महाराष्ट्र के पुणे में हैवानियत!, बस में महिला से रेप, CCTV में कैद हुआ दरिंदा, पुलिस की कई टीमें तैनात

पुणे महाराष्ट्र के पुणे शहर में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। एक सीरियल अपराधी ने स्वारगेट बस डिपो में खड़ी महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (MSRTC) की बस में 26 वर्षीय महिला के साथ रेप किया। यह घटना मंगलवार सुबह करीब 5:30 बजे की बताई जा रही है, जब पीड़िता अपने गृहनगर सतारा जिले के लिए बस पकड़ने के इंतजार में थी। स्वारगेट पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने बुधवार को बताया कि आरोपी की पहचान दत्ता गाडे के रूप में हुई है, जिसके खिलाफ पहले से ही चोरी और चैन स्नेचिंग के कई मामले दर्ज हैं। ऐसे दिया वारदात को अंजाम पीड़िता के अनुसार, वह मंगलवार सुबह करीब 5:30 बजे स्वारगेट बस स्टैंड के एक प्लेटफॉर्म पर पैठण जाने वाली बस का इंतजार कर रही थी। तभी आरोपी ने उसे यह कहकर गुमराह किया कि उसकी बस दूसरे प्लेटफॉर्म पर खड़ी है। संदिग्ध ने उसे डिपो में खड़ी राज्य परिवहन निगम की शिवशाही बस में चढ़ने को कहा। महिला उसकी बातों में आ गई और उसके साथ वहां तक चली गई, जहां एक बस सुनसान जगह पर खड़ी थी। अंधेरे का फायदा उठाकर आरोपी ने महिला को बस के अंदर बैठने के लिए कहा और फिर खुद भी अंदर घुस गया। इसके बाद उसने महिला के साथ रेप किया और मौके से फरार हो गया। CCTV फुटेज से हुई पहचान, पुलिस की कई टीमें तैनात घटना के बाद पीड़िता ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की। स्वारगेट बस स्टैंड पर लगे CCTV कैमरों की मदद से आरोपी की पहचान की गई। पुणे पुलिस ने आरोपी की धरपकड़ के लिए कई टीमें गठित की हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। recent visitors 75

आतिशी मार्लेना की कुर्सी भले ही छिन गई, लेकिन उनके वेतन, भत्तों और सुविधाओं में कटौती नहीं होगी

  नई दिल्ली आम आदमी पार्टी की हार के बाद आतिशी मार्लेना की मुख्यमंत्री की कुर्सी भले ही छिन गई, लेकिन उनके वेतन, भत्तों और सुविधाओं में कटौती नहीं होगी। इसकी वजह यह है कि दिल्ली में मुख्यमंत्री और नेता विपक्ष के लिए वेतन और भत्ते एक जैसे हैं। इनके अलावा डिप्टी स्पीकर और मंत्रियों के लिए भी यही वेतन-भत्ते लागू हैं। अरविंद केजरीवाल के इस्तीफे के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री बनीं आतिशी का चुनाव बाद इस पद से हटना तय था। यदि चुनाव में आम आदमी पार्टी की भी जीत हुई होती तो भी उन्हें सीएम की कुर्सी छोड़नी थी। पार्टी ने घोषणा की थी कि यदि चुनाव में जीत मिली तो अरविंद केजरीवाल दोबारा मुख्यमंत्री बनेंगे। 