिक महत्व के कारण देश और विदेश के पर्यटकों और वैज्ञानिकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। भूवैज्ञानिक विशेषताएँ और जैव विविधता यह उद्यान अपनी भूवैज्ञानिक विविधता के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ की कार्स्ट संरचनाएँ, चूना पत्थर की गुफाएँ, जल संरचनाएँ और चट्टानी परतें वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए अध्ययन का एक महत्वपूर्ण केंद्र हैं। इस क्षेत्र में भूवैज्ञानिक परिवर्तन देखे जाते हैं।  चूना पत्थर की गुफाएँ पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है |  जैवविविधता से भरपूर यह उद्यान में विभिन्न वनस्पति, वन्यजीव और विशेष प्रजाति के प्रजातीय पाए जाते है| 963 प्रकार की वनस्पतियाँ, जिनमें 120 फ़ैमिली  और 574 प्रजातियाँ शामिल हैं। यहाँ दुर्लभ ऑर्किड की 30 प्रजातियाँ दर्ज की गई हैं। 49 स्तनपायी, 210 पक्षी, 37 सरीसृप, 16 उभयचर, 57 मछलियाँ और 141 तितली प्रजातियाँ है । बस्तर हिल मैना (छत्तीसगढ़ का राज्य पक्षी), ट्रैवणकोर वुल्फ स्नेक, ग्रीन पिट वाइपर, मोंटेन ट्रिंकेट स्नेक जैसी दुर्लभ प्रजातियाँ है । बस्तर क्षेत्र में पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति को संरक्षित करता है। यहाँ गोंड और धुरवा जनजातियाँ रहती हैं, जो अपनी पारंपरिक रीति-रिवाजों, नृत्य, लोकगीतों और त्योहारों के लिए प्रसिद्ध हैं। इस क्षेत्र में स्थानीय आदिवासियों द्वारा हस्तशिल्प कला जैसे  बांस शिल्प कलाकृतियाँ विशेष रूप से लोकप्रिय हैं।  यहाँ के आदिवासी समुदाय प्रकृति से गहराई से जुड़े हुए हैं और जंगलों से जुड़ी अनेक कहानियाँ और मान्यताएँ पीढ़ियों से चली आ रही हैं। इको-टूरिज्म और साहसिक पर्यटन गतिविधियों में  जंगल सफारी, बर्ड वॉचिंग, ट्रेकिंग ,कयाकिंग बम्बू राफ्टिंग , कैम्पिंग , होमस्टे , गुफा भ्रमण और फोटोग्राफी के  बेहतरीन अवसर मिलते हैं, जिससे यह रोमांचक पर्यटन स्थल बनता है। यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक गुफाएँ, वन्यजीव, और सांस्कृतिक विरासत इसे छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल करते हैं। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान  के विशेषता को देखते हुए इसे यूनेस्को ने अस्थायी सूची में शामिल किया गया है । उद्यान को यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल किया जाने से बस्तर क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। recent visitors 39

ओडिशा सरकार की सहमति के बाद स्ट्रक्चर में रेत की बोरियां डालकर पानी का प्रवाह सुनिश्चित किया गया

