Wednesday, July 1, 2026 7:23 pm

कोर्ट ने केजरीवाल की न्यायिक हिरासत 20 अगस्त तक बढ़ाई, अब रक्षाबंधन भी मनाएंगे जेल में

नई दिल्ली दिल्ली आबकारी नीति CBI मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने सीएम अरविंद केजरीवाल की न्यायिक हिरासत 20 अगस्त तक बढ़ा दी। उन्हें तिहाड़ जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किया गया। दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कथित शराब घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में सीबीआई द्वारा गिरफ्तारी को चुनौती दी थी। शराब घोटाले में सीबीआई वाले मामले में हाईकोर्ट ने यह फैसला सुनाया है। 12 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सीएम केजरीवाल को अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था। हालांकि, सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद से वे जेल से बाहर नहीं आ पाए थे। CBI ने दिल्ली शराब घोटाले में चार्जशीट की दाखिल, केजरीवाल को बनाया आरोपी-: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने कथित शराब घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अन्य आरोपियों के खिलाफ एक विशेष अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था। जिसमें आम आदमी पार्टी (आप) और इसके राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को आरोपी बनाया गया है। recent visitors 76

ग्रामीण महिलाओं की होगी नि:शुल्क सोनोग्राफी, राजस्थान में गर्भवतियों को मिलेगा ‘मां वाउचर’

जयपुर. हेल्थ सेक्टर में राज्य सरकार ने आज से नि:शुल्क सोनोग्राफी की शुरूआत की है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरुवार दोपहर में लांचिंग की। यह योजना इसी साल 8 मार्च से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में बारां, भरतपुर फलौदी में शुरू की गई थी। अब सरकार ने इसका दायरा बढ़ाकर पूरे प्रदेश में इसे लागू की है। चिकित्सा विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव शुभ्रा सिंह ने बताया कि इस योजना के माध्यम से राजकीय सोनोग्राफी केंद्रों के साथ-साथ निजी सोनोग्राफी केंद्रों पर भी निःशुल्क सोनोग्राफी करवाई जा सकेगी। उन्होंने बताया कि गर्भवती महिलाओं को उनके मोबाइल नंबर पर SMS के जरिए QR कोड आधारित ई-वाउचर मिलेगा। उस वाउचर को देकर किसी भी सूचीबद्ध निजी सेंटर में वे निःशुल्क सोनोग्राफी करा सकेंगी। यदि डॉक्टर दोबारा सोनोग्राफी करवाने के लिए कहता है तो फिर से नि:शुल्क वाउचर दिया जाएगा। 30 दिन में टेस्ट जरूरी, आधार-मोबाइल ले जाना होगा साथ जानकारी के अनुसार, 84 दिन या उससे अधिक दिन की गर्भवती महिलाएं इस योजना के तहत फ्री सोनोग्राफी करवा सकती हैं। योजना का लाभ लेने के गर्भवती महिला को अपना जन आधार कार्ड और मोबाइल फोन लेकर चिकित्सा संस्थान पर जाना होगा। वहां ओटीपी के माध्यम से उन्हें SMS पर QR वाउचर जारी किया जाएगा, जिसकी वैधता 30 दिन की होगी। अगर किसी वजह से तय समय में महिला सोनोग्राफी नहीं करा पाती हैं तो वह दोबारा चिकित्सा संस्थान पर जाकर उसकी अवधि 30 दिन तक के लिए और बढ़ा सकती हैं। हालांकि ऐसा सिर्फ एक बार ही किया जा सकेगा। कैसे मिलेगा मां वाउचर योजना का लाभ? चिकित्सा विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव शुभ्रा सिंह ने बताया कि इस योजना के माध्यम से राजकीय सोनोग्राफी केंद्रों के साथ-साथ निजी सोनोग्राफी केंद्रों पर भी निःशुल्क सोनोग्राफी सेवाओं का लाभ मिल सकेगा. गर्भवती महिलाओं को उनके मोबाइल नंबर पर SMS द्वारा QR कोड आधारित ई-वाउचर मिलेगा. उस वाउचर को देकर किसी भी सूचीबद्ध निजी सेंटर में वे निःशुल्क सोनोग्राफी करा सकेंगी. बीते दिनों राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने विधानसभा में बताया था कि हर गर्भवती महिला को एक वाउचर दिया जाएगा. लेकिन अगर डॉक्टर को लगता है कि डिलीवरी से पहले दूसरे सोनोग्राफी की जरूरत है, तो उनकी रिकमेंडेशन पर दूसरा वाउचर भी फ्री उपलब्ध कराया जाएगा। वाउचर जारी होने के बाद 60 दिन में टेस्ट जरूरी जानकारी के अनुसार, 84 दिन या उससे अधिक दिन की गर्भवती महिलाएं इस योजना के तहत फ्री सोनोग्राफी करवा सकती हैं. योजना का लाभ लेने के गर्भवती महिला को अपना जन आधार कार्ड और मोबाइल फोन लेकर चिकित्सा संस्थान पर जाना होगा. वहां ओटीपी के माध्यम से उन्हें SMS पर QR वाउचर जारी किया जाएगा, जिसकी वैधता 30 दिन की होगी. अगर किसी वजह से तय समय में महिला सोनोग्राफी नहीं करा पाती हैं तो वह दोबारा चिकित्सा संस्थान पर जाकर उसकी अवधि 30 दिन तक के लिए और बढ़ा सकती हैं. ऐसा सिर्फ वो एक ही बार कर सकेंगी. सोनोग्राफी कराना क्यों जरूरी है? अल्ट्रासाउंड या सोनोग्राफी इसलिए कराई जाती है ताकि गर्भावस्था के दौरान भ्रूण की वृद्धि और विकास को देखा जा सके. इससे यह सुनिश्चित होता है कि प्रेगनेंसी सामान्य रूप से आगे बढ़ रही है. इस टेस्ट की मदद प्रेगनेंसी के दौरान एब्नार्मेलिटीज, अबॉर्शन या मल्टीपल प्रेगनेंसी का पता लगा सकते हैं. इसके साथ ही बच्चे के जन्म की फिक्स तारीख भी पता कर सकते हैं. सामान्य तौर पर गर्भवती महिलाएं 2 से 3 बार सोनोग्राफी करवाती हैं. पहला टेस्ट  6-12 सप्ताह के बीच किया जाता है. जबकि दूसरा टेस्ट 13-26 सप्ताह कराया जाता है. recent visitors 77

