साढ़े तीन लाख खसरों की रबी फसलों का होगा सर्वेक्षण, 25 मार्च तक पूरा करने के निर्देश

धमतरी चालू रबी मौसम में जिले में लगी फसलों का डिजिटल सर्वे तेजी से किया जा रहा है। भारत सरकार द्वारा धमतरी जिले को इस डिजिटल फसल सर्वेक्षण के लिए पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चयनित किया गया है। जिले के लगभग 3 लाख 53 हजार खसरों की भूमि पर लगी रबी फसलों का सर्वेक्षण 25 मार्च तक पूरा करने के निर्देश कलेक्टर सुश्री नम्रता गांधी ने राजस्व विभाग के अधिकारियों को दिए हैं। जिले में लगी रबी फसलों का सर्वे कर निर्धारित पोर्टल और मोबाईल एप्प में जानकारी दर्ज की जाएगी। कलेक्टर ने इस सर्वे को निर्धारित तिथि तक पूरा करने के लिए संबंधित गांवों के दसवीं पास और मोबाईलधारक युवाओं को सर्वेयर बनाने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए हैं। ऐसे सर्वेयरों को फसल सर्वेक्षण के बारे में प्रशिक्षित करने और किसी भी तकनीकी त्रुटि के निराकरण तथा जरूरी सहयोग के लिए राजस्व निरीक्षक श्री दीपचंद भारती को जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिले में खरीफ मौसम में लगी फसलों का भी डिजिटल सर्वे कराया गया था, परन्तु खरीफ मौसम में काम करने वाले सर्वेयरों की उपलब्धता रबी मौसम में कम होने के कारण सर्वे का काम प्रभावित हुआ है। काम को तेजी से पूरा करने के लिए कलेक्टर सुश्री गांधी ने नये सर्वेक्षणकर्ताओं का चयन करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। सर्वेक्षणकर्ता का चयन पटवारी के माध्यम से तहसीलदार द्वारा किया जाएगा। सर्वेक्षणकर्ता 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके पुरूष या महिला हो सकते हैं। इनका दसवीं कक्षा पास होना जरूरी होगा। सर्वेक्षणकर्ता के पास स्वयं का इंटरनेटयुक्त मोबाईल होना भी अनिवार्य किया गया है। सामान्यतः संबंधित गांव के निवासी को ही सर्वेक्षणकर्ता बनाया जाएगा, परन्तु योग्य व्यक्ति गांव में उपलब्ध नहीं होने पर नजदीकी गांव या कृषि विज्ञान केन्द्र या कृषि एवं उद्यानिकी महाविद्यालय के विद्यार्थियों को भी सर्वेक्षणकर्ता बनाया जा सकेगा। सर्वेक्षणकर्ताओं को मोबाईल एप्प के माध्यम से फसलों का सर्वे कर पोर्टल अपलोड करने और स्वीकृत होने के बाद हर एक खसरे के लिए 10 रूपये का मानदेय दिया जाएगा। सर्वेक्षणकर्ताओं के काम की मॉनिटरिंग प्रतिदिन आधार पर संबंधित पटवारियों द्वारा की जाएगी। सर्वेयर द्वारा की गई प्रविष्टियों का सत्यापन राजस्व निरीक्षक करेंगे। नये चयनित किए गए सर्वेयरों को राजस्व निरीक्षक मंडल स्तर पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। recent visitors 41

जातिगत जनगणना पर बोले बाबा बागेश्वर जातियों के बजाय अमीरी-गरीबी के आधार पर जनगणना होनी चाहिए

