ग्वालियर किला निजी हाथों में सौंपने शहरवासियों ने किया विरोध, बोले- दिल्ली तक जाएंगे

gwalior city residents protested against handing over gwalior fort to private hands Gwalior Fort Update: ग्वालियर के ऐतिहासिक किले को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी से शहरवासी आक्रोश में आ गए हैं। लोगों का कहना है कि ग्वालियर किला (Gwalior Fort) हमारी विरासत है, इससे छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे। शहरवासियों का कहना है कि ग्वालियर किले पर बने ऐतिहासिक स्मारक हमारी पहचान हैं और किले के निजीकरण के बाद यहां मनमाने ढंग से वसूली प्रारंभ हो जाएगी। इसके विरोध में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा शुक्रवार को कलेक्टर और राज्य पुरातत्व विभाग को ज्ञापन देकर चेताएगी। बता दें, भोपाल में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में पर्यटन-संस्कृति विभाग ने इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड (इंडिगो एयरलाइंस) के साथ ग्वालियर किले के लिए एमओयू किया है। वहीं इंडिगो ग्रुप के 100 लोगों की टीम शुक्रवार 7 मार्च की शाम 4 बजे ग्वालियर फोर्ट पहुंच रही है। टिकट काफी महंगे हो जाएंगेग्वालियर किले पर जो स्मारक पूर्ण रूप से संरक्षित हैं और उनसे आमदनी भी हो रही है, ऐसे स्मारकों को निजी हाथ में देना ठीक नहीं रहेगा। क्योंकि उनके टिकट काफी बढ़ जाएंगे। ऐसे में आम आदमी स्मारकों को देखने से वंचित रह जाएगा और पुरातत्व महत्व भी समाप्त हो जाएगा।–लाल बहादुर सिंह, पूर्व क्यूरेटर (संग्रहाध्यक्ष) गूजरी महल संग्रहालयराष्ट्रपति भवन तक जाएंगे हम इस मुद्दे पर पूरी लड़ाई लड़ेंगे, किसी भी हालत में किले का निजीकरण नहीं होने देंगे। चाहे इसके लिए दिल्ली में राष्ट्रपति भवन तक क्यों ना जाना पड़े। हम हर स्तर पर इसका पुरजोर विरोध करेंगे। साथ ही दूसरे समाजों को भी इससे जोड़ेंगे। इससे पूर्व भी हमने यहां निजी होटल के निर्माण को नहीं होने दिया था।-पूरन सिंह राणा, एडवोकेट, सचिव, जाट समाज कल्याण परिषद ग्वालियरनिजीकरण बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेंगे ग्वालियर का किला न सिर्फ शहर बल्कि प्रदेश-देश के लिए भी पुरातत्व धरोहर है। इसका निजीकरण किया जाना बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं होगा। पता नहीं इस ऐतिहासिक विरासत को पूंजीपतियों के हवाले क्यों किया जा रहा है। जो लोग इस काम को करवा रहे हैं, उन्हें गरिमा का बिल्कुल भी ज्ञान नहीं है। हम शुक्रवार को इसके लिए ज्ञापन भी देंगे।-सुनील शर्मा, कांग्रेस प्रदेश महासचिवकम हो जाएगी पर्यटकों की संख्या ग्वालियर किला हमारे ग्वालियर नहीं अपितु पूरे देश में प्रसिद्ध है, यहां हर कोई आना पसंद करता है। निजी हाथों में जाने के बाद यहां जाने के लिए अतिरिक्त पैसा देना पड़ेगा। वहीं राज्य पुरातत्व विभाग और केंद्रीय पुरातत्व विभाग इस किले का संरक्षण और देखभाल कर तो रहे हैं। निजीकरण से निश्चित तौर पर पर्यटकों की संख्या कम ही होगी।–ज्योति अग्रवाल, संस्थापक अध्यक्ष, अग्रकुल महिला समितिनिजीकरण बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए ग्वालियर किला हमारी ऐतिहासिक धरोहर है, इसका निजीकरण बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए। इसे संरक्षित रखना सरकार की जिम्मेदारी है, न कि निजी कंपनियों को सौंपना। इससे आम जनता की पहुंच और सांस्कृतिक महत्व प्रभावित हो सकता है। किले का संरक्षण सरकार खुद करे, ताकि इसकी ऐतिहासिक पहचान बनी रहे।-श्वेता बिंदल, चेयरपर्सन, जेसीआई ग्वालियरनिर्णय वापस लिया जाए ग्वालियर किला हमारे शहर की शान है। जो भी ऐतिहासिक धरोहर होती हैं उनकी देखभाल व संरक्षण करना सरकार का नैतिक कर्तव्य है। निजीकरण करना कोई विकल्प नहीं है, इसलिए अनुरोध है कि निजी कंपनी को किले को देने का निर्णय वापस लिया जाए। किले का जो पुराना इतिहास है उसको यथावत रखा जाए, क्योंकि यही हमारी पहचान भी है।-जुबैर रहमान, संस्थापक अध्यक्ष, लॉयंस क्लब दिशा recent visitors 134