स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने दी जानकारी, पश्चिम बंगाल में डेंगू के मामलों में तेजी

कोलकाता पश्चिम बंगाल में डेंगू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। जुलाई के अंतिम सप्ताह में ग्रामीण क्षेत्रों के लगभग 500 लोग मच्छर जनित इस संक्रमण की चपेट में आए। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि फिलहाल स्थिति नियंत्रित हैं। राज्य में जनवरी से अब तक कम से कम 2640 लोगों में यह वायरल संक्रमण पाया गया,जिसमें उत्तर 24 परगना जिले में सबसे अधिक 363 मामले हैं। पश्चिम बंगाल में 24 से 31 जुलाई के बीच डेंगू के लगभग 500 मामले सामने आए, इसमें मुर्शिदाबाद जिले के 68 और उत्तर 24 परगना जिले के 50 मामले शामिल हैं। अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा' को बताया, ‘‘जुलाई के अंतिम सप्ताह से डेंगू के मामलों में वृद्धि देखी गई है। यह मुख्य रूप से बरसात के कारण है। हम लगभग हर साल इस समय डेंगू के मामलों में इतनी वृद्धि देखते हैं। चिंता की कोई बात नहीं है। स्थिति नियंत्रण में है।'' जुलाई के अंतिम सप्ताह में मालदा जिले में डेंगू के 53 मामले सामने आए, उसके बाद हुगली में 50, पूर्व बर्धमान में 44 और दक्षिण 24 परगना में डेंगू के 32 मामले सामने आए। इस अवधि में कोलकाता और उसके आस-पास के इलाकों में 18 मामले सामने आए। अधिकारी ने बताया, ‘‘हर साल की तरह इस साल भी जनवरी से अब तक डेंगू के सबसे अधिक मामले उत्तर 24 परगना जिले से सामने आए हैं। इस साल यह संख्या 363 है।'' recent visitors 61

