इन तीन चीजों से मिलेगी सफलता

जीवन में सफलता पानी है तो जरूरी है कि सही दिशा में प्रयास किया जाए। सक्सेजफुल मैन अक्सर इन 3 चीजों को फॉलो करने के लिए कहते हैं। लाइफ में सक्सेज तो सभी चाहते हैं। लेकिन सफलता उसे ही मिलती है जो मेहनत करता है। हालांकि इसके साथ मेहनत किस दिशा में और कितनी की जा रही है, ये बात भी निर्भर करती है। अगर आप अपने करियर, फैमिली या किसी भी चीज में सफलता चाहते हैं तो इन तीन चीजों को जरूर याद रखें। तभी सक्सेज मिलने में आसानी होगी। जानें क्या हैं वो तीन चीजें, जिसे करने के लिए हर सफल इंसान कहता है। आत्मविश्वास किसी भी काम को करने के लिए आत्मविश्वास का होना सबसे ज्यादा जरूरी है। जब आप खुद पर भरोसा करेंगे कि ये काम आप कर सकते हैं। फिर वो चाहे आसान हो या कठिन पूरा जरूर होता है। स्पष्टता लाइफ में किस इंसान के साथ जिंदगी बितानी है या फिर किस दिशा में करियर बनाना है। आपकी सोच और माइंड बिल्कुल क्लियर होना चाहिए। तभी आप सफल हो सकते हैं। जब आपका माइंड बिल्कुल क्लियर होगा उसमे दुविधा की स्थिति नहीं होगी तभी आप सही दिशा में मेहनत कर पाएंगे और खुद में आत्मविश्वास भी महसूस करेंगे। निरंतरता यानी कंस्सिटेंसी 'करत-करत अभ्यास ते, जड़मत होत सुजान' इस दोहे का अर्थ है कि लगातार अभ्यास करने से मूर्ख भी बुद्धिमान हो जाता है। जब आप किसी काम को लगातार करते हैं, बिना रुके करते हैं। तो एक ना एक दिन सफलता आपको जरूर मिलती है। इसलिए अपने काम में निरंतरता बनाकर रखें। बिना रुके सही दिशा में और पूरे आत्मविश्वास के साथ किया गया काम आपको सफलता जरूर दिलाता है। recent visitors 81

हिन्दू पक्ष की याचिका पर जामा मस्जिद को लेकर संभल ज़िला कोर्ट का सर्वे का आदेश

संभल. एक स्थानीय अदालत ने शहर में स्थित शाही जामा मस्जिद के सर्वे का आदेश दिया है. वकील विष्णु शंकर जैन की याचिका पर कोर्ट ने सर्वेक्षण के लिए निर्देश दिया. याचिकाकर्ता ने खुद ‘एक्स’ पर मंगलवार को इस बात की जानकारी दी. इस कथित मस्जिद को हरि हर मंदिर के नाम से भी जाना जाता था. विष्णु शंकर जैन ने लिखा, “आज सिविल कोर्ट संभल ने मेरी याचिका पर संभल में कथित जामी मस्जिद, जिसे हरि हर मंदिर के नाम से जाना जाता था, में एडवोकेट कमिश्नर द्वारा सर्वेक्षण का निर्देश दिया है. 1529 में बाबर ने इस स्थान को आंशिक रूप से ध्वस्त कर दिया. ऐसा माना जाता है कि कल्कि अवतार संभल में होगा.” कौन हैं विष्णु शंकर जैन विष्णु शंकर जैन वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर जैन के पुत्र हैं. यह पिता-पुत्र की जोड़ी श्रीकृष्ण जन्मभूमि, ज्ञानवापी शृंगार गौरी समेत 110 मामलों की पैरवी कर रही है. विष्णु शंकर जैन अपने पिता की तरह ही वकालत कर रहे हैं. आपको बता दें कि विष्णु शंकर जैन ने 2010 में बालाजी लॉ कॉलेज से डिग्री हासिल की थी. इसके साथ ही इन्होंने अपने वकालत करियर की शुरूआत विश्व प्रसिद्ध श्रीराम जन्मभूमि केस से की थी. इस केस के अलावा पिता-पुत्र की इस जोड़ी ने 2021 में ज्ञानवापी मस्जिद, श्री कृष्ण जन्मभूमि, ताजमहल के पूर्व शिवमंदिर होने का दावा, वर्शिप एक्ट और वक्फ एक्ट 1995 को भी चुनौती देते हुए कोर्ट में वाद दायर किए हुए हैं. जामा मस्जिद का क्या है इतिहास संभल शहर के मध्य में स्थित जामा मस्जिद मुस्लिम समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल है. इसका निर्माण मुगल काल के दौरान हुआ था. हालांकि, इसके निर्माण के ठीक समय और अन्य विवरणों के बारे में कोई विशेष जानकारी उपलब्ध नहीं है. लेकिन यह माना जाता है कि इसका निर्माण पूरे उत्तर भारत पर मुगल साम्राज्य के शासन के दौरान 16वीं शताब्दी के आस-पास हुआ होगा. recent visitors 86

