Tuesday, July 7, 2026 6:36 am

रेल मंत्री ने IRCTC, IRFC को मिला नवरत्न दर्जा मिलने पर दी बधाई

नई दिल्ली सरकार ने भारतीय रेलवे कैटरिंग और टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) और भारतीय रेलवे वित्त निगम (IRFC) को नवरत्न कंपनियों के रूप में अपग्रेड करने की मंजूरी दे दी है। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि की घोषणा सार्वजनिक उद्यम विभाग (Department of Public Enterprises) ने अपने X पोस्ट के माध्यम से की। पोस्ट में कहा गया कि IRCTC 25वीं और IRFC 26वीं नवरत्न कंपनी बनी है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने IRCTC और IRFC की टीम को नवरत्न दर्जा प्राप्त करने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि सभी 7 सूचीबद्ध रेलवे पीएसयू अब नवरत्न का दर्जा प्राप्त कर चुके हैं, और यह उपलब्धि 2014 के बाद संभव हुई है। सभी 7 सूचीबद्ध रेलवे पीएसयू जो नवरत्न बने: CONCOR: जुलाई 2014 RVNL: मई 2023 IRCON और RITES: अक्टूबर 2023 RailTel: अगस्त 2024 अब IRCTC और IRFC रेल मंत्री ने इसे एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में रेलवे के संपूर्ण परिवर्तन और विकास पर केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाता है। इस अवसर पर उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री का भी आभार व्यक्त किया। IRCTC: रेलवे की नवरत्न कंपनी IRCTC, जो रेल मंत्रालय का केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (CPSE) है, ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में ₹4,270.18 करोड़ का वार्षिक टर्नओवर, ₹1,111.26 करोड़ का शुद्ध लाभ (PAT), और ₹3,229.97 करोड़ की शुद्ध संपत्ति हासिल की। IRCTC को नवरत्न का दर्जा तब मिला है जब कंपनी 2025 में अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर रही है। यह कंपनी की कैटरिंग, पर्यटन और ऑनलाइन टिकटिंग सेवाओं में उत्कृष्टता को दर्शाता है। नवरत्न दर्जा मिलने से अब IRCTC अपने यात्रा, पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र में विस्तार कर सकेगी और अपनी सेवाओं को और बेहतर बना सकेगी।   IRFC: रेलवे वित्त का मजबूत आधार भारतीय रेलवे वित्त निगम (IRFC), जो रेल मंत्रालय के अधीन एक प्रमुख वित्तीय संस्थान है, को भारत सरकार द्वारा नवरत्न का दर्जा प्रदान किया गया है। यह दर्जा IRFC की मजबूत वित्तीय स्थिति और रेलवे अवसंरचना के वित्तपोषण में इसके योगदान को मान्यता देता है। IRFC की स्थापना 12 दिसंबर 1986 को 100% सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी के रूप में हुई थी। यह भारतीय रेलवे के विस्तार और आधुनिकीकरण के वित्तपोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में IRFC का राजस्व ₹26,644 करोड़ और शुद्ध लाभ (PAT) ₹6,412 करोड़ रहा, जबकि इसकी शुद्ध संपत्ति ₹49,178 करोड़ तक पहुंच गई। आज, IRFC भारत की तीसरी सबसे बड़ी सरकारी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) बन चुकी है। नवरत्न दर्जे के लाभ नवरत्न पीएसयू (PSU) को कई विशेष अधिकार और स्वायत्तता मिलती है, जिनमें शामिल हैं: 1. वित्तीय स्वायत्तता सरकार की अनुमति के बिना संयुक्त उपक्रम (Joint Ventures), सहायक कंपनियां (Subsidiaries) बनाने और विलय या अधिग्रहण करने की शक्ति। 2. परिचालन स्वतंत्रता स्वतंत्र व्यावसायिक और निवेश निर्णय लेने की क्षमता, जिससे निजी कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में आसानी होती है। एचआर प्रबंधन में लचीलापन, जिससे कंपनी बाजार दर पर पेशेवरों की भर्ती कर सकती है। 