वन विभाग द्वारा सागौन की अवैध कटाई करने वाले वन माफियाओं को गिरफ्तार करने की मुहिम चलायी जा रही

अवैध कटाई में संलिप्त वन माफियाओं को पकड़ने की मुहिम जारी सागौन के अवैध परिवहन का आरोपी गिरफ्तार वन विभाग द्वारा सागौन की अवैध कटाई करने वाले वन माफियाओं को गिरफ्तार करने की मुहिम चलायी जा रही भोपाल वन विभाग द्वारा सागौन की अवैध कटाई करने वाले वन माफियाओं को गिरफ्तार करने की मुहिम चलायी जा रही है। इसी क्रम में वन मण्डलाधिकारी, उत्तर बैतूल, सामान्य वन मण्डल नवीन गर्ग ने बताया कि उत्तर बैतूल, सामान्य वन मण्डल के परिक्षेत्र बैतूल सामान्य वन मण्डल में 18 एवं 19 नवम्बर को वन विभाग द्वारा रात्रि गश्त के दौरान खारी बीट में जाँच करने पर सागौन की लकड़ी से भरा अशोक लीलेण्ड मिनी ट्रक जप्त कर वन अपराध प्रकरण पंजीबद्ध किया गया। वाहन की जाँच करने पर वाहन में रामकुमार वल्द पुरुषोत्तम मेहरा के नाम के ड्रायविंग लायसेंस की छायाप्रति प्राप्त हुई। इसके आधार पर वन मण्डलाधिकारी उत्तर बैतूल नवीन गर्ग सामान्य वन मण्डल के निर्देशन में उप वन मण्डलाधिकारी श्रेयस श्रीवास्तव और परिक्षेत्र अधिकारी ए.एस. बघेल के नेतृत्व में अलग-अलग दल गठित कर विभिन्न स्थलों पर छापामार कार्रवाई की गयी। छापामार कार्रवाई में वाहन मालिक रामकुमार मेहरा निवासी राहुल नगर मण्डीदीप जिला रायसेन को गिरफ्तार कर बयान दर्ज किये गये। आरोपी रामकुमार मेहरा ने बयान में यह बताया कि उसके द्वारा राजू वाड़ीवा निवासी ग्राम पाठई तहसील शाहपुर के साथ में सागौन कटाई कर परिवहन किया गया। वन विभाग द्वारा पूर्व में 27 अक्टूबर को 3 आरोपियों में राजा पिता राजू वाड़ीवा, शेख अफजल और पाढर के सोनू मुईनुद्दीन की गिरफ्तारी की जा चुकी है। वन विभाग की टीम द्वारा 22 नवम्बर को आरोपी को न्यायालय द्वारा उसके बयान के आधार पर पूछताछ एवं मौका निरीक्षण के लिये 3 दिवस के लिये फॉरेस्ट रिमाण्ड पर भेजा गया है। आरोपी रामकुमार मेहरा को 25 नवम्बर को मेडिकल परीक्षण के बाद न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। न्यायालय द्वारा प्रकरण की विवेचना में आरोपी द्वारा किये गये अपराध के आधार पर 7 दिसम्बर 2024 तक ज्यूडीशियल रिमाण्ड पर भेजा गया है। प्रकरण में आगामी कार्रवाई की जा रही है।   recent visitors 81

महिला सुरक्षा संवाद का दूसरा दिन कार्यात्मक दृष्टिकोण और युवा केंद्रित समाधानों के साथ संपन्न हुआ

