शोध में पाया गया कि देश के 65 प्रतिशत हेल्थ प्रोफेशनल सुरक्षित तंबाकू विकल्पों के पक्ष में

नई दिल्ली देश में तंबाकू की बढ़ती महामारी के बीच 10 में से चार घर धूम्रपान की लत से परेशान हैं। शुक्रवार को आई एक नई रिपोर्ट से पता चला है कि देश में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े 65 फीसदी पेशेवर जीवन बचाने के लिए तंबाकू के सुरक्षित और नए विकल्पों की मांग कर रहे हैं। साइजेन ग्लोबल इनसाइट्स एंड कंसल्टिंग के सहयोग से डॉक्टर्स अगेंस्ट एडिक्शन (डीएएडी) सर्वेक्षण की रिपोर्ट में स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों के दृष्टिकोण में एक महत्वपूर्ण बदलाव का पता चला है, जिसमें 65 प्रतिशत डॉक्टर धूम्रपान की लत छुड़ाने के प्रयासों में निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी और हीट-नॉट-बर्न उत्पादों जैसे सुरक्षित विकल्पों को एकीकृत करने का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने इन विकल्पों की प्रभावकारिता पर और अधिक शोध की आवश्यकता पर जोर दिया। यह रिपोर्ट तंबाकू की लत के खिलाफ भारत की चल रही लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जो सालाना 9,30,000 से अधिक मौतों का कारण बनती है।धूम्रपान से संबंधित बीमारियों के कारण हर दिन 2,500 से अधिक लोगों की जान चली जाती है। पद्मश्री पुरस्कार विजेता और सर गंगा राम अस्पताल के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. मोहसिन वली ने कहा, "तंबाकू की लत देश की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है। इससे निपटने के लिए हमें तंबाकू छोड़ने के लिए वैज्ञानिक रूप से स्वीकृत विकल्पों को प्राथमिकता देनी चाहिए। स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों के रूप में रोगियों को सुरक्षित विकल्पों की ओर मार्गदर्शन करना जीवन बचाने और तंबाकू के विनाशकारी प्रभाव को कम करने के लिए महत्वपूर्ण है।" डीएएडी के मुख्य समन्वयक डॉ. मनीष शर्मा ने कहा, "भारत का तम्बाकू संकट एक राष्ट्रीय आपातकाल है, जिसके लिए तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता है। धूम्रपान छोड़ने के वैज्ञानिक रूप से सिद्ध समाधानों की तत्काल वैधानिक सिफारिशें की जानी चाहिए।" सर्वेक्षण में 300 स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों को शामिल किया गया जिनमें 70 प्रतिशत से अधिक ने लत की गंभीरता और प्रेरणा की कमी का हवाला दिया और 60 प्रतिशत ने छोड़ने के लिए प्रमुख बाधाओं के रूप में लत छोड़ने के संसाधनों की कमी की ओर इशारा किया। इससे पता चला कि अपर्याप्त अनुवर्ती देखभाल और साक्ष्य-आधारित तरीकों के खराब कार्यान्वयन के कारण भारत में धूम्रपान बंद करने में बाधा आ रही है। केवल 7.4 प्रतिशत स्वास्थ्य सेवा प्रदाता नियमित रूप से लत छोड़ने के लिए सलाह देते हैं और केवल 56.4 प्रतिशत फॉलोअप कंसल्टेशन की व्यवस्था करते हैं। ये आंकड़े महत्वपूर्ण कमी को इंगित करते हैं। नई दिल्ली स्थित बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में पल्मोनरी मेडिसिन के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. पवन गुप्ता ने कहा, "तम्बाकू की लत से छुटकारा पाने के लिए बहुआयामी समाधानों की आवश्यकता है। धूम्रपान छोड़ने के लिए सुरक्षित और नए वैकल्पिक उत्पादों का उदय हमारी रणनीतियों पर पुनर्विचार करने का अवसर प्रदान करता है। धूम्रपान छोड़ने की इन रणनीतियों को एक जगह उपलब्ध कराकर और इसके बारे में तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म और संसाधनों के बारे में लोगों में जानकारी बढ़ाकर हम अपने उपचार के परिणामों में काफी सुधार कर सकते हैं।" recent visitors 97

