Saturday, July 4, 2026 4:47 am

प्रदेश सरकार शिक्षा को लेकर सजग, उच्च स्तरीय शैक्षणिक संस्थान स्थापित किये जा रहे हैं : वन मंत्री रावत

हर समुदाय में शिक्षा के प्रति चेतना बढ़ी है, फलीभूत हो रहे हैं सरकार के प्रयास : वन मंत्री रावत मंत्री रामनिवास रावत ने कहा है कि हर समुदाय में शिक्षा के प्रति चेतना बढ़ी प्रदेश सरकार शिक्षा को लेकर सजग, उच्च स्तरीय शैक्षणिक संस्थान स्थापित किये जा रहे हैं : वन मंत्री रावत कराहल में स्कूली बच्चों को बैग वितरित भोपाल वन एवं पर्यावरण मंत्री रामनिवास रावत ने कहा है कि हर समुदाय में शिक्षा के प्रति चेतना बढ़ी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के प्रयास फलीभूत हो रहे हैं। आदिवासी विकासखण्ड मुख्यालय कराहल स्थित शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में आयोजित स्कूली बच्चों के बैग वितरण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रावत ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा को लेकर सजग है। प्रदेश में उच्च स्तरीय शैक्षणिक संस्थान स्थापित किये जा रहे हैं। इसी कड़ी में आदिवासी विकासखण्ड मुख्यालय कराहल में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, मॉडल हायर सेकेण्डरी स्कूल, आईटीआई, डिग्री कॉलेज और सीएम राइज स्कूल भी बनाये गये हैं। वन मंत्री रावत ने कहा कि शिक्षित समाज से ही देश का भविष्य उज्जवल होता है, शिक्षा हर सफलता की कुंजी है। उन्होंने स्कूली बच्चों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि शिक्षा के लिये बेहतर वातावरण, बुनियादी सुविधाएँ राज्य शासन द्वारा उपलब्ध करायी जा रही हैं। इसका लाभ लेकर बच्चे अपने जीवन में आगे बढ़ें। शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय, एकलव्य आवासीय विद्यालय, शासकीय कन्या विद्यालय और मॉडल स्कूल के विद्यार्थियों को वन विकास निगम द्वारा स्कूल बैग का वितरण किया गया। वन विकास निगम द्वारा सामाजिक दायित्व गतिविधि के अंतर्गत कक्षा-6वीं से 12वीं तक के एक हजार से अधिक विद्यार्थियों को स्कूल बैग का वितरण किया गया। इस अवसर पर सहायक आयुक्त आदिम जाति कल्याण लालजी राम मीणा, शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय के प्राचार्य प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, कन्या स्कूल प्राचार्य बी.एल. धाकड़, बीआरसी अजय रावत, प्राचार्य एम.पी. मौर्य, वन विभाग के अधिकारी एवं जन-प्रतिनिधि उपस्थित थे। recent visitors 69

नवरात्रि का महोत्सव माँ अम्बे की नौ दिवस की आराधना से प्राप्त शक्ति से अपने अंदर की बुराईयों को समाप्त करने का पर्व -राज्यपाल पटेल

भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि भगवान राम दानवों का वध कर विजयादशमी पर आए थे। उसी तरह नवरात्रि का महोत्सव माँ अम्बे की नौ दिवस की आराधना से प्राप्त शक्ति से अपने अंदर की बुराईयों को समाप्त करने का पर्व है। उन्होंने कहा कि गुजराती समाज खूब प्रगति करे क्योंकि समाज की उन्नति से प्रदेश की और प्रदेश की उन्नति से देश की प्रगति होती है। राज्यपाल पटेल गुरूवार को गुजराती समाज भोपाल के द्वारा आयोजित नवरात्रि महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल ने "एक पेड़ माँ के नाम" के तहत छोटे बच्चों को पौधे वितरित किए। सरदार पटेल भवन के भूतल हॉल का उद्घाटन किया। माँ अम्बे के समक्ष प्रस्तुत किए जाने वाले गरबे का अवलोकन किया। इस अवसर पर गुजराती समाज के सदस्य और नागरिकगण बड़ी संख्या में उपस्थित थे। राज्यपाल पटेल ने इंदौर के गरबा उत्सव में शामिल होने और वहां पर 1100 गरबा आयोजनों की जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने भोपाल में भी माँ अम्बे की झाकियां, गरबे देखे है। पटेल ने कहा कि पिछले 3 साल से वह गुजराती समाज के गरबा महोत्सव में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि गुजराती समुदाय को नवरात्रि के प्रथम दिवस पर राजभवन में गरबे के लिए आमंत्रित करते है। समुदाय के अष्टमी के आयोजन में आकर शामिल होते है। उन्होंने समाज की सांस्कृतिक गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि समाज के बच्चों और युवाओं को माँ अम्बे की आराधना और जीवन के नैतिक मूल्यों के संस्कारों से संस्कारित करने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन सराहनीय पहल है। कार्यक्रम के प्रारंभ में राज्यपाल पटेल ने माँ अम्बे की आरती की गुजराती समाज भोपाल के अध्यक्ष संजय पटेल सहित समिति के सदस्यों ने उनका स्वागत अभिनंदन किया।                    recent visitors 71

