सीएम हेल्पलाइन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को सम्मानित करने के भी निर्देश

मुख्य सचिव श्री जैन की अध्यक्षता में हुआ समाधान ऑनलाइन कार्यक्रम समाधान ऑनलाइन में हुआ कई जन शिकायतों का निराकरण जन-शिकायतों के निराकरण में लापरवाही बरतने वालों की सेवाएं समाप्त करने के निर्देश दो अधीक्षण यंत्रियों को कारण बताओ नोटिस देने के निर्देश सीएम हेल्पलाइन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को सम्मानित करने के भी निर्देश भोपाल मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से समाधान ऑनलाइन कार्यक्रम हुआ। समाधान ऑनलाइन में विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, जिलों के कलेक्टर्स एवं पुलिस अधीक्षक सम्मिलित हुए। मुख्य सचिव श्री जैन ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण है अधिकारी-कर्मचारी जनता के प्रति संवेदनशील रहें। जनसमस्याओं के प्रति समर्पित भाव से रुचि लें। जनता के काम का सकारात्मक समाधान होना चाहिए, तभी उनमें संतुष्टि का भाव जागृत होगा। श्री जैन ने कहा कि जनसमस्याओं का निराकरण सत्यता पर आधारित होना चाहिए। श्री जैन ने कहा कि झूठी रिपोर्टिंग करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाकर उनकी सेवाएं समाप्त की जाएं। सीएम हेल्पलाइन का स्वरूप बदलकर फोरक्लोज करने वालों पर भी सख्त कार्यवाही की जाए। मुख्य सचिव श्री जैन ने कहा कि प्रक्रिया आधारित (प्रोसेस बेस्ड) सिस्टम बनाएं, जिसमें काम का बोझ कम होकर, समय सीमा पर कार्य हो सकेंगे। श्री जैन ने कहा कि अपने अधिकारियों कर्मचारियों की क्षमता निर्माण (कैपेसिटी बिल्डिंग) की जानी चाहिए, उन्हें विश्वास में लेकर कार्य किए जाएं। जिलों में विभागवार जनसमस्याओं का बारीकियों से निदान करें। श्री जैन ने कहा कि अच्छे कार्य करने वालों को सम्मानित किया जाए और उनके कार्यों से अन्य अधिकारियों कर्मचारियों को भी अवगत कराएं। समाधान ऑनलाइन कार्यक्रम में सीएम हेल्पलाइन के 20 नवम्बर 2024 तक के विभागवार एवं जिलेवार उच्च प्रदर्शन एवं निम्न प्रदर्शन की जानकारी दी गई। मुख्य सचिव श्री जैन ने सीहोर एवं विदिशा कलेक्टर्स से अच्छा प्रदर्शन होने पर उनसे जानकारी लेकर, इसके अनुरूप कार्य करने के लिए समस्त जिला कलेक्टर्स को निर्देशित किया। मुख्य सचिव श्री जैन ने उच्च प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित करने के भी निर्देश दिए। समाधान ऑनलाइन कार्यक्रम में मुख्य सचिव श्री जैन ने 10 जिलों उमरिया, शिवपुरी, धार, सिंगरौली, नीमच, राजगढ़, पन्ना, खरगोन, रतलाम, एवं ग्वालियर के शिकायतकर्ताओं से संवाद कर, उनकी शिकायतों के संबंध में विस्तृत चर्चा की। साथ ही संबंधित जिले के कलेक्टर्स को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। कलेक्टर शिवपुरी ने बताया कि शिकायतकर्ता श्री विक्रम सिंह सोलंकी के गेहूं भुगतान लंबित रहने में लापरवाही बरतने वाले लिपिक के विरुद्ध कार्यवाही की गई है एवं आवेदक की लंबित राशि का भुगतान किया जा चुका है। उमरिया के श्री बहोरी सिंह को पोर्टल में एंट्री सही नहीं होने के कारण एक साल विलंब से पट्टा मिल सका। इस पर मुख्य सचिव श्री जैन ने पोर्टल सही करने एवं एक साल से प्रकरण लंबित होने की जांच का