छतरपुर अपने बयानों को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहने वाले बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का एक और बयान सामने आया है. जिसमें वह जातिगत जनगणना को लेकर बोलते नजर आ रहे हैं. उन्होंने जातिगत जनगणना को देश को बांटने वाला विषय बताया और इसकी कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा कि देश में जातियों की बजाय अमीरी और गरीबी पर जनगणना होनी चाहिए. इससे पता चलेगा कि कितने लोग गरीब हैं. देश को बांटने का विषय- बाबा बागेश्वर दरअसल बाबा बागेश्वर ने जाति जनगणना की मांग पर पलटवार करते हुए कहा कि यह देश को बांटने वाली बात है. उन्होंने जाति जनगणना की जगह अमीर और गरीब की जनगणना का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि इससे पता चलेगा कि देश में कितने अमीर और कितने गरीब हैं और गरीबों के लिए योजनाएं बनाई जा सकेंगी. उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने कभी जाति खत्म करने की बात नहीं की. बता दें कि, बाबा बागेश्वर ने जाति जनगणना पर उठ रही मांग पर पलटवार करते हुए कहा कि ये देश को बांटने वाली बात है। उन्होंने जाति जनगणना की जगह अमीर और गरीब की जनगणना का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि, इस तरह की जनगणना करने से पता चलेगा कि देश में कितने अमीर और कितने गरीब हैं, ताकि गरीबों के लिए योजनाएं बनाई जा सकें। उन्होंने ये भी कहा कि उन्होंने कभी जाति खत्म करने की बात नहीं की। योजना बनाकर दिया जा सकेगा गरीबों को लाभ- शास्त्री पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने आगे कहा कि, ‘देश में जाति जनगणना देश को बांटने का मामला है। हम कभी जाति जनगणना की बात नहीं करते। जाति जनगणना की जगह अमीर और गरीब की जनगणना होनी चाहिए। क्योंकि उससे पता चलेगा कि देश में कितने अमीर और कितने गरीब हैं। उस आधार पर योजना बनाकर गरीबों के लिए काम किया जाना चाहिए। हम कभी जातिगत जनगणना की बात नहीं करते पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने आगे कहा कि 'इस देश में जाति जनगणना देश को बांटने का मामला है. हम कभी जाति जनगणना की बात नहीं करते. जाति जनगणना की जगह अमीर और गरीब की जनगणना होनी चाहिए. क्योंकि उससे पता चलेगा कि देश में कितने अमीर और कितने गरीब हैं. उस आधार पर योजना बनाकर गरीबों के लिए काम किया जा सकता है'. उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने कभी भी जाति खत्म करने की बात नहीं की. उधर, भोपाल में रमजान के दौरान हिंदुओं की दुकानों से सामान न खरीदने के मैसेज पर बाबा बागेश्वर ने भी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा है कि यदि इस प्रकार का कोई मैसेज डाला गया है तो हिंदुओं को भी इसका ध्यान रखना चाहिए. उनके इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. recent visitors 48

कैंसर के उपचार और निदान में क्रांति लायेगी एआई आधारित कैंसर स्क्रीनिंग मशीन, भोपाल एम्स में आई

