Tuesday, July 7, 2026 7:36 am

मानव और प्रकृति के कल्याण के लिए वन्य जीवों के संरक्षण का संकल्प लें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मानव और प्रकृति के कल्याण के लिए वन्य जीवों के संरक्षण का संकल्प लें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने विश्व वन्य जीव दिवस पर प्रदेशवासियों से किया आह्वान भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों से विश्व वन्य जीव दिवस पर मानव और प्रकृति के कल्याण के लिए वन्य जीवों के संरक्षण का संकल्प लेने का आव्हान किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वन्य जीवों की विविधता और उनका अस्तित्व हमारे पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ और समृद्ध पर्यावरण सुनिश्चित करना हमारा कर्तव्य है। इस दायित्व का हम पूर्ण प्रतिबद्धता से निर्वहन करें।   recent visitors 45

इन आसान तरीकों से आसानी से करें लॉक आधार कार्ड

नई दिल्ली आधार कार्ड आज के वक्त का सबसे जरूरी दस्तावेज है। आधार कार्ड में बॉयोमेट्रिक डिटेल मौजूद होती है, जिसकी मदद से फ्रॉड को अंजाम दिया जा सकता है। ऐसे में आधार कार्ड को लॉक करना जरूरी हो जाता है। अगर आप आधार की बायोमेट्रिक डिटेल को लॉक कर देते हैं, तो आपको एक एक्स्ट्रा लेयर सिक्योरिटी मिल जाती है। आधार कार्ड लॉक करने पर आपकी परमिशन के बिना आपके प्रिंट और आईरिस स्कैन का वेरिफिकेशन किया जा सकेगा। यह आपके आधार से जुड़ी एक्टिविटी पर कंट्रोल रखने में मदद करता है। आधार लॉक के प्रॉसेस को आसानी से ऑनलाइन किया जा सकता है। आइए जानते हैं कि आखिर इस फीचर को कैसे एक्टिवेट किया जाए? आधार बायोमेट्रिक लॉक आधार बायोमेट्रिक लॉक आपके फिंगरप्रिंट, आईरिस स्कैन और फेस डेटा के दुरुपयोग से बचाने के लिए शुरू किया गया है। यह एक सिक्योरिटी फीचर है। इस लॉक को एक्टिवेट करने से कोई भी आपकी परमिशन के बिना आईडी वेरिफिकेशन, वित्तीय लेनदेन या सिम कार्ड जारी नहीं कर पाएगा। यूजर UIDAI पोर्टल या mAadhaar एप्लीकेशन के जरिए किसी भी समय बायोमेट्रिक्स को लॉक या अनलॉक कर सकते हैं। आधार बायोमेट्रिक्स को ऑनलाइन कैसे लॉक करें अपने आधार बायोमेट्रिक्स को लॉक करने के लिए आपको सबसे पहले एक आधार वर्चुअल ID (VID) जेनरेट करना होगा। ऐसा करने के लिए आप UIDAI की ऑफिशियल वेबसाइट पर लॉग इन कर सकते हैं और 'VID जेनरेटर' ऑप्शन पर क्लिक कर सकते हैं।   सबसे पहले UIDAI myAadhaar पोर्टल पर जाएं।     इसके बाद नीचे स्क्रॉल करें और 'लॉक/अनलॉक आधार' ऑप्शन पर क्लिक करें।     फिर आपको 'Next' ऑप्शन पर क्लिक करना होगा।     आधार वर्चुअल ID (VID)     पूरा नाम     पिन कोड     कैप्चा कोड     फिर OTP वेरिफाई करें। वेरिफिकेशन के बाद आपका आधार बायोमेट्रिक्स लॉक हो जाएगा।     यह सिक्योरिटी फंक्शन आपके आधार डिटेल को सुरक्षित रखता है। साथ ही प्रोटेक्शन की एक एडिशनल लेयर देता है। mAadhaar ऐप से आधार बायोमेट्रिक्स कैसे करें लॉक     सबसे पहले Google Play Store या Apple ऐप स्टोर से mAadhaar ऐप डाउनलोड करें।     इसके बाद ऐप पर रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से लॉगिन करें।     फिर 'my aadhaar' आइकन पर क्लिक करें।     अपना आधार नंबर, कैप्चा कोड दर्ज करें और OTP वेरिफिकेशन पूरा करें।     अपने आधार बायोमेट्रिक्स को लॉक करने के लिए 'बायोमेट्रिक लॉक' ऑप्शन चुनें।     एक बार चालू होने पर, यह फीचर आपके फिंगरप्रिंट, आईरिस और फेस डेटा को गैरजरूरी एक्सेस से बचाता है। SMS से बायोमेट्रिक्सकैसे करें लॉक अगर आप अपने आधार बायोमेट्रिक्स को लॉक करना चाहते हैं, लेकिन आपके पास इंटरनेट एक्सेस नहीं है, तो आप SMS की मदद से आसानी से बायोमेट्रिक लॉक कर सकते हैं।     अपने आधार से लिंक मोबाइल नंबर से 1947 पर एक [GETOTP (space) aadhaar Last 4 digits] मैसेज भेजें।     फिर SMS से ओटीपी वेरिफाई करें।     अगर आपका फोन नंबर कई आधार नंबर से लिंक है, तो लास्ट 4 की जगह आखिरी 8 अंकों का यूज करें।     इस तरह आपका बायोमेट्रिक्स लॉक हो जाएगा। recent visitors 57

