Saturday, July 4, 2026 10:24 pm

गर्भवती कर छोड़ने पर 10 साल का सश्रम कारावास, छत्तीसगढ़-रायगढ़ में अविवाहित बनकर युवती से दुष्कर्म

रायगढ़. रायगढ़ जिले में खुद को अविवाहित बताकर युवती से शारीरिक संबंध बनाकर उसे गर्भवती करने के बाद शादी से मुकर जाने वाले आरोपी को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने 10 साल सश्रम कारावास और जुर्माने से दंडित किया है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता 2019 में हंडी चैक में स्थित डेंटल क्लीनिक में काम करती थी। उस वक्त क्लीनिक में लाइट बनाने का काम चल रहा था। लाइट बनाने का काम अभियुक्त भुनेश्वर साहू निवासी छातामुडा के द्वारा लिया गया था। इस दौरान भुनेश्वर ने पीड़िता से उसका मोबाइल नंबर लिया और बात करने लगा। भुनेश्वर अपने आपको कुंवारा बताकर पढ़ाई करना बताया गया और पीड़िता को पसंद करता हूं शादी करूंगा बोला गया। इस दौरान पीड़िता उसे अपने घर मिलवाने ले गई थी। मई 2019 में भुनेश्वर उसे रायगढ़ कोर्ट ले जाकर नोटरी में लिखवा कर शादी किया और बैकुंठपुर में किराये के मकान में डेढ माह तक रखकर शारीरिक संबंध बनाता रहा। पीड़िता की तबीयत खराब हुई तो भुनेश्वर ने उससे कहा कि घर चली जाओ मैंने अपने घर बात कर ली है। समाज में बात कर अपने घर ले जाउंगा। इसके बाद अपने घर ले जाने के लिये वह टाल मटोल करता रहा। इस दौरान बीच-बीच में पीडिता से मिलने जाता और शारीरिक संबंध बनाता था, जिससे वह गर्भवती हो गई थी। 22 जून 2020 को भुनेश्वर की पत्नी ने पीड़िता को फोन करके बताया कि भुनेश्वर की पत्नी है और उनके दो बच्चे हैं। इसके बाद पीड़िता ने भुनेश्वर से इस संबंध में पूछा और दोनों के बीच लड़ाई हुई। इसके बाद भुनेश्वर ने पीड़िता को रखने से साफ इंकार कर दिया। पीड़िता की शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उपार्पण पश्चात माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रायगढ़ के न्यायलय में उपार्पित पश्चात दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद अभियुक्त भुनेश्वर साहू को पीडिता को शादी का प्रलोभन देकर उसके साथ दुष्कर्म के मामले में भादवि की धारा 376 (के) (एन) का दोषी पाया गया। जिसके बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एफटीसी रायगढ़ के विद्वान न्यायाधीश जगदीश राम ने आरोपी भुनेश्वर साहू को 376 (के) (एन) के अपराध में दस वर्ष के सश्रम कारावास एवं 5 हजार रूपये के अर्थदण्ड से दंडित किया है। अर्थदण्ड न पटाने पर 6 माह का अतिरिक्त कारावास भुगताने का भी प्रावधान रखा गया है। इस मामले में अपर लोक अभियोजक हरिलाल पटेल ने पैरवी की। recent visitors 52

SC ने कहा नौकरियों में भर्ती के नियमों को सेलेक्शन प्रोसेस के बीच में नहीं बदला जा सकता

