“प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की दो दशकों से अधिक की सफलता” के उपलक्ष्य में आयोजित विशेष कार्यक्रम में शामिल होंगे मंत्री पटेल

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की सफलता और आगामी कार्ययोजना पर होगा विशेष कार्यक्रम "प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की दो दशकों से अधिक की सफलता" कार्यक्रम में  पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री पटेल भी होंगे शामिल "प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की दो दशकों से अधिक की सफलता" के उपलक्ष्य में आयोजित विशेष कार्यक्रम में शामिल होंगे मंत्री पटेल भोपाल पंचायत एवं ग्रामीण विकास, श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल एवं राज्य मंत्री श्रीमती राधा सिंह मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण (एमपीआरआरडीए) द्वारा "प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की दो दशकों से अधिक की सफलता" के उपलक्ष्य में आयोजित विशेष कार्यक्रम में शामिल होंगे। कार्यक्रम 24 दिसंबर को कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर भोपाल में प्रातः 9:30 बजे आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में प्रमुख सचिव श्रीमती दीपाली रस्तोगी और ग्रामीण विकास मंत्रालय संयुक्त सचिव अमित शुक्ला उपस्थित रहेंगे। इस अवसर पर एमपीआरआरडीए द्वारा योजना के तहत राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में किए गए विकास कार्यों की उपलब्धियां भी साझा की जाएंगी। पीएमजनमन योजना के कार्य, पुल पुलिया निर्माण, प्राधिकरण के नवाचार संवेग, ई मार्ग, संपर्क विहीन वन ग्राम जोड़ने, पीएमजीएसवाय के तहत मिसिंग लिंक जोड़ने के साथ आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। कार्यक्रम में विभिन्न विषय विशेषज्ञों द्वारा निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, नवाचार और तकनीकी उपयोग, नैनो टेक्नोलॉजी और व्हाइट टॉपिंग एवं माइक्रो सरफेसिंग जैसी उन्नत तकनीकों पर प्रस्तुतिकरण दिया जाएगा। इस दौरान निर्माण सामग्री के उपयोग, संधारण व्यवस्थाओं और योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही चुनौतियों पर भी चर्चा होगी। योजना की भविष्य की रणनीतियों और लक्ष्यों को भी साझा किया जायेगा। पीएमजीएसवाय में राज्य ने हासिल किए अभूतपूर्व लक्ष्य प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत:(पीएमजीवाय) राज्य ने ग्रामीण संपर्कता के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 97.91 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त किया है। इस योजना के तहत प्रदेश में कुल 20 हजार 227 मार्गों का निर्माण हुआ, जिनकी कुल लंबाई 89 हजार 612 किलोमीटर है। साथ ही, 1,377 वृहद पुलों का निर्माण कर 17,537 बसाहटों को मुख्य मार्गों से जोड़ा गया। मध्यप्रदेश ने पीएम जनमन योजना के अंतर्गत देश में पहली सड़क का निर्माण प्राधिकरण द्वारा किया गया। पांच वर्ष गारंटी अवधि (DLP), पांच वर्ष पश्चात संधारण (MTN), दस वर्ष पश्चात संधारण (PTN) और पंद्रह वर्ष पश्चात संधारण (FTN) के तहत 27 हजार 67 मार्गों जिनकी लंबाई 95 हजार 747 किलोमीटर लंबाई का नियमित संधारण सुनिश्चित किया जा रहा है। नेशनल क्वालिटी मॉनीटर द्वारा निरीक्षण में प्रदेश ने 91.40 प्रतिशत संतोषजनक परिणाम हासिल कर, उच्च निरीक्षण वाले अग्रणी राज्यों में स्थान प्राप्त किया है। पिछले तीन वर्षों में निर्माण गुणवत्ता और अधिकतम सड़क लंबाई के लिए मध्य प्रदेश को भारत सरकार द्वारा सम्मानित किया गया है। सड़क निर्माण में नवाचार के तहत वेस्ट प्लास्टिक का उपयोग करते हुए प्रदेश में 10 हजार 290 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण किया गया, जो देश में सर्वाधिक है। आरआरडीए द्वारा विकसित ई-मार्ग सॉफ्टवेयर को पूरे देश में लागू किया गया है। इसके अतिरिक्त डीएलपी पश्चात सड़कों के संधारण के लिए विकसित मॉडल का भी देशभर में अनुकरण किया जा रहा है।   recent visitors 39