महाकुंभ 2025 में महाआयोजन के दौरान 40 करोड़ से अधिक लोगों के प्रयागराज आने का अनुमान

प्रयागराज दुनिया के सबसे बड़े आयोजन व सनातन आस्था के केंद्र महाकुंभ 2025 को सभी के लिए सुगम बनाने हेतु योगी सरकार लगातार तत्परता से कार्य कर रही है। इस महाआयोजन के दौरान 40 करोड़ से अधिक लोगों के प्रयागराज आने का अनुमान है, जिसको लेकर मेला प्रशासन और जिला प्रशासन दोनों ने क्राउड मैनेजमेंट की तैयारी की है। खासतौर पर पीक डेज (प्रमुख स्नान) के दौरान अत्यधिक भीड़ के कारण कहीं कोई अव्यवस्था न हो, इसके लिए कार्ययोजना तैयार की गई है। आने और जाने के अलग-अलग रास्ते निर्धारित किए गए हैं, जबकि मोबिलिटी जारी रहे इसकी भी व्यवस्था की गई है। रास्ता जाम न हो, इसके लिए भी विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं। कुल मिलाकर जो योजना बनी है उसके अनुसार, श्रद्धालुओं को पीक डेज में एक से 5 किमी. और सामान्य दिनों में एक किमी. से ज्यादा पैदल यात्रा नहीं करनी होगी। आने और जाने के अलग-अलग रास्ते प्रयागराज के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने बताया कि इस सबसे बड़े धार्मिक आयोजन में सिर्फ प्रदेश और देश से ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया से श्रद्धालुओं का बड़ा जत्था प्रयागराज पहुंचने वाला है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिया है कि किसी भी श्रद्धालु को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। ऐसे में क्राउड मैनेजमेंट को लेकर एक कार्ययोजना बनाई गई है, जिसके अनुरूप व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने बताया कि महाकुंभ के दौरान सर्वाधिक श्रृद्धालु सड़क मार्ग से प्रयागराज पहुंचेंगे। प्रशासन की ओर से सभी शहर के दिशाओं में पार्किंग की व्यवस्था की गई है, जहां वाहन खड़ा कर श्रद्धालु आगे का रास्ता तय करेंगे। मेला क्षेत्र में हमने आने और जाने के अलग-अलग रास्ते निर्धारित किए हैं। आस्था की डुबकी लगाने वाले जिस रास्ते से जाएंगे, उस रास्ते से वापस नहीं लौटेंगे। उन्हें दूसरे रास्ते से होकर जाना होगा, ताकि कहीं भी श्रद्धालु आमने-सामने नहीं आ सकेंगे।   नहीं बनने दी जाएगी जाम की स्थिति मंडलायुक्त ने बताया कि ऐसी व्यवस्था की जा रही है कि श्रद्धालु कहीं एक साथ रुकें नहीं, वो चलते रहें। इससे कहीं भी जाम की स्थिति नहीं बनने दी जाएगी। हमारा उद्देश्य है कि मेला क्षेत्र के साथ-साथ शहर में भी श्रद्धालुओं की मोबिलिटी को बरकरार रखा जाए ताकि स्नान और दर्शन आदि करने के बाद वो सीधे पार्किंग स्थल पहुंचें और अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान करें। इसी तरह, रेलवे से भी रिक्वेस्ट की गई है कि वो समय पर और अधिक स्पेशल ट्रेनें संचालित करें, ताकि श्रद्धालु अपना समय गंवाए बिना यात्रा को बरकरार रखे। रेलवे की ओर से पॉजिटिव रिस्पॉन्स भी मिला है