Wednesday, July 8, 2026 7:12 am

तुलसी गबार्ड अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सरकार में राष्ट्रीय खुफिया निदेशक बनी, जाने कौन है

वाशिंटन अमेरिका के नए नवेले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पूर्व सांसद तुलसी गबार्ड को अपनी सरकार में राष्ट्रीय खुफिया निदेशक (DNI) के रूप में नियुक्त किया है। तुलसी गबार्ड अमेरिकी कांग्रेस की पहली हिंदू महिला सदस्य हैं। वह पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही ज्यादतियों की आलोचना करती रही हैं। गबार्ड की मां का जन्म अमेरिका में हुआ था। उन्होंने हिंदू धर्म अपनाया। तुलसी गबार्ड का लालन-पालन हिंदू मान्यताओं के मुताबिक ही हुआ है। वह जन्म से ही शाकाहारी हैं और कांग्रेस में प्रवेश के समय उन्होंने भगवद गीता पर शपथ ली थी। 2021 में तुलसी गबार्ड ने अमेरिकी कांग्रेस में एक प्रस्ताव पेश किया था, जिसमें बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के संरक्षण की मांग की गई थी। उन्होंने हिंदुओं के खिलाफ हो रहे अत्याचार के खिलाफ आवाज बुलंद की थी। प्रस्ताव में गबार्ड ने 1971 में पाकिस्तान की सेना द्वारा बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ किए गए अत्याचारों की कड़ी निंदा की थी। गबार्ड ने बताया कि 50 साल पहले पाकिस्तान की सेना ने बांग्लादेश में बंगाली हिंदुओं को उनके घरों से खदेड़ दिया था, जिनमें से लगभग करीब 30 लाख लोग मारे गए थे। उन्होंने यह भी कहा था कि पाकिस्तान की सेना ने हिंदुओं को जानबूझकर निशाना बनाया। पाकिस्तान की मदद पर 2017 में तुलसी गबार्ड ने भारत पर हमले करने वाले आतंकवादियों को पनाह देने पर पाकिस्तान की आलोचना की थी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान लगातार भारत, अफगानिस्तान और अन्य देशों में आतंकवादियों को सुरक्षित पनाह दे रहा है। गबार्ड ने कांग्रेस में पाकिस्तान को अमेरिकी सैन्य सहायता में कटौती करने की कोशिश की और पाकिस्तान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए दबाव बनाने का समर्थन किया। उन्होंने कहा, "मैंने कांग्रेस में पाकिस्तान को मिलने वाली अमेरिकी सैन्य सहायता को कम करने की कोशिश की है और पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाने की बात की है ताकि पाकिस्तान अपने आतंकवादियों के संबंधों को तोड़े।" भारत में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा पर चिंता गबार्ड ने भारतीय अल्पसंख्यकों विशेषकर हिंदू, सिख और अन्य धार्मिक और जातीय समूहों के खिलाफ बढ़ती हिंसा पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, "भारत में हाल के दिनों में हिंदुओं, सिखों और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा में वृद्धि एक गंभीर चिंता का विषय है। हम कांग्रेस में इस पर काम करते रहेंगे ताकि इस मुद्दे को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जा सके।" डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव प्रचार के दौरान बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के मुद्दे को भी उठाया था। शेख हसीना की सत्ता से बेदखली और छात्र आंदोलनों के बाद उन्होंने चिंता जताई। ट्रंप ने इस मुद्दे के समाधान के लिए आवाज उठाई और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा की कड़ी निंदा की। recent visitors 52

जंगल सफारी और नाइट स्टे के लिए जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में हो जाएं तैयार