 भोपाल  एम्स भोपाल में जल्द ही एआइ (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित कैंसर स्क्रीनिंग मशीन स्थापित की जाएगी। यह मशीन करीब 40 लाख रुपये की लागत से खरीदी जा रही है, जिससे कैंसर की पहचान अधिक सटीक और त्वरित होगी।     एम्स प्रबंधन के मुताबिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक न केवल कैंसर की शुरुआती पहचान में मदद करेगी, बल्कि यह कीमोथेरेपी के दुष्प्रभावों को कम करने में भी सहायक होगी।     पारंपरिक तरीकों की तुलना में एआइ आधारित मशीन तेजी से कैंसर की पहचान कर सकेगी, जिससे मरीजों का इलाज जल्द शुरू किया जा सकेगा।     इससे दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले मरीजों को भी लाभ मिलेगा क्योंकि इस तकनीक के जरिए कैंसर की स्क्रीनिंग को अधिक सुलभ बनाया जा सकता है।     विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कैंसर के मामलों को समय रहते रोका जा सकेगा और मरीजों को लंबी एवं स्वस्थ जिंदगी देने में मदद मिलेगी। पहले चरण में कैंसर का पता लगाएगी मशीन एम्स भोपाल के डायरेक्टर डा. अजय सिंह ने बताया कि "एआई आधारित कैंसर स्क्रीनिंग मशीन से कैंसर का निदान तेजी से अधिक सटीक और व्यापक रूप से सुलभ हो जाएगा. यह क्रांतिकारी तकनीक कैंसर के निदान को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखती है. यह बिना लक्षण वाले मरीजों में भी प्रारंभिक चरण में कैंसर का पता लगा सकती है. कैंसर की स्क्रीनिंग को तेज और अधिक सुलभ बनाकर, हम विशेष रूप से दूर-दराज और पिछड़े क्षेत्रों में अनगिनत जानें बचा सकते हैं. यह तकनीक मशीन लर्निंग एल्गोरिदम का उपयोग करके कैंसर की सटीक पहचान करने में मदद करती है और आनुवंशिकी एवं जीवनशैली के आधार पर कैंसर के जोखिम का अनुमान भी लगाती है." कैंसर के उपचार और निदान में क्रांति ला रहा एआई इस कार्यशाला में दो अत्याधुनिक एआई सिस्टम भी पेश किए गए. इसमें ऑप्टास्कैन अल्ट्रा, जो बड़े प्रयोगशालाओं के लिए आदर्श है और एक बार में 80 से 480 स्लाइड स्कैन कर सकता है. वहीं दूसरा ऑप्टास्कैन लाइट, जो छोटी प्रयोगशालाओं के लिए डिज़ाइन किया गया है और जिसकी क्षमता 15 स्लाइड तक है. रोगियों को एआई संचालित कैंसर पहचान से त्वरित निदान, उच्च सटीकता, अधिक पहुंच और कम लागत का लाभ मिलेगा, क्योंकि यह महंगे सीटी स्कैन और एमआरआई की आवश्यकता को समाप्त कर देगा. एम्स भोपाल में आएगी एआई आधारित कैंसर स्क्रीनिंग मशीन डायरेक्टर डॉ. अजय सिंह ने बताया कि "एम्स भोपाल में जल्द ही एआई आधारित कैंसर स्क्रीनिंग मशीन खरीदी जाएगी. जिससे कैंसर मरीजों को समय पर बेहतर उपचार मिल सके. साथ कैंसर स्क्रीनिंग की रफ्तार को भी बढ़ाया जा सके, जिससे मामलों में कमी आए. अजय सिंह ने बताया कि इस मशीन को खरीदने में करीब 40 लाख रुपये की लागत आएगी." पहले चरण में स्क्रीनिंग पर होगा फोकस इस तकनीक को प्रारंभिक चरण में कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए उपयोग किया जाएगा। एआइ तकनीक मशीन लर्निंग एल्गोरिदम का उपयोग कर आनुवांशिकी और जीवनशैली के आधार पर कैंसर के जोखिम का अनुमान भी लगा सकती है। अब ये मशीनें आएंगी     आप्टास्कैन अल्ट्रा – बड़ी प्रयोगशालाओं के लिए उपयुक्त है, जो एक बार में 80 से 480 स्लाइड स्कैन कर सकती है।     आप्टास्कैन लाइट – इसे छोटी प्रयोगशालाओं के लिए डिजाइन किया है, जिसकी क्षमता 15 स्लाइड स्कैन तक है। महंगे सीटी स्कैन और एमआरआई की जरूरत कम होगी कम     अंकोलाजी के प्रो. जगत आर. कंवर ने बताया कि एआई के उपयोग से कैंसर का इलाज अधिक व्यक्तिगत और प्रभावी होगा।     इस तकनीक से महंगे सीटी स्कैन और एमआरआई की जरूरत कम हो जाएगी, जिससे मरीजों को कम लागत में अधिक सटीक इलाज मिल सकेगा।     यह तकनीक रोगियों के लिए अधिक सुलभ, किफायती और प्रभावी होगी, जिससे मरीजों को बेहतर उपचार और तेज रिकवरी का लाभ मिलेगा।   recent visitors 57

