Sunday, July 5, 2026 1:07 pm

इजरायल ने जने कैसे किया लेबनान पर हमला? आर्मी चीफ ने बताई तैयारी वाली वो बात

तेल अवीव लेबनान के अंदर घुसकर हिजबुल्लाह के टॉप कमांडर सैयद हसन नसरल्लाह को इजरायल की ओर से मार गिराने की पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है। सबसे ज्यादा हैरानी लोगों को इस तथ्य से हो रही है कि ईरान के ही एक जासूस ने इजरायल के लिए काम किया और नसरल्लाह का पता उसे बता दिया। फ्रांसीसी अखबार ले पैरिसियन की रिपोर्ट के अनुसार करीब डेढ़ घंटे पहले ईरानी दूत ने इजरायल को नसरल्लाह का पता बताया और फिर इजरायल ने उस इमारत को ही नेस्तनाबूद कर दिया, जहां वह अपने कमांडरों के साथ मीटिंग कर रहा था। कहा जा रहा है कि वह बंकर में छिपा था, लेकिन इमारत गिरने की दहशत से ही वह मारा गया। आखिर इजरायल ने कैसे इतनी मजबूत तैयारी की थी कि तेहरान में हमास कमांडर इस्माइल हानियेह को मार गिराया और फिर लेबनान में हिजबुल्लाह के लीडर को मार डाला। यह अहम सवाल है। दरअसल 2006 में जब इजरायल की हिजबुल्लाह से जंग हुई थी तो यह 34 दिनों तक चली थी। इस युद्ध में हिजबुल्लाह के आगे इजरायल की स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी। लेकिन यहीं से इजरायल ने सबक सीखा और 2006 के बाद से ही अगली जंग की प्लानिंग शुरू कर दी। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार इजरायल ने तब से ही जंग की तैयारी शुरू कर दी थी और खासतौर पर खुफिया मिशन पर उसका जोर था। लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल का सैन्य अभियान जारी है। इजरायल ने हिजबुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह को भी मार दिया। इसका खुलासा खुद इजरायली सेना ने किया। इस बीच भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बताया कि इजरायल ने लेबनान में कैसे तैयारी के साथ हमला किया। उन्होंने कहा कि जो शेल कंपनी बनाई गई, वो ही इजरायल का मास्टरस्ट्रोक है। 'इजरायल का मास्टर स्ट्रोक' आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने हिजबुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह के खिलाफ इजरायली सैन्य अभियान पर कहा, 'जो शेल कंपनी बनाई गई है, वह इजरायल का मास्टरस्ट्रोक है। इसके लिए उसे सालों-साल की तैयारी की जरूरत है। इसका मतलब है कि वे इसके लिए तैयार थे और यही बात मायने रखती है। युद्ध उस तरह से शुरू नहीं होता जिस तरह से आप लड़ना शुरू करते हैं, यह उस दिन से शुरू होता है जिस दिन आप योजना बनाना शुरू करते हैं।' 'हमास को खत्म करने पर अड़ गया इजरायल' आर्मी चीफ ने एक अखबार से बात करते हुए कहा कि इजरायल ने हमास को अपना पहला टारगेट बनाया और उसे जड़ से खत्म करने पर अड़ गया। जनरल द्विवेदी ने विदेश मंत्री एस जयशंकर की एक किताब का हवाला देते हुए इजरायल की रणनीति की तुलना महाभारत के एक प्रसंग से की, जहां अर्जुन, अगर चक्रव्यूह में प्रवेश करते, तो जीवित बच सकते थे और अभिमन्यु भी बच जाता। इसी तरह, इजरायल ने हमास को पहले निपटाने का फैसला किया है। खासतौर पर इजरायल ने यूनिट 8200 को तैनात किया। यह इजरायली सेना की ही एक यूनिट है, जो मोसाद के साथ मिलकर काम करती है। इसके तहत उसने साइबर वारफेयर पर काम किया। इसी एजेंसी की देन थी कि उसने हिजबुल्लाह पर पेजर और वॉकी-टॉकी ब्लास्ट के जरिए हमले कराए। इसी के तहत ईरान की इंटेलिजेंस यूनिट में घुसपैठ की गई और उसके 20 लोगों से सारी सूचना हासिल की गई। ईरान के परमाणु ठिकानों से लेकर हिजबुल्लाह, हमास के लीडर्स तक के बारे में पूरी जानकारी इजरायल को मिल गई। इजरायल के इस इंटेलिजेंस वारफेयर का पहला नतीजा 2008 में आया था। तब मोसाद ने सीआईए के साथ मिलकर हिजबुल्लाह के टॉप लीडर इमाद मुगनियाह को ढेर कर दिया था। इसके बाद 2020 में ईरानी कुद्स फोर्स के नेता कासिम सुलेमानी को अमेरिका ने मार गिराया था। सुलेमानी की लोकेशन की पूरी जानकारी इजरायली एजेंसी ने ही अमेरिका को दी थी, जिसे इराक में मारा गया था। इसी दौरान इजरायल नसरल्लाह को मार गिराने वाला था, लेकिन तब ऐसा नहीं किया। इसकी वजह थी कि इजरायल तब युद्ध नहीं चाहता था। अब इजरायल की वह 18 साल पुरानी तैयारी काम आ रही है। उसने 7 दिनों में हिजबुल्लाह के सात कमांडरों को मार गिराया है। इसके अलावा हमास के लीडर्स को भी उसने ढेर किया है। recent visitors 82