हाई कोर्ट बोला- स्कूल शिक्षा विभाग निजी स्कूलों में नहीं लेगा 5वीं और 8वीं की परीक्षा

रायपुर स्कूल शिक्षा विभाग को हाई कोर्ट से झटका लगा है. विभाग के आदेश को दरकिनार करते हुए पांचवी एवं आठवीं की केंद्रीयकृत परीक्षाओं से निजी स्कूलों को अलग कर दिया है. हाई कोर्ट जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने यह फैसला छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के साथ अन्य दो याचिकाओं पर दिया है. वक़ील शरद मिश्रा ने बताया कि हाई कोर्ट के फैसले के बाद अब स्कूल शिक्षा विभाग निजी स्कूलों में पांचवी एवं आठवीं की परीक्षाएं नहीं लेगा. हमेशा की तरह निजी स्कूल ही परीक्षा आयोजित करेंगे. इसके अलावा जो निजी स्कूल केंद्रीयकृत परीक्षा में शामिल होना चाहते हैं, वे शामिल हो सकते हैं. दरअसल, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल से मान्यता प्राप्त स्कूलों में इसी सत्र से 5वीं और 8वीं की परीक्षा लेने का शिक्षा विभाग का आदेश के खिलाफ निजी स्कूल के साथ अभिभावकों ने हाई कोर्ट में याचिका लगाई गई थी. मामले में निजी स्कूल एसोसिएशन का कहना था कि उन्होंने पहले ही शिक्षा विभाग को लिखकर दिया था कि वो सीजी समग्र एवं मूल्यांकन पैटर्न पर बच्चों को पढ़ा रहे हैं. अब तक इन कक्षाओं के होम एग्जाम हुआ करते थे, लेकिन सत्र के आखिर में पांचवीं और आठवीं की परीक्षा आयोजित करने की बात कही गई थी, जिसके खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है. बता दें कि 2010-11 में कक्षा पांचवी, आठवीं की बोर्ड परीक्षा को समाप्त किया गया था. लेकिन बोर्ड परीक्षा बंद करने से विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता पर असर को देखते हुए फिर से केंद्रीयकृत परीक्षा लेने का फैसला लिया गया था. इस संबंध में प्रदेश सरकार के फैसले के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने 3 दिसंबर 2024 को कक्षा 5वीं और 8वीं की केंद्रीकृत परीक्षा लेने सभी कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देश जारी किया था. recent visitors 36