गोब्लू विश्व बाल दिवस की थीम है, जो बाल अधिकारों के लिए खड़ा है

भोपाल बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने वाली अंतर्राष्ट्रीय संस्था यूनिसेफ ने बाल अधिकारों के मुद्दे पर जागरूकता बढ़ाने के लिए अपनी “गो ब्ल्यू” थीम के तहत ऐतिहासिक इमारतों को नीले रंग में रंगने के लिए मध्यप्रदेश पर्यटन (एमपीटी) विभाग और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के साथ साझेदारी की है. दरअसल, 20 नवंबर को विश्व बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है. यूनिसेफ, नागरिक संस्था संगठन इस दिन और सप्ताह को बाल अधिकार सप्ताह के रूप में मनाते हैं. गो ब्ल्यू इस साल के विश्व बाल दिवस की थीम में से एक है, जिसक अर्थ बाल अधिकारों के लिए खड़ा होना है' भोपाल में जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी का पिरामिड नीला किया गया यूनिसेफ मध्यप्रदेश के संचार विशेषज्ञ अनिल गुलाटी ने बताया कि, शुरुआत में, 17 नवंबर को भोपाल में जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी का पिरामिड नीला किया गया, जबकि सोमवार की रात को मप्र के धार जिले के मांडू में जहाज महल या शिप पैलेस को नीले रंग से रौशन किया गया. साझेदारी के लिए एएसआई और एमपीटी के प्रति आभार भी व्यक्त किया उन्होंने बाल अधिकारों के वास्ते साझेदारी के लिए एएसआई और एमपीटी के प्रति आभार भी व्यक्त किया. इसके अलावा यूनिसेफ राज्य सरकार के साथ साझेदारी में बच्चों द्वारा ली गई थीम पर चित्र प्रदर्शित करके जलवायु परिवर्तन पर बच्चों की अभिव्यक्ति को एक मंच प्रदान करने का काम भी कर रहा है. यूनिसेफ के एक अधिकारी ने बताया कि कहा कि इस दिन को मनाने के लिए राज्य पर्यटन विभाग की सभी संपत्तियां और एएसआई की विरासत संपत्तियों, जैसे धार जिले के मांडू में जहाज महल और अन्य संपत्तियां नीली रोशनी से रौशन किया गया। हर बच्चा सुरक्षित और समर्थित हो और अपने दिन में नीले रंग को शामिल करे विश्व बाल दिवस के लिए यूनिसेफ का “गो ब्ल्यू” अभियान लोगों को कुछ नीला पहनकर, ऑनलाइन अपनी प्रोफ़ाइल तस्वीर बदलकर, एक ऐसी दुनिया की मांग करने के लिए याचिका पर हस्ताक्षर करके बच्चों के अधिकारों के लिए समर्थन दिखाने के लिए प्रोत्साहित करता है, जहां हर बच्चा सुरक्षित और समर्थित हो और अपने दिन में नीले रंग को शामिल करे. बाल दिवस पर भारत में राष्ट्रपति भवन भी नीले रंग की रोशनी से जगमगाता है उल्लेखनीय है विश्व बाल दिवस पर, दुनिया भर के स्कूल और ऐतिहासिक इमारतें नीले रंग की रोशनी से जगमगाती हैं. यूनिसेफ की वेबसाइट के अनुसार, अतीत में नीले रंग से रोशन की गई कुछ ऐतिहासिक इमारतों में एथेंस (ग्रीस) का एक्रोपोलिस, एम्पायर स्टेट बिल्डिंग (न्यूयॉर्क), अल नूर मस्जिद (न्यूजीलैंड), बेल्जियम में यूरोपीय संसद, चीन में शंघाई टॉवर, इथियोपिया में हाउस ऑफ पीपुल्स रिप्रेजेंटेटिव्स, भारत में राष्ट्रपति भवन, जॉर्डन में पेट्रा और मैक्सिको में फ्रिदा काहलो हाउस शामिल हैं. recent visitors 72