धार जिले में माइनिंग इंस्पेक्टर संदेश पिपलोदिया को कलेक्टर ने हटा दिया

 धार    मध्य प्रदेश के धार जिले में माइनिंग इंस्पेक्टर संदेश पिपलोदिया को कलेक्टर ने हटा दिया है. माइनिंग इंस्पेक्टर के खिलाफ केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर ने अधिकारियों के बीच बैठक में रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था. धार के कलेक्ट्रेट में एक बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें खनिज विभाग के निरीक्षक संदेश पिपलोदिया पर राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था. उन्होंने यह तक कह दिया था कि माइनिंग इंस्पेक्टर लोगों से बोलते हैं कि 'यदि नेतागिरी के जरिए आओगे, तो ज्यादा पैसे लगेंगे और सीधे मिलोगे तो कम राशि में काम हो जाएगा.' केंद्रीय राज्य मंत्री के बयान के बाद धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने खनिज निरीक्षक पिलोदिया को हटा दिया है. पिलोदिया धरमपुरी क्षेत्र में कार्य कर रहे थे, उन्हें जिला कार्यालय में अटैच कर दिया गया है. इसके अलावा कार्य में लापरवाही को लेकर कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है. इस मामले में प्रशासनिक टीम अलग से जांच कर रही है. अवैध उत्खनन पर कार्रवाई के बाद लगे आरोप कलेक्टर प्रियंक मिश्रा के मुताबिक, माइनिंग इंस्पेक्टर के खिलाफ लोगों की ओर से कार्य में लापरवाही की शिकायत मिली थी, जिसके बाद उन्हें हटा दिया गया है. दूसरी तरफ सूत्रों का कहना है कि धामनोद क्षेत्र में जेसीबी पकड़ने के बाद विवाद शुरू हुआ था. अवैध उत्खनन के मामले में माइनिंग इंस्पेक्टर पिपलोदिया ने जेसीबी पकड़ी थी. इसके बाद उन पर रिश्वत का आरोप लग गया. बताया जा रहा है कि जेसीबी बीजेपी नेता की थी. recent visitors 74

बोर्ड परीक्षाओं में आधे विषयों के पर्चे हो चुके हैं, लेकिन अभी तक महज सात नकल प्रकरण ही बने