मध्यप्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र 2025-26 की शुरुआत 1 अप्रैल से होगी

भोपाल मध्यप्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र 2025-26 (academic session 2025-26) की शुरुआत 1 अप्रैल से होगी। इस अवसर पर सभी हायर सेकंडरी और हाईस्कूलों में प्रवेशोत्सव मनाया जाएगा। स्कूलों को सजाया जाएगा और छात्रों के स्वागत के लिए बाल सभा का आयोजन होगा। शिक्षा विभाग ने निर्देश दिए हैं कि 25 मार्च तक कक्षाओं में नामांकन की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। 10 मार्च को प्राचार्यों की बैठक जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) डी.डी रजक ने बताया कि 10 मार्च को प्राचार्यों की बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें नए सत्र की गतिविधियों को समय पर संचालित करने और कक्षा 8 से 11 तक के परीक्षा परिणाम 20 मार्च तक घोषित करने के निर्देश दिए जाएंगे। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि विद्यार्थियों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए स्कूलों को विशेष प्रयास करने होंगे। गणित, हिंदी और अंग्रेजी पर स्पेशल फोकस शैक्षणिक कैलेंडर academic session 2025-26 calendar) के अनुसार, कक्षा 9 और 10 के छात्रों को गणित, हिंदी और अंग्रेजी विषयों का स्पेशल अभ्यास कराया जाएगा। गणित में गुणा, भाग, भिन्न और ज्यामिति से जुड़े प्रश्नों का अभ्यास होगा। हिंदी में श्रुतलेख, मात्रा की त्रुटियों में सुधार कराया जाएगा, जबकि अंग्रेजी में शब्दकोष (dictionary) से शब्द, अपठित गद्यांश (unread passages) और व्याकरण पर ध्यान दिया जाएगा। छात्रों की सुविधाओं का ध्यान शिक्षा विभाग ने निर्देश दिया है कि पात्र विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तक, छात्रवृत्ति, साइकिल आदि सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। ये सभी सुविधाएं पोर्टल पर अपडेशन के बाद प्रदान की जाएंगी। साथ ही, उन छात्रों की पहचान कर स्कूल वापस लाने के प्रयास किए जाएंगे, जो पिछले दो सालों से पढ़ाई से दूर हैं। प्रत्येक शिक्षक को ऐसे 10 छात्रों की जिम्मेदारी दी जाएगी, जिनका भौतिक सत्यापन 10 अप्रैल तक पूरा किया जाना है। पेरेंट्स की बैठक 17 मार्च को शाला प्रबंध समिति और पेरेंट्स की बैठक 17 मार्च को आयोजित की जाएगी। इसमें प्रत्येक विद्यार्थी के माता-पिता को बुलाकर उनके बच्चे की प्रगति पर चर्चा की जाएगी। राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक हरजिंदर सिंह ने कहा कि सभी तैयारियां समय पर पूरी कर ली जाएंगी ताकि नए सत्र की शुरुआत सुचारू रूप से हो सके। recent visitors 32

MP के खेतों में अभी गेहूं की फसल हरी, दाना परिपक्व नहीं, तापमान बढ़ने पर समय से पहले पकने की आशंका

