कृष्ण जन्मस्थान और शाही ईदगाह मामले पर न्यायालय का बड़ा संकेत, अब दोनों की सुनवाई एक ही अदालत में हो सकेगी

नई दिल्ली कृष्ण जन्मस्थान और शाही ईदगाह के बीच चल रहे भूमि विवाद को लेकर एक महत्वपूर्ण विकास हुआ है। उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान संकेत दिया है कि सभी संबंधित याचिकाओं की सुनवाई अब किसी एक अदालत में हो सकती है। इससे विवाद के समाधान में एक नया मोड़ आ सकता है, जो दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद हो सकता है। उच्चतम न्यायालय का रुख कृष्ण जन्मस्थान-शाही ईदगाह भूमि विवाद को लेकर उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने शुक्रवार को महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं। पीठ ने पूछा कि मथुरा की विभिन्न सिविल अदालतों से संबंधित लगभग 18 मुकदमों को एक साथ एकीकृत करके सुनवाई उच्च न्यायालय के पास क्यों न की जाए, जबकि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इस संबंध में पहले ही फैसला सुनाया था। उच्चतम न्यायालय ने यह भी कहा कि मुकदमों का एकीकरण पक्षकारों के लिए अधिक सुविधाजनक हो सकता है, क्योंकि इससे अलग-अलग अदालतों में लंबी और जटिल प्रक्रियाओं से बचा जा सकता है। मुस्लिम पक्ष की आपत्ति मुस्लिम पक्ष के वकील ने हालांकि इस एकीकरण पर आपत्ति जताते हुए कहा कि ये मुकदमे समान प्रकृति के नहीं हैं और यदि उन्हें एक साथ सुना जाता है, तो यह जटिलताओं का कारण बन सकता है। हालांकि, उच्चतम न्यायालय की पीठ ने इस आपत्ति को खारिज करते हुए कहा कि इससे किसी प्रकार की जटिलता नहीं आएगी, और यह पक्षकारों के लिए सुविधाजनक होगा। इलाहाबाद उच्च न्यायालय का निर्णय इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 26 मई 2023 को इस मामले में मथुरा की विभिन्न सिविल अदालतों से कृष्ण जन्मस्थान-शाही ईदगाह भूमि विवाद से संबंधित मुकदमों को अपने पास स्थानांतरित करने का आदेश दिया था। इसके बाद 1 अगस्त 2024 को उच्च न्यायालय ने एक और महत्वपूर्ण आदेश देते हुए मस्जिद प्रबंधन समिति की चुनौती को खारिज कर दिया था और मामले की सुनवाई जारी रखने का निर्देश दिया था। जानें 16 जनवरी से पहले की स्थिति 16 जनवरी 2024 को उच्चतम न्यायालय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 14 दिसंबर 2023 के आदेश पर रोक लगाते हुए शाही ईदगाह मस्जिद का सर्वेक्षण करने का निर्देश अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया था। इस फैसले से मामले की आगे की सुनवाई में भी नए पहलू जुड़ सकते हैं, जो विवाद को सुलझाने में सहायक हो सकते हैं। अगली सुनवाई की तारीख उच्चतम न्यायालय ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 1 अप्रैल 2025 की तारीख निर्धारित की है, जब दोनों पक्षों के वकील अपने तर्क पेश करेंगे। यह तारीख इस मामले के भविष्य के लिए अहम हो सकती है, क्योंकि इसके बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया और विवाद का समाधान निकलने की संभावना है।   recent visitors 89

अब दिल्ली और श्रीनगर के बीच डायरेक्ट ट्रेन सेवा का सपना फिलहाल अधूरा रहेगा, नहीं मिलेगी डारेक्ट ट्रेन