चार दिनों में सवा तीन लाख से अधिक विजिटर्स ने किया अवलोकन

भोपाल विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार थीम पर आयोजित राष्ट्रीय स्तर के विज्ञान मेले 2024 में एम.पी. पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) के स्टॉल को द्वितीय पुरस्कार प्राप्त हुआ है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने इस उपलब्धि पर ट्रांसको के अधिकारी-कर्मचारियों को बधाई दी है। महाकौशल विज्ञान परिषद द्वारा वेटरनरी कॉलेज जबलपुर में पहली बार आयोजित महाकौशल विज्ञान मेले में केन्द्र, राज्य, सार्वजनिक क्षेत्र के विभिन्न उपक्रमों सहित शैक्षणिक संस्थाओं के 111 स्टॉल प्रदर्शित किये गये थे। इसमें से एम.पी. ट्रांसको के स्टॉल को द्वितीय स्थान के लिये चयनित किया गया। चार दिवसीय इस विज्ञान मेले में एम.पी. ट्रांसको के स्टॉल में स्कूल, कॉलेज के विद्यार्थियों से लेकर आम नागरिकों ने काफी दिलचस्पी दिखाई। कुल 3 लाख 25 हजार 949 आगंतुको ने एम.पी. ट्रांसको के स्टॉल में विजिट कर जानकारी हॉसिल की। एम.पी. ट्रांसको को यह पुरूस्कार मध्यप्रदेश के ट्रांसमिशन नेटवर्क में विभिन्न नवाचार करने, ट्रांसमिशन एलीमेंटस एच.एम.आई तकनीक से नियंत्रित और ऊर्जीकृत करने के साथ ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेन्स में अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग करने के विभिन्न मॉडलो के प्रदर्शन और सरल भाषा में आगंतुको को व्याख्या करने की उत्कृष्ट प्रस्तुति के आधार पर दिया गया है। यह चयन देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों, विद्वान शिक्षाविदों और नामी अभियंताओं की कमेटी द्वारा किया गया। एम.पी. पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी के प्रबंध संचालक इंजी. सुनील तिवारी ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुये सभी कार्मिकों को बधाई दी है।   recent visitors 73