और उन्होंने कई अतिरिक्त स्पेशल ट्रेनें संचालित करने की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि यदि श्रद्धालु कुछ देर विश्राम करना चाहेंगे तो उनके लिए कुछ होल्डिंग एरियाज भी चिह्नित किए गए हैं। राजसी स्नान के दिनों में लागू होगी विशेष ट्रैफिक स्कीम महाकुंभ की शुरुआत के साथ ही प्रयागराज में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो जाएगा। प्रमुख स्नान के दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या कई करोड़ तक होगी। ऐसा अनुमान है कि मौनी अमावस्या को सर्वाधिक 4 से 5 करोड़ श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाने के लिए संगमनगरी आ सकते हैं। इसकी भी तैयारी की गई है। विजय विश्वास पंत ने बताया कि पीक डेज में आने वाले श्रद्धालुओं को एक से 5 किमी. और सामान्य दिनों में एक किमी. से ज्यादा नहीं चलना पड़ेगा। मौनी अमावस्या सबसे डेंसिटी वाला दिन होने की संभावना है। इसमें भी सुबह 3 बजे से दोपहर 12 बजे का समय बहुत क्रिटिकल होगा, जब श्रद्धालु संगम का रुख करेंगे। वहीं 12 बजे के बाद उनका लौटना शुरू हो जाएगा। हमारी कोशिश उन्हें सुगमता से संगम क्षेत्र तक पहुंचाने और फिर पार्किंग स्थल तक वापस आने की सुविधा प्रदान करने की है। संगम में पवित्र डुबकी लगाने के बाद उन्हें तुरंत वापस भेजने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि जाम की स्थिति न बने। उन्हें पार्किंग स्थल तक पहुंचाने के बाद गंतव्य की ओर रवाना किया जाएगा। हमारी विभिन्न ट्रैफिक स्कीम तैयार है, जिससे न ही श्रद्धालुओं को अव्यवस्था का सामना करना पड़ेगा और न ही मेला और शहर क्षेत्र में ट्रैफिक पैनिक की स्थिति होगी। इंदौर की बायो फ्रेंडली थैलियों का होगा उपयोग मंडलायुक्त ने बताया कि इस महाकुंभ को स्वच्छ कुंभ बनाने के मुख्यमंत्री जी के संकल्प को पूरा करने के लिए विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं। हमारा प्रयास है कि पूरे मेला क्षेत्र में किसी भी तरह की प्लास्टिक का उपयोग नहीं किया जाएगा। इनके रिप्लेसमेंट ऑप्शन पर विचार किया जा रहा है। खासतौर पर इंदौर की बायो फ्रेंडली थैलियों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसको लेकर हम व्यापारियों से भी संवाद करने वाले हैं। साथ ही लोगों और अधिकारियों को प्लास्टिक की बजाए विभिन्न प्रकार के झोलों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।   recent visitors 103

महाकुंभ 2025: प्रयागराज की दीवारें भी बताएंगी महाकुंभ का महत्व, परंपरा और समुद्र मंथन का भी दीवारों पर होगा चित्रण

प्रयागराज संगम नगरी में लगने वाला महाकुंभ 2025 बेहद ख़ास होने वाला है। शहर की दीवारें महाकुंभ के दौरान धर्म और अध्यात्म की अलख जगाते हुए देखी जाएंगी। पहली बार करीब 10 लाख स्क्वायर फीट दीवार पर इसका चित्रण किया जाना है जिसमें 5 लाख स्क्वायर फीट पर किया जा रहा है बाकी की दीवारें चिन्हित की जा रही है। आपको बता दे महाकुंभ के इतिहास चित्रण शहर की दीवारों पर दिखाई देगा, संत ऋषि ने कैसे कुंभ की परंपरा को आगे बढ़ाया, इसको भी चित्रण के जरिए दीवारों पर श्रद्धालु देख सकेंगे। करीब 18 करोड़ के बजट से शहर और महाकुंभ क्षेत्र में जानें वाली सड़कों के किनारे की दीवारों पर इसका चित्रण किया जा रहा