हम होंगे कामयाब पखवाड़ा भोपाल "हम होंगे कामयाब" पखवाडा में आयोजित कार्यशाला 'महिला सुरक्षा संवाद' के दूसरे दिन उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकारी विभागों और नागरिक समाज के बीच समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिये प्रतिबद्ध है, जहां महिलाएं हिंसा और भेदभाव के बिना आगे बढ़ सकें। कार्यशाला के स्काई सोशल की संस्थापक सृष्टि प्रगट ने युवा पीढ़ी की बदलाव लाने की अपार क्षमता को उजागर किया और महिलाओं के खिलाफ हिंसा से मुक्त एक भविष्य बनाने में उनके योगदान की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने सामूहिक प्रयासों और सक्रिय युवा भागीदारी की बात की, जिससे प्रणालीगत समस्याओं का समाधान किया जा सके, और यह सुनिश्चित किया जा सके। रेडियो बुन्देलखण्ड की आर.जे. सुवर्षा ने कैसे युवा सामाजिक परिवर्तन के प्रेरक बन सकते हैं पर चर्चा की। इसमें यूनिसेफ के अधिकारियों के साथ-साथ 'आरंभ' और 'उदय' के युवाओं ने अपनी परिवर्तनकारी कहानियाँ और लिंग आधारित हिंसा के खिलाफ जमीनी स्तर पर संघर्ष की रणनीतियाँ साझा कीं। इस सत्र ने युवाओं को समुदाय विकास और लिंग आधारित हिंसा के खिलाफ सक्रिय रूप से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। डॉ. वंचना सिंह परिहार ने महिला हिंसा से प्रभावित व्यक्तियों के लिए एक समग्र सहायता प्रदान करने वाली वन स्टॉप सेंटर्स की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने इन केंद्रों के संचालन को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि ये अधिक सुलभ और पीड़ित केंद्रित हो सकें। अधिवक्ता योगेश पंडित ने साइबर हिंसा से उत्पन्न होने वाली समस्याओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने महिलाओं को ऑनलाइन उत्पीड़न से बचाने के लिए कार्यात्मक दृष्टिकोण प्रदान किए और कानून व्यवस्था के तहत अपराधियों को जिम्मेदार ठहराने के तरीकों पर चर्चा की। क्लिनिकल साइकॉलाजिस्ट सुगर्गी कन्हेरे द्वारा संचालित “लिंग आधारित हिंसा का मानसिक प्रभाव” सत्र में लिंग आधारित हिंसा युवाओं पर मानसिक प्रभाव कितना गहरा हो सकता है पर चर्चा की गई। सत्र में इस तरह के मानसिक आघात को समझने, सहनशीलता का निर्माण करने और सहानुभूतिपूर्ण समर्थन प्रणालियाँ विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। इसके साथ ही यह भी बताया गया कि युवा मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने और जीबीटी से प्रभावित साथियों का समर्थन करने के लिए क्या रणनीतियाँ और उपकरण अपना सकते हैं। डॉ. दीपल मेहरोत्रा ने शिक्षा संस्थानों में सुरक्षित वातावरण बनाने के लिए आंतरिक शिकायत समितियों जैसी संस्थागत उपायों का खाका प्रस्तुत किया। साथ ही उन्होंने छात्रों और शिक्षकों के बीच लिंग संवेदनशीलता को बढ़ावा देने के सर्वोत्तम अभ्यासों को साझा किया। लिंग आधारित हिंसा जागरूकता बढ़ाने मनोचा और चिन्मय गोड़ ने संचालित किया, इस बात पर चर्चा की गई कि सोशल मीडिया का किस प्रकार उपयोग किया जा सकता है जिससे लिंग आधारित हिंसा के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके, संवाद शुरू किया जा सके और समुदायों को क्रियान्वयन के लिए प्रेरित किया जा सके।   recent visitors 78

स्वास्थ्य सहायता समूह की महिलाओं को समर्थन मूल्य में 33% भागीदारी देने एवं 0% पर बैंक लोन दिए जाने की रखी मांग