3. वैश्विक विस्तार की संभावना अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रवेश कर सकती हैं, रणनीतिक गठबंधन कर सकती हैं और ग्लोबल स्तर पर विस्तार कर सकती हैं। 4. बेहतर बाजार स्थिति वित्तीय रूप से स्थिर कंपनियों के रूप में निवेशकों का अधिक विश्वास प्राप्त होता है। मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के कारण शेयरधारकों को अधिक लाभ प्रदान कर सकती हैं।   IRCTC और IRFC को नवरत्न दर्जा मिलने से रेलवे क्षेत्र में बड़े वित्तीय और परिचालन सुधारों की संभावनाएं बढ़ेंगी। यह भारतीय रेलवे के आर्थिक और व्यावसायिक विकास में एक बड़ा कदम है और इससे रेलवे को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बेहतर स्थान मिलेगा। recent visitors 33

कूनो की रानी कहलाने वाली मादा चीता ज्वाला और उसके चार शावक पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण बने हुए

श्योपुर मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में विदेशी और भारतीय चीते अब न केवल जंगल में दौड़ते नजर आ रहे हैं, बल्कि पर्यटकों को भी खुली आंखों से दिखाई दे रहे हैं. वर्तमान में कूनो के खुले जंगल में 12 चीते स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं, जिससे पार्क में आने वाले पर्यटकों को इनका लगातार दीदार हो रहा है. चीतों की मौजूदगी से न सिर्फ पर्यटकों का रोमांच बढ़ रहा है, बल्कि उनकी संख्या में भी इजाफा देखा जा रहा है.   कूनो की रानी कहलाने वाली मादा चीता ज्वाला और उसके चार शावक पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण बने हुए हैं. बीते शुक्रवार को पार्क में आए पर्यटकों का उत्साह उस समय चरम पर पहुँच गया, जब यह चीता परिवार उनके सामने आ गया. कुछ पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों ने अपने मोबाइल फोन से तस्वीरें और वीडियो कैद किए, जो अब सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहे हैं. इन तस्वीरों में ज्वाला और उसके शावकों की जंगल में चहलकदमी और मस्ती साफ दिखाई दे रही है. यह चीता परिवार अहेरा पर्यटन जोन में घूम रहा है, जो खुले जंगल में रिलीज किए गए 12 चीतों का हिस्सा है. पर्यटकों का अनुभव कूनो में चीतों को देखने आए निवेश यादव ने बताया, "हमारा अनुभव बेहद शानदार रहा. कूनो नेशनल पार्क का जंगल बहुत अच्छा है. हमें मादा चीता ज्वाला और उसके चार शावकों को देखने का मौका मिला. निजी सफारी संचालक आदर्श गुप्ता के साथ हमने पाँच चीतों को देखा और उनके फोटो-वीडियो भी बनाए. पिछले दो साल से हम चीतों का दीदार करने को उत्सुक थे, आज हमारा इंतजार पूरा हुआ." पर्यटकों का कहना है कि चीतों को इतने करीब से देखना उनके लिए एक यादगार पल रहा. कूनो में चीतों की स्थिति कूनो नेशनल पार्क में वर्तमान में कुल 26 चीते हैं. इनमें से 12 चीते खुले जंगल में स्वतंत्र रूप से घूम रहे हैं और अपना शिकार कर रहे हैं, जबकि शेष 14 चीते अभी बड़े बाड़ों में रखे गए हैं. पार्क के अधिकारियों का कहना है कि चीतों की बढ़ती संख्या और उनकी जंगल में मौजूदगी से पर्यटन को नई गति मिल रही है. पर्यटन को बढ़ावा चीतों के आने से कूनो नेशनल पार्क में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ी है. ज्वाला और उसके शावकों की मौजूदगी ने पार्क को वन्यजीव प्रेमियों के बीच और आकर्षक बना दिया है. यह प्रोजेक्ट न केवल चीतों की संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि स्थानीय पर्यटन और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा दे रहा है.   recent visitors 33