'आप' की हार के बाद 'आप' को विपक्ष में बैठना पड़ा है। ऐसे में पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल और चुने हुए विधायकों ने आतिशी को नेता विपक्ष के रूप में स्वीकार किया। नेता विपक्ष की कुर्सी मिलने से यह तय हो गया कि उन्हें पहले की तरह वेतन और अन्य भत्ते मिलते रहेंगे। दिल्ली विधानसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, दिल्ली में स्पीकर, डिप्टी, स्पीकर, मुख्यमंत्री-मंत्रियों और नेता विपक्ष की सैलरी और भत्ते समान हैं। मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष के वेतन, भत्ते और अन्य सुविधाएं (14 फरवरी 2023 से लागू) मासिक वेतन– 60,000 प्रति माह निर्वाचन क्षेत्र भत्ता– 30,000 प्रति माह सचिवीय सहायता भत्ता– 25,000 प्रति माह प्रतिनिधिक भत्ता– 10,000 प्रति माह कुल वेतन और भत्ते– 25,000 प्रति माह अन्य सुविधाएं और भत्ते सरकारी वाहन, चालक और 700 लीटर तक पेट्रोल मुफ्त। यदि स्वयं का वाहन उपयोग किया जाए, तो 10,000 प्रति माह का वाहन भत्ता। दैनिक भत्ता – 1,500 प्रति दिन (पूरे कार्यकाल के दौरान)। डाटा एंट्री ऑपरेटर का वेतन प्रति माह 30,000 तक (दो ऑपरेटरों के लिए, प्रत्येक को 15,000)। एकमुश्त भत्ता– 1,00,000 का भुगतान लैपटॉप, कंप्यूटर, प्रिंटर, मोबाइल आदि की खरीद के लिए। कार के लिए अडवांस 12,00,000 तक का अग्रिम ऋण वाहन खरीदने के लिए, जिसे कार्यकाल के दौरान चुकाना होगा।ब्याज दर और वसूली का तरीका सरकार तय करेगी, जिसे राष्ट्रपति की मंजूरी की आवश्यकता होगी। आवास और बिजली और इलाज सरकारी आवास की सुविधा दी जाती है। यदि किराये पर रह रहे हैं तो अधिकतम 20 हजार रुपए मासिक दिए जाते हैं। यदि स्वयं के मकान में रहते हैं, तो उसकी दर की गणना कर उतनी ही राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री को प्रतिमाह 5000 यूनिट और मंत्रियों को 3 हजार यूनिट प्रतिमाह बिजली का खर्च। इसके अलावा सालाना एक लाख रुपए भारत में यात्रा के लिए दिए जाते हैं। recent visitors 97

आपराधिक मामलों में दोषी नेताओं पर ताउम्र चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध सही नहीं, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि आपराधिक मामलों में दोषी ठहराए गए नेताओं पर ताउम्र चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाना सही नहीं होगा। केंद्र ने कहा कि मौजूदा छह साल का प्रतिबंध ही काफी है। आपराधिक मामलों में दोषी करार दिए गए नेताओं पर आजीवन प्रतिबंध लगाने की मांग करने वाली एक जनहित याचिका का विरोध करते हुए केंद्र सरकार ने शीर्ष न्यायालय से ऐसा कहा है। इस याचिका में दोषी ठहराए गए सांसदों और विधायकों समेत अन्य नेताओं पर चुनाव लड़ने पर आजीवन प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी। शीर्ष अदालत में दाखिल हलफनामे में केंद्र ने कहा कि याचिका में जो अनुरोध किया गया है वह विधान को फिर से लिखने या संसद को एक विशेष तरीके से कानून बनाने का निर्देश देने के समान है, जो न्यायिक समीक्षा संबंधी उच्चतम न्यायालय की शक्तियों से पूरी तरह से परे है। इसके साथ ही केंद्र ने कहा कि इस तरह की अयोग्यता तय करना केवल संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है। हलफनामे में कहा गया है, ‘‘यह सवाल कि आजीवन प्रतिबंध लगाना उपयुक्त होगा या नहीं, यह पूरी तरह से संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है।’’ इसमें कहा गया है कि दंड के क्रियान्वयन को एक उपयुक्त समय तक सीमित कर, रोकथाम सुनिश्चित की गई है और अनावश्यक कठोर कार्रवाई से बचा गया है। केंद्र ने कहा कि यह कानून का स्थापित सिद्धांत है कि दंड या तो समय या मात्रा के अनुसार निर्धारित होते हैं। हलफनामे में कहा गया है, ‘‘यह दलील दी गई है कि याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए मुद्दों के व्यापक प्रभाव हैं और वे स्पष्ट रूप से संसद की विधायी नीति के अंतर्गत आते हैं तथा इस संबंध में न्यायिक समीक्षा की रूपरेखा में उपयुक्त परिवर्तन करना पड़ेगा।’’ अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर दोषी करार दिये गए नेताओं पर आजीवन प्रतिबंध लगाने के अलावा देश में सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों के त्वरित निस्तारण का अनुरोध किया है। अपने हलफनामे में, केंद्र ने कहा कि शीर्ष अदालत ने निरंतर यह कहा है कि एक विकल्प या दूसरे पर विधायी विकल्प की प्रभावकारिता को लेकर अदालतों में सवाल नहीं उठाया जा सकता। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 (1) के तहत, अयोग्यता की अवधि दोषसिद्धि की तारीख से छह साल या कारावास के मामले में रिहाई की तारीख से छह साल तक है। हलफनामे में कहा गया है कि उक्त धाराओं के तहत घोषित की जाने वाली अयोग्यताएं संसदीय नीति का विषय हैं और आजीवन प्रतिबंध लगाना उपयुक्त नहीं होगा। केंद्र ने कहा कि न्यायिक समीक्षा के मामले में, न्यायालय प्रावधानों को असंवैधानिक घोषित कर सकता है, हालांकि, याचिकाकर्ता द्वारा मांगी गई राहत में अधिनियम की धारा 8 की सभी उप-धाराओं में ‘‘छह वर्ष’’ के प्रावधान को ‘‘आजीवन’’ पढ़े जाने का अनुरोध किया गया है। इसने कहा कि आजीवन अयोग्यता, प्रावधानों के तहत लगाई जा सकती है और ऐसा विवेकाधिकार ‘‘निश्चित रूप से संसद के अधिकार क्षेत्र में’’ है। केंद्र ने कहा कि याचिका अयोग्यता के आधार और अयोग्यता के प्रभावों के बीच महत्वपूर्ण अंतर स्पष्ट करने में विफल रही है। हलफनामे में कहा गया है कि याचिकाकर्ता का संविधान के अनुच्छेद 102 और 191 का उल्लेख करना पूरी तरह से गलत है। संविधान के अनुच्छेद 102 और 191 संसद, विधानसभा या विधानपरिषद की सदस्यता के लिए अयोग्यता से संबंधित हैं। केंद्र ने कहा कि अनुच्छेद 102 और 191 के खंड (ई) संसद को अयोग्यता से संबंधित कानून बनाने की शक्ति प्रदान करते हैं और इसी शक्ति का प्रयोग करते हुए 1951 का (जन प्रतिनिधित्व) अधिनियम बनाया गया था। इसने कहा कि संविधान ने संसद को अयोग्यता से संबंधित ऐसे अन्य कानून बनाने का अधिकार दिया है, जिसे बनाना वह उचित समझता हो। केंद्र ने कहा, ‘‘संसद के पास अयोग्यता के आधार और अयोग्यता की अवधि, दोनों निर्धारित करने की शक्ति है।’’न्यायालय ने 10 फरवरी को, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8 और 9 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र और निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा था। recent visitors 85

दक्षिण कोरिया में बहुत तेज घट रही थी जनसंख्या, सरकार की मेहनत रंग लाई, बढ़ने लगी जन्म दर

