Thursday, July 2, 2026 1:45 am

दुल्हा-दुल्हन को गोद में उठाकर कराया पार, छत्तीसगढ़-बलौदा बाजार का मल्लीन नाला बना टापू

बलौदा बाजार. बलौदा बाजार जिले के पलारी ब्लॉक मुख्यालय से 10 किलोमीटर दूर ग्राम मल्लीन के नाला पारा के लिए बरसात के दो महीने किसी दुःस्वप्न के समान आते हैं जब एक पूरा मुहल्ला सारी दुनिया के साथ अपने ही गाँव से कट जाता है। कुल 204 घरों में बसे 1347 निवासियों वाले ग्राम पंचायत  मल्लीन को दो भागों में बाँटता है मल्लीन नाला। मुख्य भाग में स्कूल, आंगनबाड़ी, राशन भंडार, आवश्यक सामानों की दुकान और सामुदायिक भवन जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं। दूसरा भाग नाला पारा इन सारी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। इस भाग के 20 घरों में बसने वाले 125 लोगों के लिए बरसात के दो महीने कई तरह की समस्याओं का सबब बनकर आते हैं, जब थोड़ी सी बरसात में ही नाले का चढ़ा पानी नाला पारा को मुख्य भाग से पूरी तरह पृथक कर देता है। मुख्य बस्ती से कटने के बाद सबसे बड़ी दिक्कत 40 स्कूली बच्चों को शाला तक पहुँचाने में परेशानी आती है। जब पानी घुटनों तक हो तो किसी तरह नाले में बने चैक डेम या पालक के कंधों में बैठ बच्चे नाला पार कर लेते हैं, लेकिन उससे ज्यादा होने पर बच्चों का स्कूल जाना बंद हो जाता है। जिसके कारण विद्यार्थी शैक्षणिक और बौद्धिक स्तर पर पिछड़ते जाते हैं। यही हाल आंगनबाड़ी केंद्र जाने वाले 8 छोटे बच्चों का है। न बच्चे जा पाते हैं और न ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता आ पाती हैं। परिणामस्वरूप पोषण आहार और टीकाकरण जैसे शासन के कार्यक्रम यहाँ तक पहुँच ही नहीं पाते हैं। इस बीच किसी की तबियत खराब हो जाए तो अस्पताल तक पहुँचने का कोई साधन नहीं है। एम्बुलेंस तो दूर डॉक्टर भी मरीज तक नहीं पहुँच पाते, परेशानियाँ केवल जीते जी ही नहीं मरने के बाद भी पेश आती हैं, मुक्तिधाम नाला के इस पार है, इन  महीनों में किसी की मृत्यु हो जाए तो अन्तिम संस्कार का जतन करना टेढ़ी खीर बन जाती है। बरसात के दो महीने गरीब परिवारों के लिए दोहरी मार का कारण बनते हैं, एक तरफ  तो बाहर काम करने को जाने का रास्ता बंद दूसरी तरफ राशन केंद्र से राशन भी नहीं उठा पाते। मुहल्ले के निवासी जनक राम,चिन्ता राम,धरम सिंग ध्रुव, रवि साहू,दादू राम, हीरालाल,बिहारी, पाहरू साहू बताते हैं कि अन्य मौसम में नाले में बने स्टॉपडैम के रपटे या नाले के अंदर से अस्थायी कच्ची सड़क बनाकर आवागमन का जुगाड़ बनाया जाता है। पर यह जुगाड़ पहली बरसात में ही खत्म हो जाता है, नाला पर एक पक्का पुल इन सारी समस्याओं को जड़ से खत्म कर सकती है और इस बाबत शासन, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का ध्यान कई बार दिलाया गया लेकिन अब तक परिणाम शून्य ही रहा है। बरात गई तो नाला सुखा था लोटे तो नाले में पानी दूल्हे दुल्हन को गोद में उठाकर नाला पार करना पड़ा। बेटी विदा करने की जद्दोजहद नाला पारा में रहने वाले रूपेश की प्रेम विवाह इसी महीने 20 जुलाई को बस्ती पारा की भारती से तय हुई। घर से दूल्हा के रूप में तैयार हुए रूपेश के लिए नाला पार करना सोनी-महिवाल और चनाब के कथानक के कुछ हिस्सों को जीवंत करने जैसा रहा। बहरहाल, सारे बाराती सूखे नाले से आसानी से  नाला पार कर उस पार पहुँचे। अब दुल्हन के घर सारे रस्मो-रिवाज के पूर्ण होने तक सारे घराती मिलकर भगवान से प्रार्थना करते रहे कि पानी न गिरे, वरना बेटी की विदाई जाने कितने दिनों के लिए अटक जाती। जब मांगलिक कार्यक्रम पूर्ण हुए तो दूल्हा- जब दुल्हन लेकर घर लोटे तब तक बारिश हो चुकी थी और नाला में पानी भर जाने से दूल्हे गाड़ी नाला पार नहीं कर पाया और फिर बाराती दूल्हे और दुल्हन को गोद पर उठाकर नाला पार कराया तब दुल्हन अपनी ससुराल पहुंच पाई जो उनके जीवन के लिए एक यादगार पल तो बना पर सारी जीवन इस बात का मलाल भी रहेगा की उसे गोद पर उठाकर ससुराल पहुंचना पड़ा खैर समस्या तो बड़ी है पर इसे हल करना मुमकिन नहीं है जरूरत है तो बस इच्छा शक्ति का की इसे पूरा करना है देखते है की सरकार और प्रशासन जनप्रतिनिधि इस और कब ध्यान देते है और मल्लीन नाला पार बड़ा पुल कब बनता है। recent visitors 128