है। जिसमें संत महत्मा और सनातन संस्कृति से जुड़े चित्रण श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र होंगें। ख़ास बात यह है कि इस चित्रण में भगवान राम और श्रीकृष्ण को दर्शाया जाएगा। इसकेे साथ ही समुंद्र मंथन का भी चित्रण किया जाएगा, जिससे कुंभ के परंपरा की शुरूआत को श्रद्धालु चित्रण के जरिए समझ सकें। अपर मेला अधिकारी विवेक चतुर्वेदी ने बताया कि मेला क्षेत्र और शहर के प्रमुख स्थलों की दीवारें और फ्लाईओवर भगवान राम, श्रीकृष्ण, भगवान भोलेनाथ और देवी-देवताओं का बखान करेंगी। उन्होनें बताया कि पेंट माई सिटी के तहत इस बार देवी देवताओं के अलावा गंगा अवतरण की पूरी कहानी के साथ इनमे पलने वाले जीव जंतुओं को भी चित्रण के जरिए दर्शाया जाएगा। उन्होनें बताया कि करीब 10 लाख स्क्वायर फीट दीवार पर इसका चित्रण किया जाना है। चित्रण के पहले चरण के कार्य की शुरुआत मेला प्राधिकरण कार्यालय से हो चुकी है। अपर मेला अधिकारी विवेक चतुर्वेदी के मुताबिक पेंट माई पेंट सिटी के तहत कुल आठ संस्थाओं का चयन इस पूरे कार्य के लिए किया गया है। ये संस्थाएं मुंबई, पुणे, राजस्थान समेत अन्य स्थानों की हैं। इसके साथ ही इलाहाबाद विश्विद्यालय, ट्रिपल आईटी और बीएचयू के कई बद्धिक शैक्षिक लोगों को भी जोड़ा गया है। बाहरी संस्थाओं को 20 फीसदी स्थानीय कलाकार रखने हैं, ताकि स्थानीय कलाकारों को भी रोज़गार के संसाधन पेंट माय सिटी के तहत उपलब्ध कराए जा सकें।   recent visitors 82

राहुल गांधी ने कि कारीगर समुदाय से मुलाकात: पेंटरों और कुम्हारों की जिंदगी कि चुनौतियों पर चर्चा

Rahul Gandhi meets artisan community: discusses challenges in life of painters and potters नेता विपक्ष राहुल गांधी ने हाल ही में पेंटर और कुम्हार समुदाय के सदस्यों के साथ समय बिताया, उनके काम की बारीकियों को समझा और उनकी जिंदगी से जुड़ी परेशानियों पर गहन चर्चा की। राहुल गांधी ने इन मेहनतकश कारीगरों के साथ काम में हाथ बंटाया और उनकी कठिनाइयों को नजदीक से जानने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि ये कारीगर हमारे घरों को अपनी कला से रोशन करते हैं, लेकिन उनके खुद के जीवन में खुशहाली और स्थिरता की कमी है। इसके लिए समाज की भी जिम्मेदारी बनती है कि वह इन हुनरमंदों को न केवल पहचान दे, बल्कि उनके जीवन को बेहतर बनाने में सहयोग भी करे। पेंटर समुदाय की चुनौतियाँ: सीमित अवसर, जोखिमपूर्ण काम और स्थायित्व की कमी राहुल गांधी ने पेंटर समुदाय के साथ चर्चा करते हुए पाया कि उनके काम में कई तरह की चुनौतियाँ हैं। इन कलाकारों का काम चाहे घरों की दीवारों पर हो या बड़े भवनों पर, इनमें कई जोखिम जुड़े होते हैं। अधिकतर पेंटर अनौपचारिक श्रम बाजार में काम करते हैं, जिसके चलते उन्हें नियमित आय या भविष्य में स्थायित्व की कोई गारंटी नहीं मिलती। कई पेंटरों ने अपनी परेशानियों का ज़िक्र करते हुए कहा कि उनके पास पर्याप्त सुरक्षा उपकरण नहीं होते, जिससे उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ता है। राहुल गांधी ने इस पर चिंता जताई और कहा कि इस समुदाय को बेहतर उपकरण और सुरक्षा व्यवस्था प्रदान करना अत्यंत जरूरी है। साथ ही, उन्होंने पेंटरों के बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं का समाधान करने पर