Sunday, July 5, 2026 12:53 pm

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वामी बाबा रामदेव का माना आभार

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वामी बाबा रामदेव का उनके आत्मीय आशीर्वचन के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वामी बाबा रामदेव का योग, आयुर्वेद एवं सनातन संस्कृति के प्रचार के माध्यम से जन-सेवा का प्रण हमें निरंतर प्रदेश में अपनी संस्कृति से जुड़कर चलने की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आयुर्वेद और योग के जन-जन की जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बनाने के भागीरथ प्रयास से विश्व को निरोगी बनाने के प्रयासों को अप्रतिम ऊर्जा दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आज उज्जैन में "जनकल्याण पर्व" के शुभारंभ अवसर पर अपार जन समूह के साथ योग में सहभागिता की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार योग को बढ़ावा देने की दिशा में निरंतर प्रयास कर रही है।   recent visitors 144

मुख्यमंत्री यादव आज गोल जोड़, कोलार रोड भोपाल में प्रदेश के 8वें टाइगर रिजर्व रातापानी टाइगर रिजर्व का लोकार्पण करेंगे

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में 13 दिसम्बर को गोल जोड़, कोलार रोड भोपाल में प्रदेश के 8वें टाइगर रिजर्व रातापानी टाइगर रिजर्व का लोकार्पण करेंगे। इसमें विशिष्ट अतिथि राज्य वन पर्यावरण मंत्री दिलीप अहिरवार होंगे। लोकार्पण अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव और अभिनेता, लेखक, निदेशक रणदीप हूड्डा रातापानी टाइगर रिजर्व की जागरूकता के लिये "विरासत से विकास की अनूठी दौड़" बाईक रैली को हरी झण्डी दिखाकर रवाना करेंगे। यह रैली गोल जोड़ चौराहे से एकांत पार्क तक निकाली जाएगी। रातापानी टाईगर रिजर्व का लोकार्पण 13 दिसम्बर 2024 को सुबह 10:30 बजे होगा। कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव वन अशोक बर्णवाल, मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव, वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी और आमजन भी उपस्थित रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल और मार्गदर्शन पर 2 दिसम्बर, 2024 को रातापानी को प्रदेश का 8वाँ टाइगर रिजर्व घोषित कर दिया गया है। राज्य शासन द्वारा इसकी अधिसूचना जारी कर दी गयी है। रातापानी टाइगर रिजर्व के कोर एरिया का रकबा 763.812 वर्ग किलोमीटर तथा बफर एरिया का रकबा 507.653 वर्ग किलोमीटर है। इस प्रकार टाइगर रिजर्व का कुल रकबा 1271.465 वर्ग किलोमीटर होगा। रातापानी टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र की सीमा के अंदर स्थित राजस्व ग्राम झिरी बहेड़ा, जावरा मलखार, देलावाड़ी, सुरई ढाबा, पांझिर, कैरी चौका, दांतखो, साजौली एवं जैतपुर का रकबा 26.947 वर्ग किलोमीटर राजस्व भूमि इन्क्लेव के रूप में बफर क्षेत्र में शामिल है। टाइगर रिजर्व में भौगोलिक रूप से स्थित, उक्त 9 ग्राम अभयारण्य की अधिसूचना में कोर क्षेत्र में शामिल नहीं हैं। रातापानी टाइगर रिजर्व बनने से टाइगर रिजर्व का सम्पूर्ण कोर क्षेत्र रातापानी टाइगर अभयारण्य की सीमा के भीतर है। इससे ग्रामीणों के वर्तमान अधिकार में कोई परिवर्तन नहीं होगा। इससे स्थानीय ग्रामीणों को पर्यटन से नये रोजगार सृजित होंगे, जिससे आर्थिक लाभ होगा। टाइगर रिजर्व गठित होने से भारत सरकार के राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण से बजट प्राप्त होने से वन्य-प्राणियों का और बेहतर ढंग से प्रबंधन किया जा सकेगा। इसके साथ ही स्थानीय ग्रामीणों को पर्यटन बढ़ने से लाभ प्राप्त होगा। टाइगर रिजर्व बनने से रातापानी को अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिलेगी तथा भोपाल की पहचान “टाइगर राजधानी’’ के रूप में होगी।   recent visitors 178

15 वर्षों में प्राइवेट कर्मचारियों की सैलरी में वृद्धि का अनुपात प्रॉफिट की तुलना में बहुत कम