सियोल पिछले लंबे समय से दुनिया के कई देश जनसंख्या में लगातार गिरावट से जूझ रहे हैं। इनमें एक देश ऐसा है जहां जन्म दर दुनिया में सबसे कम थी। लेकिन अब सरकार और कई अन्य कंपनियों की पहल काम आ रही है और करीब 9 साल बाद पहली बार जन्म दर में वृद्धि देखने को मिली है। हम बात कर रहे हैं दक्षिण कोरिया की। यहां सरकार के लगातार प्रयासों और नीतियों का असर दिखने लगा है। पिछले एक दशक की बात करें, तो इस देश में जन्मदर में भारी गिरावट देखी गई थी क्योंकि महिलाएं करियर को प्राथमिकता दे रही थीं और महंगे घरों व बच्चों की परवरिश की बढ़ती लागत के कारण विवाह और मातृत्व से बच रही थीं। दक्षिण कोरिया में प्रजनन दर (फर्टिलिटी रेट) साल 2023 में 0.72 तक पहुंच गई थी, जो दुनिया में सबसे कम थी। किसी देश की जनसंख्या को स्थिर रखने के लिए प्रजनन दर का 2.1 होना जरूरी माना जाता है, लेकिन दक्षिण कोरिया इससे बहुत पीछे था। बढ़ती महंगाई, लंबे काम के घंटे, नौकरी की असुरक्षा और बच्चों के पालन-पोषण की ऊंची लागत के चलते युवा शादी और बच्चे पैदा करने से कतरा रहे थे। नतीजतन, देश की आबादी तेजी से घट रही थी और यह अनुमान लगाया जा रहा था कि यदि यही स्थिति रही तो साल 2100 तक दक्षिण कोरिया की 5.1 करोड़ की आबादी आधी से भी कम हो जाएगी। जन्मदर में मामूली सुधार 2024 में, दक्षिण कोरिया की कुल प्रजनन दर बढ़कर 0.75 हो गई, जो 2023 में 0.72 थी। 2015 में यह दर 1.24 थी, जिसके बाद लगातार आठ वर्षों तक गिरावट जारी थी। वहीं, 1,000 लोगों पर जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या (क्रूड बर्थरेट) 4.7 रही, जो 2014 से चली आ रही गिरावट को तोड़ने में सफल रही। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यह वृद्धि महामारी के कारण विलंबित शादियों की संख्या में वृद्धि और सरकार की कार्य-परिवार संतुलन, बाल देखभाल और आवास संबंधी नीतियों के कारण संभव हो सकी है। सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए कई कदम उठाए। पिछले कुछ सालों में करीब 286 अरब डॉलर की भारी-भरकम राशि जन्म दर को बढ़ाने के लिए खर्च की गई। इसमें सब्सिडी वाले आवास, परिवहन, स्वास्थ्य सेवाएं, मुफ्त आईवीएफ (टेस्ट ट्यूब बेबी) सुविधाएं और माता-पिता को आर्थिक सहायता जैसे कदम शामिल थे। इसके अलावा, बच्चों की देखभाल के लिए विदेशी कर्मचारियों की भर्ती, कर में छूट और 30 साल की उम्र तक तीन या अधिक बच्चों वाले पुरुषों को सैन्य सेवा से छूट जैसे प्रोत्साहन भी दिए गए। सामाजिक सोच में बदलाव अल-जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, सांख्यिकी कोरिया की अधिकारी पार्क ह्यून-जंग ने एक प्रेस वार्ता में कहा, "समाज में विवाह और मातृत्व को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण बढ़ा है।" उन्होंने बताया कि प्रजनन दर बढ़ाने में 30 वर्ष की उम्र वाले लोगों की संख्या में वृद्धि और महामारी के कारण विलंबित शादियों ने योगदान दिया। नई जनसांख्यिकीय नीति बीते वर्ष, राष्ट्रपति यून सुक-योल ने देश के "जनसांख्यिकीय संकट" से निपटने के लिए एक नए मंत्रालय के गठन का