बुरहानपुर : केरपानी में धर्मांतरण करने का आरोप, 10 पर केस दर्ज

बुरहानपुर मध्य प्रदेश में धर्मांतरण को लेकर बवाल सामने आया है। यहां के बुरहानपुर जिले के नेपानगर थाना अंतर्गत आने वाले ग्राम केरपनी में धर्मांतरण की सूचना मिलने पर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं का कहना है कि यहां रहने वाले एक आदिवासी के घर, एक बड़ा पांडाल लगाकर ईसाई धर्म की प्रार्थना कराई जा रही थी। इसके साथ ही आदिवासियों को हिन्दू धर्म का नहीं होने और ईसाई धर्म अपनाने का लालच देते हुए ईसाई धर्म अपनाने से बीमारियों के ठीक होने का लालच दिया जा रहा था। इस मामले की सूचना लगते ही धार्मिक संगठन बजरंग दल से जुड़े कुछ युवा और गांव के कई लोग वहां पहुंचे और हंगामा करना शुरू कर दिया। इस दौरान मौके पर नेपानगर थाना पुलिस भी पहुंची। जहां बजरंग दल के सदस्यों ने गांव में धर्म परिवर्तन के आरोप लगाए, वहीं पंडाल में मौजूद ईसाई धर्म के लोगों ने अपने साथ मारपीट होने के आरोप भी लगाए थे। हालांकि इस बीच सभी को नेपानगर थाना लाया गया। जहां एक शिकायती आवेदन मिलने पर खंडवा, बुराहनपुर और नागपुर जिलों के 10 लोगों के खिलाफ, धर्म परिवर्तन कराने से जुड़ा मामला दर्ज किया गया है, और अब इस मामले की जांच की जा रही है। इस मामले में ग्राम गोलखेड़ा के बलिराम किराड़े ने धर्मांतरण किये जाने का आरोप लगाते हुए, उनपर कार्यवाई करने का एक आवेदन भी नेपानगर पुलिस को सौंपा है। आवेदन में उन्होंने बताया है कि, उन्हें जानकारी मिली थी कि, ग्राम केरपनी के शांतिलाल बडोले के घर इसाई धर्म की प्रार्थना का कार्यक्रम चल रहा है। यहां पर बीमार लोग इसाई धर्म की प्रार्थना करते हैं, और वे हिन्दू धर्म छोड़कर इसाई धर्म अपनाते हैं, तो उनकी बीमारी ठीक हो जाती है। अपनी पेट दर्द की बीमारी के चलते उन्होंने वहां जाकर देखा तो, एक बड़े पंडाल में लोगो की भीड़ थी और माइक पर इसाई धर्म के गीत गाये जा रहे थे। साथ ही वहां ईसाई धर्म अपनाने के फायदे बताये जा रहे थे, और कुछ बाहरी लोग ईसाई धर्म परिवर्तन करने का लालच दे रहे थे। आरोप है कि बलिराम को भी हिन्दू धर्म से ईसाई धर्म अपनाने का लालच दिया था। साथ ही धर्म परिवर्तन कराने वालों का कहना था कि आदिवासी हिन्दू धर्म मे नहीं आते हैं। जिसे देख उन्होंने अपने साथियों के साथ धर्मातरण करने वालो के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करने का आवेदन दिया है । 10 लोगों के खिलाफ हुआ मामला दर्ज फरियादी बलिराम की शिकायत पर थाना नेपानगर में आदिवासियों को ईसाई धर्म में परिवर्तन करने से जुड़ा एक मामला धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के अंतर्गत दर्ज किया गया है। जिसमें शांतिलाल पिता भायटा, निवासी ग्राम केरपानी, प्यारसिंग पिता सालम, निवासी माजरोद कला खकनार, काशीराम पिता रगला, निवासी फेलवाडी खकनार, गुड़िया पिता जागसिंग पंवार, निवासी उसारनी खकनार, सुखलाल पिता इसमल सोलंकी, निवासी उसारनी खकनार, नरसिंग पिता सिलदार बारेला, निवासी साईंराम कालोनी रामनगर खडवा, शेलेश पिता याकूव गायकवाड, निवासी खकनार, सुगंधी बाई पति ववन गायकवाड, निवासी रेस्ट हाउस के सामने खकनार, एंजेला पति शेलेश गायकवाड़, निवासी शिर्डीपुरम खकनार, डेनियल पिता डेविड पलसपगा, निवासी स्मृतिनगर वाडी थाना वाडी जिला नागपुर को आरोपी बनाते हुए मामला दर्ज किया गया है। recent visitors 51