नई दिल्ली हाल ही में यूएस बिलेनियर अंबिशन्स की एक रिपोर्ट आई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक देश में अरबपतियों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। वहीं कैंटर की एक रिपोर्ट के मुताबिक मिडिल क्लास देश का मध्यम वर्ग सिकुड़ता जा रहा है। उसकी चीजों की खरीदने की क्षमता कम हुई है। इसका सबसे बड़ा कारण मिडिल क्लास की सैलरी में वृद्धि दर धीमा होना है। अब ऐसा ही कुछ सरकार ने भी कह दिया है। सरकार ने कुछ ऐसे आंकड़े दिए हैं जो बताते हैं कि 15 वर्षों में चीजें कितनी बदल गई हैं। इन 15 वर्षों में प्राइवेट कंपनियों का मुनाफा जहां अब तक के उच्चतम स्तर पर है तो वहीं कर्मचारियों की सैलरी उस अनुपात में नहीं बढ़ी है। इस बारे में मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंथा नागेश्वरन ने प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों को चेतावनी भी दी है।   गिरती जीडीपी ने चिंता की पैदा प्राइवेट कंपनियों के बढ़ते प्रॉफिट और कर्मचारियों के सैलरी में धीमी वृद्धि को लेकर इंडियन एक्सप्रेस ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक इस साल जुलाई-सितंबर में जीडीपी में 5.4 फीसदी की तेज गिरावट ने नीति निर्माताओं के बीच चिंता पैदा कर दी है। यह तब है कि पिछले चार वर्षों में प्राइवेट कंपनियों का मुनाफा चार गुना बढ़ गया है। वहीं सैलरी में उस अनुपात में वृद्धि नहीं हुई है। इस सेक्टर में तैयार हुई रिपोर्ट उद्योग चैंबर फिक्की और क्वेस कॉर्प लिमिटेड ने सरकार के लिए रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट में छह सेक्टर में कर्मचारियों की 4 साल की सैलरी के बारे में बताया गया है। ये 6 सेक्टर में SFSI (बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस सेक्टर), EMPI (इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग, प्रोसेस और इंफ्रास्ट्रक्चर), FMCD/FMCG (फास्ट मूविंग कंज्यूमर ड्यूरेबल्स/फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स), IT (इंफॉर्मेशन टेक्नॉलजी), लॉजिस्टिक्स और रिटेल शामिल हैं। कितनी बढ़ी सैलरी? आंकड़ों के मुताबिक इन 6 सेक्टर में कर्मचारियों की 4 साल में सालाना औसतन सैलरी अधिकतम 5.4% बढ़ी है। इतनी बढ़ोतरी FMCD/FMCG सेक्टर में हुई है। जानें, कितनी बढ़ी 4 साल में औसत सैलरी: SFSI: साल 2019 में औसत सैलरी 15,184 रुपये थी। साल 2023 में यह 17,475 रुपये हो गई। इन 4 वर्षों में इसमें 2.8% की तेजी आई। EMPI: इस सेक्टर में साल 2019 में औसत सैलरी 19,659 रुपये थी। साल 2023 में यह 20,509 रुपये हो गई। इन 4 वर्षों में इसमें 0.8% की तेजी आई। FMCD/FMCG: साल 2019 में इस सेक्टर में औसत सैलरी 14,608 रुपये थी। साल 2023 में यह 5.8% बढ़कर 19,023 रुपये हो गई। IT: इस सेक्टर में 4 साल में सैलरी में 4 फीसदी की तेजी आई है। साल 2019 में इस सेक्टर में औसत सैलरी 40,333 रुपये थी। साल 2023 में यह 49,076 रुपये हो गई। Logistics: इस सेक्टर में भी 4 साल में सैलरी में बहुत ज्यादा तेजी नहीं आई है। साल 2019 में औसत सैलरी 15,844 रुपये थी। साल 2023 में यह 4.2% बढ़कर 19,534 रुपये हो गई। कितनी बढ़ी कंपनियों की कमाई? नागेश्वरन ने कहा कि पिछले 15 वर्षों में निजी कंपनियों की कमाई में भारी वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि मार्च 2024 में कॉर्पोरेट कंपनियों का प्रॉफिट पिछले 15 साल में अपने उच्चतम स्तर पर था। नागेश्वरन के मुताबिक पिछले 4 वर्षों में प्राइवेट कंपनियों का प्रॉफिट चार गुना बढ़ा है। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा चिंता अनौपचारिक क्षेत्र में है जहां कर्मचारियों के सैलरी में मामूली वृद्धि हुई है।   recent visitors 68

