भाजपा की नई रणनीति को लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ी, नए मंत्रिमंडल से सीनियर नेताओं को बाहर किया जा सकता है

महाराष्ट्र महाराष्ट्र चुनाव में महायुति गठबंधन की जीत के बाद मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर ऐलान का इंतजार है। राज्य मंत्रिमंडल के गठन के लिए भी कोशिशें तेज हैं। इस बीच, भाजपा की नई रणनीति को लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ गई है। सूत्रों की मानें तो महायुति के नए मंत्रिमंडल से सीनियर नेताओं को बाहर किया जा सकता है। बताया जा रहा है कि युवा विधायकों को मौका देने की तैयारी है। बीजेपी के नेतृत्व वाली की सरकार में नई ऊर्जा भरने और भविष्य के चुनावों को ध्यान में रखते हुए इसे अहम माना जा रहा है। फिलहाल, पार्टी आलाकमान स्तर तक मुख्यमंत्री पद के नाम पर चर्चा चल रही है। इसके बाद देवेंद्र फडणवीस, अजित पवार और एकनाथ शिंदे अपनी-अपनी पार्टियों के कैबिनेट मंत्रियों के नाम आगे बढ़ाएंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा आलाकमान की ओर से तीनों नेताओं को एक रिपोर्ट सौंपी गई थी। इसमें बदलाव की जरूरत पर जोर दिया गया। हालांकि, लोकसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन न हो पाने पर इस योजना को टाल दिया गया। सूत्रों ने बताया कि महाराष्ट्र कैबिनट से किन चेहरों को बाहर किया जाएगा, यह काफी हद तक तय किया जा चुका है। इसे देखते हुए ही कहा जा रहा है कि अगले मंत्रिमंडल में तीनों दलों से नए चेहरे शामिल होंगे। कुछ दिग्गजों को आराम दिया जाएगा। हालांकि, उन्हें गठबंधन या अपने-अपने दलों के लिए काम करते रहना होगा। ‘50 साल से कम आयु के विधायकों को मिलेगा मौका’ सूत्रों की मानें तो भाजपा 50 साल से कम आयु के विधायकों को मंत्री पद के लिए प्राथमिकता देना चाहती है। इसका मकसद युवा मतदाताओं को पार्टी की ओर से आकर्षित करना है। ऐसा करने से अगले चुनाव में मजबूत प्रदर्शन की संभवना बढ़ जाएगी। नए लोग पार्टी और गठबंधन से जुड़ने के लिए आगे आएंगे। यह जरूर है कि इस घटनाक्रम को लेकर सीनियर विधायकों में चिंता पैदा हो गई है। कई लोगों को अपना मंत्री पद खोने का डर सताने लगा है। हालांकि, यह बात भी निकलकर सामने आ रही कि युवा और अनुभवी चेहरों के साथ मंत्रिमंडल में संतुलन बैठाने का प्रयास किया जाएगा। अजित पवार पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं। देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे के भी आज राष्ट्रीय राजधानी पहुंचने की उम्मीद है, जहां सीएम पद पर अंतिम मुहर लग सकती है। recent visitors 58

उत्तर प्रदेश के विधानसभा अध्यक्ष ने सभी विजयी उम्मीदवारों को शपथ दिलाई, मोदी-योगी के नेतृत्व पर जताई निष्ठा