सांस की बीमारी से परेशान होते बच्चे

वातावरण से हमारे श्वसन तंत्र का सीधा संबंध होता है। वातावरण में विशेष रूप से आधुनिक शहरी वातावरण में कई तरह के जीवाणु और दूषित तत्व हर वक्त मौजूद रहते हैं। इसी वजह से श्वसन तंत्र में संक्रमण आसानी से और लगातार होते रहते हैं। बचपन में तो श्वसन तंत्र की समस्या आम होती है। कई बार बचपन और बुढ़ापा दोनों अवस्थाओं में यह बीमारी गंभीर रूप धारण कर लेती है और यही नहीं कई बार यह मौत का कारण भी बन सकती है। आमतौर पर श्वसन तंत्र का संक्रमण अगर युवा वर्ग के लोगों को होता है तो वे कुछ दिनों में स्वस्थ हो जाते हैं, लेकिन छोटे बच्चों, बूढ़ों में इस रोग के गंभीर रूप धारण करने की आशंका होती है क्योंकि उनके शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता तो कम होती ही है, साथ ही फेफड़ों की क्षमता भी कम होती है। श्वसन तंत्र के ऊपर के भाग में जुकाम, गले में खराश, कान में दर्द, मवाद आना, गला खराब होना आदि के रूप में संक्रमण हो सकता है या फिर श्वसन तंत्र के निचले भाग में स्वर तंत्र या श्वसन मार्ग में या फिर फेफड़ों में संक्रमण (न्यूमोनिया) हो सकता है। आज भी हर साल 40 लाख बच्चों की मृत्यु श्वसन तंत्र के रोग के गंभीर रूप के कारण हो जाती है। छोटे बच्चों में तो औसतन हर साल 5 से 8 बार श्वसन तंत्र में संक्रमण के मामले सामने आ ही जाते हैं। ज्यादातर मामलों में बच्चों को बीमारी मामूली ही होती है और बच्चे जल्दी ठीक हो जाते हैं पर बार−बार बीमार होने से माता−पिता परेशान रहते हैं। श्वसन तंत्र का संक्रमण कान में फैलने से बच्चे बहरे हो सकते हैं। यही नहीं संक्रमण अगर खतरनाक जीवाणु से हुआ हो या इलाज में लापरवाही बरती गई हो तो यह प्राणघातक भी हो सकता है। श्वसन तंत्र में संक्रमण कई तरह के वायरस की वजह से होता है जैसे बैक्टीरिया, फफूंद। बच्चों में धूल पराग कण, ठंडक, धुंआ, गरमी, खुशबू आदि से यह समस्या शुरू होती है। इसके अलावा बच्चे वायरस बैक्टीरिया के संक्रमण के शिकार भी हो सकते हैं। अगर बच्चे कुपोषण के शिकार हैं, शरीर कई बीमारियों का घर है, दमा रोग है या फिर फेफड़ों का संक्रमण किसी खतरनाक जीवाणु से हुआ हो तो रोग गंभीर रूप धारण कर सकता है। अगर घर के अंदर या आसपास का वातावरण अच्छा नहीं प्रदूषित है, घर के आसपास कोई फैक्टरी है, घर में धूम्रपान किया जाता है या जन्म के समय शिशु का वजन कम है, बच्चा निर्धारित समय से पहले पैदा हुआ है तो रोग गंभीर रूप धारण कर सकता है। गांवों का वातावरण काफी खुला और शहरों की तुलना में काफी कम प्रदूषित होता है। इसलिए शहरी बच्चों खासकर गंदी बस्ती, झुग्गी झोपड़ी में रहने वालों में श्वसन तंत्र के संक्रमण की ज्यादा संभावना होती है। इस रोग के लक्षण इसकी गंभीरता पर निर्भर करते हैं। बच्चों में नाक बहने, गले में खराश, बुखार, खांसी, गले या कान में दर्द, कान बहना, सांस लेने में परेशानी, हांफना, शरीर नीला पड़ना, छाती में दर्द जैसी परेशानियां हो सकती हैं। रोग की शुरुआत में छोटे बच्चे दूध पीना बंद कर देते हैं। कभी−कभी शरीर ठंडा पड़ जाता है वे चिड़चिडे हो जाते हैं। उनकी सांस भी तेजी से चलने लगती है और अगर बच्चा न्यूमोनिया से पीड़ित है तो शरीर नीला पड़ जाता है, सांस लेने पर छाती अंदर धंस जाती है। श्वसन तंत्र का संक्रमण मामूली भी हो सकता है और गंभीर भी। इसलिए रोग कितना गंभीर है यह जानना बहुत जरूरी होता है। रोग की गंभीरता के अनुसार ही इलाज और देखभाल की आवश्यकता होती है। इस रोग में बच्चों को तेज बुखार होता है वे ठीक से सो नहीं पाते और वे दूध भी नहीं पी पाते हैं। यहीं नहीं उन्हें झटके भी आ सकते हैं। अगर बच्चे शांत पड़े हैं तो छाती से तेज आवाज आती है। सांस लेते वक्त छाती अंदर को धंस जाती है। सांस काफी तेज गति से चलती है। ऐसी स्थिति में बच्चों को तुरन्त अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए जहां पर समुचित उपचार आक्सीजन एंटीबायोटिक आदि दवाएं उसे दी जाती हैं। ऐसे में जरा भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए क्योंकि यह स्थिति अत्याधिक गंभीर बीमारी की होती है। अगर सांस लेते वक्त पसलियां अंदर को धंसती हैं, नथूने फूल जाते हैं, गले से गुर्राहट जैसी आवाज निकलती है, शरीर नीला पड़ जाता है तो समझ लें कि बच्चा गंभीर न्यूमोनिया की चपेट में है। ऐसे बच्चों को फौरन अस्पताल में भरती कराना आवश्यक होता है। श्वसन तंत्र के संक्रमण के रोग से पीड़ित अधिकतर बच्चे साधारण इलाज से कुछ ही दिनों में ठीक हो जाते हैं फिर भी बच्चों पर नजर रखनी चाहिए। अगर रोग गंभीर हों तो लक्षणों को पहचान कर तुरन्त डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। अगर बचपन में खांसी, जुकाम, सांस फूलने की समस्या लगातार एक माह तक रहती है तो उसे टीवी, दमा, काली खांसी होने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में उचित जांच द्वारा लक्षणों की वजह जान कर इलाज करवाना चाहिए।   recent visitors 59