रक्षाबंधन का उपहार देने का किया वादा, छत्तीसगढ़-मुख्यमंत्री ने बहनों से बांधवाई राखी

रायपुर. आज मुख्यमंत्री जनदर्शन में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से मिलने दो बहनें आईं। उन्होंने कहा कि  रक्षाबंधन से पहले जनदर्शन में आए हैं इसलिए पहले राखी बांधेंगी। रिशी अग्रवाल और सिद्धका गोस्वामी  बिलासपुर और बेमेतरा से मुख्यमंत्री के लिए राखी लेकर आई थी। उन्होंने मुख्यमंत्री को राखी बांधी। रिशी ने बताया कि उनके पिता डॉ जे पी वर्मा शासकीय महाविद्यालय बिलासपुर में प्रोफेसर के पद पर थे। उनका निधन हो गया उन्हें अनुकंपा नियुक्ति उनकी शिक्षा के मुताबिक मिले तो अच्छा लगेगा और उन्होंने तृतीय श्रेणी के पद के लिए आग्रह किया। इसी तरह सिद्धिका गोस्वामी ने बताया कि वे परपोडी बेमेतरा से हैं। उनके पिता गोडमर्रा विद्यालय में टीचर थे उनका निधन हो गया और अब अनुकंपा नियुक्ति के लिए उन्होंने आवेदन दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आप राखी के पूर्व मेरे लिए राखी लेकर आई है और आपने मेरे हाथों में राखी बांध दिया। छत्तीसगढ़ की सभी बहनों का स्नेह मुझ पर है।रक्षाबंधन का तोहफा मैं आपको अनुकंपा नियुक्ति के रूप में जल्दी प्रेषित करूंगा। recent visitors 68

सरकार पर तीखा हमला, आप मुसलमानों के दुश्मन हैं, वक्फ विधेयक उसका सबूत है : असदुद्दीन ओवैसी

नई दिल्ली वक्फ बोर्ड बिल पर बहस में हिस्सा लेते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आप मुसलमानों के दुश्मन हैं। यह बिल इस बात का सबूत देता है। ओवैसी ने कहा कि यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है, जो सभी नागरिकों को अपना आस्था के लिए समान अवसर देता है। आखिर इस विधेयक को लाने की जरूरत ही क्या है। उन्होंने कहा कि मंदिरों की समितियों में कोई गैर-हिंदू नहीं है। फिर वक्फ संपत्ति में इसकी क्या जरूरत है। ऐसा ही आपकी सरकार ईसाइयों और सिखों के साथ भी कर रही है। यही नहीं यूपी की सहारनपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी इस पर तीखा अटैक किया। उन्होंने कहा कि यह बिल कानून का उल्लंघन करता है। संविधान के खिलाफ है। इमरान मसूद ने कहा कि सरकार की ओर से तर्क दिया जा रहा है कि वक्फ बोर्ड संस्था है और यह कोई धार्मिक स्थान नहीं है। यह बात गलत है क्योंकि देश भर में वक्फ बोर्ड ही मस्जिदों, दरगाहों और अन्य मुस्लिम संस्थानों की निगरानी करता है। उनकी संपत्तियों की देखरेख करता है। इसलिए इसे मुस्लिमों के मजहबी मामलों से अलग नहीं बताया जा सकता, जैसा सरकार दावा करती है। इस बहस में अखिलेश यादव ने भी हिस्सा लिया और कहा कि वक्फ बोर्ड में किसी गैर-मुसलमान को शामिल करने की वजह क्या बनती है। उन्होंने कहा कि यदि हम जिलाधिकारी को ही सब कुछ सौंप देंगे तो क्या हो सकता है। आप इसे समझ सकते हैं। एक जगह ऐसा हुआ था और फिर जिलाधिकारी ने क्या किया, आप सब जानते हैं। अखिलेश यादव ने कहा कि यह विधेयक इसलिए लाया जा रहा है क्योंकि अभी-अभी ये लोग हारे हैं। अपने कुछ कट्टर समर्थकों के तुष्टिकरण के लिए ऐसा बिल लाया जा रहा है। इस बिल का डीएमके, टीएमसी, शरद पवार की एनसीपी जैसी पार्टियों ने भी विरोध किया है। recent visitors 86