 ग्वालियर  बोर्ड परीक्षा हो और ग्वालियर चंबल में नकल न हो, ऐसा हो नहीं सकता। पिछले कई सालों से ग्वालियर चंबल क्षेत्र परीक्षाओं में नकल के लिए काफी बदनाम रहा है। इस बार बोर्ड परीक्षाओं में 10वीं व 12वीं में आधे विषयों के पर्चे हो चुके हैं, लेकिन अभी तक महज सात नकल प्रकरण ही बने हैं और एक फर्जी परीक्षार्थी पकड़ा गया है। पिछले सालों में यह संख्या दो से तीन गुना अधिक हुआ करती थी। संभवत: नकल रोकने के लिए माध्यमिक शिक्षा मंडल ने ऐसा मैकेनिज्म बनाया और जिला प्रशासन सहित शिक्षा विभाग ने उसे फालो किया, जिसकी वजह से इस बार अंचल में नकल पर नकेल लगी हुई है। अभी तक न तो सामूहिक नकल के प्रकरण सामने आए हैं और न ही प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं ही सामने आई हैं। नकल रोकने के लिए यह अपनाया तरीका फर्जी परीक्षार्थी रोकने क्यूआर कोड ग्वालियर चंबल के भिंड, मुरैना में हर साल फर्जी परीक्षार्थी पकड़े जाते थे। लेकिन इस बार दतिया में एक प्रकरण को छोड़कर कोई मामला सामने नहीं आया है। इसके पीछे प्रवेशपत्र में क्यूआर कोड होना बताया जा रहा है। इस वजह से नकल माफिया परीक्षाओं में साल्वर नहीं बैठा पाया। पेपर लीक मामला हर बार परीक्षा से पहले रात व सुबह प्रश्नपत्र लीक होकर इंटरनेट मीडिया पर आ जाता था और छात्र उसे खरीदते थे। इस बार बोर्ड ने थाने से लेकर केंद्र में पेपर पहुंचने तक व छात्रों तक बंटने तक को एप से ट्रैक किया। ऐसे में पेपर लीक होने की अफवाह तक सामने नहीं आई। संवेदनशील परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों से नजर ग्वालियर चंबल अंचल के जितने भी परीक्षा केंद्र संवदेनशील व अति संवेदनशील थे, उन पर सीसीटीवी कैमरे से नजर रखी जा रही है। ऐसे में छात्र भी नकल नहीं ले जा पाए और माफिया भी मनमानी नहीं कर पाए। कलेक्टर प्रतिनिधि की नियुक्ति हर परीक्षा केंद्र पर एक कलेक्टर प्रतिनिधि नियुक्त किया गया। यह प्रतिनिधि थाने से प्रश्नपत्र लेकर लाने से लेकर परीक्षा समय तक केंद्र पर रहता है और व्यवस्थाओं को देखता है। इससे भी परीक्षा केंद्रों से सामूहिक नकल जैसी स्थिति सामने नहीं आई। टीमों का नियमित निरीक्षण शिक्षा विभाग सहित जिला प्रशासन की टीमें लगातार परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण कर रही हैं। ऐसे में परीक्षार्थियों सहित पर्यवेक्षकों में डर बना रहा। नहीं चली संगठित नकल माफिया की अंचल की बोर्ड परीक्षाओं में नकल संगठित माफिया कराता था। यह न केवल फर्जी परीक्षार्थी परीक्षा में बैठाता था, बल्कि केंद्रों पर सामूहिक नकल भी कराता था। लेकिन इस बार बोर्ड व प्रशासन ने अपने परीक्षा मैकेनिज्म को बदल दिया और नई तरीके सामने लाए। ऐसे में माफिया इस बार अपनी कारगुजारी में सफल नहीं हो पाया। कहां पर कितने बने प्रकरण     ग्वालियर में 1     भिंड में 1     शिवपुरी में 1     मुरैना में 4 प्रवेश पत्र में क्यूआर कोड भी     बोर्ड परीक्षाओं के लिए इस बार माध्यमिक शिक्षा मंडल ने ऐसे प्रावधान व नियम किए हैं, जिनकी वजह से परीक्षा के हर कदम पर उसकी नजर है। चाहे प्रश्नपत्र को थाने से केंद्र तक ले जाने की ट्रैकिंग हो या परीक्षा केंद्र पर नजर रखने वाली बात, सभी जगहों पर बोर्ड की नजर है। साथ ही फर्जी परीक्षार्थी की पहचान के लिए प्रवेश पत्र में क्यूआर कोड भी दिया गया। साथ ही जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग की टीमें भी सतत निगरानी कर रही हैं। इसलिए इस बार नकल पर अंकुश लगा हुआ है। – दीपक पांडेय, संयुक्त संचालक शिक्षा, ग्वालियर   recent visitors 54