नई दिल्ली देशभर में दिल्ली और श्रीनगर के बीच एक नई ट्रेन सेवा के शुरू होने की उम्मीदें बहुत थीं। इसे लेकर भारतीय रेलवे ने हाल ही में एक बड़ा अपडेट दिया है, जो उन सभी यात्रियों के लिए बुरी खबर है, जो बिना रुके दिल्ली से श्रीनगर या जम्मू तक यात्रा करने का सपना देख रहे थे। भारतीय रेलवे ने घोषणा की है कि श्रीनगर जाने वाली ट्रेनों को जम्मू के कटरा रेलवे स्टेशन पर रुकना पड़ेगा, और वहां सुरक्षा कारणों से यात्रियों को दूसरी ट्रेन में चढ़ने के लिए ट्रांसफर होना होगा। इसका मतलब यह है कि अब दिल्ली और श्रीनगर के बीच डायरेक्ट ट्रेन सेवा का सपना फिलहाल अधूरा रहेगा। 26 जनवरी को PM Modi करेंगे उद्घाटन इस नई ट्रेन सेवा का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर करेंगे। यह उद्घाटन एक बहुत बड़े रेल प्रोजेक्ट के अंतर्गत हो रहा है, जो लगभग तीन दशकों से लंबित था। इस प्रोजेक्ट के तहत दिल्ली और श्रीनगर के बीच एक रेल कनेक्टिविटी स्थापित की जाएगी, जिसे लेकर लोगों में भारी उत्साह था। कटरा स्टेशन पर होगा अनिवार्य ट्रांसशिपमेंट रेलवे अधिकारियों ने बताया है कि श्रीनगर और कटरा के बीच चलने वाली सभी ट्रेनों को कटरा रेलवे स्टेशन पर रुकना होगा। यहां पर यात्रियों को ट्रेन बदलने के लिए उतरना होगा। कटरा स्टेशन पर स्थित प्लेटफॉर्म-1 को कश्मीर जाने वाली ट्रेनों के लिए समर्पित किया जाएगा। यह सुरक्षा कारणों से किया गया है, ताकि यात्रियों का ट्रांसपोर्टेशन और सुरक्षा प्रक्रिया सही तरीके से की जा सके। कटरा स्टेशन पर यात्रियों को अपने सामान को फिर से स्कैन कराना होगा और फिर दूसरी ट्रेन में चढ़ने के लिए उन्हें प्लेटफॉर्म पर जाना होगा। इस ट्रांसफर प्रक्रिया के कारण यात्रियों को अतिरिक्त समय लग सकता है। कटरा स्टेशन पर रुकने से यात्रा में समय का इजाफा होगा, लेकिन यह कदम यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए आवश्यक है। वंदे भारत और मेल एक्सप्रेस ट्रेनें उत्तर रेलवे ने पहले ही इस ट्रेन सेवा का टाइम टेबल 31 दिसंबर 2024 को जारी किया था, जिसमें बताया गया था कि कटरा और श्रीनगर के बीच हर रोज़ एक वंदे भारत और दो मेल एक्सप्रेस ट्रेनें चलेंगी। इन ट्रेनों की शुरुआत 2024 के अंत से होने की उम्मीद है। वंदे भारत ट्रेन, जो आधुनिक सुविधाओं से लैस होगी, कटरा से सुबह 8:10 बजे रवाना होगी और 11:20 बजे श्रीनगर पहुंचेगी। दूसरी तरफ, मेल एक्सप्रेस ट्रेनें कटरा से सुबह 9:50 बजे और दोपहर 3 बजे रवाना होंगी, जो क्रमशः 1:10 बजे और 6:20 बजे श्रीनगर पहुंचेंगी। श्रीनगर से कटरा के लिए मेल एक्सप्रेस ट्रेनें सुबह 8:45 बजे और दोपहर 3:05 बजे रवाना होंगी। इस प्रकार, रेलवे ने दोपहर और शाम के समय भी ट्रेनों का संचालन सुनिश्चित किया है। क्या होगा कटरा स्टेशन पर? कटरा स्टेशन पर हर ट्रेन के आने के बाद, सभी यात्रियों को उतरकर स्टेशन के बाहर जाना होगा। यहां पर उन्हें फिर से अपनी सामान की जांच करवानी होगी और फिर आगे की यात्रा के लिए दूसरी ट्रेन का इंतजार करना होगा। कटरा का प्लेटफॉर्म-1 पूरी तरह से कश्मीर जाने वाली ट्रेनों के लिए समर्पित रहेगा। इस प्रक्रिया से यात्रियों को अपने सामान की दोबारा जांच करनी होगी, और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी यात्री बिना किसी परेशानी के अपनी यात्रा जारी रखें। यात्री यात्रा में अतिरिक्त समय का सामना करेंगे कटरा स्टेशन पर ट्रांसशिपमेंट प्रक्रिया के कारण यात्रियों को यात्रा में अतिरिक्त समय का सामना करना पड़ेगा। हालांकि, यह कदम सुरक्षा के लिहाज से लिया गया है, और रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया यात्रियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है। यात्रियों को कटरा में अपने सामान की फिर से जांच करवानी होगी और फिर अपनी यात्रा के लिए दूसरी ट्रेन में बैठना होगा। कश्मीर जाने का सपना देखने वाले दिल्लीवासियों के लिए यह एक बड़ा झटका हो सकता है, क्योंकि अब उन्हें सीधे श्रीनगर पहुंचने के लिए कटरा रेलवे स्टेशन पर ट्रेन बदलनी पड़ेगी। हालांकि, यह कदम यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। अब यात्रियों को अपनी यात्रा के दौरान अधिक समय देना होगा, लेकिन रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया पूरे यात्रा अनुभव को सुरक्षित और बेहतर बनाने के लिए जरूरी है।   recent visitors 179