प्रस्ताव रखा था। इस नीति का उद्देश्य पहले की केवल नकद सहायता आधारित योजनाओं के बजाय व्यापक समाधान देना था। नई नीति के तहत, माता-पिता दोनों के लिए कुल छह महीने तक 100 प्रतिशत वेतन भुगतान की सुविधा दी गई है, जबकि पहले यह केवल तीन महीने के लिए था। इसके अलावा, माता-पिता दोनों द्वारा छुट्टी लेने की स्थिति में कुल छुट्टी की अवधि एक वर्ष से बढ़ाकर डेढ़ वर्ष कर दी गई है। कंपनियों पर नए नियम इस वर्ष से, सरकार ने सूचीबद्ध कंपनियों के लिए अनिवार्य कर दिया है कि वे अपने बाल देखभाल से जुड़े आंकड़ों को नियामक रिपोर्ट में शामिल करें। सरकार की विभिन्न परियोजनाओं और वित्तीय सहायता पाने के लिए कंपनियों को यह आंकड़े प्रस्तुत करने होंगे। इसके अलावा, छोटे और मध्यम उद्यमों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। सरकार का वित्तीय निवेश दक्षिण कोरियाई सरकार इस वर्ष कार्य-परिवार संतुलन, बाल देखभाल और आवास के तीन प्रमुख क्षेत्रों में कुल 19.7 ट्रिलियन वॉन (13.76 अरब डॉलर) खर्च करने जा रही है। यह 2024 के मुकाबले 22 प्रतिशत अधिक है। सरकार को उम्मीद है कि इन नई नीतियों से जन्मदर को और स्थिरता मिलेगी और दक्षिण कोरिया की गंभीर जनसांख्यिकीय चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी। इन प्रयासों का नतीजा अब सामने आया है। ताजा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में जन्म दर में मामूली लेकिन महत्वपूर्ण बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह रुझान जारी रहा तो प्रजनन दर 0.74 के आगे पहुंच सकती है। हालांकि यह अभी भी अन्य देशों की तुलना में कम है, लेकिन यह एक सकारात्मक संकेत है। सितंबर 2024 में 14 सालों में पहली बार नवजात शिशुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई, जिसने सरकार और नागरिकों में उम्मीद जगाई है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल शुरुआत है। दक्षिण कोरिया को अभी लंबा रास्ता तय करना है ताकि जनसंख्या संकट से पूरी तरह उबरा जा सके। बढ़ती उम्र की आबादी और युवाओं की घटती संख्या अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। फिर भी, जन्म दर में यह बढ़ोतरी सरकार की मेहनत का रंग लाने का सबूत है और भविष्य के लिए एक नई उम्मीद की किरण लेकर आई है। recent visitors 92

इब्राहिम जादरान के 177 रनो की वजह से इंग्लैंड को दिया 326 रनों का विशाल लक्ष्य

लाहौर आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के आठवें मुकाबले में अफगानिस्तान का सामना इंग्लैंड से हो रहा है। अफगानिस्तान ने टॉस जीतकर बैटिंग चुनी है। जोस बटलर के नेतृत्व वाली इंग्लैंड की टीम को अपने मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया के हाथों हार का सामना करना पड़ा, जबकि अफगानिस्तान की टीम ने अफ्रीका के सामने घुटने टेक दिए थे। अफगानिस्तान की शुरुआत खराब रही है। सलामी बल्लेबाज रहमानुल्लाह गुरबाज 6 रन बनाकर आउट हुए। अटल 4 गेंद में 4 रन ही बना सके। रहमत शाह 4 रन ही बना सके। जोफ्रा आर्चर ने शुरुआती तीन विकेट चटकाए। हशमतुल्लाह