ट्रैफिक जाम सहित अन्य कारणों को समझने भोपाल में बनाई जाएगी समिति

भोपाल  शहर में यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए एक बार फिर से जिला प्रशासन ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। इसको लेकर चार विभाग जिला प्रशासन, नगर निगम, यातायात पुलिस और परिवहन के अधिकारियों की समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति शहर के यातायात पर सर्वे कर रिपोर्ट तैयार करेगी और उसी के आधार पर आगे व्यवस्था को दुरुस्त किया जाएगा। यह निर्देश कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने सोमवार को यातायात सुरक्षा समिति की बैठक के दौरान अधिकारियों को दिए हैं।उन्होंने कहा कि वह जल्द ही अगली बैठक लेंगे जिसमें समिति को प्रजेंटेशन देना होगा।बता दें नवदुनिया द्वारा लगातार शहर में अवैध पार्किंग और अव्यवस्थित यातायात को लेकर खबरें प्रकाशित की जार ही है। एक वर्ष पहले हुई थी बैठक, सड़क पर उतरे थे कलेक्टर शहर के यातायात को सुधारने को लेकर एक वर्ष पहले तत्कालीन कलेक्टर आशीष सिंह ने अधिकारियों के साथ बैठक ली थी। साथ ही वह स्वयं पिछले साल 15 जून, 10 जुलाई और 21 नवंबर को सडक़ों पर उतरे थे। इस दौरान कलेक्टर ने विभिन्न चौराहों की रोटरियों, लेफ्ट टर्न और कई ब्लाइंड स्पाट चिह्नित कर नगर निगम और पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को सुधारने के निर्देश दिए थे, लेकिन चुनावी वर्ष होने के कारण यह काम पूरा नहीं हो सका है। अब कलेक्टर ने एक बार फिर से प्रयास शुरू किए हैं। चार जोन में विभाजित किया जाएगा शहर यातायात व्यवस्था का अध्ययन करने के लिए शहर को चार जोन में विभाजित किया जाएगा। इसमें जाम का समय, जाम का कारण और जाम के दौरान दूसरे रूट पर डायवर्सन को लेकर भी अध्ययन होगा। जाम का समय : यातायात पुलिस शहर के चार जोन को कनेक्ट करने वाली प्रमुख सडक़ों पर होने वाले जाम के समय को चिह्नित करेगी। जाम के कारण : परिवहन और नगर निगम बड़ी रोटरियाें, भारी यातायात सडक़ पर बने खतरनाक टर्न, पुराने निर्माण और अवरोधों का भी अध्ययन होगा। इसके अलावा मुख्य मार्गों पर दौडऩे वाले ई रिक्शा, आटो चालकों की जानकारी जुटाएगी। अतिक्रमण : विभिन्न मार्गों पर खड़े होने वाले ठेले और अन्य अतिक्रमण जिनके कारण जाम लगता है चिह्नित किए जाएंगे और इन्हें शिफ्ट करने की योजना बनाई जाएगी। इन मार्गों पर जाम व दुर्घटनाएं अधिक करोंद चौराहा, नादरा बस स्टैंड, भारत टाकीज चौराहा, बागसेवनिया थाना चौराहा, राजीव गांधी चौराहा, 10 नंबर मार्केट, व्यापमं चौराहा, बंसल अस्पताल के सामने वाली सडक़, अन्ना नगर, प्रभात चौराहा,रंग महल से टीटी नगर थाना जाने वाली सड़क सहित अन्य क्षेत्रों में यातायात जाम और दुर्घटनाएं होती रहती हैं। इनका कहना है शहर के यातायात को व्यवस्थित करने के लिए विभागों के साथ मिलकर समस्याओं को चिन्हित किया जाएगा। अगली सुरक्षा समिति की बैठक में ट्रैफिक की समस्या के समाधान पर चर्चा होगी। – संजय सिंह, डीसीपी यातायात शहर में विभिन्न स्थानों पर निर्माण कार्य भी चल रहे हैं। जहां यातायात व्यवस्था बिगड़ती है, जबकि अन्य स्थानों पर अन्य कारणों से जाम के हालात बनते हैं। इन सभी कारणों का पता लगाने समिति बनाई जाएगी। जिसकी रिपोर्ट के आधार पर यातायात सुधार कार्य किए जाएंगे। – कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर recent visitors 84

मध्य प्रदेश में हथकरघा बुनाई और रंगाई कौशल की सदियों पुरानी परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही

भोपाल मध्यप्रदेश की समृद्ध हथकरघा कला प्रदेश की विविध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है, जो सदियों से चली आ रही परंपरा को समेटे हुए है। चमचमाते रंगों के साथ आंखों में बस जाने वाली डिजायन और खूबसूरत बुनावट वाले इन कपड़ों की पहचान दुनियाभर में है। टेक्सटाइल पर्यटन का विशेष महत्व है क्योंकि यह विभिन्न क्षेत्रों की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक विरासत को जीवंत रखता है। यह अनुभव आधारित पर्यटन का एक अद्वितीय पहलु है। मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा परंपरा में निहित और नवाचार से प्रेरित बुनकरों एवं शिल्पकारों की कला को संरक्षित करते हुए विभिन्न स्तर पर पहल की जा रही है। मध्य प्रदेश में हथकरघा बुनाई और रंगाई कौशल की सदियों पुरानी परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। चंदेरी साड़ियां चंदेरी साड़ी मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले के चंदेरी शहर से बुनकरों द्वारा निर्मित की जाती हैं। यह अपने कम वजन एवं स्पष्ट बनावट के लिए जानी जाती है, जो इसे गर्म मौसम के लिए आदर्श बनाती है। रेशम, कपास और ज़री (धातु के धागे) का उपयोग करके साड़ी को हाथ से बुना जाता है। अपनी चमक, स्पष्ट बनावट और बेहतरीन डिजाइन के लिए प्रसिद्ध यह साड़ियां पारंपरिक बुनाई तकनीकों और आधुनिक डिजाइनों का अनूठा संयोजन भी है। शादी हो, उत्सव हो या फिर कोई कारपोरेट आयोजन, चंदेरी साड़ी हर महिला की पसंद रहती है। म.प्र. टूरिज्म विभाग द्वारा बुनकरों को बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वस्त्र मंत्रालय की मदद से चंदेरी के पास प्राणपुर गांव में देश का पहला ‘क्रॉफ्ट हैंडलूम टूरिज्म विलेज’ भी विकसित किया है। महेश्वरी साड़ियां नर्मदा नदी के तट पर स्थित, महेश्वर हथकरघा बुनाई का सदियों पुराना केंद्र है, जो अपनी खूबसूरत महेश्वरी साड़ियों के लिए प्रसिद्ध है। इन साड़ियों की विशेषता जीवंत रंगों, सोने की ज़री और अद्वितीय पिटलूम बुनाई तकनीक है। परंपरागत रूप से कपास से बनी साड़ियां एवं कुर्ते सादे, धारीदार और यहां तक ​​कि चेकर पैटर्न सहित विभिन्न प्रकार के डिज़ाइन में उपलब्ध होते हैं। महेश्वर भ्रमण के दौरान आप यहां महेश्वरी साड़ियां बनती हुई देख सकते हैं। महेश्वर में सीधे बुनकरों से ही साड़ियां खरीद भी सकते हैं। बाग प्रिंट ऐतिहासिक शहर मांडू के पास बाग नाम का छोटा सा कस्बा बाग प्रिंट की 1000 साल पुरानी परंपरा को समेटे हुए है, जो प्राकृतिक डाई ब्लॉक प्रिंटिंग का एक अनूठा रूप है। यह बाग प्रिंट सूती, रेशमी, टसर, कॉटन-सिल्क, जूट और क्रेप के साथ दूसरे अन्य कपड़ों पर किया जा सकता है। बाग प्रिंट के कपड़ों के साड़ी, सूट, चादर के साथ-साथ नए पैटर्न के डिजाइर और मार्डन ड्रेसेस भी बनाई जाती हैं। आज बाग प्रिंट को दुनियाभर में पहचाना जाना है। भैरवगढ़ बटिक बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन के निकट भैरवगढ़ बटिक प्रिंट का केन्द्र है, जिसको जीआई टैग मिला है। सदियों पुरानी मोम प्रतिरोधी रंगाई और छपाई शिल्प मिस्र, जापान और भारत में 2000 वर्षों से अधिक समय से प्रचलित है। आकर्षक प्रिंट्स बढ़ा देते हैं शोभा मध्यप्रदेश में प्रिंट लोक कला की एक समृद्ध परंपरा है। विभिन्न क्षेत्रों के चित्रों में अनूठी विशेषताएं हैं। नीमच और उमेदपुरा के तारापुर गांव में निर्मित नंदना प्रिंट एक रंगीन ब्लॉक प्रिंट है। यह आरामदायक पोशाख भील और बाग भिलाला जनजातियों की पारंपरिक पोशाख है। मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा प्रदेश के टेक्साइल पर्यटन की क्षमता को दुनिया के सामने प्रचारित करने के लिये विभिन्न स्तरों पर प्रयास किया जा रहा है। जब भी आप प्रदेश के रमणीय पर्यटन स्थलों पर भ्रमण पर आए, तो अपने साथ सोवेनियर के रूप में यह टेक्सटाइल उत्पाद जरूर साथ ले जाएं।   recent visitors 167