प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के लिए, प्रमुख सचिव जनजातीय कार्य एवं संबंधित कलेक्टर को निर्देशित किया। धार जिले में आवेदक को दिव्यांगता प्रमाण पत्र देने के लिए देरी करने पर प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा ने बताया कि सम्बन्धित लिपिक को निलंबित कर दिया गया है। सिंगरौली के आवेदक को राशि वापस करने में देरी करने एवं समस्या का समाधान किए बिना शिकायत को फोरक्लोज करने पर सम्बन्धित अधीक्षण यंत्री श्री आर पी मिश्रा को चेतावनी देने के निर्देश मुख्य सचिव ने दिए। नीमच जिले के श्री खुशाल पाटीदार को ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी से भुगतान करने में विलंब होने पर व्यवस्थागत सुधार लाने एवं अन्य लंबित आवेदनों का निराकरण 15 दिवस में में करने के निर्देश दिए गए। राजगढ़ के आवेदक श्री विष्णु शर्मा को नल कनेक्शन में देरी में होने पर सम्बन्धित मुख्य नगर पालिका अधिकारी की वेतन वृद्धि रोकने एवं जुर्माना लगाए जाने की जानकारी आयुक्त नगरीय निकाय द्वारा दी गई। पन्ना जिले के आवेदक के धान उपार्जन में राशि भुगतान नहीं होने पर कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक से 15 दिन में निराकरण करने के निर्देश मुख्य सचिव ने दिए। खरगोन के श्री विक्रम सोलंकी को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में विलंब से भुगतान के दोषी पटवारी को निलंबित करने की जानकारी कलेक्टर ने दी। रतलाम की श्रीमति कंकू बाई की दूसरी डिलीवरी की राशि मिलने में देरी पर सम्बन्धित एएनएम को निलंबित करने की जानकारी कलेक्टर ने दी। ग्वालियर में श्री रोशन बघेल की बिगड़े हैंडपंप की शिकायत के समाधान में देरी करने पर तत्कालीन अधीक्षण यंत्री को कारण बताओ नोटिस देने के निर्देश मुख्य सचिव ने दिए। ज्ञातव्य हो कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश की जनता की समस्याओं के प्रति संवेदनशील हैं, इसलिए विदेश यात्रा में होने के कारण उन्होंने कहा कि समाधान ऑनलाइन कार्यक्रम मुख्य सचिव करेंगे ताकि जनसमस्याओं का त्वरित निराकरण हो सके। इस आशय के लिए माह के प्रत्येक चौथे सोमवार को आयोजित होने वाला यह समाधान ऑनलाइन कार्यक्रम, मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। संविधान दिवस आयोजन के निर्देश मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने 26 नवम्बर को आयोजित संविधान दिवस को उत्सवपूर्वक मनाए जाने के निर्देश सभी कलेक्टर्स को दिए। वर्ष भर चलने वाले उत्सव में "हमारा संविधान – हमारा स्वाभिमान" को टैगलाइन के रूप में उपयोग किया जाए। श्री जैन ने ग्रामीण, नगरीय क्षेत्रों, विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में संविधान दिवस मनाए जाने के लिए भी निर्देशित किया।   recent visitors 38

मंत्री लखन पटेल ने कहा विश्वविद्यालय पशुपालन के क्षेत्र में अनुसंधान के कार्य में तेजी लाए

