MPPSC ने प्रदेश में पहली बार दो हजार से अधिक डॉक्टरों के पदों पर मप्र लोक सेवा आयोग से भर्ती प्रारंभ की गई

भोपाल प्रदेश में पहली बार स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में विशेषज्ञों और चिकित्सा अधिकारियों के दो हजार से अधिक पदों पर मप्र लोक सेवा आयोग से भर्ती प्रारंभ की गई है। कुल 2083 पदों में 988 विशेषज्ञों के और बाकी चिकित्सा अधिकारियों के हैं। यह डॉक्टर इस वर्ष अंत तक मिलने की आशा है। विशेषज्ञों की नियुक्ति विशेषज्ञों की नियुक्ति विशेषज्ञता के अनुसार चरणबद्ध तरीके से साक्षात्कार के बाद की जाएगी। प्रत्येक विशेषज्ञता के लिए चयन सूची अलग-अलग जारी होगी। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में विशेषज्ञों के कुल तीन हजार 725 पदों से 1800 से अधिक रिक्त हैं। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि विज्ञापित पदों में से लगभग 60 प्रतिशत ही मिल पा रहे हैं। चिकित्सा अधिकारियों के 1200 से अधिक पद रिक्त वर्ष 2023 में सीधी भर्ती से विशेषज्ञों के 888 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया था, पर इनमें 506 ही मिले। कारण, एक तो आरक्षित पदों पर निर्धारित योग्यता के अनुसार डॉक्टर नहीं मिल पाते। दूसरा, जिनका चयन होता है, उनमें कुछ ज्वाइन भी नहीं करते। इसी तरह से चिकित्सा अधिकारियों के कुल पांच हजार 329 पदों में से 1200 से अधिक पद रिक्त हैं। 50 प्रतशित पद संविदा से भरने का प्रविधान स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पद विज्ञापित करने के बाद आयोग ने पिछले माह शुद्धि पत्र भी जारी किया था। इसमें 50 प्रतशित पद संविदा से भरने का प्रविधान किया गया है। संविदा के अभ्यर्थी नहीं मिलने से यह पद ओपन श्रेणी से भरे जाएंगे। इसके अतिरिक्त जिला अस्पतालों में सहायक प्रबंधक के 68 और प्रदेश भर के लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के 120 पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिस तरह से नए अस्पताल बन रहे हैं उसी के अनुरूप नए पद सृजित करने की भी प्रक्रिया भी चल रही है। recent visitors 66

सिंधु घाटी लिपि को डिकोड करने पर मिलेगा एक मिलियन डॉलर का पुरस्कार, सीएम एमके स्टालिन ने बड़ा एलान किया