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अनुसार नई पर्यटन फिल्म पॉलिसी नीति से प्रदेश में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में फिल्म मेकिंग और सिनेमा को बढ़ावा देने के लिए नई पर्यटन फिल्म नीति (mp tourism film policy) की घोषणा की है। इस नीति के तहत अब मध्य प्रदेश में फिल्म, वेब सीरीज, टीवी शो आदि की शूटिंग के लिए निर्माताओं को अधिक अनुदान (Grant Amount) दिया जाएगा। सीएम मोहन यादव के मुताबिक, इस नीति से राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इतना ही नहीं, इस नीति से राज्य के पर्यटन को भी फायदा होगा। इससे स्थानीय भाषाओं और संस्कृति को भी बढ़ावा मिलेगा। आपको बता दें कि तेलुगु इंडस्ट्री पहले ही फिल्म शूटिंग के लिए मध्य प्रदेश को टारगेट कर चुकी है। फिल्म निर्माण के लिए अनुदान में बढ़ोतरी नई नीति के तहत विभिन्न श्रेणियों की फिल्मों और वेब सीरीज के निर्माण पर सरकार आर्थिक सहायता (Grant Amount) देगी:     फीचर फिल्म: ₹5 करोड़ तक     वेब सीरीज: ₹2 करोड़ तक     टीवी सीरियल: ₹5 करोड़ तक     डॉक्यूमेंट्री फिल्म: ₹50 लाख तक     अंतर्राष्ट्रीय फिल्म: ₹12 करोड़ तक     शॉर्ट फिल्म: ₹20 लाख तक स्थानीय भाषाओं को प्राथमिकता सरकार ने मालवी, बुंदेली, निमाड़ी, बघेली और भीली भाषाओं में बनने वाली फिल्मों को 15% अतिरिक्त अनुदान देने का प्रावधान किया है। इसके अलावा, महिलाओं और बच्चों पर केंद्रित फिल्मों को भी 15% अधिक अनुदान मिलेगा, जिससे सामाजिक मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जा सके। पिछले प्रोजेक्ट्स को भी मिला लाभ नई नीति की घोषणा से पहले ही सरकार ने 15 हिंदी फिल्मों, 2 तेलुगु फिल्मों और 6 वेब सीरीज को 30 करोड़ रूपए से अधिक का अनुदान दिया है। इनमें शामिल प्रमुख प्रोजेक्ट स्त्री-1 और स्त्री-2 , भूल-भुलैया-3, लापता लेडीज, द रेलवे मैन, पंचायत, कोटा फैक्ट्री, गुल्लक और सिटाडेल हैं। सीएम का विजन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस नीति का उद्देश्य मध्य प्रदेश को फिल्म निर्माण का केंद्र बनाना है। उन्होंने कहा कि ‘हमारी कोशिश है कि प्रदेश की खूबसूरत लोकेशंस का फायदा फिल्म उद्योग को मिले और स्थानीय कलाकारों व तकनीशियनों को रोजगार के नए अवसर मिलें।’ recent visitors 24

दुग्ध उत्पादन क्षेत्र में 4,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्रस्तुत किए :CM यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश की समृद्ध कृषि परंपरा और सतत विकास की नीति अब वैश्विक निवेशकों का ध्यान आकर्षित कर रही है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट भोपाल में निवेशकों ने कृषि, खाद्य प्रसंस्करण और दुग्ध उत्पादन क्षेत्र में 4,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्रस्तुत किए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इसे प्रदेश की हरित और श्वेत क्रांति के लिए मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि जीआईएस भोपाल में प्राप्त निवेश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भारत को वैश्विक "फूड बास्केट" बनाने के संकल्प को साकार करने में मध्यप्रदेश अहम भूमिका निभाएगा। जैविक खेती में अग्रणी मध्यप्रदेश मध्यप्रदेश पहले ही देश का सबसे बड़ा जैविक खेती वाला राज्य