सांसद कीर्ति आजाद ने मंत्री नितिन गडकरी के कार्यों की सराहना करते हुए कहा-आप जैसे सब मंत्री हों तो उद्धार हो जाए देश

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में नितिन गडकरी ऐसे नेता और मंत्री हैं, जिनकी सराहना करने से विपक्षी दल के सांसद, विधायक और नेता नहीं हिचकिचाते हैं। उनकी छवि काम करने वाले मंत्री के तौर पर स्थापित हो चुकी है। आज गुरुवार को जब संसद की कार्यवाही चल रही थी तब विपक्षी खेमे के एक सांसद ने लोकसभा में उनकी खुलकर तारीफ की है। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर इनके जैसे सभी मंत्री हो जाएं तो देश का उद्धार हो जाएगा। आपको बता दें कि तृणमूल कांग्रेस के सांसद कीर्ति आजाद ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के कार्यों की सराहना करते हुए लोकसभा में कहा कि अगर सरकार के सभी मंत्री उनकी तरह हो जाएं तो देश का उद्धार हो जाएगा। कीर्ति आजाद ने सदन में प्रश्नकाल के दौरान सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से संबंधित पूरक प्रश्न पूछते हुए यह टिप्पणी की। पश्चिम बंगाल के वर्धमान दुर्गापुर से लोकसभा सदस्य आजाद ने कहा, ‘‘गडकरी जिस तरह से काम करते हैं, उसके लिए केवल मैं नहीं पूरा सदन उनका कायल है। काश बाकी मंत्री भी ऐसे ही हो जाएं तो देश का उद्धार हो जाए।’’ उनके इस बयान के बाद कई सदस्यों ने मेजें थपथपाईं। आपको बता दें कि यह कोई पहला मौका नहीं है जब नितिन गडकरी की सराहना विपक्षी दलों के द्वारा की गई है। इससे पहले कई बार उनकी तुलना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कई विपक्षी दलों ने की है। उन्होंने मोदी के बाद भाजपा में प्रधानमंत्री पद का सक्षम उम्मीदवार बताया है। recent visitors 76

आर्ता: पुत्रवत आचारेत अर्थात-रोगी से पुत्र के समान व्यवहार करने सहित अनेक सिद्धांतों के प्रतिपादक महर्षि चरक के सिद्धांत आज भी हैं प्रासंगिक· मंत्री इन्दर सिंह परमार

