लाड़ली बहना योजना पर वर्षभर में लगभग 18 हजार करोड़ रुपये व्यय हो रहे हैं, 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक का हो सकता है बजट

भोपाल मध्य प्रदेश का वित्त वर्ष 2025-26 का बजट चार लाख करोड़ रुपये से अधिक का हो सकता है। इसमें महिला एवं बाल विकास विभाग को लगभग 27 हजार करोड़ रुपये मिलेंगे। इससे लाड़ली बहना योजना और 450 रुपये में रसोई गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने जैसी योजना के लिए प्रविधान रहेगा। लाड़ली बहना योजना पर वर्षभर में लगभग 18 हजार करोड़ रुपये व्यय हो रहे हैं। इसी तरह सस्ती दर पर बिजली उपलब्ध कराने के लिए दिए जाने वाले अनुदान के लिए विभिन्न विभागों के बजट में 25 हजार करोड़ रुपये से अधिक का प्रविधान रखा जाएगा। अधोसंरचना विकास के कार्यों को गति देने की प्राथमिकता को पूरा करने के लिए पूंजीगत व्यय 70 हजार करोड़ रुपये से अधिक किया जाएगा। वित्त विभाग की संचालक (बजट) तन्वी सुन्द्रियाल ने सभी विभागों को बजट की अंतरिम सीमा दी है ताकि वे इसके अनुसार प्रस्ताव तैयार कर सकें। बता दें, वर्ष 2024-25 का बजट तीन लाख 65 हजार करोड़ रुपये से अधिक का है। 10 हजार करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट 16 दिसंबर से प्रारंभ होने वाले विधानसभा के शीतकालीन सत्र में प्रथम अनुपूरक बजट प्रस्तुत होगा, जो 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक का हो सकता है। इसके साथ ही वित्त वर्ष 2025-26 के बजट की तैयारी भी विभागों ने प्रारंभ की दी है। वित्त विभाग ने सभी विभागों को प्रस्ताव तैयार करने के लिए उन्हें दी जाने वाली अनुमानित राशि भी बता दी है ताकि वे प्रस्ताव उसके अनुरूप ही तैयार करें। सभी योजनाओं की समीक्षा इस बार शून्य बजट की प्रक्रिया अपनाई गई है यानी एक-एक योजना की समीक्षा कराई जा रही है। इसमें उनकी उपयोगिता के बारे में पूछने के साथ अब तक की उपलब्धियों का ब्योरा भी मांगा जा रहा है। प्रस्तावों पर विचार करने के लिए उप सचिव स्तर के अधिकारियों की बैठकें चल रही हैं। इसके बाद सचिव और फिर मंत्री स्तरीय बैठकें करके प्रस्तावों को अंतिम देने के लिए मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। ग्रामीण विकास पर 19,203 और नगरीय विकास पर 17,236 करोड़ होंगे व्यय सूत्रों का कहना है कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के लिए 19 हजार 203 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं। इसमें प्रधानमंत्री आवास से लेकर अन्य योजनाओं के लिए प्रविधान किया जाएगा। नगरीय विकास पर 17 हजार 236 करोड़, घर-घर पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 11 हजार 383 करोड़, स्कूल शिक्षा के लिए 39 हजार 109, लोक निर्माण के लिए 11 हजार 58, स्वास्थ्य के लिए 16 हजार 767, कृषि विकास के लिए 19 हजार 883, गृह के लिए 13 हजार 560, जनजातीय विकास के लिए 14 हजार 769 करोड़ रुपये की अंतरिम बजट सीमा दी गई है। इसमें पूंजीगत के साथ-साथ राजस्व व्यय भी शामिल हैं। इसी राशि में कर्मचारियों के वेतन-भत्ते के साथ पेंशनरों को किए जाने वाले भुगतान की राशि भी रहेगी। 64 प्रतिशत के हिसाब से रखा जाएगा महंगाई भत्ता प्रदेश के कर्मचारियों को भले ही अभी 50 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ता दिया जा रहा है पर आगामी वित्तीय वर्ष में यह बढ़कर 64 प्रतिशत हो जाएगा। इसके हिसाब से सभी विभागों को स्थापना व्यय में प्रविधान करके रखना होगा। इसी तरह संविदा कर्मचारियों के पारिश्रमिक में चार प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि के हिसाब से प्रविधान रहेगा। recent visitors 46