भोपाल  मौसम का सबसे बड़ा ग्राहक किसान होता है। मौसम जब मौज में होता है, तो किसानों का मन प्रफुल्लित हो उठता है। मौसम का मिजाज बिगड़ने का सीधा प्रभाव भी सबसे पहले किसान पर ही होता है। मौसम विभाग ने मार्च में ही लू जैसे हालात बनने की चेतावनी दी है। आशंका है कि अगर मार्च में ही इतनी गर्मी बढ़ी तो गेहूं की फसल को बड़ा नुकसान हो सकता है। इससे गेहूं का उत्पादन 15 से 20 प्रतिशत तक कम हो जाएगा। फसलों की कटाई अब होगी शुरू जिले में रबी फसलों की कटाई का दौर मार्च माह में शुरू होगा। इसके तहत 10 से 15 मार्च के बीच फसलों की कटाई प्रारंभ होगी, जो 15 अप्रेल तक चलेगी। हालांकि अगेती फसलों की कटाई इस माह के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है। गेहूं का दाना छोटा रहने पर समर्थन मूल्य पर खरीद में परेशानी होती है। पिछले साल भी काश्तकारों को इसी परेशानी का सामना करना पड़ा था। उत्पादन में पडेगा फर्क, जल्दी पक जाएगी फसल तापमान में बढ़ोतरी के कारण गेहूं और जौ की फसल में फर्क पड़ेगा। दाना तो बन जाएगा, लेकिन जल्दी पक जाएगा। इससे उत्पादन में 5-7 प्रतिशत घट सकता है। इसके अलावा अन्य फसलों में कुछ फर्क नहीं पड़ेगा। अच्छी पैदावार की उम्मीदों पर फिर सकता है पानी     भोपाल के ग्राम सलैया निवासी कामता पाटीदार ने बताया कि उन्होंने विदिशा जिले के ग्राम दुलई में अपनी 50 एकड़ जमीन में गेहूं की बोवनी की है। धान की फसल लेने के कारण बोवनी जनवरी में हो सकी थी। अभी खेत में गेहूं की हरी फसल खड़ी है। अब बढ़ती धूप देखकर फसल के जल्दी पकने की आशंका है।     खजूरीकला के किसान मिश्रीलाल राजपूत ने बताया कि जनवरी में ठीक ठाक ठंड पड़ने के कारण इस बार गेहूं की अच्छी पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन हरी फसल के दौरान धूप के तीखे तेवर देखकर अरमानों पर पानी फिरता दिख रहा है।     मध्य प्रदेश के किसानों ने वर्ष 2024-25 के रबी सीजन में 138.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में फसल लगाई है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा गेहूं का है। सामान्य मौसम में सरकारी एजेंसियों ने इस साल 80 लाख टन गेहूं उत्पादन का अनुमान लगाया है। नहीं हो पाता है दानों का पूरा विकास बढ़ते तापमान से गेहूं की बढ़वार रुक जाती है. फसल की लंबाई कम होती है और यह जल्दी पक जाती है. गेहूं में बालियां लगने के बाद दाना भरने के लिए कुछ समय चाहिए होता है. मौसम