प्रदेश के 21 लाख श्रमिकों का वेतन बढ़ा, इंदौर में दैनिक वेतन भोगी श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन का आदेश जारी

इंदौर मासिक और दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों और श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतनमान का आदेश श्रम आयुक्त मध्य प्रदेश इंदौर ने जारी किया है। एक अक्टूबर 2024 से 31 मार्च 2025 तक विभिन्न अनुसूचित नियोजनों में परिवर्तनशील महंगाई भत्ते सहित न्यूनतम वेतन देय होगा। इससे करीब दस लाख दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों और श्रमिकों को लाभ होगा। श्रम आयुक्त मध्य प्रदेश इंदौर रजनी सिंह ने दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों और श्रमिकों के वेतन में एक अक्टूबर 2024 से 2275 रुपये प्रतिमाह या 87.50 रुपये प्रतिदिन की वृद्धि के आदेश जारी किए। उपभोक्ता सूचकांक में दो बिंदुओं की वृद्धि हुई यह वृद्धि 31 मार्च 2025 तक जारी रहेगी। जनवरी से जून 2024 तक की अवधि में अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का औसत 402 रहा है। विगत छह माही का औसत 400 रहा था। इसके अनुसार अभा उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 400 के ऊपर दो बिंदुओं की वृद्धि हुई। इस वजह से 67 अनुसूचित नियोजनों में अकुशल, अर्द्धकुशल, कुशल और उच्च कुशल श्रमिकों के महंगाई भत्ते में 25 रुपये प्रतिबिंदु के मान से 50 रुपये प्रतिमाह की वृद्धि हुई। इसके अनुसार परिवर्तनशील महंगाई भत्ते की कुल राशि 2225 में 50 रुपये जोड़कर 2275 रुपये प्रतिमाह बढ़ोतरी होगी। recent visitors 36