विरासत के साथ विकसित मध्यप्रदेश निर्माण के संकल्प का एक वर्ष

डॉ. मोहन यादव भोपाल देश का ह्दय प्रांत मध्यप्रदेश गौरवशाली इतिहास और विश्वविख्यात सांस्कृतिक परंपराओं के लिये प्रसिद्ध है। सृष्टि के आरंभ से लेकर अब तक मानव सभ्यता के कई चिन्ह मध्यप्रदेश की धरती पर हैं। यहां पर्याप्त भू-संपदा, वन-संपदा, जल-संपदा, और खनिज-संपदा है। हम विगत एक वर्ष में विकसित मध्यप्रदेश निर्माण के साथ प्रदेश की विरासत को सहेजने के संकल्प को लेकर आगे बढ़े हैं। यह हमारा सौभाग्य है कि डबल इंजन की सरकार का लाभ मध्यप्रदेश और प्रदेशवासियों को मिल रहा है। इस विशेष संयोग में प्रदेश ने नवाचारों के साथ विकास के कई कीर्तिमान स्थापित किये हैं। इन दिनों प्रदेश में जनकल्याण पर्व मनाया जा रहा है। यह प्रदेश की समृद्धि का उत्सव है। इसमें भविष्य की कई संभावनाएं आकार लेंगी। शासन-प्रशासन और प्रदेशवासी सभी मिलकर विकास की गंगा बहाएंगे। आपकी सरकार, आपके द्वार होगी और जनता के हित जनता तक पहुंचेंगे। इसमें नई सौगातें भी शामिल होंगी। मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के नदी जोड़ो के स्वप्न को मध्यप्रदेश में धरातल पर उतारा जा रहा है। 17 दिसंबर को पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना तथा 25 दिसंबर को केन-बेतवा लिंक परियोजना का शिलान्यास प्रधानमंत्री मोदी द्वारा किया जायेगा। यह आनंद का विषय है कि मध्यप्रदेश देश में पहला ऐसा राज्य है जहां 2 नदी जोड़ो परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। इससे जलस्रोत परस्पर जुड़ेंगे तो धरती का जल स्तर सुधरेगा, हमारे गांव और क्षेत्रों को पानी सुलभ होगा तथा अन्नदाता को सिंचाई के लिये पर्याप्त पानी मिलेगा। प्रदेश में जिस तरह कृषि, उद्योग, पर्यटन और आध्यात्मिक पर्यटन के लिये संभावनाएं विकसित हो रही हैं। इसमें औद्योगिक क्रांति, हरित क्रांति और पर्यटन क्रांति की त्रिवेणी से गरीबी पूर्णतः समाप्त हो जायेगी। पिछले दिनों रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित करके मध्यप्रदेश के गांव-गांव को औद्योगीकरण और आधुनिक उत्पाद से जोड़ने का प्रयत्न किया गया है। भविष्य में जिला स्तर पर भी इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित होंगी। हैदराबाद, कोयंबटूर तथा मुंबई में रोड-शो और यूके-जर्मनी के उद्योगपतियों को निवेश के लिये प्रदेश में आमंत्रित करना उद्योग विस्तार का उपक्रम है। क्षेत्रीयता से लेकर ग्लोबल स्तर तक उद्योग के लिये किया गया यह पहला नवाचार है। प्रधानमंत्री जी ने विकसित भारत निर्माण के लिये ज्ञान (GYAN) गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी के सम्मान की बात कही है। हमने इन्हीं 4 आधार स्तंभों पर केंद्रित समग्र विकास का रोडमैप तैयार किया है। प्रदेश सरकार गरीब कल्याण, युवा शक्ति, किसान-कल्याण और नारी शक्ति मिशन लागू करने जा रही है। हमारा लक्ष्य है अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति का कल्याण हो, उन्हें बेहतर भविष्य निर्माण का अवसर मिले। प्रदेश में हर गरीब की पढ़ाई, लिखाई, दवाई, नौकरी और रहने-खाने से लेकर जीवन की हर जरूरत को सरकार पूरा कर रही है। अब गरीब-कल्याण मिशन में होने वाली गतिविधियों और कार्यों से हर गरीब के जीवन-स्तर में सुधार आयेगा, उनकी समृद्धि से प्रदेश के विकास को गति मिलेगी। यह गरीबों के प्रति हमारी संवेदनशीलता ही है कि हुकुमचंद मिल के 30 साल पुराने