परिवर्तन के कारण तेज हवा चलती है और तापमान बढ़ जाता है, तो पुष्पन क्रिया शीघ्र हो जाती है. गेहूं की बालियों में दाने नहीं भर पाते हैं. दानों को मजबूती नहीं मिल पाती है, क्योंकि तापमान में तेजी से वृद्धि के कारण दानों का पूरा विकास नहीं हो पाता है और समय से पहले ही दाने परिपक्व हो जाते हैं. दाना कमजोर पड़ जाता है. इससे गेहूं की गुणवत्ता और उपज दोनों पर असर पड़ता है. गेहूं की फसल में ये काम करें गेहूं और जौ की फसलों को बढ़ते तापमान प्रभाव से बचाने के लिए दाना भराव और दाना निर्माण की अवस्था पर सीलिसिक अम्ल 15 ग्राम प्रति 100 लीटर का फॉलियर स्प्रे करना चाहिए. सीलिसिक अम्ल का पहला छिड़काव बलियां निकलते समय और दूसरा छिड़काव दूधिया अवस्था पर करने से काफी लाभ मिलेगा. सीलिसिक अम्ल गेहूं को प्रतिकूल परिस्थितियों में लड़ने की शक्ति प्रदान करता है और निर्धारित समय पूर्व पकने में मदद करता है. इससे उपज में गिरावट नहीं होती है. गेहूं और जौ की फसल में जरूरत के अनुसार, बार-बार हल्की सिंचाई करनी चाहिए. इसके अलावा, 0.2 प्रतिशत म्यूरेट ऑफ पोटाश या 0.2 प्रतिशत पोटेशियम नाइट्रेट का 15 दिनों के अंतराल पर दो बार छिड़काव किया जा सकता है. तापमान से नुकसान से बचने के उपाय गेहूं और जौ की फसलों में बाली आने पर एस्कॉर्बिक अम्ल के 10 ग्राम प्रति 100 लीटर पानी का घोल छिड़काव करने से अधिक तापमान होने पर भी नुकसान नहीं होगा. गेहूं की पछेती बोई फसल में पोटेशियम नाइट्रेट 13:0:45, चिलेटेड जिंक, चिलेटेड मैंगनीज का छिड़काव भी फायदेमंद होता है. वातावरण में बदलाव के कारण गेहूं की फसल में झुलसा रोग का प्रकोप दिखाई दे रहा है तो इसके नियंत्रण के लिए किसानों को प्रोपिकोनाजोल की एक मिलीलीटर मात्रा प्रति लीटर पानी के घोल को दो बार 10 से 12 दिनों के अंतराल पर छिड़काव करना चाहिए. दाना पतला पड़ने से पैदावार प्रभावित होगी     मध्य प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में किसानों का रुझान धान की खेती की तरफ बढ़ा है। धान की कटाई दिसंबर तक होने के कारण गेहूं की बोवनी भी देरी से हो पाती है। इस वजह से अभी गेहूं की फसल हरी है। यह समय दाना के परिपक्व होने का है। तापमान बढ़ने के कारण फसल जल्दी पकने लगेगी। इससे गेहूं का दाना पतला रह जाएगा। इससे गेहूं के उत्पादन में भी 15 से 20 प्रतिशत तक की गिरावट होने की संभावना है। – डॉ. जीएस कौशल, पूर्व संचालक, कृषि विभाग, भोपाल   recent visitors 31