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को घोषणा की कि सरकारी नौकरियों में सेलेक्शन को कंट्रोल करने वाले नियमों को भर्ती प्रक्रिया के बीच में या उसके शुरू होने के बाद नहीं बदला जा सकता. यह फैसला भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनाया जिसमें जस्टिस ऋषिकेश रॉय, पीएस नरसिम्हा, पंकज मिथल और मनोज मिश्रा शामिल थे. पीठ ने कहा कि भर्ती के लिए रूल्स ऑफ द गेम को चयन प्रक्रिया के बीच में नहीं बदला जा सकता. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भर्ती करने वाली संस्था अलग-अलग चरणों के लिए अलग-अलग मानक तय कर सकती है, लेकिन वह चरण के खत्म होने के बाद मानदंडों को बदल नहीं सकती. पीठ ने कहा कि आवेदन आमंत्रित करने और रिक्तियों को भरने के लिए विज्ञापन प्रकाशित होने के बाद भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी. अगर मौजूदा नियमों या विज्ञापन के तहत कोई बदलाव स्वीकार्य है, तो उस बदलाव को संविधान के अनुच्छेद 14 की आवश्यकता को पूरा करना होगा और गैर-मनमानापन की कसौटी पर खरा उतरना होगा. 'प्रक्रिया ट्रांसपेरेंट और गैर-मनमानी होनी चाहिए' पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा नियमों के अधीन भर्ती निकाय भर्ती प्रक्रिया को तार्किक निष्कर्ष पर लाने के लिए उचित प्रक्रिया तैयार कर सकते हैं. पीठ ने कहा कि प्रक्रिया के लिए अपनाई गई प्रक्रिया ट्रांसपेरेंट और गैर-मनमानी होनी चाहिए. विस्तृत निर्णय बाद में अपलोड किया जाएगा. पांच न्यायाधीशों की पीठ को सौंपा था केस इससे पहले तेज प्रकाश पाठक और अन्य बनाम राजस्थान हाई कोर्ट और अन्य (2013) मामले में तीन न्यायाधीशों की पीठ ने इस मुद्दे को पांच न्यायाधीशों की पीठ को सौंप दिया था. तेज प्रकाश मामले में सुप्रीम कोर्ट ने के मंजूश्री बनाम आंध्र प्रदेश राज्य और अन्य (2008) के पहले के फैसले की सत्यता पर संदेह जताया था. 2008 के फैसले में कोर्ट ने कहा था कि चयन मानदंड को प्रक्रिया के दौरान बीच में नहीं बदला जा सकता. यह स्पष्ट रूप से अस्वीकार्य है. recent visitors 63

क्रूरता मानकर पति का तलाक मंजूर, छत्तीसगढ़-बिलासपुर में पत्नी से झगडे में रेलवे को तीन करोड़ का नुकसान