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व और प्रभावी रणनीति के चलते उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दल राष्ट्रीय लोकदल ने उपचुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए 9 में से 7 सीटों पर जीत हासिल की। इसके बाद शुक्रवार को विधानसभा में नवनिर्वाचित विधायकों का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सभी विजयी उम्मीदवारों को शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विजयी प्रत्याशियों को शुभकामनाएं देते हुए इसे प्रदेश के विकास और जनता की आस्था की जीत बताया। जिन नवनिर्वाचित विधायकों ने शपथ ली उनमें कुंदरकी से रामवीर सिंह, फूलपुर से दीपक पटेल, खैर से सुरेंद्र सिंह, गाजियाबाद से संजीव शर्मा, कटेहरी से धर्मराज निषाद, मझवां से सुचिस्मिता मौर्य और मीरापुर से रालोद की मिथलेश पाल शामिल हैं। इन सभी उम्मीदवारों ने जनता के विश्वास और समर्थन का धन्यवाद करते हुए अपने क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता देने की बात कही। सभी ने एक स्वर में 'राष्ट्र प्रथम' के संकल्प को दोहराया, साथ ही मोदी-योगी के नेतृत्व के प्रति अपनी निष्ठा जताई। शपथ ग्रहण समारोह के बाद विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने नवनिर्वाचित सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा का सदस्य होना गौरव की बात है। जनता की सेवा का अवसर आपको मिला है। मुख्यमंत्री के कार्यों को लेकर अगर जनता के बीच में जाएं तो हर बार जीत आपको मिलेगी। आपके पास ढाई साल का समय है, उसे जनता के बीच ज्यादा से ज्यादा व्यतीत करें। इसके साथ ही आपकी उपस्थिति विधानसभा में भी दिखनी चाहिए। यहां आपकी परफॉर्मेंस ही जनता के बीच आपकी सक्रियता के संदेश के रूप में जाएगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री द्वय केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी, कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना सहित कई विधायक मौजूद रहे। बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचे के विकास और पारदर्शी प्रशासन पर जोर दिया गया है। उनकी सरकार की जनहितकारी योजनाओं जैसे उज्ज्वला योजना, मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली व सड़क परियोजनाओं ने लोगों का विश्वास मजबूत किया है। इसके अलावा, प्रदेश में अपराध नियंत्रण और धार्मिक स्थलों के पुनरुद्धार जैसे कदमों ने योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता को और बढ़ावा दिया है। परिणामस्वरूप यूपी विधानसभा उप चुनाव में भाजपा और सहयोगी दल रालोद के शानदार प्रदर्शन ने पार्टी के उत्साह में गजब का इजाफा किया है। वहीं, उपचुनाव में समाजवादी पार्टी और इंडी गठबंधन के तमाम दावे ध्वस्त हो गए। गठबंधन की तमाम कोशिशों और बड़े बड़े दावों के बावजूद, विपक्षी दल अपनी साख बचाने में नाकाम रहे। भाजपा और सहयोगी दलों की इस जीत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जनता का भरोसा योगी सरकार पर कायम है। इस ऐतिहासिक जीत के साथ भाजपा ने प्रदेश में अपनी मजबूत स्थिति का प्रमाण दिया है। recent visitors 80

कोलकाता में सड़कें जाम रहीं, बांग्लादेश में चल रहे संकट के खिलाफ हिंदू सड़कों पर, मुसलमान भी कर रहे हैं विरोध

कोलकाता पश्चिम बंगल की राजधानी कोलकाता में सड़कें जाम रहीं। हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। हिंदू संगठनों ने बांग्लादेश में चल रहे संकट के खिलाफ प्रदर्शन किया, वहीं मुस्लिम संगठनों ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित वक्फ संशोधन विधेयक के विरोध में प्रदर्शन किया। पश्चिम बंगाल स्टेट जमीयत-उल-उलमा की तरफ से विरोध में एक सभा आयोजित की गई। शहर के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग इस विरोध में शामिल हुए। उन्होंने वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ आवाज उठाई और साथ ही एक स्वतंत्र फिलिस्तीन राज्य की भी मांग की। इस सभा को जमीयत-उल-उलमा पश्चिम बंगाल के अध्यक्ष और राज्य के जन शिक्षा विस्तार व पुस्तकालय सेवा मंत्री सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने संबोधित किया। उन्होंने कहा, "भारत का संविधान हर नागरिक को स्वतंत्रता प्रदान करता है। यदि कोई संविधान में छेड़छाड़ करने की कोशिश करेगा, तो उसके खिलाफ विरोध होगा। वक्फ संशोधन विधेयक के माध्यम से सरकार ने सीधे संविधान पर हमला किया है। यह मुस्लिम समुदाय के अधिकारों को छीनने और वक्फ संपत्तियों को नष्ट करने की साजिश है।" हिंदू संगठनों का प्रदर्शन वहीं दूसरी ओर हिंदू संगठनों ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे कथित अत्याचारों पर प्रदर्शन किया। उन्होंने केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर हस्तक्षेप करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ा रुख अपनाने की मांग की। कोलकाता में यातायात व्यवस्था चरमराई इन दोनों बड़े प्रदर्शनों के चलते कोलकाता की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। शहर के महत्वपूर्ण मार्गों पर जाम लगा रहा और लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सरकार के खिलाफ बढ़ता विरोध मुस्लिम संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यदि वक्फ संशोधन विधेयक वापस नहीं लिया गया, तो राज्यभर में व्यापक प्रदर्शन किए जाएंगे। दूसरी ओर, हिंदू संगठनों ने भी बांग्लादेश के मामले पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। राजनीतिक हलकों में इन प्रदर्शनों को लेकर चर्चा तेज है। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ बंगाल में विरोध की यह लहर और तेज हो सकती है। recent visitors 93