कौशल विकास प्रशिक्षण योजनाओं पर 32 विभागों ने आपसी समन्वय पर की चर्चा

आधुनिक युग की मांग के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण योजनाओं के समन्वय पर कार्यशाला आयोजित सचिव रघुराज राजेन्द्रन ने कहा कि आधुनिक समय में कौशल विकास योजनाओं को इस तरह से तैयार किया जाना चाहिए, जो रोजगारोन्मुखी हो कौशल विकास प्रशिक्षण योजनाओं पर 32 विभागों ने आपसी समन्वय पर की चर्चा भोपाल तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग द्वारा  वल्लभ भवन, मंत्रालय में कौशल प्रशिक्षण योजनाओं को आधुनिक युग की मांगों के अनुरूप तैयार करने और अधिकाधिक युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में 31 विभागों ने कौशल विकास प्रशिक्षण योजनाओं पर आपसी समन्वय पर गहन चर्चा की। कार्यशाला की अध्यक्षता तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार सचिव रघुराज राजेन्द्रन (आईएएस) ने की। सचिव रघुराज राजेन्द्रन (आईएएस) ने कहा कि आधुनिक समय में कौशल विकास योजनाओं को इस तरह से तैयार किया जाना चाहिए, जो रोजगारोन्मुखी हो। उन्होंने कहा कि कौशल विकास को प्रोत्साहित करने के लिए दसवीं, ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों को आईटीआई परिसरों का दौरा करवाना चाहिए, जहां वे विभिन्न ट्रेड्स और कैरियर विकल्पों को समझ सकें। इसके साथ ही विद्यार्थियों के लिए पर्सनालिटी डेवलपमेंट क्लासेस और कैरियर गाइडेंस प्रोग्राम आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि वे अपनी रुचि और क्षमताओं के अनुरूप अपने कैरियर की योजना बना सकें। सचिव राजेन्द्रन ने इस बात पर जोर दिया कि स्कूल के बाद विद्यार्थी समानांतर रूप से कई ट्रेड्स में प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं, जिससे उनके कौशल और रोजगार के अवसरों में व्यापकता आएगी। उन्होंने ग्रामीण और जनजाति समुदायों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन समुदायों के लोगों को उनके पारंपरिक व्यवसायों में और अधिक कुशल बनाने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाने चाहिए। यह पहल उनके रोजगार को मजबूत करने और उनकी आजीविका में सुधार लाने में सहायक होगी। कार्यशाला का उद्देश्य विभिन्न विभागों में संचालित कौशल प्रशिक्षण योजनाओं का समन्वय करना और उन्हें साझा प्लेटफॉर्म पर लाने के उपायों पर चर्चा करना था। सचिव राजेन्द्रन ने कहा कि कौशल प्रशिक्षण को उद्योगों की वर्तमान मांगों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन एनर्जी, सर्कुलर इकोनॉमी और डिजिटल उद्यमिता से जोड़कर प्रदेश के युवाओं को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना आज की आवश्यकता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य कुशल कार्यबल तैयार करने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि विभागों के बीच समन्वय और संसाधनों को सांझा करने से कौशल विकास योजनाओं का प्रभाव और भी बढ़ेगा। कार्यशाला में विभिन्न विभागों ने अपने-अपने प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी साझा की। औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, महिला एवं बाल विकास, किसान कल्याण, सामाजिक न्याय, उच्च शिक्षा, ऊर्जा, खेल एवं युवा कल्याण सहित अन्य विभागों ने अपनी योजनाओं और उनकी उपलब्धियों को प्रस्तुत किया। कई विभागों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि उनके हितग्राही अन्य विभागों द्वारा संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रमों से भी लाभान्वित हो सकते हैं। संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क के संचालक जी.एन. अग्रवाल ने विभाग की प्रमुख पहलों जैसे 7A, QUEST, DISHA, HUNAR, DAKSH, VIDYUT, SRIJAN, PUNARJANI और Project CODE का विस्तृत विवरण दिया। कौशल विकास संचालनालय के अतिरिक्त संचालक एम.जी. तिवारी और मध्यप्रदेश राज्य कौशल विकास एवं रोजगार निर्माण बोर्ड के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी एन.पी.