भोपाल नगरीय प्रशासन एवं आवास राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी ने आज केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से दिल्ली प्रवास के दौरान सौजन्य भेंट की। इस दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, महिलाओं के आर्थिक उत्थान और स्वावलंबन को प्रोत्साहन देने के लिए दो महत्वपूर्ण मांगें रखीं। श्रीमती बागरी ने आग्रह किया कि समर्थन मूल्य पर संचालित खरीदी केंद्रों में महिला स्वसहायता समूहों को 33% आरक्षण दिया जाए। वर्तमान में, स्वसहायता समूहों को केवल उन खरीदी केंद्रों का संचालन सौंपा जाता है, जो शेष रह जाते हैं। इस नीति में संशोधन कर महिलाओं की भागीदारी को सुनिश्चित करने से समूह की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनने का अवसर मिलेगा। साथ ही महिला स्वसहायता समूहों के आर्थिक बोझ को कम करने के लिए उन्होंने सहकारी बैंकों से जीरो प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण देने की योजना प्रारंभ करने का भी मांग रखी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में महिलाएं उच्च ब्याज दर पर ऋण लेकर कार्य कर रही हैं, जिससे उनके लाभ का बड़ा हिस्सा ब्याज चुकाने में चला जाता है। सहकारी बैंकों से जीरो प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण देने की योजना के माध्यम से महिलाओं को अपने व्यवसाय और योजनाओं को बेहतर ढंग से संचालित करने का अवसर मिलेगा। राज्यमंत्री श्रीमती बागरी ने कहा कि इस योजना के क्रियान्वयन से महिलाएं अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकेंगी और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकेंगी। महिला सशक्तिकरण की दिशा में यह पहल न केवल प्रदेश बल्कि पूरे देश की महिलाओं के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित होगी।   recent visitors 76

चैंपियंस ट्रॉफी 2025 को लेकर 29 नवंबर को वर्चुअल (ऑनलाइन) बैठक करेगा आईसीसी बोर्ड

नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) का बोर्ड अगले साल फरवरी-मार्च में पाकिस्तान में होने वाली चैंपियंस ट्रॉफी के कार्यक्रम को अंतिम रूप देने के लिए 29 नवंबर को वर्चुअल (ऑनलाइन) बैठक करेगा। टूर्नामेंट का कार्यक्रम घोषित करने में काफी विलंब हो चुका है। देरी का कारण भारत द्वारा दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंधों को देखते हुए पाकिस्तान में खेलने से इनकार करना है। भारत ने 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों के बाद से पाकिस्तान का दौरा नहीं किया है। भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) चाहता है कि टूर्नामेंट हाइब्रिड मॉडल में खेला जाए, जिसमें भारत के मुकाबले किसी तीसरे देश में आयोजित किए जाएं। जय शाह एक दिसंबर को संभालेंगे कार्यभार हाइब्रिड मॉडल पर अब तक पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने सहमति नहीं जताई है। आईसीसी के प्रवक्ता ने मंगलवार को पीटीआई को बताया, ‘‘आईसीसी बोर्ड चैंपियंस ट्रॉफी के कार्यक्रम पर चर्चा करने के लिए 29 नवंबर को बैठक करेगा।’’ यह महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक बीसीसीआई सचिव जय शाह के एक दिसंबर को आईसीसी अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालने से दो दिन पहले हो रही है। वह और बोर्ड के अन्य सदस्य नए पदाधिकारियों के कार्यभार संभालने से पहले मामले को सुलझाने के इच्छुक होंगे। ICC की इस पेशकश को नहीं मान रहा PCB आईसीसी के कार्यकारी बोर्ड सदस्य बढ़े हुए वित्तीय प्रोत्साहन के वादे के साथ पीसीबी को चैंपियंस ट्रॉफी के लिए हाइब्रिड मॉडल स्वीकार करने के लिए मनाने की कोशिश कर रहे हैं। मामले की जानकारी रखने वाले सूत्र ने कहा, ‘‘पीसीबी ने कड़ा रुख अपनाया है और हाइब्रिड मॉडल के तहत टूर्नामेंट की मेजबानी नहीं करना चाहता है। इसलिए अब गतिरोध को समाप्त करने के लिए उन्हें अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन की पेशकश की जा रही है।’’ 'हाइब्रिड मॉडल अपनाया जाता है तो ऐसा हो' उन्होंने कहा, ‘‘पीसीबी ने अब तक ऐसे सभी कदमों का विरोध किया है और इस बात पर जोर दिया है कि यदि भारत पाकिस्तान में खेलने को इच्छुक नहीं है तो यह उनकी समस्या है क्योंकि भाग लेने वाले अन्य छह देशों को पाकिस्तान में खेलने में कोई समस्या नहीं है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘पीसीबी इस बात पर जोर दे रहा है कि अगर हाइब्रिड मॉडल अपनाया जाता है तो भी भारत बनाम पाकिस्तान मैच और फाइनल लाहौर में खेले जाएं। जाहिर है कि भारतीय क्रिकेट बोर्ड इस पर सहमत नहीं होगा। वह पाकिस्तान के खिलाफ मैच के साथ सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबला भी दुबई में खेलना चाहता है।’’ recent visitors 94