आईपीएस डांगी को राज्यपाल रामेन डेका के हाथों मिली पीएचडी की डिग्री

रायपुर  हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग के शोधार्थी रतन लाल डांगी (वरिष्ठ आईपीएस) ने बीआईटी भिलाई के ऑडिटोरियम में विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह में राज्यपाल रामेन डेका के हाथों डॉक्ट्रेट (पीएचडी) की डिग्री प्राप्त की. बता दें कि डांगी ने अपना शोध कार्य निर्देशक डी. सुनीता मिश्रा, विभागाध्यक्ष राजनीति विज्ञान शासकीय नवीन महाविद्यालय खुर्सीपार भिलाई एवं सहायक निर्देशक डॉ. प्रमोद यादव विभागाध्यक्ष राजनीति विज्ञान, सेठ आरसीएम कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय दुर्ग के निर्देशन में पूरा किया है. आईपीएस डांगी के शोध का टॉपिक था “छत्तीसगढ़ में माओवादी समस्या के उन्मूलन में सहायक पुलिस आरक्षकों की भूमिका (जिला बीजापुर के संदर्भ में)”. ज्ञात रहे डांगी ने अपने कैरियर की शुरुआत देश के सबसे अधिक नक्सल प्रभावित क्षेत्र बस्तर संभाग से ही की थी. वो एसडीओपी उत्तर बस्तर कांकर एसपी पश्चिम बस्तर बीजापुर, एसपी उत्तर बस्तर कांकेर, एसपी बस्तर, डीआईजी उत्तर बस्तर कांकेर एवं दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा में पदस्थ रहे हैं. इन्होंने देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़े खतरे के रूप में उभरी समस्या माओवाद को नजदीक से देखा है एवं इसका मुकाबला भी किया है. जिला बीजापुर में पुलिस अधीक्षक रहते हुए नक्सलियों के विरुद्ध अभियानों का नेतृत्व करने से उनको राष्ट्रपति द्वारा दो बार पुलिस वीरता पदक से भी सम्मानित किया जा चुका है. माओवादियों के विरुद्ध आदिवासियों का स्व स्पूर्त जन आंदोलन सलवा जुडूम के समय डांगी बीजापुर जिले के पुलिस अधीक्षक थे. उस दौरान माओवादियों ने आदिवासियों के राहत शिविरों एवं सलवा जुडूम नेताओं पर लगातार हमले कर रहे थे. उनकी सुरक्षा के लिए सरकार ने स्थानीय युवाओं को विशेष पुलिस अधिकारी नियुक्त किया. इन युवाओं (एमपीओ) के सहयोग से पुलिस ने सघन नक्सल विरोधी अभियान चलाया, जिससे नक्सलियों के बस्तर से पैर उखड़े. उनके समर्थकों ने विशेष पुलिस अधिकारियों की नियुक्ति के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की ,जिस पर सुनवाई में न्यायालय ने एसपीओ की नियुक्तियों