रजनीकांत को अस्पताल में भर्ती कराया गया, हालत स्थिर

चेन्नई,  जाने माने अभिनेता रजनीकांत को सोमवार देर रात चेन्नई के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। सूत्रों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 73 वर्षीय रजनीकांत का मंगलवार को संभवत: कोई पूर्व निर्धारित उपचार (‘इलेक्टिव प्रोसीजर’) होना है और उनकी हालत स्थिर है। रजनीकांत के परिवार या अस्पताल की ओर से इस बारे में अब तक कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई है। recent visitors 64

बिजुरी पुलिस ने अज्ञात अंधे कत्ल की घटना का 12 घंटे मे किया खुलासा

बिजुरी  इस प्रकार है कि दिनाक 30.09.024 को सूचनाकर्ता द्वारा यह जानकारी दी गई कि गलैयाटोला बिजुरी में एक अज्ञात व्यक्ति की लाश झाडियों मे चादर मे लपेटकर बांधकर फेकी गयी है जिसकी तस्दीक पर एक अज्ञात महिला की 08-10 दिन पुराना शव उक्त स्थान पर पाये जाने की पुष्टि हुई। सूचना पर मर्ग 0/24 धारा 194 बीएनएसएस के तहत पंजीबद्ध कर जांच मे लिया गया जो अज्ञात महिला के शव को घटना स्थल के आसपास के रहवासियों को दिखाया गया उनके घरों मे किसी व्यक्ति के गुम या न मिलने के संबंध मे जानकारी ली गयी तो घटना स्थल के पास ही स्थित घर के रहवासी मुन्नी कोल ने बताया कि उसकी बडी बहन सरोज कोल पति स्व. प्रदीप कोल उम्र 40 वर्ष कही दिनांक 19.09.024 को रात 08:00 बजे करीब घर से बिलासपुर जाना कहकर निकली है जो आज दिनांक तक नही आई है उक्त महिला और उसके पति गेंदलाल से अज्ञात महिला के शव की पहचान करायी गयी जिन्होने यह खुलासा किया कि घटना स्थल से प्राप्त शव मृतिका सरोज कोल का है जिसकी पंचनामा कार्यवाही, घटना स्थल निरीक्षण एवं शव प्राप्ति की परिस्थितियों से यह तथ्य पाया गया कि मृतिका की हत्या की गयी है और साक्ष्य छुपाने की नियत से उक्त स्थान पर छुपाया गया है। घटना विवरण अपराध घारा 103(1), 238 बीएनएस का पाया जाने से तत्काल मामला पंजीबद्ध कर अनुसंधान मे लिया गया। विवेचना दौरान  मृतिका को अंतिम बार देखने वाले उसके दत्तक पुत्र राजकुमार कोल पिता प्रदीप कोल के कथन संदेहास्पद प्रतीत हुये साथ ही मुखबिर तंत्र द्वारा बताया गया कि संदेही राजकुमार दो तीन दिनो से एक पिक-अप इस शर्त पर किराये मे लेने की फिराक मे है कि किराये कि पिक-अप को खुद लेकर मनेन्द्रगढ तक जायेगा जिसके लिये वह मुह मांगा किराया देने के लिये तैयार है जो उसकी आर्थिक स्थिति के विपरीत है जिस कारण उक्त संदेही से मनोवैज्ञानिक तरीके से बारीकी से पूछताछ की गयी तो आरोपी राजकुमार पिता प्रदीप कोल उम्र 18 वर्ष निवासी गलैयाटोला बिजुरी ने बताया कि उसकी बडी मां मृतिका सरोज कोल उसे कही आने जाने नही देती थी घर मे रखती थी गांली गलौज मारपीट करती थी, दिनांक 17.09.24 की रात भी उसे मोहल्ले के गणेश विसर्जन मे नही जाने दिया तो मोहल्ले के उसके साथी उसका मजाक उडाकर बोले कि मेहेरिया है क्या घर मे छुपा रहता है जो बात आरोपी को बहुत बुरी लगी और उसने अपनी बडी मॉ की हत्या कि योजना बनाई तथा 17-18.09.24 की दरमियानी रात करीब 02:30 बजे जब मृतिका सो रही थी तब उसके सिर के दाहिने हिस्से मे प्राण घातक हमला कर उसकी हत्या कर दी घटना मे प्रयुक्त कुल्हाडी मृतिका के खून आलूदा कपडे चादर और आरोपी के खून आलूदा कपडे जप्त किये गये है आरोपी को गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय भेजा जा रहा है। उल्लेखनीय है कि आरोपी राजकुमार मृतिका की छोटी बहन मुन्नी बाई का वास्तविक पुत्र है जिसे मृतिका द्वारा बचपन मे गोद लिया गया था तब से वह मृतिका के साथ ही रहता था उसके पहचान दस्तावेज मे आरोपी के पिता का नाम प्रदीप कोल लेख है जो मृतिका सरोज कोल का पति है। उपरोक्त अंधे कत्ल के खुलासे मे वरिष्ठ अधिकारियो के सतत मार्गदर्शन, एफ एस एल टीम के डाक्टर प्रदीप व उनकी टीम, डॉग स्काड अनूपपुर व बिजुरी पुलिस के निरीक्षक विकास सिंह, उनि सोने सिंह परस्ते सउनि उदय प्रजापति, विपिन बिहारी राय, रवि करण पयासी प्रआर. सतीश मिश्रा, सुखेन्द्र सिह, विनोद मिंज, मनोज लकडा आर. आनंद, लक्ष्मण, अभिषेक, राजदेव, सुनील, प्रभाकर, नत्थूलाल म.आर. संगम तोमर की महत्पूर्ण भुमिका रही। recent visitors 65

वन्यजीवों को बचाने के लिये लोगों के मन में वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और दया भावना का विकास आवश्यक- राज्यमंत्री अहिरवार

वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता एवं दया भावना का विकास आवश्यक है : राज्यमंत्री अहिरवार राज्यमंत्री अहिरवार ने राज्यस्तरीय वन्यप्राणी सप्ताह-2024 का शुभारंभ  वन्यजीवों को बचाने के लिये लोगों के मन में वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और दया भावना का विकास आवश्यक- राज्यमंत्री अहिरवार भोपाल वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री दिलीप सिंह अहिरवार ने कहा है कि वन्यजीवों को बचाने के लिये लोगों के मन में वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और दया भावना का विकास आवश्यक है। वन विभाग राष्ट्रीय उद्यान भोपाल में राज्यस्तरीय वन्यजीव सप्ताह 2024 के शुभारंभ अवसर पर उन्होंने यह बात कही। उन्होंने कहा कि आम लोगों में वन्यजीव के प्रति जागरूकता बढ़ाने और अपनत्व की भावना विकसित करने की दृष्टि से प्रतिवर्ष अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में वन्य जीव सप्ताह मनाया जाता है। राज्यमंत्री अहिरवार ने कहा कि वन्यजीवों के संरक्षण में जनता की भागीदारी को भी यथोचित स्थान मिलना अति आवश्यक है। जन-जागरूकता का अभाव, वन्यजीवों के प्रति अज्ञानता एवं अंधविश्वास भी वन्यजीवों के संरक्षण में बाधक है। उन्होंने कहा कि विद्यालय एवं महाविद्यालय स्तर के शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण विषय को अनिवार्य किया जाना चाहिए। राज्यमंत्री अहिरवार ने कहा कि वनों एवं वन्यजीवों के संरक्षण के लिये पंचायत स्तर पर जनजागरण कार्यक्रम आयोजित कर वन्यजीव संरक्षण को काफी हद तक सफल बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि राज्यस्तरीय वन्यजीव सप्ताह-2024 का समारोह प्रत्येक जिले में किया जा रहा है। राज्यमंत्री अहिरवार ने कहा कि सम्राट अशोक के शासनकाल में भी वन्यजीवों के लिये अभय वन बनाये जाते थे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय उद्यानों में सिर्फ वन्य जीवों का संरक्षण भर नहीं होता है बल्कि जैव विविधता का भी संवर्द्धन होता है। उन्होंने कहा कि वास्तव में राष्ट्रीय उद्यान ही देश के ऐसे संरक्षित वन हैं, जहां वनस्पति एवं वन्य जीव दोनों सुरक्षित है। राज्यमंत्री अहिरवार ने वन्यजीवों पर आधारित प्रदर्शनी का शुभारंभ किया और उसका अवलोकन किया। इस अवसर पर राज्यमंत्री अहिरवार ने वनों और वन्यप्राणियों के संरक्षण, संवर्धन और सुरक्षा की शपथ भी दिलाई। वन विहार राष्ट्रीय उद्यान भोपाल में राज्यस्तरीय वन्यजीव सप्ताह 2024 का आयोजन एक अक्टूबर से 7 अक्टूबर तक आयोजित किया जायेगा। आज शुभारंभ अवसर पर स्कूली बच्चों के पेंटिंग प्रतियोगिता आयोजित की गई।‍जिसमें विभिन्न स्कूलों के सैकड़ो विद्यार्थियों ने भाग लिया। वन्यजीव सप्ताह में प्रतिदिन विभिन्न प्रतियोगिताएँ आयोजित की जायेगी। कार्यक्रम में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक व्ही एन अंबाडे, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (उत्पादन) एच. यू. खान, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास) यू.के. सुबुद्धि, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (समन्वय) सुदीप सिंह, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (प्रोजेक्ट) मोहनलाल मीना, संचालक वन विहार और विभिन्न स्कूलों के शिक्षक – विद्यार्थी उपस्थित रहे।   recent visitors 44

जनजातीय समाज ने हमें प्रकृति के संरक्षण का मार्ग दिखाया : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