भोपाल पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल ने कहा है कि विश्वविद्यालय पशुपालन के क्षेत्र में अनुसंधान के कार्य में तेजी लाए, जिससे पशुओं की नस्ल में सुधार हो और दुग्ध उत्पादन बढ़े। केंद्र और राज्य सरकार पशुपालन के क्षेत्र में किसानों की आय दोगुनी करने के लिए हर संभव कार्य कर रही हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय के प्राध्यापक और कर्मचारियों को सातवें वेतनमान का लाभ दिलाने और छात्राओं की स्टाइपेंड की राशि बढ़ाने की बात कही। मंत्री पटेल ने आज जबलपुर में नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय का निरीक्षण किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मनदीप सिंह, कुलसचिव डॉ. श्रीकांत जोशी, वित्त नियंत्रक महेश कोरी, संचालक प्रक्षेत्र डॉ. एस.एस. तोमर, संचालक अनुसंधान डॉ. जी.पी. लखानी उपस्थित थे। मंत्री पटेल द्वारा विश्वविद्यालय स्थित कुक्कुट विभाग, पंचगव्य उत्पादन इकाई, मिनरल मिक्सचर यूनिट तथा डेयरी का भी निरीक्षण किया गया। उन्होंने मुर्गी की कड़कनाथ नस्ल को बढ़ावा देने की बात कही, जिससे इस नस्ल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी पहचान मिले और ग्रामीणों को इसका फायदा मिल सके। उन्होंने पंचगव्य के विपणन पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि हर जिले में एक ऐसा स्थान चयन किया जाए, जहां पर पंचगव्य से निर्मित उत्पादों की बिक्री हो और वे आसानी से जनता को मिल सकें। मंत्री पटेल ने बताया कि हीफर गाय को किसानों को वितरित करने की योजना पर भी कार्य चल रहा है। निराश्रित गायों को गौशाला में भेजने का प्रबंध किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय की डेयरी में एंब्रियो ट्रांसफर टेक्नोलॉजी के उपयोग से देशी गायों के नस्ल सुधार कार्य पर प्रसन्नता व्यक्ति की तथा आधुनिक तकनीकी से नस्ल सुधार पर जोर दिया। recent visitors 40

मध्यप्रदेश में प्रभावी संचार के लिए बिजली कंपनियां करेंगी उपयोग

भोपाल एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी के संचालक मंडल द्वारा जागरूकता उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए मध्यप्रदेश में संचार के लिए ‘’विद्युत’’ और ‘’बिजली’’ को विद्युत वितरण कंपनियों के अधिकृत शुभंकर के रूप में उपयोग करने का निर्णय लिया गया है। शुभंकर ‘’विद्युत’’ और ‘’बिजली’’ को मध्यप्रदेश में ऊर्जा विभाग के अधीन एम.पी.पॉवर मैनेजमेंट कंपनी, एम.पी.पॉवर जनरेटिंग कंपनी, एम.पी.पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी के साथ ही तीनों विद्युत वितरण कंपनियों क्रमश: पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी जबलपुर, पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी इंदौर तथा मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी भोपाल द्वारा इन शुभंकरों के माध्यम से प्रभावी संदेश तैयार कर प्रचार – प्रसार को बढावा देने के लिए उपयोग किया जाएगा।    गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में ऊर्जा के दक्ष उपयोग को बढ़ावा देने एवं घरों की छतों पर सोलर रूफ-टॉप के उपयोग को प्रोत्साहित करने बिजली बिलों के समय पर भुगतान और विद्युत सुरक्षा के लिए उपभोक्ताओं को जागरूक करने के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए मध्यप्रदेश में संचार के लिए ‘’बिजली’’ नाम की एक छोटी बालिका और ‘’विद्युत’’ नाम के एक छोटे बालक को शुभंकर के रूप में उपयोग किया जाएगा। यह शुभंकर बिजली उपभोक्ताओं तक बिजली संबंधी संदेश पहॅुंचाने के लिए ऊर्जा विभाग के राजदूत के रूप में काम करेंगे।   