भोपाल चरक जयंती श्रावण शुक्ल नाग पंचमी 2081 संवत इस बार 9 अगस्त 2024 को है। ईसा से लगभग 200 वर्ष पूर्व चिकित्सा ग्रंथ लुप्त हो गए थे । यह पूरे भारतीय जनमानस और विश्व के लोगों के लिए अत्यंत ही संकट का दौर था। जब सारी मानवता त्राहि-त्राहि करने लगी जब सारी धरती के लोग कष्ट से मरने लगे। जब समाज अकाल मृत्यु को प्राप्त होने लगा जैसा कि भगवान ने श्रीमद्भगवद्गीता में प्रतिज्ञा की, जब-जब धर्म की हानि होगी तब तब मैं आऊंगा। जब जब अधर्म रूपी रोगों का साम्राज्य होगा। पाप का साम्राज्य होगा तब- तब मैं प्रकट होउंगा। तब भगवान शेषनाग स्वयं इस धरती पर विचरण करते हुए आये और उन्होंने देखा कि जनता कितने कष्ट में है कितनी दुखी है। उनका हृदय द्रवित हो गया, करुणा से भर उठे और उन्होंने कपिष्ठल नामक गाँव जो कश्मीर में पुंछ के पास स्थित गांव है, वहां पर वेद वेदांग नामक एक वैदिक ब्राह्मण के घर में श्रावण शुक्ल नाग पंचमी के दिन जन्म लिया। शेषनाग का पूज्य दिवस अवतरण दिवस श्वेत वाराह पुराण में स्वयं ब्रह्मदेव ने नाग पंचमी का दिन बताया है। इस कारण से महर्षि चरक के जन्मदिन को हम श्रावण शुक्ल पंचमी नाग पंचमी मनाते हैं। महर्षि चरक ने वेद उपनिषदों का अध्ययन करने के उपरांत आयुर्वेद का अध्ययन प्रारंभ किया। उन्होंने महर्षि पुनर्वसु आत्रेय के द्वारा उपदिष्ट और आचार्य अग्निवेश के द्वारा प्रणीत लिखित ग्रंथ अग्निवेश तंत्र को खोजा। उसके छिन्न-भिन्न अंशों को सहेजा सम्हाल।जो बड़ी मुश्किल से उनको प्राप्त हुए और उस ग्रंथ को अग्निवेश तंत्र को जो कि पूर्ण नहीं था उस समय उसको धीरे-धीरे करके लेखन कार्य प्रारंभ किया। औषधियों का चयन करना, औषधियों के बारे में खोजना,उनका प्रयोग किया। इस प्रकार से चरक संहिता का वर्णन लिखना प्रारंभ किया। जिसमे मानव जीवन रोग चिकित्सा का वर्णन है। सबसे महत्व की बात चिकित्सा जगत में उन्होंने चिकित्सा सिद्धांत दिए। वह अपने आप में अप्रतिम कार्य था ।पूरी मानव सभ्यता, मानव समाज, पृथ्वी उनके उपकार कभी नहीं भूल सकती। ऐसे मनीषी का जन्म भगवान के तुल्य ऐसे सर्वश्रेष्ठ चिकित्सक का जन्मदिन मनाना हम चिकित्सकों का ही नहीं इस मानव जाति का परम कर्तव्य है। आभार प्रदर्शन है। यह धन्यवाद है ऐसे व्यक्ति के लिए जिन्होंने मानव समाज को इस पूरी धरती को रोगों के भय से दूर किया। चिकित्सा सिद्धांतों की स्थापना की। विश्व के प्रथम चिकित्सक शेषावतार महर्षि अथर्ववेद के उपवेद और पंचमवेद आयुर्वेद के आदि चिकित्सक महर्षि चरक को भगवान शेषनाग का अवतार माना जाता है। उनका जन्म ईसा से 200 वर्ष पूर्व कश्मीर में पुंछ के पास कपिष्ठल नामक गांव में हुआ था। श्वेत वाराह पुराण के अनुसार उनका जन्मदिन श्रावण शुक्लपक्ष नागपंचमी (इस बार 9 अगस्त 2024) को मनाया जाता है। उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर में भगवान शेषनाग के कपाट भी आज ही के दिन खोले जाते हैं। उन्होंने महाभारत काल के पश्चात खण्डित हो चुके कायचिकित्सा(मेडिसिन) के महान ग्रंथ अग्निवेश-तंत्र का प्रतिसंस्कार (पुनर्लेखन) कर चरक-संहिता रूपी कालजयी रचना प्रदान की। बौद्ध धर्म के नास्तिक दर्शन काल में अहिंसा के सिद्धांत के कारण राजव्यवस्था