मध्यप्रदेश के प्राइवेट स्कूलों में RTE के तहत पढ़ रहे बच्चों को कक्षा 12वीं तक मुफ्त शिक्षा का लाभ मिलने की संभावना

भोपाल  मध्यप्रदेश के प्राइवेट स्कूलों में शिक्षा का अधिकार कानून (RTE) के तहत पढ़ रहे बच्चों को कक्षा 12वीं तक मुफ्त शिक्षा का लाभ मिलने की संभावना है. अभी शिक्षा का अधिकार कानून के तहत कक्षा 8 वीं तक ही बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दी जाती है. अब बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने मुख्यमंत्री के सामने प्रदेश में इसका दायरा 12 वीं तक किए जाने और परिवार के साथ पलायन करने वाले आदिवासी बच्चों को दूसरे जिलों में शिक्षा का लाभ दिलाने की व्यवस्था शुरू करने की मांग की है. इस मामले में मुख्यमंत्री ने कहा "कार्यक्रम में मंत्री मौजूद हैं, वह इन विषयों को गंभीरता से समझेंगी." कार्यशाला में मुख्यमंत्री के सामने रखी मांग मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव  कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अनिनियम, पॉस्को को लेकर आयाजित कार्यशाला के शुभारंभ में पहुंचे. कार्यक्रम में मंत्री निर्मला भूरिया भी मौजूद थीं. इसी कार्यक्रम में बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष देवेन्द्र मोरे ने सरकार से मांग की "नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा के अधिनियम के तहत बच्चों को अभी कक्षा 8 वीं तक लाभ दिया जाता है, लेकिन इसके दायरे को बढाकर कक्षा 12 वीं तक किया जाना चाहिए. इससे कक्षा 8 वीं के बाद बच्चों को शिक्षा से वंचित नहीं होना पड़ेगा. प्रदेश में अभी 15 लाख बच्चे आरटीई से लाभान्वित हो रहे हैं. प्रदेश में इस 84 हजार से ज्यादा बच्चे 8 वीं क्लास में पढ़ रहे हैं. हालांकि यह विषय केन्द्र का है, लेकिन राज्य सरकार इसे अमल में लाकर नवाचार कर सकती है." आदिवासी इलाकों के बच्चों के लिए भी मांग बाल संरक्षण आयोग का कहना है "इसके अलावा मध्यप्रदेश के 89 ब्लॉक ट्राइबल के हैं. ट्राइबल बच्चों के बच्चे मजबूरी के चलते परिवार के साथ पलायन करते हैं. सरकार को पलायन के बाद दूसरे जिले या प्रदेश में पहुंचने पर बच्चे को शिक्षा का लाभ मिल सके, इसकी व्यवस्था की जाए. हालांकि पिछले साल राज्य शिक्षा केन्द्र ने मध्यप्रदेश से गुजरात पहुंचने आदिवासी क्षेत्र के बच्चों के लिए गुजरात 12 हजार किताबों के सेट पहुंचाए थे." मुख्यमंत्री ने विभागीय मंत्री पर छोड़ा मामला कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा "2018 से 2024 के बीच मध्यप्रदेश में महिला एवं बाल अपराध के मामले में 48 प्रकरण में मृत्युदंड दिया गया है. राज्य सरकार हमेशा ऐसे मामलों को लेकर बेहद सख्त है. जिस समाज में यदि बच्चे, बच्चियां, महिलाएं सुरक्षित हैं, तभी देश का भविष्य है. ऐसे अपराधों से निपटने के लिए सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है. समाज भी अपनी जिम्मेदारी निभाए." मुख्यमंत्री ने बाल अधिकार आयोग की मांग को लेकर कहा "जो मुद्दा आपने उठाया है, उस क्षेत्र की मंत्री निर्मला भूरिया कार्यक्रम में मेरे जाने के बाद भी मौजूद रहेंगी, वह इसे और अच्छे से समझेंगी." recent visitors 26