चेन्नई तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने बड़ा एलान किया। उन्होंने कहा कि सिंधु घाटी की लिपि एक सदी से भी अधिक समय से एक अनसुलझी पहेली बनी हुई है। उन्होंने इसे समझने वाले को 1 मिलियन अमेरिकी डॉलर का पुरस्कार देने की घोषणा की। एग्मोर के सरकारी संग्रहालय में आयोजित सिंधु घाटी सभ्यता की खोज की शताब्दी पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन समारोह के दौरान सीएम एमके स्टालिन ने ये एलान किया। दरअसल, तीन दिवसीय संगोष्ठी में दुनिया भर के प्रसिद्ध पुरातत्वविदों, इतिहासकारों और विद्वानों ने सभ्यता के महत्व और तमिलनाडु के साथ इसके संबंधों पर चर्चा की है। वहीं, इस कार्यक्रम में अपने भाषण के दौरान सीएम स्टालिन ने कहा कि सिंधु घाटी के मिट्टी के बर्तनों पर पाए गए लगभग 60 प्रतिशत प्रतीक तमिलनाडु में खुदाई के दौरान मिली कलाकृतियों पर पाए गए प्रतीकों के समान हैं। सीएम स्टालिन ने कही ये बात उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस आश्चर्यजनक समानता ने विद्वानों के बीच काफी रुचि जगाई है और संभावित रूप से सिंधु घाटी सभ्यता के रहस्यों को उजागर कर सकती है। सीएम स्टालिन ने इस क्षेत्र में अनुसंधान को और बढ़ावा देने के लिए प्रसिद्ध पुरातत्वविद् इरावतम महादेवन के नाम पर एक शोध पीठ स्थापित करने के लिए 2 करोड़ रुपये के अनुदान की भी घोषणा की। बता दें कि ये चेयर सिंधू घाटी सभ्यता पर गहन अध्ययन की सुविधा प्रदान करेगी, जिसमें तमिलनाडु के साथ इसके संबंधों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। तमिलनाडु और सिंधु घाटी सभ्यता के बीच संबंध पर भी खोज गौरतलब है कि तूतीकोरिन के शिवकलाई से हाल ही में मिली पुरातात्विक खोजों ने शोधकर्ताओं को तमिलनाडु और सिंधु घाटी सभ्यता के बीच एक निश्चित संबंध स्थापित करने के करीब ला दिया है। इन खोजों का समय निर्धारण उन्हें 2500 ईसा पूर्व और 3000 ईसा पूर्व के बीच रखता है। खास बात है कि तमिलनाडु की खोजों से एक लौह युग की सभ्यता की उपस्थिति का पता चलता है जो सिंधु घाटी सभ्यता के समानांतर चलती थी, जो 3300 ईसा पूर्व से 1300 ईसा पूर्व तक फैली थी। वहीं, सिंधु घाटी सभ्यता ने इस दौरान मुख्य रूप से तांबे की वस्तुओं का उपयोग किया था। recent visitors 62

छत्तीसगढ़ में मार्च तक बनकर तैयार हो जाएंगे 40 हजार पीएम आवास, उपमुख्यमंत्री साव ने दिए निर्देश

 रायपुर  नगरीय प्रशासन व विकास विभाग के राज्य नगरीय विकास अभिकरण (सूडा) ने तीन माह में चालीस हजार से अधिक आवासों को पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए अधिकारियों को कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने अधिकारियों की बैठक ली थी, जिसमें अधूरे कार्यों को लेकर नाराजगी जताई थी। उन्होंने अधूरे कार्यों को जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए थे। रैपिड असेसमेंट सर्वे दरअसल, प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना- शहरी 2.0 (पीएमएवाई-यू 2.0) के अंतर्गत 192 नगरीय निकायों के हितग्राहियों को पक्के मकान से लाभान्वित करने के लिए रैपिड असेसमेंट सर्वे (संभावित पात्र हितग्राहियों का सर्वेक्षण) किया जा रहा है। निर्माण कार्य तक शुरू नहीं हो पाया इधर, प्रधानमंत्री आवास योजना- शहरी के अभी तक 41,563 आवास अधूरे पड़े हैं। करीब चार हजार का निर्माण कार्य तक शुरू नही हो पाया है। प्रधानमंत्री आवास योजना- शहरी के तहत केंद्र सरकार की ओर से 2,49,166 आवास की स्वीकृत मिली थी। इसमें से अब तक 2,03,654 पूर्ण हो चुके हैं। पीएमएवाई-यू 2.0 में बढ़े 22 निकाय पीएमएवाई-यू 2.0 में 13 जिलों में 22 निकाय बढ़े हैं। पहले चरण में 170 निकाय शामिल थे, जो अब बढ़कर 192 हो गए हैं। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के पहले चरण में वंचित शहर और कस्बों को दूसरे चरण में शामिल के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार ने भी नगर निगम के सभी आयुक्तों और नगर पालिका परिषदों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को पत्र जारी कर पहले चरण में वंचित शहरों और कस्बों को आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय से मंजूरी के बाद दूसरे चरण में शामिल करने के निर्देश दिए है। केंद्र और राज्य सरकार की मंशानुसार सभी पात्र हितग्राहियों को आवास आवंटित किया जाना है। सर्वे के बाद पात्रता परीक्षण कराया जाएगा। इसके लिए संयुक्त समिति का गठन किया जाएगा।     recent visitors 62