बन चुका है। देश की कुल जैविक खेती में 40% योगदान देने वाले राज्य ने अब इस क्षेत्र का विस्तार कर 17 लाख हेक्टेयर से 20 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। सरकार किसानों को निःशुल्क सोलर पंप उपलब्ध करा रही है ताकि वे पर्यावरण अनुकूल तरीकों से उत्पादन कर सकें। राज्य में उद्यानिकी क्षेत्र में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। बीते वर्षों में बागवानी फसलों का रकबा27 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 32 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। इससे राज्य के फल-सब्जी उत्पादकों को भी सीधा लाभ मिलेगा। मध्यप्रदेश बनेगा दुग्ध उत्पादन का हब प्रदेश दूध उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो चुका है। वर्तमान में देश के कुल दुग्ध उत्पादन में 9% योगदान देने वाला मध्यप्रदेश अब इसे 20% तक बढ़ाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि सांची ब्रांड ने राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना ली है। प्रदेश में वर्तमान में प्रतिदिन 591 लाख किलो दूध का उत्पादन हो रहा है। इससे प्रदेश देश में तीसरा सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक राज्य बन गया है।  नवाचार और खाद्य प्र-संस्करण में निवेश की बाढ़ जीआईएस-भोपाल में "सीड-टु-शेल्फ" थीम पर केंद्रित एक विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसमें निवेशकों ने प्रदेश की अपार संभावनाओं को पहचाना। राज्य में 8 फूड पार्क, 2 मेगा फूड पार्क, 5 एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टरऔर एक लॉजिस्टिक्स पार्क स्थापित किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्र-संस्करण योजना के तहत 930 करोड़ रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की गई है। यहां 70 से अधिक बड़ी औद्योगिक इकाइयां और 3,800 से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम इकाइयाँ पहले ही सक्रिय हैं। इनके जरिए कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। सिंचाई परियोजनाओं से होगा कृषि क्षेत्र का विस्तार प्रदेश में सिंचित रकबा तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2003 में केवल 3 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित थी, जो अब 50 लाख हेक्टेयर तक पहुंच चुकी है। सरकार ने वर्ष 2028-29 तक इसे 1 करोड़ हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। नर्मदा, चंबल, ताप्ती, बेतवा, सोन, क्षिप्रा, कालीसिंध और तवा जैसी सदानीरा नदियों पर बनी सिंचाई परियोजनाओं से यह लक्ष्य संभव हो सकेगा। जीआईएस-भोपाल से रोजगार के नए अवसर जीआईएस-भोपाल में खाद्य प्र-संस्करण क्षेत्र में आये 4,000 करोड़ रुपये के निवेश से प्रदेश में 8,000 से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होंगे। खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के बढ़ने से किसान सीधे अपने उत्पाद का बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकेंगे, जिससे राज्य की आर्थिक मजबूती को और बढ़ावा मिलेगा। जीआईएस-भोपाल में हरित और श्वेत क्रांति को लेकर मिले निवेश प्रस्तावों ने मध्यप्रदेश को देश का "फूड बास्केट" बनाने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाने का अवसर दिया है। कृषि, जैविक खेती, खाद्य प्रसंस्करण और दुग्ध उत्पादन में हुए ये निवेश प्रदेश के विकास की नई इबारत लिखने को तैयार हैं।   recent visitors 31