प्रदेश सरकार ने इंडस्ट्री और स्किल डेवलपमेंट को आपस में जोड़ते हुए “इंडस्ट्री-रेडी वर्क फोर्स” तैयार करने की दिशा में कई रणनीतिक की साझेदारियां : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-भोपाल रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव और रोड-शो के परिणामस्वरूप, मध्यप्रदेश निवेशकों के लिए एक आकर्षक केंद्र बना। साथ ही कुशल मैन पॉवर उपलब्ध कराने वाला आदर्श स्थान पर बन गया है। प्रदेश सरकार ने इंडस्ट्री और स्किल डेवलपमेंट को आपस में जोड़ते हुए "इंडस्ट्री-रेडी वर्क फोर्स" तैयार करने की दिशा में कई रणनीतिक साझेदारियां की हैं। इससे लाखों युवाओं को प्रत्यक्ष और परोक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। जीआईएस-भोपाल में कौशल विभाग ने कई देशी-विदेशी एजेंसियों के साथ एमओयू किये। ये एजेंसियां आधुनिक तकनीक को ध्यान में रखते हुए एडवांस ट्रेड्स एवं विधाओं का कौशल प्रशिक्षण देंगी। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और निवेशकों को कुशल वर्क फोर्स मिलेगा। जीआईएस में युवाओं के कौशल विकास एवं रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिये संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा 8 एमओयू साइन किये गये। इंडो-जर्मन ग्रीन स्किल्स (जीआईजेड) और कंपनी श्नाइडर इलेक्ट्रिक के सहयोग से ग्रीन एनर्जी क्षेत्र में सिमुलेशन-बेस्ड ट्रेनिंग शुरू की जा रही है। इससे इलेक्ट्रिशियन और सोलर तकनीशियन जैसे ट्रेड्स में कुशल युवाओं की मांग पूरी होगी। इसी प्रकार, जीआईजेड और सिमेंस इंडिया की साझेदारी आईटी प्रशिक्षुओं को इंडस्ट्री-रेडी ग्रीन स्किल्स प्रदान करेगी। इससे प्रदेश में सतत् और समावेशी व्यावसायिक कार्यक्रमों को मजबूती मिलेगी। साइन्टेक टेक्नोलॉजीज और अपनाटाइम टेक प्रा. लि. के साथ मिलकर ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग और अपस्किलिंग की पहल की जा रही है। इससे इंडस्ट्री की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रतिभा को विकसित किया जा सकेगा। यह कंपनी अपने डिजिटल भर्ती प्लेटफॉर्म से प्रदेश के युवाओं को संभावित नियोक्ताओं से जोड़ेगी, इससे रोजगार प्राप्त करने की प्रक्रिया सरल और व्यापक होगी। ग्वालियर के सरकारी डिविजनल आईटीआई में इलेक्ट्रिशियन ट्रेड के प्रशिक्षुओं को मार्तंडक सोलर एनर्जी प्रा. लि. द्वारा प्रशिक्षित एवं प्रायोजित किया जाएगा। इससे तकनीकी शिक्षा और उद्योग की मांग के बीच संतुलन स्थापित होगा। उन्नति फाउंडेशन स्वयम पोर्टल के माध्यम से रोजगार उन्मुख ऑनलाइन पाठ्यक्रम, साइकोमेट्रिक विश्लेषण और कैरियर गाइडेंस प्रदान कर रही है, जिससे युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ेगी। प्रदेश