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर जोरा नाला कंट्रोल स्ट्रक्चर में जल प्रवाह को नियंत्रित कर इंद्रावती नदी की मुख्य धारा में पानी छोड़ा गया है। ओडिशा सरकार की सहमति के बाद स्ट्रक्चर में रेत की बोरियां डालकर पानी का प्रवाह सुनिश्चित किया गया, जिससे इंद्रावती नदी में जल स्तर में वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री साय के निर्देश पर जल संसाधन मंत्री केदार कश्यप ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल से इंद्रावती नदी के जल संकट के समाधान हेतु चर्चा की। इस पर केंद्रीय मंत्री ने छत्तीसगढ़ एवं ओडिशा के मुख्यमंत्रियों को समस्या के निराकरण हेतु आवश्यक निर्देश दिए। जिसके परिणामस्वरूप उड़ीसा राज्य की सहमति से जोरा नाला कंट्रोल स्ट्रक्चर को अस्थायी रूप से एक फीट ऊंचा किया गया, जिससे इंद्रावती नदी के जल प्रवाह में सुधार हुआ। इसके अतिरिक्त, इंद्रावती नदी के अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम में जमा रेत को हटाने का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है, जिसे अप्रैल के पहले सप्ताह तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस संबंध में कलेक्टर हरिस एस के मार्गदर्शन में अपर कलेक्टर सी.पी. बघेल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महेश्वर नाग और जल संसाधन विभाग के ईई वेद पांडेय ने स्थानीय किसानों को जिला कार्यालय के प्रेरणा सभा कक्ष में पूरी जानकारी दी। इंद्रावती नदी और जोरा नाला की समस्या इंद्रावती नदी का उद्गम ओडिशा राज्य के कालाहांडी जिले के रामपुर धुमाल गांव से हुआ है। यह नदी 534 किलोमीटर की यात्रा के बाद गोदावरी नदी में मिलती है। नदी का कैचमेंट एरिया 41,665 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें ओडिशा में 7,435 वर्ग किमी, छत्तीसगढ़ में 33,735 वर्ग किमी और महाराष्ट्र में 495 वर्ग किमी शामिल हैं। ओडिशा राज्य की सीमा पर ग्राम सूतपदर में इंद्रावती नदी दो भागों में बंट जाती है। एक भाग इंद्रावती नदी के रूप में 5 किमी बहकर ग्राम भेजापदर के पास छत्तीसगढ़ में प्रवेश करता है, जबकि दूसरा भाग जोरा नाला के रूप में 12 किमी बहते हुए शबरी (कोलाब) नदी में मिल जाता है। पहले जोरा नाला का पानी इंद्रावती में आता था, लेकिन धीरे-धीरे इसका बहाव बढ़ने से इंद्रावती का जल प्रवाह कम हो गया। समस्या गंभीर होने पर दिसंबर 2003 में ओडिशा और छत्तीसगढ़ के प्रमुख अभियंताओं की बैठक में जोरा नाला के मुहाने पर जल विभाजन के लिए कंट्रोल स्ट्रक्चर बनाने का निर्णय लिया गया। यह स्ट्रक्चर ओडिशा सरकार द्वारा बनाया गया, जिसकी डिज़ाइन केंद्रीय जल आयोग (CWC) ने तैयार की। निर्माण के बाद भी जोरा नाला में अधिक पानी जाने से छत्तीसगढ़ को ग्रीष्म ऋतु में औसतन 40.71% और ओडिशा को 59.29% जल प्रवाह मिला। राज्य सरकार की पहल से समाधान की दिशा में प्रगति इंद्रावती नदी में न्यूनतम जल प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने कई प्रयास किए। 6 जनवरी 2021 को ओडिशा और छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने संयुक्त निरीक्षण किया। इस निरीक्षण में कंट्रोल स्ट्रक्चर के अपस्ट्रीम में जलभराव रोकने के लिए रेत और बोल्डर हटाने तथा जोरा नाला के घुमाव को सीधा करने का अनुरोध किया गया। वर्ष 2018 के बाद इंद्रावती नदी में सतत जल प्रवाह कम होने की समस्या बनी हुई थी। अब राज्य सरकार के प्रयासों से ओडिशा सरकार का सहयोग प्राप्त हुआ है, जिससे नदी के जल प्रवाह को संतुलित करने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इससे इंद्रावती नदी में जल प्रवाह बढ़ेगा और किसानों को सिंचाई के लिए पानी की बेहतर उपलब्धता सुनिश्चित होगी। recent visitors 33

छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) (संशोधन) विधेयक-2025 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया

मंत्रिपरिषद के निर्णय : दिनांक – 12 मार्च 2025 मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित कैबिनेट की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए –     मंत्रिपरिषद ने राज्य में नक्सल समस्या के समाधान के लिए ठोस पहल करते हुए छत्तीसगढ़ नक्सलवाद उन्मूलन नीति-2023 के स्थान पर छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत एवं पुनर्वास नीति-2025 को मंजूरी प्रदान की है। इस नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को आर्थिक सहायता, पुनर्वास, शिक्षा, रोजगार और सुरक्षा जैसी सुविधाएं दी जाएंगी।     छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल विधेयक-2025 विधानसभा के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।     छत्तीसगढ़ सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक-2025 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।     छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) (संशोधन) विधेयक-2025 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।     मुख्यमंत्री ने 27 फरवरी को फिल्म ‘‘छावा‘‘ को राज्य में टैक्स फ्री करने की घोषणा की थी। मंत्रिपरिषद द्वारा मुख्यमंत्री जी की घोषणा के अनुपालन में फिल्म छावा के प्रदर्शन पर प्रवेश हेतु देय राज्य माल और सेवा कर (एसजीएसटी) के समतुल्य धनराशि की प्रतिपूर्ति किए जाने का अनुमोदन किया गया।     मंत्रिपरिषद द्वारा राज्य में जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और वैज्ञानिक योजना तैयार करने के लिए राज्य जल सूचना केन्द्र (SWIC) का गठन करने का निर्णय लिया गया। इसके लिए भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय से समझौता ज्ञापन (एमओयू) करने की सहमति प्रदान की गई। रायपुर          स्टेट वाटर इंफॉर्मेशन सेंटर वर्षा, नदी और जलाशयों के स्तर, भूजल गुणवत्ता, गाद, नहरों में जल प्रवाह, फसल कवरेज, जलभृत मानचित्रण, भूमि और मिट्टी के डेटा सहित जल संसाधन संबंधी विभिन्न सूचनाओं का संग्रह, विश्लेषण और भंडारण करेगा।     SWIC, NWIC  द्वारा विकसित डिजिटल प्लेटफार्म की सहायता से जल संसाधन प्रबंधन के लिए प्रमाणिक डेटा उपलब्ध कराएगा। इससे नीति निर्माण, रणनीतिक निर्णय, मॉडलिंग, विश्लेषणात्मक उपकरणों के विकास और जल प्रबंधन को मजबूती मिलेगी।     मंत्रिपरिषद द्वारा राज्य के जल संसाधन विभाग के 09 बॉधों के सुधार कार्यों के लिए 522.22 करोड़ रूपए भारत सरकार के माध्यम से ऋण स्वीकृति प्राप्त करने का निर्णय लिया गया। इनमें मनियारी टैंक, घोंघा टैंक, दुधावा, किंकारी, सोंढूर, मूरूमसिल्ली (भाग-2), रविशंकर सागर परियोजना (भाग-2), न्यूज रूद्री बैराज और पेण्ड्रावन टैंक शामिल हैं।     मंत्रिपरिषद द्वारा राज्य में सुशासन और नीति क्रियान्वयन को मजबूत करने में युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप योजना शुरू करने का निर्णय लिया गया है।     यह योजना आईआईएम रायपुर और ट्रांसफार्मिंग रूरल इंडिया फाउण्डेशन नई दिल्ली के सहयोग से सुशासन एवं अभिसरण विभाग द्वारा संचालित की जाएगी। यह योजना छत्तीसगढ़ के मूल निवासी युवाओं के लिए होगी। इस कार्यक्रम को सुफलतापूर्वक पूर्ण करने वाले फेलो को आईआईएम रायपुर द्वारा एमबीए के डिग्री प्रदान की जाएगी। प्रारंभिक तौर पर चयनित फेलो को दो वर्ष की कुछ अवधि में आईआईएम रायपुर में शैक्षणिक सत्र में शामिल होना होगा तथा शेष अवधि में जिला/विभाग में राज्य की योजनाओं एवं कार्यक्रम हेतु कार्य करके जिला/विभाग को सहयोग प्रदान करना होगा। इस कार्यक्रम में होने वाले खर्च का वहन राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा साथ ही फेलो को प्रति माह स्टाईपेंड भी प्रदान किया जाएगा।     मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ में भारत माला परियोजना के क्रियान्वयन में भ्रष्टाचार की प्राप्त शिकायत को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच ईओडब्ल्यू के माध्यम से जांच कराने का निर्णय लिया है। recent visitors 41

मतांतरण की आशंका के कारण विदिशा में 18 यात्रियों को ट्रेन से उतारा, पातालकोट एक्सप्रेस से जा रहे थे पंजाब

विदिशा राजकीय रेलवे पुलिस ने पातालकोट एक्सप्रेस से पंजाब जा रहे 18 यात्रियों को जबरन उतार लिया। इन यात्रियों की अगुवाई 40 वर्षीय सहजनाथ कर रहा था। यह कार्रवाई मतांतरण के संदेह में की गई है। इस बारे में बजरंग दल ने पुलिस से शिकायत की थी। बताया जा रहा है कि मंगलवार को छिंदवाड़ा से पंजाब जा रही पातालकोट एक्सप्रेस से छिंदवाड़ा के ही 18 लोग फिरोजपुर जा रहे थे। उन्हें वहां चर्च की प्रार्थना सभा में शामिल होना था। बजरंग दल के पदाधिकारियों ने यात्रियों की अगुवाई कर रहे सहजनाथ की तस्वीर के साथ मतांतरण की शिकायत की थी। सूचना मिलते ही एसडीएम पहुंचे इस पर कार्रवाई करते हुए जीआरपी ने गंजबसौदा में एस-3 और एस-4 कोच से सहजनाथ सहित 11 यात्रियों को उतार लिया। शेष सात लोगों को बीना स्टेशन पर उतारा गया। घटना की जानकारी मिलते ही एसडीएम विजय राय और एसडीओपी मनोज मिश्रा मौके पर पहुंचे। बजरंग दल की सूचना पर रोका गया जीआरपी एसआई बलवंत सिंह ने बताया कि बजरंग दल से जुड़े लालसिंह खटीक की सूचना पर इन यात्रियों को रोका गया। इनके सामान की तलाशी में ईसाई धर्म से जुड़ा साहित्य मिला है। उतारे गए लोगों ने बताया कि वे चर्च घूमने जा रहे थे और पूर्व में भी कई बार वहां गए हैं। सहजनाथ ने बताया कि वह इन 18 लोगों को चर्च की प्रार्थना सभा में शामिल होने के लिए ले जा रहा था। recent visitors 31