पाकिस्तान में करीबी रिश्तेदारों में शादी की परंपरा बन रही बच्चों में जेनेटिक्स बीमारी की मुख्य वजह

इस्लामाबाद  पाकिस्तान में कजिन मैरिज (चचेरे, ममेरे भाई-बहनों के बीच होने वाली शादियों) के बढ़ने से कई तरह की बीमारियां पैदा हो रही हैं। एक्सपर्ट ने इस पर चिंता जताते हुए कहा है कि कजिन मैरिज बढ़ने से आनुवंशिक विकारों में तेजी आई है। कराची की डोव यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंस (DUHS) में जीनोमिक डिसऑर्डर एंड रिसेसिव डिसऑर्डर पर बात करते हुए विशेषज्ञों ने पाकिस्तान में कजिन मैरिज की बढ़ती दर पर फिक्र का इजहार किया है। जियो टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉक्टर स्टाइलियानोस एंटोनाराकिस ने बताया कि आनुवंशिक परिवर्तनशीलता (जेनेटिक वेरिएबिलिटी) विकास को बढ़ा सकती है लेकिन इसका एक बड़ा खतरा ये है कि ये आनुवंशिक विकारों (जेनेटिक डिसॉर्डर) का बोझ भी डालती है। यह बोझ विशेष रूप से उन आबादियों में ज्यादा होता है, जहां कजिन मैरिज की दर अधिक है। पाकिस्तान में बढ़ता जा रहा कजिन मैरिज का चलन पाकिस्तान में कुल होने वाली शादियों में से करीब 65 प्रतिशत कजिन मैरिज होती हैं। देश के कुछ समुदायों में कजिन मैरिज की दर 85 फीसदी तक है। DUHS के वाइस चांसलर प्रोफेसर सईद कुरैशी ने कहा कि सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक कारणों से कजिन मैरिज का चलन बढ़ा है। उन्होंने कहा, 'हालांकि इसके कुछ जैविक लाभ हैं लेकिन ये बच्चों में रिसेसिव और डोमिनेंट जेनेटिक विकारों का जोखिम काफी बढ़ा देता है।' जिनेवा विश्वविद्यालय के डॉक्टर स्टाइलियानोस एंटोनाराकिस ने बताया कि 2,980 जीन रिसेसिव बीमारियों से जुड़े हैं। आगा खान विश्वविद्यालय की अम्बरीन फातिमा ने भी पाकिस्तान में चचेरे भाई-बहनों के बीच विवाह की बढ़ती दर और इसके परिणामस्वरूप होने वाले आनुवंशिक विकारों के बारे में चिंता जताई। एक्सपर्ट ने एक मत से कहा कि सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए। हेल्थ सेक्टर में काम किए जाने की जरूरत प्रोफेसर सईद ने कहा कि जिन परिवारों में आपस में शादियां होती हैं। वहां थैलेसीमिया, माइक्रोसेफली जैसी आनुवंशिक बीमारियां आम हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में कजिन मैरिज की दर को देखते हुए स्वास्थ्य सेवा हस्तक्षेप की जरूरत है। प्रोफेसर अताउर्रहमान ने आनुवंशिक बीमारियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक विकास के महत्व पर जोर दिया। थैलेसीमिया एक रक्त विकार है जो लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को प्रभावित करता है। माइक्रोसेफली एक ऐसी स्थिति है जिसमें बच्चे का सिर असामान्य रूप से छोटा होता है। रिसेसिव जेनेटिक डिसऑर्डर तब होते हैं जब बच्चे को माता-पिता दोनों से जीन का एक दोषपूर्ण संस्करण विरासत में मिलता है। डोमिनेंट जेनेटिक डिसऑर्डर भी बच्चे को विरासत में मां-पिता से ही मिलता है। recent visitors 62