सरकार और संभल प्रशासन को शाही जामा मस्जिद के विवादित कुएं को लेकर कोई भी कदम उठाने से रोका: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश सरकार और संभल जिला प्रशासन को शाही जामा मस्जिद के विवादित कुएं को लेकर कोई भी कदम उठाने से रोक दिया। इस कुएं का आधा हिस्सा मस्जिद के अंदर और आधा हिस्सा मस्जिद के बाहर है। कोर्ट ने इस मामले में साम्प्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की जरूरत की बात कही है। आपको बता दें कि इसी इलाके में मस्जिद के स्थान पर एक हिंदू मंदिर होने का दावा किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट की जिस बेंच ने इस मामले पर रोक लगाई है उसमें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) संजीव खन्ना और जस्टिस पीवी संजय कुमार शामिल थे। पीठ ने आदेश दिया कि संभल नगर पालिका परिषद द्वारा दिसंबर 2024 में जारी किए गए नोटिस पर कार्रवाई नहीं की जाएगी। नोटिस में कुएं की सफाई, संपत्ति की जांच और मस्जिद के बाहरी हिस्से को सार्वजनिक उपयोग के लिए खोलने की बात की गई थी। कोर्ट ने इस मामले पर कड़ी निगरानी रखने की बात कही है। आपको बता दें कि इस मामले में अब 21 फरवरी को सुनवाई होगी। कोर्ट ने जिला प्रशासन को दो सप्ताह के भीतर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस मामले में शाही जामा मस्जिद के प्रबंधन समिति द्वारा एक याचिका दाखिल की गई थी। उनके द्वारा निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें मस्जिद का सर्वे करने का आदेश दिया गया था। मस्जिद के प्रबंधन का आरोप था कि सर्वे बिना किसी सूचना के किया गया और यह कार्रवाई अवैध तरीके से और जल्दबाजी में की गई थी। इस सर्वे के बाद 24 नवंबर 2024 को संभल में हिंसक झड़पें हुई थीं, जिसमें चार लोग मारे गए थे और कई लोग घायल हो गए थे। मस्जिद के वकील ने की रोक की मांग सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता हुजैफा अहमदी ने अदालत से अनुरोध किया कि वह जिला प्रशासन को कुएं की जांच और उस पर की जाने वाली कार्रवाई पर रोक लगाए। उन्होंने कहा कि कुआं मस्जिद के अंदर और बाहर स्थित है और इसे बिना अदालत की अनुमति के सार्वजनिक उपयोग के लिए खोलना अनुचित होगा। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) केएम नटराज ने इस दलील का विरोध किया। उनका कहना था कि यह एक सार्वजनिक कुआं है और राज्य की संपत्ति है। अब स्थिति शांतिपूर्ण है, लेकिन कुछ लोग इसमें समस्या पैदा करना चाहते हैं। कुआं खोलने से क्या ऐतराज? इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "यह पानी है। इसे सभी को उपयोग करने देना चाहिए। आप खुद कह रहे हैं कि इसका आधा हिस्सा मस्जिद के अंदर है और आधा बाहर। यदि कोई व्यक्ति बाहर के हिस्से से पानी का उपयोग करता है तो इससे कोई समस्या नहीं होनी चाहिए।" अहमदी ने इसके जवाब में कहा, "यह कुआं पूरी तरह से ढका हुआ था और इसका उपयोग कभी नहीं किया गया। मस्जिद इसका पानी एक पंप के माध्यम से उपयोग करती है। नगरपालिका के नोटिस में इसे हरी मंदिर कहा गया है। पूजा और भक्तों की स्नान के लिए पानी इस्तेमाल करने की बात की गई है।" इस पर सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले को नकारते हुए कहा, "यह क्या है? इसे मत बढ़ाइए। ऐसा करना उचित नहीं है।" कोर्ट ने सरकार से स्टेटस रिपोर्ट की मांग करते हुए आदेश दिया कि नगरपालिका परिषद का कुएं से संबंधित नोटिस प्रभावी नहीं होगा। हिंदू पक्ष ने किया SC के पुराने आदेश का जिक्र हिंदू पक्ष की ओर से पेश हुए वकील विष्णु शंकर जैन ने इस बात को याद दिलाया कि मस्जिद प्रबंधन समिति को पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि वह इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाए, न कि सीधे सुप्रीम कोर्ट आए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "हां, हम जानते हैं। हम चाहते थे कि वे हाईकोर्ट जाएं, लेकिन हम इस मामले पर कड़ी निगरानी रख रहे हैं ताकि कोई हिंसा न हो और शांति और सौहार्द बना रहे।" आपको बता दें कि यह विवाद तब बढ़ा जब एक मुकदमे में यह दावा किया गया कि शाही जामा मस्जिद उस स्थान पर बनाई गई थी जहां पहले एक हिंदू मंदिर खड़ा था। उसे "हरीहर मंदिर" के रूप में जाना जाता है। हिंदू पक्ष ने मंदिर में पूजा करने के लिए पहुंच की मांग की थी। इसके बाद स्थानीय अदालत ने मस्जिद का सर्वे कराने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने 29 नवंबर को सेशन कोर्ट को इस मामले में कोई भी कार्यवाही करने से रोक दिया। इसके अलावा मस्जिद प्रबंधन समिति को इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने की सलाह दी थी। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा था कि वह इलाके में शांति बनाए रखने के लिए कदम उठाए और विवाद का समाधान समुदायों के बीच मध्यस्थता के माध्यम से करने का प्रयास करे। recent visitors 76

