योगी का चलेगा डंडा सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारियों को वापस करना होगा वेतन

एटा   उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एटा और कासगंज जिलों के कलेक्टर कार्यालय में 1993 और 1995 के बीच फर्जी तरीके से नौकरी पाने वाले 24 कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया है. इन सभी पर राजस्व परिषद के फर्जी आदेश के जरिए नौकरी पाने का आरोप है. 1995 में हुई थी फर्जी नियुक्ति बताया गया है कि 1995 में एटा के तत्कालीन डीएम मेजर आरके दुबे को एक पत्र मिला, जिसमें 24 लोगों की नियुक्ति का आदेश दिया गया था. इस आदेश के आधार पर नियुक्तियां की गईं. कुछ वर्षों बाद शिकायत हुई कि ये आदेश फर्जी था. इसके बाद जांच शुरू हुई और राजस्व परिषद ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया था.   फाइलें दबाकर टाल दिया गया था मामला इस मामले में लंबे समय तक फाइलें दबाकर मामले को टालने की कोशिश की गई, लेकिन 2019 में फिर से शिकायत होने पर जांच में बड़ा खुलासा हुआ. जांच के दौरान सामने आया कि फर्जी तरीके से नौकरी पाने वाले कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब कर दिए थे. डीएम की गहन जांच के बाद एसआईटी गठित की गई. एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में 30 कर्मचारियों की संलिप्तता पाई, इसमें 19 रिटायर हो चुके थे, जबकि चार अभी भी कार्यरत थे. सरकार ने इन्हें बर्खास्त कर रिटायर हो चुके कर्मचारियों से भी वेतन और अन्य लाभों की रिकवरी के आदेश दिए हैं.   recent visitors 72

प्रयागराज कुम्भ में विहिप करेगी कई बड़े कार्यक्रम

अयोध्या  विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) ने अपने सभी सांगठनिक कार्यक्रम और बैठकें और सम्मेलन प्रयागराज में आयोजित कुंभ में करने का निर्णय लिया है। विहिप महामंत्री बजरंग लाल बागड़ा की ओर से इस सिलसिले में विस्तृत कार्य योजना जारी कर दी गई है। इसके अनुसार पूरे कुंभ भर संगठन का वहीं पर जमावड़ा रहेगा। बजरंग लाल बागड़ा की ओर से सितम्बर में ही जारी पत्र के अनुसार 19 जनवरी को मेरठ, लखनऊ, पटना क्षेत्र का मातृशक्ति सम्मेलन, 24 को केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक, अगले दिन 25 को प्रथम बेला में साध्वी सम्मेलन, द्वितीय बेला में संत सम्मेलन होगा। 27 जनवरी को युवा संत सम्मेलन, छह फरवरी को मंत्रियों एवं संगठन मंत्रियों की बैठक, सात से नौ फरवरी तक प्रन्यासी मंडल की बैठक, 10 फरवरी को विमर्श कार्यशाला, 10-11 फरवरी को विभाग मंत्री और संगठन मंत्रियों का अभ्यास वर्ग होगा। 11-12 फरवरी को बजरंग दल की अखिल भारतीय बैठक, 12 फरवरी को विभाग संगठन मंत्री अभ्यास वर्ग, 15-16 फरवरी को धर्म प्रसार अखिल भारतीय बैठक, 15-16-17 फरवरी मातृशक्ति, दुर्गा वाहिनी की अखिल भारतीय बैठक, सत्रह को धर्म प्रसार संत बैठक, 19 फरवरी को गोरक्षा अखिल भारतीय बैठक और बीस फरवरी को गोरक्षा सम्मेलन होगा।   recent visitors 95

संरक्षण गृहों का उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण प्रदान करना है, जहां वे अच्छे नागरिक के रूप में विकसित हो सकें- CM योगी