स्वयं का ट्रांसफार्मर योजना के वर्क ऑर्डर जारी करने का कार्य प्रबंधक ओएंडएम द्वारा किया जाएगा

भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा निर्णय लिया गया है कि स्वयं का ट्रांसफार्मर योजना (ओवायटी) के वर्क ऑर्डर जारी करने का कार्य प्रबंधक ओएंडएम द्वारा किया जाएगा। गौरतलब है कि पूर्व में यह कार्य उप महाप्रबंधक (एसटीसी) द्वारा निष्पादित किया जाता था। नये निर्देशों के तहत ओवायटी के कार्य का सुपरविजन के कार्यादेश प्रबंधक ओएंडएम द्वारा जारी किया जाएगा और सहायक प्रबंधक/प्रबंधक की अनुशंसा पर उप महाप्रबंधक ओएंडएम द्वारा कार्यपूर्णतः प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। इसके आधार पर कंपनी के नियमानुसार ट्रांसफार्मर की चार्जिंग की जाएगी। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने कहा है कि सामग्री और कार्य की गुणवत्ता तथा उपभोक्ताओं को ओवायटी कनेक्शन त्वरित गति से मिलने की सहूलियत की दृष्टि से यह व्यवस्था लागू की गई है। इस नई व्यवस्था से उपभोक्ताओं के ओवायटी योजना में ट्रांसफार्मर स्थापना के कार्य त्वरित गति से होंगे। ओवायटी योजना में ट्रांसफार्मर लगाने के लिए कंपनी की ऑनलाइन व्यवस्था में आवेदक से प्राप्त आवेदन पर ‘‘अ‘‘ श्रेणी के ठेकेदारों द्वारा कार्य कराया जाता है।   recent visitors 85

कांग्रेस संगठन पदाधिकारियों के काम में निष्क्रिय रहने वाले की छुट्टी कर देगा

भोपाल लंबी ऊहापोह के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस कार्यसमिति का गठन हो चुका है। सभी पदाधिकारियों को दायित्व भी मिल गया है। अब कांग्रेस पार्टी की प्रदेश इकाई ने तय किया है कि इन सबके कामों का त्रैमासिक मूल्यांकन किया जाएगा। सभी पदाधिकारियों को प्रतिमाह अपने कामकाज का ब्यौरा प्रदेश कांग्रेस को देना होगा। इसमें दौरे, बैठकों और कार्यक्रमों की जानकारी रहेगी। वहीं, जिला और ब्लॉक इकाइयों से भी प्रदेश पदाधिकारियों की गतिविधियों का फीडबैक लिया जाएगा। इसके आधार पर मूल्यांकन होगा। जो भी कसौटी पर खरा नहीं उतरेगा, उसकी छुट्टी करने का इरादा है। विरोध के बाद साधा संतुलन यहां पर यह बता दें कि कांग्रेस ने पहले छोटी कार्यसमिति बनाने का निर्णय लिया था। इसके हिसाब से 17 उपाध्यक्ष और 71 महासचिव बनाए गए। विरोध के स्वर उभरे तो 84 सचिव और 36 संयुक्त सचिव नियुक्त करके संतुलन साधने का प्रयास किया गया। महासचिवों को जिले का प्रभारी बनाया गया है और उनका सहयोग करने के लिए सचिव और सह सचिवों को सह प्रभारी बनाया है। जिलों का करना होगा दौरा इन्हें निर्देश दिए गए हैं कि सबको माह में कम से कम एक बार प्रभार के जिले का दौरा करना होगा। जिला और ब्लॉक कांग्रेस पदाधिकारियों के साथ बैठक करके संगठन की गतिविधियों की समीक्षा करनी होगी। कांग्रेस द्वारा दिए जाने वाले कार्यक्रमों का नेतृत्व करने के साथ उसकी रिपोर्ट भी प्रदेश मुख्यालय को देनी होगी। इसके आधार पर कामकाज का त्रैमासिक मूल्यांकन होगा। संगठन के कामों में रुचि न दिखाने वाले निष्क्रिय पदाधिकारियों की छुट्टी कर दी जाएगी। इनके स्थान पर युवा नेताओं को मौका दिया जाएगा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का कहना है कि सभी के कामकाज का मूल्यांकन करेंगे। सबका मकसद संगठन को मजबूत बनाना है। इसके लिए यह व्यवस्था बनाई गई है। जिलों में होंगे प्रशिक्षण पार्टी ने यह भी तय किया है कि संगठन को हर स्तर पर सक्रिय किया जाएगा। जिलों में प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे। इसमें बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं को आमंत्रित किया जाएगा। प्रशिक्षण विभाग द्वारा पार्टी की रीति-नीति और कार्यक्रम बताए जाएंगे। इसके साथ ही भाजपा सरकार की वादाखिलाफी को मुद्दा बनाकर प्रदर्शन भी किए जाएंगे। recent visitors 74