मध्यप्रदेश को वुल्फ स्टेट का दर्जा दिलाने में नौरादेही का अहम योगदान, यहां पर भेड़ियों पर रिसर्च भी चल रही

सागर  देश में सबसे ज्यादा भेड़िये मध्यप्रदेश में है. खास बात ये है कि मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही) भारतीय भेड़ियों के प्राकृतिक आवास के तौर पर जाना जाता है. मध्यप्रदेश को वुल्फ स्टेट का दर्जा दिलाने में नौरादेही का अहम योगदान है. खास बात ये है कि यहां पर भेड़ियों पर रिसर्च भी चल रही है. जबलपुर स्थित स्टेट फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (SFRI) पर रिसर्च कर रही है. तीन भेड़ियों पर होगी रिसर्च 2023 में शुरू हुआ ये प्रोजेक्ट दो साल के लिए है. इसी कड़ी में नौरादेही टाइगर रिजर्व ने यहां के भेड़ियों पर रिसर्च के लिए तीन भेड़ियों को रेडियो काॅलर पहनाने की अनुमति एनटीसीए (National Tiger Conservation Authority) से मांगी है. अनुमति मिलते ही नौरादेही टाइगर रिजर्व के तीन भेड़ियों को रेडियो काॅलर पहनाया जाएगा और रिसर्च को आगे बढ़ाया जाएगा. इस रिसर्च का उद्देश्य बाघ और तेंदुए जैसे जानवरों के बीच भेड़ियों का जीवन, उनका पसंदीदा खान पान, रहवास और उनकी दिनचर्या के बारे में जानना है. नौरादेही भारतीय भेड़िये और ग्रे वुल्फ का प्राकृतिक आवास नौरादेही को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिले फिलहाल एक साल ही बीता है. अगर नौरादेही की बात करें, तो टाइगर के पहले इसकी पहचान भेड़ियों के प्राकृतिक आवास के रूप में थी. नौरादेही को 1975 में भेड़ियों के प्राकृतिक आवास के रूप में अभ्यारण्य का दर्जा दिया गया था. करीब 1197 वर्ग किमी वाले नौरादेही वन्य जीव अभ्यारण्य के लोगो (Logo) में भी ग्रे वुल्फ नजर आता था. नौरादेही टाइगर रिजर्व में भेड़ियों पर रिसर्च देशभर में 2022 में भेड़ियों की गणना करायी गयी थी. जिसमें सबसे ज्यादा भेड़ियों के साथ मध्यप्रदेश को पहला स्थान मिला था. मध्‍य प्रदेश में 772, राजस्‍थान में 532 और गुजरात में 494 भेड़िए पाए गए थे. इसके अलावा अन्य राज्यों में इनकी संख्या काफी कम थी. भारतीय वन्य जीव संस्थान द्वारा की गयी इस गणना में भारत में कुल 3170 भेड़िए पाए गए थे. जिनमें से करीब 20 प्रतिशत मध्य प्रदेश में ही थे. भेड़ियों पर दो साल की रिसर्च नौरादेही में राज्य वन अनुसंधान संस्थान द्वारा फरवरी 2024 में भारतीय भेड़ियों पर रिसर्च नौरादेही टाइगर रिजर्व में शुरू की गयी थी. जानकार बताते हैं कि, ''मध्यप्रदेश में ग्रे वुल्फ का सबसे बड़ा आवास नौरादेही टाइगर रिजर्व है. यहां पर भेड़िए आसानी से देखे जा सकते हैं. यहां बाघों की संख्या बढ़ने के बाद ये रिसर्च शुरू की गयी. जिसका एक उद्देश्य ये भी है कि बाघों के यहां आने के बाद इनके रहन-सहन,जीवन, खान पान पर क्या असर हुआ है.'' तीन भेड़ियों को रेडियो काॅलर पहनाने की मांगी अनुमति नौरादेही टाइगर रिजर्व में चल रही रिसर्च के लिए तीन भेड़ियों को पहली बार रेडियो काॅलर पहनाने की अनुमति एनटीसीए (नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी) से मांगी गयी है. अनुमति मिलते ही तीन भेड़ियों को रेडियो काॅलर पहनाया जाएगा. एसएफआरआई के शोधकर्ता वैज्ञानिकों ने तय किया है कि नौरादेही में भेड़िए झुंड में रहते हैं. अलग-अलग झुंड वाले तीन भेड़ियों का चयन करके रेडियो काॅलर पहनाया जाएगा. रेडियो काॅलर पहनाने के बाद उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी. इस शोध से टाइगर रिजर्व के मैनेजमेंट में मिलेगी मदद नौरादेही टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर डाॅ. एए अंसारी बताते हैं कि, ''मध्य प्रदेश शासन के आदेश पर SFRI (State Forest Research Institute) ने भेड़ियों के अध्ययन के लिए शोध परियोजना स्वीकृत की. दो वर्ष में होने वाले इस अध्ययन के तहत तीन भेड़ियों को रेडियो काॅलर पहनाकर मॉनीटरिंग की जानी है. इसका उद्देश्य नौरादेही का जो एरिया है, इसमें भेड़ियों के व्यवहार पर अध्ययन किया जाए. कैसे वह शिकार करता है, शिकार में क्या पसंद है, कब और कितने दिन में शिकार करता है. इनके रहवास, ये किस तरह झुंड में रहते हैं और कैसी इनकी दिनचर्या है. इन सबका अध्ययन करने के लिए रेडियो काॅलर पहनाया जाएगा.'' ''इससे हमें ये फायदा होगा कि नौरादेही टाइगर रिजर्व का मैनेजमेंट करने में हमे मदद मिलेगी. इसलिए तीन भेड़ियों को रेडियो काॅलर पहनाने की अनुमति मांगी गयी है. अनुमति मिलते ही एसएफआरआई और टाइगर रिजर्व प्रबंधन ये काम करेगा. मध्यप्रदेश में पहली बार भेड़ियों को रेडियो काॅलर पहनाया जा रहा है.'' recent visitors 20