खंडवा के भामगढ़ के राम मंदिर में अचानक आग लगी, अग्निकांड में मंदिर में रखी सामग्री जलकर खाक हो गई

खंडवा मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के भामगढ़ स्थित श्री राम मंदिर में देर रात आग लग गई। मंदिर में आग लगने के बाद पहले ग्रामीणों ने आग बुझाने की कोशिश की। लेकिन, जब आग नियंत्रित नहीं हुई तो फायर ब्रिगेड की मदद ली गई। जानकारी के अनुसार, भामगढ़ में लगभग 500 साल पुराना श्री राम मंदिर है। इस मंदिर में शुक्रवार की देर रात को अचानक आग लग गई, महज कुछ ही देर में आग ने विकराल रूप ले लिया। ग्रामीणों ने काफी देर तक आग बुझाने की कोशिश की, मगर उनके प्रयास सफल नहीं हुए। परिणाम स्वरूप फायर ब्रिगेड की गाड़ी बुलाना पड़ी और शनिवार की सुबह तक इस आग पर काबू पाया जा सका। बताया गया है कि इस पुराने मंदिर का लकड़ी का शेड और काफी पुरानी दीवार होने के कारण आग तेजी से भड़की। आग इतनी ज्यादा थी कि आसपास के मकानों को भी खाली करना पड़ा। आग कैसे लगी इस बात का खुलासा नहीं हो पाया है। इस अग्निकांड में मंदिर में रखी सामग्री जलकर खाक हो गई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक शाम तक मंदिर में दर्शन करने भी बड़ी संख्या में लोग गए थे। देर रात लगभग ढाई बजे मंदिर परिसर से ग्रामीणों ने धुंआ उठते हुए देखा और फिर कुछ ही देर में आग ने आग की तेज लपटों दिखाई देने लगी। आग को बुझाने के लिए ग्रामीणों ने हर तरफ से पानी डाला गया मगर सफलता नहीं मिली। बाद में, फायर ब्रिगेड की मदद से इस आग को बुझाया जा सका। पुलिस के मुताबिक मंदिर में आग कैसे लगी यह बात स्पष्ट नहीं हो पाई है। इस अग्निकांड में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई है, मंदिर में रखा सामान जरूर बड़ी तादाद में जल गया है। अग्निकांड के समय मंदिर में कोई था अथवा नहीं पुलिस इस बात की जानकारी जुटा रही है।   recent visitors 139