स्कूल शिक्षा विभाग ने जारी किये निर्देश, अद्धवार्षिक मूल्यांकन 16 से 21 दिसम्बर की अवधि में किया जायेगा

भोपाल प्रदेश की शासकीय एवं अशासकीय शालाओं में शैक्षणिक सत्र 2024-25 में इस वर्ष 16 दिसम्बर से अर्द्धवार्षिक मूल्यांकन किया जायेगा। इसके लिये स्कूल शिक्षा विभाग ने दिशा-निर्देश जारी किये हैं। यह अर्द्धवार्षिक मूल्यांकन कक्षा 3 से 8 की सभी शासकीय शालाओं, अशासकीय शालाओं के साथ मदरसों में भी होगा। अद्धवार्षिक मूल्यांकन 16 से 21 दिसम्बर की अवधि में किया जायेगा। अर्द्धवार्षिक मूल्यांकन 30 नवम्बर 2024 तक पढ़ाये गये पाठ्यक्रम के अनुसार किया जायेगा। मूल्यांकन के लिये प्रश्न पत्र राज्य शिक्षा केन्द्र तैयार कर रहा है। कक्षा 5 और 8 के विषयवार प्राप्त अंकों की प्रविष्टि परीक्षा पोर्टल पर की जायेगी। अधिभार की गणना शाला द्वारा नहीं की जायेगी। यह गणना सॉफ्टवेयर में स्वत: ही हो जायेगी। इस संबंध में विस्तृत निर्देश स्कूल शिक्षा विभाग के पोर्टल पर अपलोड कर दिये गये हैं। कक्षा 5 और 8 के बच्चों की पंजीकरण की व्यवस्था ऑनलाइन पोर्टल rskmp.in पर की गई है। अतिरिक्त अतिथि शिक्षकों को रिलीव करने संबंधी निर्देश स्कूल शिक्षा विभाग ने GFMS पोर्टल पर पूर्व से कार्यरत अतिरिक्त अतिथि शिक्षकों को रिलीव करने के संबंध में प्रदेश के समस्त जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिये हैं। निर्देश में बताया गया है कि शासकीय शालाओं में नवीन भर्ती से शिक्षकों की पदस्थापना की गई है। इसके साथ ही उच्च पद प्रभार से भी शिक्षक पदस्थ किये गये हैं। इस कारण स्वीकृत पद के विरूद्ध रिक्त पद उपलब्ध न होने पर संबंधित विषय में कार्यरत अतिथि शिक्षकों को रिलीव किया जाना होगा। इस संदर्भ में एक ही विषय में एक से अधिक अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं तथा रिक्त पद एक ही है, तो अतिथि शिक्षक को रिलीव करने की कार्यवाही की जायेगी। इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश स्कूल शिक्षा विभाग के पोर्टल पर प्रदर्शित किये गये है।   recent visitors 97

