Tuesday, July 7, 2026 12:18 am

प्लास्टिक फ्री सिटी की ओर राजधानी… ढाई साल पहले खंती पर आती थी 12 टन पॉलीथिन, अब सिर्फ 8 टन

The capital is moving towards a plastic free city… 12 tonnes of polythene used to come to the mine two and a half years ago, now only 8 tonnes भोपाल । राजधानी के बाजारों से धीरे-धीरे पॉलीथिन कम होने लगी है। इनकी जगह कंपोस्टेबल बैग ले रहे हैं। असर भी दिखने लगा है। ढाई साल पहले शहर से निकलने वाले कचरे में 12 टन पॉलीथिन रहती थी। मौजूदा समय में आदमपुर खंती पर रोजाना लगभग 8 टन ही पॉलीथिन पहुंच रही है। कंपोस्टेबल बैग का सबसे ज्यादा इस्तेमाल रेस्त्रां, शॉपिंग मॉल और डिपार्टमेंटल स्टोर्स में हो रहा है। शहर में रोज करीब डेढ़ टन कंपोस्टेबल बैग की खपत होती है। भुट्टे के स्टार्च यानी माड़ को प्रोसेस करके कंपोस्टेबल बैग बनाए जाते हैं। यदि जानवर इन्हें खा लें तो उनको भी नुकसान नहीं होता है। यह पॉलीथीन से होने वाले प्रदूषण के मुकाबले हानिकारक नहीं है। ये अधिकतम 6 महीने में मिट्टी में घुल जाते हैं। भुट्टे की माड़ से बनने के कारण ये रिन्युएबल होते हैं, यानी इनका उत्पादन दोबारा से किया जा सकता है। बायोडिग्रेडेबल से थोड़े अलग हैं कंपोस्टेबल बैग … एक्सपर्ट्स का कहना है कि बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक से कंपोस्टेबल बैग थोड़े अलग होते हैं। कंपोस्टेबल बैग जल्द मिट्टी में घुल जाते हैं जबकि बायोडिग्रेडेबल को 6 महीने से ज्यादा का समय लगता है। हालांकि दोनों पर्यावरण हितैषी होते हैं। फायदा- पॉलीथिन से सस्ता किलो के हिसाब से देखें तो कंपोस्टेबल बैग पॉलीथिन के मुकाबले 20 रुपए तक सस्ता है। यह प्रति किलो 130 रुपए में मिलता है, वहीं, पॉलीथिन 150 रुपए प्रतिकिलो तक है। एक किलोग्राम कंपोस्टेबल बैग में करीब 200 पीस आते हैं। फिलहाल भोपाल में कंपोस्टेबल बैग बनाने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से दो प्लांट को लाइसेंस दिया गया है। इसके अलावा बाहर से भी शहर में कंपोस्टेबल बैग आ रहे हैं। पॉलीथिन में 30% कमी, कपड़े के बैग भी बढ़ रहे पॉलीथिन के इस्तेमाल में करीब 30% कमी देखने को मिली है। मॉल्स और डिपार्टमेंटल स्टोर के अलावा कई दुकानदार भी कंपोस्टेबल बैग में सामान दे रहे हैं। 30% ग्राहक कपड़े या जूट का थैला लेकर बाजार पहुंच रहे हैं। पॉलीथिन के उपयोग में कमी का एक यह भी बड़ा कारण है। देवेंद्र सिंह चौहान, एडीसी नगर निगम recent visitors 159

क्या पट्टा धारकों की सम्पत्ति का पट्टा रिन्यूअल करेंगे मुख्यमंत्री और भाजपा सरकार।

Will the Chief Minister and the BJP government renew the lease of the property of the lease holders? भोपाल। मप्र में अर्जून सिंह सरकार समय तथा दिग्विजय सिंह सरकार समय लाखों लोगों को देकर आशियाने के अधिकार वैधानिक रूप में दिए। दिग्विजय सिंह शासन काल में तो पति-पत्नी को संयुक्त रुप से दिया गया था। पट्टो का नवीनीकरण किया जाना है, पट्टों में नामांतरण किया जाना है क्योंकि मूल पट्टे धारक की मृत्यु होने पर उसके वारिसों के नाम चढ़ना है,,, पंरतु भाजपा सरकार जो मप्र में सन् 2003 से काबिज हैं उसके व्दारा इस बाबद प्रशासनिक अधिकारियों व्दारा तैयारी धरातल पर नहीं कि जा रही है। सन् 1980 और 1994 के समय दिये गये पट्टो की समयावधि 30साल की थी इस प्रकार 1980 के पट्टो की समयावधि 2010 में तो 1994 के 2024 में समाप्त हो चुकी है। डॉ मोहन यादव मुख्यमंत्री बताए क्या इन पट्टे धारकों को सरकार ध्यान देकर कानूनी मान्यता देगी। क्या कांग्रेस सरकार की सौगात समझकर भाजपा कदम नहीं उठा रही। क्या ये सब भारत के नागरिक नहीं है। लेखक  प्रमोद कुमार व्दिवेदी एड्वोकेट प्रवक्ता मप्र कांग्रेस कमेटी recent visitors 97