को अवैध ठहराकर सरकार को तुरंत इनकी नियुक्ति को निरस्त करने के निर्देश दिए. स्थानीय युवाओं की नक्सल विरोधी लड़ाई में उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए सरकार ने सहायक सशस्त्र पुलिस बल अधिनियम बनाकर सभी एसपीओ को सहायक पुलिस आरक्षक के पद पर नियुक्त करके सीटीजेडब्ल्यू में विशेष प्रशिक्षण दिलाकर नक्सल मोर्चे पर तैनात कर दिया. इन सहायक पुलिस आरक्षकों की मदद से पुलिस को नक्सल विरोधी अभियानों में अपार सफलताएं मिली. नक्सलियों का प्रभाव क्षेत्र भी सिकुड़ने लगा था. डांगी ने अपने शोध में भी यह पाया कि 99 प्रतिशत युवाओं ने एसपीओ सहायक पुलिस आरक्षक बनने का कारण में नक्सलियों को खत्म करने एवं क्षेत्र के विकास करने को बताया है. 90 प्रतिशत युवाओं ने यह माना कि उनके सहायक पुलिस आरक्षक बनने से स्वयं के साथ ही परिवार ने प्रगति की है. 85 प्रतिशत युवाओं ने माना कि उनके सहायक पुलिस आरक्षक बनने के बाद से उनके गाँव में विकास कार्य हुए हैं. 92 प्रतिशत युवाओं ने माना है कि उनके सहायक पुलिस आरक्षक बनने से नक्सली वारदातों में कमी आई है. 94 प्रतिशत का कहना है कि नक्सल विरोधी अभियानों में तेजी आई है. शोध के दौरान 96 प्रतिशत युवाओं ने बताया कि उनके पारिवारिक, शैक्षणिक एवं सामाजिक पृष्ठभूमि में भी सुधार आया है. 91 प्रतिशत सहायक पुलिस आरक्षकों का कहना है कि उनके इस पद पर नियुक्ति से क्षेत्र के युवाओं का नक्सलियों से मोहभंग हुआ है. साथ ही 91 प्रतिशत का कहना है कि इससे उनके क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं. छत्तीसगढ़ में 2011 के बाद सहायक पुलिस आरक्षकों की नियुक्ति से लगातार नक्सली घटनाओं में कमी आई है. सुरक्षा बलों, आमजनों की मौतों में भी कमी आई है। साथ ही नक्सलियों की मौतों, गिरफ्तारियों एवं उनके आत्म समर्पण की संख्याएं बढ़ी है. क्षेत्र में विकास कार्यों ने भी गति पकड़ी है. डांगी का कहना है कि इस प्रकार की समस्याओं (सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक) का समाधान स्थानीय युवाओं की सहभागिता से ही संभव है. बता दें कि रतन लाल डांगी वर्तमान में राज्य पुलिस अकादमी में निदेशक के पद पर कार्यरत हैं. recent visitors 125

कोचिंग में बर्थडे मनाकर ब्रिज से कूद गई छात्रा रेलवे ट्रैक पर गिरी, हुई दर्दनाक मौत