विवाद से लेकर श्रमिकों की मिल से जुड़ी हर समस्या का हल निकाला और उन्हें उनका अधिकार दिलाया है, वहीं गंभीर बीमारी के गरीब मरीजों के लिये एयर एंबुलेंस सेवा भी शुरू की है। राष्ट्र को समृद्ध बनाने की शक्ति युवाओं में है। आवश्यक है कि युवा कर्मशील हो, विचारशील हो और अपनी परंपराओं से जुड़ा हुआ हो। इसी अनुरूप युवाओं को शिक्षण और प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में तैयार राष्ट्रीय शिक्षा नीति सबसे पहले मध्यप्रदेश में लागू हुई। यहां स्किल्ड युवा तैयार हो रहे हैं। प्रदेश के सभी जिलों में पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस से उत्कृष्ट शिक्षा मिलेगी, भारतीय ज्ञान परंपरा और युगानुकूल शिक्षा के समावेश से युवाओं को अपनी समृद्ध विरासत का ज्ञान होगा और बेहतर भविष्य निर्माण के द्वार खुलेंगे। हर विकासखंड में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के निर्माण से गांव-गांव से खेल प्रतिभाएं उभरकर आएंगी। युवा शक्ति मिशन में प्रदेश के युवाओं की शिक्षा, आधुनिक तकनीकी में योग्यता और कौशल निर्माण के साथ सर्वांगीण विकास की लक्ष्य प्राप्ति शामिल है। प्रदेश में स्किल्ड युवा अपना स्व-रोज़गार स्थापित कर रहे हैं। वहीं शासकीय सेवाओं में लगभग ढाई लाख युवाओं की भर्ती का अभियान भी शुरू हो गया है। मध्यप्रदेश कृषि प्रधान प्रांत है। किसान कल्याण मिशन में कृषि की उपज बढ़ाने की दिशा में ठोस प्रयास किये जायेंगे। अगले 5 वर्ष में सिंचाई का रकबा 50 लाख हेक्टेयर से 1 करोड़ हेक्टेयर किया जायेगा। अन्नदाता को शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण देने के साथ खाद, बीज से लेकर उपज की बिक्री तक की व्यवस्था की गई है। किसानों के खेत में सोलर पंप लगाए जाएंगे, जिससे वे अपने उपयोग के लिये अपनी बिजली स्वयं बनायेंगे। हम प्रयासरत हैं कि जल की एक-एक बूंद का लाभ किसानों को मिले। हम चाहते हैं कि किसान चिंता मुक्त होकर खेती करें और खुशहाल जीवन जियें। हर किसान को गौ-पालक और हर घर को गौ-रक्षक बनाने का प्रयास है। मध्यप्रदेश न केवल कृषि उत्पादन में देश में शीर्ष पर हो, बल्कि दुग्ध उत्पादन और दुग्ध निर्यातक प्रदेश बने इसीलिये मध्यप्रदेश में गौ-वंश पालन के लिये अनुदान दिया जा रहा है। परिवार, समाज, राष्ट्र और सृष्टि निर्माण के केन्द्र में है नारी भारतीय दर्शन में नारी के महत्व का उल्लेख है। महिला कल्याण के लिये नारी शक्ति मिशन में महिलाओं का आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक और राजनीतिक सशक्तिकरण किया जायेगा। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जहां शासकीय सेवाओं में महिलाओं का आरक्षण 33 प्रतिशत से बढ़ाकर 35 प्रतिशत किया गया है। बहनों के मान-सम्मान और स्वाभिमान के लिये लाड़ली बहना योजना से महिलाओं को और सेनिटेशन एवं हाइजीन योजना से प्रदेश की लाखों बालिकाओं को आर्थिक संबल दिया है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक से सांस्कृतिक पुनरुत्थान का कार्य हो रहा है। प्रदेश में समृद्ध और गौरवशाली विरासत को सहेजने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। श्रीराम वन गमन पथ, श्रीराम के कर्तव्य पालन और राष्ट्र निर्माण का समर्पण संपूर्ण भारत को एक सूत्र में बांधने का आधार देगा। श्रीकृष्ण पाथेय में उन सभी स्थानों को तीर्थ के रूप में विकसित किया जा रहा है जहां श्रीकृष्ण के स्मृति चिन्ह हैं। उन … Read more