भी जोर दिया, ताकि इस समुदाय को एक सुरक्षित और बेहतर भविष्य मिल सके। कुम्हार समुदाय से बातचीत: पारंपरिक कला के संरक्षण की जरूरत राहुल गांधी ने कुम्हार समुदाय के साथ बातचीत करते हुए उनकी कला की बारीकियों को समझा। कुम्हारों की कला भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का एक अभिन्न हिस्सा है। लेकिन आज, आधुनिकता के इस दौर में यह कला विलुप्त होने के कगार पर है। कुम्हारों ने बताया कि पारंपरिक मिट्टी के बर्तन और मूर्तियाँ बनाने का काम पीढ़ी दर पीढ़ी चला आ रहा है, लेकिन अब प्लास्टिक और मशीनी उत्पादों के कारण उनकी मांग घटती जा रही है। राहुल गांधी ने कहा कि सरकार और समाज को मिलकर कुम्हारों को उचित बाजार और सहयोग प्रदान करना चाहिए। यदि उनके उत्पादों को बढ़ावा दिया जाए, तो ये लोग न केवल आर्थिक रूप से सशक्त होंगे बल्कि भारत की सांस्कृतिक धरोहर को भी संजीवनी मिलेगी। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि इस कला को आधुनिक बाजार में स्थान दिलाने के लिए प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता की भी आवश्यकता है। हुनरमंदों को मौके देने पर जोर: स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण राहुल गांधी का मानना है कि यदि सही प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता मिले तो कारीगर और कलाकार अपनी कला से समाज में योगदान कर सकते हैं और एक आर्थिक संबल पा सकते हैं। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि पेंटरों और कुम्हारों जैसे कारीगरों के लिए विशेष योजनाएं लाई जाएं। उन्होंने कहा कि ऐसे कलाकारों के लिए वित्तीय योजनाओं, लोन स्कीम और सरकारी सब्सिडी की व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि उन्हें अपनी कला को आगे बढ़ाने के लिए आर्थिक आधार मिल सके। इसके साथ ही उन्होंने स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय बाजारों और कला मेलों का आयोजन करने का सुझाव दिया, जहां ये कलाकार सीधे अपने उत्पादों को बेच सकें और उचित मुनाफा कमा सकें। समाज के प्रति संदेश: कला और मेहनत की इज्जत करें राहुल गांधी ने इस मुलाकात के दौरान एक संदेश दिया कि समाज को इन मेहनतकशों के योगदान को समझना चाहिए और उनकी कला का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पेंटर और कुम्हार जैसे लोग हमारे घरों और समाज को सुंदर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अगर हम इनकी कला और मेहनत की इज्जत करेंगे और इन्हें सहयोग देंगे, तो एक समृद्ध और सशक्त समाज की स्थापना हो सकती है। राहुल गांधी की यह पहल न केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है बल्कि यह समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने एक उदाहरण प्रस्तुत किया कि कैसे नेता जनता के करीब जाकर उनकी असली समस्याओं को समझ सकते हैं और उनके समाधान में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। recent visitors 165

रिपोर्ट: वित्त वर्ष 2025 में भारत का सेवा निर्यात 9.8% बढ़कर 180 अरब डॉलर पर पहुंचा