एमपी नगर थाने के पास हुआ दर्दनाक हादसा, बस ने बाइक सवार तीन लोगों को रौंदा, दो लोगों की मौत

 भोपाल शहर के एमपी नगर इलाके में शुक्रवार सुबह एक तेज रफ्तार बस ने बाइक सवार तीन लोगों को रौंद दिया। इस हादसे में दो लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां पर उसकी हालत नाजुक बताई जा रही है। टक्कर मारने के बाद बाइक को बस करीब 50 मीटर तक घसीटते हुए ले गई थी। पुलिस ने इस मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। थाने के पास हुआ हादसा एमपी नगर थाना पुलिस के मुताबिक बाइक क्रमांक एमपी 20 एनएम 7243 पर सवार तीन युवक थाने से चंद मीटर दूर डीबी मॉल की ओर आ रहे थे। तभी पीछे से तेज रफ्तार से आ रही पुष्प ट्रैवल्स की बस क्रमांक एमपी 04 पीए 2336 ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मारते हुए रौंद दिया। हादसे में दोनों युवकों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। जबकि उनका साथी गंभीर रूप से घायल हो गया। मृतकों की फिलहाल पहचान नहीं हो सकी है। घटना की खबर लगते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने मृतकों के शव बरामद कर उन्हें पोस्टमार्टम के लिए हमीदिया अस्पताल भेज दिया। इसके साथ ही पुलिस ने घायल को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया। पुलिस मृतकों की पहचान करने में जुटी हुई है। पुलिस ने टक्कर मारने वाली बस के साथ-साथ बाइक को भी जब्त कर लिया है। फिलहाल पुलिस मामले की जाच में जुटी हुई है। recent visitors 105

WTC Final की रेस में बने रहने के लिए सीरीज के साथ -साथ भारत को ऑस्ट्रेलिया से जीतने होंगे इतने मैच, मुश्किल है गणित