मुख्यमंत्री डॉ यादव ने माँ अंबे की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के कल्याण की मंगल कामना की

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव दुर्गा अष्टमी के अवसर पर उज्जैन के जयसिंहपुरा में देवी पंडाल पहुंचे। उन्होंने माँ अंबे की प्रतिमा की विधिवत पूजा-अर्चना और आरती कर प्रदेशवासियों के कल्याण की मंगल कामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इसी प्रकार दशहरे पर्व पर भी आनंद बरसे। सभी त्यौहारों पर माँ अंबे का आशीर्वाद बना रहे। इस दौरान विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, विवेक जोशी सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहें।   recent visitors 61

अटल पेंशन योजना 18 से 40 वर्ष की उम्र के नागरिकों के लिए लाई गई है, इस योजना से 10वें वर्ष में जुड़े 56 लाख लोग

नई दिल्ली भारत सरकार नागरिकों के लिए कई योजनाएं चला रही है। इन्हीं योजनाओं में से एक अटल पेंशन योजना है। यह योजना 18 से 40 वर्ष की उम्र के नागरिकों के लिए लाई गई है। अटल पेंशन योजना यानी एपीआई के 9 वर्ष पूरे हो चुके हैं। योजना के दसवें वर्ष में पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) की ओर से मंगलवार को सकल पंजीकरण के आंकड़ों की जानकारी दी गई है। पीएफआरडीए द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक,अटल पेंशन योजना से अब तक 7 करोड़ लोग जुड़ चुके हैं। इस योजना के तहत वर्ष 2024- 25 में अब तक 56 लाख से अधिक नामांकन हुए हैं। प्राधिकरण ने कहा, “यह योजना अपने 10वें वर्ष में है और इसने एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है।” अटल पेंशन योजना के तहत नागरिकों को 60 वर्ष की उम्र में पेंशन की सुविधा दी जाती है। यह भारत में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों पर केंद्रित पेंशन योजना है, जिसे पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण द्वारा रेगुलेट किया जाता है। योजना के तहत लाभार्थी को 1,000- 5000 रुपये प्रति माह पेंशन दी जाती है। पेंशन की राशि लाभार्थी को उसके द्वारा योजना में दिए योगदान के आधार पर तय होती है। भारत का कोई भी नागरिक इस योजना में नामांकन करवा सकता है। योजना के लिए व्यक्ति का डाकघर या बैंक में एक बचत खाता होना अनिवार्य है। पीएफआरडीए ने कहा, “समाज के सबसे कमजोर वर्गों को पेंशन के दायरे में लाने की यह उपलब्धि सभी बैंकों और एसएलबीसी/यूटीएलबीसी के अथक प्रयासों से संभव हो पाई है।” हाल के दिनों में, नियामक प्राधिकरण ने योजना के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए राज्य और जिला स्तर पर एपीवाई आउटरीच कार्यक्रम आयोजित करना, जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना, विभिन्न मीडिया चैनलों के माध्यम से प्रचार करना और नियमित निष्पादन समीक्षा करना जैसी पहल की है।   recent visitors 77

भारत में एक मात्र जगह…जहां दशहरे पर रावण नहीं, महिषासुर का होता है दहन, इसके पीछे अनोखी कहानी