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में महिला कल्याण विभाग ने बच्चों के सर्वांगीण विकास और सुरक्षा के लिए एक नई और महत्वपूर्ण पहल की है। इस पहल के तहत राज्य के विभिन्न जनपदों में 10 नए बाल संरक्षण गृहों का निर्माण और संचालन किया जाएगा। इन संरक्षण गृहों का उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण प्रदान करना है, जहां वे अच्छे नागरिक के रूप में विकसित हो सकें। महिला कल्याण विभाग द्वारा प्रस्तावित इस योजना के अनुसार, प्रदेश के मथुरा, प्रयागराज, कानपुर नगर, आजमगढ़, झांसी, अमेठी, फैजाबाद, देवरिया, सुल्तानपुर तथा ललितपुर में इन संरक्षण गृहों की स्थापना की जाएगी। हर संरक्षण गृह में 100-100 बच्चों को रखने की क्षमता होगी, जिससे अधिक से अधिक बच्चों को लाभान्वित किया जा सके। इनमें 1 राजकीय बाल गृह (बालिका), 1 राजकीय बाल गृह (बालक), 7 राजकीय संप्रेक्षण गृह (किशोर), किशोर न्याय बोर्ड सहित 1 प्लेस ऑफ सेफ्टी गृह शामिल है। इन संरक्षण गृहों में बच्चों को न केवल रहने की सुविधाएं दी जाएगी, बल्कि उनके शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास का भी ध्यान रखा जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सोच के अनुसार महिला एवं बाल विकास विभाग इन संरक्षण गृहों की स्थापना से असहाय और संवेदनशील बच्चों को एक नया जीवन देकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास कर रहा है। इन गृहों में बच्चों को एक संरक्षित वातावरण में शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और जीवन कौशल जैसी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। इस योजना के तहत राज्य सरकार ने बाल संरक्षण गृहों के निर्माण के लिए आवश्यक फंड भी निर्धारित किए हैं। सभी गृहों का निर्माण योगी सरकार अपने बजट से करेगी। वहीं इन गृहों के संचालन में केंद्र सरकार द्वारा मिशन वात्सल्य योजना के प्रावधानों के केंद्रांश-60 प्रतिशत और राज्यांश-40 प्रतिशत के अनुसार राज्य सरकार पर 7.96 करोड़ रुपये का व्ययभार आएगा। इसके साथ ही ‘मुख्यमंत्री बाल आश्रय योजना’ के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2024-25 में 100 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। योजना के सफल संचालन के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह भी सुनिश्चित किया है कि इन गृहों का निर्माण और प्रबंधन गुणवत्ता मानकों के अनुसार किया जाएगा। इसके लिए सरकार ने टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से कंसल्टेंट्स का चयन भी किया है, ताकि इन बाल संरक्षण गृहों में दी जाने वाली सेवाओं का उच्चतम स्तर सुनिश्चित किया जा सके। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का उद्देश्य है कि राज्य का कोई भी बच्चा असुरक्षित या उपेक्षित महसूस न करे। सीएम योगी ने कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए, क्योंकि वे समाज के भविष्य हैं। इस योजना के तहत बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए विशेष प्रशिक्षित कर्मचारियों की नियुक्ति की जाएगी, जो उनकी सुरक्षा और कल्याण के प्रति संजीदा होंगे। इन बाल संरक्षण गृहों में बच्चों को उनकी उम्र और जरूरतों के हिसाब से सेवाएं दी जाएंगी, ताकि वे मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रह सकें।   recent visitors 56

बंटेंगे तो कटेंगे के नारे से योगी ने जाति और संविधान वाले नैरेटिव को तोड़ा, महाराष्ट्र चुनाव में पीएम मोदी से अधिक रैली CM योगी करेंगे