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट टीम ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पर्थ टेस्ट मैच में 295 रनों से जीत हासिल की थी. ऑस्ट्रेलियाई धरती पर भारतीय टीम की ये सबसे बड़ी टेस्ट जीत रही. इस जीत के साथ ही भारतीय टीम ने पांच मैचों की टेस्ट सीरीज में 1-0 की लीड ले ली. अब दोनों टीमों के बीच दूसरा टेस्ट 6 दिसंबर (शुक्रवार) से एडिलेड ओवल में खेला जाएगा. WTC फाइनल के लिए 5 टीमें रेस में… पर्थ टेस्ट में जीत के चलते भारतीय टीम को वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप (WTC) की अंकतालिका में भी फायदा पहुंचा. भारतीय टीम WTC टेबल में फिर से पहले नंबर पर आ गई. WTC की ताजा अंकतालिका पर नजर डालें तो इसमें फिलहाल भारत और ऑस्ट्रेलिया का दबदबा दिख रहा है. इसके अलावा साउथ अफ्रीका, श्रीलंका और न्यूजीलैंड की टीमें भी फाइनल की रेस में हैं. जबकि पाकिस्तान समेत चार टीमें फाइनल की रेस से पूरी तरह बाहर हो चुकी हैं. फाइनल मुकाबला जून 2025 में क्रिकेट के मक्का लॉर्ड्स में खेला जाना है. भारतीय टीम के अब तक 15 मैचों में 9 जीत, 5 हार और एक ड्रॉ से 110 अंक हैं. उसके अंकों का प्रतिशत 61.11 प्रतिशत है. भारत को मौजूदा चक्र में 4 मैच और खेलने हैं, जो ऑस्ट्रेलिया के ही खिलाफ हैं. उधर WTC टेबल में ऑस्ट्रेलिया दूसरे स्थान पर है. कंगारू टीम के 13 मैच में 8 जीत, चार हार एवं एक ड्रॉ से 90 अंक हैं. उसका अंक प्रतिशत 57.69 है. उधर श्रीलंका की टीम तीसरे स्थान पर है. श्रीलंका के नौ मैचों में 55.56 प्रतिशत अंक हैं. वहीं न्यूजीलैंड चौथे, साउथ अफ्रीका पांचवें और इंग्लैंड छठे पायदान पर है. जबकि पाकिस्तान सातवें, वेस्टइंडीज आठवें और बांग्लादेश नौवें नंबर पर है. हालांकि इंग्लैंड, पाकिस्तान, बांग्लादेश और वेस्टइंडीज फाइनल की रेस से आउट हो चुका है. भारत को WTC फाइनल में पहुंचने के लिए ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बाकी के चार में से तीन टेस्ट जीतने होंगे और एक मुकाबले को ड्रॉ कराना होगा. अगर भारतीय टीम एक भी मैच गंवाती है तो उसे दूसरी टीमों के नतीजों पर निर्भर रहना होगा. भारतीय टीम अधिकतम 69.30% अंकों तक पहुंच सकती है. ऑस्ट्रेलिया को अपने दम पर WTC फाइनल में पहुंचने के लिए 6 में से पांच मुकाबले जीतने होंगे. ऑस्ट्रेलियाई टीम को भारत के खिलाफ अपने घर पर चार और टेस्ट मैच खेलने हैं. फिर श्रीलंका के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए उसे भारतीय उपमहाद्वीप का दौरा करना है. श्रीलंका के लिए भी समीकरण साफ है. उसे WTC फाइनल में पहुंचने के लिए चाारों मुकाबले जीतने होंगे. श्रीलंका फिलहाल साउथ अफ्रीका के खिलाफ उसकी धरती पर दो मैचों की टेस्ट सीरीज खेल रही है. फिर उसे अपने घर पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज की मेजबानी करनी है. न्यूजीलैंड ने हाल ही में भारत के खिलाफ उसकी धरती पर टेस्ट सीरीज में 3-0 से जीत हासिल की थी. इसके बावजूद न्यूजीलैंड के लिए समीकरण अब भी मुश्किल है. कीवी टीम फिलहाल इंग्लैंड के खिलाफ अपने घर पर तीन मैचों की टेस्ट सीरीज खेल रही है. यदि कीवी टीम इन तीनों मैचों में जीत हासिल कर लेती है, तो ही उसके लिए कुछ चांस बनेगा. साउथ अफ्रीका के लिए भी समीकरण काफी स्पष्ट है. साउथ अफ्रीकी टीम यदि चारों मैच जीत लेती है तो वह फाइनल में पहुंच जाएगी. साउथ अफ्रीकी टीम फिलहाल श्रीलंका के खिलाफ अपने घर पर दो मैचों की टेस्ट सीरीज खेल रही है. फिर उसे दो मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए पाकिस्तानी टीम की भी मेजबानी करनी है. फाइनल का समीकरण (दूसरे नतीजों पर निर्भर रहे बिना) ऑस्ट्रेलिया: 6 में से 5 जीतने पर भारत: चार में 3 जीत और एक ड्रॉ श्रीलंका: चार में से चार जीतने पर न्यूजीलैंड: 3 में से 3 जीतने पर* साउथ अफ्रीका: 4 में से 4 जीतने पर बता दें कि वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप का यह तीसरा चक्र है, जो 2023 से 2025 तक चलेगा. इस तीसरे चक्र के लिए आईसीसी प्वाइंट्स सिस्टम से जुड़े नियमों को पहले ही रिलीज कर चुकी है. टेस्ट मैच जीतने पर टीम को 12 अंक, मैच ड्रॉ होने पर 4 अंक और मुकाबला टाई होने पर 6 प्वाइंट मिलेंगे. वहीं मैच जीतने पर 100 फीसदी, टाई होने पर 50 फीसदी, ड्रॉ होने पर 33.33 फीसदी और हार पर शून्य फीसदी अंक जोड़े जाएंगे. किसी दो मैच की सीरीज में कुल 24 प्वाइंट और पांच मैच की सीरीज में 60 अंक उपलब्ध होंगे. चूंकि प्वाइंट्स टेबल में जीत प्रतिशत के आधार पर रैंकिंग का प्राथमिक तौर पर निर्धारण होता है.   recent visitors 81

हंगामा नहीं थमा तो श्री बिरला ने सदस्यों से कहा- देश की जनता चाहती है कि उनके सवाल यहां पर उठे, नहीं चला प्रश्नकाल