बिलासपुर. बिलासपुर में पत्नी के दुर्व्यवहार से रेलवे स्टेशन मास्टर को नौकरी में निलंबन झेलना पड़ा। पत्नी के इस तरह के व्यवहार से क्षुब्ध होकर पति ने तलाक के लिए हाईकोर्ट में याचिका लगाई। कोर्ट ने पत्नी के इस व्यवहार को क्रूरता माना एवं पति के तलाक की याचिका को स्वीकार किया है। मामले की सुनवाई जस्टिस रजनी दुबे एवं जस्टिस संजय कुमार जायसवाल की बेंच में हुई। याचिकाकर्ता विशाखापत्तनम निवासी स्टेशन मास्टर की 12 अक्तूबर 2011 को भिलाई के चरोदा निवासी युवती से हिन्दू रीति रिवाज से शादी हुई। 14 अक्तूबर 2011 को पति ने विशाखापटनम में रिसेप्शन अयोजित किया। इसमें पत्नी खुश नहीं थी। रात में उसने पति को बताया, कि उसका इंजीनियरिंग कॉलेज के ग्रंथपाल के साथ प्रेम सम्बन्ध है उसने प्रेमी के साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाया है। पति ने इस बात की जानकारी उसके पिता को दी। पिता ने अपनी बेटी को समझाया, और भविष्य में ऐसा न करने की गारंटी ली। जिस पर दोनों साथ रह रहे थे। एक रात पति ड्यूटी में था तब पत्नी फोन कर झगड़ा करने लगी। पति ने उसे घर आकर बात करेंगे कहा और अंतिम शब्द ओके कहा। माइक में ओके शब्द सुनकर साथ में काम कर रहे दूसरे स्टेशन मास्टर ने रेलगाड़ी को रवाना करने का सिग्नल दे दिया। नक्सल क्षेत्र होने के कारण उस खंड में रात 10 से सुबह 6 बजे तक रेल यातायात निषेधित है। इसके कारण रेलवे को तीन करोड़ का नुकसान हुआ और पति को निलंबित कर दिया गया। लगातार पत्नी द्वारा प्रताड़ित किये जाने पर उसने तलाक के लिए विशाखापटनम परिवार न्यायालय में आवेदन दिया, तो पत्नी ने 498 के तहत पति, उसके 70 वर्षीय पिता, शासकीय सेवक बड़े भाई, भाभी व मौसेरा भाई बहन के खिलाफ रिपोर्ट लिखाई। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पति के आवेदन को दुर्ग न्यायालय ट्रांसफर किया गया। दुर्ग परिवार न्यायालय से आवेदन खारिज होने पर पति ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई। हाईकोर्ट ने सुनवाई में पाया कि पत्नी ने पति पर भाभी के साथ अवैध संबंध होने का आरोप लगाया था, जबकि याचिकाकर्ता की माँ का 2004 में निधन हो गया है। उसकी शादी में भाभी ने मां की सभी रस्म की है। इसके अलावा पति व उसके शासकीय सेवक बड़े भाई, भाभी व अन्य रिश्तेदार जो अलग रहते हैं उनके खिलाफ दहेज प्रताड़ना की झूठी रिपोर्ट लिखाई। दहेज में कब और कैसे नकद रकम दिया गया, यह नहीं बताया गया। कोर्ट ने कहा कि पति से फोन पर झगड़ा करने और इसके कारण माइक में ओके बोलने पर सहकर्मी ने प्रतिषेधित क्षेत्र के लिए रेलगाड़ी को सिग्नल दिया। जिसके लिए पति को निलंबित किया गया। पति के परिवारवालों के खिलाफ झूठी रिपोर्ट लिखाई और भाभी पर अवैध संबंध होने की बात कही, यह सब पति के प्रति मानसिक क्रूरता है। हाईकोर्ट ने परिवार न्यायालय के निर्णय को रद्द कर पति के तलाक की याचिका को स्वीकार किया है। recent visitors 61

प्रदेश में वनाधिकार और पेसा कानून सटीक और प्रभावी तरीके से लागू होंगे, टॉस्क फोर्स गठित