मुंबई महाराष्ट्र चुनाव प्रचार अब जोर पकड़ने लगा है और कांग्रेस, बीजेपी समेत सभी दलों के स्टार प्रचारकों के दौरे शुरू हो गए हैं । अगले 13 दिनों तक बड़े नेता महाराष्ट्र में तूफानी दौरा करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महाराष्ट्र में 11 रैलियां करेंगे। आठ नवंबर से पीएम मोदी की जनसभा की शुरुआत होगी। 6 नवंबर को राहुल गांधी भी आरएसएस के गढ़ नागपुर से चुनाव प्रचार की शुरुआत करेंगे। 18 अक्तूबर की शाम को चुनाव प्रचार का शोर थम जाएगा। उससे पहले यूपी के मुख्यमंत्री और बीजेपी के ट्रंप कार्ड साबित हो चुके योगी आदित्य नाथ मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र में 15 चुनावी सभाओं को संबोधित करेंगे। वह पीएम मोदी से अधिक जनसभाओं में शिरकत करेंगे। एक्सपर्ट मानते हैं कि महाराष्ट्र में योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी और 'बंटेंगे तो कटेंगे' वाले नारे का असर भी महाराष्ट्र चुनाव में दिखेगा। जम्मू और हरियाणा में राहुल गांधी पर भारी पड़े योगी हरियाणा और जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में योगी आदित्यनाथ का करिश्मा नजर आया। जम्मू-कश्मीर में योगी आदित्यनाथ का स्ट्राइक रेट 90 फीसदी और हरियाणा में करीब 65 फीसदी रहा। जम्मू में योगी ने पांच विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी रैलियां कीं, जिनमें से चार पर बीजेपी को जीत मिली। बीजेपी किश्तवाड़ और कठुआ जैसे मुस्लिम बाहुल्य सीट पर जीतने में सफल रही। किश्तवाड़ में पहली बार बीजेपी की शगुन परिहार ने कमल खिलाया। हरियाणा में भी योगी आदित्यनाथ ने 20 विधानसभा क्षेत्रों में प्रचार किया, जिनमें से 13 पर बीजेपी को जीत मिली। यह जीत कांटे के मुकाबले में बीजेपी को तीसरी बार हरियाणा की सत्ता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण साबित हुई। सीएम योगी ने हरियाणा में असंध से चुनावी रैली की शुरुआत की थी। इस सीट से ही राहुल गांधी प्रचार में उतरे थे। असंध में बीजेपी को जीत मिली। हरियाणा से कनाडा तक लगे 'बंटेंगे तो कटेंगे' के नारे हरियाणा चुनाव में ही योगी आदित्यनाथ ने 'बंटेंगे तो कटेंगे' के चुनावी नारे को लॉन्च किया। इस नारे में ग्राउंड पर इस कदर कमाल किया कि बीजेपी ने एंटी इम्कबेंसी और कांग्रेस के नैरेटिव को धवस्त कर दिया। यह नारा इनके जुबान पर इस कदर चढ़ा कि गैर चुनावी राज्यों में भी बीजेपी समर्थक इसे आजमाने लगे। लोकप्रियता का आलम यह है कि कनाडा में हमले के बाद हिंदू समुदाय ने अपने प्रदर्शन में'बंटेंगे तो कटेंगे' के नारे लगाए। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के ऐलान के बाद मुंबई समेत राज्य के कई हिस्सों में योगी आदित्यनाथ की तस्वीर के साथ 'बंटेंगे तो कटेंगे' के पोस्टर लगाए गए। एक्सपर्ट मानते हैं कि चुनाव में एमवीए के लिए मुस्लिम वोटरों की एकजुटता का जवाब इस नैरेटिव से दिया जा सकता है। इससे पहले के चुनाव में बाबा का बुलडोजर भी काफी लोकप्रिय और प्रभावी साबित हुआ था। क्यों चलता है योगी आदित्यनाथ का करिश्मा चुनाव प्रचार के दौरान योगी आदित्यनाथ अपने भाषण की शुरुआत महिला विकास, किसान और विकास जैसे मुद्दों से करते हैं। 'युवाओं के हाथ में तमंचा नहीं टेबलेट होना चाहिए', यह उनकी पसंदीदा लाइनों में से एक है। इसके बाद मोदी सरकार के कार्यकाल में हुए काम के जरिये आतंकवाद को लेकर कांग्रेस को निशाने पर रखते हैं। आतंक की बात होती है तो पाकिस्तान की चर्चा लाजिमी है। पाकिस्तान और आतंकवाद के साथ ही वह अपना संदेश साफ कर देते हैं। दंगों की चर्चा करते हैं तो बुल्डोजर एक्शन के बारे में बताते हैं। राम मंदिर की चर्चा तो सभा में मौजूद के लोगों को अयोध्या में दर्शन का निमंत्रण देते हैं। जब समां बंध जाता है तो वह सभा में मौजूद लोगों से संवाद भी करते हैं। यूपी में सड़कों पर नमाज बंद, मस्जिदों में लगे लाउड स्पीकर हटाने और अपराधियों के खिलाफ बुलडोजर एक्शन पर भी जनता का फीडबैक लेते हैं। हरियाणा में राहुल गांधी के जातिगत आरक्षण के जवाब में ही उन्होंने 'बंटेंगे तो कटेंगे' का नारा दिया था। recent visitors 74