28 नवंबर गुरुवार को इन राशियों में दिखेगा लाभ

मेष राशि- आज का दिन धन और वित्त के मामले में अच्छा रहेगा। नौकरीपेशा लोगों को तरक्की और लाभ देखने को मिल सकता है। जीवनसाथी के साथ बहस करने से बचें क्योंकि मनमुटाव की स्थिति पैदा हो सकती है। वृषभ राशि- आज घूमने-फिरने का प्लान भी बन सकता है। अपनी एक्सपर्टीज बढ़ाने और कुछ नई स्किल्स सीखने में निवेश करने के लिए यह अच्छा दिन होगा। व्यवसायियों को अपने खर्चों के प्रति सावधानी बरतनी चाहिए। मिथुन राशि- आज का दिन संतोषजनक रहेगा। नया कार्यभार मिलने की भी बड़ी संभावना है। आपकी कड़ी मेहनत आपको प्रमोशन दिला सकती है। अहंकारी न होने का प्रयास करें। कारोबार फलेगा-फूलेगा। कर्क राशि- आपको आज सीनियर्स के साथ सावधानी बरतने की जरूरत है। अच्छे प्रॉफिट की उम्मीद कर सकते हैं। हो सकता है आप पॉलिटिक्स के शिकार हो जाएं। सुझावों के प्रति खुले रहें, भले ही वे आपके जूनियर्स से ही क्यों न आए हों। सिंह राशि- आर्थिक रूप से यह एक अच्छा दिन है। करियर के नए अवसर आपके सामने आएंगे। आज आपको प्रशंसा मिल सकती है। व्यापार अच्छा चलेगा और आप अच्छे मुनाफे की भी उम्मीद कर सकते हैं। कन्या राशि- विदेश यात्रा के योग बन रहे हैं, जो लाभदायक रहेगी। इंकम बढ़ाने और प्रमोशन पाने के लिए आपको पूरे लगन के साथ ऑफिस के टास्क कंप्लीट करने चाहिए। तनाव से दूर रहें। तुला राशि- प्रोडक्टिविटी आज रोज के मुकाबले नॉर्मल से स्लो रहेगी। कारोबार से जुड़े लोगों को आज सावधान रहने की जरूरत है। लाइफ पार्टनर के साथ बॉन्ड को स्ट्रांग बनाने के लिए आप डेट प्लान कर सकते हैं। वृश्चिक राशि- हेल्थ आज अच्छी रहेगी। कुछ अप्रत्याशित समस्याएं सामने आ सकती हैं, जिससे आपकी प्लानिंग पूरी होने में देरी हो सकती है। कॉन्फिडेंस में आपके कमी आ सकती है। धनु राशि- आपको अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए बहुत ज्यादा प्रयास करने पड़ सकते हैं। कुछ नुकसान होने की भी आशंका है। स्किन को हेल्दी रखने के लिए आपको डाइट में हरी सब्जियां शामिल करनी चाहिए। मकर राशि- करियर और फाइनेंशियल लाइफ आज नॉर्मल रहेगी। व्यवसाय में आर्थिक कमजोरी का अनुभव हो सकता है। आज आपको पॉजिटिव एटीट्यूड मेन्टेन करना चाहिए। फिटनेस पर ध्यान दें। कुंभ राशि- आपके काम की सराहना होगी और तारीफ भी मिलेगी। आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी। आज आपको खासतौर पर अपने स्वास्थ्य की देखभाल करनी चाहिए। व्यवसायी अपने काम का विस्तार करेंगे मीन राशि- आज का दिन आपके लिए भाग्यशाली साबित हो सकता है। यह एक सपने के सच होने जैसा दिन होगा। अच्छा मुनाफा हासिल करेंगे। ऑयली फूड से दूरी बनाएं और मेंटल हेल्थ पर ध्यान दें। recent visitors 96