भगवान बिरसा मुण्डा की स्मृति में 15 नवंबर को छत्तीसगढ़ के हर जिले में मनाया जाएगा ’जनजातीय गौरव दिवस’ : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्यमंत्री ’जनजातीय समाज का गौरवशाली अतीत’ विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में शामिल हुए  जनजातीय समाज ने हमें प्रकृति के संरक्षण का मार्ग दिखाया  : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जनजातीय संस्कृति में छिपी है, गहरी आध्यात्मिकता देश के लिए संघर्ष करने की परम्परा जनजातीय परम्परा रही है जीवन जीने की कला जनजातीय समाज से सीखनी चाहिए रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भगवान बिरसा मुण्डा की जयंती के अवसर पर 15 नवंबर को छत्तीसगढ़ के हर जिले में ’जनजातीय गौरव दिवस’ मनाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुण्डा की स्मृति में जनजातीय गौरव दिवस मनाने का निर्णय लिया है। इस वर्ष भगवान बिरसा मुण्डा की 150वीं जयंती है। छत्तीसगढ़ में भी इसे भव्य रूप से मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री आज राजधानी रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में ’जनजातीय समाज का गौरवशाली अतीत, ऐतिहासिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक योगदान’ विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वन मंत्री केदार कश्यप ने की। विधायक भईयालाल राजवाड़े विशेष अतिथि के रूप में कार्यक्रम में उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज का गौरवशाली इतिहास रहा है। यह सोचकर गर्व होता है कि अनेक महान स्वतंत्रता सेनानियों का जन्म जनजातीय समाज में हुआ। अपने देश के लिए संघर्ष करने की परम्परा जनजातीय समाज में प्रारंभ से रही है। शहीद वीर नारायण सिंह, गैंदसिंह, गुण्डाधूर जैसे अनेक महान नायकों ने अपना बलिदान दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरी दुनिया आज जलवायु परिवर्तन की गंभीर चुनौतियों से गुजर रही है। ऐसे में प्रकृति का संरक्षण बहुत आवश्यक है। जनजातीय समाज ने हमें प्रकृति के संरक्षण का मार्ग दिखाया हैै, जो आज भी अनुकरणीय है। जनजातीय समाज में प्रकृति की पूजा की जाती है। पूर्वीं छत्तीसगढ़ में साल के पेड़ में जब फूल आते है तो सरहुल पर्व मनाया जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय संस्कृति में गहरी आध्यात्मिकता छिपी है। प्रकृति को सहेजकर, प्रकृति के अनुकूल जीवन जीना। बड़े-छोटे, स्त्री-पुरुष में किसी तरह का भेदभाव नहीं। सब बराबर हैं और प्रकृति का उपहार सबके लिए है। ये बातें हमें इस समाज से सीखने की आवश्यकता है। वास्तव में जीवन जीने की कला जनजातीय समाज से सीखनी चाहिए। जनजातीय समाज में दहेज जैसी सामाजिक बुराई का अस्तित्व नहीं है। भगवान बिरसा मुण्डा का शौर्य हमें हमेशा जीवन में साहस की राह दिखाता है। उन्होंने शोषण मुक्त समाज का सपना देखा था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हीं