रिपोर्ट: AI के चलते नौकरियां जाएंगी और अब ऐसा ही देखने को मिल रहा है, अब होने लगे है AI से काम, झटका

नई दिल्ली आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (AI) का प्रभाव जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है और इसके चलते ढेरों काम अब आसान हो गए हैं। एक्सपर्ट्स ने पहले ही चिंता जताई थी कि AI के चलते नौकरियां जाएंगी और अब ऐसा ही देखने को मिल रहा है। Bloomberg Intelligence की नई रिपोर्ट में सामने आया है कि अगले तीन से पांच साल के अंदर ग्लोबल बैंक्स के कर्मचारियों की दो लाख से ज्यादा नौकरियां जाने वाली हैं। BI में चीफ इन्फॉर्मेशन एंड टेक्नोलॉजी ऑफिसर्स के सर्वे में संकेत मिले हैं कि कुल नौकरियाों में से 3 प्रतिशत की कटौती होने वाली है और लाखों नौकरियां जाएंगी। BI के सीनियर एनालिस्ट Tomasz Noetzel ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि ऐसी जो भी नौकरियां, जिनमें एक जैसा काम बार-बार करना पड़ता है, उनके जाने का रिस्क है। हालांकि कई नौकरियां पूरी तरह खत्म नहीं होंगी और उनके लिए काम करने का तरीका बदल जाएगा। इन वजहों से जाने वाली हैं नौकरियां ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस ने जो पीयर ग्रुप कवर किया, उसमें Citigroup Inc., JPMorgan Chase & Co. और Goldman Sachs Group Inc. वगैरह शामिल हैं। 93 लोगों में से करीब एक चौथाई ने कहा है कि कुल कर्मचारियों में से 5 प्रतिशत से 10 प्रतिशत के बीच AI के इस्तेमाल के बाद प्रभावित होंगे। दरअसल, AI टूल्स के साथ ना सिर्फ कंपनियों की प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी, बल्कि वे अपना खर्च भी कम कर पाएंगे। मौजूदा काम की स्पीड भी AI टूल्स के चलते बढ़ जाएगी। सामने आया है कि सबसे ज्यादा नौकरियां बैंकिंग सेक्टर से जाने वाली हैं और किसी अन्य सेक्टर के मुकाबले बैंकिंग के क्षेत्र की तो 54 प्रतिशत नौकरियों का ऑटोमेशन किया जा सकता है। कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि नौकरियां पूरी तरह खत्म होने के बजाय नए अवसर पैदा होंगे और मौजूदा काम करने का तरीका AI के आने के बाद बदलेगा। recent visitors 91

योगी ने कहा- कुंभ में ऐसे लोगों का स्वागत है जो अपने गोत्र को भारत के ऋषियों के नाम से जोड़कर देखते हैं