सुप्रीम कोर्ट में पूजा स्थलों की सुरक्षा से संबंधित याचिका पर 4 दिसंबर को सुनवाई करेगा

नई दिल्ली देश में विभिन्न धार्मिक स्थलों, खासकर मंदिरों और मस्जिदों को लेकर विवाद बढ़ते जा रहे हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश के संभल जिले में स्थित जामा मस्जिद का सर्वेक्षण कोर्ट के आदेश पर हुआ था, जिसके बाद हिंसा की घटनाएं सामने आईं। अब इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने 1991 के पूजा स्थल कानून और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा से संबंधित याचिका पर सुनवाई करने का संकेत दिया है। आइए जानते हैं इस मामले के बारे में और कब होगी इसपर सुनवाई। सुप्रीम कोर्ट में कब होगी सुनवाई? सुप्रीम कोर्ट में पूजा स्थलों की सुरक्षा और 1991 के पूजा स्थल कानून से संबंधित याचिका पर 4 दिसंबर 2024 को सुनवाई होगी। इस सुनवाई में भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ शामिल होगी। सुनवाई करने वाले न्यायधीश इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, जस्टिस पी नरसिम्हा, और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच शामिल होगी। यह केस जमीअत उलमा-ए-हिंद और गुलजार अहमद नूर मोहम्मद आजमी की तरफ से दायर किया गया है, और इनके वकील एजाज मकबूल कोर्ट में उनका पक्ष रखेंगे। क्या है 1991 का पूजा स्थल कानून? 1991 का पूजा स्थल कानून भारत में धार्मिक स्थलों के स्वरूप को लेकर एक महत्वपूर्ण कानून है। इसके तहत, यह प्रावधान किया गया कि 15 अगस्त 1947 को जिस रूप में धार्मिक स्थल था, उसे उसी रूप में बनाए रखा जाएगा। इसका मतलब है कि स्वतंत्रता संग्राम के समय के बाद से किसी भी धार्मिक स्थल का रूप बदलने पर रोक लगा दी गई है। इस कानून का उद्देश्य धार्मिक स्थलों के स्वामित्व और रूप में बदलाव से होने वाले विवादों को रोकना है। खासतौर पर इसने रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर एक अपवाद रखा था, जिससे विवादित बाबरी मस्जिद को लेकर कोई बदलाव नहीं किया जा सका था। धारा 3 के तहत, यह कानून किसी व्यक्ति या समूह को किसी धार्मिक स्थल को दूसरे धर्म के स्थल में बदलने से रोकता है। क्या बदलाव होगा इस कानून में? इस कानून का उद्देश्य धार्मिक स्थलों के स्वरूप को स्थिर रखना था ताकि किसी भी धार्मिक स्थल में बदलाव या तोड़फोड़ से विवादों की स्थिति पैदा न हो। लेकिन, कई बार इस कानून की व्याख्या को लेकर विवाद उठते रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस कानून पर सुनवाई होने से भविष्य में इस कानून के प्रभाव और इसकी व्याख्या पर कुछ नया रुख सामने आ सकता है। सुप्रीम कोर्ट की भूमिका अब जब सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर सुनवाई करेगा, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि कोर्ट पूजा स्थल कानून की परिभाषा और उसके दायरे को कैसे निर्धारित करता है। इसके अलावा, कोर्ट यह भी तय करेगा कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कौन से कदम उठाए जाएं। यह मामला धार्मिक स्थलों से जुड़ी संवेदनशीलता को लेकर है, और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई इस दिशा में महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि इस कानून में कोई बदलाव किया जाता है, तो वह देशभर में धार्मिक स्थलों के विवादों को प्रभावित कर सकता है। 4 दिसंबर को होने वाली सुनवाई देश भर के लोगों और धार्मिक संगठनों के लिए एक अहम मोड़ साबित हो सकती है। recent visitors 82