के युवाओं को वैश्विक अवसरों से जोड़ने के लिए वन वर्ल्ड एलायंस जापान के सहयोग से जापानी भाषा और आवश्यक कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे वे जापान में भी रोजगार के लिए तैयार हो सकेंगे। जीआईएस भोपाल से मिलेगा व्यावसायिक प्रशिक्षण और रोजगार अवसरों को नया आयाम मध्यप्रदेश में ग्रीन स्किल्स और इंडस्ट्री-रेडी वर्क फोर्स को बढ़ावा देने के लिए बहुपक्षीय सहयोग जीआईएस-भोपाल के प्रभावी परिणामों के रूप में, मध्यप्रदेश में कौशल विकास और रोजगार अवसरों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ सहयोग स्थापित किए गए हैं। इंडस्ट्री-फोकस्ड प्रशिक्षण कार्यक्रमों और व्यावसायिक शिक्षा को सशक्त बनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण साझेदारियों को मूर्त रूप दिया गया है। ग्रीन एनर्जी सेक्टर में सिमुलेशन-बेस्ड ट्रेनिंग इंडो-जर्मन ग्रीन स्किल्स (जीआईजेड) और कंपनी श्नाइडर इलेक्ट्रिक ने "सिमुलेशन-बेस्ड वोकेशनल ट्रेनिंग फॉर ग्रीन एनर्जी जॉब्स" (ग्रीन स्किल्स) परियोजना के तहत प्रदेश में इलेक्ट्रिशियन और सोलर तकनीशियन ट्रेड के व्यावसायिक प्रशिक्षण की गुणवत्ता को उन्नत करने के लिए एसएसआर ग्लोबल स्किल पार्क और कौशल विकास निदेशालय के साथ समझौता किया है। इंडस्ट्री-रेडी आईटी प्रशिक्षुओं के लिए ग्रीन स्किल्स जीआईजेड और सिमेंस इंडिया के सहयोग से, मध्यप्रदेश में आईटी प्रशिक्षुओं को इंडस्ट्री-प्रासंगिक ग्रीन स्किल्स से लैस करने, जेंडर समावेशन को बढ़ावा देने और वर्क-रेडीनेस को सशक्त करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। यह सहयोग प्रदेश में सतत और समावेशी व्यावसायिक कार्यक्रमों को मजबूत करेगा। कार्य स्थल आधारित प्रशिक्षण और रोजगार सहायता सायंटेक टेक्नोलॉजीज और अपना टाइम टेक प्रा. लि. के साथ साझेदारी के तहत, छात्रों को ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग, अपस्किलिंग और इंडस्ट्री की आवश्यकताओं के अनुरूप रोजगार के लिए तैयार करने की पहल की गई है। अपना डिजिटल भर्ती मार्केटप्लेस के माध्यम से प्रदेश के युवाओं को संभावित नियोक्ताओं से जोड़ने के लिए एक प्रभावी मंच प्रदान किया जा रहा है। इंडस्ट्री की आवश्यकताओं के अनुसार तकनीकी शिक्षा मार्तंडक सोलर एनर्जी प्रा. लि. द्वारा ग्वालियर के सरकारी डिविजनल आईटीआई में इलेक्ट्रिशियन ट्रेड के प्रशिक्षुओं को प्रायोजित किया जाएगा, इससे तकनीकी शिक्षा और उद्योग आवश्यकताओं के बीच की खाई को पाटा जा सकेगा। साथ ही युवाओं की एम्प्लोयबिलिटी को बढ़ाया जा सकेगा। ऑनलाइन लर्निंग और कैरियर गाइडेंस युवाओं के लिए रोजगार उन्मुख पाठ्यक्रम, ऑनलाइन लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (एलएमएस) और साइकोमेट्रिक विश्लेषण को मजबूत करने के लिए उन्नति फाउंडेशन द्वारा स्वयम प्लेटफॉर्म के माध्यम से विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों की पेशकश की गई है। इसके साथ ही, मध्यप्रदेश सरकार के उद्योगम पोर्टल के माध्यम से रोजगार के अवसरों को सुलभ बनाया जाएगा। जापान में रोजगार के अवसर वन वर्ल्ड