एस. सेंगर ने भी अपने-अपने संस्थानों द्वारा संचालित योजनाओं और उपलब्धियों का विवरण साझा किया। अपर सचिव गिरीश शर्मा ने समापन सत्र में कहा कि यह कार्यशाला कौशल विकास के क्षेत्र में समन्वय और सहभागिता को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर देने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए सभी विभागों का सक्रिय सहयोग आवश्यक है। हर विभाग को अपनी प्रशिक्षण योजनाओं को आधुनिक युग की चुनौतियों और अवसरों के अनुरूप तैयार करना चाहिए। इस अवसर पर संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क के संचालक अग्रवाल, ग्लोबल स्किल्स पार्क के संचालक (एक्सटर्नल रिलेशन) नीरज सहाय सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।   recent visitors 35

मंत्री सारंग ने कहा विभिन्न सातों विधाओं में हमारे युवाओं के उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिये बेहतर तैयारी की जाये

राज्य स्तरीय युवा उत्सव जनवरी-2025 में मनाया जायेगा: मंत्री सारंग  मंत्री सारंग ने राज्य स्तरीय युवा उत्सव मनाने के संबंध में संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये मंत्री सारंग ने कहा विभिन्न सातों विधाओं में हमारे युवाओं के उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिये बेहतर तैयारी की जाये भोपाल खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा है कि राज्य स्तरीय युवा उत्सव जनवरी-2025 में मनाया जायेगा। इसमें विभिन्न विधाओं में युवा प्रदर्शन कर सकेंगे। मंत्री सारंग ने राज्य स्तरीय युवा उत्सव मनाने के संबंध में संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये। मंत्री सारंग ने कहा कि विभिन्न सातों विधाओं में हमारे युवाओं के उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिये बेहतर तैयारी की जाये। युवा उत्सव में भाषण, विज्ञान मेला, कविता लेखन, कहानी लेखन, समूह लोकगीत, समूह लोकनृत्य और पेंटिंग सहित 7 विधाएं शामिल है। मंत्री सारंग ने कहा कि राज्य स्तरीय युवा उत्सव उत्साहपूर्वक मनाया जाये। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित अन्य गणमान्य अतिथियों को भी आमंत्रित किया जाये। साथ ही सभी विधाओं का उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिये युवाओं को प्रोत्साहित किया जाये। मंत्री सारंग को बताया गया कि सातों विधाओं के युवा राष्ट्रीय युवा उत्सव में शामिल होंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मंशा अनुरूप 15 से 29 वर्ष की आयु वर्ग के युवाओं की प्रतिभा को मंच प्रदान करने के उद्देश्य से 12 से 16 जनवरी के मध्य नई दिल्ली में 28वें राष्ट्रीय युवा उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इसमें जिला स्तर पर 18 से 26 दिसम्बर तक चयन किया जा रहा है। संभाग स्तर पर 3 से 5 जनवरी तक उत्कृष्ट युवाओं का चयन होगा। राज्य स्तर पर 7 या 8 जनवरी को कार्यक्रम प्रस्तावित है। राज्य स्तरीय युवा उत्सव-2025 के विजेताओं को समूह विधा में प्रथम आने पर 6 हजार, द्वितीय को 4 हजार और तृतीय को 2 हजार रूपये की राशि प्रदान की जायेगी। इसी प्रकार एक विधा में प्रथम को 10 हजार द्वितीय को 6 हजार और तृतीय को 4 हजार रूपये की पुरस्कार राशि दी जायेगी। बैठक में संचालक रवि कुमार गुप्ता, उप सचिव संजय जैन, संयुक्त संचालक बी.एल. यादव सहित अन्य खेल अधिकारी उपस्थित थे।   recent visitors 41

प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का भाव, भारतीय समाज की सभ्यता एवं विरासत : आयुष मंत्री परमार