Saurabh Sharma के ऑफिस में 13 घंटे से ज्यादा वक्त तक चली तलाशी, जानिए सर्चिंग टीम को क्या कुछ मिला

भोपाल परिवहन विभाग के धनकुबेर पूर्व आरक्षक (Former RTO Constable) सौरभ शर्मा (Saurabh Sharma) और उसके सहयोगी चेतन गौर (Chetan Gour) पर अब ईडी (ED) का भी शिकंजा कसना शुरू हो गया है. इनकी काली कमाई (Black Money) से जुड़े साक्ष्य तलाशने ईडी ने प्रदेश के अलग अलग इलाको में इनसे जुड़े ठिकानों पर एक साथ रेड की थी. ग्वालियर में सौरभ और चेतन के घरों पर लगभग साढ़े तेरह घण्टे तक जांच पड़ताल चली. बताया जा रहा है कि पुलिस इन दोनों जगहों से एक सेल डीड और एक डायरी जब्त करके ले गई है.  प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम गुरुवार को ही ग्वालियर पहुंच गई थी. ऐसे हुई कार्रवाई ED ने गुप्त ढंग से यहां ऑपरेशन की योजना बनाई थी, उसने स्थानीय टैक्सी का सहारा लेकर पर्यटक बनकर पहले शहर में भ्रमण किया. शुक्रवार को सुबह 5 बजे टीम सौरभ शर्मा के विनय नगर सेक्टर दो में  शब्द प्रताप आश्रम स्थित घर पहुंची. यहां देर रात तक लगभग 13.30 घंटे तक सर्चिग चली, जिसमें मकान की रजिस्ट्री से संबंधित सेल डीड, एक डायरी और अन्य दस्तावेज जब्त किए गए। इसके बाद टीम वहां से रवाना हो गई. सौरभ के किस ठिकाने से क्या मिला… 1. ई- 7/98, अरेरा कॉलोनी: इस मकान में सौरभ परिवार के साथ 2 साल से रह रहा है। सूत्रों का कहना है कि ये मकान रोहित तिवारी ने खरीदा था। सौरभ को उसने 50 हजार रुपए महीने किराए पर ये मकान दिया है। लोकायुक्त की टीम ने इस घर पर छापा मारा था। क्या मिला- यहां से प्रॉपर्टी में निवेश के दस्तावेज और नकदी मिली है। 2. ई- 7/78, अरेरा कॉलोनी: सौरभ ने ये बंगला 2 महीने पहले ही खरीदा है। बताया जा रहा है कि ये बंगला बहुत दिनों से खाली था। यहां लोकायुक्त की टीम ने छापा नहीं मारा, लेकिन दो दिन पहले यहां पुलिस देखी गई है। ये भी पता चला कि इस घर की निगरानी के लिए पुलिस ने एक दूसरे मकान पर सीसीटीवी लगाया था। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि किसी ने नहीं की। क्या मिला- ये मकान खाली था। यहां पर सर्चिंग के दौरान कुछ खास नहीं मिल पाया है। 3. ई- 7/ 657, अरेरा कॉलोनी: इस बंगले में सौरभ ने जयपुरिया स्कूल का ऑफिस बनाया हुआ था। इसमें ही उसका दोस्त चेतन सिंह गौर रहता था। लोकायुक्त को इसी मकान से 2 क्विंटल से ज्यादा चांदी की सिल्लियां मिली हैं। क्या मिला- जयपुरिया स्कूल में निवेश के कुछ दस्तावेज मिले हैं। खाली बैग मिले, जिन्हें नकदी के लिए इस्तेमाल किया जाता था। 