नई दिल्ली लोकसभा में विपक्षी दलों के सदस्यों ने आज फिर हंगामा और शोरशराबा किया जिसके कारण सदन में प्रश्नकाल बाधित रहा और अध्यक्ष ओम बिरला को सदन की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। सदन की कार्यवाही जैसे ही शुरू हुई विपक्ष के सदस्य अपनी मांगों को लेकर खड़े हो गए और सदन में चर्चा की मांग करने लगे। अध्यक्ष ने सदस्यों की बात अनसुनी कर प्रश्न काल जारी रखा तो विपक्षी दलों के सदस्यों का हंगामा तेज हो होने लगा। प्रश्नकाल में सबसे पहला मुद्दा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का आया जिसमें मंत्री, सदस्य का सवाल और शोर शराबे के कारण सुन नहीं पाए और उन्होंने दोबारा प्रश्न करने का आग्रह किया। हंगामे के बीच सदस्य ने दोबारा सवाल किया जिसका स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेप नड्डा ने लंबा जवाब दिया लेकिन शोर शराबे में कुछ भी सुनाई नहीं दे रहा था। हंगामा नहीं थमा तो श्री बिरला ने सदस्यों से कहा “ देश की जनता चाहती है कि उनके सवाल यहां पर उठे। यह सदन उनकी आशा और आकांक्षा का मंदिर है और उसमें सबको सहयोग करना चाहिए। आज महत्वपूर्ण विषय है। प्रश्नकाल आपका समय है इसलिए आपसे आग्रह है कि प्रश्नकाल चलने दें। देश की जनता माननीय सांसदों के बारे में और अपने मुद्दों को लेकर चिंता कर रही है। सदन सबका है इसलिए सदन चलने दीजिए। आपके जो मुद्दे हैं उन सब पर बोलने का आप सबको मौका दिया जाएगा।”   recent visitors 95

खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने ओडिशा में होने वाले पुलिस कार्यक्रम में बाधा डालने का बनाय प्लान

ओडिशा खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने ओडिशा में होने वाले पुलिस कार्यक्रम में बाधा डालने का प्लान बनाय है। खबर है कि पुलिस महानिदेशकों (डीजीपी) और पुलिस महानिरीक्षकों (आईजीपी) का सालाना अखिल भारतीय सम्मेलन को लेकर धमकी जारी की है। फिलहाल, इसे लेकर पुलिस की तरफ से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पन्नू ने वीडियो में कहा, 'भुवनेश्वर सिर्फ मंदिर का शहर नहीं है, बल्कि आतंक का भी शहर है जहां CISF, BSF, CRPF, NSG, NIA और IB के 200 आतंकवादी अमित शाह के नेतृत्व में बैठक कर रहे हैं, जिसने शहीद निज्जर को मारने में भूमिका निभाई। हिंसक हिन्दुत्व विचारधारा के प्रभाव में खालिस्तान समर्थक सिखों, कश्मीरी लड़ाकों, नक्सलों और माओवादियों को मारने की साजिश करने वाले डीजीपी की आंतकी कॉन्फ्रेंस में बाधा डालें और रोके।' आगे कहा, 'नक्सलों और माओवादियों, कश्मीरी लड़ाकों, मैं अपील करता हूं कि अपने मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने के लिए भुवनेश्वर के होटलों और मंदिरों में कवर लें।' इस सम्मेलन में आंतरिक सुरक्षा, जम्मू-कश्मीर और खालिस्तान समर्थक तत्वों सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल एवं अन्य गणमान्य लोग इस तीन दिवसीय सम्मेलन में शामिल होंगे जहां साइबर अपराध, एआई उपकरणों से उत्पन्न चुनौतियों तथा ड्रोन से पैदा होने वाले खतरों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। अधिकारियों ने बताया कि डीजीपी और आईजीपी रैंक के लगभग 250 अधिकारी सम्मेलन में प्रत्यक्ष रूप से भाग लेंगे, जबकि 200 से अधिक अन्य अधिकारी डिजिटल तरीके से हिस्सा लेंगे। यह सम्मेलन उन ठोस उपलब्धियों की पहचान करने तथा उनकी प्रगति की निगरानी करने का अवसर भी प्रदान करता है, जिसे हर वर्ष प्रधानमंत्री के समक्ष भी प्रस्तुत किया जाता है। वर्ष 2013 तक यह वार्षिक सम्मेलन नई दिल्ली में आयोजित किया जाता था। उसके अगले साल जब, मोदी सरकार के सत्ता में आयी, तब गृह मंत्रालय (एमएचए) और खुफिया ब्यूरो (आईबी) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम को राष्ट्रीय राजधानी के बाहर आयोजित करने का निर्णय लिया गया। recent visitors 81