वन समितियों में सहकार से समृद्धि के खुलेंगे द्वार : मंत्री सारंग  वन मेले से लघु वनोपजों के संग्रहण एवं विक्रय के नये अवसर मिलते हैं, जो विक्रय श्रृंखला के निर्माण में सहायक होते हैं : मंत्री सारंग प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का भाव, भारतीय समाज की सभ्यता एवं विरासत : आयुष मंत्री परमार अंतर्राष्ट्रीय वन मेला-2024 का हुआ समापन भोपाल खेल एवं युवा कल्याण, सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय वन मेला वनों, वन उत्पादों के प्रति जागरूकता को बढ़ाने के साथ ही दूरस्थ अंचलों के ग्रामीणों को सतत आजीविका के साधन उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण मंच है। वन मेले से लघु वनोपजों के संग्रहण एवं विक्रय के नये अवसर मिलते हैं, जो विक्रय श्रृंखला के निर्माण में सहायक होते हैं। मेले में वैद्यों द्वारा आयुर्वेद का ज्ञान देने के साथ वन से प्राप्त जड़ी-बूटियों को प्रदर्शित किया जाता है। मंत्री सारंग ने कहा कि भारतीय परम्परा में प्रकृति के साथ ज्ञान एवं व्यवहार अद्भुत एवं आश्चर्यजनक रहा है। उन्होंने सहकार से समृद्धि के साथ संस्कार से सहकार की बात कही। मंत्री सारंग लाल परेड ग्राउण्ड में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय वन मेले के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मंत्री सारंग ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय वन मेले को और अधिक भव्यता प्रदान की जायेगी। उन्होंने कहा कि वनोपज के संग्रहण और विक्रय में समितियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। वनांचलों में रहने वालों के सशक्तिकरण के लिये सहकार अत्यंत आवश्यक है। इससे ही वनों में रहने वालों का आर्थिक सशक्तिकरण होगा। मंत्री सारंग ने कहा कि वर्ष 2025 को अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस के रूप में मनाया जायेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश को सशक्त बनाने के लिये सहकार आंदोलन चलाया जायेगा। सहकार आंदोलन से सशक्त समाज का निर्माण होता है। मंत्री सारंग ने अंतर्राष्ट्रीय वन मेले के सफल आयोजन पर बधाई दी। उच्च शिक्षा एवं आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का भाव, भारतीय समाज की सभ्यता एवं विरासत है। मंत्री परमार ने कहा कि वन मेला भारतीय सम्पदा, सभ्यता एवं ज्ञान परम्परा को निरंतर आगे बढ़ाने के संकल्प का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि वन मेला का उद्देश्य मात्र प्रदर्शन नहीं, बल्कि जीवन पद्धति का व्यापक दृष्टिकोण है। आयुर्वेद भारत की पुरातन चिकित्सा पद्धति है, जो वन औषधियों पर आधारित है। हमारे देश में कृषि के बाद बड़ी आबादी आजीविका के लिये वनोपज पर ही निर्भर है। उनका उद्देश्य वनोपज का दोहन नहीं, बल्कि अपनी आवश्यकता अनुसार उपयोग के साथ वनों का संरक्षण करना भी है। मंत्री परमार ने कहा कि हमारे पूर्वज वनस्पती का महत्व जानते थे, इसलिये प्रकृति के संरक्षण के भाव से परम्परा एवं मान्यताएँ स्थापित कीं। उन्होंने कहा कि प्रकृति के अंग नदी, पेड़, पहाड़ एवं सूर्य आदि समस्त के प्रति कृतज्ञता का भाव इनके संरक्षण एवं लोक कल्याण निहित हैं। मंत्री परमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आयुर्वेद का आगे बढ़ाने का संकल्प जन-आंदोलन बन रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाला समय आयुर्वेद का है। मंत्री द्वय ने वन मेले में वनोपज एवं वन औषधियों के विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने वनोपज संघ की स्मारिका “व्यापार एवं विकास’’ एवं ईको-टूरिज्म की “अनुभूति’’ पुस्तिका का विमोचन किया। अंतर्राष्ट्रीय वन मेले में उत्कृष्ट प्रदर्शनी, जिला यूनियन, शासकीय एवं निजी स्टॉल, वन-धन केन्द्र एवं आयुर्वेदिक महाविद्यालयों के स्टॉल के उत्कर्ष प्रदर्शन के लिये प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। मंत्री सारंग, मंत्री परमार और भोपाल नगर निगम मेयर श्रीमती मालती राय को स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव, प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ विभाष कुमार ठाकुर, विभागीय अधिकारी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।   recent visitors 41

केन-बेतवा लिंक परियोजना से बदलेगी बुंदेलखंड क्षेत्र की तस्वीर और तकदीर

पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल जी के नदी जोड़ो अभियान का सपना म.प्र. की धरती पर हो रहा साकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री मोदी 25 दिसंबर को खजुराहो में केन-बेतवा लिंक परियोजना का करेंगे शिलान्यास बदलेगी बुंदेलखंड क्षेत्र की तस्वीर और तकदीर भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि देश की प्रथम केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना केन्द्र सरकार, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के मध्य परस्पर सहयोग एवं समन्वय का एक अनूठा उदाहरण है। पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के नदी जोड़ो अभियान के सपने को साकार करने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बीड़ा उठाया है। बहुउद्देशीय और महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना से मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के समूचे बुंदेलखंड क्षेत्र की तस्वीर और तकदीर बदलेगी। इस परियोजना से किसानों को जहां सिंचाई के लिए भरपूर जल उपलब्ध होगा, वहीं पेयजल और उद्योगों के लिए भी पर्याप्त पानी मिलेगा। क्षेत्र के आर्थिक, सामाजिक विकास के साथ ही पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। सूखाग्रस्त बुंदेलखंड क्षेत्र में भूजल की स्थिति भी सुधरेगी। मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश की तस्वीर और तकदीर बदलने वाली इस परियोजना का शिलान्यास करने प्रधानमंत्री मोदी 25 दिसंबर को छतरपुर जिले के खजुराहो आ रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना, देश में भूमिगत दाबयुक्त पाइप सिंचाई प्रणाली अपनाने वाली सबसे बड़ी सिंचाई परियोजना है। यह परियोजना मध्यप्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिले में केन नदी पर निर्मित की जा रही है। परियोजना के अंतर्गत पन्ना टाइगर रिजर्व में केन नदी पर 77 मीटर ऊँचाई एवं 2.13 किलोमीटर लंबाई के दौधन बांध एवं 2 टनल (अपर लेवल 1.9 कि.मी. एवं लोअर लेवल 1.1 कि.मी.) का निर्माण कर बांध में 2,853 मिलियन घन मीटर जल का भंडारण किया जायेगा। केन नदी पर दौधन बांध से 221 कि.मी. लंबी लिंक नहर के द्वारा दोनों राज्यों में सिंचाई एवं पेयजल की सुविधा प्रदाय करते हुये केन नदी के अधिशेष जल को बेतवा नदी में अंतरित किया जावेगा। परियोजना से दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के माध्यम से मध्यप्रदेश के 10 जिले पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, सागर, रायसेन, विदिशा, शिवपुरी एवं दतिया के 2 हजार ग्रामों में 8.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो सकेगी। इससे लगभग 7 लाख किसान परिवार लाभान्वित होंगे। केन- बेतवा परियोजना से उत्तरप्रदेश में 59 हज़ार हेक्टेयर क्षेत्र में वार्षिक सिंचाई सुविधा होगी एवं 1.92 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मौजूदा सिंचाई का स्थिरीकरण (Stabilisation) किया जावेगा, जिससे उत्तरप्रदेश के महोबा, झांसी, ललितपुर एवं बांदा जिलों में सिंचाई सुविधा प्राप्त होगी। परियोजना से मध्यप्रदेश की 44 लाख एवं उत्तरप्रदेशकी 21 लाख आबादी को पेयजल की सुविधा मिल सकेगी। साथ ही परियोजना से 103 मेगावाट जल विद्युत एवं 27 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन होगा। इसका सम्पूर्ण लाभ मध्यप्रदेश को प्राप्त होगा। परियोजना अंतर्गत विरासत में प्राप्त एतिहासिक चंदेल कालीन तालाबों को सहेजने का कार्य भी शामिल है। मध्यप्रदेश के छतरपुर, टीकमगढ़ एवं निवाड़ी जिलों में चंदेल कालीन 42 तालाबों का मरम्मत/जीर्णोधार किया जाकर वर्षाकाल में जल भराव होगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों को लाभ एवं भू-गर्भीय जलस्तर में बढ़ोत्तरी होगी। दौधन बांध के निर्माण से उत्तरप्रदेश के बांदा जिले को बाढ़ की विभीषिका से छुटकारा मिलेगा। दौधन जलाशय से पन्ना टाईगर रिजर्व में जंगली जानवरों को वर्षभर पेयजल मिलेगा एवं वन के पारिस्थितिकी-तंत्र में भी अभूतपूर्व सुधार होगा। मध्यप्रदेश की उदारवादी नीतियों के फलस्वरूप लगभग समस्त विस्थापितों द्वारा पुनर्वासन एवं पुनर्व्यस्थापन पैकेज को चुना गया है। परियोजना के निर्माण से कृषकों को उन्नत सिंचाई