रमजान में भोपाल में सिर्फ भाईजान की दुकान से सामान खरीदे, वायरल मैसेज से गर्माया सियासी पारा

भोपाल मध्य प्रदेश में रमजान का पवित्र महीना शुरू होते ही सोशल मीडिया पर एक मैसेज वायरल हो रहा है, जिसमें मुस्लिम समुदाय से सिर्फ मुस्लिम दुकानदारों से सामान खरीदने की अपील की जा रही है. इस मैसेज ने सूबे की सियासत को गरमा दिया है. हालांकि, मुस्लिम समाज के कई लोगों ने इसे गलत परंपरा करार देते हुए कहा है कि वे ऐसे संदेशों पर ध्यान नहीं देंगे और समाज को बांटने की कोशिशों को नाकाम करेंगे.   रमज़ान की शुरुआत के साथ अगले 30 दिन तक रोज़ेदार अल्लाह की इबादत में जुटे रहेंगे और ईद के साथ इसे पूरा करेंगे. इस बीच, भोपाल में मोबाइल और सोशल मीडिया के जरिए मुस्लिमों से केवल मुस्लिम दुकानदारों से खरीदारी करने का अभियान चलाया जा रहा है. एक 'X' यूज़र इबरार अहमद ने लिखा, "अस्सलामुअलैकुम. रमज़ान का मुबारक महीना आ गया है. खरीदारी सोच-समझकर करें, खास तौर पर उनसे जो आपकी खरीदारी से रमज़ान और ईद खुशी से मना सकें." आजतक की टीम ने भोपाल में कई लोगों से बात की, जिन्होंने ऐसे मैसेज दिखाए लेकिन कहा कि वे इन पर अमल नहीं करेंगे. सियासी बवाल इस मैसेज पर सियासत भी शुरू हो गई है. बीजेपी विधायक और पूर्व प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा ने तंज कसते हुए कहा, "जब हिंदुओं के कुंभ में मुस्लिमों को दुकान लगाने से रोकने की बात होती है, तो खूब हल्ला मचता है. लेकिन अब ये पार्टियां चुप क्यों हैं?" वहीं, कांग्रेस ने इसे चिंताजनक बताया. MP कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने कहा, "पिछले 10 सालों में माहौल इतना खराब हो गया है कि लोग धर्म के आधार पर खरीदारी की बात कर रहे हैं. यह समाज के लिए खतरनाक है." पहले भी हुई थी ऐसी अपील पिछले साल दिवाली पर भी हिंदुओं से 'अपना त्यौहार, अपनों के साथ' हैशटैग के साथ हिंदू दुकानदारों से खरीदारी की अपील हुई थी. अब रमज़ान में इसी तरह का कैंपेन सामने आने से दोनों पक्षों में बहस छिड़ गई है. बीजेपी इसे विपक्ष की चुप्पी से जोड़ रही है, जबकि कांग्रेस इसे सामाजिक सौहार्द के लिए खतरा बता रही है. भाईचारे पर सवाल त्यौहार आमतौर पर भाईचारे का प्रतीक होते हैं, लेकिन इस तरह के मैसेज से समाज को बांटने की कोशिशें चिंता का विषय बन गई हैं. सामाजिक विश्लेषकों का कहना है कि ऐसी हरकतों पर लगाम लगाना जरूरी है, वरना सामाजिक तनाव बढ़ सकता है. फिलहाल, यह मामला मध्य प्रदेश में चर्चा का केंद्र बना हुआ है.   recent visitors 33

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख भागवत आज 4 मार्च को भोपाल में 700 कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण शिविर उद्घाटन करेंगे

भोपाल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत आज  भोपाल में रहेंगे। वे विद्या भारती के देशभर से आने वाले 700 से ज्यादा पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं के अभ्यास वर्ग का उद्घाटन करेंगे।