मध्यप्रदेश में कार्यरत तीनों विद्युत वितरण कंपनियों और ऊर्जा क्षेत्र में कार्यरत अन्य कंपनियों द्वारा ऊर्जा से संबंधित संदेशों को संप्रेषित करने के लिए इन दोनों शुभंकर का उपयोग एक अभिनव और आकर्षक दृष्टिकोण को प्रदर्शित करेगा तथा इन आकर्षक शुभंकरों के अधिकारिक उपयोग से बिजली सुरक्षा, ऊर्जा बचत, ऊर्जा दक्षता और सौर ऊर्जा को बढ़ावा मिलने के साथ ही बिजली बिलों का समय पर भुगतान करने के लिये उपभोक्ताओं को प्रभावी रूप से प्रेरित किया जा सकेगा। इससे राज्य में अधिक प्रभावी और जिम्मेदार ऊर्जा खपत संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा।   कौन हैं "बिजली" और "विद्युत" शुभंकर बिजली एक छोटी बालिका है जिसकी आंखें चमकदार हैं और प्रभावित करने वाली हैं। यह लड़की बिजली को दर्शाने वाली लाल पोशाक पहनती है और हाथ में एक छोटा सा दीपक लिये हुए है, जो ऊर्जा और बिजली के महत्व को प्रतिबिम्बित करता है। बिजली एक ऐसी शुभंकर है जो कि चंचल, जिज्ञासु, ऊर्जा से भरपूर और उत्साही है, जो ऊर्जा और नवकरणीय ऊर्जा स्रोतों का प्रतिनिधित्व करती है। यह गर्मजोशी और सुलभता को प्रतिविम्बित करती है, जो सभी उम्र के उपभोक्ताओं के लिए भरोसेमंद है। दूसरी ओर, विद्युत एक प्यार भरी शरारत लिये हंसता मुस्कुराता लड़का है, जिसने बिजली के प्रतीक वाली हरे रंग की टी-शर्ट पहनी है और हाथ में एक हरे लाल रंग का बिजली का चिन्ह है, जो बिजली की खपत को रेखांकित करता है। विद्युत शुभंकर दिखने में साहसी, आत्मविश्वास से परिपूर्ण और हमेशा सीखने के लिए उत्सुक दिखाई देता है। यह ऊर्जा संरक्षण और सौर ऊर्जा के नवीन पहलुओं को दर्शाता है और उसका करिश्माई स्वभाव युवाओं और उम्रदराज उपभोक्ताओं को समान रूप से आकर्षित करता है। छोटे बच्चे उमंग, उत्साह के पर्याय और देश का भविष्य हैं, इसलिए शुभंकर ‘’बिजली’’ और ‘’विद्युत’’ को छोटे बच्चे के रूप में दर्शाया गया है।     recent visitors 84

देवेंद्र परमार को बेस्ट डेयरी फार्मर वर्ग में देशी पशु नस्ल सुधार के लिए द्वितीय पुरस्कार

भोपाल पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में उपलब्धि के लिए प्रदेश के शाजापुर जिले के किसान देवेंद्र परमार का केंद्रीय पशुपालन एवं डेयरी विभाग के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय गोपाल-रत्न पुरस्कार 2024 के लिए चयन हुआ है। उन्हें बेस्ट डेयरी फार्मर वर्ग में देशी पशु नस्ल सुधार के लिए द्वितीय पुरस्कार केंद्रीय पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन द्वारा राष्ट्रीय दुग्ध दिवस 26 नवंबर के अवसर पर नई दिल्ली में प्रदान किया जाएगा। दुग्ध उद्यमी किसान देवेंद्र परमार शाजापुर जिले के पटलावदा के हैं, जो भोपाल दुग्ध संघ के अंतर्गत शुजालपुर दुग्ध उत्पादन समिति के सदस्य हैं। वह बड़ी संख्या में दुधारू पशुओं का पालन करते है। उन्होंने देशी गायों की नस्ल सुधार में उल्लेखनीय कार्य किया है। वह देव डेयरी के नाम से पैकेज्ड दूध बेचते हैं। उन्होंने अपने खेत में गोबर गैस संयंत्र भी लगया है, जिससे बड़ी मात्रा में गोबर गैस का उत्पादन करते हैं, साथ ही जैविक खाद बेचकर भी अच्छी आमदनी लेते हैं। राष्ट्रीय गोपाल-रत्न पुरस्कार राष्ट्रीय गोपाल-रत्न पुरस्कारों का