तकनीक से फसलों के उत्पादन में बढ़ोतरी के साथ उनके जीवन में समृद्धि और खुशहाली आएगी। साथ ही बुंदेलखंड भू-भाग में व्याप्त जल संकट से छुटकारा मिलेगा और रोजगार के लिए हो रहे पलायन पर भी रोक लगेगी। प्रदेश के सिंचाई रकबे में होगी अभूतपूर्व वृद्धि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की दो महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परियोजनाओं केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजनाओं से प्रदेश के सिंचाई रकबे में अभूतपूर्व वृद्धि होगी। प्रदेश में सिंचाई का रकबा निरंतर बढ़ रहा है। वर्ष 2003 में जहां प्रदेश का सिंचाई रकबा लगभग 3 लाख हेक्टेयर था, आज बढ़कर लगभग 50 लाख हेक्टेयर हो गया है। प्रदेश की निर्मित और निर्माणाधीन सिंचाई परियोजनाओं से प्रदेश में वर्ष 2025-26 तक सिंचाई का रकबा लगभग 65 लाख हेक्टेयर होने की संभावना है। सरकार ने वर्ष 2028-29 तक प्रदेश की सिंचाई क्षमता 1 करोड़ हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए प्रदेश में तेज गति से कार्य किया जा रहा है। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने बताया कि राज्य सरकार ने जल संसाधन विभाग के लिए बजट में पर्याप्त राशि का प्रावधान किया है। वर्ष 2024-25 के बजट में सिंचाई परियोजनाओं के निर्माण एवं संधारण के लिए 13,596 करोड रुपए का प्रावधान किया गया है। केन-बेतवा लिंक परियोजना – प्रमुख बिंदु              प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में परियोजना के कियान्वयन के लिए मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री के मध्य 22 मार्च 2021 को त्रिपक्षीय सहमति ज्ञापन (MOA) हस्ताक्षरित किया गया।              परियोजना की लागत राशि 44 हजार 605 करोड़ रूपये है।              परियोजना का व्यय निर्धारण केन्द्र सरकार द्वारा 90 प्रतिशत एवं राज्य सरकार द्वारा 10 प्रतिशत के अनुपात में है।              परियोजना से 8.10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी।              परियोजना से मध्यप्रदेश के 10 जिले छतरपुर, पन्ना, दमोह, टीकमगढ़, निवाडी, शिवपुरी, दतिया, रायसेन, विदिशा एवं सागर लाभान्वित होंगे।              02 हजार ग्रामों के लगभग 7 लाख 18 हजार किसान परिवार लाभान्वित होंगे।              10 जिलों की 44 लाख आबादी को पेयजल की सुविधा मिलेगी।              103 मेगावॉट विद्युत उत्पादन होगा।              सूखाग्रस्त बुंदेलखण्ड क्षेत्र में भूजल स्तर की स्थिति में सुधार, औद्योगीकरण, निवेश एवं पर्याटन को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। इससे स्थानीय स्तर पर लोगों में आत्मनिर्भरता आयेगी तथा लोगों का पलायन रूकेगा।   recent visitors 63

साल 2025 कितने दिन बंद रहेंगे स्‍कूल, ऑफिस और बैंक, कितने मिलेंगे लॉन्‍ग वीकेंड, जानिए

 बैंक यूजर्स के लिए जरूरी खबर है। नए साल में  जनवरी से दिसंबर महीने 40 से 50 दिन बैंक बंद रहने वाले है।इनमें त्यौहार, साप्ताहिक अवकाश और दूसरा चौथा शनिवार शामिल है। बैंक बंद रहने से चेकबुक पासबुक समेत कई बैंकिंग संबंधित काम प्रभावित हो सकते है, हालांकि ऑनलाइन सेवाएं जारी रहेंगी, जिनका आप उपयोग कर सकते है। दरअसल, भारत में बैंक की छुट्टियों में राष्ट्रीय अवकाश (राजपत्रित अवकाश) और सरकारी अवकाश (राज्य और केंद्र दोनों) शामिल हैं।  राज्य सरकार की बैंक छुट्टियां अलग अलग राज्यों में अलग-अलग होती हैं, जबकि केंद्र सरकार की बैंक छुट्टियाँ पूरे देश में एक जैसी रहती हैं।इनके अलावा भारतीय बैंक हर महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को बंद रहते हैं।