दरअसल, इस अखिल भारतीय शिक्षण संस्थान के लगभग 700 कार्यकर्ताओं के लिए एक प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया जा रहा है. संघ के एक पदाधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि यह प्रशिक्षण शिविर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित सरस्वती विद्या मंदिर आवासीय विद्यालय में आयोजित किया जाएगा. संघ के इस पदाधिकारी ने बताया कि आठ मार्च को शिविर के समापन सत्र को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और आरएसएस के विचारक और विद्या भारती के वरिष्ठ सलाहकार सुरेश सोनी भी संबोधित करेंगे. मंत्री विश्वास सारंग ने प्रदर्शनी का किया  उद्घाटन उद्घाटन से एक दिन पहले यानी सोमवार 3 मार्च को मध्य प्रदेश के खेल एवं युवा मामलों के मंत्री विश्वास सारंग और अन्य गणमान्य व्यक्ति सोमवार को उसी स्थान पर भारत के गौरवशाली अतीत और उज्ज्वल भविष्य की झलक पेश करने वाली एक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया . उन्होंने बताया कि पूरे प्रशिक्षण शिविर के दौरान आरएसएस के संयुक्त महासचिव कृष्ण गोपाल मौजूद रहेंगे. केरवा डैम रोड स्थित शारदा विहार में 5 दिन चलने वाले अभ्यास वर्ग में एनसीईआरटी, सीबीएसई डायरेक्टर, भाषा भारती अध्यक्ष सहित शिक्षा के क्षेत्र से जुडे़ अधिकारी और विशेषज्ञ सत्रों में शामिल होंगे। कार्यकर्ता पिछले 3 महीनों से इस अभ्यास वर्ग के लिए तैयारियां कर रहे थे। संघ के अनुसार, आरएसएस से संबद्ध विद्या भारती, एक गैर-सरकारी शैक्षणिक संगठन है, जो 1952 से देश में शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहा है. तब उसने गोरखपुर में अपना पहला स्कूल स्थापित किया था. इस वक्त विद्या भारती देश भर में 22,000 स्कूल चलाती है. इन विद्यालयों में सामूहिक रूप से 1,54,000 शिक्षक और लगभग 36 लाख विद्यार्थी हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीप टेक्नोलॉजी पर फोकस राव ने बताया विद्या भारती के करीब 22 हजार औपचारिक और अनौपचारिक विद्यालय संचालित हैं। इन विद्यालयों में शैक्षणिक, प्रबंधन और तमाम कामों को करने वाले 700 से ज्यादा पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं को अभ्यास वर्ग में प्रशिक्षित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश के सभी जिलों में एक अच्छा स्किल डेवलपमेंट सेंटर तैयार हो। कल्पना यही है कि स्किलिंग बाय स्कूलिंग यानि शिक्षा के साथ निपुणता की व्यवस्था हो। अपडेटेड नॉलेज से समृद्ध बने। इस दृष्टि से हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीप टेक्नोलॉजी में हमारे शिक्षक गण दक्ष हों। हमारे पास 1 लाख 6 हजार आचार्य हैं उनको सशक्त करने के लिए यह अभ्यास वर्ग चला रहे हैं। वर्ग में कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर सामाजिक परिवर्तन के प्रयासों को प्रत्यक्ष रूप से समझ सकेंगे। जिला स्तर पर देंगे प्रशिक्षण पूर्ण रूप से विद्याभारती के लिए काम करने वाले जिला और उससे ऊपर के कार्यकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण वर्ग आयोजित हो रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में होने वाले नए परिवर्तन पर प्रशिक्षण लेकर यह जिला स्तर पर कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देंगे। प्रदर्शनी में भारत की सांस्कृतिक झलक आयोजन स्थल को पर्यावरण-संवेदनशील बनाते हुए पूर्णतः प्लास्टिक मुक्त रखने का संकल्प लिया गया है। भारत के गौरवशाली अतीत और उज्ज्वल भविष्य की झलक डिजिटल व मैन्युअल प्रदर्शनियों का नियोजन किया जाएगा। ये प्रदर्शनियां भारत की संस्कृति, विज्ञान, शिक्षा और राष्ट्रसेवा के अद्वितीय पहलुओं को प्रस्तुत करेंगी। स्कूल से ओलंपिक तक जाते हैं विद्या भारती के विद्यार्थी विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के महामंत्री अवनीश भटनागर ने बताया कि विद्याभारती के 22 हजार स्कूलों में 35 लाख विद्यार्थी पूरे देश में अध्ययनरत हैं। विद्यालय से शुरू होकर राष्ट्रीय स्तर तक स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया जो भारत के स्कूली खेलों का आयोजन करती है। इसने 29वें राज्य के रूप में विद्या भारती को मान्यता दी। हमारे विद्यार्थी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक खेलने जाते हैं। उसके बाद ओलंपिक तक में सहभागिता करते हैं। recent visitors 44