देहरादून. जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क रामनगर का सबसे प्रसिद्ध पर्यटन जोन ढिकाला 15 नवंबर को पर्यटकों के लिए सुबह 6 बजे खोल दिया जाएगा। जिसके साथ ही पर्यटकों के लिए रात्रि विश्राम की सुविधा भी शुरू हो जाएगी। ढिकाला पर्यटन जोन 25 दिसंबर तक नाइट स्टे के लिए फुल हो चुका है। पर्यटकों का यह पसंदीदा जोन है। इस जोन में वन्य जीवों को देखने के साथ ही टाइगर को देखने की संभावनाएं होती हैं। कॉर्बेट के ढ़ेर सारे पर्यटन जोन में हर साल लाखों पर्यटक आते हैं, इनमें से ढिकाला पर्यटन जोन को इस पार्क का सबसे पसंदीदा जोन माना जाता है। इसके बाद बिजरानी जोन लोगों को खास पसंद है। बारिश की वजह से 15 जून को कॉर्बेट नेशनल पार्क के कई जोन को बंद कर दिया जाता है। जो 15 नवंबर को खुलता है। कॉर्बेट पार्क के सभी जोन में पर्यटकों ने डे विजिट और नाइट स्टे के लिए बुकिंग करवाई जाती है। ढिकाला जोन का मुख्य ढिकाला, सर्पदुली, गैरल और सुल्तान के साथ ही बिजरानी, झिरना, गर्जिया, सोना नदी, दुर्गा देवी, पाखरो और मुंडिया पानी पर्यटन रात्रि विश्राम के एडवेंचर का लुत्फ उठा सकेंगे। जीप सफारी या घूमने फिरने के लिए यात्रा jimcorbetttravels.com ऑनलाइन बुक करें। जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित है। कॉर्बेट अपनी बाघ समृद्धि के लिए प्रसिद्ध है। कॉर्बेट को भारत का सबसे पुराना और सबसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय उद्यान होने का गौरव प्राप्त है। इसमें 6 पर्यटक जोन हैं। कॉर्बेट में सबसे बड़ा और सबसे विविध जंगल सफारी क्षेत्र होने के नाते, ढिकाला अपनी प्रचुर प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ अपने विदेशी जीवों के लिए सर्वोत्तम दृश्य प्रदान करने के लिए प्रसिद्ध है। इसका प्रवेश द्वार रामनगर शहर से 18 किमी दूर है। महत्वपूर्ण जानकारी कॉर्बेट पार्क के ढिकाला जोन में 30 रूम की सुविधा है। इसमें 12 डॉरमेट्री है। ढिकाला के ही गैरल में 6 कक्ष और 8 बेड की डॉरमेट्री है। सुल्तान में 2 कक्ष, मलानी में 2 कक्ष, बिजरानी जोन में 7 रूम की सुविधा है। ढेला पर्यटन जोन में 2 रूम की सुविधा है। झिरना जोन में 4 रूम,पाखरो जोन में 2 रूम हैं। सोना नदी में 2 रूम की सुविधा है। 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे के लिए निःशुल्क होगी। जीप सफारी या घूमने फिरने के लिए यात्रा jimcorbetttravels.com ऑनलाइन बुक करें। recent visitors 125

बीएमएचआरसी का एम्स में नहीं होगा विलय, हाई कोर्ट के निर्देश के बाद केंद्र ने दी जानकारी