इसके अलावा क्षेत्रीय छुट्टियां किसी विशेष राज्य या क्षेत्र से संबंधित होती हैं। एक राज्य में किसी दिन बैंक अवकाश होने का मतलब यह नहीं है कि दूसरे राज्य में भी छुट्टी होगी Bank Holiday : जनवरी से अप्रैल     नए साल का दिन – 1 जनवरी     गुरु गोबिंद सिंह जयंती – 6 जनवरी     स्वामी विवेकानंद जयंती – 12 जनवरी     मकर संक्रांति / पोंगल – 14 जनवरी     मोहम्मद हज़रत अली / लुई-नगाई-नी का जन्मदिन – 14 जनवरी     गणतंत्र दिवस – 26 जनवरी     बसंत पंचमी – 2 फरवरी     गुरु रविदास जयंती – 12 फरवरी     महाशिवरात्रि – 26 फरवरी     होली – 14 मार्च     बैंक खातों का वार्षिक समापन – 1 अप्रैल     बाबू जगजीवन राम जयंती – 5 अप्रैल     महावीर जयंती – 10 अप्रैल     तमिल नव वर्ष – 14 अप्रैल Bank Holiday : मई से अगस्त     गुरु रवींद्रनाथ टैगोर जयंती – 7 मई     बुद्ध पूर्णिमा – 12 मई     ईद-उल-जुहा (बकरीद) – 7 जून     गुरु अर्जुन देव शहीदी दिवस – 10 जून     रथ यात्रा – 27 जून     मुहर्रम – 6 जुलाई     रक्षाबंधन – 9 अगस्त     स्वतंत्रता दिवस – 15 अगस्त     जन्माष्टमी (वैष्णव) – 15 अगस्त     श्रीमंत शंकरदेव तिथि – 25 अगस्त     विनयगर चतुर्थी – 26 अगस्त Bank Holiday : सितंबर से दिसंबर     थिरुवोणम – 5 सितंबर     बैंक खातों का अर्ध-वार्षिक समापन – 1 अक्टूबर     महात्मा गांधी जयंती – 2 अक्टूबर     दशहरा – 2 अक्टूबर     दिवाली – 20 अक्टूबर     गोवर्धन पूजा – 22 अक्टूबर     छठ पूजा – 28 अक्टूबर     गुरु नानक जयंती – 5 नवंबर     क्रिसमस का दिन – 25 दिसंबर  वैकल्पिक या रेस्ट्रिक्टिड अवकाश     नया साल: 1 जनवरी (बुधवार)     गुरु गोबिंद सिंह जयंती: 6 जनवरी (सोमवार)     मकर संक्रांति/माघ बिहू/पोंगल: 14 जनवरी (मंगलवार)     बसंत पंचमी: 2 फरवरी (रविवार)     गुरु रविदास जयंती: 12 फरवरी (बुधवार)     शिवाजी जयंती: 19 फरवरी (बुधवार)     स्वामी दयानंद सरस्वती जयंती: 23 फरवरी (रविवार)     होलिका दहन: 13 मार्च (गुरुवार)     डोलयात्रा: 14 मार्च (शुक्रवार)     राम नवमी: 16 अप्रैल (रविवार)     जन्माष्टमी (स्मार्त): 16 अगस्त (शुक्रवार)     गणेश चतुर्थी/विनायक चतुर्थी: 27 अगस्त (बुधवार)     ओणम या तिरुओणम: 5 सितंबर (शुक्रवार)     दशहरा (सप्तमी): 29 सितम्बर (सोमवार)     दशहरा (महाष्टमी): 30 सितम्बर (मंगलवार)     दशहरा (महानवमी): 1 अक्टूबर (बुधवार)     महर्षि वाल्मिकी जयंती: 7 अक्टूबर (मंगलवार)     करक चतुर्थी (करवा चौथ): 10 अक्टूबर (शुक्रवार)     नरक चतुर्दशी: 20 अक्टूबर (सोमवार)     गोवर्धन पूजा: 22 अक्टूबर (बुधवार)     भाई दूज: 23 अक्टूबर (गुरुवार)     प्रतिहार षष्ठी या सूर्य षष्ठी (छठ पूजा): 28 अक्टूबर (मंगलवार)     गुरु तेग बहादुर का शहीदी दिवस: 24 नवंबर (सोमवार)     क्रिसमस की पूर्व संध्या: 24 दिसंबर (बुधवार) कब-कब मिलेंगे लॉन्‍ग वीकेंड 11 और 12 जनवरी को शनिवार व रविवार की छुट्टी है. 13 जनवरी को अवकाश ले लिया जाए तो 14 को मकर संक्रांति की छुट्टी मिल जाएगी. ऐसे में आप 11 से 14 जनवरी तक लॉन्‍ग वीकेंड पर जा सकते हैं. मार्च में 14 को होली है और 15 व 16 फरवरी को शनिवार व रविवार अवकाश है. इस तरह तीन दिन के लिए लॉन्‍ग ड्राइव पर जाया जा सकता है. इसी तरह 29 और 30 मार्च को शनिवार-रविवार है और 31 मार्च को ईद-उल-फितर की छुट्टी है. यानी तीन छुट्टियां इ‍क्‍ट्ठी हो रही है. अप्रैल में दो लॉन्‍ग वीकेंड मिलेंगे. 12,13,14 अप्रैल और 18 अप्रैल को गुड फ्राइडे और 19-20 अप्रैल को शनिवार और रविवार है. 15 अगस्त में स्वतंत्रता दिवस की छुट्टी के बाद 16 और 17 अगस्त को शनिवार व रविवार की छुट्टी मिल जाएगी. सितंबर में 5 तारीख को ईद ए मिलाद की छुट्टी है तो 6 और 7 सितंबर को शनिवार और रविवार की छुट्टी रहेगी. Bank User इन Online सेवाओं की ले सकते है Help बैंक की छुट्टियों के दौरान कस्टमर्स ऑनलाइन सेवाओं का उपयोग कर सकते है, क्योंकि यूपीआई (UPI), मोबाइल बैंकिंग (Mobile Banking), इंटरनेट बैंकिंग (Internet Banking) जैसी डिजिटल सेवाओं (Digital Banking) पर बैंक हॉलीडे का कोई असर नहीं होता है।     NET BANKING: बैंक की वेबसाइट या मोबाइल ऐप के जरिए आप नेट बैंकिंग का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें मनी ट्रांसफर ,बिलों का भुगतान और बैलेंस चेक की सुविधा उपलब्ध होती है।     Unified Payments Interface : पैसे ट्रांसफर करने के लिए यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) एक सुरक्षित तरीका है आपको केवल UPI ऐप जैसे Google Pay, PhonePe, Paytm आदि का इस्तेमाल करना होता है।     MOBILE BANKING: स्मार्टफोन पर बैंक की मोबाइल ऐप के जरिए आप कई सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं, जैसे फंड ट्रांसफर, मोबाइल रिचार्ज, यूटिलिटी बिल पेमेंट आदि।     ATM USE: पैसे निकालने, बैलेंस चेक करने और मिनी स्टेटमेंट प्राप्त करने के लिए एटीएम हमेशा उपलब्ध रहते हैं। एटीएम में कार्डलेस कैश विदड्रॉल जैसी सुविधाओं का भी उपयोग कर सकते हैं। recent visitors 280