उद्देश्य पशुपालन और डेयरी के क्षेत्र में काम करने वाले स्वदेशी जानवरों को पालन कर रहे किसान, एआई तकनीशियन और डेयरी सहकारी समितियां / दूध उत्पादक कंपनियां/ डेयरी किसान उत्पादक संगठन की पहचान कर उन्हें प्रोत्साहित करना है। यह पुरस्कार तीन श्रेणियों में स्वदेशी गाय/भैंस नस्लों का पालन करने वाले सर्वश्रेष्ठ डेयरी किसान, सर्वश्रेष्ठ कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन (एआईटी) और सर्वश्रेष्ठ डेयरी सहकारी/ दुग्ध उत्पादक कंपनी/ डेयरी किसान उत्पादक संगठन को प्रदान किए जाते हैं। पुरस्कार में प्रथम श्रेणी के लिए 5 लाख रुपये का नकद पुरस्कार, द्वितीय श्रेणी के लिए 3 लाख रुपये, तृतीय श्रेणी के लिए 2 लाख रुपये और पूर्वोत्तर क्षेत्र में विशेष पुरस्कार के लिए 2 लाख रुपये शामिल हैं। साथ ही एक प्रमाण-पत्र और एक स्मृति चिन्ह भी दिया जाता है। इस वर्ष विजेताओं का चयन कुल प्राप्त 2574 आवेदनों में से किया गया था, जिन्हें एक ऑनलाइन आवेदन पोर्टल यानी https://awards.gov.in के माध्यम से आमंत्रित किया गया। राष्ट्रीय गोकुल मिशन पशुपालन क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है जो कृषि और संबद्ध क्षेत्र के जीवीए का एक तिहाई हिस्सा है और इसकी वार्षिक वृद्धि दर 8% से ज्यादा है। साथ ही पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन गतिविधियाँ किसानों की आय उत्पन्न करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, विशेष रूप से भूमिहीन, छोटे और सीमांत किसानों और महिलाओं के लिए, इसके अलावा यह लाखों लोगों को सस्ती और पौष्टिक भोजन प्रदान करती है। भारत की स्वदेशी गायों की नस्लें मजबूत हैं और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की आनुवांशिक क्षमता रखती हैं। स्वदेशी नस्लों के विकास एवं संरक्षण पर एक विशेष कार्यक्रम के न होने से उनकी जनसंख्या कम हो रही थी और उनका प्रदर्शन उनकी क्षमता से कम है। इसलिए केन्द्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने दिसंबर 2014 में "राष्ट्रीय गोकुल मिशन" की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य स्वदेशी पशु नस्लों को संरक्षित और विकसित करना है।   recent visitors 66

26 नवंबर मंगलवार को इन राशियों में दिखेगा लाभ

मेष राशि- मेष राशि में वाणी में मधुरता रहेगी। आत्मविश्वास भी भरपूर रहेगा। फिर भी संयत रहें। जीवनसाथी की सेहत का ध्यान रखें। नौकरी में तरक्की के मार्ग प्रशस्त होंगे। आय में वृद्धि होगी। वृषभ राशि- वृषभ राशि वालों का आत्मविश्वास तो भरपूर रहेगा, परंतु आत्मसंयत भी रहें। परिवार में शांति बनाए रखने के प्रयास करें। माता की सेहत का ध्यान रखें। कुटुंब-परिवार में धार्मिक कार्य हो सकते हैं। मिथुन राशि- मिथुन राशि वालों का मन प्रसन्न रहेगा, परंतु सेहत के प्रति सचेत रहें। खर्चों की अधिकता रहेगी। वस्त्रों के प्रति रुझान बढ़ सकता है। पिता के सहयोग से कारोबार में वृद्धि होगी। कर्क राशि- कर्क राशि वालों का आत्मविश्वास भरपूर रहेगा। मन प्रसन्न रहेगा। परिवार के साथ किसी धार्मिक स्थान पर जाने का कार्यक्रम बन सकता है। उपहार में वस्त्र मिल सकते हैं। सिंह राशि- सिंह राशि वालों का आत्मविश्वास भरपूर रहेगा, परंतु मन परेशान रहेगा। बातचीत में संतुलित