4. ई- 8/ 98, रेलवे कॉलोनी: इस मकान में शरद जायसवाल रहता है। शरद कंस्ट्रक्शन कंपनी अविरल में डायरेक्टर भी हैं। बताया जा रहा है कि शरद ने सौरभ के निवेश से जुड़ी अहम जानकारी ईडी को दी है। क्या मिला- प्रॉपर्टी में निवेश के दस्तावेज सौरभ की मां का लॉकर फ्रीज कराया सौरभ शर्मा के विनय नगर स्थित आवास से ईडी की टीम को उसकी मां उमा शर्मा के साथ जॉइंट अकाउंट के दस्तावेज मिले हैं। जो यूनियन बैंक के हैं। उमा शर्मा के नाम शब्द प्रताप आश्रम स्थित यूनियन बैंक में एक लॉकर भी मिला है। जिसमें मनी लॉन्ड्रिंग के पैसे आने जाने की आशंका पर उसे फ्रीज कराया गया है। हाईवे पर हाल ही में एक जमीन बेचे जाने के भी कुछ दस्तावेज मिले हैं। इसके अलावा कई सारे रिकॉर्ड जमा किए गए हैं, जिनको आगे जांच में लिया जा सकता है। इसके अलावा ग्वालियर में सौरभ शर्मा के सिटी सेंटर स्थित घर और जबलपुर में उसकी ससुराल के मकान में भी ईडी ने दिन भर सर्चिंग की। यहां से भी कुछ अहम दस्तावेज और बैंक ट्रांजेक्शन की जानकारी मिली है। ईडी की एक अन्य टीम ने  सौरभ के दोस्त और पार्टनर चेतन गौर के कम्पू स्थित आवास पर छापा मारा. इस घर मे भी कोई मौजूद नहीं था. बताया गया कि ईडी ने चेतन के घर से कई दस्तावेज जब्त किये. चेतन के घर पर टीम ने तलाशी के बाद कुछ फाइलें भी जब्त कीं, जो सरकारी ठेकों से जुड़ी बताई जा रही हैं. बताया गया है चेतन ने सौरभ के काम में रिश्तेदारों का पैसा निवेश किया था, इसकी फाइलों की पड़ताल के लिए टीम यहां आई थी. चेतन ने 3 गाड़ियां भी दी हुई थीं, जिसके बदले में उसे हर महीने 2.50 लाख रुपये मिलते थे. बताया गया कि ईडी टीम (ED Team) ने सौरभ के विनय नगर स्थित घर मे काफी बारीकी से जांच पड़ताल की. उन्होंने फर्नीचर व जमीन को भी ठोक कर देखा. ईडी ने सौरभ के घर पर रखे फर्नीचर को भी अच्छी तरह से चेक करने के साथ ही फर्श  को भी कई बार ठोक कर देखा. वह यह देखना चाहती थी इनमें कुछ छिपा तो नहीं है. इसके साथ ही घर मे कार्यरत संग्राम नामक एक कर्मचारी से भी पूछताछ की. पता ये भी चला कि सौरभ ने कुछ समय पहले दुबई में अपनी पत्नी दिव्या के साथ अपने बेटे का जन्मदिन भी मनाया था. जांच में यह तथ्य भी प्रकाश में आया कि सौरभ के कई रिश्तेदार भी दुबई में रहते हैं. सौरभ के घर से जांच टीम रात लगभग साढ़े सात बजे निकली और सीधे गाड़ियों में सवार हो गई. इस टीम में एक पुरुष और एक महिला मुंह ढंके हुए निकले जो पूरी कार्रवाई के दौरान टीम के साथ रहे. इन दोनों को लेकर दिन भर चर्चा रही. हालांकि बताया गया कि यह दोनो स्वतंत्र साक्ष्य के रूप में लाये गए थे, जो एक राष्ट्रीय बैंक के एक मैनेजर और एक फील्ड ऑफीसर थे. टीम घरों से निकलकर सीधे अपने गंतव्य पर रवाना हो गई. शहर में नहीं रुकी. recent visitors 65

मध्यप्रदेश बीजेपी में जबर्दस्त खींचतान, मोहन-शर्मा-सिंधिया सबके पावर खत्म, हाईकमान का सीधा हस्तक्षेप