कुंभ मेले में डिजिटल तकनीक के साथ AI का भी इस्तेमाल किया जा रहा

प्रयागराज प्रयागराज में जनवरी 2025 से शुरू हो रहे महाकुंभ मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर मेला प्रशासन तैयारियों में लगा है. इसी को लेकर उत्तर प्रदेश आपदा प्राधिकरण ने दो दिवसीय वर्कशॉप आयोजित किया. इसमें महाकुंभ में लगे अलग-अलग विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को बुलाया गया और उनसे तैयारियों की जानकारी ली गई. इस एक्सरसाइज में बताया गया कि पहले तो बेहतर मैनेजमेंट के जरिए किस तरह से आपदा को रोकना है, लेकिन अगर आपदा की कोई स्थिति आती है तो सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षित बचाकर किस तरह से हिफाजत करनी है. आपदा से बचने की तैयारी की जा रही है कुंभ को लेकर अलग-अलग विभागों में एक साथ समन्वय बना कर उन्हें ट्रेनिंग देने का काम उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की तरफ से किया जा रहा है. प्राधिकरण के वाइस चेयरमैन लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी खुद ही सरकारी विभागों के साथ वॉलिंटियर्स को ट्रेनिंग देने का काम कर रहे हैं. इसमें गूगल मैप और वीडियो फिल्म के जरिए मेला क्षेत्र की हकीकत से रूबरू के बारे में बताया जा रहा है और आपदा को किस तरह से रोका जा सकता है उसकी तैयारी की जा रही है. प्रयागराज के कुम्भ मेला के लिए उत्तर प्रदेश आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा सभी विभागों को एक साथ बुलाकर टेबलटॉप एक्सरसाइज कराई गई. एक्सरसाइज में महाकुंभ से जुड़े हर विभाग के बड़े अधिकारी शामिल हुए और मेला में सेक्टर वाइज बने अधिकारियों से आपदा से निपटने के लिए उनके द्वारा की जा रही तैयारियों का जायजा लिया गया. टेबलटॉप एक्सरसाइज़ को तीन सत्र में आयोजित किया गया. पहले सत्र में मेला क्षेत्र में पैदल एवं वाहन यातायात, आवश्यक सेवाएं, अन्य व्यवस्थाएं की स्थिति पर चर्चा की गई. दूसरे सत्र में मेला क्षेत्र के बाहर जनपद प्रयागराज की मुख्य सड़कों, रेलवे स्टेशन, बस स्टैन्ड इत्यादि में भीड़ प्रबंधन पर चर्चा की गई और तीसरे सत्र में मेला क्षेत्र के अंतर्गत अग्निशमन, डूबने और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम की संभावित स्थितियों पर विभागों की योजनाओं और प्रतिक्रियाओं पर चर्चा हुई. दो दिवसीय टेबल टॉप एक्सरसाइज समाप्त प्रयागराज के कुंभ मेला पुलिस लाइन मे टेबल टॉप एक्सरसाइज में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ पुलिस विभाग के साथ-साथ रेलवे,अग्निशमन विभाग के अधिकारी शामिल हुए. आपको बता दें कि कुंभ मेला 2025 के लिए अब तक की इसे सबसे बड़ी एक्सरसाइज माना जा रहा है. दो दिवसीय टेबल टॉप एक्सरसाइज समाप्त हो गई. वहीं अब कुछ दिनों बाद फील्ड पर उतरकर मार्क ड्रिल किया जाएगा. आपदा प्रबंधन विभाग किसी प्रकार से कोई लूप होल नहीं छोड़ना चाहता है. वहीं इसको लेकर बैठकों का दौर जारी है और प्रतिदिन जगह-जगह पर बैठक की जा रही है. जिससे कि अगर कोई आपदा होती है तो उसे फौरन निपटा जा सके. सुरक्षा- व्यवस्था के लिए AI तकनीक का प्रयोग महाकुंभ प्रबंधन के लिए डिजिटल तकनीक का महत्वपूर्ण उपयोग किया गया है. भीड़ प्रबंधन के लिए 2500 कैमरा, डिजिटल कम्यूनिकेशन, चैट बोट, इंटीग्रेटेड कंट्रोल और AI तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है. वहीं अब 24 दिसम्बर को मेला क्षेत्र के विभिन्न सेक्टरों में मॉक एक्सरसाइज़ किया जाएगा.   recent visitors 134