रहें। सेहत का ध्यान रखें। पिता का सान्निध्य मिलेगा। कारोबार में वृद्धि होगी। मन प्रसन्न रहेगा। कन्या राशि- कन्या राशि वालों का मन परेशान रहेगा। संयत रहें। व्यर्थ के क्रोध व वाद-विवाद से बचें। संतान की सेहत का ध्यान रखें। कारोबार में वृद्धि होगी। लाभ में वृद्धि होगी। किसी पैतृक संपत्ति से धन मिल सकता है। तुला राशि- तुला राशि वालों का मन परेशान हो सकता है। जीवनसाथी की सेहत का ध्यान रखें। माता का सान्निध्य मिलेगा। नौकरी में परिवर्तन के अवसर मिल सकते हैं। शैक्षिक कार्यों में सफल रहेंगे। वृश्चिक राशि- वृश्चिक राशि वालों का मन परेशान रहेगा। आत्मविश्वास में कमी रहेगी। संयत रहें। धैर्यशीलता बनाए रखें। कारोबार में निवेश कर सकते हैं। कारोबार के लिए यात्रा पर जा सकते हैं। धनु राशि- धनु राशि वालों का मन प्रसन्न रहेगा। आत्मविश्वास भी भरपूर रहेगा। नौकरी में तरक्की के मार्ग प्रशस्त होंगे। अफसरों का सहयोग मिलेगा। संतान सुख में वृद्धि होगी। मकर राशि- मकर राशि वालों का मन तो प्रसन्न रहेगा, परंतु आत्मविश्वास में कमी रहेगी। शैक्षिक कार्यों में सुधार होगा। कला या संगीत के प्रति रुचि बढ़ सकती है। कारोबार में वृद्धि होगी। लाभ में वृद्धि होगी। कुंभ राशि- कुंभ राशि वालों का मन परेशान रहेगा। आत्मविश्वास में कमी रहेगी। आत्मसंयत रहें। व्यर्थ के क्रोध से बचें। पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा। किसी पुराने मित्र से भेंट हो सकती है। मीन राशि- मीन राशि वालों के मन में उतार-चढ़ाव रहेंगे। आत्मसंयत रहें। क्रोध के अतिरेक से बचें। जीवनसाथी की सेहत का ध्यान रखें। वाहन सुख में कमी आ सकती है। तरक्की के मार्ग प्रशस्त होंगे। recent visitors 91

जंगली जानवरों के हमले से मौत पर दो किस्त में 25 लाख रुपये देगी MP सरकार

MP government will give Rs 25 lakh in two installments on death due to attack by wild animals भोपाल ! मध्य प्रदेश में वन्य जीव के हमले से किसी भी व्यक्ति की मृत्यु होने पर आठ लाख रुपये के स्थान पर अब 25 लाख रुपये देने का निर्णय राज्य सरकार ने लिया है। वन विभाग मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव की घोषणा के अनुसार जंगलों में वन्यप्राणी के हमले में मरने वाले व्यक्तियों को 25 लाख रुपये हर्जाना देने का प्रस्ताव तैयार कर रहा है। इसमें आर्थिक सहायता दो किस्त में दी जाएगी। वन्यप्राणी के हमले पर व्यक्ति की मृत्यु पर उसके स्वजन को तुरंत 10 लाख रुपये दिए जाएंगे। शेष 15 लाख रुपये की बैंक में एफडी की जाएगी। इसमें 10 लाख रुपये की एफडी पांच साल बाद और शेष पांच लाख रुपये की एफडी 10 साल बाद तोड़ी जाएगी। यह राशि मृतक के वारिसों को ब्याज सहित भुगतान की जाएगी। एक साल में करीब 40 मामले वर्तमान में वन विभाग के पास एक साल में जनहानि के करीब 40 मामले आते हैं, जिनमें मुआवजा देने के लिए करीब तीन करोड़ रुपयों का बजट रखा जाता है। यह प्रस्ताव जल्द ही कैबिनेट में प्रस्तुत करने की तैयारी है। महाराष्ट्र में इसी तरह वन्यजीव के हमले से मृत्यु पर स्वजन को राशि दी जाती है। बता दें कि मप्र में वर्तमान में जनहानि पर मुआवजा राशि आठ लाख रुपये, उपचार पर हुआ व्यय तथा स्थाई अपंगता पर दो लाख रुपये दिए जाते हैं। वहीं महाराष्ट्र में वन्यप्राणी