की परिकल्पना के अनुरूप प्रधानमंत्री जनमन योजना प्रारंभ कर विशेष पिछड़ी जनजाति के लोगों के जीवन में समृद्धि लाने का प्रयास किया है। प्रधानमंत्री कल हजारीबाग से प्रधानमंत्री जनजाति उन्नत ग्राम अभियान की शुरूआत करेंगे, जिसमें जनजातीय बहुल 63 हजार गांवों के 5 करोड़ से अधिक लोग लाभान्वित होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय लोग कभी दिखावा नहीं करते, उनकी सरलता-सहजता मन मोह लेती है। जनजातीय समाज की खानपान की शैली बीपी-शुगर जैसी लाइफ स्टाईल से जुड़ी बीमारियों से दूर रखती है। उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग द्वारा ’जनजातीय समाज का गौरवशाली अतीत पर आयोजित यह कार्यशाला जनजातीय समाज के गौरव को पूरे समाज के सामने लाने में मील का पत्थर साबित होगी। वन मंत्री केदार कश्यप ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समाज का बहुत बड़ा योगदान रहा हैै। इस समाज में अनेक महापुरूषों ने जन्म लिया जिन्होंने 1857 क्रांति के पहले ही अंग्रेजों के विरूद्ध संघर्ष की शुरूआत की। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजों को बड़ा नुकसान जनजातीय क्षेत्रों में हुआ, अनेक मौकों पर उन्हें मजबूर होकर पीछे हटना पड़ा। कश्यप ने कहा कि अंग्रेजों ने जब बस्तर में रेल लाईन बिछाने का काम शुरू किया उसमें लकड़ी का उपयोग किया जाता था। जनजातीय समाज ने इसका विरोध किया और यह भाव जताया कि हमारा जंगल कोई नहीं काटेगा। सामाजिक एकजुटता के कारण बहुत कुछ संरक्षित रहा। उन्होंने कहा कि आज किए जा रहे आयोजन के माध्यम से इतिहास के पन्नों में दर्ज जनजातीय समाज के गौरव की गाथा हमारी आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा सामाजिक समरसता का सबसे बड़ा प्रमाण है। इस समाज में 80 प्रतिशत परिवार संयुक्त परिवार है। मिलेट का उपयोग, जैविक खेती जैसी अनेक बातें जनजातीय समाज से शिक्षित समाज को सीखने की आवश्कता है। स्वागत भाषण उच्च शिक्षा विभाग के सचिव प्रसन्ना आर. ने दिया। वनवासी विकास समिति के अखिल भारतीय युवा कार्य प्रमुख वैभव सुरंगे ने स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समाज के योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जनजातीय संस्कृति में अनेक प्रगतिशील परम्पराएं हैं। भगवान से ये कुछ नहीं मांगते। वनवासी विकास समिति के सचिव डॉ. अनुराग जैन ने कहा कि जनजातीय समाज के गुमनाम महानायकों के योगदान से नई पीढ़ी को परीचित कराने की जरूरत है। कार्यक्रम में वनवासी विकास समिति के प्रांताध्यक्ष उमेश कश्यप विश्व विद्यालय के कुलपति एवं प्रबुद्ध नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे। मुख्यमंत्री सहित अतिथियों ने इस अवसर पर जनजातीय समाज के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों पर केंद्रित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। recent visitors 70