शाहिदी ने 40 रनों का योगदान दिया। अजमतुल्लाह उमरजई ने 31 गेंद में 41 रन की पारी खेली। इब्राहिम जादरान ने 146 गेंद में 177 रनों की दमदार पारी खेली। जादरान आखिरी ओवर में आउट हुए। मोहम्मद नबी ने 24 गेंद में 40 रन बनाए। अफगानिस्तान ने 50 ओवर में सात विकेट खोकर 325 रन बनाए हैं। इब्राहिम जादरान 146 गेंद में 177 रन की पारी खेली। इब्राहिम जादरान 146 गेंद में 177 रन बनाकर पवेलियन लौट गए हैं। चैंपियंस ट्रॉफी के इतिहास का ये सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर है। अफगानिस्तान का ये छठा विकेट गिरा है। अफगानिस्तान ने 48वें ओवर में 300 रन पूरे कर लिए हैं। नबी और जादरान के बीच 80 से ज्यादा रन की साझेदारी हो चुकी है। recent visitors 50

केजरीवाल बतौर मुख्यमंत्री जिस बंगले में रहते थे उसका दो साल का बिल 41 लाख रुपए, भाजपा ने दागे सवाल

नई दिल्ली दिल्ली में सरकार चलाते हुए जनता के लिए 200 यूनिट खपत पर बिजली मुफ्त करने वाले अरविंद केजरीवाल अब अपने ही बिल को लेकर घिर गए हैं। अत्यधिक बिजली खपत का आरोप लगा भाजपा उन पर सवाल उठा रही है। भाजपा को यह मौका सूचना के अधिकार (RTI) के तहत पूछे गए एक सवाल के जवाब से मिला है, जिसमें दिल्ली सरकार ने बताया है कि अरविंद केजरीवाल बतौर मुख्यमंत्री जिस बंगले में रहते थे उसका दो साल का बिल 41 लाख रुपए से अधिक का था। आरटीआई एक्टिविस्ट कन्हैया कुमार की ओर से पूछे गए सवाल के जवाब में बताया गया कि अक्टूबर 2022 से अक्टूबर 2024 के बीच 6 फ्लैग स्टाफ रोड के बंगले में 41.5 लाख रुपए की बिजली खपत हुई। इस बंगले को भाजपा और कांग्रेस की ओर से शीशमहल कहा जाता है। बंगले में सुख-सुविधा पर करोड़ों रुपए खर्च का आरोप है और इसकी जांच चल रही है। आरटीआई से मिले जवाब के मुताबिक, अरविंद केजरीवाल के बंगले में दो साल में 560335 यूनिट की बिजली खपत की गई, जिसका बिल 41,51,350 रुपए है। इस लिहाज से औसत निकालें तो हर दिन करीब 767 यूनिट बिजली खपत की गई, जिसका मूल्य करीब 5700 रुपए है। दिल्ली में CM के लिए कितनी बिजली मुफ्त दिल्ली विधानसभा की वेबसाइट पर मंत्रियों और मुख्यमंत्री के वेतन और भत्ते की विस्तार से जानकारी दी गई है। इसमें मुफ्त बिजली का भी जिक्र है। इसमें बताया गया है मुख्यमंत्री को हर महीने 5000 यूनिट बिजली के बिल के लिए प्रतिपूर्ति (रिइंबर्समेंट) का प्रावधान है, जबकि मंत्रियों के लिए सीमा 3000 यूनिट मासिक है। इस लिहाज से देखें तो अरविंद केजरीवाल के लिए हर महीने 5000 यूनिट बिजली मुफ्त थी जबकि उनकी खपत औसतन करीब 21000 यूनिट मासिक थी। भाजपा का तीखा हमला आरटीआई जवाब के बहाने भाजपा अब केजरीवाल पर हमलावर है। भाजपा के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने तीखा प्रहार किया है। उन्होंने एक वीडियो में कहा, 'शीशमहल के खर्च की कहानी तो हम सबने सुनी है। हमें पता है कि किस तरह केजरीवाल ने जनता के 45 करोड़ रुपए इस पर खर्च किए। पर अब एक और चौंकाने वाली खबर है। आरटीआई दिखाती है कि 2 साल में मुख्यमंत्री निवास में बिजली का बिल 41.5 लाख रुपए का था। 5.60 लाख यूनिट बिजली खर्च हुई। हर दिन 5700 रुपए का प्रतिदिन है। आप समझ सकते हैं कि कितने एसी नॉन स्टॉप चल रहे ते। यह वही केजरीवाल है जिसने करोड़ों रुपए खर्च किए अपने ऐशो-आराम पर। वैगनार कार में घूमते थे और फिर 1.5 करोड़ रुपए की गाड़ी खरीद ली वह भी आरटीआई से सामने आया था। शीशमहल की कहानी दरअसल बंगले नहीं मानसिकता के रेनोवेशन की है।' recent visitors 85