मार्च में ठंड ने मारी पलटी , भोपाल, जबलपुर, इंदौर में टूटा 10 साल का रिकॉर्ड

भोपाल मध्य प्रदेश में मौसम का मिजाज इस बार काफी चौंका रहा है. दिसंबर-जनवरी में जहां ठंड ने कई रिकॉर्ड तोड़ दिए तो अब मार्च में जाते- जाते फिर रिकॉर्ड बना दिया है. जबलपुर, भोपाल और इंदौर में ठंड ने 10 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. यहां मार्च के महीने में रात का तापमान 10 सालों बाद 10 डिग्री के नीचे चला गया है. इसके साथ ही 13 जिलों में पिछले 24 घंटे में ठंड ने जबर्दस्त वापसी की है. कहां कितना रहा तापमान? बात करें मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों की तो भोपाल में बीती रात तापमान 9.8 दर्ज किया गया. वहीं जबलपुर में 9.6, उज्जैन में 9, इंदौर में 10.8 और ग्वालियर में 11.6 डिग्री सेल्सियस तक पारा गिर गया. इससे पहले जहां दिन और रात के तापमान में बढ़ोत्तरी का अनुमान लगाया जा रहा था, तो वहीं पश्चिमी विक्षोभ के असर से मध्य प्रदेश के मौसम ने फिर लोगों को चौंका दिया. मार्च में टूटा 10 साल का रिकॉर्ड मौसम विभाग के 2015 के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 10 सालों में मार्च के महीने में भोपाल, जबलपुर और इंदौर में रात का तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं गया. मार्च 2015 में भोपाल में न्यूनतम तापमान 10.5 डिग्री सेल्सियस, जबलपुर में 11.5 डिग्री सेल्सियस और इंदौर में 10.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था. मार्च में दिन गर्म और रातें रहती हैं ठंडी मौसम विभाग के आंकड़े बताते हैं कि पिछले दस सालों में मार्च में दिन काफी गर्म होते हैं और रातें कुछ हद तक ठंडी. पिछले दस सालों में मार्च के मौसम में दिन और रात के तापमान में 20 से लेकर 27 डिग्री सेल्सियस तक का अंतर देखने मिला है. वहीं कई बार हल्की बारिश भी दर्ज की जाती है. हालांकि, इस बार मार्च की ठंड ने एक दशक बाद फिर चौंकाया है. क्यों पड़ी मार्च में इतनी ठंड? मौसम विभाग के वैज्ञानिक डॉ. सुरेंद्र कुमार के मुताबिक, '' पश्चिमी हिमालय में दो वेस्टर्न डिस्टर्बेंस सक्रिय होने से अति भारी बारिश व बर्फबारी हुई है. इसके बाद पिछले तीन दिनों से उत्तरी हवाएं मध्य प्रदेश में आ रही हैं. इन्हीं बर्फीली हवाओं की वजह से मध्य प्रदेश में लंबे अरसे के बाद मार्च में कोल्ड वेव की स्थिति बनी है. जैसे-जैसे नए वेदर पैटर्न एक्टिव होंगे और हवा की रफ्तार बदलेगी, वैसे-वैसे ठंड का असर कम होगा. होली के बाद मध्य भारत में कई शहरों का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है.'' आगे कैसा रहेगा एमपी का मौसम? बात करें आने वाले दिनों की तो फिलहाल मौसम विभाग ने बारिश होने की कोई संभावना नहीं जताई है. हालांकि, 9 मार्च को नया वेस्टर्न डिस्टर्बेंस सक्रिय होने से मध्य प्रदेश के अधिकतर जिलों में 10 मार्च के बाद फिर मौसम बदलेगा. अगले 24 घंटे में तापमान में मामूली उतार-चढ़ाव देखने मिलेगा. बता दें कि पिछले 24 घंटे में शाजापुर का गिरवर सबसे ठंडा रहा. यहां तापमान 6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. वहीं बड़वानी में 7.5, सीहोर में 7.7, मंडला में 8, उमरिया में 8.2 और खजुराहो में न्यूनतम तापमान 9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. recent visitors 63