प्रयागराज उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में भव्य महाकुंभ का आयोजन किया जा रहा है। इसकी तैयारी बड़े ही जोर-शोर से की जा रही है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री खुद इसकी निगरानी कर रहे हैं। वह बार-बार प्रयागराज का दौरा कर रहे हैं। इस सबके बीच इस बात की चर्चा थी कि कुंभ के दौरान यहां मुसलमानों की एंट्री बैन कर दी गई है। हालांकि, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री खुद इस मुद्दे पर खुलकर बात की है। जब योगी आदित्यनाथ से इस विषय पर पूछा गया तो उन्होंने साफ-साफ कहा कि जिस किसी को भी भारत की सनातन परंपरा में आस्था है वह यहां आएं। हालांकि उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में यह भी कह दिया कि गलत मानसिकता से लोग यहां नहीं आएं। कुछ भी गलत करते हुए पकड़े जाने पर उनके साथ दूसरे तरीके से व्यवहार हो सकता है। योगी आदित्यनाथ ने कुंभनगरी में मुसलमानों का स्वागत करते हुए शर्तें भी लगा दी हैं। उन्होंने कहा कि कुंभ के दौरान ऐसे ही लोगों का स्वागत है जो अपने को भारतीय मानते हों। सनातन परंपरा में श्रद्धा रखते हैं। जिन्हें ऐसा लगता है कि भूतकाल में किसी दबाव में आकर उनके पूर्वजों ने उपासना विधि के रूप में इस्लाम स्वीकार किया था, लेकिन वे सनातनी हैं तो उनका कुंभ में स्वागत हैं। योगी ने कहा कि कुंभ में ऐसे लोगों का स्वागत है जो अपने गोत्र को भारत के ऋषियों के नाम से जोड़कर देखते हैं। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ऐसे लोग प्रयागराज आएं और परंपरागत तरीके से संगम में स्नान करें। ऐसे लोगों के आने में कोई समस्या नहीं हैं। योगी आदित्यनाथ वक्फ बोर्ड के दावों का जवाब देते हुए कहा कि अगर कोई आएगा और कहेगा कुंभ की यह भूमि हमारी है और हम लोग इस पर कब्जा करेंगे तो मुझे लगता है कि उनको 'डेंटिंग-पेंटिंग' का सामना करना पड़ सकता है। अखाड़ों के संतों के साथ योगी का डिनर वहीं, योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को प्रयागराज दौरे के पहले दिन साधु संतों के साथ रात्रि भोज किया और उन्हें उपहार भी भेंट किया। रात्रि भोज में सभी अखाड़ों, खाकचौक, दंडीबाड़ा और आचार्यबाड़ा के संत उपस्थित रहे। इस रात्रि भोज कार्यक्रम में जूना, निरंजनी, उदासीन बड़ा, निर्मल, तीनों वैष्णव अखाड़े (निर्मोही, दिगंबर, निर्वाणी), अग्नि, आवाहन, अटल एवं आनंद अखाड़े के संत भी शामिल रहे। साथ ही खाकचौक से संतोष दास (सतुआ बाबा) भी इस दौरान उपस्थित रहे। साधु संतों ने मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पुष्प वर्षा कर स्वागत और अभिनंदन किया। recent visitors 106