योगी सरकार की नई योजना से होगी 8 लाख की कमाई, फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूटूबर को फायदा

लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार ने डिजिटल दुनिया में रोजगार के नए दरवाजे खोलते हुए एक नई सोशल मीडिया पॉलिसी की घोषणा की है। इसके तहत सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स अब राज्य की कल्याणकारी योजनाओं और अन्य पहल का प्रचार करके हर महीने 8 लाख रुपये तक कमा सकते हैं। यह पॉलिसी राज्य के युवाओं और डिजिटल क्रिएटर्स के लिए रोजगार के अवसर पैदा करेगी। इसी के साथ-साथ सरकारी योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाने में मदद करेगी। इस पॉलिसी में क्या है खास? दरअसल, यूपी सरकार ने एक नई सोशल मीडिया पॉलिसी की घोषणा की है। इस पॉलिसी का मकसद न केवल सरकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार करना है, बल्कि राज्य के युवाओं और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स को एक मौका देना है, जिसके तहत वे सरकारी योजनाओं और पहल को प्रमोट करके हर महीने लाखों रुपये कमा सकते हैं। यह पॉलिसी फेसबुक, एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स पर लागू होगी, जिससे डिजिटल दुनिया में रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। इंफ्लुएंसर्स के लिए सुनहरा मौका इस पॉलिसी के तहत सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स को सरकार की योजनाओं का प्रचार-प्रसार करने के लिए पैसे मिलेंगे। खास बात यह है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को इंफ्लुएंसर्स के फॉलोअर्स और सब्सक्राइबर्स के आधार पर विभिन्न श्रेणियों में बांटा गया है, जिसके अनुसार उनकी अधिकतम कमाई तय की गई है। एक्स (ट्विटर), फेसबुक, इंस्टाग्राम – अधिकतम भुगतान: ₹5 लाख प्रति माह (X) – अधिकतम भुगतान: ₹4 लाख प्रति माह (फेसबुक) – अधिकतम भुगतान: ₹3 लाख प्रति माह (इंस्टाग्राम) – अधिकतम भुगतान: ₹2 लाख प्रति माह (कम फॉलोअर्स के लिए) यूट्यूब – अधिकतम भुगतान: ₹8 लाख प्रति माह (वीडियो, शॉर्ट्स, और पॉडकास्ट के लिए) – अन्य श्रेणियों में ₹7 लाख, ₹6 लाख और ₹4 लाख प्रति माह तक की कमाई हो सकती है। इंफ्लुएंसर्स को सरकारी योजनाओं के वीडियो, ट्वीट्स, पोस्ट्स और रील्स को सोशल मीडिया पर शेयर करना होगा, जिसे ‘V-Form’ नामक एक डिजिटल एजेंसी संभालेगी। यह एजेंसी इस पूरी प्रक्रिया को मैनेज करेगी, जिससे इंफ्लुएंसर्स को सीधे भुगतान मिलेगा। कैसे बन सकते हैं इसका हिस्सा? अगर आप एक सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर हैं और इस पॉलिसी का लाभ उठाना चाहते हैं, तो आपको इन बातों का ध्यान रखना होगा। सोशल मीडिया अकाउंट्स की श्रेणीः आपको पहले यह तय करना होगा कि आपके फॉलोअर्स या सब्सक्राइबर्स की संख्या किस कैटेगरी में आती है। एक्स, फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब के लिए अलग-अलग कैटेगरी बनाई गई हैं, जिसके आधार पर आपकी कमाई तय होगी। रजिस्ट्रेशन: इस स्कीम का हिस्सा बनने के लिए आपको सरकार द्वारा नामित एजेंसी ‘V-Form’ के माध्यम से रजिस्टर करना होगा। इसके लिए आपको अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स की जानकारी, फॉलोअर्स की संख्या और कंटेंट के नेचर को सबमिट करना होगा। कॉन्टेंट की अपलोडिंगः रजिस्ट्रेशन के बाद आपको सरकारी योजनाओं से जुड़े वीडियो, पोस्ट्स, रील्स या पॉडकास्ट को अपने प्लेटफार्म पर अपलोड करना होगा। इन पोस्ट्स के माध्यम से सरकारी योजनाओं की जानकारी और उनकी लाभकारी पहल को जनता के सामने लाना होगा। अधिकतम कमाई: जैसे-जैसे आपके फॉलोअर्स और सब्सक्राइबर्स बढ़ेंगे, वैसे-वैसे आपकी कैटेगरी भी बढ़ेगी, जिससे आप हर महीने 8 लाख रुपये तक कमा सकते हैं। यूट्यूब पर कंटेंट क्रिएटर्स के लिए यह विशेष रूप से फायदेमंद हो सकता है, जहां वीडियो, शॉर्ट्स और पॉडकास्ट के माध्यम से उन्हें सबसे अधिक कमाई का मौका मिलेगा। सिस्टम से जुड़े लोगों का मानना है कि यह पॉलिसी केवल सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स को ही नहीं, बल्कि समाज के सभी वर्गों को लाभान्वित करने वाली है। इसके माध्यम से सरकारी योजनाओं को तेजी से और प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाया जा सकेगा। खासकर ग्रामीण इलाकों में जहां लोगों तक सरकारी योजनाओं की जानकारी कम पहुंच पाती है, इस पॉलिसी के जरिए उन्हें सरकारी लाभों के बारे में पता चलेगा। फर्जी खबरों पर भी लग सकेगी रोक! इस पॉलिसी का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह सोशल मीडिया पर फैलने वाली फर्जी और भ्रामक खबरों पर भी अंकुश लगाएगी। इसके तहत सरकार ने नियम बनाए हैं, जिसमें किसी भी प्रकार के आपत्तिजनक, राष्ट्र-विरोधी या समाज-विरोधी कंटेंट पोस्ट करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। फर्जी खबरों, नफरत फैलाने वाले संदेशों और समाज को भड़काने वाले कंटेंट पर सरकार की नजर रहेगी और उचित जरूरी उठाए जाएंगे। recent visitors 134

बुलडोजर एक्शन के बाद अब योगी आदित्यनाथ का एक स्लोगन भी चल पड़ा ‘बंटेंगे तो कटेंगे’