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा- मध्य प्रदेश की सड़कों पर फिर से दौड़ेंगी सरकारी बसें

भोपाल मध्य प्रदेश वासियों के लिए दो दशक पहले बंद की गई राज्य सरकार संचालित बस सेवाएं फिर से शुरू की जाएंगी. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बस सुविधा शुरू करने का ऐलान किया. मुख्यमंत्री विदिशा जिले के लटेरी कस्बे में सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि गरीबों को बस सेवाओं की आवश्यकता होती है. संपन्न लोगों के पास खुद की गाड़ियां होती हैं. पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, "याद कीजिए, 20 साल पहले की स्थिति. सड़कों पर राज्य परिवहन निगम की बसें दौड़ा करती थीं. परिवहन निगम की बस सेवाओं की फिर से आवश्यकता है. हम सरकारी बस सेवाएं दोबारा शुरू करने जा रहे हैं." हालांकि, उन्होंने बस शुरू करने की समय सीमा नहीं बताई. बता दें कि दो दशक पहले मध्य प्रदेश में सरकारी बस सेवाओं को बंद कर दिया गया था. बस बंद होने के बाद मार्गों पर निजी ऑपरेटर्स का कब्जा हो गया है. बड़े शहरों में बस सेवा नगर निगमों की तरफ से संचालित की जाती हैं. गौरतलब है कि लोक परिवहन सेवा गरीब लोगों के सस्ती होती है. मध्य प्रदेश की सड़कों पर फिर से दौड़ेंगी सरकारी बसें सरकारी बसों के संचालन से मध्य प्रदेश की जनता को बुनियादी सुविधा मिलने लगेगी. आम जनता को सस्ती और सुलभ यातायात सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए गठित मध्य प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम को 2005 में बंद कर दिया गया था. लिहाजा, सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई. यात्रियों को भारी परेशानी होने लगी. परिवहन व्यवस्था पर निजी ऑपरेटर्स ने कब्जा जमा लिया. प्राइवेट बस ऑपरेटर्स मुनाफा वाले रूट पर सेवाएं देने लगे. ग्रामीण इलाकों में यात्री बस की सुविधा नदारद हो गई. यात्रियों की असुविधा को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सरकारी बसों को शुरू करने ऐलान किया. recent visitors 76

प्रियंका गांधी को लेकर रमेश बिधूड़ी के विवादित बयान पर भड़के सचिन पायलट, कहा- ‘BJP के नेताओं की…’