आयुष्मान कार्ड में ओटीपी बन रहा बड़ी मुसीबत, परेशानियों के बीच जारी है आयुष्मान कार्ड बनाने का काम

राजगढ़ भारत सरकार द्वारा बनाए जा रहे आयुष्मान कार्ड को गति जरूर मिल रही है, लेकिन वेरिफिकेशन के लिए आने वाला वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) अब कर्मचारियों के लिए सिरदर्द बन चुका है। दरअसल, कभी मोबाइल नेटवर्क कमजोर होने के कारण ओटीपी नहीं आता, तो कभी मोबाइल में बैलेंस नहीं होने के कारण इनकमिंग सेवा बंद हो जाने के कारण भी मैसेज नहीं आ पा रहा है। ऐसे में कार्ड बनाने वाले परेशान होकर वापस लौटने को मजबूर हो जाते हैं। परेशानियों के बीच जारी है आयुष्मान कार्ड बनाने का काम नगर परिषद के संजय शर्मा बताते हैं कि आधार कार्ड से लिंक मोबाइल नंबर पर ओटीपी फिलहाल परेशानी बना हुआ है। वेरीफाई और आयुष्मान कार्ड को एक्टिवेट करने के लिए ओटीपी आवश्यक होता है। हालांकि टीम लगातार काम कर रही है। इसी का नतीजा है कि 400 से अधिक आयुष्मान कार्ड बन भी चुके हैं। विडंबना यह है कि बुधवार से लेकर शनिवार तक कार्ड जरूर बने, लेकिन दिक्कत आती जा रही है। मूल रूप से आयुष्मान कार्ड बनाने की बड़ी जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग का अमला निश्चित दिनों पर टीकाकरण में लग जाता है। ऐसे में नगर परिषद के अमले को ही मैदान में उतरना पड़ रहा है। संजय शर्मा ने बताया कि सोमवार को सिर्फ एक एएनएम और नगर परिषद के कर्मचारियों ने कार्ड बनाने की प्रक्रिया की। नगर परिषद के प्रतीक यादव, यश मकवाना, विशाल मेवाती, मुकेश यादव आदि मौजूद रहे। 400 कार्ड और बनना बाकी नगर परिषद के अनुसार, अधिकांश लोगों के कार्ड बनाए जा चुके हैं। इसके तहत बुधवार को जहां सिर्फ पांच कार्ड बने थे, तो वहीं गुरुवार को 71, शुक्रवार को 104 और शनिवार को 102 कार्ड बनाए जा चुके हैं। अब भी करीब 400 लोगों के कार्ड बनाने का काम बाकी है। माना जा रहा है कि एक सप्ताह के भीतर इस कार्य को पूर्ण कर दिया जाएगा। एसडीएम और सीएमओ लगातार बनाए हुए हैं नजर एसडीएम और सीएमओ इस काम को लेकर गंभीर नजर आ रहे हैं। दरअसल, पिछले दिनों एसडीएम आशा परमार ने नगर में पहुंचकर इस कार्य की प्रगति को देखते हुए जल्द से जल्द कार्य पूर्ण करने के लिए निर्देश भी दिए थे। नगर परिषद के संजय शर्मा के मुताबिक सीएमओ आरती गरवाल के मार्गदर्शन में तेजी से काम करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। recent visitors 116