नई दिल्ली भारत के सेवा क्षेत्र ने अच्छा प्रदर्शन जारी रखा है, जिसमें सेवाओं के निर्यात में 9.8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 180 अरब डॉलर तक पहुँच गया है। वहीं, सेवाओं के आयात में भी 9.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो 62.9 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। यह जानकारी बैंक ऑफ बड़ौदा की एक रिपोर्ट में दी गई है। इस वृद्धि के परिणामस्वरूप, सेवाओं का व्यापार संतुलन 82.6 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में अधिक है। हालांकि, सेवाओं के निर्यात और आयात में क्रमिक वृद्धि मामूली रही है। चालू खाता घाटा (CAD) वित्त वर्ष 2025 (FY25) के लिए चालू खाता घाटा 1 प्रतिशत से 1.2 प्रतिशत के बीच रहने की उम्मीद है। स्थिर विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) और मजबूत विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) प्रवाह, जो कि अनुकूल ब्याज दरों और भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एकीकृत करने के लिए नीतियों द्वारा समर्थित हैं, बाहरी खाते का समर्थन करेंगे। निर्यात में संभावित बाधाएं मौद्रिक नीति में ढील के शुरू होने में देरी निर्यात सुधार को बाधित कर सकती है, लेकिन मौलिक अर्थशास्त्रीय कारक व्यापार में मध्यम अवधि में सुधार के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ दिखाते हैं। आने वाले महीनों में व्यापार घाटे पर ऊपर की ओर दबाव पड़ सकता है, क्योंकि आयात की वृद्धि निर्यात में धीरे-धीरे सुधार से अधिक हो सकती है। व्यापार घाटे की स्थिति सितंबर में सुधार के बावजूद, वित्त वर्ष 2025 के पहले छह महीनों के लिए व्यापार घाटा अधिक है, जो संभावित चुनौतियों का संकेत देता है। वित्त वर्ष का दूसरा आधा भाग (H2FY25) आमतौर पर मौसमी कारकों के कारण निर्यात गतिविधियों में वृद्धि देखता है, लेकिन पूर्ण सुधार वैश्विक आर्थिक स्थितियों पर निर्भर करेगा, जो अभी भी अनिश्चित हैं। आयात में कमी इस सुधार का मुख्य कारण सोने के आयात में भारी गिरावट है, जो पिछले महीने 10.1 अरब डॉलर से घटकर 4.4 अरब डॉलर हो गया। हालांकि, वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में (H1FY25) व्यापार घाटा बढ़ता हुआ नजर आ रहा है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 119.2 अरब डॉलर की तुलना में 137.4 अरब डॉलर तक पहुँच गया है। यह वृद्धि मुख्य रूप से तेजी से बढ़ते आयात के कारण हुई है, जो निर्यात में मामूली सुधार से अधिक है। निर्यात का आंकड़ा अप्रैल से सितंबर की अवधि में निर्यात में केवल 1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो 213.2 अरब डॉलर तक पहुंचा है। यह पिछले वर्ष की समान अवधि में 8.9 प्रतिशत की गिरावट के मुकाबले महत्वपूर्ण सुधार है। वृद्धि का नेतृत्व फार्मास्युटिकल्स, इंजीनियरिंग वस्त्र, और रसायनों जैसे क्षेत्रों ने किया है। हालांकि, कृषि और संबंधित उत्पादों के निर्यात महंगाई के दबाव के कारण कमजोर बने रहे हैं। आयात का रुख महत्वपूर्ण गैर-तेल और गैर-सोने के आयात में, गैर-धातु धातुएं, पूंजी वस्तुएं, और इलेक्ट्रॉनिक्स में मजबूत वृद्धि बनी हुई है, जो पूंजी निवेश और उपभोक्ता खर्च की मांग को दर्शाती है। दलहन का आयात भी बढ़ा है, जो घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने और महंगाई को नियंत्रित करने के लिए है। भविष्य की चुनौतियाँ हालांकि, आयात का मार्ग upward रहने की उम्मीद है, जो औद्योगिक इनपुट और धातुओं की वैश्विक कीमतों में वृद्धि से प्रेरित है। वैश्विक मांग, विशेषकर यूरोजोन और चीन में, नरम बनी हुई है, जबकि तेल की कीमतों में अस्थिरता आयात बिल को और बढ़ा सकती है। महंगाई के दबाव, घरेलू मांग में वृद्धि, और त्योहारों के दौरान सोने की कीमतों में स्थिरता व्यापार संतुलन पर दबाव डाल सकती है। इसके अतिरिक्त, अगर भारतीय रुपया कमजोर रहता है, तो आयातित महंगाई के जोखिम बढ़ सकते हैं।   recent visitors 220