Ramesh Bidhuri Controversy: कांग्रेस नेता सचिन पायलट के मुताबिक बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व जो महिला सशक्तिकरण का झूठा दम भरता है, वो सबसे पहले अपने नेताओं को महिलाओं का सम्मान करना सिखाए. Ramesh Bidhuri On Priyanka Gandhi: दिल्ली विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को लेकर बीजेपी के पूर्व सांसद रमेश बिधूड़ी के विवादित टिप्पणी ने सियासी तल्खी बढ़ा दी है. अब कांग्रेस महासचिव संचिन पायलट ने इसको लेकर बीजेपी और रमेश बिधूड़ी की तीखी आलोचना की है. उन्होंने कहा कि बीजेपी के पूर्व सांसद का बयान उनके महिला विरोधी सोच का प्रतीक है.  राजस्थान के टोंक से विधायक सचिन पायलट ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा, “भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की सोच निम्न स्तर पर पहुंच गई है. बीजेपी नेता महिलाओं का आदर करना तो दूर, उनके लिए अशोभनीय शब्दों का प्रयोग कर अपनी असली मानसिकता दिखा रहे हैं.” उन्होंने अपने एक्स पोस्ट में आगे लिखा, “केरल के वयनाड से कांग्रेस सांसद और AICC महासचिव प्रियंका गांधी पर बीजेपी नेता रमेश बिधूड़ी द्वारा की गई अमर्यादित टिप्पणी की मैं कड़े शब्दों में निंदा करता हूं. बीजेपी की महिला विरोधी सोच उसके नेताओं की तुच्छ शब्दावली से साफ झलकती है. बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व जो महिला सशक्तिकरण का झूठा दम भरता है, उसे पहले अपने नेताओं को महिलाओं का सम्मान करना सिखाना चाहिए.” बिधूड़ी ने मांगी माफी  दरअसल, रविवार (5 जनवरी)  दिल्ली के कालकाजी में चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी के पूर्व सांसद और प्रत्याशी रमेश बिधूड़ी ने प्रियंका गांधी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी. उन्होंने कहा था, ‘लालू यादव ने वादा किया था बिहार की सड़कों को हेमा मालिनी के गालों जैसा बना दूंगा, लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाए. मैं आपको विश्वास दिलाता हूं, जैसे ओखला और संगम विहार की सड़कें बना दी हैं. वैसे ही कालकाजी में सारी की सारी सड़कें प्रियंका गांधी के गाल जैसी बना दूंगा.’  हालांकि, इस मसले पर विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने माफी मांग ली. उन्होंने कहा, “अगर मेरी टिप्पणी से किसी को ठेस पहुंची है, तो मैं इस पर खेद व्यक्त करता हूं. अपने शब्द वापस लेता हूं. उन्हों ये भी कहा कि उनका मकसद किसी को अपमानित करना नहीं था.”  recent visitors 267

सीएम योगी करेंगे 11 जनवरी को 11 बजे रामलला का अभिषेक, भजन भी होगा लॉन्च, 13 जनवरी तक प्रतिष्ठा द्वादशी का आयोजन

अयोध्या भव्य मंदिर में रामलला के विराजमान होने के एक वर्ष पूरे होने पर अयोध्या में 11 से 13 जनवरी तक प्रतिष्ठा द्वादशी का आयोजन होगा। 11 जनवरी को पहले दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 11 बजे गर्भगृह में श्रीरामलला का अभिषेक करेंगे। उसके बाद अंगद टीला पर होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम का उद्घाटन कर श्रद्धालुओं को संबोधित भी करेंगे। उसी दिन सोनू निगम, शंकर महादेवन और मालिनी अवस्थी समेत कई मशहूर कलाकारों द्वारा गाया गया भजन भी रिलीज किया जाएगा। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म के अधिष्ठाता मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम जी के जन्म स्थान अयोध्या धाम में नवनिर्मित मंदिर की स्थापना का एक वर्ष 11 जनवरी को संपन्न हो रहा है। इस दौरान 13 जनवरी तक उत्सव मनाया जाएगा। इसकी तैयारियां तेजी से चल रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 11 जनवरी को रामलला का अभिषेक करेंगे। महोत्सव के मद्देनजर नगर के प्रमुख चौराहों लता चौक, जन्मभूमि पथ, श्रृंगार हाट, राम की पैड़ी, सुग्रीव किला, छोटी देवकाली समेत अन्य स्थलों पर कीर्तन भी होगा। इसमें युवा कलाकार वाद्य यंत्रों से नगरी को मंत्रमुग्ध कर देंगे। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि इस अवसर पर तीन दिवसीय श्रीराम राग-सेवा का कार्यक्रम मंदिर परिसर में गर्भगृह के निकट मंडप में संपन्न होगा। इसमें प्रभु श्रीराम की भक्ति के प्रति विनीत भाव से संगीत, नृत्य और वादन से उन्हें सेवा प्रदान करने का उपक्रम होगा। अनुष्ठान के परिकल्पनाकार और समन्वयक अयोध्या के कलाविद् यतीन्द्र मिश्र हैं। इस कार्य में उनका सहयोग संगीत नाटक अकादमी कर रहा है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि सभी संतों को बुलाया गया है। अयोध्या से बड़ी संख्या में लोग महाकुंभ में गए हैं। उन्होंने आग्रह किया कि तीन दिन के कार्यक्रम में एक दिन लोग अयोध्या पहुंचकर कार्यक्रम में शामिल हों। पहला दिन : 11 जनवरी को लता मंगेशकर की बहन व प्रख्यात गायिका उषा मंगेशकर और मयूरेश पई भगवान के सम्मुख भजन से राग-सेवा का आरंभ करेंगी। इसके बाद साहित्य नाहर सितार व संतोष नाहर वायलिन की जुगलबंदी से भक्ति का कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे। पहले दिन का समापन डॉ. आनंदा शंकर जयंत के भरतनाट्यम नृत्य की प्रस्तुति से होगा। दूसरा दिन : 12 जनवरी को महोत्सव की शुरुआत राग सेवा प्रसिद्ध लोक गायिका शैलेश श्रीवास्तव के बधावा, सोहर गायन से होगी। इसके बाद प्रख्यात शास्त्रीय गायिका कलापिनी कोमकली श्री राम भजन व निर्गुण गायन से राग-सेवा प्रस्तुत करेंगी। कार्यक्रम का समापन विश्वविख्यात बांसुरी वादक राकेश चौरसिया के बांसुरी वादन से होगा। तीसरा दिन : तीसरे व अंतिम दिन 13 जनवरी को राग-सेवा का आरंभ आरती अंकलिकर के शास्त्रीय गायन से होगा, जिसके बाद प्रख्यात कथक नृत्यांगना शोभना नारायण की कथक प्रस्तुति होगी। अंत में दक्षिण के गायक श्रीकृष्ण मोहन एवं श्रीराम मोहन त्रिचूर ब्रदर्स के शास्त्रीय गायन व श्रीराम भजन से कार्यक्रम संपन्न होगा। recent visitors 70