के हमले से जनहानि पर 25 लाख, छत्तीसगढ़ में छह लाख और उत्तर प्रदेश, राजस्थान व गुजरात में पांच-पांच लाख रुपये मुआवजा दिया जाता है। पांच साल में 292 से अधिक लोगों की मौत मध्य प्रदेश में बाघ-तेंदुआ सहित अन्य मांसाहारी वन्यप्राणियों के जंगल से बाहर निकलकर नजदीक की बस्ती में पहुंचने की घटनाएं बढ़ रही हैं। इससे मानव-वन्यप्राणी द्वंद की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। पिछले पांच साल में वन्यप्राणियों के हमले में 292 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं वर्ष 2023-24 से अक्टूबर माह तक वन्यप्राणी के हमले से जनहानि, व्यक्ति के घायल होने और पशु हानि के प्रकरणों में 15 करोड़ तीन लाख रुपये की राशि पीड़ित परिवारों को क्षतिपूर्ति के रूप में भुगतान की जा चुकी है। मप्र से सटे राज्यों में अलग-अलग है मुआवजा राशि छत्तीसगढ़ : जनहानि पर छह लाख रुपये व स्थाई अपंगता पर कोई राशि देय नहीं है।उत्तर प्रदेश : जनहानि पर पांच लाख रुपये, स्थाई अपंगता पर चार लाख रुपये।राजस्थान : जनहानि पर पांच लाख रुपये, स्थाई अपंगता पर तीन लाख रुपये।गुजरात : जनहानि पर पांच लाख रुपये, स्थाई अपंगता पर दो लाख रुपये।महाराष्ट्र : जनहानि पर 25 लाख रुपये एवं स्थाई अपंगता पर साढ़े सात लाख रुपये। recent visitors 160

औषधीय गुणों से भरपूर अर्जुन के पेड़ से संबंधित विस्तृत जानकारी,एवं फायदे

Detailed information and benefits related to Arjuna tree which is rich in medicinal properties. अर्जुन के पेड़ को औषधीय पेड़ माना जाता हैं क्यूंकि इसे बहुत सी दवाइयों के लिए उपयोगी माना जाता है। यह पेड़ ज्यादातर नदी और नालों के किनारे पाए जाते है। अर्जुन का पेड़ सदाहरित रहता हैं। अर्जुन के पेड़ को अन्य कई नामो से जाना जाता हैं जैसे ,घवल और नदीसर्ज। इस पेड़ की ऊंचाई लगभग 60 -80 फ़ीट ऊँची रहती हैं। अर्जुन का पेड़ ज्यादातर उत्तर प्रदेश ,महाराष्ट्र ,बिहार और अन्य कई राज्यों नदियों के किनारे या सुखी नदियों के तल के पास पाए जाते है। अर्जुन का पेड़ कैसा होता हैं अर्जुन के पेड़ की लम्बाई काफी ऊँची रहती है। अर्जुन का पेड़ बहुत ही शुष्क इलाकों में पाया जाता हैं। अर्जुन के पेड़ को किसी भी मिटटी में उगाया जा सकता है। अर्जुन के पेड़ को अनुनारिष्ट के नाम से भी जाना जाता है। इस पेड़ का उपयोग बहुत सालों से आयुर्वेदिक दवाइयों के लिए किया जा रहा है। अर्जुन के पेड़ का फल कैसा होता हैं अर्जुन के पेड़ का फल शुरुआत हल्के सफ़ेद और पीले रंग का होता हैं ,कुछ समय पश्चात जब फल में बढ़ोत्तरी होती हैं तो ये फल हरे और पीले रंग का दिखाई पड़ता हैं ,साथ ही इसमें से हल्की हल्की सुगंध भी आने लगती है। पकने के बाद ये फल लाल रंग का दिखाई पड़ने लगता है। अर्जुन के पेड़ के पत्ते हैं लाभकारी अर्जुन के पेड़ के पत्ते खाने से ये शरीर में जमा गंदे कॉलेस्ट्रॉल को बाहर निकलता हैं। इसका सेवन सुबह खाली पेट करना चाहिए। इन पत्तों का सेवन करने से ब्लड शुगर नियंत्रित रहता हैं। अर्जुन की छाल से मिलने वाले फायदे अर्जुन की छाल का काढ़ा बनाकर पीने से खून पतला होता हैं जो शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को संतुलित बनाये रखता है। इस छाल के काढ़े का उपयोग दो से तीन महीने लगातार