अविभावक अपने बच्चों को सैनिक स्कूल में कक्षा 6 और कक्षा 9 में प्रवेश दिलवाना चाहते हैं वे 13 जनवरी तक आवेदन करे

नई दिल्ली ऑल इंडिया सैनिक स्कूल एंट्रेस एग्जाम (AISSEE 2025) के लिए आवेदन पत्र भरने की अंतिम तिथि 13 जनवरी 2025 निर्धारित है। ऐसे में जो छात्र या अविभावक अपने बच्चों को सैनिक स्कूल में कक्षा 6 और कक्षा 9 में प्रवेश दिलवाना चाहते हैं वे अंतिम दिनों में वेबसाइट पर होने वाली परेशानियों से बचने के लिए तुरंत ही आवेदन कर लें। एप्लीकेशन फॉर्म ऑनलाइन माध्यम से एनटीए की ऑफिशियल वेबसाइट exams.nta.ac.in/aissee पर जाकर भरा जा सकता है। आपकी सहूलियत के लिए इस पेज पर भी आवेदन का डायरेक्ट लिंक उपलब्ध करवा दिया गया है। आवेदन के लिए योग्यता यहां से करें चेक सैनिक स्कूल कक्षा 6 में प्रवेश के लिए छात्र का 5वीं कक्षा उत्तीर्ण होने के साथ ही आयु 10 से 12 वर्ष के बीच होनी चाहिए। इसके अलावा कक्षा 9 में प्रवेश के लिए छात्र का 8वीं कक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक है और साथ ही उम्र 13 से 15 वर्ष के बीच होनी चाहिए। आयु की गणना 31 मार्च 2025 को ध्यान में रखकर की जाएगी। एप्लीकेशन प्रॉसेस ऑल इंडिया सैनिक स्कूल एंट्रेस एग्जाम 2025 आवेदन पत्र भरने के लिए सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट aissee2025.ntaonline.in पर विजिट करें। वेबसाइट के होम पेज पर न्यू कैंडिडेट रजिस्टर हियर लिंक पर क्लिक करके मांगी गई जानकारी भरें और पंजीकरण कर लें। इसके बाद फॉर्म में मांगी गई अन्य डिटेल भरकर आवेदन प्रक्रिया पूर्ण कर लें। इसके बाद निर्धारित शुल्क जमा करें और पूर्ण रूप से भरे हुए फॉर्म को सबमिट कर दें। अंत में फॉर्म का प्रिंटआउट निकालकर भविष्य के संदर्भ के लिए सुरक्षित रख लें। आवेदन शुल्क आवेदन पत्र भरने के साथ अविभावक निर्धारित शुल्क अवश्य जमा करें। एप्लीकेशन फीस कैटेगरी के अनुसार अलग अलग तय की गई है। जनरल, ओबीसी एवं ईडब्ल्यूएस वर्ग से आने वाले उम्मीदवारों को शुल्क के रूप में 800 रुपये का भुगतान करना होगा वहीं एससी/ एसटी के लिए एप्लीकेशन फीस 650 तय की गई है। आवेदन शुल्क डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड एवं नेट बैंकिंग के माध्यम से जमा किया जा सकता है। ऑल इंडिया सैनिक स्कूल एंट्रेस एग्जाम (AISSEE 2025) से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए स्टूडेंट्स या माता पिता ऑफिशियल वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं। recent visitors 167

नई दिल्ली सहित दिल्ली के अन्य बड़े स्टेशनों पर पार्किंग शुल्क में हुई कटौती, अब काम देना होंगे पैसे: रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव

नई दिल्ली नई दिल्ली सहित दिल्ली के अन्य बड़े स्टेशनों पर कैब और आटो पार्किंग के शुल्क में कमी कर दी गई है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशनों पर आटो व कैब चालकों और कुलियों से मुलाकात करने के बाद इसकी घोषणा की। कैब चालक को अब 12 सौ रुपये प्रति माह की जगह चार सौ और ऑटो चालकों को सात सौ की जगह मात्र दो सौ रुपये पार्किंग देना होगा। कुलियों की समस्या भी हल करने का आश्वासन दिया। मंत्री ने मौके पर ही पार्किंग शुल्क में कमी की घोषणा की प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा के साथ नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर पहुंचे। कैब व आटो चालकों और कुलियों के प्रतिनिधियों ने उनसे मुलाकात कर मांग पत्र सौंपा। मंत्री ने मौके पर ही पार्किंग शुल्क में कमी की घोषणा कर दी। कुलियों ने प्रत्येक स्टेशन पर आराम घर बनाने, परिवार को 20 लाख रुपये तक की बीमा व उपचार की सुविधा देने, बच्चों की पढ़ाई की सुविधा देने और वर्दी की समस्या हल करने की मांग की। रेल मंत्री ने कहा, 50 से अधिक कुली जिस स्टेशन पर होंगे उन्हें आराम घर मिलेगा।   कुलियों की समस्याओं का समाधान करने का भी दिया आश्वासन आयुष्मान योजना के अंतर्गत उनका व उनके स्वजनों का उपचार, रेलवे स्कूल में बच्चों को पढ़ाई की सुविधा मिलेगी। वर्दी की समस्या हल होगी। उन्होंने कुलियों को यात्रियों से अच्छे व्यवहार की सलाह दी। कहा, ऐसा कोई काम नहीं होने चाहिए जिससे कि उन्हें व रेलवे को लेकर यात्रियों के मन में गलत धारना बने। इस मौके पर ऑटो रिक्शा संघ के महामंत्री राजेंद्र सोनी सहित अन्य लोग उपस्थित थे। recent visitors 88

पीएमओ ने कहा- इन आउटलेट्स के जरिए दवाइयों की खरीद करने से नागरिकों को 5,020 करोड़ की बचत हुई, नवंबर तक बिकी 1,255 करोड़

नई दिल्ली जन औषधि केंद्रों से नवंबर 2024 के अंत तक 1,255 करोड़ रुपये से अधिक की सस्ती दवाइयों की बिक्री हुई है। यह जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) द्वारा दी गई। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पीएमओ ने कहा कि इन आउटलेट्स के जरिए दवाइयों की खरीद करने से नागरिकों को 5,020 करोड़ रुपये की बचत हुई है। जन औषधि केंद्र विशेष केंद्र हैं जो आम जनता को किफायती दामों पर गुणवत्तापूर्ण दवाइयां उपलब्ध कराते हैं। इसकी स्थापना प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (पीएमबीजेपी) के तहत की गई थी, जो नवंबर 2008 में शुरू की गई एक जन कल्याणकारी योजना है। इस योजना को फार्मास्यूटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइस ब्यूरो ऑफ इंडिया (पीएमबीआई) के माध्यम से क्रियान्वित किया जा रहा है। इससे पहले रसायन और उर्वरक मंत्रालय ने बताया कि नवंबर 2024 तक देशभर में 14,320 जन औषधि केंद्र खोले जा चुके हैं। 2023-24 में फार्मास्यूटिकल्स विभाग के तहत पीएमबीआई ने 1,470 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज की थी, जिससे नागरिकों को लगभग 7,350 करोड़ रुपये की बचत हुई थी।पिछले 10 वर्षों में इस परियोजना के तहत लगभग 30,000 करोड़ रुपये की बचत हुई है। 2024 में पीएमबीजेपी ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड और असम राइफल्स (सीएपीएफ, एनएसजी और एआर) के साथ कई एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे, जिससे सीएपीएफ, एनएसजी और एआर (एमएचए) अस्पतालों में जन औषधि दवाएं उपलब्ध करा कर स्वास्थ्य सेवा पहुंच को बढ़ाया जा सके। इसके अलावा मॉरीशस में पहला विदेशी जन औषधि केंद्र खोला जा चुका है। मंत्रालय ने कहा कि फार्मास्यूटिकल्स विभाग ने भी चालू वित्त वर्ष के दौरान 500 करोड़ रुपये के कुल वित्तीय परिव्यय के साथ फार्मास्युटिकल उद्योग को मजबूत करने के लिए एक योजना लागू की है। इस योजना का उद्देश्य देश भर में मौजूदा फार्मा क्लस्टरों और एमएसएमई को उनकी उत्पादकता, गुणवत्ता और एमएसएमई क्लस्टरों में सुधार करने के लिए सहायता प्रदान करना है। recent visitors 94