बैतूल की कोयला खदान ढहने से 3 की मौत, 3.5 किमी अंदर हुआ हादसा

बैतूल मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में एक बड़ा हादसा हुआ है। यहां वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की कोयला खदान में छत का हिस्सा ढहने से तीन कर्मचारियों की मौत हुई है। मौके पर पुलिस और रेस्क्यू टीमें पहुंच गई हैं। मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालने की कोशिश की जा रही है। बताया जा रहा है कि कोयला खदान के एक फेज की स्लैब अचानक ढह गई। बैतूल के एसपी निश्चल झारिया के मुताबिक हादसे में शिफ्ट इंचार्ज गोविंद, ओवर मेन हरि चौहान और माइनिंग सरदार रामदेव पंडौले की जान गई है। बैतूल के पाथाखेड़ा क्षेत्र में वेस्टर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड की छतरपुर-1 खदान है। यहां गुरुवार दोपहर को खदान की 10 मीटर ऊंची छत गिर गई। खदान के कंट्यूनर माइनर सेक्शन में कोयला काटते वक्त यह हादसा हुआ। चपेट में आने से तीन लोगों की जान चली गई। बचाव टीम ने घटनास्थल से तीनों कर्मचारियों के शवों को बाहर निकाला। जानकारी के मुताबिक हादसे के वक्त खदान के अंदर 25-26 लोग विभिन्न सेक्शनों में काम करने में जुटे थे। कोयला काटते समय खदान की छत गिर छतरपुर वन खदान में कंट्यूनर माइनर मशीन चल रही थी। कोयला काटते समय अचानक खदान की छत गिर गई। बताया जा रहा है कि अधिकारी और वर्कर खदान में निरीक्षण के लिए उतरे थे। जिस सेक्शन में हादसा हुआ वह जॉय माइनिंग सर्विस का है। इसमें ऑस्ट्रेलियाई मशीन लगी है। कंपनी कोलकाता की है। हादसे में इनकी हुई मौत     गोविंद कोसरिया (उम्र 37 वर्ष), पद- शिफ्ट इंचार्ज     रामप्रसाद चौहान (उम्र 46 वर्ष), पद- माइनिंग सरदार     रामदेव पंडोले (उम्र 49 वर्ष), पद- ओवरमैन गोविंद कोसरिया छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के रोहंगी गांव के रहने वाले थे। दो साल पहले 23 मई 2023 को उनका तबदला छत्तीसगढ़ से एमपी के पाथाखेड़ा स्थित डब्ल्यूसीएल खदान में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर हुआ था। वे यहां छतरपुर वन कोयला खदान में तैनात थे। 9 गोविंद ने 2019 में कोयला कंपनी जॉइन की थी। यहां उनके परिवार में पत्नी प्रियंका है। रामप्रसाद चौहान पाथाखेड़ा के हॉस्पिटल कॉलोनी में रहते थे। उन्होंने 13 दिसंबर 2004 में कोयला कंपनी जॉइन की थी। उनके परिवार में पत्नी उमा, 13 साल की बेटी पूर्वी और 10 साल का बेटा जितेंद्र है। रामदेव पंडोले एसपीए के पद पर तैनात थे। रामदेव ने 29 जुलाई 1995 को कोयला कंपनी में नौकरी शुरू की थी। वे शोभापुर कॉलोनी में रहते थे। उनके परिवार में पत्नी सरिता और दो बेटे अंकुश (24) और पियूष (22) है। कलेक्टर ने आर्थिक मदद देने के दिए निर्देश कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी और पुलिस अधीक्षक निश्चल झारिया भी घटना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने रेस्क्यू ऑपरेशन को लेकर जरूरी निर्देश दिए। विधायक डॉ. योगेश पंडाग्रे भी मौके पर पहुंचे हैं। कलेक्टर ने जीएम, डब्ल्यूसीएल को लाइफ कवर स्कीम से डेढ़ लाख की सहायता तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश अधिकारियों को दिए। साथ ही एक्सग्रेसिया, ग्रेच्युटी , कंपनसेशन और पीएफ, लाइफ इनकेशमेंट की राशि भी जल्द देने के निर्देश दिए हैं। बगैर सपोर्ट की छत के नीचे पहुंच गए भारतीय कोयला खदान मजदूर संघ के अध्यक्ष प्रमोद कुमार ने बताया कि 2 फुट मोटा और ढाई मीटर लंबा रूफ गिरा था, जिसमें दबने से 3 लोगों की मौत हो गई। उन्होंने बताया कि टीम मशीन से कोयला खुदाई के बाद तुरंत मौके पर चली गई थी। ये लोग बगैर सपोर्ट की छत के नीचे पहुंच गए थे। जहां यह हादसा हुआ। जांच के लिए नागपुर से आई टीम, कोल इंडिया की टीम भी आएगी इस मामले की जांच के लिए नागपुर से टीम पहुंच गई है। शु्क्रवार सुबह तक कोल इंडिया की जांच टीम भी यहां पहुंच जाएगी। सूत्रों के मुताबिक इस हादसे की जांच के लिए कोल इंडिया की एडी टीम यहां पहुंचेगी। यह टीम एक सप्ताह में जांच रिपोर्ट सौंपेगी। बताया जा रहा है कि कोयला खदान हादसों में दो से ज्यादा मौतों को डिजास्टर एक्सीडेंट की श्रेणी में रखा जाता है। अगर इसे कोल इंडिया ने ज्यादा गंभीरता से लिया तो इसकी कोर्ट ऑफ इंक्वारी भी हो सकती है। जिसमें सुप्रीम कोर्ट के जज के नेतृत्व में जांच कमेटी घटना की जांच करती है। सेफ्टी मेंबर्स की अनुशंसा पर यह होता है। इसकी अपील हादसे के तीस दिन के भीतर की जा सकती है। बैतूल की घटना पर श्रम मंत्री प्रहलाद पटेल ने जताया दुख बैतूल की छतरपुर कोयला खदान की छत गिरने से 3 मजदूरों की मृत्यु का दुखद समाचार मिला है। हमारे प्रमुख सचिव ने कलेक्टर बैतूल और श्रम अधिकारी से बात की है। मृतक श्रमिकों के प्रति विनम्र श्रद्धांजलि और ईश्वर परिवारों को शक्ति दें। मृतकों के परिजन को कलेक्टर बैतूल ने WCL को लाइफ कवर स्कीम से 1.5 लाख रुपए के साथ ही एक्सग्रेशिया, ग्रेच्युटी, पीएफ और क्षतिपूर्ति देने हेतु तत्काल निर्देश दिए गए हैं। recent visitors 59