एलायंस जापान के सहयोग से, मध्यप्रदेश के छात्रों को जापानी भाषा और आवश्यक कौशल में प्रशिक्षित किया जाएगा, जिससे वे जापान में रोजगार के अवसरों के लिए तैयार हो सकें। यह पहल राज्य के युवाओं को वैश्विक अवसरों से जोड़ने में एक महत्वपूर्ण कदम होगी। जीआईएस भोपाल से कौशल विकास और रोजगार में आएगा बड़ा बदलाव जीआईएस-भोपाल के बाद मध्यप्रदेश ने कौशल विकास और रोजगार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय साझेदारियों को मूर्त रूप दिया है। इन समझौतों से युवाओं को उद्योग-रेडी बनाया जा रहा है। साथ ही तकनीकी शिक्षा को इंडस्ट्री स्टैंडर्ड के अनुरूप उन्नत किया जा रहा है। इन सहयोगों के माध्यम से प्रदेश के युवाओं को ग्रीन एनर्जी, आईटी, तकनीकी और वैश्विक रोजगार के क्षेत्रों में नए अवसर प्राप्त होंगे। जीआईएस-भोपाल से निवेश भी आकर्षित हुआ है और लाखों युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। प्रदेश सरकार और उद्योग जगत के इस सहयोग से मध्यप्रदेश एक सशक्त, आत्म-निर्भर और इंडस्ट्री-रेडी वर्क फोर्स का केंद्र बन रहा है।   recent visitors 54

खजुराहो-सांची में भी गोल्फ कोर्ट और रिसॉर्ट बनाने के लिए 600 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव, नजरपुरा आईलैंड में लक्जरी रिसॉर्ट बनेंगे

भोपाल  ट्रेजर ग्रुप छह सौ करोड़ रुपए का निवेश कर खंडवा जिले के नजरपुरा आईलैंड में लक्जरी रिसॉर्ट बनाएगा, खजुराहो में मिनी गोल्फ कोर्स एवं रिसॉर्ट तथा सांची में गोल्फ कोर्स एवं लक्जरी रिसॉर्ट बनाएगा। वहीं अमेजन प्राइम, हालीवुड प्रोजेक्ट, जी फाइव और अन्य निवेशक मिलकर मध्यप्रदेश में तीन सौ करोड़ रुपए खर्च कर नये प्रोजेक्ट शुरु करेंगे। ट्रेजर समूह आने वाले समय में खंडवा जिले के नजरपुरा आईलैंड में लक्जरी रिसॉर्ट बनाएगा। दतला पहाड़ खजुराहों के समीप मिनी गोल्फ कोर्स भी समूह बनाएगा साथ ही यहां एक लक्जरी रिसार्ट भी बनाएगा। समूह सांची के पास भी एक गोल्फ कोर्स और लक्जरी रिसॉर्ट का निर्माण करेगा। इन सब पर ट्रेजर समूह छह सौ करोड़ रुपए खर्च करेगा। मध्यप्रदेश में बड़े निवेशक निखिल आडवाणी द्वारा रिवेल्यूशनरी अमेजन प्राइम सौ करोड़ खर्च कर इंदौर, खंडवा, खरगौन और महेश्वर में यूनिट शुरु करेगा। हालीवुड प्रोजेक्ट के तहत इंडिया टेक वन अस्सी करोड़ खर्च कर टीकममगढ़, ओरछा और चंदेरी में निर्माण करेगा। जीफाइव द्वारा हेनरी डी कुन्हा का रियलिटी शो अनटाइटल्ड भोपाल और सीहोर में 25 करोड़ रुपए खर्च कर शुरु किया जाएगा। वहीं आर्यन सक्सेना का प्रोजेक्ट अनटाईटल्ड थिएट्रिकल रिलीज आठ करोड़ से अनूपपुर और अमरकंटक में शुरु होगा। मध्यप्रदेश में सिनेमा हॉल के निर्माण और पुनर्निमाण के आठ प्रस्ताव भी नई नीति के तहत बुरहानपुर, कटनी, इंदौर, खजुराहो के लिए मिले है। इन पर 37 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा। आईएचसीएल एमआरएस खोलेगे नई होटल्स- आईएचसीएल मध्यप्रदेश में विभिन्न नेशनल पार्क, भोपाल, एवं इंदौर में नौ होटल्स शुरु कर चुकी है। समूह अब इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर एवं पेंच में पांच नई इकाईयों की स्थापना करेगा। इसके लिए समूह मध्यप्रदेश में 1907 करोड़ रुपए खर्च करेगा।