 उज्जैन  उज्जैन में कोचिंग से जन्मदिन मनाकर घर जा रही 12वीं कक्षा की छात्रा ने जीरो पाइंट पुल से कूदकर खुदकुशी कर ली। छात्रा को पुल की रैलिंग पर चढ़ा देखकर ऑटो रिक्शा ड्राइवर ने उसे बचाने का प्रयास किया था। मगर तब तक छात्रा ने नीचे छलांग लगा दी थी। जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस मामले की जांच में जुटी है। माधवनगर पुलिस ने बताया कि प्रिया पुत्री महेश बैरागी उम्र 17 वर्ष मूल रूप से ग्राम समरखेड़ी की रहने वाली है। मगर यहां अपने मामा के साथ चिमनगंज क्षेत्र में रहती थी। प्रिया 12वीं कक्षा की छात्रा थी और कानीपुरा स्थित शासकीय कन्या हायर सेकंडरी में पढ़ती थी। पुल से ट्रेन की पटरियों पर लगा दी छलांग गुरुवार को प्रिया तीन बत्ती क्षेत्र में कोचिंग गई थी। जहां उसने अपना जन्मदिन मनाया था। अपने साथी छात्र-छात्राओं को उसने चाकलेट भी बांटी थी। इसके बाद वह घर की ओर जा रही थी। जीरो पाइंट पुल पर उसने अपनी साइकिल खड़ी की और बैग रखकर वह पुल पर चढ़ गई और वहां से रेल पटरियों पर छलांग लगा दी थी। ड्राइवर ने उसे पुल की रैलिंग पर चढ़ा देखा जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। पुल से ऑटो रिक्शा लेकर गुजर रहे ड्राइवर राजा ने छात्रा को पुल की रैलिंग पर चढ़ा हुआ देखा था। जिस पर उसने ऑटो से उतरकर उसे बचाने का प्रयास किया। हालांकि तब तक छात्रा कूद चुकी थी। लोग कह रहे सुसाइड नोट मिला, पुलिस कर रही इन्कार माधवनगर थाना प्रभारी राकेश भारती ने बताया कि घटना का पता चलते ही मामा मौके पर पहुंच गए थे। फिलहाल वह कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं है। कुछ लोगों का कहना था कि छात्रा के पास सुसाइड नोट भी मिला है। मगर पुलिस का कहना है कि उन्हें फिलहाल सुसाइड नोट नहीं मिला है। recent visitors 96

हंस ट्रेवर्ल्स के दफ्तर पर सुबह प्रशासन का दल पहुंचा और ताला लगाकर उसके दफ्तर की किया सील

इंदौर इंदौर के व्यस्त क्षेेत्रों में बसें पार्क कर प्रतिदिन सवारियां बैठाने वाले और ट्रैफिक जाम करने वाले छह ट्रेवर्ल्स के दफ्तर प्रशासन ने सील कर दिए। ढक्कनवाला कुंआ मार्ग पर हंस ट्रेवर्ल्स की बसें दिनभर सड़क पर खड़ी रहती थी। गुरुवार सुबह सबसे पहले प्रशासन का दल उसके दफ्तर पहुंचा और ताला लगाकर सील लगा दी। संचालकों से अफसरों ने कहा कि बसों का संचालन शहरी सीमा से किया जाए। शहरी क्षेत्र में बसें नजर आई तो उन्हें भी जब्त किया जाएगा। ट्रैैफिक पुुलिस को सबसे ज्यादा शिकायतेें इस ट्रेवर्ल्स को लेकर ही अाती थी। जब प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची तो वहां बसें नहीं खड़ी थी। चर्चा है कि प्रशासन के छापे की भनक संचालकों को पहले ही लग गई थी। इसके बाद अफसर छोटी ग्वालटोली स्थित मुलतानी सोना ट्रेवर्ल्स के दफ्तर पहुंचे और दफ्तर सील कर दिया। इस ट्रेवर्ल्स की बसे भी पटेल प्रतिमा के आसपास खड़ी रहती है और इस कारण यातायात बाधित होता हैै। इसके अलावा अशोक ट्रेवर्ल्स का दफ्तर भी सील कर दिया गया हैै। झाबुुआ टाॅवर में तीन ट्रेवर्ल्स सील कर दिए गए और तीन बसें भी जब्त की गई। आपको बता दे कि इंदौर में मुंडला नायता और एमआर-10 पर नए बस स्टेशन बन गए है। छह माह के भीतर इन बस स्टेशनों से बसों का संचालन शुरू करने की तैयारी प्रशासन ने की है। शहर के ज्यादातर निजी ट्रेवर्ल्स शाम के समय विजय नगर, रेडिसन चौराहा, खजराना से यात्रियों को बैठातेे है। इस कारण ट्रैफिक भी जाम होता है। recent visitors 108