खो खो फेडरेशन ने विश्वकप मैचों के नियम किये अधिसूचित, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मैचों में तत्काल प्रभाव से लागू होंगे

नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय खो खो फेडरेशन ने 13 से 19 जनवरी तक नई दिल्ली में होने वाले वाले खो खो विश्वकप मैचों के लिए नए नियम अधिसूचित कर दिये गये है। यह नियम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खो खो मैचों में तत्काल प्रभाव से लागू होंगे। अंतरराष्ट्रीय खो खो फेडरेशन के अध्यक्ष सुधांशु मित्तल ने बताया कि खो खो मैच की अवधि 50 मिनट की होगी और मैच से पहले टॉस के जरिए दोनों टीमों को अटैकिंग और डिफेंस का विकल्प चुनने का मौका मिलेगा। प्रत्येक टीम में 15 खिलाड़ी होंगे जिनमें से 12 खिलाड़ी मैदान में खेलेंगे जबकि तीन बचे खिलाड़ी स्थानापन्न(सब्स्टिटूट) होंगे। जारी नियमों के मुताबिक सेंट्रल लेन को पार करना, जल्दी उठ जाना, पीछे हटना और दिशा बदलना फाउल माना जायेगा। खो खो विश्वकप के लिए खेल का मैदान का आकार 26 बाई 20 मीटर आयताकार होगा। प्रत्येक मैच दो पारी का होगा। प्रत्येक पारी सात मिनट की अटैकिंग और डिफेंसिव टर्न में विभाजित होगी। प्रत्येक पारी के बाद चार मिनट का विश्राम होगा और टर्न के बीच तीन मिनट का ब्रेक होगा। टर्न के शुरुआत में तीन डिफेंडर्स बैच खेल के मैदान में होगा। जब तीनों डिफेंडर्स को आउट घोषित कर दिया जायेगा तो 30 सेकेंड का ब्रेक मिलेगा और डिफेंडर्स के अगले बैच को 30 सेकेंड के अन्दर मैदान में प्रवेश करना पड़ेगा और अगर वह निर्धारित समय अवधि के अन्दर खेल के मैदान में प्रवेश नहीं करते हैं तो उन्हें लेट एंट्री के लिए आउट करार दिया जायेगा। अगर डिफेंडिंग टीम का कोई बैच तीन मिनट तक मैदान में डटा रहता है तो उसे एक अतिरिक्त अंक प्रदान किया जायेगा और इसके बाद प्रत्येक 30 सेकंड के लिए एक अतिरिक्त अंक मिलता रहेगा। ‘खो’ को कार्यान्वित करने के लिए उकडूर बैठे हुए अटैकर की पीठ को अपनी हथेली-हाथ से छूएगा और तत्काल जोर से ‘खो’ शब्द का उच्चारण करेगा जोकि अंपायर और रेफरी को सुनाई देना चाहिए। अटैकिंग टीम को प्रत्येक सफल आउट के लिए दो अंक मिलेंगे। प्रत्येक टीम को दो रिव्यू की अनुमति होगी। दो पारी के अंत में ज्यादा नम्बर पाने वाली टीम विजयी होगी।   recent visitors 216

ISRO New Chairman: कौन हैं वी नारायणन, जो बनेंगे ISRO के नए चीफ, एस सोमनाथ की लेंगे जगह