करना चाहिए। इस काढ़े के उपयोग से रक्तश्राव कम होता है। यह ह्रदय के रक्तचाप जैसी गतिविधियों की क्षमता में सुधार लाता है। पाचन किर्या में सहायक अर्जुन का पेड़ पाचन किर्या में सहायक होता हैं। इसकी छाल का चूर्ण बनाकर लेने से ये पाचन तंत्र को संतुलित बनाये रखता है। यह बड़े हुए चर्बी को कम करने में मदद करता हैं ,अर्जुन की छाल का सेवन लिवर जैसी समस्याओं के लिए बेहतर माना जाता है। यह वजन घटाने में भी सहायता प्रदान करती है। सर्दी खांसी में है लाभकारी अर्जुन के पेड़ की छाल का कड़ा बनाकर पीने से या फिर अर्जुन के चूर्ण में शहद मिलाकर खाने से सर्दी और खांसी दोनों में फायदा होता है। अर्जुन के पेड़ का रस औषिधि के रूप में सदियों से किया जा रहा हैं। हड्डियों के जोड़ने में मददगार अर्जुन के पेड़ की छाल का उपयोग टूटी हुई हड्डियों या फिर मांसपेशियों में होने वाले दुखाव के लिए किया जाता हैं। इसमें छाल के चूर्ण को एक गिलास दूध में दो चम्मच चूर्ण मिलाकर पीने से हड्डियां मजबूत होती है। ये हड्डी में होने वाले दर्द से भी आराम दिलाता हैं। अल्सर बीमारी में है फायदेमंद अर्जुन का प्रयोग अल्सर जैसी बीमारी में भी किया जाता हैं। कई बार अल्सर का घाव जल्द ही नहीं भर पाता हैं। या फिर घाव सूखते ही दूसरे घाव निकल आते हैं ,इसमें अर्जुन के पेड़ की छाल का काढ़ा बनाकर ,घाव को इससे धोये। ऐसा करने से घाव कम होने लगते हैं,साथ ही अल्सर जैसे रोग को भी नियंत्रित करता है। अर्जुन की छाल से होने वाले नुकसान अर्जुन के पेड़ को बहुत सी बीमारियों के लिए लाभकारी माना जाता हैं ,लेकिन इसके कुछ नुक्सान भी हैं जो शरीर पर गलत प्रभाव डालते है। सीने में जलन होना अर्जुन की छाल का सेवन बहुत से लोगो की सेहत के लिए ठीक नहीं रहता हैं, जिसकी वजह से उन्हें जी मचलना या घबराहट जैसी परेशानियां अक्सर हो जाती है। यदि आप छाल का सेवन कर रहे हैं और आपको ऐसा महसूस होता हैं की सीने में जलन या दर्द हो रहा हैं तो इसका उपयोग करना उसी वक्त छोड़ दे। पेट में दर्द या ऐठन का महसूस होना यदि छाल का उपयोग करने से आपको पेट में दर्द या और कोई परेशानी महसूस होती हैं तो छाल का सेवन करना बंद कर दे। हालाँकि अर्जुन एक आयुर्वेदिक जड़ीबूटी हैं लड़की कुछ लोगों पर इसका दुष्प्रभाव पड़ता है। एलर्जी जैसो रोगों को जन्म देता हैं अर्जुन के पेड़ की छाल का घोल बनाकर शरीर पर लगाया जाता हैं, यह त्वचा के लिए बहुत ही लाभकारी माना जाता हैं। लेकिन इसका लेप बहुत से लोगो के शरीर एलेर्जी से जुडी समस्याओं को भी खड़ा कर देता हैं। यदि इस लेप का उपयोग करने के बाद शरीर में खुजली जैसी परेशानिया हो तो इस लेप का उपयोग न करें। आयुर्वेद में अर्जुन के पेड़ को बहुत ही लाभकारी माना गया हैं। अर्जुन के पेड़ में सबसे ज्यादा उपयोग छाल का किया जाता हैं। अर्जुन के पेड़ की छाल में मैग्नीशियम ,पोटेसियम और कैल्शियम पाया जाता है। इस पेड़ की छल का इस्तेमाल बहुत से रोगो में किया जाता हैं ,और ये लाभकारी भी है। अर्जुन के पेड़ की छाल का उपयोग कैंसर सम्बंधित रोगो से निपटने के लिए भी किया जाता है। साथ ही इसके कुछ नुक्सान भी हैं। जो व्यक्ति पहले से किसी भी प्रकार की कोई दवाई ले रहा हैं ,उसे इसका सेवन डॉक्टर से परामर्श लेकर ही करना चाहिए। recent visitors 154