भोपाल ! मध्यप्रदेश में संगठन चुनावों के दौरान भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में भारी उथल-पुथल देखने को मिली। पार्टी के भीतर मंडल अध्यक्षों और जिला अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर खींचतान साफ झलकी। पार्टी ने पहले पारदर्शिता का दावा करते हुए कहा था कि नियुक्तियां किसी मंत्री, सांसद, विधायक, या जिलाध्यक्ष की पसंद से नहीं, बल्कि योग्यता के आधार पर होंगी। लेकिन व्यवहार में यह वादा अधूरा ही रहा। बीजेपी हाईकमान ने इस स्थिति से निपटने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे नेताओं का जिला अध्यक्षों के चयन में सीधा हस्तक्षेप समाप्त कर दिया गया है। हाईकमान ने स्पष्ट कर दिया है कि जैसे सांसद और विधायक के टिकट का निर्णय केंद्रीय नेतृत्व करता है, वैसे ही अब जिलाध्यक्षों का चयन भी दिल्ली से होगा। मध्यप्रदेश में बीजेपी जिलाध्यक्षों की चयन प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जिला स्तर पर चुनाव अधिकारियों ने तीन नामों का पैनल तैयार कर प्रदेश संगठन को सौंप दिया है। अब इन नामों पर अंतिम निर्णय हाईकमान करेगा। यह पहली बार है जब मध्यप्रदेश बीजेपी में जिलाध्यक्षों का निर्धारण सीधे दिल्ली से किया जाएगा। इस बदलाव का उद्देश्य संगठन को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। अब तक जिलाध्यक्षों का चयन स्थानीय नेताओं द्वारा किया जाता रहा, जिसमें कई बार सांसद और विधायकों ने अपनी पसंद के लोगों को ही प्राथमिकता दी। इससे योग्यता को दरकिनार किया गया। नई व्यवस्था के तहत काबिल और निष्ठावान कार्यकर्ताओं को प्रमुख जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। हाल ही में हुए मंडल अध्यक्षों के चुनावों में कई गड़बड़ियां सामने आईं। पार्टी द्वारा तय किए गए क्राइटेरिया, जैसे 45 साल की आयु सीमा, आपराधिक रिकार्ड न होना, और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल न होना, का पालन कई जगहों पर नहीं हुआ। कई मंडल अध्यक्षों की नियुक्तियों पर विवाद हुआ, और कुछ को चयन के तुरंत बाद हटा भी दिया गया। मंडल अध्यक्षों के चुनाव में सामने आए विवादों और शिकायतों के बाद हाईकमान ने जिलाध्यक्षों के चयन को लेकर सख्ती दिखाई है। अब दिल्ली से चयन होने से पारदर्शिता और निष्पक्षता की उम्मीद बढ़ गई है। इससे कार्यकर्ताओं का विश्वास भी मजबूत होगा और पार्टी संगठन को नई दिशा मिलेगी। यह कदम मध्यप्रदेश बीजेपी के संगठन को न केवल मजबूती देगा, बल्कि योग्यता और पारदर्शिता के नए मानदंड भी स्थापित करेगा। recent visitors 401

एनएमडीएफसी अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में है, 85 प्रतिशत महिलाएं शामिल