राजीव शुक्ला भगवान राम के पुत्र लव के मंदिर पहुंचे , इस कट्टर इस्लामिक देश में है मौजूद

इस्लामाबाद  बीसीसीआई के उपाध्यक्ष और राज्यसभा सांसद राजीव शुक्ला पाकिस्तान पहुंचे हैं। उनका यह दौरा पाकिस्तान में आयोजित चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान हुआ है। इस दौरान उन्होंने लाहौर में स्थित भगवान राम के पुत्र लव की समाधि पर भी पहुंचे। राजीव शुक्ला ने उनकी समाधि पर पूरा-अर्चना करते हुए तस्वीर भी पोस्ट की है। इसमें उन्होंने कहा कि भगवान राम के दूसरे पुत्र कुश ने कसूर शहर को बसाया था, जो पाकिस्तान का एक बड़ा शहर है। राजीव शुक्ला ने क्या कहा राजीव शुक्ला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, लाहौर के प्राचीन क़िले में प्रभु राम के पुत्र लव की प्राचीन समाधि है लाहौर नाम भी उन्ही के नाम से है। वहां प्रार्थना का अवसर मिला। साथ में पाकिस्तान के गृहमंत्री मोहसिन नकवी जो इस समाधि का जीर्णोद्धार करवा रहे हैं । मोहसिन ने मुख्यमंत्री रहते यह काम शुरू करवाया था।" 'कुश ने बसाया था कसूर शहर' उन्होंने आगे लिखा, "लाहौर के म्युनिसिपल रिकॉर्ड में दर्ज है कि यह नगर भगवान राम के पुत्र लव के नाम से बसाया गया था और कसूर शहर उनके दूसरे पुत्र कुश के नाम से। पाकिस्तान सरकार भी यह बात मानती है।" कौन हैं राजीव शुक्ला राजीव शुक्ला भारतीय राजनेता, पूर्व पत्रकार और इंडियन प्रीमियर लीग के पूर्व अध्यक्ष हैं। आईपीएल में कथित भ्रष्टाचार और स्पॉट फिक्सिंग का मामला सामने आने के बाद राजीव शुक्ला ने 1 जून 2013 को इसके अध्यक्ष के रूप में इस्तीफा दे दिया। 2015 में राजीव शुक्ला को फिर से सर्वसम्मति से बीसीसीआई द्वारा आईपीएल के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया। 18 दिसंबर 2020 को उन्हें निर्विरोध बीसीसीआई का उपाध्यक्ष चुना गया था। recent visitors 99