नागा चैतन्य और शोभिता धुलिपाला ने कर ली सगाई, सोशल मीडिया पर फोटोज वायरल

नागा चैतन्य ने फाइनली शोभिता धुलिपाला से सगाई कर ली है। दोनों की सगाई की फोटोज नागा के पिता नागार्जुन ने शेयर की है। नागार्जुन ने दोनों को सगाई की बधाई दी है और शोभिता का परिवार में स्वागत भी किया है। तस्वीरों में आप देखेंगे कि नागा ने व्हाइट कलर का कुर्ता पजामा पहना है और शोभिता ने पीच कलर की साड़ी। शोभिता के हाथ में डायमंड रिंग भी नजर आ रही है। फोटोज शेयर कर नागार्जुन ने लिखा, 'हमें काफी खुशी हो रही है बताते हुए कि हमारे बेटे नागा चैतन्य की शोभिता धुलिपाला से सगाई हो गई है। सगाई आज सुबह 9.42 बजे हुई। हम शोभिता का अपने परिवार में स्वागत करते हैं। इस प्यारे कपल को बधाई। दोनों को लाइफटाइम की खुशियां और प्यार मिले। भगवान का आशीर्वाद इन पर हमेशा रहे। एक अनंत प्रेम की शुरुआत।' नागार्जुन के घर हुई सगाई इस दौरान नागा की मां अमाला और भाई अखिल भी मौजूद थे। इससे पहले पिछले साल सितंबर में नागा की दूसरी शादी की खबर आई थी। हालांकि उस वक्त एक्टर के सोर्स ने इन खबर को गलत बताया था। नागा और शोभिता काफी समय से एक-दूसरे को डेट कर रहे थे। लेकिन कभी अफेयर की खबरों पर रिएक्ट नहीं किया था। सामंथा के साथ टूटा रिश्ता बता दें कि शोभिता से पहले नागा की सामंथा रुथ प्रभु से शादी हुई थी। दोनों ने लंबे रिलेशनशिप के बाद शादी की थी। कुछ साल साथ रहने के बाद दोनों अलग हो गए। दोनों के तलाक से सभी फैंस को बड़ा झटका लगा था क्योंकि फैंस को दोनों साथ में बहुत पसंद थे। recent visitors 97

रियल स्टेट कंपनी की तरह काम कर रही भाजपा, लिखकर दे कि वक्फ की जमीनें नहीं बेची जाएंगी: अखिलेश यादव

लखनऊ सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा रियल स्टेट कंपनी की तरह काम कर रही है। उन्हें लिखकर देना चाहिए कि वक्फ की जमीनें नहीं बेची जाएंगी। उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा कि ‘वक़्फ़ बोर्ड’ का ये सब संशोधन भी बस एक बहाना है। रक्षा, रेल, नजूल लैंड की तरह ज़मीन बेचना निशाना है। वक़्फ़ बोर्ड की जमीनें, डिफेंस लैंड, रेल लैंड, नजूल लैंड के बाद ‘भाजपाइयों के लाभार्थ योजना’ की शृंखला की एक और कड़ी मात्र हैं। भाजपा क्यों नहीं खुलकर लिख देती : ‘भाजपाई-हित में जारी' इस बात की लिखकर गारंटी दी जाए कि वक़्फ़ बोर्ड की ज़मीनें बेची नहीं जाएंगी। भाजपा रियल स्टेट कंपनी की तरह काम कर रही है। उसे अपने नाम में ‘जनता’ के स्थान पर ‘जमीन’ लिखकर नया नामकरण कर देना चाहिए : भारतीय जमीन पार्टी। बता दें कि केंद्र सरकार वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक को लोकसभा में पेश करने वाली है जिसे लेकर बयानबाजी का दौर जारी है। recent visitors 67