भोपाल /जबलपुर  भोपाल गैस त्रासदी के संबंध में दायर याचिकाओं की सुनवाई करते हुए केन्द्र सरकार ने हाईकोर्ट के जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ को बताया कि डिजिटाइजेशन के लिए टेंडर आमंत्रित किये गये थे. लेकिन सिर्फ एक कंपनी द्वारा निविदा प्रस्तुत किये जाने के कारण इसे रद्द कर दिया गया है. सरकार शीघ्र ही दूसरा टेंडर जारी करेगी. युगलपीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई 9 दिसम्बर को निर्धारित की है. गैस पीड़ितों के उपचार व पुनर्वास के संबंध में 20 निर्देश गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने साल 2012 में भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन की ओर से दायर याचिका की सुनवाई करते हुए भोपाल गैस पीड़ितों के उपचार व पुनर्वास के संबंध में 20 निर्देश जारी किए थे. इनका क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए मॉनिटरिंग कमेटी का गठन किया गया. कोर्ट के निर्देश थे कि मॉनिटरिंग कमेटी प्रत्येक 3 माह में अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष पेश करेगी. इसके बाद पेश रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट द्वारा केन्द्र व राज्य सरकार को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे. इसी मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है. बीएमएचआरसी में कितने मेडिकल स्टाफ की नियुक्ति इसी के साथ याचिका के लंबित रहने के दौरान मॉनिटरिंग कमेटी की अनुशंसाओं का परिपालन नहीं किए जाने के खिलाफ भी अवमानना याचिका 2015 में दायर की गई. याचिका पर पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से बताया गया था कि बीएचएमआरसी में डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ के निर्धारित पदों में 70 प्रतिशत से अधिक की नियुक्ति कर दी गयी है. बीएमएचआरसी को एम्स में मर्ज करने का मामला इसी दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से मांग की गई कि बीएचएमआरसी को एम्स में मर्ज नहीं किया जाए. मर्ज की मांग को संसदीय बोर्ड में चर्चा के बाद उसे केन्द्र लोक स्वास्थ्य एव परिवार कल्याण विभाग को भेजा गया. केन्द्र लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने पूर्व में ही मर्ज नहीं किये जाने के संबंध में निर्णय लिया है. युगलपीठ ने बीएचएमआरसी को एम्स में मर्ज नहीं किये जाने के संबंध में लिखित जवाब पेश करने के निर्देश जारी किए हैं. सरकार की तरफ से अधिवक्ता विक्रम सिंह ने पैरवी की. हर तीन माह में रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन सहित अन्य की ओर से दायर याचिका की सुनवाई करते हुए गैस पीड़ितों के उपचार व पुनर्वास के संबंध में 20 दिशा-निर्देश दिए थे। इनका क्रियान्वयन सुनिश्चित करने कमेटी भी गठित की थी। कोर्ट ने कमेटी को हर तीन माह में रिपोर्ट हाई कोर्ट में पेश करने कहा था।  दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने साल 2012 में भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन सहित अन्य की ओर से प्रस्तुत जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए भोपाल गैस पीड़ितों के उपचार व पुनर्वास के संबंध में 20 दिशा निर्देश जारी किए थे। इन बिंदुओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए निगरानी समिति भी गठित की थी। कोर्ट ने निर्देश दिए थे कि निगरानी समिति प्रत्येक तीन माह में अपनी रिपोर्ट हाई कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करेगी। पेश रिपोर्ट के आधार पर हाई कोर्ट द्वारा केंद्र व राज्य सरकार को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। इस मामले के लंबित रहने के दौरान निगरानी समिति की अनुशंसाओं का परिपालन न किए जाने के विरुद्ध अवमानना याचिका 2015 में दायर की गई थी। पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से बताया गया था कि बीएचएमआरसी में डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ के निर्धारित पदों में 70 प्रतिशत से अधिक की नियुक्ति कर दी गई है। एक याचिकाकर्ता की ओर से आवेदन दायर करते हुए मांग की गई थी कि बीएचएमआरसी को एम्स में विलय नहीं किया जाए।   recent visitors 53

केंद्र सरकार का मणिपुर में हिंसा पर बड़ा फैसला, जिरीबाम समेत 6 पुलिस थाना क्षेत्रों में फिर लगा AFSPA