 ब्यावर राजस्थान में ब्यावर जिले के बिजयनगर के निकट शक्तीपीठ श्री बाड़ी माता मंदिर में आसोज नवरात्रि में रावण की जगह महिषासुर के दहन की परंपरा है। ये प्रदेश का ऐसा पहला स्थान है, जहां महिषासुर के पुतले का दहन होता है। दरअसल, ये सिलसिला आज से करीब 23 साल पहले शुरू हुआ था। वहीं, कल यानी 11 अक्टूबर को मंदिर परिसर में मां भगवती मर्दिनी 41 फीट के महिषासुर के पुतले का दहन करेंगी। एक और संपूर्ण देश व प्रदेश में बुराई के प्रतिक रावण का दहन किया जाता है। वहीं बिजयनगर के निकट स्थित बाड़ी माताजी में पिछले 23 वर्षों से महिषासुर के पुतले का दहन किया जा रहा है। इस बार 11 अक्टूबर को मंदिर परिसर में मां भगवती मर्दिनी द्वारा 41 फीट के महिषासुर के पुतले का दहन किया जाएगा। जानें-क्यों होता है महिषासुर का दहन बिजयनगर के निकट स्थित प्रमुख शक्तिपीठ श्री बाड़ी माता मंदिर ट्रस्ट प्रमुख कृष्णा टांक ने बताया की महिषासुर एक राक्षस था। जिसका वध करने के लिए ब्रह्नमा, विष्णु और महेश के तेज पुज से व देवी-देवताओं ने अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित कर मां भगवती को शक्ति प्रदान की। इसके बाद मां भगवती ने सिंह पर सवार हो अपना विकराल रूप धारण कर महिषासुर का वध किया। बाड़ी माता भी एक मां का ही रूप है। इसलिए यहां पर महिषासुर के पुतले का दहन किया जाता है। 23 सालों से महिषासुर का दहन कार्यक्रम बाड़ी माता तीर्थ धाम पर पिछले 23 सालों से महिषासुर का दहन का कार्यक्रम होता आया है। हर साल जगह-जगह पर दशहरे पर रावण दहन का कार्यक्रम होता है। लेकिन, प्रदेश व देश में शायद एक मात्र बिजयनगर शहर के निकट बाड़ी माता मंदिर है। जहां महिषासुर का दहन होता है। महिषासुर के दहन बाड़ी माताजी मंदिर में महिषासुर के दहन का कोई विशेष कारण नहीं बताया जा रहा है। बस वर्षों पहले माताजी के परमभक्त स्मृतिशेष चुन्नीलाल टांक ने ये परमंपरा शुरू की थी। जिसने अब एक विशाल रूप ले लिया है। हर साल दशहरे पर यहां मेला भरने सहित भव्य झांकिया का भी आयोजन होतो है। साथ ही शानदार आतिशबाजी का भी आयोजन किया जाता है। बाड़ी माता मंदिर में विराजित माता की प्रतिमाएं मूल स्वरूप में बाड़ी माता मन्दिर के शिखर की ऊंचाई 185 फीट है मन्दिर में भगवान शिव, मां लक्ष्मी, धर्मराज, श्रीकृष्ण राधा, श्रीराम दरबार, चारभुजानाथ, गंगा मैया, चित्रगुप्त, सूर्यनारायण भगवान, रामदेव, गायत्री माता, शीतला माता सहित की अन्य देव प्रतिमाएं विराजित है। नवरात्र के दौरान यहां भक्तजनो का तांता लगा रहता है। recent visitors 94

कश्मीर चुनाव में लोगों ने बढ़-चढ़कर डाला वोट, कश्मीर अब पाक से बहुत दूर हो गया – शब्बर जैदी