एमआरएस ग्रुप द्वारा महेन्द्र भवन पन्ना, क्योटी किला रीवा एवं सिंहपुर महल चंदेरी में डेढ़ सौ करोड़ रुपए खर्च कर लक्जरी बुटिक होटल विकसि किए जाएंगे। प्रमुख वैश्विक आतिथ्य कंपनी हिल्टन जबलपुर और भोपाल में 254 कमरों की दो इकाईयों शुरु करेगी। इस पर दो सौ करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा। जहानुमा ग्रुप आॅफ होटल्स द्वारा अठारह करोड़ रुपए खर्च कर मांडू में एक नया प्रीमियम होटल शुरु करेगा। सकूह मध्यप्रदेश में चार इकाईयां संचालित कर रहा है। ओबेराय सामूह बांधवगढ़ में विंध्यविलास वन्य जीव रिसॉर्ट का सफल संचालन कर रहा हे अब 450 करोड़ रुपए खर्च कर राजगढ़ पैलेस खजुराहो में एक नई इकाई में निवेश शुरु करेगा। आईटीसी होटल प्राइवेट लिमिटेड ढाई सौ करोड़ रुपए खर्च कर लुनेरा कासेल हेरिटेज होटल आईटीसी धर एवं आईटीसी भोपाल का विकास करेगा। आईटीसी जबलपुर में वेलकम होटल आईटीसी का सफलतापूर्वक संचालन कर रहा है।   खंडवा, सांची, खजुराहो के निवेश प्रस्ताव     नजरपुरा आइलैंड खंडवा: इंदिरा सागर डैम के बैक वाटर एरिये में ये आइलैंड है। यहां पर 17.57 हेक्टेयर भूमि पर 138.34 करोड़ रुपए से 106 लग्जरी रूम, 2 रेस्टोरेंट, वॉटर स्पोर्ट्स, विश्व स्तरीय वेलनेस रिसॉर्ट (स्पा, मेडटेशन-योगा) एवं अन्य एक्टिविटी होग और 500 से अधिक लोगों को रोजगार मिल सकेगा।     सांची में रिसॉर्ट: सांची के पास नीनोद में 77 हेक्टेयर जमीन पर कुल 246.02 करोड़ रुपए की लागत से 217 लग्जरी रूम एवं विलाज, 5 रेस्टोरेंट, गोल्फ कोर्ट, गोल्फ विला, कन्वेंशन सेंटर, वेलनेस सेंटर एवं टूरिज्म से जुड़ी अन्य एक्टिविटी होगी। इससे करीब साढ़े 6 सौ लोगों को रोजगार मिलेगा।     खजुराहो में गोल्फ कोर्ट: खजुराहो स्थित दतला पहाड़ में 72.943 हेक्टेयर जमीन पर 206.27 करोड़ रुपए की लागत से 204 लग्जरी स्वीट रूम्स, 2 रेस्टोरेंट, गोल्फ कोर्ट, वेलनेस सेंटर, थीम गार्डन, हेरिटेज वॉल, हॉट एयर बैलूनिंग जैसी पर्यटन सुविधाएं जुटाई जाएंगी। इसमें 500 से अधिक लोगों को रोजगार मिल सकेगा। ट्रेजर ग्रुप के इंदौर में भी प्रोजेक्ट्स ट्रेजर ग्रुप इंदौर का है। ग्रुप के यहां पर कई प्रोजेक्ट्स हैं। कंपनी रियल एस्टेट विकास, पैकेजिंग उत्पादों के निर्माण, पवन ऊर्जा उत्पादन, हर्बल उत्पादों समेत अन्य गतिविधियों में शामिल हैं। ग्रुप ने तीनों ही जगहों पर 600 करोड़ रुपए का निवेश प्रस्ताव दिया है। recent visitors 67

UPI को लेकर Qatar के साथ बड़ी Deal, Islamic देशों में आगे निकला India, आ रहे कौन से नए फीचर्स

नईदिल्ली Web Summit Qatar 2025 में UPI को लेकर एक बड़ा ऐलान किया गया है. भारत के यूनिफाइड पमेंट्स् सिस्टम (UPI) का कतर में फुल रोलआउट शुरू होने जा रहा है. इसकी जानकारी भारत के एंबेस्डर विपुल ने Web Summit में दी है. UPI एक पेमेंट सिस्टम है, जिसमें QR कोड या मोबाइल नंबर एंटर करके पेमेंट ट्रांसफर की जा सकती है. Qatar National Bank’s (QNB) के प्वाइंट ऑफ सेल सिस्टम के साथ सफलतापूर्वक इंटीग्रेशन हो गया है. ये जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स से मिली है. भारतीय एंबेस्डर विपुल ने इसकी जानकारी बीते दोहा में आयोजित Web Summit Qatar के दौरान दी. UPI के इस फुल रोलाउट के बाद भारतीय लोग कतर में आसानी से फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन कर सकेंगे. इसका फायदा की भारतीयों को मिलेगा. भारत और कतर के स्टार्टअप और इनोवेशन के सेक्टर में मजबूत साझेदारी नजर आ रही है. Web Summit Qatar का दूसरा एडिशन गौरतलब है कि कतर की राजधानी दोहा में Web Summit का दूसरा एडिशन हाल ही में आयोजित किया गया. इसमें भारत सहित दुनिया भर की कई बड़ी कंपनियों ने हिस्सा लिया. माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और सिस्सको से लेकर टिक टॉक और स्नैपचैट ने भी इस इवेंट में अपनी टेक्नोलॉजी शोकेस की है. स्टार्टअप इंडिया के तहत कई भारतीय स्टार्टअप्स भी Web Summit में शामिल हुए. भारत के कतर में एंबेस्डर विपुल ने भारतीय पैवेलियन का इनौग्रेशन किया और कहा कि इस ग्लोबल स्टेज से भारतीय स्टार्टअप को फायदा होगा. क्या है UPI? UPI एक पेमेंट्स सिस्टम है, जिसकी मदद से कोई भी भारतीय तुरंत मनी ट्रांसफर कर सकता है. इसमें 1 पैसे से लेकर मोटी रकम तक भेजी जा सकती है. UPI की मदद से अलग-अलग बैंकों के बीच रकम ट्रांसफर होती है. UPI, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने बनाया है और इसे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) रेगुलेट करता है. यह एक सेफ सिस्टम है. धीरे-धीरे इसका विस्तार दुनिया के कई देशों में भी हो रहा है. भारत के अलावा और किन देशों में चलता है UPI UPI भारत के अलावा भी कई देशों में चलता है. UPI का इस्तेमाल भारत के अलावा 7 अन्य देशों में किया जाता है. इसमें श्रीलंका, मॉरीशस, फ्रांस, UAE, सिंगापुर, नेपाल और भूटान का नाम शामिल है. जल्द ही इस लिस्ट में कतर भी शामिल हो जाएगा.   recent visitors 71

31 मार्च से पहले बनानी होगी 42 लाख किसान आईडी: एक करोड़ का टारगेट, अब तक 58 लाख किसानों का ही हुआ रजिस्ट्रेशन

42 lakh farmer IDs will have to be created before 31 March: Target is one crore, only 58 lakh farmers have been registered so far भोपाल। प्रदेश में किसानों की कुंडली तैयार करने के लिए फार्मर आईडी जनरेट करने के मामले में अपेक्षित सफलता नहीं मिल पा रही है। प्रदेश में एक करोड़ लाख फार्मर आईडी बनाने का टारगेट है। अब तक 58 लाख फार्मर आईडी बनाई जा चुकी है। बाकी लक्ष्य पूरा करने के लिए कलेक्टरों को जिलों में कैम्प लगाने के निर्देश दिए गए हैं। भारत सरकार एवं किसान कल्याण मंत्रालय की एग्री-स्टेक योजना के अंतर्गत प्रदेश में फार्मर रजिस्ट्री बनाने के निर्देश जारी किए गए हैं। भारत सरकार द्वारा हर किसान और भूमिस्वामी को एक यूनीक आईडी प्रदान की जा रही है। इससे किसानों को ऑनलाइन लोन प्रोसेस पूरी करने में आसानी होगी। सरकार के लिए भी हितग्राही योजनाओं के लक्ष्य निर्धारण और सत्यापन प्रक्रिया सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। recent visitors 122