भोपाल राज्य शासन द्वारा मध्यप्रदेश में वन अधिकार अधिनियम और पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में गठित टास्क फोर्स का पुनर्गठन किया गया है।        गठित टास्क फोर्स की शीर्ष समिति में जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद पटेल, वन एवं पर्यावरण मंत्री श्री रामनिवास रावत को उपाध्यक्ष, मुख्य सचिव मध्यप्रदेश शासन को पदेन सचिव और प्रमुख सचिव जनजातीय कार्य को पदेन सह सचिव नियुक्त किया गया है।        मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अध्यक्षता में कार्यकारी समिति भी गठित की गई है। इसमें मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास, अपर मुख्य सचिव वन और अपर आयुक्त जनजातीय अनुसंधान एवं विकास संस्थान को पदेन सदस्य नियुक्त किया गया है। डॉ. मिलिंद दांडेकर (विधि विशेषज्ञ), डॉ. शरद लेले (विषय विशेषज्ञ), श्री मिलिंद थत्ते (विषय विशेषज्ञ), श्री भगत सिंह नेताम पूर्व विधायक, श्री राम डांगोरे पूर्व विधायक, डॉ. रूपनारायण मांडवे और श्री कालू सिंह मुजाल्दा जनजातीय मंत्रणा परिषद मध्यप्रदेश को सदस्य नियुक्त किया गया है। प्रमुख सचिव, जनजातीय कार्य विभाग समिति के पदेन सदस्य सचिव होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशानुसार वर्ष में 2 बार शीर्ष समिति की बैठक होगी और कार्यकारी समिति की बैठक मुख्यमंत्री के निर्देश पर बुलाई जा सकेगी। समिति के प्रमुख दायित्व- टास्क फोर्स समिति राज्य में वर्तमान में चिन्हांकित वन अधिकार अधिनियम में सीएफआरआर प्रावधानों की संभावित क्षेत्रों के मेपिंग की जिलेवार सूची तैयार करना एवं अन्य संभावित क्षेत्रों के चिन्हांकन के लिये संस्तुति प्रदान करना। वन अधिकार अधिनियम में सीएफआरआर प्रावधानों के संभावित क्षेत्रों के लंबित प्रकरणों का जिलेवार आकलन करना। राज्य में पेसा और वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन के लिये राज्य शासन के संबंधित विभागों एवं एफआरए संबंधित विषयों के लिये डीएलसी और पेसा संबंधी विषयों के लिये जिला पंचायतों को संभावित रणनीतियों और कार्ययोजना के लिये अनुसंशाएं प्रदान करना। प्रस्तावित अनुशंसाओं के प्रशासकीय अनुमोदन के बाद कार्य-योजना एवं समय-सीमा के अनुसार बिन्दुवार क्रियान्वयनित कार्यों का मूल्यांकन और पर्यवेक्षण करना। राज्य में वन अधिकार अधिनियम और पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिये अन्य उपाय या अनुसंशाएं प्रस्तुत करना। टास्क फोर्स का कार्यकाल 2 वर्ष का होगा, जो अपनी प्रथम अनुसंशाओं का प्रतिवेदन 3 माह की अवधि या इसके पूर्व प्रस्तुत करेगा। *समिति के प्रमुख दायित्व* टास्क फोर्स समिति राज्य में वर्तमान में चिन्हांकित वन अधिकार अधिनियम में सीएफआरआर प्रावधानों की संभावित क्षेत्रों के मेपिंग की जिलेवार सूची तैयार करना एवं अन्य संभावित क्षेत्रों के चिन्हांकन के लिये संस्तुति प्रदान करना। वन अधिकार अधिनियम में सीएफआरआर प्रावधानों के संभावित क्षेत्रों के लंबित प्रकरणों का जिलेवार आकलन करना। राज्य में पेसा और वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन के लिये राज्य शासन के संबंधित विभागों एवं एफआरए संबंधित विषयों के लिये डीएलसी और पेसा संबंधी विषयों के लिये जिला पंचायतों को संभावित रणनीतियों और कार्ययोजना के लिये अनुसंशाएं प्रदान करना। प्रस्तावित अनुशंसाओं के प्रशासकीय अनुमोदन के बाद कार्य-योजना एवं समय-सीमा के अनुसार बिन्दुवार क्रियान्वयनित कार्यों का मूल्यांकन और पर्यवेक्षण करना। राज्य में वन अधिकार अधिनियम और पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिये अन्य उपाय या अनुसंशाएं प्रस्तुत करना। टास्क फोर्स का कार्यकाल 2 वर्ष का होगा, जो अपनी प्रथम अनुसंशाओं का प्रतिवेदन 3 माह की अवधि या इसके पूर्व प्रस्तुत करेगा।   recent visitors 50