द्वारा वैदिक और शल्य क्रियाओं का निषेध कर दिया गया था। दूसरी तरफ बौद्ध धर्म के "स्वभावो परमवाद" के सिद्धांत की आड़ में (यानी शरीर तो स्वभाव से ही बनता बिगड़ता है इसलिए चिकित्सा की क्या आवश्यकता है ऐसा कहकर) वैद्यों के चिकित्सा कार्यों का विरोध किया जाता था। कहा जाता है कि बौद्ध सम्राट बिम्विसार को भी बवासीर की तकलीफ़ हुई थी, लेकिन अहिंसा के सिद्धांत के चलते उन्होंने शल्य चिकित्सा को अंगीकार नहीं किया। जिस पर आचार्य जीवक ने एक लेप बनाकर अर्श को ठीक किया था। सम्राट अशोक के बाद चिकित्सा कार्यों पर शासन द्वारा ऐसा प्रतिबंध करीब 50 वर्ष तक रहा, जिसे भारत के मेडिकल-इमरजेंसी का काल कहा जा सकता है। मान्यता है कि ऐसे कालखंड में अनन्त भगवान-शेष छद्म रूप में धरती पर विचरण करने आए। रोगों से पीड़ित मानवता को देखकर करुणावश उनका हृदय द्रवीभूत हो गया और उन्होंने वेद-वेदांग नामक ब्राह्मण के घर जन्म लिया। ऐसे समय में रोगों से पीड़ित मानवता की सेवा के लिए उन्होंने भारत भर में घूमते हुए चिकित्सा का कार्य और उसका प्रचार किया। इसी कारण "चरकात् चरक:" नित्यप्रति घूमने के कारण उनका नाम चरक पड़ा। उन्होंने "आर्ता: पुत्रवत आचारेत्" यानी रोगी से पुत्र के समान व्यवहार करने सहित अनेक सिद्धांतों का प्रतिपादन कर चिकित्सक समाज के लिए एक मिशाल कायम की। आचार्य चरक ने आज से 2150 वर्ष पूर्व चरक संहिता का लेखन किया था। चरक संहिता मूल रूप से अग्निवेश तंत्र का ही परिष्कृत ग्रंथ है।पुनर्वसु आत्रेय द्वारा उपदिष्ट सूत्रों को, महर्षि अग्निवेश ने अग्निवेश तंत्र में निबंध किया था। काल क्रम से वह ग्रंथ लुप्त हुआ तथा आयुर्वेद चिकित्सा के प्रति भी समाज में उपेक्षा हुई। जिसके कारण मानवता और सारा विश्व रोगों से ग्रस्त हुआ। आचार्य चरक ने ऐसे समय में जन्म लेकर और पूरे जीवन भर परिभ्रमण करते हुए चंक्रमण करते हुए, औषधीयों के माध्यम से रोगों की चिकित्सा की और इन चिकित्सा के प्रयोगों को उन्होंने चरक संहिता के ग्रंथ में स्थान दिया। चरक सूत्र स्थान के प्रारंभ में छः पदार्थों के महत्व को प्रतिपादित किया। सामान्य, विशेष, समवाय, द्रव्य, गुण एवं कर्म के महत्व को प्रतिपादित किया। दिनचर्या का व्याख्यान विस्तार से किया। ऋतु अनुसार हमें क्या भोजन करना चाहिए, कैसे भोजन करना चाहिए, किन दोषों का प्रकोप है कैसे समान है कौन सी व्याधि किस ऋतू में हो सकती हैं इन सब बातों को उन्होंने बताया।   ऐसे महापुरुष जिन्होंने इतने हजारों वर्ष पूर्व इस प्रकार के वैज्ञानिक चिकित्सा सिद्धांतों की प्रस्तुति देकर मानवता को और विश्व को हमेशा हमेशा के लिए रोगों से मुक्त होने का एक सूत्र दिया,उनका स्मरण करना उनका प्रातः स्मरण करना हमारा कर्तव्य है।महर्षि चरक ने ही रसायन प्रकरण में च्यवनप्राश का उल्लेख किया है च्यवनप्राश एक ऐसा रसायन है जिसका सेवन करने से व्यक्ति को जरा नामक व्याधि नहीं होती है। बुढ़ापा नहीं आता है और व्यक्ति की समस्त धातुएं श्रेष्ठ निर्मित होती है जिसके कारण व्यक्ति में ऊर्जा और उत्साह का स्तर उच्च बना रहता है। च्यवनप्राश के उल्लेख के समय ही महर्षि चरक ने उसके लाभ बताते हुए कहा कि च्यवनप्राश का उपयोग श्वास और … Read more