शहर की 531 कॉलोनियों के रहवासी नगर निगम रिकॉर्ड में बकायादा

इंदौर वर्ष 2024-25 का संपत्तिकर अग्रिम जमा करने के बावजूद शहर की 531 कॉलोनियों के रहवासी नगर निगम रिकॉर्ड में बकायादार हैं। इन कॉलोनियों के रहवासियों को मैसेज भेजे जा रहे हैं कि वे 14 दिसंबर 2024 को आयोजित वर्ष की अंतिम राष्ट्रीय लोक अदालत में आएं और बकाया करों का भुगतान करें। रहवासी समझ नहीं पा रहे कि जब उन्होंने कर का भुगतान अग्रिम में कर दिया है, तो फिर उन्हें बकायादार क्यों बताया जा रहा है। निगम की तरफ से बकाया भुगतान के लिए मैसेज क्यों भेजे जा रहे हैं। यह स्थिति पोर्टल को देरी से अपडेट करने की वजह से बनी है। मई के अंतिम सप्ताह में नगर निगम ने कॉलोनियों के रेट जोन में बदलाव किया था। शहर की 531 कॉलोनियां इससे प्रभावित हुई थीं। इस बदलाव के चलते इन कॉलोनियों में संपत्तिकर में 10 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन निगम ने इस बदलाव को पोर्टल में अपडेट ही नहीं किया। बिल के हिसाब से जमा कर दिया था असर यह हुआ कि जब लोग अग्रिम कर जमा करने निगम कार्यालय पहुंचे तो उन्हें पुरानी दर के हिसाब से संपत्ति और जलकर के बिल थमा दिए गए। चूंकि 30 जून तक अग्रिम कर जमा करने पर छूट थी, लोगों ने बिल के हिसाब से कर जमा कर दिया। अगले वर्ष पड़ेगा आर्थिक बोझ पोर्टल अपडेट करने में हुई देरी का असर अगले वर्ष एडवांस में करों का भुगतान करने वालों पर ज्यादा पड़ेगा। जिन लोगों ने वर्ष 2024-25 का कर अग्रिम में जमा कराया था उन्हें अगले वर्ष 2025-26 के बढ़े हुए कर के साथ-साथ वर्ष 2024-25 का बकाया कर भी जमा करना होगा। recent visitors 47

पूजा स्थल अधिनियम को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बहस, नए निर्देश का क्या पड़ेगा असर