इस्लामाबाद पाकिस्तान के शीर्ष अर्थशास्त्री और संघीय राजस्व बोर्ड के अध्यक्ष रह चुके सैयद शब्बर जैदी का कहना है कि कश्मीर अब उनके देश से बहुत दूर हो गया है। शब्बर जैदी ने कश्मीर में हुए विधानसभा के चुनाव और इसके नतीजों पर ये टिप्पणी की है। जैदी का मानना है कि भले ही कश्मीर के लोगों ने नरेंद्र मोदी की पार्टी भाजपा को वोट नहीं दिया है लेकिन पाकिस्तान के लिहाज से भी कोई अच्छी खबर नहीं है क्योंकि कश्मीरियों ने नेशनल कॉन्फ्रेंस को चुना है, जिसे शेख अब्दुल्ला ने बनाया था। शब्बर जैदी ने एक्स पर एक पोस्ट करते हुए लिखा, 'पाकिस्तान ने कश्मीर हमेशा के लिए खो दिया है। कश्मीर चुनाव नतीजे दिखाते हैं कि कश्मीरियों ने बीजेपी के खिलाफ वोट दिया लेकिन ये भी देखिए कि उन्होंने शेख अब्दुल्ला की बनाई पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस को जमकर समर्थन दिया है। मेरे विचार से उन्होंने हिंदुत्व और पाकिस्तान के साथ विलय दोनों को अस्वीकार कर दिया। हमने पाकिस्तान में अपने प्रदर्शन से कश्मीरियों को निराश कर दिया।' कश्मीर में चुनाव ने किया पाकिस्तान को निराश! जम्मू कश्मीर की 90 सदस्यों वाली विधानसभा के लिए हुए चुनाव के नतीजे मंगलवार को घोषित किए गए हैं। चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 90 में से 42 पर जीत दर्ज की है। वहीं उसकी सहयोगी कांग्रेस के खाते में छह सीटें गई हैं। बीजेपी ने जम्मू रीजन की 29 सीटों पर जीत दर्ज की है। पीडीपी और दूसरी पार्टियां कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ सकीं। कश्मीर में चुनाव पर ना सिर्फ भारत बल्कि पाकिस्तान और दुनियाभर की निगाह थीं। इसकी वजह ये थी कि जम्मू कश्मीर में यह चुनाव 10 साल के बाद हुआ है कश्मीर का राज्य का दर्जा खत्म किए जाने और केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद यह पहला विधानसभा चुनाव था। एक्सपर्ट का मानना है कि कश्मीर के लोगों ने जिस तरह चुनाव जोश के साथ हिस्सा लिया, उसने कहीं ना कहीं पाकिस्तान की मीडिया और सरकार को परेशान किया है। जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के लिए तीन चरणों में वोटिंग हुई थी। इस चुनाव में कश्मीर में 63.45 प्रतिशत मतदान हुआ। कश्मीर में लंबे समय बाद इस तरह का उत्साह चुनाव के लिए देखा गया। इस चुनाव में लोगों ने कहीं भी वोटिंग का बायकॉट नहीं किया, जैसा पहले कुछ इलाकों में देखा जाता रहा था। इस पूरे घटनाक्रम ने पाकिस्तानियों को परेशान कर रखा है। उनको लगता है कि अब पाकिस्तान के लिए कश्मीर में समर्थन ढूंढ़ना मुश्किल होगा। recent visitors 113

हरियाणा में नायब सिंह सैनी समेत मंत्रिमंडल में 14 सदस्य होंगे, मंत्रिमंडल में किसकी लगेगी लॉटरी