लखनऊ आगरा के एक कार्यक्रम में योगी आदित्यनाथ ने बांग्लादेश के हालात की मिसाल देते हुए लोगों को एक स्लोगन के जरिये आगाह करने की कोशिश की थी, 'बंटेंगे तो कटेंगे'. और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उसी बात को महाराष्ट्र में अपने तरीके से पेश किया, 'अगर हम बंटेंगे तो बांटने वाले महफिल सजाएंगे' – और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के भाषण में भी ऐसा ही भाव महसूस हुआ था. अब तो संघ की तरफ से ये स्लोगन ऐसे एक्सप्लेन किया जा रहा है, जैसे यही आखिरी रास्ता बचा हो. इस नारे के पीछे राजनीतिक मकसद को चाहे जैसे भी समझा जाये, लेकिन ये तो मानना ही पड़ेगा कि ये लोगों की जबान पर भी चढ़ रहा है, और बीजेपी विरोधी राजनीतिक दलों के नेताओं की तरफ से विरोध भी जताया जाने लगा है. धार्मिक एकता, या जातीय एकता पर जोर देखा जाये तो योगी आदित्यनाथ ने कोई नई बात नहीं कही है. एकता की अहमियत तो बरसों से समझाई जाती रही है. योगी आदित्यनाथ ने उसी बात को अपने अंदाज में पेश किया है, और मौका ऐसा है कि ये नया राजनीतिक नारा हो गया है. खास बात ये है कि इस नारे का जय श्रीराम की तरह विरोध भी नहीं किया जा सकता, जैसा ममता बनर्जी करती रही हैं. ये ऐसा भी नारा नहीं है जिसकी वजह से योगी सीधे सीधे निशाने पर आ जायें, जैसे – '… गर्मी शांत कर देंगे.' तभी ये स्लोगन लोगों की जबान पर भी चढ़ रहा है, और आगरा में तो पोस्टर भी लग चुके हैं. आगरा में  लगे पोस्टर पर योगी आदित्यनाथ की तस्वीर भी है, और ये स्लोगन भी लिखा है – और ये पोस्टर इलाके के लोगों को हैपी दिवाली बोलने के लिए लगाया गया है. फर्ज कीजिये, ऐसे में जबकि लोग अपने वॉटर बॉटल पर 'बंटेंगे तो कटेंगे' लिखवाने लगे हों, तो मानकर चलना चाहिये कि सड़कों पर चल रही गाड़ियों के ग्लास पर भी ये स्लोगन पढ़ने को मिल सकता है. अब सवाल है कि योगी आदित्यनाथ के इस नारे में धार्मिक एकता का संदेश है, या जातीय एकता का? परिभाषित इसे अलग अलग तरीके से जरूर किया जा रहा है, लेकिन ये तो हर मामले में फिट बैठता है. योगी आदित्यनाथ के स्लोगन का समर्थन करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले कहते हैं, हिंदू समाज एकता में नहीं रहेगा तो आजकल की भाषा में 'बंटेंगे तो कटेंगे' हो सकता है. हिंदू समाज के जातियों में बंटने की सबसे ज्यादा फिक्र संघ को ही रही है, और उसी बात को लेकर दत्तात्रेय होसबले समझाते हैं, समाज में अगड़ा-पिछड़ा, जाति-भाषा में भेद करेंगे तो हम कटेंगे… इसलिए एकता जरूरी है… हिंदू समाज की एकता लोक कल्याण के लिए है… हिंदुओं को तोड़ने के लिए शक्तियां काम कर रही हैं… आगाह करना जरूरी है. उत्तर प्रदेश में हाल ही में पुलिस एनकाउंटर को लेकर भी जातीय राजनीति का बोलबाला देखने को मिला है. सुल्तानपुर डकैती के आरोपियों के एनकाउंटर से लेकर पुलिस हिरासत में होनेवाली मौतों को लेकर भी – और ऐसे में संघ और बीजेपी की तरफ से योगी आदित्यनाथ के स्लोगन को चुनावों में भुनाने की कोशिश चल रही है. एक्शन, स्लोगन और ब्रांड योगी 1. एकता की जो बातें बहुत पहले से होती रही हैं. नैतिक शिक्षा में ऐसी तमाम नसीहतें दी जाती रही हैं. तमाम ऐसे किस्से पढ़ने को मिलते हैं – योगी आदित्यनाथ ने उसी बात को ठेठ देसी अंदाज में बोल कर वर्ड-ऑफ-माउथ बना दिया है. और योगी की ये बात वैसे ही ली जा रही है, जैसे आमिर खान के मुंह से सुनने को मिला था, 'ठंडा मतलब कोका कोला.' जैसे, यूपी और बिहार में सड़कों पर रफ्तार भरते ट्रकों के पीछे लिखा होता है, 'सटला त गइला बेटा.' थोड़ा ध्यान देकर देखिये, सभी में ध्वनि एक जैसी ही है. 2. वैसे भी योगी आदित्यनाथ हिंदुत्व की राजनीति में एक ब्रांड तो हैं ही. ब्रांड मोदी के बाद अगर उस मिजाज का कोई और ब्रांड है तो ब्रांड योगी ही है – और 'बंटेंगे तो कटेंगे' में भी बुलडोजर की ही छवि उभर कर आ रही है. 3. जैसे योगी के बुलडोजर को बीजेपी सरकारों के मुख्यमंत्रियों ने हाथों हाथ लिया था, बंटेंगे तो कटेंगे को भी करीब करीब वैसे ही लिया जा रहा है – और खास बात ये है कि ये भाव मोदी से लेकर भागवत तक के भाषणों में भी प्रकट होने लगा है.   recent visitors 71