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में मस्जिदों के खिलाफ ताबड़तोड़ दर्ज हो रहे अदालती मुकदमों पर सुप्रीम कोर्ट ने ब्रेक लगा दिया है। इसके बाद संभल की जामा मस्जिद, जौनपुर की अटाला मस्जिद और बदायूं की शम्सी जामा मस्जिद केस पर बड़ा असर पड़ने वाला है। इन सभी मामलों में निचली अदालतें सर्वे के आदेश समेत कोई भी अंतरिम फैसला नहीं दे पाएंगी। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा करने पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही किसी अन्य मस्जिद या धर्मस्थल को लेकर सर्वोच्च अदालत के अगले आदेश तक कोई मुकदमा भी दर्ज नहीं किया जाएगा। क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने देश की सुप्रीम अदालत साल 1991 के पूजा स्थल अधिनियम की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाने वाली याचिकाओं के एक बैच पर सुनवाई कर रही थी। यह अधिनियम 15 अगस्त 1947 से पूजा स्थलों के धार्मिक चरित्र के रूपांतरण को प्रतिबंधित करता है। यानी कि जो भी धार्मिक स्थल 15 अगस्त 1947 से पहले जिस हालत में थे, वह वैसे ही रहेंगे। इस याचिका पर सुनवाी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो इस कानून की संवैधानिक वैधता, इसकी रूपरेखा और दायरे का विश्लेषण कर रहे हैं, इसलिए उन्हें देशभर में लंबित मुकदमों की सुनवाई पर रोक लगानी होगी। चीफ जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की स्पेशल बेंच ने आदेश दिया कि पूजा स्थल अधिनियम से संबंधित केस कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है। ऐसे में हम यह निर्देश देना उचित समझते हैं कि न्यायालय के अगले आदेश तक पूजा स्थलों के खिलाफ कोई केस दर्ज नहीं किया जाएगा और कार्यवाही नहीं की जाएगी। कोर्ट ने कहा कि हम यह भी निर्देश देते हैं कि लंबित मुकदमों में अदालतें सर्वेक्षण के आदेशों समेत कोई प्रभावी अंतरिम आदेश या अंतिम आदेश पारित नहीं करेंगी। यूपी के मुकदमों पर क्या होगा असर हाल ही में संभल की जामा मस्जिद में सर्वे के दौरान बवाल मच गया था। 19 नवंबर 2024 को स्थानीय अदालत के जज ने एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त कर मस्जिद के सर्वे का आदेश दिया था। इस मस्जिद का दो बार सर्वे किया जा चुका है लेकिन रिपोर्ट कोर्ट में पेश नहीं की जा सकी है। सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद अदालत में रिपोर्ट पेश करने की राह में तो कोई अड़चन नहीं आएगी लेकिन जज साहब इस रिपोर्ट के आधार पर मस्जिद को लेकर कोई फैसला नहीं सुना सकेंगे। अटाला मस्जिद का सर्वे रुकेगा? जौनपुर की अटाला मस्जिद को लेकर भी विवाद पुराना है। दावा किया जा रहा है कि मस्जिद के स्थान पर अटाला देवी का मंदिर था। मामला अदालत में गया तो लोकल कोर्ट ने जुलाई 2024 में अमीन सर्वे का आदेश दिया था। हालांकि, स्थानीय लोगों के विरोध के बाद सर्वे हो नहीं पाया। अब सर्वे का मामला हाई कोर्ट में है। वहीं, हिंदू पक्ष सर्वे को लेकर एक बार फिर स्थानीय अदालत में पहुंच गया है। हिंदू पक्ष ने अमीन को विवादित स्थल का निरीक्षण, उनकी रिपोर्ट और नक्शा तैयार करने के लिए सुरक्षा प्रदान करने के संबंध में पुलिस अधीक्षक को निर्देशित करने को लेकर कोर्ट में अर्जी दाखिल की है। कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के लिए 16 दिसंबर की तिथि नियत की है। अब 16 दिसबंर को मामले को लेकर सुनवाई तो होगी लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अटाला मस्जिद का सर्वे नहीं किया जा सकेगा। बदायूं मस्जिद पर क्या होगा? बदायूं में अखिल भारतीय हिंदू महासभा के प्रदेश संयोजक मुकेश पटेल ने साल 2022 में कोर्ट में वाद दायर कर दावा किया था कि नीलकंठ महादेव मंदिर को तोड़कर जामा मस्जिद बनाई गई है। इस केस में सरकारी अधिवक्ता की बहस पूरी हो चुकी है। पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट भी आ चुकी है। 30 नवंबर से इंतजामिया कमेटी की तरफ से बहस शुरू की गई थी। 3 दिसंबर को इस पर सुनवाई भी हुई थी।अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने 10 दिसंबर की तारीख तय की थी और मंगलवार को मुस्लिम पक्ष को इस पर बहस करनी थी, लेकिन एक अधिवक्ता के निधन के चलते सुनवाई नहीं हो सकी। अब इस मामले में सुनवाई 17 दिसंबर को होनी है। हालांकि, इस केस में मुकदमा सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने से पहले का है। ऐसे में, इस पर भी 17 दिसंबर को कोर्ट में सुनवाई तो हो सकेगी लेकिन अदालत कोई भी अंतरिम या अंतिम फैसला नहीं सुना सकेगी। कुल मिलाकर इन तीनों मस्जिदों को लेकर कोर्ट में चल रहा मामला पूरी तरह से पूजा स्थल अधिनियम को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मुकदमे पर निर्भर हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के जज इस अधिनियम का विश्लेषण कर जो फैसला सुनाएंगे, उसके आधार पर ही इन मामलों में स्थानीय अदालतें आगे की कार्रवाई कर पाएंगी। ऐसे में माना जा रहा है कि यूपी में कुछ दिनों तक मंदिर-मस्जिद को लेकर लगातार उठ रहे सनसनीखेज मामले थमेंगे। यूपी कॉलेज मजार विवाद वहीं, इस बीच वाराणसी में यूपी कॉलेज में मजार को लेकर विवाद भी गरमाया है। कॉलेज के छात्रनेताओं ने इसके खिलाफ न सिर्फ विरोध प्रदर्शन किया बल्कि कॉलेज में हनुमान चालीसा का पाठ भी किया। कई छात्र इस दौरान गिरफ्तार किए गए। कॉलेज में बाहरी लोगों के प्रवेश पर बैन लगा दिया गया। ताजा अपडेट के अनुसार मजार के गेट पर दो ताले जड़ दिए गए हैं। दूसरे ताले के बारे में पुलिस प्रशासन को भी जानकारी नहीं है। हालांकि, यह केस अभी कोर्ट में नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब इसमें भी केस दर्ज नहीं किया जा सकेगा। recent visitors 60