जनजातीय समाज ने हमें प्रकृति के संरक्षण का मार्ग दिखाया, जनजातीय संस्कृति में छिपी है, गहरी आध्यात्मिकता : साय

रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भगवान बिरसा मुण्डा की जयंती के अवसर पर 15 नवंबर को छत्तीसगढ़ के हर जिले में जनजातीय गौरव दिवस मनाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुण्डा की स्मृति में जनजातीय गौरव दिवस मनाने का निर्णय लिया है। इस वर्ष भगवान बिरसा मुण्डा की 150वीं जयंती है। छत्तीसगढ़ में भी इसे भव्य रूप से मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री आज राजधानी रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में झ्जनजातीय समाज का गौरवशाली अतीत, ऐतिहासिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक योगदानझ् विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने की। विधायक श्री भईयालाल राजवाड़े विशेष अतिथि के रूप में कार्यक्रम में उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज का गौरवशाली इतिहास रहा है। यह सोचकर गर्व होता है कि अनेक महान स्वतंत्रता सेनानियों का जन्म जनजातीय समाज में हुआ। अपने देश के लिए संघर्ष करने की परम्परा जनजातीय समाज में प्रारंभ से रही है। शहीद वीर नारायण सिंह, गैंदसिंह, गुण्डाधूर जैसे अनेक महान नायकों ने अपना बलिदान दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरी दुनिया आज जलवायु परिवर्तन की गंभीर चुनौतियों से गुजर रही है। ऐसे में प्रकृति का संरक्षण बहुत आवश्यक है। जनजातीय समाज ने हमें प्रकृति के संरक्षण का मार्ग दिखाया हैै, जो आज भी अनुकरणीय है। जनजातीय समाज में प्रकृति की पूजा की जाती है। पूर्वीं छत्तीसगढ़ में साल के पेड़ में जब फूल आते है तो सरहुल पर्व मनाया जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय संस्कृति में गहरी आध्यात्मिकता छिपी है। प्रकृति को सहेजकर, प्रकृति के अनुकूल जीवन जीना। बड़े-छोटे, स्त्री-पुरुष में किसी तरह का भेदभाव नहीं। सब बराबर हैं और प्रकृति का उपहार सबके लिए है। ये बातें हमें इस समाज से सीखने की आवश्यकता है। वास्तव में जीवन जीने की कला जनजातीय समाज से सीखनी चाहिए। जनजातीय समाज में दहेज जैसी सामाजिक बुराई का अस्तित्व नहीं है। भगवान बिरसा मुण्डा का शौर्य हमें हमेशा जीवन में साहस की राह दिखाता है। उन्होंने शोषण मुक्त समाज का सपना देखा था। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हीं की परिकल्पना के अनुरूप प्रधानमंत्री जनमन योजना प्रारंभ कर विशेष पिछड़ी जनजाति के लोगों के जीवन में समृद्धि लाने का प्रयास किया है। प्रधानमंत्री कल हजारीबाग से प्रधानमंत्री जनजाति उन्नत ग्राम अभियान की शुरूआत करेंगे, जिसमें जनजातीय बहुल 63 हजार गांवों के 5 करोड़ से अधिक लोग लाभान्वित होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय लोग कभी दिखावा नहीं करते, उनकी सरलता-सहजता मन मोह लेती है। जनजातीय समाज की खानपान की शैली बीपी-शुगर जैसी लाइफ स्टाईल से जुड़ी बीमारियों से दूर रखती है। उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जनजातीय समाज का गौरवशाली अतीत पर आयोजित यह कार्यशाला जनजातीय समाज के गौरव को पूरे समाज के सामने लाने में मील का पत्थर साबित होगी। वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समाज का बहुत बड़ा योगदान रहा हैै। इस समाज में अनेक महापुरूषों ने जन्म लिया जिन्होंने 1857 क्रांति के पहले ही अंग्रेजों के विरूद्ध संघर्ष की शुरूआत की। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजों को बड़ा नुकसान जनजातीय क्षेत्रों में हुआ, अनेक मौकों पर उन्हें मजबूर होकर पीछे हटना पड़ा। श्री कश्यप ने कहा कि अंग्रेजों ने जब बस्तर में रेल लाईन बिछाने का काम शुरू किया उसमें लकड़ी का उपयोग किया जाता था। जनजातीय समाज ने इसका विरोध किया और यह भाव जताया कि हमारा जंगल कोई नहीं काटेगा। सामाजिक एकजुटता के कारण बहुत कुछ संरक्षित रहा। उन्होंने कहा कि आज किए जा रहे आयोजन के माध्यम से इतिहास के पन्नों में दर्ज जनजातीय समाज के गौरव की गाथा हमारी आने वाली पीढि?ों तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा सामाजिक समरसता का सबसे बड़ा प्रमाण है। इस समाज में 80 प्रतिशत परिवार संयुक्त परिवार है। मिलेट का उपयोग, जैविक खेती जैसी अनेक बातें जनजातीय समाज से शिक्षित समाज को सीखने की आवश्कता है। स्वागत भाषण उच्च शिक्षा विभाग के सचिव श्री प्रसन्ना आर. ने दिया। वनवासी विकास समिति के अखिल भारतीय युवा कार्य प्रमुख श्री वैभव सुरंगे ने स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समाज के योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जनजातीय संस्कृति में अनेक प्रगतिशील परम्पराएं हैं। भगवान से ये कुछ नहीं मांगते। वनवासी विकास समिति के सचिव डॉ. अनुराग जैन ने कहा कि जनजातीय समाज के गुमनाम महानायकों के योगदान से नई पीढ़ी को परीचित कराने की जरूरत है। कार्यक्रम में वनवासी विकास समिति के प्रांताध्यक्ष श्री उमेश कश्यप विश्व विद्यालय के कुलपति एवं प्रबुद्ध नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे। मुख्यमंत्री सहित अतिथियों ने इस अवसर पर जनजातीय समाज के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों पर केंद्रित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। recent visitors 64

मिथुन चक्रवर्ती को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार मिलने पर जया प्रदा ने खुशी जाहिर की

मुंबई,  बॉलीवुड अभिनेत्री जया प्रदा ने मिथुन चक्रवर्ती को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार मिलने पर खुशी जाहिर की है। केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को मिथुन चक्रवर्ती को दादा साहब फाल्के पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की है। मिथुन चक्रवर्ती को 08 अक्टूबर को 70वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह के दौरान दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। जया प्रदा ने मिथुन चक्रवर्ती को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार मिलने पर खुशी जाहिर की है।जयाप्रदा ने कहा कि मिथुन दा महानायक हैं। मिथुन दा को दादा साहब अवार्ड दिया जाएगा, ये हमारे लिए और इंडस्ट्री के लिए बहुत खुशी की बात है।यह फिल्म जगत में हम सभी के लिए गर्व का क्षण है।मिथुन दा ने कई भाषाओं की कई फिल्मों में काम किया है। मैं दादा के साथ दो फिल्में अभी कर रही हूं। इनमें एक रिवाज है और दूसरी फौजी है। मुझे बहुत अच्छा लगा।   recent visitors 89