शॉर्ट सर्किट के कारण लगी आग, उद्घाटन से पहले ही रेस्टोरेंट पूरी तरह जलकर खाक

कटनी रंगनाथ नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत बरगवां में मौजूद सिंध बैंक के ऊपरी हिस्से में नया रेस्टोरेंट खोलने के लिए तेजी से काम लगा हुआ था। 15 तारीख को रेस्टोरेंट का उद्घाटन होना था। इससे पहले की रेस्टोरेंट उद्घाटित हो पाता बीती रात आज की लपटों में पूरा रेस्टोरेंट जलकर खाक हो गया। जिस बिल्डिंग में आग लगी उसी बिल्डिंग के निचले हिस्से पर सिंध बैंक मौजूद था। बताया जाता है कि एटीएम में देर रात शॉर्ट सर्किट होने के बाद आग भड़क गई, जिससे पूरी बिल्डिंग कुछ देर में ही आग का गोला बन गई। आग इतनी भीषण थी कि आग की लपटे अगल-बगल वाली बिल्डिंग को भी अपनी चपेट में लेने लगी थी। धधकती बिल्डिंग के ठीक बगल वाली बिल्डिंग में मौजूद एक कर्मचारी आग की लपटों से घिर गया। आग के बीच कर्मचारी को अंदर फंसा देख पुलिस ने सक्रियता दिखाई और जान हथेली पर रखकर उसे आग की लपटों के बीच से बाहर निकाला। शॉर्ट सर्किट बना वजह सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक सिंध बैंक के समीप मौजूद एटीएम में शुक्रवार देर रात लगभग साढ़े 12 बजे शॉर्ट सर्किट के कारण आग लग गई। धीरे-धीरे आग ने पूरी बिल्डिंग को ही चपेट में ले लिया। बिल्डिंग के ऊपरी हिस्से में नए रेस्टोरेंट का काम चल रहा था। रेस्टोरेंट का उद्घाटन 5 दिन बाद 15 जनवरी को होना था। रेस्टोरेंट का काम लगभग पूर्ण हो चुका था। बताया जाता है कि भीषण आग के कारण रेस्टोरेंट पूरी तरह जलकर नष्ट हो गया। निचले हिस्से में मौजूद सिंध बैंक की बाहरी दीवारों और शीशे आग से प्रभावित हुए हैं। यहां पर शीशे चटक गए आग की तपिश तो अंदर पहुंची, लेकिन बैंक के अंदर आग नहीं लगी, जिसके कारण सिंध बैंक में मामूली नुकसान बताया जा रहा है। फंसा था एक व्यक्ति देर रात लगभग 12:30 बजे हुई आगजनी पर बड़ी मशक्कत के बाद लगभग 3:30 बजे तड़के काबू पाया जा सका। आग लगभग 3 घंटे तक यहां तांडव मचाती रही। आग के शोले उगल रही बिल्डिंग के ठीक बगल वाली बिल्डिंग भी आग की चपेट में आ रही थी और उस बिल्डिंग के अंदर वहां काम करने वाला एक कर्मचारी फंस गया था। आग की लपटों के बीच फंसे कर्मचारियों पर जैसे ही रंगनाथ नगर थाना प्रभारी नवीन नामदेव और उनके स्टाफ की नजर पड़ी उन्होंने बिना समय गंवाए कर्मचारी को बचाने के प्रयास शुरू कर दिए। बीच बचाव में कर्मचारी चोटिल भी हुआ है उसे तुरंत शासकीय जिला अस्पताल पुलिस के द्वारा भिजवाया गया। आगजनिक की इस घटना में रेस्टोरेंट में भारी नुकसान होने की संभावना जताई जा रही है। recent visitors 64

33% महिला आरक्षण कानून को चुनौती मामले में सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को निरर्थक बताया

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने 33% महिला आरक्षण कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई से शुक्रवार को इनकार कर दिया। अदालत ने उस याचिका को निरर्थक बताया जिसमें विधेयक को चुनौती दी गई थी, न कि अधिनियम को। दूसरी याचिका में इस मामले को लेकर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने सहित अन्य उपाय तलाशने की मांग रखी गई, जिसे नकार दिया गया। एससी की बेंच ने कहा कि पहले भी संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का मुद्दा उठाया गया, मगर इसे कभी लागू नहीं किया जा सका। हालांकि, इस बार इसे परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने की शर्त पर लागू किया जा रहा है। महिला आरक्षण कानून क्या है? महिला आरक्षण अधिनियम (नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023) लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करता है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों पर भी यह नियम लागू होगा। इसका मतलब है कि लोकसभा की 543 सीटों में से 181 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित कर दी जाएंगी। हालांकि, पुडुचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित नहीं होंगी। मालूम हो कि जनगणना के आंकड़े जारी होने के बाद यह आरक्षण लागू होगा। जनगणना के आधार पर महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित होंगी जिसके लिए परिसीमन किया जाएगा। यह आरक्षण 15 साल की अवधि के लिए मिलेगा। फिलहाल, लोकसभा की 131 सीटें एससी-एसटी के लिए आरक्षित की गई हैं। महिला आरक्षण कानून लागू होने के बाद इनमें से 43 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इन 43 सीटों को सदन में महिलाओं के लिए आरक्षित कुल सीटों का ही हिस्सा माना जाएगा। इसका मतलब है कि महिलाओं के लिए आरक्षित 181 सीटों में से 138 ऐसी होंगी, जिन पर किसी भी जाति की महिला उम्मीदवार होगी। साफ है कि इन सीटों पर उम्मीदवार पुरुष नहीं हो सकते हैं। मालूम हो कि यह गणना लोकसभा में सीटों की मौजूदा संख्या पर की गई है। परिसीमन के बाद इसमें बदलाव हो सकता है। recent visitors 89