नई दिल्ली राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम (एनएमडीएफसी) ने अपनी स्थापना के बाद से 24.84 लाख से अधिक लाभार्थियों को 9,228.19 करोड़ रुपये से अधिक वितरित किए हैं, जिनमें से 85 प्रतिशत से अधिक लाभार्थी महिलाएं हैं। यह जानकारी सरकार ने शनिवार को दी। एनएमडीएफसी अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में है। इसकी स्थापना अल्पसंख्यक समुदायों के बीच पिछड़े वर्गों के सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए की गई है। वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान एनएमडीएफसी ने 1.84 लाख से अधिक लाभार्थियों को 765.45 करोड़ रुपये का रियायती ऋण जारी किया। एनएमडीएफसी ने आवेदकों, एससीए और एनएमडीएफसी के बीच ऋण लेखा प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाने के लिए मिलन (एनएमडीएफसी के लिए अल्पसंख्यक ऋण लेखा सॉफ्टवेयर) ऐप लॉन्च किया है, जिसमें एनएमडीएफसी के एमआईएस पोर्टल का इंटीग्रेशन भी शामिल है। इस ऐप पर 14.57 लाख लाभार्थियों का डेटा उपलब्ध है। मंत्रालय ने कहा कि मिलन मोबाइल ऐप का एंड्रॉइड और आईओएस एडिशन भी लॉन्च किया गया है। हाल ही में, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक और पंजाब ग्रामीण बैंक ने रिफाइनेंस मोड पर एनएमडीएफसी योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए। अपनी 100-दिवसीय कार्य योजना के तहत, मंत्रालय ने जुलाई में ‘लोक संवर्धन पर्व’ का आयोजन किया, जिसमें पूरे भारत के अल्पसंख्यक कारीगरों को एक साथ लाया गया। इस मंच ने कारीगरों को अपनी स्वदेशी कला, शिल्प और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान किया। पर्व में विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों से संबंधित 162 कारीगरों द्वारा बनाए गए विभिन्न राज्यों के 70 से अधिक हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। इसके अलावा, तीर्थयात्रा के अनुभव को बढ़ाने और सूचना प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने के लिए ‘हज सुविधा ऐप’ लॉन्च किया गया। इस वर्ष 9,000 से अधिक शिकायतों और 2,000 से अधिक एसओएस मामलों का समाधान किया गया। इस वर्ष अब तक की सबसे अधिक संख्या 4,557 महिला तीर्थयात्रियों की रही। ‘जियो पारसी’ पारसी समुदाय की जनसंख्या में गिरावट को रोकने के लिए एक और योजना है। यह योजना 2013-14 में शुरू की गई थी। मंत्रालय ने चिकित्सा घटक के तहत वित्तीय सहायता चाहने वाले पारसी जोड़ों के लिए एक पोर्टल भी शुरू किया है। मंत्रालय द्वारा अगस्त में लोकसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 पेश किया गया। इसके बाद, विधेयक को संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) के पास भेज दिया गया है।   recent visitors 45

खंडवा के प्रसिद्ध श्री राम मंदिर में लगी भीषण आग, आसपास के मकान कराए गए खाली, फायर ब्रिगेड ने पाया काबू

खंडवा मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के भामगढ़ स्थित श्री राम मंदिर में शुक्रवार की देर रात आग लग गई। मंदिर में आग लगने के बाद पहले ग्रामीणों ने आग बुझाने की कोशिश की। लेकिन, जब आग नियंत्रित नहीं हुई तो फायर ब्रिगेड की मदद ली गई। पुलिस के मुताबिक मंदिर में आग कैसे लगी यह बात स्पष्ट नहीं हो पाई है। इस अग्निकांड में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई है, मंदिर में रखा सामान जरूर बड़ी तादाद में जल गया है। अग्निकांड के समय मंदिर में कोई था अथवा नहीं पुलिस इस बात की जानकारी जुटा रही है। आज सुबह आग पर पाया गया काबू जानकारी के अनुसार, भामगढ़ में लगभग 500 साल पुराना श्री राम मंदिर है। इस मंदिर में शुक्रवार की देर रात को अचानक आग लग गई, महज कुछ ही देर में आग ने विकराल रूप ले लिया। ग्रामीणों ने काफी देर तक आग बुझाने की कोशिश की, मगर उनके प्रयास सफल नहीं हुए। परिणाम स्वरूप फायर ब्रिगेड की गाड़ी बुलाना पड़ी और शनिवार की सुबह तक इस आग पर काबू पाया जा सका। आसपास के मकान कराए गए खाली बताया गया है कि इस पुराने मंदिर का लकड़ी का शेड और काफी पुरानी दीवार होने के कारण आग तेजी से भड़की। आग इतनी ज्यादा थी कि आसपास के मकानों को भी खाली करना पड़ा। आग कैसे लगी इस बात का खुलासा नहीं हो पाया है। इस अग्निकांड में मंदिर में रखी सामग्री जलकर खाक हो गई है। ग्रामीणों ने मंदिर परिसर से धुआं उठता देखा स्थानीय लोगों के मुताबिक शाम तक मंदिर में दर्शन करने भी बड़ी संख्या में लोग गए थे। देर रात लगभग ढाई बजे मंदिर परिसर से ग्रामीणों ने धुंआ उठते हुए देखा और फिर कुछ ही देर में आग ने आग की तेज लपटों दिखाई देने लगी। आग को बुझाने के लिए ग्रामीणों ने हर तरफ से पानी डाला गया मगर सफलता नहीं मिली। बाद में, फायर ब्रिगेड की मदद से इस आग को बुझाया जा सका। recent visitors 45