जमीन विवाद के चलते खूनी संघर्ष: गोलीबारी और धारदार हथियारों से हमले में एक की मौत, कई घायल

Bloody conflict due to land dispute: One dead, many injured in firing and attack with sharp weapons मुरैना में जमीन विवाद को लेकर गोलिया चल गईं। एक पक्ष ने दूसरे पक्ष पर फरसे और कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। विवाद में तीन लोगों को गोलियां लगी हैं, एक बुजुर्ग की मौके हो गई, अन्य अस्पताल में भर्ती हैं। मुरैना। नूराबाद थाना क्षेत्र के बित्तौली पुरा गांव में शुक्रवार की सुबह खेत जोतने गए एक ही परिवार के पांच लोगों पर लभनपुरा गांव के दूसरे पक्ष ने ताबड़तोड़ फायर की, इसके बाद कुल्हाड़ी फरसों से हमला कर दिया। इस हमले में तीन लोगों गोली लगी, वहीं दो कुल्हाड़ी-फरसे के हमले में घायल हो गए।गोली लगने से एक बुजुर्ग की मौके पर ही मौत हो गई, अन्य घायलों को इलाज के लिए ग्वालियर अस्पताल ले जाया गया है। विवाद के पीछे बित्तौलीपुरा व लभनपुरा गांव के बीच में स्थित पांच बीघा जमीन है। जिसको लेकर दोनों पक्षों में पूर्व से कहासुनी चली आ रही थी। पुलिस अब आरोपितों की तलाश में जुट गई है। जमीन को लेकर चल रहा था विवाद जानकारी के मुताबिक बित्तौलीपुरा निवासी श्रीकृष्णा गुर्जर के परिवार का लभनपुरा के पूर्व सरपंच बुलाखी गुर्जर के परिवार से दोनों गांव के बीच स्थित पांच बीघा जमीन को लेकर विवाद चला आ रहा था। अब बोवनी का समय है, तो फिर से यह विवाद गर्मा गया और दो दिन से कहासुनी भी हो रही थी। खेत जोतने के दौरान हुआ हमला शुक्रवार की सुबह आठ बजे श्रीकृष्णा गुर्जर उसके परिवार के देशराज गुर्जर , करतार सिंह , अंकुर, विशंभर सिंह इस खेत को जोतने के लिए गए थे। इसी बीच वहां बुलाखी गुर्जर अपने परिजनों के साथ लाठी फरसे और बंदूकों से लैस होकर मौके पर पहुंच गए। श्रीकृष्णा गुर्जर व उसके स्वजन को खेत जोतता देख बुलाखी व उसके स्वजन ने ताबड़ताेड़ फायरिंग कर दीं। तीन को गोली लगी, दो फरसे से घायल गोलीबारी में एक गोली श्रीकृष्णा गुर्जर के सीने में लगी, देशराम के बांये कंधे पर लगी और अंकुर गुर्जर की पीठ में गोली लगी। वहीं करतार व विशंभर फरसों के हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए। गोली लगने से श्रीकृष्णा गुर्जर ने मौके पर दम तोड़ दिया। बाकी घायलों को सीधे ही ग्वालियर अस्पताल में भर्ती कराया गया। वारदात की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और छानबीन में जुट गई। पुलिस अभी इस मामले में आरोपितों पर मामला दर्ज कर रही है। धारदार हथियारों से किया हमला, चार हुए घायल बागचीनी थाना क्षेत्र के घुर्रा गांव में गुरूवार की शाम को विवाद के चलते एक पक्ष ने दूसरे पक्ष पर धारदार हथियारों से हमला कर दिया। इस हमले में चार लोग घायल