महाकुंभ स्थल की जमीन को वक्फ की संपत्ति करार दिया, मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने किया बड़ा दावा

बरेली प्रयागराज में महाकुंभ 2025 की तैयारी अपने अंतिम चरण में है। महाकुंभ मेले में मुस्लिमों के प्रवेश और दुकानें लगाने को लेकर बयानबाजी तेज है।इस बीच उत्तर प्रदेश के बरेली में ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी बड़ा दावा करते हुए महाकुंभ स्थल की जमीन को वक्फ की संपत्ति करार दिया। मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने रविवार को एक बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि मुसलमानों ने हमेशा बड़ा दिल दिखाया है और उसके सबूत दिए हैं। उसकी मिसालें भी बहुत सारी मिलेंगी। महाकुंभ मेले में अखाड़ा परिषद, नागा संन्यासियों और स्वामी बाबाओं ने मुसलमानों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया। लेकिन खुद प्रयागराज के जो मुसलमान हैं, उनमें से एक सरताज ने इस बात की जानकारी दी कि जिस जमीन के ज्यादातर हिस्से पर शामियाने और तंबू लगाए गए हैं, वो जमीन वक्त की है और वहां के मुसलमानों की है। ये जमीन लगभग 54 बीघा है। उन्होंने आगे कहा कि इसके बाद भी मुसलमानों की दरियादिली देखिए कि उन्होंने बड़ा दिल दिखाते हुए मेले की तैयारियों पर कोई आपत्ति नहीं की है। मगर अखाड़ा परिषद और दूसरे बाबा लोगों की तंग दिली देखिए कि वे मेले में मुसलमानों के प्रवेश पर पाबंदी लगा रहे हैं। मेले में मुसलमानों को दुकानें लगाने के लिए मना कर रहे हैं। वक्फ की 55 बीघा जमीन पर मेला लग रहा है। इन तमाम चीज़ों को बहुत गौर से साधु संतों को सोचना चाहिए। उन्हें इस तरह की सोच को छोड़नी होगी, मुसलमानों की तरह बड़ा दिल दिखाना होगा। वहां के जो जिम्मेदार लोग हैं उन लोगों को इस पर गौर करना चाहिए। recent visitors 109