मां के उकसाने पर बेटों ने की थी उप प्रधानाचार्य की हत्या

  मुरादाबाद मुरादाबाद के थाना मझोला इलाके के लाकड़ी फाजलपुर में मंगलवार को दिनदहाड़े 2 बाइक सवारों ने काम पर जा रहे एक स्कूल के वाइस प्रिंसिपल को गोली मार दी थी. इसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया. इस घटना के बाद क्षेत्र में खलबली मच गई और मौके पर पहुंची पुलिस पड़ताल में जुट गई. टीम गठित करके आरोपियों की तलाश की गई जिसके बाद 24 घंटे के अंदर पुलिस ने घटना का खुलासा कर दिया है. इस खूनी खेल के पीछे एक महिला और उसके दो बेटे शामिल थे और पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया आरोपी महिला के 14 साल के बेटे प्रिंस ने 15 फरवरी 2024 को आत्महत्या कर ली थी. प्रिंस लाकड़ी मोहल्ले में स्थित श्री साईं विद्या मंदिर में 8वीं में पढ़ता था. शबाबुल हसन भी इसी स्कूल में वाइस प्रिंसिपल था,मां कविता राघव उर्फ वंदना को शक था कि शबाबुल ने प्रिंस को स्कूल में प्रताड़ित किया था जिसके चलते उसने आत्महत्या की थी. तभी से वह अपने छोटे बेटे की मौत का बदला लेने की कोशिशों में लगी थी। वह शबाबुल को व्हाट्सएप पर आए दिन धमकी भी देती थी. जिसके बाद उसने बेटे शिवम और आदित्य को शबाबुल की हत्या के लिए उकसाया और वाइस प्रिंसिपल को मार डाला. पुलिस ने आरोपी मां उसके दोनों बेटे को गिरफ्तार कर हत्या का खुलासा किया है. एसपी सिटी रण विजय सिंह ने बताया कि हत्या में शामिल आरोपी आदित्य और शिवम ने छोटे भाई प्रिंस की मौत का बदला लेने के लिए श्री साईं विद्या मंदिर स्कूल के वाइस प्रिंसिपल शबाबुल आलम को गोली से मारा है . इनका आरोप था कि वाइस प्रिंसिपल ने उनके भाई को प्रताड़ित किया था जिसके चलते उसने सुसाइड कर लिया.     recent visitors 64

बेरमा में जमीन विवाद को लेकर दो पक्षों में जमकर हुई मारपीट, छह घायलों की हालत गंभीर, रीवा मेडिकल कॉलेज रेफर

मैहर/सतना मध्‍य प्रदेश में मैहर के बेरमा गांव में दो पक्षों में जमीन को लेकर विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ गया कि जान पर बन आई। कई घायल हुए, जिन्‍हें अस्‍पतालों में भर्ती कराया गया है। विवाद में के बाद पूरे गांव व आसपास के क्षेत्र में अफरा तफरी का माहौल बना है। सभी घायलों को मैहर के जिला अस्‍पताल में भर्ती कराया जमीनी विवाद में मारापीटी के दौरान दोनों पक्षों के लोग लाठी लेकर बाहर निकल आए और एक-दूसरे पर प्रहार करने लगे। मारापीटी में करीब छह लोग घायल हो गए। सभी घायलों को मैहर के जिला अस्‍पताल में भर्ती कराया। हालत गंभीर होने पर रीवा मेडिकल कालेज रेफर कर दिया जिला अस्‍पताल के डाक्‍टरों ने प्राथमिकी उपचार करके जांच करने के दौरान बताया कि पांच लोगों की हालत तो स्थिर है, लेकिन युवक की स्थिति ज्‍यादा ही गंभीर है। ऐसा कहते हुए रीवा मेडिकल कालेज रेफर कर दिया। रीवा मेडिकल के चिकित्‍सक बोले-छह घायलों में एक की हालत नाजुक रीवा मेडिकल कालेज में स्थिति देखकर वहां के डाक्‍टरों ने गहन जांच करते हुए बोले- कि छह घायलों में एक की हालत नाजुक प्रतीत होती है। ऐसा कहकर जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद बोस मेडिकल कालेज अस्‍पताल रेफर कर दिया। युवक ने जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद बोस मेडिकल कालेज अस्‍पतालमें दम तोड़ दिया स्‍वजन तत्‍काल जबलपुर युवक को लेकर रवाना हुए, लेकिन जिंदगी नहीं बचा सके। युवक ने जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद बोस मेडिकल कालेज अस्‍पतालमें दम तोड़ दिया। जमीन को लेकर विवाद का वीडियो भी वायरल हुआ था दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से जमीन को लेकर विवाद का वीडियो भी वायरल हुआ था। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है और आगे की जांच शुरू कर दी है. घटना से गांव में दहशत का माहौल है। पुलिस अधीक्षक ने कहा-आरोपियों की तलाश की जा रही है मैहर के पुलिस अधीक्षक सुधीर अग्रवाल ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से रंजिश थी। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर कार्रवाई कर रही है। आरोपियों की तलाश की जा रही है। फिलहाल इस पुरे मामले में पुलिस जांच में जुट गई है।   recent visitors 138