नेता प्रतिपक्ष महंत ने सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल, 2028 तक 10 लाख करोड़ की GDP के लक्ष्य को बताया ‘सपना’

रायपुर छत्तीसगढ़ विधानसभा नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने राज्य की बीजेपी सरकार पर भ्रष्टाचार, अपराध और धान खरीदी में किसानों को हो रही परेशानियों को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। साथ ही, उन्होंने यह दावा किया कि राज्य सरकार ने उनके द्वारा स्वीकृत सभी कार्यों को रद्द कर दिया है। इसके अलावा, उन्होंने साय सरकार के एक साल पूरा होने पर आयोजित जश्न और दुबई में कथावाचक प्रदीप मिश्रा की कथा में महादेव सट्टा एप के सरगना सौरभ चंद्राकर के देखें जाने को लेकर भी सवाल खड़े किये हैं। नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने प्रदेश की जीडीपी को 2028 तक 10 लाख करोड़ तक पहुंचाने के सरकार के लक्ष्य को “सपना” करार दिया और इसे वास्तविकता से परे बताया। उन्होंने कहा, “यह सपना कैसे देखा जा सकता है? इसे पूरा करने के लिए सरकार के पास कोई ठोस योजना नहीं है। किसके निर्देश पर सरकार काम कर रही है, यह भी समझ से बाहर है।” उन्होंने कहा कि “सरकार ने मेरे द्वारा स्वीकृत नगर पालिका, सड़क, मंडी के कार्यों को वापस ले लिया। सरकार ने मेरा ध्यान नहीं रखा। प्रदेशभर में भ्रष्टाचार फैला हुआ है। स्कूली छात्राओं के साथ दुष्कर्म की घटनाएं हो रही हैं, और हर विभाग में गड़बड़ी व्याप्त है। ट्रांसफर ऑर्डर हाई कोर्ट से रद्द होने तक भ्रष्टाचार का सिलसिला जारी है।” जशपुर जिले में बीते दिनों सामने आई एक नाबालिग लड़की के अपहरण और हत्या की वारदात पर प्रतिक्रिया देते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा, “मुख्यमंत्री जी को यह बुरा लगेगा, लेकिन उनके ही जिले में एक लड़की को खेत में दबाकर उस पर धान बो दिया गया। रायगढ़ में अपराध की दर बढ़ी है, खासकर आदिवासियों और महिलाओं पर। सरकार इसे कैसे उपलब्धि मान सकती है?” राइस मिलर्स की हड़ताल और धान खरीदी के मुद्दे पर महंत ने कहा कि सरकार के साथ राइस मिलर्स का कोई ठोस समझौता नहीं हो पाया है। महंत ने आरोप लगाया कि धान का उठाव केवल कुछ जगहों पर हो रहा है, और किसान अभी भी टोकन पर आश्रित हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अमानक बोरे में धान भरने से किसानों को हर क्विंटल पर 23 रुपये का नुकसान हो रहा है। महंत ने राज्यपाल को पत्र लिखकर अमानक बोरे का मुद्दा उठाया और सरकार से ध्यान देने की अपील की। इसके अलावा, दुबई में कथावाचक प्रदीप मिश्रा की कथा में महादेव सट्टा एप के सरगना सौरभ चंद्राकर की तस्वीर पर नेता प्रतिपक्ष महंत ने कहा कि प्रदीप मिश्रा जी उन्हें माला पहना रहे थे, हमने देखा। वह हमारे यहां के बड़े कथाकार हैं, किनके भरोसे ये सब चल रहा है, यह इससे पता चल रहा है। recent visitors 94