चंडीगढ़ हरियाणा में बीजेपी की लगातार तीसरी बार जीत के बाद अब सबकी निगाहें नई सरकार और कैबिनेट के गठन पर टिकी हैं। हरियाणा सरकार में मुख्यमंत्री सहित कुल 14 मंत्री हो सकते हैं। इसका मतलब है कि भाजपा को 11 नए चेहरों की तलाश करनी होगी, क्योंकि केवल अनिल विज ही वो सीनियर नेता हैं जिन्होंने अपनी सीट बरकरार रखी है। अनिल विज को मंत्री पद मिल सकता है। बीजेपी जाटों, ब्राह्मणों, पंजाबी और दलितों सहित राज्य की विभिन्न जातियों को ध्यान में रखकर कैबिनेट का गठन करेगी। जातिगत समीकरणों और समुदायों की मांगों को संतुलित करते हुए सरकार बनाना कोई आसान काम नहीं है। लेकिन बीजेपी ने हाल के दिनों में सफलतापूर्वक किया है। पिछले साल दिसंबर में, मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के चुनाव जीतने के बाद, पार्टी ने विधायकों और राज्य के नेताओं से परामर्श करने के बाद मुख्यमंत्रियों और मंत्रिमंडलों की घोषणा करने में अपना समय लिया। हरियाणा में भी इसी तरह के कदम उठाने की संभावना है। बीजेपी के पास अब दलित समुदाय से नौ विधायक हैं, आठ पंजाबी मूल के, सात ब्राह्मण और जाटों और यादवों में से प्रत्येक के छह विधायक हैं। पार्टी के पास गुर्जर, राजपूत, वैश्य और एक ओबीसी नेता भी हैं। इन दो दलित नेताओं में से एक मिल सकती है कैबिनेट में जगह इस सरकार में भाजपा के पास नौ दलित विधायक हैं, जिनमें से दो सबसे आगे हैं। एक हैं छह बार के विधायक कृष्ण लाल पंवार और दूसरे हैं दो बार के विधायक कृष्णा बेदी। पंजाबी मूल के आठ लोगों में सात बार के विधायक और पूर्व गृह मंत्री अनिल विज हैं, जो मार्च में मुख्यमंत्री नहीं बनाए जाने के बाद नाराज हो गए थे। यह तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा लोकसभा सीट के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद इस्तीफा देने के बाद हुआ था। पिछले महीने अपनी अम्बाला कैंट सीट जीतने वाले शविज ने तीसरी बार उस रिंग में अपनी टोपी फेंकी लेकिन उन्हें फिर से नजरअंदाज कर दिया गया। और यह पार्टी के लिए थोड़ी परेशानी खड़ी कर सकता है। कृष्ण मिड्ढा को क्या मिलेगी जगह जींद के विधायक कृष्ण मिड्ढा भी इस रेस में हैं, जिन्होंने लगातार तीसरी बार अपनी सीट जीती है। एक और अब तीन बार के विधायक यमुनानगर से घनश्याम दास अरोड़ा हैं। लेकिन उनकी नियुक्ति को छोड़ दिया जा सकता है क्योंकि उनकी सीट अम्बाला क्षेत्र के भीतर है। अरोड़ा को हांसी से तीन बार के विधायक विनोद भयाना के लिए नजरअंदाज किया जा सकता है। किस ब्राह्मण चेहरे को मिलेगा मौका फिर नंबर आता है ब्राह्मण को, इनमें बल्लभगढ़ से तीन बार के विधायक मूल चंद शर्मा शामिल हैं, जिन्हें मंत्रिमंडल में बरकरार रखा जा सकता है। एक और संभावित दो बार के लोकसभा सांसद अरविंद शर्मा हैं जिन्होंने गोहाना जीता। राम कुमार गौतम, जिन्होंने सफीदों को जीत दिलाई, जिसे भाजपा ने कभी नहीं जीता था। अहीरवाल बेल्ट से कौन होगा मंत्री भाजपा के लिए अहीरवाल बेल्ट के छह विधायक महत्वपूर्ण हैं जिन्होंने एक बार फिर पार्टी को भारी मतों से वोट दिया। कांग्रेस को हराने के लिए इस बार यह समर्थन महत्वपूर्ण था। इनमें बादशाहपुर से छह बार के विधायक राव नरबीर सिंह हैं। वह पहली सैनी सरकार में नहीं थे, लेकिन 2014 के चुनाव जीतने के बाद श खट्टर की अध्यक्षता वाली सरकार में थे। केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की बेटी आरती राव ने पहली बार अटेली सीट जीती है, लेकिन उनका नाम शॉर्टलिस्ट में है। साथ ही दो बार के विधायक लक्ष्मण यादव का नाम भी है। इस जाट विधायक को मिल सकती है जगह जाट हरियाणा की सबसे बड़ी उप-आबादी में से एक है। जाट नेता महीपाल ढांडा अब पानीपत (ग्रामीण) से दो बार के विधायक हैं और उनके बरकरार रहने की संभावना है। राई से दूसरी बार चुने गए कृष्ण गहलोत भी इस दौड़ में शामिल हैं। एक संभावित बड़ा नया नाम पार्टी के राज्यसभा सांसद किरण चौधरी की बेटी श्रुति चौधरी का है। अन्य संभावित उम्मीदवारों में वैश्य समुदाय के पूर्व मंत्री विपुल गोयल शामिल हैं। हरियाणा में सबसे अमीर महिला और हिसार से निर्दलीय विधायक सावित्री जिंदल ने औपचारिक रूप से भाजपा को अपना समर्थन दे दिया है। इससे उनके नए मंत्रिमंडल में शामिल होने की संभावना बढ़ गई है। recent visitors 70