हुए। जिन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जानकारी के मुताबिक घुर्रा गांव निवासी शाहरूख खान का गांव के ही जफर खान से किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई। इसी कहासुनी पर जफर व उसके स्वजन ने शाहरूख पर हमला कर दिया। बचाव में शाहरूख के स्वजन इंतो खां, साबिर व उम्मेद खान आए तो उन पर भी आरोपितों ने धारदार हथियार से हमला कर घायल कर दिया। पुलिस ने इस मामले में शाहरूख की फरियाद पर आरोपित जफर खान, हनीफ, पप्पन व सागीर खान के खिलाफ मामला दर्ज किया है। recent visitors 255

भारत-चीन सीमा विवाद: पूर्वी लद्दाख में गश्त बहाल, तनाव घटाने की दिशा में बड़ा कदम

Step towards peace in Eastern Ladakh: Indian Army resumes patrolling in Demchok, sweets exchanged on Diwali पूर्वी लद्दाख में टकराव वाले प्रमुख बिंदुओं से भारतीय और चीनी सैनिकों के पूरी तरह पीछे हटने के कुछ ही दिनों बाद भारतीय सेना ने शुक्रवार (1 नवंबर 2024) को डेमचोक में गश्त फिर से शुरू कर दी। सेना के सूत्रों ने इसे भारत-चीन संबंधों में स्थिरता की दिशा में एक सकारात्मक संकेत बताया है। सूत्रों के अनुसार, डेमचोक में गश्त शुरू हो चुकी है, और जल्द ही भारतीय सेना देपसांग में भी गश्त पर लौटेगी। इससे पहले दोनों देशों के बीच हुए समझौते के तहत सैनिकों ने टकराव वाले बिंदुओं से पीछे हटने की प्रक्रिया पूरी की थी। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य अप्रैल 2020 से पहले की स्थिति को बहाल करना है, जब लद्दाख के विभिन्न क्षेत्रों में तनाव गहरा गया था। दिवाली पर सीमा पर मिठाईयों का आदान-प्रदान समझौते के ठीक एक दिन बाद, दिवाली के अवसर पर वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर विभिन्न सीमा बिंदुओं पर भारतीय और चीनी सैनिकों ने मिठाईयों का आदान-प्रदान किया। इसे दोनों देशों के बीच सामंजस्यपूर्ण संबंध की एक नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। इस परंपरागत आदान-प्रदान में दोनों पक्षों में सौहार्द और मित्रता का माहौल देखने को मिला। गलवान झड़प के बाद चार साल से जारी गतिरोध में सफलता जून 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद भारत-चीन संबंधों में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया था और पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर गतिरोध जारी था। लेकिन विदेश सचिव विक्रम मिस्री के अनुसार, हाल ही में हुई बातचीत के बाद दोनों देशों ने गतिरोध समाप्त करने के एक महत्वपूर्ण समझौते पर सहमति जताई है। इस समझौते को 2020 में उत्पन्न हुए मुद्दों को हल करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। गश्त की बहाली से अप्रैल 2020 से पहले की स्थिति की ओर वापसी सेना के सूत्रों का कहना है कि गश्त बहाली के लिए स्थानीय स्तर पर कमांडरों के बीच बातचीत जारी रहेगी। इसके साथ ही भारतीय सेना अप्रैल 2020 से पहले की गश्त वाली स्थिति और स्तर को बहाल करने का प्रयास करेगी। सत्यापन प्रक्रिया चल रही है और गश्त के तरीकों पर चर्चा और निर्णय हो रहे हैं। भारत-चीन के बीच यह प्रगति दोनों देशों के बीच शांति और सामंजस्य बढ़ाने का एक कदम है, जो आने वाले समय में स्थिरता का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। recent visitors 143