वनडे प्लेयर्स की ताजा रैंकिंग आईसीसी ने की जारी, शमी और कुलदीप को फायदा, विराट कोहली ने टॉप-5 में मारी एंट्री

नई दिल्ली इंटरेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) ने बुधवार को वनडे प्लेयर्स की ताजा रैंकिंग जारी की है। भारत के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली, तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी और स्पिनर कुलदीप यादव को ताजा रैंकिंग में एक-एक स्थान का फायदा मिला है। कोहली ने फिर से टॉप-5 में एंट्री मारी है। वह 743 अंकों के साथ पांचवें पायदान पर हैं। उन्होंने आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में पाकिस्तान के खिलाफ 111 गेंदों में नाबाद 100 रन बनाए थे, जिसमें सात चौके शामिल हैं। यह कोहली का 52वां वनडे और 82वां इंटरनेशनल शतक था। टॉप-10 बल्लेबाजों में भारत के चार खिलाड़ी शामिल हैं। युवा ओपनर शुभमन गिल टॉप पर काबिज हैं। उनके 817 अंक हैं। कप्तान रोहित शर्मा (757) तीसरे और श्रेयस अय्यर (679) नौवें नंबर पर बरकरार हैं। पाकिस्तान के स्टार बल्लेबाज बाबर आजम (770) दूसरे पायदान पर हैं। उन्होंने भारत के खिलाफ 26 गेंदों में 23 रन बटोरे थे। भारत के विकेटकीपर-बल्लेबाज केएल राहुल दो पायदान ऊपर 15वें पर पर चले गए हैं। भारत ने महामुकाबले में पाकिस्तान को 6 विकेट से धूल चटाई थी। भारत ने सेमीफाइनल में सीट कंफर्म कर ली है। न्यूजीलैंड के विल यंग (आठ पायदान ऊपर 14वें), ऑलराउंडर रचिन रविंद्र (18 नंबर 24वें) और इंग्लैंड के बेन डकेट (27 पायदान ऊपर 17वें ) को शतक का लाभ मिला है। वहीं, गेंदबाजों की रैंकिंग में शमी 14वें स्थान पर पहुंच गए हैं। उनके 599 अंक हैं। शमी ने बांग्लादेश के खिलाफ 53 रन देकर 5 विकेट चटकाए थे। हालांकि, उन्हें पाकिस्तान के विरुद्ध कोई विकेट नहीं मिला। कुलदीप बांग्लादेश के सामने खाली हाथ रहे लेकिन पाकिस्तान के खिलाफ 40 रन देकर तीन शिकार किए। वह अब 656 अंकों के साथ तीसरे पायदान पर हैं। टॉप-10 गेंदबाजों में कुलदीप एकमात्र भारतीय हैं। श्रीलंका के स्पिनर महेश तीक्षणा (689) टॉप पर हैं। अफगानिस्तान के स्पिनर राशिद खान (658) दूसरे और साउथ अफ्रीका के केशव महाराज (641) चौथे स्थान पर हैं। महाराज को एक पायदान का फायदा हुआ। न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज मैट हेनरी दो स्थान ऊपर चढ़कर छठे पर आ गए हैं। ऑस्ट्रेलिया के स्पिनर एडम जाम्पा (दो स्थान ऊपर 10वें) टॉप-10 में जगह बनाने में सफल रहे। साउथ अफ्रीका के तेज गेंदबाज कगिसो रबाडा (चार स्थान ऊपर चढ़कर 16वें) और न्यूजीलैंड के माइकल ब्रेसवेल (31 स्थान ऊपर 26वें) भी आगे बढ़े हैं। recent visitors 86