इंफाल केंद्र सरकार ने मणिपुर में हिंसा को लेकर बड़ा कदम उठाया है. हिंसा प्रभावित जिरीबाम समेत छह पुलिस थाना क्षेत्रों में केंद्र सरकार ने सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम (AFSPA) को फिर से लागू कर दिया है. इस अधिनियम के तहत किसी क्षेत्र को अशांत घोषित किया जाता है और सुरक्षा बलों को विशेष सुविधाएं प्रदान की जाती हैं. केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से गुरुवार को अधिसूचना जारी की गई है. इस अधिसूचना में कहा गया है कि जातीय हिंसा के कारण वहां लगातार अस्थिर स्थिति है. केंद्र सरकार की ओर से इंफाल पश्चिम जिले में सेकमाई और लामसांग, इंफाल पूर्व जिले में लामलाई, जिरीबाम जिले में जिरीबाम, कांगपोकपी में लेइमाखोंग और बिष्णुपुर में मोइरांग के पुलिस थाना क्षेत्रों में AFSPA को फिर से लागू किया गया है. गृह मंत्रालय ने मणिपुर के पांच जिलों (इंफाल पश्चिम, इंफाल पूर्व, जिरीबाम, कांगपोकपी और बिष्णुपुर) के छह पुलिस स्टेशनों में सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम, 1958 को तत्काल प्रभाव से 31 मार्च, 2025 तक बढ़ा दिया है. नया आदेश मणिपुर सरकार के फैसले के बाद आया है. राज्य सरकार ने 1 अक्टूबर को पूरे राज्य में AFSPA लागू किया था. उसके अनुसार इन छह सहित 19 पुलिस थाना क्षेत्रों को छोड़कर बाकी सभी शामिल हैं. एक अक्टूबर को मणिपुर सरकार ने जारी किया था आदेश मणिपुर सरकार के 1 अक्टूबर के AFSPA लगाने के आदेश से बाहर रखे गए पुलिस स्टेशन इम्फाल, नाम्बोल, मोइरंग, काकचिंग, लाम्फाल, सिटी, सिंगजामेई, लामलाई, इरिलबंग, सेकमाई, लामसांग, पटसोई, वांगोई, पोरोमपत, हेइंगंग, लेइमाखोंग, थौबल, बिष्णुपुर और जिरीबाम आदि शामिल हैं. मणिपुर के जिरीबाम जिले में एक पुलिस स्टेशन और एक निकटवर्ती सीआरपीएफ शिविर पर छद्म वर्दी पहने और अत्याधुनिक हथियारों से लैस उग्रवादियों द्वारा अंधाधुंध गोलीबारी करने के बाद सोमवार को सुरक्षा बलों के साथ भीषण मुठभेड़ में ग्यारह संदिग्ध उग्रवादी मारे गए थे. एक दिन बाद, उसी जिले से सशस्त्र उग्रवादियों ने महिलाओं और बच्चों सहित छह नागरिकों का अपहरण कर लिया था. इसके बाद सशस्त्र उग्रवादियों ने दो लोगों को जलाकर मार डाला था. मणिपुर हिंसा में 200 से अधिक लोगों की हुई है मौत एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी का कहना है कि जिन लोगों का अपहरण किया गया है, उनमें 13 मैतेई समुदाय से थे, और जून में अपने घरों से विस्थापित हो गए थे और अपनी सुरक्षा के लिए मुठभेड़ स्थल जकुरधोर और बोरोबेक्रा पुलिस स्टेशन में सीआरपीएफ कैंप के आसपास रह रहे थे. बता दें कि मई में पिछले साल मई से इम्फाल घाटी स्थित मैतेईस और आसपास के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले कुकी-जो समूहों के बीच जातीय हिंसा में 200 से अधिक लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं. जातीय रूप से विविधतापूर्ण जिरीबाम, जो इम्फाल घाटी और आसपास की पहाड़ियों में संघर्षों से काफी हद तक अछूता रहा है, इस साल जून में एक खेत में एक किसान का क्षत-विक्षत शव मिलने के बाद इस इलाके में भी हिंसा भड़क उठी है. recent visitors 57

राज्यमंत्री गौर ने सिद्धम पाल को बीजा आदि आवश्यक दस्वातेज सौपकर जापान के लिए रवाना किया

भोपाल पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने रतलाम शहर निवासी सिद्धम पाल को बीजा आदि आवश्यक दस्वातेज सौपकर जापान के यामागुची शहर के लिए रवाना किया। सिद्धम पाल का जापान के यामागुची शहर की एक कम्पनी में चयन हुआ है। सिद्धम पाल ने भारत सरकार और जापान सरकार के बीच रोजगार के लिए हुए समझौते के आधार पर तैयार टेक्निकल इंटर्न ट्रेनिंग प्रोग्राम (टीआईटीपी) में चयनित होकर जापान की यामागुची नौकरी प्राप्त की है। सिद्धम पाल 18 नवम्बर 2024 को नई दिल्ली से यामागुची जापान के लिए रवाना होंगे। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा है कि प्रदेश के पिछड़ा वर्ग के युवाओं को विदेश में रोजगार उपलब्ध कराने की योजना के अंतर्गत रतलाम शहर के सिद्धम पाल को जापान भेजा जा रहा है। प्रदेश के पिछड़ा वर्ग के युवक-युवतियों को रोजगार दिलाने का प्रयास पिछड़ा वर्ग द्वारा जारी रहेगा। संचालक, राज्य स्तरीय रोजगार एवं प्रशिक्षण केन्द्र पिछड़ा वर्ग डॉ. देवेश मिश्रा और अन्य अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित थे।   recent visitors 96