बैरागढ़ जोन में एक भी रैन बसेरा नहीं, सर्दी जोर पकड़ने लगी, नहीं मिल रहा अलाव का सहारा

भोपाल नगर निगम के बैरागढ़ जोन में एक भी रैन बसेरा नहीं है। उधर, सर्दी जोर पकड़ने लगी है। ऐसे में गरीब एवं बेसहारा लोगों के लिए रेलवे स्टेशन, आरक्षण केंद्र एवं फुटपाथ ही आसरा बने हुए हैं। सर्दी लगातार बढ़ रही है, पर अभी तक अलाव की व्यवस्था भी नहीं की गई है। कड़ाके की ठंड शुरू हो चुकी है। आने वाले दिनों में पारा और लुढ़कने की संभावना है। ऐसे में बेसहारा, गरीब बुजुर्गों के पास खुले आसमान में रात बिताने का अलावा कोई विकल्प नहीं है। बैरागढ़ जोन में वार्ड क्रमांक तीन, चार एवं पांच हैं। किसी भी वार्ड में रैन बसेरा नहीं है। पिछले साल नगर निगम ने थद्धाराम ज्ञानचंदानी सामुदायिक भवन में अस्थायी रैन बसेरा बनाया था। सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से यहां चादर एवं गद्दों की व्यवस्था की गई थी। इस बार अभी तक यह व्यवस्था नहीं की गई है। आरक्षण केंद्र के बाहर कंपकपाते मिले बुजुर्ग सोमवार रात्रि करीब नौ बजे संत हिरदाराम नगर रेलवे स्टेशन के आरक्षण केंद्र परिसर में बुजुर्ग ठंड से कंपकपाते नजर आए। कोई आशियाना नहीं है। इसलिए यहां रात गुजारना मजबूरी है। स्टेशन के टिकट काउंटर के पास भी देर रात को बेसहारा लोग सोते नजर आते हैं। बैरागढ़ मेन रोड पर रात्रि करीब 11 बजे कपड़े की दुकानें बंद होती हैं। दुकानों के सामने खाली जगह पर भी मुसाफिर एवं बेसहारा लोग आराम करते नजर आते हैं। सिविल अस्पताल के गेट के पास भी अस्थायी आश्रय स्थल नजर आता है।   हलालपुर बस स्टैंड पर 15 बेड नगर निगम ने पांच साल पहले हलालपुर बस स्टैंड पर सामुदायिक आश्रय स्थल बनाया था। जोन क्रमांक 20 में शामिल इस रैन बसेरे में 15 बेड हैं। बस स्टैंड पर रात के समय कई कई गरीब यात्री भी बसों से उतरते हैं। दिसंबर से फरवरी माह तक यहां लोगों को रात गुजारने के लिए जगह नहीं मिलती। बैरागढ़ एवं गांधीनगर बस स्टैंड के पास भी नया रैन बसेरा बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है। जोनल अधिकारी जोन एक  के विक्रम झा ने बताया बैरागढ़ के थद्धाराम कम्युनिटी हॉल में जल्द ही अस्थायी रैन बसेरा बनाया जाएगा। हॉल अभी खाली है। यहां दो कर्मचारी भी तैनात किए जाएंगे, ताकि बेसहारा लोगों को कोई परेशानी नहीं हो। फिलहाल जोन क्षेत्र में स्थायी रैन बसेरा बनाने का प्रस्ताव नहीं है। recent visitors 72