अब रतलाम-चंदेरिया, नागदा-भोपाल सेक्शन में कवच लगने से नीमच, मंदसौर, उज्जैन, भोपाल तक ट्रेनों की स्पीड बढ़ जाएगी

रतलाम  ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने के साथ ही सुरक्षा को लेकर रेलवे संसाधन मजबूत कर रहा है। दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग के साथ ही रतलाम रेल मंडल में रतलाम से चंदेरिया और नागदा से भोपाल तक का सेक्शन भी कवच युक्त होगा। इसके लिए रेल मंडल से टेंडर जारी हो गए हैं। काम पूरा करने के लिए दो साल की समय सीमा रखी गई है। इससे नीमच, मंदसौर के साथ ही उज्जैन, भोपाल तक ट्रेनों की स्पीड बढ़ाई जा सकेगी। रतलाम-चंदेरिया और नागदा-भोपाल सेक्शन पर कवच संस्करण 4.0 का प्रावधान किया जाएगा। इसमें 120.72 करोड़ रुपये की लागत आएगी। रतलाम रेल मंडल के 427.83 किलोमीटर के पूर्ण ब्लाक सेक्शन में यह प्रणाली लगाई जाएगी। चार दिसंबर तक टेंडर भरे जा सकेंगे। मुंबई-दिल्ली रेल मार्ग के 789 किमी में से 503 में ट्रायल पूरा     इधर मुंबई-दिल्ली रेल मार्ग पर ट्रेनों की स्पीड 160 किमी प्रति घंटा करने के लिए मिशन रफ्तार में ब्रिजों के मरम्मत, ओएचई का रख-रखाव, सिगनलिंग सिस्टम में सुधार, कर्व का री-अलाइनमेंट, एचबीम स्लीपर लगाए गए हैं।     वर्तमान में वडोदरा-अहमदाबाद खंड सहित मुंबई सेंट्रल-नागदा खंड पर 90 लोको के साथ 789 किलोमीटर पर कवच का काम चल रहा है। इसमें से 503 किलोमीटर तक लोको परीक्षण हो चुका है।     90 में से 73 लोकोमोटिव पहले ही कवच प्रणाली से लैस किया जा चुका है। वडोदरा-रतलाम-नागदा सेक्शन के 303 किलोमीटर में 173 पर लोको ट्रायल पूरा हो चुका है। मार्च 2025 तक काम पूरा होने की संभावना है। क्या है कवच स्वचालित ट्रेन सुरक्षा तकनीक 'कवच' ट्रेन सुरक्षा और परिचालन दक्षता को बढ़ाती है। इसमें इंजन पर लगे सेंसर, जीपीएस सिस्टम से एक ही ट्रैक पर दो ट्रेनों के आमने-सामने आने पर स्वचालित ब्रेक लग जाते हैं। आरडीएसओ द्वारा विकसित कवच को ट्रेन टकरावों को रोकने, खतरे में सिगनल पासिंग से बचने में लोको पायलटों को सहायता मिलती है। इससे 200 किमी प्रति घंटे तक की गति को समायोजित किया जा सकता है। ट्रेनें तय गति सीमा के भीतर चले और इसकी रियल टाइम निगरानी भी होगी। यह काम भी किए ट्रैक पर पशु आदि न आए, इसके लिए नागदा-गोधरा खंड में लगभग 56 करोड़ की लागत से रेलवे ट्रैक के दोनों ओर कुल 160 किलोमीटर बाउंड्रीवाल का निर्माण होना है। करीब 100 किमी की बाउंड्रीवाल बनाई जा चुकी है। recent visitors 121