ISRO New Chairman: Who is V Narayanan, who will become the new chief of ISRO, will replace S Somnath V Narayanan: भारत सरकार ने घोषणा की है कि वी नारायणन ISRO के नए अध्यक्ष के रूप में एस सोमनाथ की जगह लेंगे. वह 14 जनवरी से ISRO के अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग के सचिव के रूप में कार्यभार संभालेंगे नई दिल्ली । Indian Space Program: भारत सरकार ने मंगलवार (7 जनवरी) को घोषणा की कि वी नारायणन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के नए अध्यक्ष के रूप में एस सोमनाथ की जगह लेंगे. वी नारायणन 14 जनवरी से ISRO के अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालेंगे और साथ ही वह अंतरिक्ष विभाग के सचिव का पद भी संभालेंगे. नियुक्ति समिति के आदेश के अनुसार वी नारायणन अगले दो सालों तक या आगामी आदेश तक इन दोनों महत्वपूर्ण पदों पर काम करेंगे. इस घोषणा के साथ ही ISRO के इतिहास में एक और अहम बदलाव आया है जो भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के भविष्य को नई दिशा देने में सहायक साबित हो सकता है. वी नारायणन की नियुक्ति एक अहम कदम है क्योंकि उनका अनुभव और योगदान भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में उल्लेखनीय रहा है. वह एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक हैं और उनके नेतृत्व में ISRO और भी नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है. कौन हैं वी नारायणन? वी नारायणन एक जाने माने सम्मानित वैज्ञानिक हैं जिनके पास रॉकेट और स्पेसक्राफ्ट प्रपल्शन के क्षेत्र में लगभग चार दशकों का अनुभव है. उन्होंने 1984 में भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ISRO से जुड़कर कई अहम भूमिकाओं में काम किया है. आजकल वह लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम सेंटर (LPSC) के निदेशक के तौर पर कार्यरत हैं जो ISRO का एक प्रमुख केंद्र है. उनकी वैज्ञानिक यात्रा की शुरुआत विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) से हुई जहां उन्होंने Augmented Satellite Launch Vehicle (ASLV) और Polar Satellite Launch Vehicle (PSLV) के विकास में अहम योगदान दिया. इसके अलावा उन्होंने कई प्रमुख प्रणालियों जैसे Ablative नोजल सिस्टम, कॉम्पोजिट मोटर केस और कॉम्पोजिट इग्निटर केस के निर्माण और परीक्षण में भी अहम भूमिका निभाई. वी नारायणन ने ISRO के अंतरिक्ष मिशनों को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है जिससे भारत को अंतरिक्ष क्षेत्र में एक अग्रणी राष्ट्र बनने में मदद मिली है. वी नारायणन के योगदान और उपलब्धियां वी नारायणन का योगदान ISRO के तकनीकी विकास और अंतरिक्ष मिशनों में अहम रहा है. उनके किए गए कार्यों ने भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान को नई दिशा दी है.  1984 में ISRO से जुड़ना: वी नारायणन ने 1984 में ISRO को जॉइन किया था और इसके बाद उन्होंने संस्थान के विकास में एक मजबूत नींव रखी. रॉकेट और स्पेसक्राफ्ट प्रोपल्शन में विशेषज्ञता: उन्होंने रॉकेट प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी और स्पेसक्राफ्ट प्रोपल्शन के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल की और कई अहम प्रोजेक्ट्स पर काम किया. LPSC के निदेशक के रूप में काम: वह वर्तमान में लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम सेंटर (LPSC) के निदेशक हैं जहां उन्होंने कई एडवांस्ड सिस्टम्स का विकास किया है.  उन्होंने Ablative नोजल सिस्टम, कॉम्पोजिट मोटर केस और कॉम्पोजिट इग्निटर केस के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जो ISRO के सफल मिशनों का हिस्सा बने. स्पैडेक (Space Docking Technology) का प्रक्षेपण: हाल ही में उन्होंने स्पैडेक एक स्वदेशी अंतरिक्ष डॉकिंग तकनीकी प्रणाली का सफल प्रक्षेपण किया जो भारत के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है. चंद्रयान 4 और गगनयान के लिए महत्वपूर्ण तकनीक ISRO ने हाल ही में अपनी प्रमुख उपलब्धियों में से एक को हासिल किया है जिसमें स्पैडेक (Space Docking Technology) का सफल प्रक्षेपण शामिल है. ये तकनीक भारत को उन देशों के साथ खड़ा करती है जिनके पास अंतरिक्ष में डॉकिंग करने की तकनीकी क्षमता है जैसे कि अमेरिका, रूस और चीन. इस तकनीक के सफल परीक्षण ने भारत को अंतरिक्ष में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद की है. ये तकनीक आगामी मिशनों जैसे चंद्रयान 4 और गगनयान के लिए अहम साबित होगी. इसके अलावा ISRO के नए अध्यक्ष के रूप में वी नारायणन की नियुक्ति के बाद भारतीय अंतरिक्ष मिशनों की गति और उन्नति की उम्मीदें और भी बढ़ गई हैं. उनके नेतृत्व में ISRO को नई ऊंचाइयों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा क्योंकि उनका अनुभव और दिशा-निर्देशन भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर और भी प्रासंगिक बना सकता है recent visitors 477