मुख्यमंत्री ने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मनुष्य के रूप में जीते जी जिन्हें भगवान का दर्जा मिला, ऐसे भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती प्रति वर्ष मनाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि अतीत में इतिहास के पन्नों पर स्वर्ण बिहार, झारखंड की धरती से उन्होंने अंग्रेजों का प्रबल प्रतिरोध स्थापित किया, जहां से आदिवासी अंचल में दो स्वतंत्रता आंदोलन की भूमिका बनी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा की जयंती का राज्य स्तरीय कार्यक्रम शहडोल और धार में आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों से स्वतंत्रता आंदोलन में भगवान बिरसा मुंडा के उन पक्षों को भी सामने रखा जायेगा, जिससे स्वतंत्रता आंदोलन को मजबूती मिली।   recent visitors 53

यूके ने कश्मीर में हिंसा और अशांति के इतिहास पर जोर दिया है और कहा है कि बहस से मौजूदा तनाव और बढ़ सकता है

नई दिल्ली ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की डिबेटिंग सोसाइटी ऑक्सफोर्ड यूनियन ने कश्मीर की आजादी पर एक कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की है। यह डिबेट कश्मीर के मौजूदा परिदृश्यों पर आधारित होगी। सोसायटी के मुताबिक पैनलिस्टों में जस्टिस फाउंडेशन और कश्मीर फ्रीडम मूवमेंट का नेतृत्व करने वाले डॉ. मुजम्मिल अय्यूब ठाकुर, जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के डिप्लोमैटिक ब्यूरो के अध्यक्ष प्रोफेसर जफर खान और पूर्व प्रधानमंत्री वी पी सिंह के मीडिया सलाहकार रह चुके प्रेम शंकर झा भी शामिल होंगे। इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट में ऑक्सफोर्ड यूनियन ने बताया, "गुरुवार 14 नवंबर को हम 'यह सदन आजाद कश्मीर में विश्वास करता है' प्रस्ताव पर बहस की मेजबानी करेंगे। कश्मीर का मुद्दा ब्रिटिश शासन की देन है। 1947 से यहां के लोग भुगत रहे हैं। कश्मीर की आजादी के लिए लगातार संघर्ष जारी है। इससे कश्मीरियों के बीच अशांति फैली हुई है। परमाणु हथियारों से लैस भारत और पाकिस्तान इस पर नियंत्रण और भू-राजनीतिक प्रभाव के लिए होड़ करते हैं लेकिन कश्मीरियों को आजादी चाहिए। क्या एक स्वतंत्र कश्मीर इस स्थायी संकट का जवाब हो सकता है?" ऑक्सफोर्ड यूनियन ने लिखा, "प्रस्ताव के लिए सबसे पहले डॉ. मुज़म्मिल अय्यूब ठाकुर बोलेंगे। डॉ. ठाकुर कश्मीरी स्वतंत्रता कार्यकर्ता हैं जो कश्मीर पर भारतीय के तथाकथित नियंत्रण का विरोध करते हैं और जस्टिस फाउंडेशन और कश्मीर की आजादी के आंदोलन का नेतृत्व करते हैं।" वहीं प्रस्ताव के लिए दूसरे वक्ता प्रोफेसर जफर खान होंगे। जफर खान जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के डिप्लोमैटिक ब्यूरो के अध्यक्ष हैं जो जम्मू और कश्मीर के लोगों के अधिकारों की वकालत करने पर केंद्रित एक संगठन है।" पोस्ट में कहा गया है कि "विपक्ष की ओर से प्रेम शंकर झा बोलेंगे जो भारत के प्रधानमंत्री के पूर्व मीडिया सलाहकार रह चुके हैं। खबर सामने आने के बाद ब्रिटिश हिंदू का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह इनसाइट यूके ने इस फैसले की कड़ी निंदा की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर समूह ने लिखा, "हमने ऑक्सफोर्ड यूनियन को एक औपचारिक पत्र भेजा है जिसमें हमने बहस की मेजबानी करने के उनके निर्णय पर गहरी चिंता व्यक्त की है।" समूह ने आगे कहा, “आतंकवाद से कथित संबंध रखने वाले वक्ताओं को आमंत्रित करना चिंताजनक है और इस बहस की मंशा पर गंभीर सवाल उठाता है।" इनसाइट यूके ने कश्मीर में हिंसा और अशांति के इतिहास पर जोर दिया है और कहा है कि बहस से मौजूदा तनाव और बढ़ सकता है। recent visitors 67