योगी सरकार ने दीपावली पर एक दिन और अवकाश का किया ऐलान, 4 दिनों की लंबी छुट्टी की मौज

लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार ने दिवाली को लेकर एक दिन और अवकाश की घोषणा कर दी है. इससे दीपावली का अवकाश कुल चार दिनों का हो गया है. शुक्रवार को 31 अक्तूबर को दिवाली के साथ कई जगहों पर 1 नवंबर को भी दीपावली मनाई जा रही है. ऐसे में 31-1 को अवकाश के साथ शनिवार-रविवार को चार दिन की छुट्टी रहेगी. इससे पहले राज्य में 31 अक्टूबर की ही छुट्टी घोषित की गई थी. लेकिन अब इसके साथ 1 नवंबर को भी अवकाश घोषित कर दिया गया है. इसको लेकर आदेश भी जारी कर दिया गया है. ऐसे में अब प्रदेश में दो दिनों तक अवकाश रहेगा. आपको बता दें कि इस बार दिवाली यूपी सहित कई राज्यों में 31 अक्टूबर की शाम से 1 नवंबर की शाम 6 बजे तक मनाई जाएगी. जिसको लेकर योगी सरकार की तरफ से कर्मचारियों को 1 नवंबर की छुट्टी दी गई है. अयोध्या में दिवाली के दौरान चीनी सजावटी वस्तुओं का नहीं होगा उपयोग इधर, अयोध्या में राम मंदिर का प्रबंधन करने वाले श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने स्थानीय शिल्प स्किल को बढ़ावा देने के लिए दिवाली के दौरान चीनी सजावटी वस्तुओं का उपयोग नहीं करने का फैसला किया है. अयोध्या शहर इस साल भव्य दीपोत्सव की तैयारी कर रहा है. यह आयोजन का आठवां संस्करण होगा और जनवरी में राम मंदिर में अभिषेक समारोह के बाद पहला होगा. मंदिर परिसर को दीयों और अन्य वस्तुओं से भी सजाया जाएगा. मीडिया में जारी एक बयान के मुताबिक श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने दिवाली के दौरान चीनी सजावटी वस्तुओं के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है. स्थानीय शिल्प कौशल को बढ़ावा दिया है और 'वोकल फॉर लोकल' पहल और आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ने के साथ तालमेल बिठाया है. पुलिस ने कहा कि दीपोत्सव कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा बनाए रखने के लिए लगभग 10000 सुरक्षाकर्मी ड्यूटी पर होंगे और उनमें से लगभग आधे सादे कपड़ों में होंगे. राम मंदिर के चीनी सजावटी वस्तुओं का उपयोग नहीं करने के फैसले के बारे में पूछे जाने पर अयोध्या के आयुक्त गौरव दयाल ने कहा कि मूल रूप से हम केवल उन वस्तुओं का उपयोग करना चाहते हैं जो स्वदेशी और स्थानीय हैं.उन्होंने कहा कि वे चीनी वस्तुओं का उपयोग नहीं करेंगे. recent visitors 105