बर्फीली हवाओं से ठिठुरा मध्यप्रदेश: भोपाल सहित कई जिलों में आज शीतलहर चलेगी; 10 जनवरी से बदलेगा मौसम

Madhya Pradesh shivers due to icy winds: Cold wave will prevail in many districts including Bhopal today; Weather will change from January 10 भोपाल । जनवरी में दूसरी बार मध्यप्रदेश कड़ाके की ठंड से ठिठुर गया है। बर्फीली हवाओं की वजह से भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन समेत पूरे प्रदेश में दिन-रात के टेम्परेचर में 2 से 3 डिग्री तक की गिरावट हुई है। मौसम विभाग के मुताबिक, अगले 3 दिन तक कड़ाके की ठंड पड़ेगी। वहीं, 10 जनवरी से बादल और बूंदाबांदी वाला मौसम रहेगा। 12 जनवरी को कई शहरों में हल्की बारिश होने का अनुमान है। उत्तर भारत में वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) की एक्टिविटी के बाद सर्द हवा की रफ्तार बढ़ गई है। मंगलवार को 12.5 किमी की ऊंचाई पर 250 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से जेट स्ट्रीम हवाएं बही, जिसका असर पूरे प्रदेश में देखने को मिला। 8, 9 और 10 जनवरी को भी सर्द हवाओं का असर रहेगा। बुधवार को प्रदेश के आधे हिस्से में कोहरे का असर रहेगा। वहीं, ग्वालियर-चंबल और सागर संभाग के जिलों में शीतलहर चलेगी। बर्फ पिघलने से और बढ़ेगी ठंड जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, लद्दाख में बर्फबारी हुई है। यह बर्फ अब पिघल रही है। ऐसे में हवा की रफ्तार भी तेज हो गई है। मौसम विभाग के अनुसार, जनवरी में प्रदेश का मौसम ठंडा ही रहेगा।20 से 22 दिन तक शीतलहर चलने का अनुमान है। जनवरी के पहले सप्ताह में कड़ाके की ठंड पड़ी। वहीं, अब दूसरा दौर शुरू हुआ है। इस सप्ताह ऐसा रहेगा मौसम उत्तरी हवा के असर से दिन-रात के तापमान में गिरावट हुई है। अगले 3 दिन ऐसा ही मौसम बना रहेगा। उत्तर-पश्चिम भारत में 10 जनवरी को वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) एक्टिव होगा। इसके असर से 12 जनवरी से बूंदाबांदी हो सकती है। अगले 4 दिन ऐसा रहेगा मौसम 8 जनवरी: ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में शीतलहर का असर रहेगा। वहीं, भोपाल, उज्जैन, जबलपुर, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, नीमच, मंदसौर, रतलाम, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, राजगढ़, विदिशा, सीहोर, नर्मदापुरम, रायसेन, नरसिंहपुर, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी में मध्यम से घना कोहरा छाया रहेगा। 9 जनवरी: मौसम साफ रहेगा, लेकिन ठंड का असर बना रहेगा। 10 जनवरी: ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में कहीं-कहीं हल्की बारिश के आसार हैं। 11 जनवरी: ग्वालियर, मुरैना, श्योपुर, भिंड, दतिया, निवाड़ी, छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना, सतना और रीवा में भी बारिश होने के आसार हैं। recent visitors 321