दमोह – सागर जिले की जनता के लिए बड़ी सौगात, फोरलेन हाईवे की मिली मंजूरी, साल के अंत तक निर्माण कार्य आरंभ

 दमोह/ सागर सफर को तेज, सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए सरकार लगातार सड़क परियोजनाओं पर काम कर रही है। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश के दमोह और सागर जिले के लोगों के लिए बड़ी सौगात मिलने जा रही है। दमोह-सागर रोड को फोरलेन (Damoh-Sagar Four lane highway) करने की मंजूरी स्टेट लेवल इंपावर्ड कमेटी (एसएलईसी) से मिल चुकी है। अब कैबिनेट की स्वीकृति मिलते ही टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी और उम्मीद है कि साल के अंत तक निर्माण कार्य भी आरंभ हो जाएगा। चार बायपास होंगे शामिल दमोह-सागर फोरलेन सड़क परियोजना करीब 2,196 करोड़ रुपए की लागत से पूरी होगी। 76.83 किलोमीटर लंबी इस सड़क के निर्माण के दौरान चार बायपास भी बनाए जाएंगे, जिससे पारसोरिया, गढ़ाकोटा, रोन और बांसा जैसे आवासीय क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी और इन क्षेत्रों का विकास भी होगा। परियोजना के प्रमुख बिंदु     सड़क की चौड़ाई 45 मीटर होगी।     वर्तमान में यह सफर दो घंटे में तय होता है, जो फोरलेन बनने के बाद एक घंटा कम हो जाएगा।     सड़क का निर्माण हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) पर किया जाएगा।     परियोजना का 40% खर्च अग्रिम रूप से एमपीआरडीसी (MPRDC) वहन करेगा, जबकि शेष 60% राशि राज्य सरकार द्वारा 15 वर्षों तक एन्युटी भुगतान के रूप में दी जाएगी। बहेरिया से मारुताल तक होगा निर्माण राज्य सरकार ने इस परियोजना को एसएच-63 (स्टेट हाईवे 63) के अपग्रेडेशन के रूप में मंजूरी दी है। इस सड़क का निर्माण सागर के बहेरिया से लेकर दमोह के मारुताल बायपास तक किया जाएगा। इससे आसपास के गांवों और कस्बों को भी तेज और सुरक्षित परिवहन सुविधा मिलेगी, जिससे क्षेत्र का विकास होगा। कैबिनेट से मंजूरी के बाद शुरू होगी टेंडर प्रक्रिया एसएलईसी से मंजूरी मिलने के बाद अब इस प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा गया है। मुख्यमंत्री पहले ही इस परियोजना को मंजूरी का संकेत दे चुके हैं। जैसे ही कैबिनेट से स्वीकृति मिलेगी, टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी, जिसे चार महीनों में पूरा करने की योजना है। यदि सब कुछ सुचारू रूप से चलता रहा, तो नवंबर-दिसंबर तक सड़क निर्माण का कार्य शुरू हो जाएगा। एमपीआरडीसी सागर के जीएम नितिन वार्वे ने बताया कि ‘सागर-दमोह रोड को फोरलेन किया जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही टेंडर जारी किया जाएगा। उम्मीद है कि साल के अंत तक निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।’ इस परियोजना से क्या होंगे फायदे?     दमोह और सागर के बीच यात्रा का समय घटेगा।     सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी और सफर सुरक्षित होगा।     हाईवे से जुड़े गांवों और कस्बों का आर्थिक विकास होगा।     क्षेत्र में परिवहन सुविधाएं बेहतर होंगी और ट्रैफिक की समस्या दूर होगी। recent visitors 24