कोतवाली अनूपपुर पुलिस द्वारा लम्बे समय से फरार चल रहे चार ईनामी स्थाई वारण्टी गिरफ्तार

अनूपपुर पुलिस अधीक्षक अनूपपुर श्री मोती उर रहमान के निर्देशन में बुधवार की रात्रि कोतवाली अनूपपुर पुलिस द्वारा लम्बे समय से फरार चल रहे चार स्थाई गिरफ्तारी वारण्टी को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है। टी.आई. कोतवाली निरीक्षक अरविन्द जैन के नेतृत्व में उपनिरीक्षक प्रवीण कुमार साहू, प्रधान आरक्षक शेख रसीद, राजेश कंवर, महेन्द्र राठौर, रीतेश सिहं, शिवशंकर प्रजापति, आरक्षक संजय सिहं की टीम के द्वारा विगत 06 साल से फरार चल रहे राजू उर्फ राजकुमार कोल पिता सुखीराम कोल उम्र 35 वर्ष निवासी ग्राम कोड़ा अनूपपुर के विरूद्ध माननीय न्यायालय शिवानी असाटी न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी जिला अनूपपुर द्वारा प्रकरण क्रमांक 687/18 धारा 279,337 भा.द.वि. में स्थाई गिरफ्तारी वारण्ट जारी किये जाने से गिरफ्तार किया गया। विगत 02 सालो से फरार चल रहे श्यामजी पटेल पिता रामप्रसाद पटेल उम्र करीब 32 साल निवासी ग्राम पिपरिया अनूपपुर के विरूद्ध माननीय न्यायालय पारूल जैन न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अनूपपुर के द्वारा प्रकरण क्रमांक 165/22 धारा 498ए, 427,323,294,506,34 भा.द.वि. में स्थाई गिरफ्तारी वारण्ट जारी किये जाने से गिरफ्तार किया गया।                  विगत 03 साल से फरार चल रहे सन्तू राठौर पिता बुधईया राठौर उम्र 45 साल निवासी ग्राम हरी अनूपपुर के विरूद्ध माननीय न्यायालय श्रीमती गीता सोलंकी प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय अनूपपुर के द्वारा वसूली / गिरफ्तारी वारण्ट जारी किये जाने से से गिरफ्तार किया गया। इसी तरह विगत 01 वर्ष से फरार चल रहे सुरेश राठौर पिता शिवप्रसाद राठौर उम्र 32 साल निवासी ग्राम भगतबांध के विरूद्ध मानीय न्यायालय श्रीमती गीता सोलंकी प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय अनूपपुर के द्वारा विसूली/ गिरफ्तारी वारण्ट जारी किये जाने से गिरफ्तार किया गया है।                       पुलिस अधीक्षक अनूपपुर श्री मोती उर रहमान द्वारा उक्त फरार चल रहे स्थाई वारण्टियों की गिरफ्तारी पर ईनाम उदघोषणा भी जारी किया गया था। recent visitors 53