HMP वायरस के इलाज में एंटीबायोटिक्स की कोई भूमिका नहीं, यह अपने आप ठीक हो जाता है: AIIMS डॉ. रणदीप गुलेरिया

नई दिल्ली देशभर में मानव मेटान्यूमोवायरस (HMPV) के मामलों में इजाफा हो रहा है। मगर स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि लोगों को पैनिक होने की जरूरत नहीं है। इस बीच अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के पूर्व निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने मंगलवार को कहा कि ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस के इलाज में एंटीबायोटिक्स की कोई भूमिका नहीं है। यह श्वसन से जुड़ी बीमारी है। उन्होंने लोगों से पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और पौष्टिक भोजन लेने की सलाह दी है। काफी पुराना है HMPV उन्होंने कहा कि यह वायरस नया नहीं है। यह काफी पहले से ही मौजूद है। इसमें केवल हल्का संक्रमण होता है। मगर शिशुओं, बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों में यह निमोनिया का कारण बन जाता है। इस वजह से सांस लेने में दिक्कत आती है। अस्पताल में भी भर्ती होना पड़ सकता है। डॉ. रणदीप गुलेरिया के मुताबिक यह वायरस आमतौर पर अपने आप ही ठीक हो जाता है। अगर बुखार आ रहा है तो दवा लें, पानी पीते रहें और अच्छा पोषण वाला खाना लें। भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि संक्रमण होने पर भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें। इससे संक्रमण का फैलाव नहीं होगा। वायरस का इलाज सिर्फ लक्षणात्मक है। बुखार और शरीर के दर्द को कम करने के लिए अच्छी मात्रा में पानी पियें। अगर खांसी और जुकाम जैसे लक्षण हैं तो एंटी-एलर्जिक दवा ली जा सकती है। उन्होंने कहा कि इसकी कोई विशिष्ट एंटीवायरल दवा नहीं है। यह एक वायरल संक्रमण है। इस वजह से इसमें एंटीबायोटिक्स लेने की कोई अहम भूमिका नहीं है। सर्दी होने पर बच्चों को घर पर ही रखें डॉ. गुलेरिया ने कहा कि अगर बच्चे को बुखार, सर्दी और खांसी है तो उन्हें कम से कम 5 से 7 दिनों तक घर पर रहना चाहिए, ताकि बच्चा स्कूल में दूसरों में संक्रमण न फैलाए। उन्होंने लोगों को नियमित हाथ होने और मास्क पहनने की सलाह दी है, ताकि फ्लू जैसी सांस की बीमारियों से बचा जा सके। उन्होंने कहा कि कोविड-19 से जो सबक हमने सीखा है, उसका सभी को पालन करना चाहिए। यह न केवल एचएमपीवी से बल्कि कोविड समेत अन्य इन्फ्लूएंजा संबंधी वायरस से भी बचाएगा। देशभर में कुल सात मामले देशभर में HMPV के कुल सात मामले सामने आ चुके हैं। कर्नाटक और तमिलनाडु में दो-दो और गुजरात में एक मामला रिपोर्ट किया गया है। यह सभी मामले 3 महीने से 13 वर्ष तक के बच्चों के हैं। स्थिति पर बारीकी से नजर: जेपी नड्डा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने एक वीडियो संदेश में कहा कि एचएमपीवी कोई नया वायरस नहीं है। इसकी पहली बार 2001 में पहचान की गई थी। यह कई वर्षों से पूरी दुनिया में फैल रहा है। यह श्वसन के जरिए हवा के माध्यम से फैलता है। खास बात यह है कि यह वायरस हर उम्र के लोगों को प्रभावित करता है। मगर सर्दियों में यह अधिक फैलता है। जेपी नड्डा ने कहा कि चिंता की कोई वजह नहीं है। स्थिति पर बारीकी से नजर रखी जा रही है। recent visitors 126