पीएम जन-मन योजना का मुख्य उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर एवं पिछड़े जनजातीय समूहों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना

भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा समाज के सबसे कमजोर आय वर्ग के लोगों को सशक्त बनाने के लिए शुरू की गई पीएम जन-मन योजना उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लेकर आई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर एवं पिछड़े जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। छिंदवाड़ा जिले के तामिया ब्लॉक के भारियाढाना गांव की श्रीमती प्रमिला पति संजय भारती को इस योजना का भरपूर लाभ मिला है। प्रमिला मध्यप्रदेश की विशेष पिछड़ी भारिया जनजाति से हैं। वे अपने परिवार के साथ बड़ी विपरीत परिस्थितियों में जीवन-यापन कर रही थीं। परिवार में पांच सदस्य हैं। दिहाड़ी मजदूरी ही उनके परिवार का मुख्य आय स्रोत था और न्यूनतम आय में उनका जीवन बेहद कठिन था। श्रीमती प्रमिला भारती और उनके परिवार को इसी योजना से कई लाभ मिल रहे हैं, जिनसे उनका जीवन अब बेहद खुशहाल हो गया है। परिवार के पास आधार कार्ड, समग्र आईडी, जाति प्रमाण पत्र, राशन कार्ड जैसे सभी जरूरी दस्तावेजों सहित जन-धन बैंक खाता भी है। इनकी मदद से उन्हें शासन की सभी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल रहा है। योजना के तहत सबसे पहले उन्हें एक पक्का मकान मिला। पहले उनके पुराने (मिट्टी और बांस से बने) कच्चे मकान में बारिश में पानी टपकता था और दीवारें भी अत्यंत कमजोर थीं। बारिश भीगते हुए और सर्दी कंपकपाते हुए बीतती थी। पक्की छत वाले मकान के रूप में अब उनके परिवार को एक स्थायी, मजबूत और सुरक्षित आवास मिल गया है। पहले चूल्हे पर लकड़ी जलाकर धुंए में खाना पकाने से उन्हें स्वास्थ्य समस्याएं होती थीं। लेकिन उज्ज्वला योजना से गैस कनेक्शन मिलने से उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया। अब वे साफ-सुथरे वातावरण में भोजन बनाती हैं और गैस सिलेंडर रिफिल के लिए उन्हें सब्सिडी भी मिलती है। परिवार के सभी सदस्यों के जाति प्रमाण पत्र बन जाने से प्रमिला को अपने बच्चों की शिक्षा में भी उन्हें भरपूर मदद मिल रही है। एमपीटास पोर्टल पर प्रोफाइल बनने के बाद दोनों बच्चों को एसटी छात्रवृत्ति का लाभ मिला। इससे उनके शिक्षा संबंधी खर्चों का भार भी कम हुआ। पीएम जन-धन योजना से परिवार का बैंक खाते खोलने से उन्हें भारिया पोषण आहार योजना के तहत हर महीने पोषण आहार के लिए राशि सीधे खाते में मिल रही है। साथ ही आयुष्मान कार्ड मिलने से उनके परिवार को अब पांच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज की सुविधा भी मिल गई है। पीएम जन-मन योजना के कारण श्रीमती प्रमिला भारती और उनके परिवार को वे सभी सुविधाएं मिल रही हैं, जिनकी उन्हें लंबे समय से आस थी। शासकीय योजनाओं का सीधा और समग्र लाभ मिलने से उनका जीवन स्तर बेहतर हो गया है। श्रीमती प्रमिला भारती प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को इस परिवर्तन के लिए धन्यवाद देती हैं। वे कहतीं हैं "पी.एम. जन-मन ने हमारी सारी समस्याएं दूर कर दी हैं। आज मेरा पूरा परिवार खुशहाल और सुरक्षित जीवन जी रहा है।" recent visitors 78